Nous Shorts· 16 Jun 2026· 2:49

Girl Who Cycled Home— The Untold Story After COVID Fame

"After so much attention, how did she slip back into invisibility?"

Full Transcript

जी, आप ज्योति कुमारी की बात कर रहे हैं, उसको गर्ल ऑफ बिहार के नाम से जानते हैं। वो अपने बीमार पिता को लेकर दरभंगा तक पहुंची थी, सात-आठ दिन की जर्नी करके। तो उस वक्त उनको, आई थिंक, पूरे कोविड नैरेटिव में, नेशनल नैरेटिव में, उनको बहुत ओवरवेल्मिंग तरीके से लिया गया। बहुत लोग उनके रेज़िलिएंस की तारीफ कर रहे थे, इवांका ट्रंप उनको कुछ कह रही थीं, एवरी मिनिस्टर इन बिहार वांटेड टू हेल्प हर, तेजस्वी यादव, चिराग पासवान, दे सेड दे विल फंड हर एजुकेशन एंड पूरा एक

इतना अटेंशन उनके ऊपर आ गया था, और सम फिल्ममेकर ही स्टेप्ड इन एंड ही सेड, आई विल मेक अ फिल्म ऑन हर लाइफ। तो इस तरह की बातें हुईं, और बहुत उस वक्त उनको एक अंडरडॉग की कहानी की तरह लिया गया, तो सब लोग पॉजिटिवली उसको ले रहे थे, एंड शी राइटली डिज़र्व्ड दैट अटेंशन। लेकिन जब मैं 2021-22-23 में उनसे बात करती रही, तो उनकी फिल्म के आने की बातें होती रहीं, होती रहीं। तो 2021 में उनके पिता को हार्ट स्ट्रोक

हुआ और उनकी डेथ हो गई, नॉट अ कोरोना विक्टिम, उनको दिल का दौरा पड़ा और वो चले गए। उसके बाद ज्योति शी वाज़ एबल टू बिल्ड अ हाउस फॉर हर मदर, बट मैंने फिर देखा कि उनको तो पढ़ाई करनी चाहिए थी, क्योंकि बिहार के मिनिस्टर्स तो चाहते थे कि लड़की कॉलेज जाए, और जब ज्योति से मैंने बात की थी तब उन्होंने भी कहा था कि मुझे तो अपने कॉलेज की पढ़ाई करनी है। लेकिन जब मैं 24 में उनके पास जाती हूं तो

वो तो अपने घर में ही नहीं हैं, वो अपनी एक्सटेंडेड फैमिली मेंबर, मौसी के यहां रहती हैं। तो कॉलेज का क्या हुआ? कॉलेज का तो कुछ भी नहीं हुआ, उन्होंने कभी एनरोल ही नहीं किया। तो कॉलेज में लड़की पहुंची नहीं। तो मैंने पूछा भी कि अब उनका फ्यूचर क्या है, क्योंकि उनको तो नरेंद्र मोदी, पीएम मोदी से भी पुरस्कार मिला था। इतनी अटेंशन के बाद कैसे वो फिर से उसी इनविज़िबिलिटी में स्लिप बैक हो गईं। क्योंकि माइग्रेंट की बेटी हैं तो उनका जो मैक्सिमम इमेजिन किया जा सकने वाला फ्यूचर

है, वो है अच्छी जगह शादी। तो जब मैंने उनसे बात की, तो शी वाज़ नॉट एबल टू एनरोल हरसेल्फ इन द हायर एजुकेशन दैट शी वांटेड टू। तो उनकी लाइफ में एक छोटा बदलाव उनके घर बनाने वाला हुआ, जो कि उनके आसपास के घरों से बेहतर घर था, वो थैंक्स टू द कोविड कवरेज। लेकिन उसके बियॉन्ड कोई इंस्टीट्यूशनल चेंज, या उस तरह का चेंज जो नेक्स्ट जनरेशन को आगे बढ़ा सके एजुकेशन या किसी जॉब के थ्रू, वो होना चाहिए था। तो वैसा ज्योति कुमारी की लाइफ में कुछ भी नहीं हुआ। और वो जो मिनिस्टर्स की हेल्प थी, जो बड़े-बड़े वायदे, जब भी कोई

इंसिडेंट रिपोर्ट होता है तो सब लोग चाहते हैं कि उससे जितना मुमकिन हो माइलेज ले सकें। तो किसी मिनिस्टर का इस तरह का कोई फंड उनके पास नहीं आया।

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