Nous Podcast· 10 Mar 2026· 47:36

Is the Iran War Exposing the Limits of US Power? | Amaresh Misra

In this episode, senior journalist Bushra Khanum speaks with author and political commentator Amaresh Misra about the rapidly evolving conflict involving Iran, Israel, and the United States, and its wider global implications. Misra argues that recent developments have exposed significant vulnerab…

Full Transcript

इजराइल में देखिए हजार से ऊपर लोगों के मारे जाने की खबर है कि कम से कम000 सिविलियंस और जो उनके आर्मी के लोग हैं वो मारे गए हैं। उसमें मोसाद के कुछ टॉप फंक्शनरीज भी हैं। नेतन्या के बारे में जो बात है उसके भाई के बारे में यह अभी कंफर्म नहीं है। लेकिन यह सच हो सकता है। क्यों? क्योंकि उसके भाई नेतहो का की पूरी फैमिली यहां तक कि सारा नेत्र्याहो बहुत दिन से नहीं दिखी। मेरा सवाल आपसे यह है कि कब तक आखिर अमेरिका इसको छिपा पाएगा और जो बॉडी बैग्स हैं जब वो अमेरिका पहुंचना शुरू होंगे तो क्या आपको लगता है कि यह इस वॉर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है? इस वॉर ने जो सबसे बड़ा काम सात आठ दिनों में किया है कि अमेरिका की जो वीकनेसेस हैं वो पूरा उसने एक्सपोज कर दिया। नितिन याू ने यह कहा था कि सरप्राइज़ के लिए तैयार रहे ईरान। क्या उनका इशारा न्यूक्लियर वेपन की तरफ है? क्या वो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं? जो इजराइल ने जो गाजा के साथ किया जिस तरीके से उन्होंने गाजा को बर्बाद किया वहां पर उन लोगों ने एक जेनोसाइड किया वो जो दर्द है उसका एक अंश भी वो इजराइल ने कभी महसूस नहीं किया। आज इस बार पहली बार वो महसूस करता है। ईरान चाहे हिजबुल्ला की बात करें, हूं की बात करें या फिर हम हमास की बात करें उसको वो अलाय के तौर पर देखता है। प्रॉक्सी के तौर पर नहीं देखता है। अब सबसे इंपॉर्टेंट बात है कि मुस्तबा खामन की यूनिक की का यूनिक आस्पेक्ट क्या है? वो इमाम खामन का फतवा बदल सकते हैं। जिस फतवे में इमाम खामई ने कहा था कि न्यूक्लियर वेपन ईरान नहीं बनाएगा। आदाब न्यूज़ नेटवर्क देख रहे हैं आप। मैं हूं आपके साथ बुशरा खानम फहाद। ईरान, इजराइल और अमेरिका वॉर को आज 11 दिन हो गए हैं। इन 11 दिनों में क्या कुछ डेवलपमेंट्स हुए हैं? यह वॉर किधर जाती हुई नजर आ रही है? क्या कोई भी ऐसे आसार दिख रहे हैं कि यह वॉर आने वाले दिनों में थम जाए या फिर इसमें आप इजाफा ही होते देखेंगे। इसके अलावा 28 फरवरी को जिस तरह से अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के ऊपर यह इललीगल अटैक किया जिसमें आया अली खामनाई की शहादत हुई टॉप लीडरशिप इसमें खत्म हो गई। उसके बाद अमेरिका को यह लग रहा था कि ईरान में सिविल वॉर जैसी जो सिचुएशन है वह पैदा हो जाएगी और वह रिजीम चेंज करने में पूरी तरीके से कामयाब हो जाएंगे। वहां अपना कोई पपेट बिठा देंगे और ईरान पर एक तरह से वह कब्जा कर लेंगे। लेकिन वो ख्वाब तो उनका ख्वाब ही बनकर रह गया क्योंकि ईरान ने जिस तरह से रिटेलिएट किया और जो अमेरिकन बेसिस हैं खासतौर पर जो मिडिल ईस्टर्न कंट्रीज में है उनको जिस तरह से निशाना बनाया है अब अमेरिका और इजराइल की समझ नहीं आ रहा है कि आखिर इसका जवाब वो किस तरह से दें। दुनिया यह देख रही है कि सो कॉल्ड जो वर्ल्ड पावर अपने आप को कहते थे अमेरिका और उसके साथ-साथ इजराइल के कहने पर जो अमेरिका सब कुछ करता रहा है वो किस तरह से घुटनों पर आते हुए नजर आ रहे हैं और मैं यह यूं ही नहीं कह रही हूं बल्कि तमाम तरह की इस तरह की खबरें जो आप देख रहे हैं क्योंकि इजराइल में जिस तरह की तबाही हो रही है उसकी तस्वीरें तो आप तक नहीं पहुंच रही हैं क्योंकि पूरी तरीके से सेंसरशिप वहां पर कर दी गई है। कोई भी फॉरेन जर्नलिस्ट जाकर वहां कोई वीडियो नहीं बना सकते हैं। वहां जा नहीं सकते हैं। वहां के लोग वीडियो नहीं बना सकते हैं। उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकते हैं। तो इस तरह की सेंसरशिप है। तो आप समझिए कि कितना ज्यादा नुकसान इजराइल में हुआ है। और वहीं ईरान में जो कुछ हो रहा है, ईरान में जिस तरह की तबाही है, वो सब कुछ आप देख रहे हैं और वो सब कुछ टीवी चैनल्स पर दिखाया जा रहा है क्योंकि ईरान ने किसी तरह का सेंसरशिप नहीं किया है। एक और जो नया डेवलपमेंट हुआ है, वह यह कि आयतुल्लाह अली खामनाई की शहादत के बाद उनके जो बेटे हैं आयतुल्ला मुज्तबा खामनाई, उनको सुप्रीम लीडर चुन लिया गया है। और यह भी एक तरह से एक बड़ा झटका है अमेरिका और इजराइल के लिए क्योंकि उन्होंने ये क्लेम किया था कि अगला जो भी कोई लीडर होगा वो उनकी मर्जी का होगा। तो यहां तो एक खामनाई गए और दूसरे खामनाई आ गए। इस पर भी हम बात करेंगे कि इससे क्या कुछ ईरान में बदलने जा रहा है और हमारे साथ एक बार फिर से अमरीश मिश्रा जी जुड़ गए हैं। पिछला जो प्रोग्राम था वो आपने खासा पसंद किया था इसलिए एक बार फिर से उन्होंने मैंने बुलाया है। उन्हें दावत दी है। अमरीश मिश्रा जी वेस्टीज मामलों के जानकार हैं। राइटर हैं, ऑथर हैं और इसके अलावा जो रेजिस्टेंस की पूरी जो हिस्ट्री है उसको बहुत अच्छे से वो समझते हैं। अमरीश जी बहुत-बहुत इस्तकबाल आपका नाउ नेटवर्क में। थैंक यू। थैंक यू सो मच विश्व। अमरीश जी। मेरा पहला सवाल आपसे यह है कि जब मैंने आपसे पिछली दफा बात की थी तो तकरीबन दो या तीन दिन हुए थे इस वॉर को और आज जब हम आपसे बात कर रहे हैं तो 11 दिन हो गए हैं। क्या डेवलपमेंट्स आप देख रहे हैं उस पहले दिन से आज 11वें दिन में क्या कुछ बदला है इस पूरे वॉर में? देखिए इन इन पिछले आठ दिनों में या एक हफ्ते में कह लीजिए ईरान का जो अपर हैंड हुआ है और अपर हैंड इस मामले में कि एयर डिफेंसेस जो यूएस के डिस्ट्रॉय हुए हैं। एंड दिस इज द बिगेस्ट स्टोरी क्योंकि एयर डिफेंसेस जो यूएस के डिस्ट्रॉय हुए हुए हैं उससे एक पॉलिटिकल क्राइसिस पूरी दुनिया में क्रिएट हुई है। और पॉलिटिकल क्राइसिस क्या है? एंड यह बिल्कुल नया एंगल है। वो यह है कि जैसे यूरोप अब यूरोप से कहा गया था कि अमेरिकन हथियार खरीदो और फिर यूक्रेन को दो। आपको याद होगा जब ट्रंप सत्ता में आए थे तो ये ये करार हुआ था। ट्रंप ने कहा था हम ही सब क्यों नेटो में हम ही सबसे ज्यादा क्यों खर्च करें? यूरोपियन पावर्स अमेरिका से हथियार खरीदे यूक्रेन को दे। अब इस चक्कर में कई यूरोपियन जो देश है उन्होंने अमेरिका से खरीदना शुरू कर दिया। अब वहां पर पैनिकिक है यूरोप में। वह यह कह रहे हैं कि अमेरिकन वेपंस का तो सप्लाई ही रुक जाएगा क्योंकि अमेरिकन वेपंस प्रायोरिटाइज कर रहे हैं मिडिल ईस्ट को जहां उनको बहुत नुकसान हो रहा है। बड़े-बड़े उनके एयर डिफेंस सिस्टम्स नष्ट हो गए हैं। तो जो पेट्रियट मिसाइल्स हैं जो सेकंड लेवल के एयर