Senior Journalist Raju Parulekar Exposes the Politics Behind the Anna Movement
In this sharp and wide-ranging conversation, journalist and political commentator Raju Parulekar speaks with Senior Bushra Khanum on the changing nature of Indian politics, the legacy of the 2011 anti-corruption movement, and the rise of new political formations claiming to represent “change”.
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अन्ना को हम पहचानते बहुत पहले से थे। अन्ना को हम पहचानते बहुत पहले से थे। अन्ना संगी वंगी कुछ नहीं है। अन्ना अन्ना संगी वंगी कुछ नहीं है। अन्ना अन्ना संगी वंगी कुछ नहीं है। अन्ना अपॉर्चुनिस्ट थे। अपॉर्चुनिस्ट थे। अपॉर्चुनिस्ट थे। क्या जब आप अन्ना के साथ थे और ये जब क्या जब आप अन्ना के साथ थे और ये जब क्या जब आप अन्ना के साथ थे और ये जब अन्ना मूवमेंट चल रहा था। क्या आपको तभी अन्ना मूवमेंट चल रहा था। क्या आपको तभी अन्ना मूवमेंट चल रहा था। क्या आपको तभी पता था ये आरएसएस बैक्ड है? आम आदमी पता था ये आरएसएस बैक्ड है? आम आदमी पता था ये आरएसएस बैक्ड है? आम आदमी पार्टी एक ऐसी न्यूसेंस वैल्यू लेकर पैदा पार्टी एक ऐसी न्यूसेंस वैल्यू लेकर पैदा पार्टी एक ऐसी न्यूसेंस वैल्यू लेकर पैदा हुई है कि जो जिसमें डीएनए बेसिकली आरएसएस हुई है कि जो जिसमें डीएनए बेसिकली आरएसएस हुई है कि जो जिसमें डीएनए बेसिकली आरएसएस का है। अब कॉकरोच जनता पार्टी जो डिजिटल आ का है। अब कॉकरोच जनता पार्टी जो डिजिटल आ का है। अब कॉकरोच जनता पार्टी जो डिजिटल आ गई है वो आम आदमी पार्टी का ही स्पेस गई है वो आम आदमी पार्टी का ही स्पेस गई है वो आम आदमी पार्टी का ही स्पेस ऑक्यूपेशन है। ऑक्यूपेशन है। ऑक्यूपेशन है। तो ये क्या आप कह रहे हैं आम आदमी पार्टी तो ये क्या आप कह रहे हैं आम आदमी पार्टी तो ये क्या आप कह रहे हैं आम आदमी पार्टी की बी टीम है। की बी टीम है। की बी टीम है। क्योंकि उस वक्त का आप चरम पे जो आंदोलन
क्योंकि उस वक्त का आप चरम पे जो आंदोलन क्योंकि उस वक्त का आप चरम पे जो आंदोलन था आप याद कीजिए। अन्ना अगर यहां पर शहादत था आप याद कीजिए। अन्ना अगर यहां पर शहादत था आप याद कीजिए। अन्ना अगर यहां पर शहादत दे देते तो प्रधानमंत्री तो केजरीवाल ही दे देते तो प्रधानमंत्री तो केजरीवाल ही दे देते तो प्रधानमंत्री तो केजरीवाल ही बनने थे। ऐसा केजरीवाल का गणित था। बनने थे। ऐसा केजरीवाल का गणित था। बनने थे। ऐसा केजरीवाल का गणित था। अब वो फेल हो गया। लेकिन ये बताइए कि यह अब वो फेल हो गया। लेकिन ये बताइए कि यह अब वो फेल हो गया। लेकिन ये बताइए कि यह स्पेस विपक्ष क्यों नहीं ऑक्यूुपाई कर पा स्पेस विपक्ष क्यों नहीं ऑक्यूुपाई कर पा स्पेस विपक्ष क्यों नहीं ऑक्यूुपाई कर पा रहा? रहा? रहा? विपक्ष को बुद्धि कहां है? विपक्ष इतना विपक्ष को बुद्धि कहां है? विपक्ष इतना विपक्ष को बुद्धि कहां है? विपक्ष इतना लेकिन राहुल गांधी तो युवाओं से लेकिन राहुल गांधी तो युवाओं से लेकिन राहुल गांधी तो युवाओं से [गला साफ़ करने की आवाज़] सीधे बात