2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
Salman Khurshid argues that recent legal disputes over places of worship represent a reversal of a constitutional consensus that sought to draw a line under historical conflicts.
जो हुआ है वह भी तो एक रिवर्सल है। जो हुआ है वह भी तो एक रिवर्सल है। जी जी जी जी जी जी जी एक एक निजाम था चला आ रहा था 500 साल जी एक एक निजाम था चला आ रहा था 500 साल जी एक एक निजाम था चला आ रहा था 500 साल से 600 साल से 700 साल से एक निजाम चला आ से 600 साल से 700 साल से एक निजाम चला आ से 600 साल से 700 साल से एक निजाम चला आ रहा था उसको भी रिवर्स किया गया है रहा था उसको भी रिवर्स किया गया है रहा था उसको भी रिवर्स किया गया है और उसको डेमोक्रेसी के नाम पे रिवर्स किया और उसको डेमोक्रेसी के नाम पे रिवर्स किया और उसको डेमोक्रेसी के नाम पे रिवर्स किया गया है। ये कहा गया है कि ये वो लोग थे जो गया है। ये कहा गया है कि ये वो लोग थे जो गया है। ये कहा गया है कि ये वो लोग थे जो तानाशाह थे उन्होंने यह निजाम बनाया था और तानाशाह थे उन्होंने यह निजाम बनाया था और तानाशाह थे उन्होंने यह निजाम बनाया था और अब क्योंकि हमको यह मौका मिला है। अब क्योंकि हमको यह मौका मिला है। अब क्योंकि हमको यह मौका मिला है। डेमोक्रेटिक मौका मिला है तो हम डेमो डेमोक्रेटिक मौका मिला है तो हम डेमो डेमोक्रेटिक मौका मिला है तो हम डेमो डेमोक्रेसी का सहारा लेकर इसको रिवर्स डेमोक्रेसी का सहारा लेकर इसको रिवर्स डेमोक्रेसी का सहारा लेकर इसको रिवर्स करते हैं। तो रिवर्स तो हो रहा है ना करते हैं। तो रिवर्स तो हो रहा है ना करते हैं। तो रिवर्स तो हो रहा है ना और रिवर्स वहां हो रहा है जहां पर बहुत और रिवर्स वहां हो रहा है जहां पर बहुत और रिवर्स वहां हो रहा है जहां पर बहुत दिन तक हम लोग ये सब समझते रहे दिन तक हम लोग ये सब समझते रहे दिन तक हम लोग ये सब समझते रहे [नाक से की जाने वाली आवाज़] सिर्फ खास [नाक से की जाने वाली आवाज़] सिर्फ खास [नाक से की जाने वाली आवाज़] सिर्फ खास किसी एक कौम के लोग नहीं बल्कि पूरे मुल्क किसी एक कौम के लोग नहीं बल्कि पूरे मुल्क किसी एक कौम के लोग नहीं बल्कि पूरे मुल्क के लोग ये समझते रहे। अक्सरियत मुल्क के के लोग ये समझते रहे। अक्सरियत मुल्क के के लोग ये समझते रहे। अक्सरियत मुल्क के ये समझते रहे कि इसको रिवर्स करना गलत है ये समझते रहे कि इसको रिवर्स करना गलत है ये समझते रहे कि इसको रिवर्स करना गलत है और उसी की उसी उसी को नजर अंदाज हम ना कर और उसी की उसी उसी को नजर अंदाज हम ना कर और उसी की उसी उसी को नजर अंदाज हम ना कर दें। हमने कानून बनाया था प्लेसेस ऑफ दें। हमने कानून बनाया था प्लेसेस ऑफ दें। हमने कानून बनाया था प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट का कि हमने यह तय किया कि एक वरशिप एक्ट का कि हमने यह तय किया कि एक वरशिप एक्ट का कि हमने यह तय किया कि एक कहीं ना कहीं लकीर खींच कर यह कहा जाए कि कहीं ना कहीं लकीर खींच कर यह कहा जाए कि कहीं ना कहीं लकीर खींच कर यह कहा जाए कि इससे पहले जो कुछ हुआ है उसको अब भूल इससे पहले जो कुछ हुआ है उसको अब भूल इससे पहले जो कुछ हुआ है उसको अब भूल जाइए। इसके बाद अब कुछ नहीं होगा। अब कोई जाइए। इसके बाद अब कुछ नहीं होगा। अब कोई जाइए। इसके बाद अब कुछ नहीं होगा। अब कोई तब्दीली नहीं लाई जाएगी। 15 अगस्त 1947 के तब्दीली नहीं लाई जाएगी। 15 अगस्त 1947 के तब्दीली नहीं लाई जाएगी। 15 अगस्त 1947 के बाद कोई तब्दीली नहीं होगी। उस दिन तक जो बाद कोई तब्दीली नहीं होगी। उस दिन तक जो बाद कोई तब्दीली नहीं होगी। उस दिन तक जो हो गया सो हो गया। किसी का फायदा रहा, हो गया सो हो गया। किसी का फायदा रहा, हो गया सो हो गया। किसी का फायदा रहा, किसी का नुकसान रहा। लेकिन उसके बाद इसको किसी का नुकसान रहा। लेकिन उसके बाद इसको किसी का नुकसान रहा। लेकिन उसके बाद इसको बार-बार मत होने दीजिए। लेकिन मसला यह है बार-बार मत होने दीजिए। लेकिन मसला यह है बार-बार मत होने दीजिए। लेकिन मसला यह है कि आज वो कुरेदा फिर जा रहा है जो आपने कि आज वो कुरेदा फिर जा रहा है जो आपने कि आज वो कुरेदा फिर जा रहा है जो आपने अभी जिक्र किया है कमाल मौला मौस का जो अभी जिक्र किया है कमाल मौला मौस का जो अभी जिक्र किया है कमाल मौला मौस का जो जिक्र किया है भौतशाला का उसको अब कोना वह जिक्र किया है भौतशाला का उसको अब कोना वह जिक्र किया है भौतशाला का उसको अब कोना वह आज का फैसला है।
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
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