Nous Shorts· 08 Jul 2026· 1:53

How Pakistan's Army Took Charge of Foreign Policy

"After nuclear tests, role of army in Pakistan was central to diplomacy."

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देखिए सब कुछ है, मुस्लिम नेशन है, न्यूक्लियर वेपन है, कनेक्टिविटी है, ज्योग्राफी है, पर सबसे बड़ी बात यह है जो हमें समझनी है, कि उनके जो जनरल्स हैं आर्मी के, वो फॉरेन पॉलिसी में बहुत ज्यादा अच्छे हो गए हैं। इसकी मैं आपको मिसाल देता हूं, कि 1998 में जब हिंदुस्तान ने न्यूक्लियर टेस्ट किए थे, तब अमेरिका, क्लिंटन एडमिनिस्ट्रेशन, वो कोशिश कर रहे थे कि पाकिस्तान टेस्ट ना करे। तो जो उनके एक बहुत रिप्रेजेंटेटिव थे, स्ट्रोब टैलबट, अमेरिका के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट थे, वो कोशिश कर रहे थे कि उस समय जो उनके प्राइम मिनिस्टर हैं, नवाज़ शरीफ, उनको कॉन्टैक्ट करें। तो नवाज़ शरीफ के दफ्तर में कोई फोन ही नहीं उठा रहा था। फिर उन्होंने जो आर्मी चीफ थे, जनरल जहांगीर करामत, वहां फोन किया। उन्होंने कहा आ जाइए, हमसे बात करिए। तो बात हुई, उसमें जहांगीर करामत ने दो टूक बोल दिया अमेरिकंस को, यह हमारी नेशनल सिक्योरिटी है, हम कॉम्प्रोमाइज नहीं करेंगे, आप जाइए। तो उन्होंने उसके बाद टेस्ट किए, हम जानते हैं। उसके बाद एक नोट भेजा जनरल जहांगीर करामत ने फॉरेन ऑफिस में, कि देखिए अब जो पाकिस्तान है, न्यूक्लियर वेपन स्टेट हो गया है, तो अब हमारा भी रोल बन गया है डिप्लोमेसी में, फॉरेन पॉलिसी में। और अब आप अगर देख रही हैं, तो जो फील्ड मार्शल आसिफ मुनीर हैं, जो रास्ता शुरू किया था जनरल जहांगीर करामत ने, वो से मुनीर आगे ले गए हैं। ये जो बात हो रही है, जो ट्रंप भी बात करते हैं, वो कहते हैं माय फेवरेट फील्ड मार्शल।

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