कर [गला साफ़ करने की आवाज़] सीधे बात कर [गला साफ़ करने की आवाज़] सीधे बात कर देखिए राहुल गांधी अकेले क्या ही कर सकते देखिए राहुल गांधी अकेले क्या ही कर सकते देखिए राहुल गांधी अकेले क्या ही कर सकते हैं उनकी हैं उनकी हैं उनकी लेकिन इतना तो कर सकते हैं इतनी ये स्पेस लेकिन इतना तो कर सकते हैं इतनी ये स्पेस लेकिन इतना तो कर सकते हैं इतनी ये स्पेस तो ऑक्यूुपाई कर सकते हैं। तो ऑक्यूुपाई कर सकते हैं। तो ऑक्यूुपाई कर सकते हैं। देखिए इस देश में अच्छे-अच्छे लोग जो देखिए इस देश में अच्छे-अच्छे लोग जो देखिए इस देश में अच्छे-अच्छे लोग जो डेमोक्रेसी पे विश्वास रखते हैं सो कॉल्ड
डेमोक्रेसी पे विश्वास रखते हैं सो कॉल्ड डेमोक्रेसी पे विश्वास रखते हैं सो कॉल्ड उनको भी ना मुसलमानों के प्रति इतना प्यार उनको भी ना मुसलमानों के प्रति इतना प्यार उनको भी ना मुसलमानों के प्रति इतना प्यार नहीं है। आप उनको इक्वल सिटीजन हो वो भी नहीं है। आप उनको इक्वल सिटीजन हो वो भी नहीं है। आप उनको इक्वल सिटीजन हो वो भी नहीं मानते। तो क्या अभी लोग यह रियलाइज नहीं मानते। तो क्या अभी लोग यह रियलाइज नहीं मानते। तो क्या अभी लोग यह रियलाइज कर रहे हैं कि यह [संगीत] एक आईडियोलॉजिकल कर रहे हैं कि यह [संगीत] एक आईडियोलॉजिकल कर रहे हैं कि यह [संगीत] एक आईडियोलॉजिकल पिटिकल वॉर है? इट्स दिस इज नॉट द सिंपल पिटिकल वॉर है? इट्स दिस इज नॉट द सिंपल पिटिकल वॉर है? इट्स दिस इज नॉट द सिंपल थिंग। नाउ में हम डाटा और ग्राउंड थिंग। नाउ में हम डाटा और ग्राउंड थिंग। नाउ में हम डाटा और ग्राउंड रियलिटीज के जरिए वो स्टोरीज आपके सामने रियलिटीज के जरिए वो स्टोरीज आपके सामने रियलिटीज के जरिए वो स्टोरीज आपके सामने लाते हैं जिन्हें अक्सर दबा दिया जाता है लाते हैं जिन्हें अक्सर दबा दिया जाता है लाते हैं जिन्हें अक्सर दबा दिया जाता है या गलत तरीके से पेश किया जाता है। हम एक या गलत तरीके से पेश किया जाता है। हम एक या गलत तरीके से पेश किया जाता है। हम एक इंडिपेंडेंट प्लेटफार्म है यानी हमारे इंडिपेंडेंट प्लेटफार्म है यानी हमारे इंडिपेंडेंट प्लेटफार्म है यानी हमारे पीछे किसी तरह की कोई कॉर्पोरेट बैकिंग पीछे किसी तरह की कोई कॉर्पोरेट बैकिंग पीछे किसी तरह की कोई कॉर्पोरेट बैकिंग नहीं है। हमारी असली ताकत आप हैं। अगर आप
नहीं है। हमारी असली ताकत आप हैं। अगर आप नहीं है। हमारी असली ताकत आप हैं। अगर आप चाहते हैं कि ऐसी सच्ची और जरूरी स्टोरीज चाहते हैं कि ऐसी सच्ची और जरूरी स्टोरीज चाहते हैं कि ऐसी सच्ची और जरूरी स्टोरीज लगातार आपके सामने आती रहे तो हमारी लगातार आपके सामने आती रहे तो हमारी लगातार आपके सामने आती रहे तो हमारी वीडियोस को आप ज्यादा से ज्यादा शेयर वीडियोस को आप ज्यादा से ज्यादा शेयर वीडियोस को आप ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। चैनल को सब्सक्राइब करें और अगर करें। चैनल को सब्सक्राइब करें और अगर करें। चैनल को सब्सक्राइब करें और अगर आपके लिए मुमकिन हो तो स्क्रीन पर दिए गए आपके लिए मुमकिन हो तो स्क्रीन पर दिए गए आपके लिए मुमकिन हो तो स्क्रीन पर दिए गए क्यूआर कोड के जरिए आप हमें सपोर्ट करें क्यूआर कोड के जरिए आप हमें सपोर्ट करें क्यूआर कोड के जरिए आप हमें सपोर्ट करें ताकि हम यूं ही आपके सामने स्टोरीज लाते ताकि हम यूं ही आपके सामने स्टोरीज लाते ताकि हम यूं ही आपके सामने स्टोरीज लाते रहें और यूं ही काम करते रहें।