डिफेंस सिस्टम्स हैं वो अब अमेरिका यूज़ कर रहा है। लेकिन उनमें भी इतना ज्यादा खर्च हो रहा है। से जो पेट्रियट जो सिस्टम्स है एयर डिफेंस सिस्टम उसमें जो पीसी3 मिसाइल्स यूज़ होती हैं वो लगभग डिप्लीट हो चुकी है और अमेरिका पीसी2 यूज़ कर रहा है जो 200 में बनी। अब जब यहां वो पीसी2 यूज़ कर रहा है तो वो जर्मनी को और इंग्लैंड को और यूके को और फ्रांस को वो क्या देगा? तो वहां पर यह हो रही है प्रॉब्लम कि वो लोग अपने को रीूट कर रहे हैं। अपने लोकल जो जैसे फ्रांस है वो अपने लोकल आर्म्स मैन्युफैक्चरर्स को बूस्ट कर रहा है। अभी पोलैंड पोलैंड पिछले दो सालों में पोलैंड बहुत बड़ा मार्केट अमेरिकन हथियारों का बनके उभरा। लेकिन पोलैंड ने अभी साउथ कोरिया से हथियार खरीद रहा है पोलैंड। मतलब आप सोचिए सात आठ दिनों में ये हालत हो गई। और अभी तो मैं जो तेल की क्राइसिस अच्छा तेल की क्राइसिस में आप देखिए क्या है कि मिडिल ईस्ट के सारे जो कंट्रीज हैं मिडिल ईस्ट एक्चुअली वेस्ट एशिया कहना चाहिए मिडिल ईस्ट इज अ कॉलोनियल टर्म बट क्योंकि वो लोगों को आइडेंटिफाई उससे लोग करते हैं। तो कहने का तो अभी क्या है कि जो ज्यादातर देश हैं खाड़ी के देश ये सभी लोगों ने इन सब ने अपना ऑयल प्रोडक्शन कम कर दिया। तो जब ऑयल प्रोडक्शन कम कर दिया है और उधर ईरान ऑयल टैंकर उनके जाने नहीं दे रहा है। चाइना और रशिया के अलावा किसी के ऑयल टैंकर स्टेट्स ऑफ और कुरमूस क्रॉस नहीं कर रहे हैं। उसके साथ-साथ ईरान ने हमले भी किए हैं टैंकर्स पे और एक तरह से दुनिया को दिखाया है कि अगर अह उसकी बात नहीं मानी तो उसके नतीजे गंभीर होंगे और ईरान बहुत ही ज्यादा सीरियस है इस इस बात को लेके कि स्टेट ऑफ हुमूस में उसकी इजाजत के बिना कोई टैंकर पास नहीं हो सकता। अब देखिए जो क्रूड ब्रेंट है जिसको हम लोग एक ब्रॉडली कहते हैं उसकी जो प्राइस है वो $10 प्रति बैरल हो गई। एक बैरल में 159 लीटर्स होते। बोर शुरू होने के पहले यह 70 प्रति बैरल थी। यानी 10 दिन में यह करीब आप $40 इसमें इजाफा हुआ है। अभी क्या हो रहा है? बहुत सारे देशों के पास रिजर्व्स हैं ऑयल के। जैसे अमेरिका खुद के पास रिजर्व्स हैं। इजराइल के पास रिजर्व्स है और इंडिया के पास रिजर्व्स हैं। जैसे 40 45 दिनों के रिजर्व और इंडिया को तो खैर रशियन ऑयल का एक्सेस अब मिल गया है। लेकिन जिन देशों को रशियन ऑयल का एक्सेस नहीं है। अब जैसे यूरोपियन देश हैं जो रश जो रशिया से ऑयल खरीदते थे, गैस भी खरीदते थे तो वो उनको एक संकट आ गया है क्योंकि प्यूटन ने कह दिया है कि हम 2027 में हमारा करार खत्म हो रहा था। सेंश के बावजूद एक करार था यूरोपियन देश और रशिया में प्यूटिन ने अभी कहा अभी तीन दिन पहले उसने कहा कि 2027 में हमारा करार खत्म हो रहा है लेकिन हम अभी से क्यों नहीं बंद कर दें इनको गैस देना अब अगर रशिया ने गैस देना बंद कर दिया तो ये तो यूरोप की बहुत बड़ी क्राइसिस हो जाएगी इंडिया को देखिए आप तो एलपीजी हमारा हम एलपीजी अपना जो है दो तरह के होते हैं मतलब लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस और लिक्विफाइड नेचुरल गैस तो एलपीजी हम जो इंपोर्ट करते हैं 70 80% हमारी जरूरतें सब इंपोर्ट से होती है पूरी और क़तर ने अपनी कई फैक्ट्रीज बंद कर दी हैं। गैस का सप्लाई अभी हमारे पास रिजर्व है लेकिन कब तक लास्ट करेगा? तो ये देखिए जो पूरी समस्या है ये सात आठ दिनों में तो सैनिक स्तर पे ईरान ने पूरी तरह से एक जो मिसाइल वॉर चली है उसमें अमेरिका और इजराइल को पीछे धकेला है। कई मौतों की बात आ रही है। कई लोगों के मारे जाने की सैनिकों के मारे जाने की बात आ रही है जो अभी इजराइल छुपा रहा है। अमेरिका भी छुपा रहा है। लेकिन वो बात धीरे-धीरे लीक हो रही है। उसके अलावा मार्केट्स में और फिर देखिए जो आर्म्स की इंडस्ट्री है उसमें जो क्राइसिस है तो एक ग्लोबल क्राइसिस एक आप समझिए इस वॉर ने जो वेस्टर्न वर्ल्ड है या वेस्टर्न वर्ल्ड के जो एलाइज है जैसे साउथ कोरिया हो गया ये हो गया ये तमाम जो देश है जापान हो गया बहुत सारे और देश तो ये सब संकट में है इस वॉर की वजह से तो अब आप समझ अब आप आप सोच सकते हैं कि इस वॉर ने जो सबसे बड़ा काम सात आठ दिनों में किया है कि अमेरिका की जो वीकनेस है अमेरिका वो पूरा उसने एक्सपोज कर दिया है दुनिया के साथ कि अमेरिका जो है दरअसल इसके पास जो कुछ भी है वो उससे ये 10 गुना ज्यादा बड़बोलेपन में उसको बढ़ा चढ़ा के बताता है। असलियत अमेरिका की ये है कि इसके पास खुद अपने लिए पीसी3 मिसाइल्स नहीं है अपने लोगों को डिफेंड करने के लिए। यह देखिए हुआ है। मेरे एक ज़हन में एक बात यह आ रही थी अमरीश जी कि क्या हम एक ऐसी तारीख को रकम कर रहे हैं? हैं। क्या हम एक ऐसी तारीख के गवाह बन रहे हैं जहां हम इन इंपीरियलिस्ट जो ताकतें हैं उनको पूरे तरीके से हम कोलैप्स होता हुआ देख रहे हैं और एक नया वर्ल्ड ऑर्डर वो वर्ल्ड ऑर्डर नहीं जिसकी बात इजराइल और अमेरिका करते हैं। हम बात कर रहे हैं कि क्या दुनिया के नए लीडर्स हम इवॉल्व होता हुआ देख रहे हैं कि जो पावर सेंटर है क्या हम उसको बदलता हुआ देख रहे हैं और क्या ईरान ये करने में कामयाब हो पा रहा है और क्या ये जो एक पूरा मिथ है उसको तोड़ते हुए क्या वह बताने में कामयाब हो पा रहा है कि इन ताकतों को इस तरीके से घुटनों पर लाया जा सकता है और पूरे तरीके से उन्हें हराया भी जा सकता है? देखिए सब ये इस दुनिया में मुझे लगता है कि अभी हम रीसेंट जो पास्ट में जाएं वो भी कर सकते हैं। लेकिन हजारों सालों से एक देखिए एक रवायत चली आ रही थी कि जो टेक्नोलॉजिकली सुपीरियर फोर्सर्सेस हैं और जैसे रोमन अंपायर था या उसके बाद आप मेडवल एरा में देखिए तो बहुत सारे जो ऑटोमन अंपायर था, मुगल अंपायर था, सफाबित अंपायर था। हम इन जनरल बात कर रहे हैं तो ये था कि भाई जो एंपायर्स हैं बड़े-बड़े इनसे कोई मुकाबला नहीं कर सकता और उसी उसी कड़ी में अपने को ब्रिटिश एंपायर भी देखता था। ब्रिटिश एंपायर भी अपने को हालांकि फर्क ये है कि ब्रिटिश एंपायर दूसरे देशों के रिसोर्सेज लूटता था या लेकिन मुगल सफाबित और ऑटोमन एंपायर ने ऐसा नहीं किया। रोमन एंपायर भी दूसरे देशों के रिसोर्सेज लूटता था। अब अगर इस फर्क को हम एक एक तरफ एक तरफ रख दें तो उससे क्या समझ में आता है कि इन लोगों एक जो मिथ था कि भाई बड़ी पावर से कोई लड़ नहीं सकता। ज्यादा से ज्यादा आप गोरिल्ला वॉर लड़ सकते हैं। उसमें बहुत टाइम लगता है। 