Nous Shorts· 23 Jun 2026· 2:11

Rahul Gandhi & Future of Opposition Politics

"When politics is reduced to a majoritarian agenda, entire communities risk becoming politically irrelevant."

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राहुल गांधी को बहसियत एक इंडिविजुअल मैं यह कहूंगा कि वो जो भी कुछ कर रहे हैं कर रहे हैं। कर अच्छा कर रहे हैं। लेकिन उनसे यही उम्मीद की जाती है और ये उनका फर्ज भी बनता है ड्यूटी भी बनती है क्योंकि वो लीडर ऑफ़ अपोजिशन है और एक उस पार्टी के जो जिसका सवा सौ साल का 150 साल का इतिहास है कम्युनलिज्म और डेमोक्रेसी पर और सोशलिज्म और सेकुलरिज्म पर स्टैंड लेने का वो उस पार्टी की तर्जुमानी कर रहे हैं। जहां तक दूसरा आपका सवाल था कि मुसलमान को क्या करना चाहिए? क्या था? जरा आप दोबारा रिपीट जी उत्तर प्रदेश आने वाले उत्तर प्रदेश के इलेक्शन में क्या सुरते हाल रहेगी? जी तो वो देखिए मुसलमान के वोट से सरकारें बनती और बिगड़ती तो है लेकिन खालिस उसी के वोट पे हो जाएगा ऐसा कुछ नहीं है। यूपी में 20सदी वोट है। बिहार में तकरीबन इतना ही है। बंगाल में 30सदी आसाम में 35सदी लेकिन उसका वोट तब रेलेवेंट होता है जब उसके लिए दूसरी सियासी जमातें जो हैं जिनके साथ दूसरा वोट बैंक भी है वह मिलता है। तब मुसलमान का वोट रेलेवेंट होता। यह हमने देखा है जब चाहे एसपी की सरकार हो, बीएसपी की सरकार हो, जनता दल की सरकार हो, आरएलडी की सरकार, आरजेडी की सरकार हो तो उस वक्त में वो हो जाता है। लेकिन जहां जिस मुद्दे पर आपने बातचीत शुरू की थी कि जब आपका एजेंडा ही इस पूरी कम्युनिटी को 20 फीसदी से ज्यादा तबके को आइसोलेट कर देना हो, इरिलेवेंट बनाना हो और आपको एक मेजॉरिटेरियन कम्युनल एजेंडा चला करके चुनाव जीतना हो तो फिर यही सूरत बन के आती है जो फिलहाल बनी हुई है। लेकिन मुझे लगता है कि अगर जिस तरह से पिछले लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में 43 से ज्यादा सीटों पर सेुलर उम्मीदवार जीते और उन्होंने सोशल जस्टिस के नाम पर कम्युनल फर्सेस को हराया। अगर उस तरह का कुछ माहौल बनता है तो मुश्किल नहीं है कि यूपी में भी वो बीजेपी को हराया जा सके।

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