आदाब न्यूज़ नेटवर्क देख रहे हैं आप। मैं आदाब न्यूज़ नेटवर्क देख रहे हैं आप। मैं हूं आपके साथ बुशरा खानम फहाद और आज हमारे हूं आपके साथ बुशरा खानम फहाद और आज हमारे हूं आपके साथ बुशरा खानम फहाद और आज हमारे पॉडकास्ट के गेस्ट बेहद अहम हैं। आपको पॉडकास्ट के गेस्ट बेहद अहम हैं। आपको पॉडकास्ट के गेस्ट बेहद अहम हैं। आपको अन्ना आंदोलन तो याद होगा। वही अन्ना अन्ना आंदोलन तो याद होगा। वही अन्ना अन्ना आंदोलन तो याद होगा। वही अन्ना आंदोलन जिसने हमेशा के लिए या कहें कि आंदोलन जिसने हमेशा के लिए या कहें कि आंदोलन जिसने हमेशा के लिए या कहें कि बहुत लंबे वक्त के लिए देश की सियासत को बहुत लंबे वक्त के लिए देश की सियासत को बहुत लंबे वक्त के लिए देश की सियासत को पूरी तरीके से बदल दिया। उसके बाद आम आदमी पूरी तरीके से बदल दिया। उसके बाद आम आदमी पूरी तरीके से बदल दिया। उसके बाद आम आदमी पार्टी बनी। अरविंद केजरीवाल आए। कांग्रेस पार्टी बनी। अरविंद केजरीवाल आए। कांग्रेस पार्टी बनी। अरविंद केजरीवाल आए। कांग्रेस पार्टी सत्ता से गई। भारतीय जनता पार्टी पार्टी सत्ता से गई। भारतीय जनता पार्टी पार्टी सत्ता से गई। भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई और अब हम कह सकते हैं कि सत्ता में आई और अब हम कह सकते हैं कि सत्ता में आई और अब हम कह सकते हैं कि पिछले 12 साल से वह सत्ता में हैं और अब पिछले 12 साल से वह सत्ता में हैं और अब पिछले 12 साल से वह सत्ता में हैं और अब पता नहीं कि वह सत्ता से कब बेदखल होंगे पता नहीं कि वह सत्ता से कब बेदखल होंगे पता नहीं कि वह सत्ता से कब बेदखल होंगे और उसमें यह कहा जाता है कि एक बड़ा
और उसमें यह कहा जाता है कि एक बड़ा और उसमें यह कहा जाता है कि एक बड़ा हिस्सा या कहें कि सबसे महत्वपूर्ण रोल हिस्सा या कहें कि सबसे महत्वपूर्ण रोल हिस्सा या कहें कि सबसे महत्वपूर्ण रोल अगर किसी ने निभाया तो वो उस आंदोलन ने अगर किसी ने निभाया तो वो उस आंदोलन ने अगर किसी ने निभाया तो वो उस आंदोलन ने निभाया जिसको उस वक्त के मीडिया ने किस निभाया जिसको उस वक्त के मीडिया ने किस निभाया जिसको उस वक्त के मीडिया ने किस तरह से दिन रात वहां पर रहकर कवर किया। अब तरह से दिन रात वहां पर रहकर कवर किया। अब तरह से दिन रात वहां पर रहकर कवर किया। अब उसी से जुड़े हुए जो लोग हैं वो बाहर आकर उसी से जुड़े हुए जो लोग हैं वो बाहर आकर उसी से जुड़े हुए जो लोग हैं वो बाहर आकर कह रहे हैं जो अब उस शायद आईडियोलॉजी में कह रहे हैं जो अब उस शायद आईडियोलॉजी में कह रहे हैं जो अब उस शायद आईडियोलॉजी में यकीन नहीं रखते या उनके साथ नहीं है। उनका यकीन नहीं रखते या उनके साथ नहीं है। उनका यकीन नहीं रखते या उनके साथ नहीं है। उनका कहना यह है कि दरअसल यह आरएसएस बैग्ड कहना यह है कि दरअसल यह आरएसएस बैग्ड कहना यह है कि दरअसल यह आरएसएस बैग्ड आंदोलन था। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि तब आंदोलन था। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि तब आंदोलन था। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि तब आप उसके साथ थे। अब आप यह कह रहे हैं कुछ