20ों साल 25ों साल लग जाते हैं। फिर भी उसमें सक्सेस मिलती है। जैसे चाइना में मिली, वियतनाम में मिली। लेकिन ये जो 7 अक्टूबर 2023 में ईरान लेड एक्सेस ऑफ रेिस्टर्स ने दिखाया दुनिया को। सबसे पहले हमास ने और उसके बाद हजबुल्ला ने और अब ईरान दिखा कि कैसे आप बड़ी ताकत से जो आपके पास है अगर उनके पास मान लीजिए $4 मिलियन डॉलर के ड्रोंस हैं। आपके पास 4000 के के ड्रोंस हैं। एक्चुअली और उससे कम ही अगर देखा जाए तो हमास के और सस्ते ड्रोंस हैं। अगर आप भारी मात्रा में कंसंट्रेटेड तरीके से अटैक करिए तो आप उनको ओवरवेल कर सकते हैं। जैसे आयरन डोम को जो 7 अक्टूबर को हमास ने ओवरवेल किया सोम उसने एक साथ 4000 ड्रोन मार दिए तो इंटरसेप्टर उनके वही नहीं कर पाए। वो वर्क ही नहीं कर पाए। और उसके बाद जो आयरन जो इलेक्ट्रॉनिक वॉल गाजा पर लगी थी उसके वो भी इक्विप थी कि वो मिसाइल्स मारे जैसे अगर उसकी तरफ कुछ आ रहा है लेकिन उसको भी ओवरवेल्म इतना ज्यादा क्वांटिटी से कर दिया कि वो बैठ गई। अब ईरान पे आई है जो अभी अभी अभी जंग चल रही है। जून में भी ईरान ने दिखाया था। लेकिन अभी खासतौर पे जो उसने दिखाया कि वो एक साथ सैकड़ों ड्रोंस मारता है ईरान। उसके पीछे मिसाइल्स होती हैं और वो मिसाइल्स ऐसी है जो डायरेक्शन चेंज कर देती है। वो लटरिंग मिसाइल्स है और वो अगर सऊदी अरेबिया की तरफ जा रही है तो वो कुवैत की तरफ मुड़ सकती है। वो इजराइल की तरफ मुड़ सकती है। और उनके आगे ड्रोंस हैं जिन जो कि चीफ ड्रोंस हैं जिनको ईरान छोड़ता है उनको सैक्रिफाइस करने के लिए कि भाई उसमें इंटरसेप्टर्स जो अमेरिका के हैं वो खर्च हो जाए। और यही हुआ। अभी देखिए जो मिसाइल्स ने जो रडार सिस्टम सबसे पहले ध्वस्त किया अमेरिका का वो ऐसे ही किया। ड्रोंस मारे वो इंटरसेप्टर्स ड्रोंस की तरफ चले गए। फिर जो मिसाइल आई उसके बाद उसने रडार सिस्टम नष्ट कर दिया और यही कुवैत बहराइन हर जगह कतर हर जगह हुआ है। तो यह देखिए जो एक नया तरीका लड़ने का हमको सिखाया गया है। हॉलीवुड की भी फिल्मों में दिखाया जाता था कि वो रेजिस्टेंस है तो अंडर ग्राउंड है और बड़ी मुश्किल से वो ये कर रहा है वो कर रहा है। लेकिन यहां पर एक पूरी तरीके से एक आपको यह बता दिया गया है कि वॉर ऑफ एट्रिशन वॉर ऑफ एट्रिशन अगर आप करिए और दूसरी बात एसिट्रिक वॉरफेयर इसको एसिमिट्रिक वॉरफेयर कहते हैं कि जो थोड़ा सा वीक है वो कैसे ओवरवेल कर सकता है अपने से सुपीरियर फो को अपने से सुपीरियर एनिमी को ये देखिए दुनिया के लिए सबसे बड़ा सबक जी काफी इंपॉर्टेंट बातें आप यहां पर कह रहे हैं और ये हमारे जो ऑडियंस है उसको भी समझना बहुत इंपॉर्टेंट है यहां एक और बात जो मैं आपसे पूछना चाह रही थी कि इजराइल की जब हम बात करते हैं तो इजराइल में कितनी भारी तबाही हुई है। अह इसके बारे में बहुत कुछ बाहर निकल कर नहीं आ पा रहा है। अगर आईआरजीसी की हम बात करें ईरानियन क्लेम्स की अगर हम बात करें तो उनकी तरफ से कहा जा रहा है कि लगभग 1000 लोग जो सिविलियंस हैं वो हताहत हुए हैं। बड़ी तादाद में जो इजरायली सोल्जर्स हैं उनकी मौतें हुई हैं वहां पर। बहुत बड़े तादाद में वहां तबाही हुई है। इमारतें वहां पर तबाह कर दी गई हैं। और यह भी कहा जा रहा है कि जो नितिन याू के भाई हैं उनके नितिन याू के घर पर अटैक हुआ है। जिसमें उनके भाई हताहत हो गए हैं और जो बनगिवर हैं वो भी बुरी तरीके से जख्मी हैं। आपके सोर्सेस क्या कहते हैं? क्या कुछ आपके पास अपडेट है? देखिए अभी-अभी वीडियो आया है बनगोरियन एयरपोर्ट का अभी एकद घंटा पहले। उसमें ऐसा लग रहा है जैसे जैसे कोई दंगा हो रहा है पनगुरियन एयरपोर्ट पर जो इजराइल का एकमात्र एयरपोर्ट वो मिलिट्री भी है सिविलियन भी है और जबकि वहां से फ्लाइट्स बंद है फ्लाइट्स वहां ना आ सकती है ना जा सकती हैं और अभी कुछ दिन पहले दो घंटे के लिए अपना एयर स्पेस खोला था इजराइल ने तो उसमें भी वो बाहर से डॉक्टर्स लाए थे सैकड़ों डॉक्टर्स आ चुके हैं। क्यों आ रहे हैं सैकड़ों डॉक्टर? अच्छा आज की स्थिति यह है कि वहां पर भीड़ लगी हुई है। लोग यह कह रहे हैं कि फ्लाइट्स चालू करो हमको बाहर जाने दो। तो एक तरह का प्रोटेस्ट हो रहा है। उसी के साथ-साथ लोगों की बदहवासी भी दिखाई पड़ रही है। उसमें एक यह भी कहानी आ रही है कि कुछ इजराइली ऐसे हैं जो प्राइवेट चार्ज कर रहे हैं। मतलब बहुत ज्यादा पैसा लेके प्राइवेट एयर फ्लाइट्स वो चला रहे हैं। अभी हमको यूएई से भी ये खबर आई। ओमान से भी आई, दुबई से आई क्योंकि दुबई और अभी ओमान को छोड़ के बाकी सभी देशों में फ्लाइट्स बंद हैं। और एक पैनिकिक है। दुबई से हजारों इंडियंस छोड़ के या इंडियंस और मतलब पाकिस्तानी जो भी वहां सब छोड़ के ओमान आ रहे हैं। ओमान से वो आने की कोशिश कर रहे हैं। उसके बाद प्राइवेट एयरक्राफ्ट्स दुबई और तमाम और अबू धाबी वगैरह में वहां से भी चल रही हैं। तीन कोई कह रहा है 3 लाख पर सीट, कोई कह रहा है 13 लाख पर सीट। जो भी वो तो इजराइल भी वही करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इजराइल में जब यह बात वहां लोगों को पता चली तो वहां राइट टाइप सिचुएशन हो गया। अभी बनोरियन एयरपोर्ट में और भी बहुत कुछ हो रहा है जो धीरे-धीरे सामने आ रहा है। इजराइल में देखिए हजार से ऊपर लोगों के मारे जाने की खबर है कि कम से कम000 सिविलियंस और जो उनके आर्मी के लोग हैं वो मारे गए हैं। उसमें मोसाद के कुछ टॉप फंक्शनरीज भी हैं। नेतन्या के बारे में जो बात है उसके भाई के बारे में यह अभी कंफर्म नहीं है। लेकिन यह सच हो सकता है। क्यों? क्योंकि उसके भाई नेत्रहो का की पूरी फैमिली यहां तक कि सारा नेत्र बहुत दिन से नहीं दिखी बन गिविवर और स्मूथ रिच बन बन गिविवर और स्मूथ रिच जो फाइनेंस मिनिस्टर हैं और इंजीनियर मिनिस्टर है ये तो दिखे ही नहीं है। 28 फरवरी से नहीं दिखे। कभी एक वीडियो मैसेज आता है। जैसे स्मूथिच का वीडियो मैसेज आता है और इसका बन गिवर का तो वीडियो मैसेज भी नहीं आया। ये वही बन गिवर है जो अभी 13 14 दिन पहले इजराइली प्रजंस में घुस रहा था और दुनिया को दिखा रहा था कि देखो कैसे हम ब्रूटली पैलेस्तीनियन प्रजनर्स को ट्रीट कर रहे हैं। वो पूरी दुनिया ने देखा कि उनको मार रहा है। उनको पूरा एक सब ह्यूमन ट्रीटमेंट उनका कर रहा है। ये वही बन गिवेन आज वो चेहरा दिखाने लायक नहीं। तो देखिए यह जो सारी बातें हैं यह दिखा रही हैं कि इजराइली सोसाइटी हैज़ बीन हिट हार्ड और इतना इतनी मार इजराइल ने कभी भी अपनी हिस्ट्री में नहीं झेली। इजराइल ने वॉर्स लड़ी है। 