2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
"As Islam expands in its true spirit, it is compatible with society, contributory to society, and not inherently in conflict with it."
हम उमा है। ये भी हमारे अंदर एक एक डिजायर भी है। एक ड्राइविंग फोर्स भी है। साथ ही साथ हम इस मुल्क का हिस्सा भी है। ये दोनों चीजें जो है हमारे अंदर जो है कभी कबभार क्लैश लाती है। अगर आप इस्लाम की तरफ चले जाए इस्लामिक फिलॉसफी की तरफ चले जाए जो 1400 साल के अंदर जो इवॉल्व हुई है पॉलिटिकल फिलॉसफी तो उसमें ये क्लैश नहीं है। उसमें तस्सवुर ही अलग है। कुरान में भी तसवुर ही अलग है। हदीस में भी तसवुर ही अलग है। और फिर इस्लाम ज ही दूसरी सोसाइटीज़ तक एक्सपेंड करता गया। फिर लीडर्स के जो जितने भी मुजद्द उठे उनके बिहेवियर में या उनके काम में भी वो दिखता है कि तसवुर ही अलग है। क्लैश नहीं है। ये इस्लाम जो ही एक्सपेंड होता है इन इट्स स्पिरिट। यह कंपैटिबल भी है, कंट्रीब्यूटर भी है और यह क्लैशिंग भी नहीं है। मुस्लिम सोसाइटी जो है थ्रूउ इंडिया इस तरह से इस इस डिस्कोर्स पे इन्होंने काम नहीं किया है। इस इस डिस्कोर्स पे काम करने की जरूरत है। ताकि नंबर एक राइट विंग के खिलाफ एक सब्सटैंशियल और प्रैक्टिकल जवाब भी हो। जो प्रैक्टिसिंग हमारा कैरेक्टर हो उस प्रैक्टिसिंग कररेक्टर से भी जवाब मिले। पॉलिटिकल डिस्कोर्स मिले। पॉलिटिकल आईडियोलॉजी मिले। दूसरा हिंदुस्तान में बहुत सारी ऐसी मैं अभी भी कहूंगा कि मेजॉरिटी है जो राइट विंग नहीं है। उनके साथ एंगेज करने में आसानी हो जाए। उनका हमारे साथ एंगेज करने में उनके लिए भी आसानी हो जाए। वी कैन हैव अ कॉमन ग्राउंड जहां पे वो उस मुस्लिम या इस्लामिक फिलॉसफी के साथ आइडेंटिफाई करने में भी कोई दिक्कत ना समझे। वो नुकसान ना समझे और उसके साथ मिलके वो काम भी कर सके। तो मेरे लिए आई थिंक दो तीन सवालों का जवाब ढूंढना जरूरी है जिसप हम एंगेज करने की जरूरत है। हम मुसलमान हैं हम हिंदुस्तानी भी हैं, हमारी जिओपॉलिटिकल इंटरेस्ट भी है, ग्लोबल इंटरेस्ट भी है। हाउ डू वी सी आवरसेल्व्स एस मुस्लिम्स? हाउ डू वी सी आवरसेल्व्स एस इंडियन मुस्लिम्स? हाउ डू वी सी आवरसेल्व्स एट वि द ग्लोबल इंडियन मुस्लिम्स इंगेजिंग इन द ग्लोबल लैंडस्केप ग्लोबल लैंडस्केप तो इन सब चीजों पे बात करने की जरूरत है इवॉल्व होने की जरूरत है डिबेट्स करने की जरूरत है आइडियाज डेवलप करने की जरूरत है मैं जो बातें करूंगा इट्स नॉट नेसेसरी जरूरी नहीं है कि सब की सब सही हो फिर बट एक डिस्कसिव नेचर है और डिस्कशन होना बहुत जरूरी है
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
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