Nous Shorts· 27 Jun 2026· 2:18

RSS vs Constitutional Idea of India

"A promise made to every Indian citizen must be honoured—regardless of religion, caste, language, or region."

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यह 70 साल पहले ही बताया गया होता तो शायद हकीकत कुछ और होती। दलितों की सिटीजनशिप के हवाले से, मुस्लिम्स की, ड्रेविडियंस की, बंगाली की, आसामीज़ की, नॉर्थ ईस्टर्न की, कश्मीरियों की हकीकत शायद कुछ और होती क्योंकि डिसीजंस उसी हिसाब से लिए जाते हैं। बट जो डिसीजंस कलेक्टिव डिसीजन लिया गया ये सिर्फ सावरकर और गोल वर्कर ने डिसीजन नहीं लिया। सिर्फ आरएसएस ने डिसीजन नहीं लिया। सिर्फ एक पर्टिकुलर रिलीजन के पर्टिकुलर क्लास ने कास्ट ने डिसीजन नहीं लिया। ये हजारों आइडेंटिटीज ने कलेक्टिव डिसीजन लिया। सैकड़ों फेथ्स ने कलेक्टिव डिसीजन लिया। और उस वक्त एक कॉन्ट्रैक्ट किया गया सबका आपस में। तब वादे किए गए। मैं खुद को भी उसी मीजान पे उसी स्केल पे ठहराऊंगा जो कुरान मुझसे कहता है कि अगर वादा किया है उस पर अमल करना है उफ बिलकूद मेरे लिए भी वही सही है और दूसरे पे भी वही अप्लाई होता है तो मेरा सवाल ही यही है अगर इस सिटीजन इंडियन सिटीजन से वादा किया गया 70 साल पहले चाहे कोई भी हो रीजनली कल्चरली एथिकली रेशियली लिंग्विस्टिकली अह और रिलीजियसली वो कोई भी आइडेंटिटी उनके साथ जो वादा किया गया है वो कॉन्ट्रैक्ट किया गया है उस पे अमल होना चाहिए वही कॉन्ट्रैक्ट वो वादा इंप्लीमेंट होना चाहिए उसके पाबंद हर कोई होने चाहिए हिंदू भी उतना है और मुसलमान भी उतना है राइट विंग आईडियोलॉजी एक्सट्रीमिस्ट आइडियोलॉजी जो है आरएसएस की आरएसएस की हिंदुत्व आईडियोलॉजी सनातन नहीं हिंदू हिंदूज़्म नहीं ये उस कॉन्ट्रैक्ट को तोड़ रहे हैं ये सुप्रीमिज्म को ला रहे हैं और ये दे आर इंस्पायर्ड दे आर इट्स नॉट अ सीक्रेट वो नाजी आईडियोलॉजी से इंस्पायर्ड है। दे ओन दैट इंस्पिरेशन। वो चाहते हैं कि पर्टिकुलर एक क्लास, एक कास्ट, एक पर्टिकुलर रिलिजन का एक उनका एक पर्टिकुलर रोल हो और दूसरों के कर्टेड डाइल्यूटेड राइट्स हो रोल हो सोसाइटी में और अथॉरिटी एक पर्टिकुलर कास्ट एंड रिलजन के पास रहे। ये ये खिलाफवर्जी है ना कॉन्स्टिट्यूशन की उस कॉन्ट्रैक्ट की।

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