1967 की वॉर 1973 की वॉर जो थी उसमें इजिप्ट की फर्सेस एक समय हावी होने लगी थी। लेकिन वो आर्मी कॉन्फ्लिक्ट्स थे। जो इजराइल ने जो गाजा के साथ किया जिस तरीके से उन्होंने गाजा को बर्बाद किया वहां पर उन लोगों ने एक जेनोसाइड किया वो जो दर्द है उसका एक अंश भी वो इजराइल ने कभी महसूस नहीं किया आज इस बार पहली बार वो महसूस कर यहां एक और बात जो मैं बहुत छोटा सा एक कमेंट में जो ऐड करना चाह रही थी वो ये कि ये भी कहा जा रहा है ईरान की तरफ से कि वॉर ऑफ प्रिजनर्स जो हैं अमेरिकन सोल्जर्स जो हैं उनको वॉर ऑफ़ प्रिजनर्स जो है वो बनाया गया है। आपके पास इसको लेकर क्या इनेशन है? देखिए इस पे बुशरा क्या है मामला? इजराइल ने क्या किया? देखिए इजराइल ने दो साल की जंग लड़ी गाज़ा में। ऑफिशियल फिगर्स इजराइल ने अभी तक ठीक से जारी नहीं किए हैं। जो उनके आईडीएफ के चीफ ने आखिरी बार बताया था 11 अक्टूबर 2025 को कि 1013 इस तरह से अब आप देखेंगे तो शायद उसमें कुछ जोड़ घटाव इजराइल हमेशा करता रहता है। अगर Google वगैरह में आप देखिए तो 1000 के ऊपर पहले तो कह रहे थे केवल 900 लोग मारे गए। लेकिन अब 10100 के ऊपर वो एक्सेप्ट करते। इंजरीज जो है वह 40 से 500 हैं क्योंकि वह हॉस्पिटल के रिकॉर्ड्स बताती है। लेकिन नेतन्याओं ने क्या किया? नेतृतन्याओं ने बहुत सारे जो इस तरीके से भाड़े के जस खासतौर पे अफ्रीका के उनको बुला बुला के और वो कहीं रजिस्टर्ड नहीं होते। उनको सीधे भेजा जाता है। पैसा मिलता है उनकी फैमिली को उनको। वह जाकर सीधे लड़ते हैं। वह अगर मारे जाए तो उनकी कोई ऑफिशियल अकाउंटेबिलिटी नहीं होती है। और इसी बल पर जो हमास का या बाकी लोगों का बहुत सारे वेस्ट के इंडिपेंडेंट एनालिस्ट का जो ये कहना है कि भाई कम से कम 5 से 10,000 इजराइली सोल्जर्स मारे गए हैं। इन्होंने नौ आठ से 9 हजार मौतें छुपाई हैं। और कैसे छुपाई है वो उस उसका तरीका जो इनका है बॉडीज गायब करने का वो बड़ा प्रोफेशनल तरीका इजराइल का और आज का नहीं है। काफी लंबे समय का है। मुझे लगता है अमेरिका ने उससे सीखा है और अमेरिका ने उससे सीख के यह एक पॉलिसी बनाई है कि एक तो जो अमेरिकन बेससेस में सोल्जर्स हैं उनका अभी देखिए पिछले दो-तीन महीनों में ट्रांसफर बहुत कुछ हुआ। यानी जो सोल्जर्स थे वो वापस गए अमेरिका नए आए हैं और ये इसका मतलब है कि ये वॉर पहले से प्लान हो रही थी और जो नए आए हैं उनमें काफी ऐसे हैं जो गरीब घरों से हैं और जिनको पैसा देके मर्सरी टाइप सोल्जर्स हैं और जिनको यह कहा गया है बहुतों को कि ईरान को तबाह करना है और जीसस क्राइस्ट आएंगे अगर ईरान तबाह होगा तो अब जब इस तो वो लोग जो मारे गए हैं उनकी जो बॉडीज है बहुत सारे यह भी एक बात आ रही है कि उनकी बॉडीज सी मतलब समुद्र में भी बहा दी गई। कुछ जो अमेरिकन युद्धपोत है उन्होंने समुद्र में बहा दिए जिसको बरियल एच सी कहते हैं। लेकिन बरियल एच सी तो उनका होता है कि जो जैसे अब्राहम लिंकन के जो सेलर्स हैं या जेरलफोर्ड है उसके सेलर्स हैं। अब यहीं पर वह ग्रे लाइन आ जाती है कि वह इन सोल्जर्स को जो ग्राउंड के सोल्जर्स अगर 5 से 700 जो अली लजारी ने भी कहा और भी और एक बार नहीं दो-तीन बार कहा तो उनका उसका और कैसे वेरीफाई होगा वो आने वाले दिनों में दिख जाएगा। दूसरी बात देखिए जो बंदी है अब बंदियों के में दूसरी कहानी छुपी बंदियों में यह कहानी छुपी है कि अमेरिका में देखिए अभी तक करीब तीन एफ15 जहाज उनके तीन या चार चार वो कुवैत में गिरे जो कुवैत में मारे गए और ये अमेरिका ने कहा फ्रेंडली फायर था कि कुवैत जो कुवैत का जो एयर डिफेंस सिस्टम है उसने एफ15 मार मार गिराया अब वो जिस तरह से उनके जो वीडियोस है उसमें साफ पता लग रहा है कि वो एक किसी बड़े मिसाइल से उनको मारा गया है या ड्रोन से मारा गया है। लेकिन बहरहाल अमेरिका का कहना है कि फ्रेंडली फायर उसके बाद जो ईरान के ऊपर ईरान के अंदर जो F15 मारे गए जिसमें कम से कम अभी एडमिट किया अमेरिका ने केवल एक और कहा है कि हमने दोनों पायलट्स को हमने सेफली बचा लिया। हम हम जाके उनको एक्सट्रैक्ट कर लाए यानी उनको निकाल लाए। लेकिन जो वहां की रिपोर्ट्स हैं कम से कम छ से सात F15 ईरान के ऊपर मार गिराए गए और उनके पायलट्स ईरानी कस्टडी में ये देखिए रियल बिल्कुल एक और बात जो मैं यहां आपसे पूछना चाह रही थी वो ये भी कि जो आईआरजीसी ये क्लेम कर रहा है कि जो अमेरिकन सोल्जर्स हैं उनकी भी तादाद वो 500 से 600 बता रहे हैं। हालांकि अमेरिका की अगर हम बात करें वो इस पर पूरी तरीके से पर्दा डाल रहा है। अमेरिका का यह कहना है कि सिर्फ आठ ही सोल्जर्स उसके इसमें हताहत हुए हैं। मेरा सवाल आपसे यह है कि कब तक आखिर अमेरिका इसको छिपा पाएगा और जो बॉडी बैग्स हैं जब वो अमेरिका पहुंचना शुरू होंगे तो क्या आपको लगता है कि ये इस वॉर का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट हो सकता है और जो पहले से ही पूरे अमेरिका में प्रोटेस्ट हो रहे हैं। क्या उसमें और इजाफा हमें देखने के लिए मिलेगा? और क्या ये एक ऐसा टर्निंग पॉइंट हो सकता है जो इस वॉर की तस्वीर को बदल दे? नहीं देखिए अभी बॉडी बैग्स पहुंचना शुरू नहीं हुए हैं। अभी अमेरिका ने एडमिट किया है कि आठ लोग उसके मारे गए हैं। अब सोचिए एक इंसिडेंट कुवैत में होता है। ये 2 मार्च की बात है। जो कुवैत के जो पोर्ट शब पोर्ट स्वब में जो अमेरिकन सोल्जर्स हैं वहां ईरान मिसाइल मारता है। पहले आता है कि दो मारे गए। फिर आता है चार मारे गए। फिर आता है छह मारे गए। अब आ रहा है आठ मारे गए। तो अब आप देखिए वो कैसे बढ़ा रहे हैं। तो अच्छा यह कह रहे हैं कि उसमें जो इंजर्ड थे वो वो मर रहे हैं। तो कितने इंजर्ड है भाई जो अभी और जिनकी डेथ होने की संभावना है। इस तरह के जो चीजें हैं अब जो जैसे उन्होंने आठ लोगों का एडमिट किया है। उसमें से शायद छह की फोटोग्राफ भी रिलीज की उन्होंने तो उनके तो बॉडी बैग्स पहुंचना शुरू हो गए शुरुआती स्तर पे। लेकिन जो बाकी हैं उनका अमेरिका क्या करेगा या उनके परिवार जो हैं अमेरिका में उनके पास क्या वो वॉइस है क्योंकि देखिए अमेरिका में भी पिछले तीन चार सालों में गरीबी बहुत बड़ी है और इकोनमिक इनकलिटी बहुत बड़ी लोगों की हालत बहुत खराब है और यह आप जानते होंगे जोन ममदानी ने भी अपने इलेक्शन कैंपेन में इस बात को कहा था न्यूयॉर्क जैसे शहर के बारे में तो इसलिए देखिए वहां पर अब यह आसान हो गया है कि गरीब लोगों को रिक्रूट कर गरीब अमेरिकनंस को रिक्रूट करके और उनको पैसा वगैरह देकर उनकी आइडेंटिटी को गायब कर दिया जाए। सीआई का यह प्रोग्राम भी रहा है बहुत पुराना जिसको अभी वह सुनने में आया है कि अभी फिर से इंप्लीमेंट सीआई कर रहा है कि कैसे सोल्जर्स को ही गायब कर दो उनके नंबर्स को कि इतने सोल्जर्स गए और इतने नहीं लौटे वही गायब कर दो। तो देखिए इस समय क्या हो रहा है कि एक बहुत हाई लेवल का डिसेप्शन का गेम भी चल रहा है और डिसेप्शन का गेम का मतलब केवल यह नहीं कि ईरान की आंखों में धूलक अपनी जनता की भी आंखों में धूल झुक ये भी डिसेप्शन एंड दिस इज आल्सो बीइंग प्रैक्टिस्ड बाय अमेरिका एंड इजराइल और अब बात करना बहुत जरूरी है जो नई लीडरशिप है उसको लेकर अमरेश जी और मेरा सवाल ये है कि जो नई लीडरशिप है यानी कि जो सुप्रीम लीडर चुने गए हैं ईरान के आयतुल्ला मुस्तबा खामना नाई जो कि आयतुल्लाह खामनाई जो हैं उनके बेटे हैं। उनके चार बेटे हैं। इनका नंबर दूसरा है और उनको चुना गया है। इससे क्या कुछ अब ईरान में बदलने जा रहा है और यह भी बताना यहां पर जरूरी है अपनी ऑडियंस