Nous Shorts· 16 Jun 2026· 1:58

"Either Give Us Justice or Kill Us Too" | Delhi Riot Survivors

"Either give us justice. And if justice cannot be delivered, then kill us too."

Full Transcript

तो हमारे साथ इंसाफ नहीं हुई। बेईमानी हो रही है। अल्लाह माफ ना करेंगे। इंसाफ की तो ये उम्मीद ही छोड़ रखी है मैंने कि इंसाफ तो बस अल्लाह ही करेगा। क्योंकि देखो जब कोई हमारे दुश्मन नहीं था। कोई हमारा हमें हम किसी को जानते नहीं है। हमें ये नहीं पता कि किसने मारा। तो ऐसा तो किसी को मैं फंसवा नहीं सकती। ना ही किसी का ऐसे नाम ले सकती है। ना ही हमारे घर कुटुम में कोई ऐसा दुश्मन था। ना ही रिश्तेदार में था। ना ही मोहल्ले पड़ोस वाला था कोई भी तो ऐसे किसी का नाम नहीं ले सकती बस अब तो मैंने अल्लाह के ऊपर छोड़ दिया कि अल्लाह इंसाफ करेगा उनका भी जिसने हमें मारा।

मुझे जिन्होंने मेरे पापा को मारा है उनको भी सजा होनी चाहिए मिलना चाह रही हूं मेरे साथ इंसाफ हो। अगर वो लोग इंसाफ नहीं कर सकते ना तो हम लोगों को भी मार दें, इतना चाहती हूं मैं। या तो इंसाफ कर दें, अगर इंसाफ नहीं कर सकते तो फिर हम लोगों को भी मार दें जिनका कोई कसूर नहीं था। हम लोग दर-दर ठोकर खा रहे, दूसरों के आगे हाथ मिला रहे हैं। जिन्होंने मारा वो लोग

खुलेआम यूं ही घूम रहे हैं। ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हैं। हमारा तो कोई कसूर भी नहीं था। ना हम हिंदू मानते ना मुसलमान, हम सबको एक जैसा ही इंसान मानते हैं। आज कैमरे के सामने हम आपको इन तीन औरतों की दर्दनाक दास्तान सुना पाए क्योंकि इन्होंने कैमरे के सामने आना कबूल किया। लेकिन यह सिर्फ तीन दास्तानें नहीं हैं। यह आईना है उस नाइंसाफ सिस्टम का जो 6 साल बाद भी इंसाफ नहीं दे

सका है। यहां 18 और विडोज़ हैं। 18 और नाम, 18 और जिंदगियां, 18 और उजड़े हुए घर जो अटक गई हैं 23 फरवरी 2020 में, बेशुमार सवालों के साथ इंसाफ के इंतजार में।

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