Nous Shorts· 14 Jun 2026· 1:53

Is Muslim Politics Only Reactive? | Ruhullah Mehdi' Argument

"There is no comprehensive political philosophy."

Full Transcript

तो ये जो हैंगओवर है, 70 साल के डिफरेंट काइंड ऑफ पॉलिटिकल मुस्लिम आइडेंटिटीज़ का, जिन्होंने अलग-अलग रूल्स लिए — आप जब आए, आप ऑफकोर्स कश्मीर के पर्सपेक्टिव से इस इंटरप्ले को देख रहे थे। इंडियन नेशनल पॉलिटिक्स में, आपने पिछले एक-डेढ़ साल में किस तरह की मुस्लिम पॉलिटिकल आइडेंटिटीज़ देखी हैं? उसकी कोई मैपिंग है आपके सामने, कि मुसलमान क्या कर रहा है, क्या उसकी डिसीज़न-मेकिंग का पर्सपेक्टिव है, और कहां आकर आपको लगा कि कंट्राडिक्शन्स फेस हो रहे हैं।

इसीलिए मैंने कहा कि देयर कुडंट हैव बीन अ बेटर टाइम फॉर मी टू कम टू नेशनल पॉलिटिक्स। मुझे कुछ कमियां लगीं — चैलेंज है, और चैलेंज के जवाब में रिस्पॉन्स नहीं है, एक कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिटिकल फिलॉसफी नहीं है। कुछ हम पे तोहमतें लगाई जाती हैं मुस्लिम सोसाइटी पे। उन तोहमतों का ना तो पॉलिटिकल जवाब है, ना इस तरह से एकेडमिक कोई काम किया गया है, ना कोई एक फिलॉसफी मुरत्तब की गई है जिसको लेके

मुस्लिम सोसाइटी उस बात पे खड़ी हो जाए कि आप चाहे जितनी भी इंटरप्रिटेशन हमारे बारे में करो, दिस इज़ व्हॉट वी आर। और रिएक्टिव पॉलिटिक्स मैंने देखी, सिर्फ इस हद तक कि जितनी भी मुस्लिम लीडरशिप, पॉलिटिशियन या ऑर्गेनाइज़ेशन आप देखें — कहीं लिंचिंग होती है, कहीं इस तरह के राइट्स वगैरह भी होते हैं, या बयानात आ जाते हैं राइट विंग की तरफ से पॉलिटिशियंस की तरफ

से, लिबास पे, खाने पे, किसी एक इंडिविजुअल की लिंचिंग हो जाती है — उसके रिएक्शन में बातें होती हैं। वक्फ अमेंडमेंट बिल आया, तो उसके रिएक्शन में बातें हुईं।

Discussion

0

Readers only · Comments are reviewed by the desk before they appear

Readers only

The journalism is free for everyone — create a free account to join the discussion.

More from Nous Shorts