को कि आयतुल्ला मुस्तबा खामनाई जो हैं वो जब ईरान और इराक वॉर हुई थी तो वो फ्रंट लाइन कमांडर तो आप समझिए कि उन्हें किस तरह का एक्सपीरियंस है और इसके अलावा जो अभी आयतुल्ला अली खामनाई के जो घर पर अटैक हुआ था उस अटैक में जहां उन्होंने अपने वालिद को खोया अपनी वालिदा को खोया उनकी वाइफ और उनका जो बच्चा है वो भी इसमें शहीद हुए उनकी बहन बहनोई और उनका बच्चा भी शहीद हुआ तो आप समझिए कि उसके बाद उनको सुप्रीम लीडर चुना गया है और मेरा सवाल आपसे यही है कि उससे क्या कुछ अब ईरान में और खासतौर पर जिस सिचुएशन में ईरान है फिलहाल उसमें क्या कुछ बदलने जा रहा है? देखिए यह जो नई लीडरशिप आई है यह नया जनरेशन है। अभी मुस्तबा खामने की उम्र 56 साल की है। अली खाम नहीं उनके पिता इमाम खामई वो 88 साल के थे। तो ये आप देखिए कि सीधे एक नई जनरेशन आ गई। चाहिए। यह जो नई यह जो जनरेशनल चेंज है यह केवल सुप्रीम लीडर के लेवल पे नहीं हुआ है। यह आईआरजीसी में भी बहुत सारे लोग मार दिए गए हैं। उसी तरीके से और भी बहुत सारी जो पॉलिटिकल लीडरशिप है उसमें भी बहुत सारे लोग मारे गए हैं। और जो सिक्योरिटी फोर्सेस हैं जैसे बासज उसके भी बहुत से लोग मारे गए हैं। तो हर जगह हर जगह ये स्थिति बन रही है कि एक नई जनरेशन पावर में आ रही है। और सबसे इंपॉर्टेंट बात है कि मुस्तबा खामने की यूनिक की का यूनिक आस्पेक्ट क्या है? तो यूनिक आस्पेक्ट उनका ये है कि वो इमाम खामने का फतवा बदल सकते हैं। जिस फतवे में इमाम खामने ने कहा था कि न्यूक्लियर वेपन ईरान नहीं बनाएगा और जो इस्लामिक प्रिंसिपल्स के खिलाफ है वेपन्स ऑफ़ मास डिस्ट्रक्शन। उस फतवे को मुस्तबा नहीं बदल सकते। यह देखिए बहुत बड़ी चीज है क्योंकि इससे यह गेम चेंजर होगा। आज भी लोग कहते हैं कि अगर ईरान के पास न्यूक्लियर वेपन होता तो इजराइल और अमेरिका की हिम्मत ही नहीं होती उस पर हमला करने की। तो अब देखिए ये संभावना बढ़ जाती है क्योंकि इस्लामिक जुरिस प्रूडेंस में ये है कि अगर कोई ऐसा थ्रेट आ जाए वजूद का कोई सवाल आ जाए तो फिर इस तरह के वेपन्स आप यूज़ कर सकते हैं या बहुत सारे ऐसे तरीके आप यूज़ कर सकते हैं। तो इसलिए देखिए संभावना यही है कि मुस्तबा खाम नहीं उस फतवे को बदलेंगे और यह दुनिया दुनिया इससे हिल जाएगी। ईरान के पास अगर न्यूक्लियर वेपन आ गया या घोषणा भी कर दी कि हम एक्वायर करने जा रहे हैं। इससे देखिए बहुत बड़ा बहुत बड़ी तब्दीली होगी और ये हो सकता है कि ट्रंप और नितन पीछे भी हट जाए। यह भी संभव जी गल्फ कंट्रीज में जिस तरह की तबाही है वह सब हम देख रहे हैं। अमेरिकन बेससेस को जो निशाना बनाया गया है वो सब भी हमने देखा और हमने देख देखा कि जो रडार से जो कि $1 बिलियन डॉलर की जिसकी कीमत है उसको भी ईरानियन मिसाइल्स ने पूरी तरीके से तबाह कर दिया है। क्या आपको लग रहा है कि आने वाले दिन में जो जीसीसी कंट्रीज हैं उनमें से खासतौर पर यूएई और सऊदी अरब क्या वो सीधे तौर पर इस वॉर में शामिल हो सकते हैं क्योंकि अमेरिका की तरफ से लगातार इसको लेकर प्रेशर बनाया जा रहा है। यह कहा जा रहा है कि इन कंट्रीज को अपने आप को बचाने के लिए इसमें सीधे तौर पर इस वॉर में उतरना चाहिए। हालांकि अभी तक किसी भी कंट्री से इन जीसीसी कंट्रीज से किसी भी तरह का कोई बयान सामने नहीं आया है और ऐसा नहीं लग रहा है कि हाल फिलहाल में वो कोई ऐसा फैसला लेने जा रहे हैं। लेकिन आप क्या कहते हैं? अगर ऐसा हुआ तो क्या हो सकता है फिर? देखिए गल्फ कंट्रीज अभी तक सामने नहीं आए हैं और मुझे नहीं लगता वो आएंगे। उनकी कुत नहीं। पूरे मिडिल ईस्ट में वेस्ट एशिया में पावर बैलेंस शिफ्ट हो रहा है। और हम जो खाड़ी के देश हैं उनसे अगर आगे बढ़े जैसे हम दो देशों का एग्जांपल लें अज़र बैजान और टर्की। टर्की में अभी तीन-चार दिन पहले एक खबर आई थी कि एक मिसाइल ल्च हुई है ईरान से जो टर्की ने इंटरसेप्ट कर ली। आज फिर खबर आई कि एक बैलेस्टिक मिसाइल टर्की ने आज फिर इंटरसेप्ट की। लेकिन दोनों ही समय आज खासतौर पर आई वास वेरी सरप्राइज कि टर्की का जो बयान था उसमें ईरान को उसने मेंशन मेंशन तक नहीं किया। अब ये हो सकता है कि एक फॉल्स फ्लैग हो इजराइल ने कर दिया हो तो ये और ये टर्की समझ रहा है ये भी हो सकता है। लेकिन दूसरी संभावना भी है कि टर्की कहीं ना कहीं ईरान को एनॉय नहीं करना चाहता इस समय। फिर अज़रान अज़र बैजान की जमीन लंबे समय से क्योंकि अज़रान इजराइल का बहुत ही क्लोज है और अज़रान इजराइल को तेल भी देता है। तो अज़र बैजान की जो जमीन है वो काफी समय से ईरान पे हमला करने के लिए खासतौर पे प्रोटेस्ट वगैरह के समय काफी इस्तेमाल हुई थी। पिछले प्रोटेस्ट में भी उसके पहले और खासतौर पे जो कुछ करे सेपरेटिस्ट है जो जो कुर्द सेपरेटिस्ट है वह भी उनप वो भी वहीं पर अज़र बैजान से ही घुसते हैं। तो अभी जो अज़र बैजान के एयरपोर्ट पर जो अटैक हुआ था दो दिन पहले और उसको ईरान ने कहा था कि हमने नहीं किया फिर हुआ था किया। अब उस समय अज़रान के प्रेसिडेंट ने उसका उसका विरोध किया था और कहा था कि ये बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसका जवाब दिया जाएगा। आज जब नए सुप्रीम लीडर चुने गए तो अज़रान के प्रेसिडेंट ने एक कांग्रेचुलेटरी मैसेज भेजा। अब आप सोचिए जिस देश ने आप कह रहे हो कि आप पर हमला किया उसको आप कांग्रे उनको आप कांग्रेचुलेट कर रहे हो और वो इजराइल और अमेरिका का एलआई है अज़रबजान अब तो ऐसा भी नहीं कि रश और चाइना के के ऑर्बिट में है तो ऐसी ये स्थिति दिखा रही है कि ईरान ने जो अपने मसल्स दिखाए हैं और वाकई पंचेस मारे हैं केवल दिखाए नहीं पंचेस जो मारे हैं उससे पूरी पूरे इलाके में आसपास के एक नई एक ईरान के प्रति नई रिस्पेक्ट पैदा हुई है। ईरान की जो पावर है उसका उसका एहसास लोगों ने किया है और ये लोग समझ गए हैं कि शायद इस एरिया की एक नई महाशक्ति सीन पे आ गई। जी अगला सवाल मेरा आपसे है कि लगातार यह कहा जा रहा है कि बूट्स ऑन ग्राउंड यानी कि ग्राउंड इन्वेशन की तैयारी अमेरिका कर रहा है और किसी भी वक्त वो बूट्स ऑन ग्राउंड कर सकता है। मेरा सवाल यह है और मैं अराची जो हैं उनको सुन रही थी जो विदेश मंत्री हैं उनको उन्होंने ये कहा एक टीवी चैनल पे जो काफी वायरल हुआ जिसमें उन्होंने कहा कि ऐसा अगर अमेरिका करता है तो वो उसके लिए सबसे ज्यादा खतरनाक कदम होगा और वो इसका खामियाजा भुगतेगा जैसे वो ईरान पर अब अटैक करके जिसका खामियाजा भुगत रहा है तो क्या इसकी आप कितनी पॉसिबिलिटीज आप देख रहे हैं और दूसरा नितिन याू ने ये कहा था कि सरप्राइज के लिए तैयार रहे ईरान और उन्होंने कहा था कि एक ऐसा सरप्राइज होगा जिसको ईरान जो है वो बहुत लंबे वक्त तक याद रखेगा यानी कि तबाही की वो किसी तरह की बात कर रहे हैं। क्या उनका इशारा न्यूक्लियर वेपन की तरफ है। क्या वो उसका इस्तेमाल कर सकते हैं? क्योंकि