2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
"Muslims must identify who truly stands with them—and who only seeks their votes."
लेकिन अगर हम अकाली दल की बात करते हैं तो वह तो सिखों की पार्टी है, पंजाब में है, वो पार्टी तो क्या उसको हम रिलिजन बेस पार्टी बोलेंगे या नहीं कहेंगे? बिल्कुल रिलिजन बेस पार्टी है। और शिवसेना भी इस तरह से काफी समय तक अपने आप को — उसमें मुसलमान कोई होता नहीं था, वो अपने आप को सिर्फ हिंदुओं की पार्टी कहती थी, मेजॉरिटी की पार्टी कहती थी। लेकिन मैं ये आपको बताऊं कि इस देश में राजनीति किस तरह से हुई? 67 में तक पिछड़ों का कोई सा नहीं था पॉलिटिक्स में। तो उस वक्त के सोशलिस्ट लीडर राम मनोहर लोहिया ने एक नारा गढ़ा — सोशलिस्टों ने बांधी गांठ, पिछड़े पाएं सौ में साठ। अब सौ में साठ का जो मामला था उसमें पिछड़े भी थे, दलित भी थे, आदिवासी भी थे, महिलाएं भी थीं और मुसलमान भी थे। स्पष्ट रूप से लिखा गया उन सारी चीजों को, और उसके आधार पर नौ राज्यों में गैर-कांग्रेसी सरकारें 67 में बनीं और केंद्र में भी इंदिरा गांधी की पार्टी कांग्रेस चुनाव हारते-हारते बची, बहुत बेयर मेंबर मेजॉरिटी उनको मिल पाई। और उस वक्त से यही उभार था जिसकी वजह से मुलायम सिंह यादव, लालू प्रसाद, मायावती, रामविलास, शरद यादव, नीतीश कुमार, कर्पूरी ठाकुर — ये लोग पैदा हुए पॉलिटिकल लीडर, और इन्होंने अपने राज्यों में मुख्यमंत्री भी बने, और उनमें से एक चौधरी चरण सिंह छह महीने के लिए सही, प्रधानमंत्री भी बन गए। लेकिन धर्म के आधार पर राजनीति आज होना इस मुल्क में बिल्कुल असंभव है, और मैं मानता हूं कि वो होनी भी नहीं चाहिए, क्योंकि जब आप उसकी बात करते हैं तो एक तरह से बीजेपी को जस्टिफिकेशन देते हैं कि अगर धर्म के आधार पर ही राजनीति होनी है और पॉलिटिकल पार्टियां बननी हैं तो फिर बीजेपी का जस्टिफिकेशन जरूरी है, जो कि कॉन्स्टिट्यूशन के तहत लीगल नहीं है। ये सारी बातें और जो हेट स्पीच, हेट क्राइम, जिन बातों का जिक्र किया, वो करके तो आप नहीं कर सकते। तो इसलिए जरूरत इस बात की है कि मुसलमान को यह आइडेंटिफाई करना पड़ेगा कि उसका हमदर्द कौन है, उसका मसीहा कौन है, क्या वह लोग उसको वोट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं या उनका कोई कमिटमेंट भी है?
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
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