Nous Shorts· 21 Jun 2026· 1:47

Hinduism, Zionism, and Political Identity

"Shloka says: Helping others is virtue & causing pain is sin."

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बहुत सारे हिंदूवादी लोग यह हिंदुत्व पे इसलिए विश्वास रखते हैं क्योंकि उन्होंने हिंदुओं के जो सो कॉल्ड धर्म ग्रंथ कहे जाते हैं उनको पढ़ा ही नहीं है। जैसे उन्होंने वंदे मातरम भी कभी पढ़ा ही नहीं। कंठस्थ होना तो बहुत दूर की बात है। कई श्लोक हैं। मैं आपको एक श्लोक बताता हूं संस्कृत का — अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनं द्वयं, परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम्। आकाशात् तोयं यथा गच्छति सागरं, सर्वदेव नमस्कारं केशवं प्रतिगच्छति। अब इसका मतलब यह है कि 18 पुराणों में व्यास ने यही कहा है कि दूसरे पे परोपकार करो तो उसी में पुण्य है। पापाय परपीडनम् — यानी दूसरे को पीड़ा दो तो वह पाप है। उसमें कहीं भी हिंदू या मुसलमान का जिक्र नहीं है। अगर यह बात संस्कृत में है और ठोस है तो इसका मतलब आरएसएस धर्मद्रोही भी है। देशद्रोही तो है ही, आतंकवादी तो है ही, लेकिन धर्मद्रोही है। किसी भी मंदिर को हाथ लगाने की इनके किसी भी व्यक्ति की योग्यता नहीं है, क्योंकि यह जो बेसिक सीख दी जाती है उसके खिलाफ वो बर्ताव कर रहे हैं। जो पापाय परपीडनम् व्यास कह रहे हैं तो आप कौन होते हो भागवत? इसीलिए बार-बार यह कहना बहुत जरूरी हो जाता है कि हिंदूइज़्म और हिंदुत्व इन दोनों को कैसे अलग-अलग करने की जरूरत है। और बीजेपी-आरएसएस का — जैसे जैसे यहूदियों में जो मेरी तरह प्योरनिज़्म के खिलाफ बोल रहे हैं वो खुद यहूदी हैं। हम एंटीसेमेटिक नहीं हैं, हम ज़ायनिज़्म के खिलाफ हैं।

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