यह साफ तौर पर दिख रहा है कि वो किस तरह से फ्रस्ट्रेटेड हैं जो उनका मंसूबा है वो पूरी तरीके से नाकाम हो रहा है ईरान को लेकर। तो क्या इस फ्रस्ट्रेशन में वो इस तरह का कोई बड़ा और खतरनाक कदम उठा सकते हैं? देखिए बूट्स ऑन ग्राउंड रूल आउट नहीं किया जा सकता लेकिन वो किस तरह का होगा अभी शुरुआत में अभी अमेरिका अब बात कर रहा है स्पेशल ऑपरेशंस की कि जैसे इस पान में एनरिच्ड यूरेनियम है तो स्पेशल ऑपरेशन करके एनरिच्ड यूरेनियम उठा ले। अब यह सुनने में बहुत आसान लगता है। जैसे जैसे मजदूरों को उठाया था उस तरीके से तो वह तो एक इंसान था ना। यहां पर आप एनरिच यूरेनियम को उठाने की बात कर रहे हैं जो इतिहास में कभी नहीं हुआ। उसको आप उठा के सेफली ला पाएंगे कि नहीं। बहुत सारे इब्स एंड बट्स हैं। वो भी एक बहुत दूर की कौड़ी लगती है। लेकिन एक अमेरिका में ये बहस चल रही है कि स्पेशल ऑपरेशन कुछ किए जाए। फुल स्केल अटैक ना किया जाए। क्योंकि फुल स्केल अटैक में सबसे बड़ा खतरा यह है कि ईरान तैयार है। और ईरान उसको क्योंकि देखिए वॉर मेंटल भी होती है। पहले से अगर आप आपने कोई सरप्राइज एलिमेंट नहीं है। बूट्स ऑन द ग्राउंड ईरान उसके लिए तैयार है। कई बार कह चुका है। उसके फॉरेन मिनिस्टर कह चुके हैं। लारीजानी कह चुके हैं। कई लोग कि हम तैयार उसके पहले भी जब इमाम काम नहीं जिंदा थे वो भी कह चुके हैं। वो वो लोग वेनेजुला टाइप कुछ करना चाहते हैं। लेकिन यहां पर किसी लीडर को उठाने के बजाय क्योंकि वो समझ गए हैं कि लीडर को मारने से उठाने से कोई फायदा नहीं है। दूसरा आ जाएगा और यह हर हर पोजीशन की यहां तक कि आप हम हालांकि वहां डीएम एसएसपी नहीं होते लेकिन अगर आप सोच लीजिए तो अगर डीएम भी एसएसपी हम कहीं का मारा जाए हिंदुस्तान का तो चार डीएम तैयार हैं। आप ये सोचिए इस तरह की सिचुएशन ईरान में तो इसलिए वो लोग वो तो नहीं लेकिन अब ये न्यूक्लियर ये उठा लो। दूसरी एक एक चीज आ रही है कि जैसे जो कुछ जगह हैं ईरान की ऑयल प्रोडक्शन की जैसे एक खर् आइलैंड है जहां ईरान का ऑयल प्रोडक्शन बहुत ज्यादा होता है। और वो मिसाइल से प्रोटेक्टेड है। सब कुछ है। लेकिन यह भी एक व्यू आ रहा है कि खर् आइलैंड पर कब्जा कर लो। अगर पूरे ईरान पर नहीं कर पाओ। एक छोटा सा आइलैंड है उस पर कब्जा कर लो। लेकिन वो भी उतना आसान नहीं क्योंकि उस पे फिर ईरान रिसोंड करेगा और वहां तो वो उसकी जमीन है तो वो तो फिर पूरी तरह से घेर के मारेगा। तो यह जो पूरी बातें हैं जो सरप्राइज नेतों का यही और कुछ नहीं कि वो एक कुछ सोफिस्टिकेटेड वेपन्स के साथ वो करने की कोशिश करेंगे जो आज तक दुनिया में नहीं हुआ। लेकिन वो कितने सफल होंगे कैसे होंगे जो इतिहास है ईरान में इंटरवेंशन का ऑपरेशंस का वो बहुत ही बुरा रहा है। जमी कार्टर ने कोशिश की थी 1979 1980 में पूरी कितने अमेरिकन सोल्जर्स मारे गए थे और पूरी तरह से फेलियर रहा था। जी एक जो सवाल बार-बार पूछा जा रहा है वो है चाइना और रशिया को लेकर। जब लास्ट टाइम मैंने आपसे बात की थी जब बहुत क्लियर नहीं था। हालांकि आप तो तब भी यह कह रहे थे कि चाइना और रशिया जो है वह लगातार इंफॉर्मेशन शेयर कर रहे हैं और दोनों का ही रोल बिल्कुल अलग-अलग तरीके से है। जहां चाइना रियल टाइम इंफॉर्मेशन दे रहा है तो रशिया दूसरे तरीके से हेल्प कर रहा है। मेरा सवाल आपसे यह है कि अब अभी आप चाइना और रशिया के रोल को किस तरह से देख रहे हैं? क्योंकि अब जो उनकी लीडरशिप है वो खुले तौर पर सामने आकर मीडिया के सामने आकर खासतौर पर रशिया की मैं बात करूं तो ईरान के फुल सपोर्ट में आकर नजर आ रहे हैं। और एक और डेवलपमेंट ये है कि व्लादमीर पुतिन ने ट्रंप से एक घंटे तक लगभग फोन पर बात की है। तो इससे भी यह साफ तौर पर दिख रहा है कि ना सिर्फ ईरान के साथ जो उनका रोल है बल्कि इस वॉर को किस तरह से रुकवाया जाए या आगे क्या किया जाए उसमें भी रशिया एक इंपॉर्टेंट रोल निभाता हुआ नजर आ रहा है। देखिए क्या है रश और चाइना रश ने ईरान को बहुत ही क्रूशियल ह्यूमन इंटेलिजेंस दी जिसमें जिसकी वजह से ईरान उन सैनिकों को लोकेट कर पाया जो अपने बेसिस से भाग भाग के जब बेसिस पे मिसाइल्स पड़ रहे थे तो यूएस बेसिस से भाग भाग के वो होटल्स में गए जो होटल जैसे जो जैसे मरीना एक एक एड्रेस है वो होटल नहीं है रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स है मरीना दुबई का बहुत फेमस मैं तो वहां गया भी हूं। तो मरीना में जो अटैक हुआ है जहां पर अमेरिकन सोल्जर्स जिस फ्लोर पर ठहरे थे वहां मार दिया। लेकिन उसमें सबसे अद्भुत बात है कि उसमें कोई सिविलियन कैजुअल्टी नहीं हुई। यानी दुबई का कोई नागरिक उसमें नहीं मारा गया। तो यह दिखा रहा है इस तरह की इंटेलिजेंस रशियन इंटेलिजेंस होती है केजीबी की बहुत ही एक्यूरेट जो उन्होंने यूक्रेन में भी दिखाया है और दूसरी बात चाइना की जो इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस है चाइना की जो इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पेस्ट है जिस तरह से एक अभी दो दिन पहले एक गुप्त जो न्यूक्लियर फैसिलिटी इजराइल की है सिडत मीका वहां पर जो ईरान ने मार दी और वो जो मार हुई है उसने वाकई इजराइल को हिला दिया क्योंकि इजराइल ने उस साइट को प्रोटेक्ट किया हुआ था। वहां ऐसे बंकर्स है कि न्यूक्लियर एक्सप्लोजन भी हटा उनको भेज सकता है और वहां पर इजराइल की जरको मिसाइल्स रखी हुई है। जेरीको थ्री जो न्यूक्लियर टिप है यानी वो इजराइल का लास्ट डिफेंस है वहां तक ईरान पहुंच गया। तो ये भी इसमें भी चाइना की मदद थी। तो अब देखिए अब तो खुल के यूएस और इजराइल इस रूप में देख रहे हैं कि वो केवल ईरान से नहीं लड़ रहे हैं। वो रशिया और चाइना से भी लड़ रहे हैं। ये वो खुल के देख रहे हैं। जी हिजबुल्ला के रोल को आप इस पूरे वॉर सिचुएशन में आप कैसे देख रहे हैं? कैसे आंक रहे हैं? क्योंकि यह कहा गया कि जो टॉप लीडरशिप है हिजबुल्ला की उसको जिस तरह से एलिमिनेट किया गया उसके बाद हिजबुल्ला बहुत कमजोर हो गया। लेकिन जिस तरह से वो छुड़ा रहा है इजराइल के लेबनान में वो साफ तौर पर ये दिखा रहा है कि वो जरूर कमजोर हुआ लेकिन उसने किस तरह से बाउंस बैक किया है इस पूरे वॉर सिचुएशन में क्योंकि ईरान चाहे हिजबुल्ला की बात करें हूती की बात करें या फिर हम हमास की बात करें उसको वो अलाय के तौर पर देखता है प्रॉक्सी के तौर पर नहीं देखता है तो उन हिजबुल्ला के खासतौर पर हूती के जो रोल है उसको इस वॉर में आप किस तरह से देख रहे हैं और कितना खतरनाक नाक आप देख रहे हैं। जी देखिए इस वक्त हमास तो अभी देखिए शांत है क्योंकि अभी वह गाजा पीस अकॉर्ड चल रहा है। लेकिन कब तक कब तक शांत रहेगा यह कोई नहीं कह सकता। कभी भी गाज़ा फ्रंट एक्सप्ल कर सकता है। जो यमन की बात है हुतीज़ ने कह दिया है कि वह वार करेंगे सही टाइम पे