2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
"How can a Muslim remain fully Muslim while also being fully Indian?"
तो व्हाट इज अ मुस्लिम सोसाइटी इन अ नेशन स्टेट कॉल्ड इंडिया? हाउ डज अ मुस्लिम सी हिमसेल्फ अ मुस्लिम एंड एज एन इंडियन एट द सेम टाइम? मुसलमान मुसलमान कैसे हो सकता है, और साथ ही साथ हिंदुस्तानी भी कैसे हो सकता है? या इसी तरह यूरोपियन भी कैसे हो सकता है, किसी और मुल्क का अमेरिकन कैसे हो सकता है? इस सवाल का कंप्रिहेंसिव जवाब और फिलॉसफी अभी तक ना मैंने डिस्कोर्स में देखी है, ना पॉलिटिकल सतह पे वो डेप्थ देखी है। गोश्त पे बातें होती हैं, वेज-नॉनवेज खाने पे बातें होती हैं, लिबास पे बातें होती हैं, लाउडस्पीकर पे बातें होती हैं — रिएक्टिव डिस्कोर्स यही है ना? मुस्लिम पॉलिटिक्स इस हद तक अभी इवॉल्व नहीं हुई है कि जो लूप होल्स हमने छोड़े हैं, उन्हें देख के राइट विंग हमारी एग्जिस्टेंस पे, हमारी कंपैटिबिलिटी पे सवाल करता है, और उसका जवाब मैंने नहीं देखा है। मैं समझता हूं कि इस तरह के मौके एक खास किस्म की खिदमत करने का मौका देते हैं — शायद मेरे लिए एक अपॉर्चुनिटी है कि हिंदुस्तान में ये पॉलिटिक्स कैसे की जाए, पहले मुस्लिम लेवल पे, क्योंकि मुसलमान इस वक्त क्राइसिस का शिकार है। एक मुस्लिम पॉलिटिकल फिलॉसफी कैसे शेप की जाए कुरान और सुन्नत की टीचिंग्स की बुनियाद पे, और हमारे असलाफ ने जो मिसालें छोड़ी हैं उनकी बुनियाद पे — ये साबित कैसे किया जाए कि हम कंपैटिबल हैं, और सिर्फ कंपैटिबल ही नहीं, बल्कि वी कैन बी अ कंट्रीब्यूटरी फोर्स टू द सोसाइटी। उम्मा का जो कॉन्सेप्ट है, उसे रीशेप करने की जरूरत है — हमने उस कॉन्सेप्ट को गलत तरीके से कैसे समझा है, जिन लूप होल्स को देख के हम पे उंगलियां उठाई जाती हैं, उन गैप्स को फिल करने और उसे रीइमेजिन करने की जरूरत है। हम क्राइसिस का शिकार खुद भी हैं, मुसलमान क्राइसिस का शिकार खुद भी है विदइन, इसीलिए हम कहीं ना कहीं इतने फ्रजाइल बन जाते हैं कि राइट विंग उसका फायदा उठाता है।
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
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