2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
"There is no superiority based on caste, race, language or region—the Qur'an commands the establishment of justice."
जब तक यूनिवर्सल स्यूशन ना हो इस्लाम के पास इट कैन नॉट क्लेम टू बी यूनिवर्सल। तो अगर यूनिवर्सल सशंस हम डिराइव नहीं कर पाते हैं हमारे बिहेवियर की वजह से मुसलमानों को देख के ये डिराइव नहीं कर पाता है कि इस्लाम में यूनिवर्सल स्यूशन है। वो हमारे कंडक्ट और अंडरस्टैंडिंग में प्रॉब्लम है। तो इंटरनल रिफॉर्म की बहुत ज्यादा जरूरत है। बिफोर दिस वी एंगेज विद राइट विंग। बिफोर दिस वी अप्रोच टू द सेुलर पॉलिटिक्स ऑफ इंडिया। हमें इंटरनल रिफॉर्म की जरूरत है। मुस्लिम्स को रीइमेजिनेशन रिकंस्ट्रक्शन की जरूरत है। रीइमेजिनेशन ऑफ द वर्ल्ड एंड वर्ल्ड रियलिटीज इसकी जरूरत है। रिकंस्ट्रक्शन ऑफ पॉलिटिकल फिलॉसफी ऑफ द मुस्लिम सोसाइटीज। इसकी जरूरत है। कुरान कैसे इंगेज करता है? क्या ये क्लैश करता है? और इट कंट्रीब्यूट्स इट कॉम्प्लीमेंट्स इस सबको रिक रिकंस्ट्रक्ट करने की जरूरत है। मेरी नजरों में जो आयात मैंने आपके सामने पेश की अगर इन चीजों को मद्देज़ रखा जाए गाइडिंग प्रिंसिपल्स ये है यू आर अ कंट्रीब्यूटर कमट इन एक्सीलेंस कंट्रीब्यूशन में कमट करो अल्लाह ताला वही चाहते हैं। तो ये कुछ आइडेंटिटीज इसके लिए कुरान ने डिस्कशन को छोड़ा नहीं है। हर किसी आइडेंटिटी को एकनॉलेज किया है कुरान ने क्योंकि खुद बनाया है ना कुरान ने। अच्छा एक और आयत ज़हन में आई इन शबा तारफ़ हो इनकर ये सारी आइडेंटिटी एकनॉलेज की है कुरान ने और उनकी वजह भी बताई है ये जो ये कास वगैरह है ये तुम्हारी आइडेंटिटी ये सिर्फ एड्रेस के लिए एड्रेस के लिए ताकि पता चले सिंपलीफाई हो जाए एड्रेस कोई किसी पे सुपीरियर नहीं है। सुपीरियर कौन है जो अल्लाह ताला अल्लाह ताला के लिए काम करे और अल्लाह ताला क्या काम चाहता है आपसे याना बिल किस इट ऑल एंड्स एट द सिंपल वर्ल्ड बेहतर आप में से कोई भी नहीं किसी कास रेस की बुनियाद लैंग्वेज की बुनियाद पे रीजन पे की बुनियाद पे कोई नहीं ये कुरान है बेहतरीन वही है जो अल्लाह ताला के लिए काम करे जो अल्लाह ताला के लिए उठे अल्लाह ताला क्या काम चाहते है कुरान ही कहता जस्टिस एस्टब्लिश करो।
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
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