और उनको ईरान ने ही कहा होगा रुकने के लिए क्योंकि जो यमन से मार आएगी यमन के पास भी बैलस्टिक मिसाइल्स है। तो यमन से जो मार आएगी वो तो इजराइल की कमर तोड़ देगी बेसिक। तो यह इसका यह एक इसलिए भी लोग वेट कर रहे हैं कि अगर कोई ग्राउंड ऑपरेशन लिमिटेड ही सही कोई ग्राउंड ऑपरेशन अगर हुआ तो उस समय ये यमन से सीधे मिसाइल इजराइल ये ईरान कहेगा कि मारो उसके बाद हिजबुल्लाह अब हिजबुल्ला ने जो जंग छेड़ दी इससे इजराइल के फाकते उड़ गए। इसलिए क्योंकि इजराइल अभी तक 27 नवंबर 2024 को संधि हुई थी और उसके बाद अभी तक सोचिए वो 2 मार्च को हजबुल्ला ने रिसोंड किया। इतने समय में हजारों लेबनी सिविलियंस मारे जा चुके हैं। पता नहीं तीन से 4000 वायलेशन हो चुके हैं। जो खुद वहां पर यूएओ की फर्सेस हैं लेबनन में। उन्होंने रिकॉर्ड किया है। और इन सबके बावजूद इधर कुछ दिनों में आठ दिनों में सेकंड मार्च से ले अभी तक जो मेरी खबर है कि कम से कम 24 से 27 इजराइली सोल्जर्स हताहत हैं जो कि उसमें मारे गए हैं और इजराइल केवल सिविलियन एरियाज में बम्बार्डमेंट करने के बजाय कुछ नहीं कर पा रहा है। जिन पांच पॉइंट्स पे इजराइल था उनसे वो 1 इंच भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। जब भी वो बढ़ने की कोशिश करता है हिजबुल्ला उसको मारता है। और ये कहां हो रहा है? ये साउथ ऑफ लेटिनी रिवर में हो रहा है। जो इजराइल कह रहा था हमने क्लियर कर दिया हजबुल्ला हिजबुल्ला के लोग यहां अब है ही नहीं। इस तरह का इस तरह के बड़े-बड़े क्लेम्स किए जा रहे थे। तो हिजबुल्ला भी एक अद्भुत लड़ाई लड़ रहा है। देखिए वहां पर इजराइल का जो कॉन्फिडेंस है लेबनन में वो इतना हो गया था। अभी आज 9 तारीख है। अभी मेरे ख्याल से पांच या छ मार्च को हेलीकॉप्टर से इन लोगों ने अपने ट्रूप्स उतारे साउथ लेबनन और खास इलाके में अंदर और उसमें इनको इतना कॉन्फिडेंस था कि यहां हिजबुल्ला नहीं है। लेकिन वहां पर चुपचाप उन लोगों हिजबुल्ला की फाइटर्स उनको मार करते रहे। जब वो काफी आगे बढ़ गए और एक जगह जहां एंबुश पॉइंट था। जब वह वहां पहुंच गए तो हिजबुल्ला ने हमला कर दिया। उसके बाद वहां पर कितने घायल हुए, कितने मरे गए अभी तक उसकी कोई उसके कोई फिगर्स नहीं आए। इसलिए देखिए हजबुल्लाह का तो इजराइल के साथ इतिहास रहा है। जब से हजबुल्ला 1982 में बना सन 2000 में लेबनन से उसने भगा दिया इजराइली को। 2006 की जंग में हराया। अभी भी जो जंग हुई थी जिसकी संधि हुई 204 में उसमें भी हसबुल्ला ने हरा ही दिया था। क्योंकि नसरल्लाह और सारे लोगों के मारे जाने के बाद इजराइल ने हमला किया था और इजराइल को अंदर नहीं घुसने दिया था। पीछे धकेल दिया था। तो इसलिए हिजबुल्लाह का तो देखिए बड़ा एक यूनिक एक परफॉर्मेंस है और हिजबुल्ला अपने रॉकेट्स की भी मार कर रहा है और ईरान के साथ कोऑर्डिनेट भी कर रहा है कि कुछ टारगेट्स पे इजराइल के खासतौर पे हिजबुल्ला मारे और वो बड़ी सफलता से मारा। जी वन वेरी लास्ट क्वेश्चन अमरेश जी। सवाल मेरा ये है आपसे कि जो फॉल्स फ्लैग की बात बार-बार की जा रही है। आपने टकर कालसन का आपने इंटरव्यू सुना ही होगा। इसके अलावा भी और भी बहुत सारे जो एक्सपर्ट्स हैं जो फॉरेन एक्सपर्ट हैं, इंटरनेशनल एक्सपर्ट हैं वो लगातार फॉल्स फ्लैग की बात कर रहे हैं। और इसमें बात की जा रही है मस्जिद अलसा की जो क़िबला-ए-अव्वल है उसकी बात की जा रही है। और ये कहा जा रहा है कि उस पर अटैक किया जा सकता है किसी भी वक्त। एक फॉल्स फ्लैग किया जा सकता है और यह भी कि जो थर्ड टेंपल की बात इजराइल की तरफ से की जा रही है और क्या ऐसा करके वो उसकी तरफ क्या एक उसका बढ़ता हुआ कदम होगा और क्या इसमें वो इस पूरे जो सिचुएशन है इस वोलेटाइल सिचुएशन में क्या ऐसा करने में वो कामयाब हो सकता है। आप इसको किस तरह से देखते हैं क्योंकि सबको यह पता है कि इजराइल कैसे फॉल्स फ्लैग करने में माहिर है और अभी भी हमने जो मिडिल ईस्ट में कई जगहों पर जिस तरह के अटैक हुए और फिर ईरान ने उसको कंडेम करते हुए कहा कि उसने नहीं किया है वो साफ तौर पर पता चला कि वो इजराइल की तरफ से किए गए हैं। आगे वो और किस तरह से इस तरह के फॉल्स फ्लैग जो है वो कर सकता है। देखिए इजराइल और अमेरिका कुछ भी कर सकते हैं। अब यहां पर अभी जो शुरू में वॉर के शुरू में जो ईरान की एक बच्चियों के स्कूल पर जो हमला हुआ था जिसमें 120 बच्चियां मारी गई थी और अभी उनका पूरा बहुत ही हृदयवर्धक घटना थी उसको अमेरिका ने कह दिया है कि वो ईरान ने मिसाइल से मारा अपने ही लोग अब आप सोचिए ये अमेरिका ने क्लेम किया है तो वो कर सकता है लेकिन वो उसकी बात सुनेगा कौन सवाल यहां पर ये है कि जो सुन्नी स्ट्रीट है या जो अरब स्ट्रीट है जो सड़क है वो वो इस समय ईरान की सुन रही। वहां पर जो पॉपुलर सपोर्ट है वह ईरान के साथ और वहां पर यह बात ऑलरेडी अच्छा क्योंकि हमास हमास वहां पर एक इस समय अरब स्ट्रीट का लीडर है एक एक तरह से तो हमास भी एक पूरा अपना एंटी इजराइल प्रो ईरान स्टैंड्स मेंटेन रख रहा है और वो भी बार-बार कह रहा है कि अलक्सा मस्जिद पे इस तरह से फॉल्स फ्लैग हो सकता है। तो इसलिए मुझे नहीं लगता कि अगर वह होगा भी तो सफल सफल होगी बल्कि वो बैकलस्ट उसका हो जाएगा उल्टा हो जाए क्योंकि अगर वो हो गया तो लोग सीधे समझेंगे इजराइल ने किया और फिर एक अलग तरह की जिहाद की कॉल आएगी। यह तो अब साफ तौर पर लग रहा है कि इजराइल इजराइल जो है वह पूरी तरीके से अमेरिका और इजराइल जो है वह फ्रस्ट्रेटेड नजर आ रहे हैं। यह भी साफ तौर पर लग रहा है कि उनकी उम्मीदों पर पूरी तरीके से पानी फिरता हुआ नजर आ रहा है और ईरान अभी भी कह रहा है कि किसी भी तरीके से ना तो हम कोई नेगोशिएशन की टेबल पर बैठेंगे और ना ही हम किसी तरीके से बातचीत को आगे बढ़ाएंगे क्योंकि उनका यह साफ तौर पर कहना है कि हमने जो पहले बातचीत की है उसके हमने नतीजे देख लिए हैं। तो यह तो अब साफ है कि अब जो भी आगे फैसला होगा वो फैसला अमेरिका और इजराइल नहीं करने जा रहे हैं बल्कि वो फैसला ईरान करेगा और ईरान साफ तौर पे ये कह रहा है कि ये दादागिरी इजराइल और अमेरिका की हमेशा के लिए खत्म होनी चाहिए जिस तरह की वो बार-बार धमकियां दे रहा है। तो इस बार जो टर्म्स एंड कंडीशंस हैं वो ईरान रखता हुआ नजर आ रहा है ना कि अमेरिका और इजराइल। देखना होगा आगे और किस तरह के इसमें डेवलपमेंट्स होते हैं। बहुत-बहुत शुक्रिया अमरेश जी आपका इस शो का हिस्सा बनने के लिए। नाउ नेटवर्क के साथ एक बार फिर से जुड़ने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। थैंक यू। शुक्रिया आप तमाम नाजरीन का भी, आप तमाम ऑडियंस का भी और मेरी आपसे एक रिक्वेस्ट है कि अगर आप हमारे जो शोज़ हैं उनको अगर पसंद कर रहे हैं तो आप चैनल को सब्सक्राइब करिए। ज्यादा से ज्यादा लोगों तक शेयर करिए और हमारे मेंबर भी बनिए।

