2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
"If Chabahar Port had been fully developed, there would have been no dependence on the Strait of Hormuz."
नॉर्वे में जिस पत्रकार महिला ने उनको सवाल पूछा वो इंटीग्रिटी वाली लेडी है। हम उनको वो जवाब दिए नहीं और यहां पर उसके चरित्र का हनन करने में कुलपति से ले कुलगुरु तक आरएसएस के लगे हुए हैं। बिल्कुल मोदी जी खुद तो उनके इशारे के या उनके सहायता के बिना तो लग नहीं सकते। हम उसका इंस्टा और Facebook अकाउंट वो तो जािस्ट जुकरबर्ग तो वो सारी चीजें जो हो रही है हिंदुस्तान में वो जाइनिज्म के इशारे पे हो रही है क्योंकि मोदी उनके बल पे ही बैठे हैं तख्त पे तो क्या आपको लग रहा है आज जो भारत भुगत रहा है वो इस सरकार की फॉरेन पॉलिसी में जिस तरह से एक धुरी के साथ जो वो खड़े हो गए हैं इजराइल अमेरिका और यूएई क्या उसकी वजह से भी भुगत रहा है क्योंकि अभी अब्बास अराची जो उनका एक बयान है जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके जहाज निकलने दिए जाएंगे तो उन्होंने कहा कि हम तो हमेशा से सस्ता तेल भारत को देते थे भारत ने हमसे लेना बंद किया अगर वो फिर से उसने भी यही कहा वही तो क्या ये जो अभी दिखाया जा रहा है कि एक बहुत बड़ा इकोनमिक क्राइसिस है होगा ऑफ कोर्स होमस बंद हुआ है वो इकोनमिक क्राइसिस है लेकिन क्या इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि हमारे फॉरेन पॉलिसी चाबार पोर्ट होता होमूस स्टेट स्टेट ऑफ होमोस का बात ये किसको बता रहे हैं चाबार पोर्ट अगर ईरान का होता तो स्टेट ऑफ होमस की जरूरत ही आप ज्योग्राफी देखिए आप चाबार से सीधा ईरान से तेल ले सकते थे। हम सवाल विलिंगनेस का था और विलिंगनेस लूली हो गई इनकी क्योंकि इनकी सत्ता उनके हाथ में थी। हम और जो राहुल गांधी कहते हैं कि ही इज़ अ कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम। तो कॉम्प्रोमाइज्ड पीएम। तो यही अलग भाषा में इसको कॉम्प्रोमाइज ही कहते हैं। यानी वॉइसराय आता था या गवर्नर के जनरल वो कॉम्प्रोमाइज्ड होता था। क्योंकि वो ब्रिटिश सल्तनत की हित की जो बात है वही करता था ना हिंदुस्तानी लोगों के। इसलिए 1 करोड़ लोग यहां के बंगाल के फेमिन में मरे। अब आगे जाकर देखिए क्या होता है।
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
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