Nous Shorts· 06 Jul 2026· 2:23

Can India Claim Global Leadership? I Ruhullah Mehdi on Foreign Policy

"The current foreign policy is flawed, counterproductive, and damaging for India."

Full Transcript

जो करंट फॉरेन पॉलिसी है, ये फ्लॉड भी है, काउंटर-प्रोडक्टिव भी है, एंड इन द लॉन्ग रन इट्स डैमेजिंग फॉर इंडिया। मुसलमान आबादी को आप दो मिनट बाहर निकाल दीजिए इस इक्वेशन से, उसके बावजूद यह फ्लॉड है, डैमेजिंग है, काउंटर-प्रोडक्टिव है — इंडिया की ग्लोबल स्टैंडिंग के खिलाफ है। क्लेम टू लीडरशिप जो है इंडिया की, ये उन प्रिंसिपल्स के खिलाफ है जिन प्रिंसिपल्स ने और जिस प्रैक्टिस ने ग्लोबल लीडरशिप के मुकाम तक इंडिया को पहुंचाया था। अब वी आर नॉट एनी मोर देयर। यह उन एफर्ट्स और प्रिंसिपल्स के खिलाफ है, कोई माने या ना माने। अब क्योंकि यह मजाक बन चुका है आज के हिंदुस्तान में, मगर हकीकत 2014 तक की हिंदुस्तान की यही थी, और इसकी प्रोग्रेस का ड्राइविंग फैक्टर यही था ग्लोबली — कि इट टुक मोरल स्टैंडिंग ग्लोबली, इट गेव मोरल लीडरशिप। मिलिट्री पावर इंडिया के पास नहीं था, आज भी हम कोई ग्लोबल मिलिट्री पावर नहीं हैं। हम कोई इतनी बड़ी इकॉनमिक पावर भी नहीं हैं। यह कहा जाता है कि हम चौथी बड़ी इकॉनमी हैं, बट चौथी बड़ी इकॉनमी हम सिर्फ जीडीपी के लिहाज से हैं, पर कैपिटा जीडीपी के लिहाज से हम आज भी बहुत ज्यादा पीछे हैं, गरीब मुल्कों में आज भी शुमार हैं। तो हमारी इकॉनमी इतनी बड़ी नहीं है कि हम इकॉनमी की बुनियाद पे ग्लोबल लीडरशिप की पोजीशन क्लेम करें। ना मिलिट्री क्लेम है हमारी, ना इकोनॉमिक क्लेम है हमारी। 70 साल के दौरान हमारी क्लेम टू लीडरशिप क्या थी और फैक्टर क्या था जिसने हमें ग्लोबल लीडरशिप का मुकाम दिलाया — वी वर ऑलमोस्ट देयर, वी टुक मोरल स्टैंड, वी गेव मोरल डायरेक्शन टू द रीजनल पॉलिटिक्स एंड ग्लोबल पॉलिटिक्स एज वेल। इससे उस वजह से हमें इज्जत की निगाह से देखा जाता था, और इज्जत का मुकाम दिया जाता था, और लीडरशिप रोल हमें मिला था। इससे वो सारा कंप्रोमाइज हुआ — यह जो यूएस की हेजेमनी के सामने हमने सरेंडर किया है, ये जो इज़राइल की अग्रेशन, उनके ज़ायनिज़्म के साथ हमने खुद को रिलेट भी किया है, सरेंडर भी किया है, एंड वी हैव स्टार्टेड टू बिकम पार्ट ऑफ दैट।

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