Companion article

A Fatwa That Could Fall

When Ayatollah Mojtaba Khamenei was named Iran's Supreme Leader following his father's reported death in the opening strike of the Iran-Israel-US war, the succession carried a technical detail that analyst Amaresh Misra considers pivotal: the younger Khamenei is not personally bound by the fatwa his father, Ayatollah Ruhollah Khomeini, issued declaring nuclear weapons contrary to Islamic principle. Speaking to Nous Podcast host Bushra Khanam Fahad eleven days into the war, Misra argued that Islamic jurisprudence permits exceptions to such rulings where a state's existence is under threat — meaning a new Supreme Leader could, in principle, reverse the ban.

That possibility, Misra said, is what could most alter the war's course. Either the acquisition of a nuclear weapon or a declared intent to build one, he argued, would be enough to force a change in calculation from Washington and Tel Aviv, who he believes have so far miscalculated badly in confronting Iran.

Misra framed the succession itself as part of a wider generational turnover inside Iran's security establishment, with significant losses reported among the Islamic Revolutionary Guard Corps and the Basij militia as well as the political leadership — replaced, in his telling, by a younger cohort with direct combat experience from the Iran-Iraq war.

The Miscalculation

Misra's account rests on a central claim: that the strike which opened the war killed Ayatollah Ali Khamenei along with much of Iran's senior clerical and military leadership, and that Washington had bet the loss of that leadership would tip the country into civil war and allow the installation of a compliant government. This is Misra's own characterization of events, not an independently confirmed account, but it is the premise he returns to throughout the conversation to explain why, in his view, the war has instead gone badly for its instigators.

In the roughly eight days before the interview, he said, Iran's retaliation destroyed a significant part of the US air-defense network stationed in the region, forcing American forces to draw down their newer PAC-3 interceptor stock for the older PAC-2 — a shift, he argued, with consequences well beyond the Middle East, since it left European allies buying American Patriot systems for Ukraine unable to secure supply. He said Poland has since turned to South Korea for arms instead.

Iran's Hand at the Strait of Hormuz

Misra tied the military picture to an economic one. Gulf oil producers have cut output, he said, while Iran restricts tanker passage through the Strait of Hormuz to vessels from China and Russia — a squeeze he said pushed Brent crude from around $70 to roughly $110 a barrel within ten days. He noted India's roughly 40- to 45-day reserve cushion and its access to discounted Russian oil, but said European buyers facing a separate threat — Vladimir Putin's suggestion that Russia could halt gas exports to Europe well before a 2027 contract expires — have no comparable buffer.

What Israel Isn't Showing

Misra spent much of the interview describing what he called a deliberate Israeli effort to conceal the war's toll on its own population, saying foreign journalists have been barred from filming inside the country and that a communications blackout has kept most footage of the damage from reaching the outside world — a censorship regime he contrasted with Iran's decision to let its own strikes be broadcast. He put the officially acknowledged Israeli death toll at roughly 1,000 but cited unnamed Western independent analysts estimating actual military deaths at five to ten thousand, concealed, he claimed, through the informal recruitment of low-income soldiers — some, he said, from Africa — whose deaths go officially unrecorded.

He also referenced then-unconfirmed reports that Prime Minister Benjamin Netanyahu's brother had been killed in a strike on the family residence, and said senior ministers Itamar Ben-Gvir and Bezalel Smotrich had not been seen publicly in over a week. Misra described scenes of panic at Ben Gurion Airport, with long queues demanding evacuation and reports of private operators charging steep prices for seats on flights out of the country.

Weighing a Ground Invasion

Asked whether a US ground invasion was likely, Misra said it could not be ruled out but argued Washington was instead debating narrower special-operations options: a raid to seize Iran's enriched uranium stockpile directly, which he called an operation without real historical precedent, or an attempt to seize Kharg Island, the heavily defended center of Iran's oil exports, rather than move against the country as a whole. He was skeptical either would succeed, citing repeated statements from Iran's Foreign Ministry that the country is prepared for a ground assault, and pointing to the failed 1980 US hostage-rescue mission as a cautionary precedent.

Moscow and Beijing, Working Quietly

Misra credited Russia with supplying what he called crucial human intelligence that let Iranian forces track American soldiers who had relocated from bases under fire to hotels and residential buildings — including, he claimed, a strike on a Dubai Marina residential tower that killed no civilians despite hitting a floor where US soldiers were staying. He attributed a separate strike on Sdot Micha, an Israeli facility he described as housing nuclear-capable Jericho III missiles, to Chinese electronic-warfare support. Washington and Israel, he argued, now understand they are contending not just with Iran but, indirectly, with both Russia and China.

Hezbollah's Comeback, and the Houthi Threat Held in Reserve

On Lebanon, Misra said Hezbollah — weakened by the earlier killing of its senior leadership — has resumed strikes south of the Litani River since March 2, inflicting what he estimated at two dozen or more Israeli casualties and halting a helicopter-borne Israeli incursion that had expected the area to be empty. He described Iran treating Hezbollah, the Houthis and Hamas as allies rather than proxies, with Yemen's Houthis, in his account, holding fire at Iran's request while retaining the capacity to strike Israel directly if a ground operation begins. Hamas, he said, remains quiet under the existing Gaza truce, though he did not expect that calm to hold indefinitely.

A Warning About Al-Aqsa

Misra addressed warnings — including from commentator Tucker Carlson — that Israel might stage a false-flag attack on Al-Aqsa Mosque to widen the war further. He said he would not put such an operation past Israel, pointing to a pattern of unclaimed regional strikes he said were later traced back to it, but argued that Arab and Muslim public opinion already favors Iran to a degree that would make such an operation backfire rather than help Israel's position.

Who Is Setting the Terms

He was careful to note that verifying any of this from outside Iran is difficult: independent confirmation of casualty figures on both sides has been scarce, official Israeli and American statements have shifted repeatedly as events unfold, and claims from Iranian-aligned sources have not been independently corroborated.

Misra ended by arguing Tehran has ruled out negotiations altogether, on the reasoning that earlier talks yielded nothing, and that it is now Iran — not Washington or Tel Aviv — dictating the terms on which the war might end. His account, delivered eleven days into the conflict, rests on claims — chief among them the reported death of Iran's Supreme Leader — that remained unconfirmed outside Iranian and allied media at the time he made them.

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