आप उसके साथ थे। अब आप यह कह रहे हैं कुछ आप उसके साथ थे। अब आप यह कह रहे हैं कुछ लोगों ने माफ़ी भी मांगी है जिसमें प्रशांत लोगों ने माफ़ी भी मांगी है जिसमें प्रशांत लोगों ने माफ़ी भी मांगी है जिसमें प्रशांत भूषण भी हैं। लेकिन तब आपको कांग्रेस भूषण भी हैं। लेकिन तब आपको कांग्रेस भूषण भी हैं। लेकिन तब आपको कांग्रेस पार्टी क्या लग रही थी और अब जब आपकी वजह पार्टी क्या लग रही थी और अब जब आपकी वजह पार्टी क्या लग रही थी और अब जब आपकी वजह से एक तरह से हम कह सकते हैं कि बीजेपी से एक तरह से हम कह सकते हैं कि बीजेपी से एक तरह से हम कह सकते हैं कि बीजेपी सत्ता में आई है और वो क्या कर रही है तब सत्ता में आई है और वो क्या कर रही है तब सत्ता में आई है और वो क्या कर रही है तब आप इस तरह की बातें करते हुए नजर आ रहे आप इस तरह की बातें करते हुए नजर आ रहे आप इस तरह की बातें करते हुए नजर आ रहे हैं। मेरे साथ स्टूडियो में आज बेहद खास हैं। मेरे साथ स्टूडियो में आज बेहद खास हैं। मेरे साथ स्टूडियो में आज बेहद खास मेहमान हैं। अ वो अन्ना के साथ रहे। अन्ना मेहमान हैं। अ वो अन्ना के साथ रहे। अन्ना मेहमान हैं। अ वो अन्ना के साथ रहे। अन्ना आंदोलन शायद मैं कहना गलत होगा लेकिन आंदोलन शायद मैं कहना गलत होगा लेकिन आंदोलन शायद मैं कहना गलत होगा लेकिन अन्ना के जरूर वो साथ रहे। कुछ मीडिया अन्ना के जरूर वो साथ रहे। कुछ मीडिया अन्ना के जरूर वो साथ रहे। कुछ मीडिया हाउसेस ने उन्हें अन्ना के ब्लॉगर के तौर हाउसेस ने उन्हें अन्ना के ब्लॉगर के तौर हाउसेस ने उन्हें अन्ना के ब्लॉगर के तौर पर भी दिखाया। उनकी फोटोस हैं जो हम देखते
पर भी दिखाया। उनकी फोटोस हैं जो हम देखते पर भी दिखाया। उनकी फोटोस हैं जो हम देखते हैं जहां वो अन्ना के साथ हैं। उनकी गोद हैं जहां वो अन्ना के साथ हैं। उनकी गोद हैं जहां वो अन्ना के साथ हैं। उनकी गोद में एक तरह से उन्होंने सर रखा हुआ है। वो में एक तरह से उन्होंने सर रखा हुआ है। वो में एक तरह से उन्होंने सर रखा हुआ है। वो काफी वायरल हैं। लेकिन अभी के जो हमारे काफी वायरल हैं। लेकिन अभी के जो हमारे काफी वायरल हैं। लेकिन अभी के जो हमारे गेस्ट हैं और जो उस वक्त के थे क्या उनका गेस्ट हैं और जो उस वक्त के थे क्या उनका गेस्ट हैं और जो उस वक्त के थे क्या उनका कोई हृदय परिवर्तन हुआ है या फिर उनको उस कोई हृदय परिवर्तन हुआ है या फिर उनको उस कोई हृदय परिवर्तन हुआ है या फिर उनको उस वक्त उसके बारे में कि वो आरएसएस से जुड़ा वक्त उसके बारे में कि वो आरएसएस से जुड़ा वक्त उसके बारे में कि वो आरएसएस से जुड़ा हुआ है या आरएसएस का मोहरा है अन्ना भी हुआ है या आरएसएस का मोहरा है अन्ना भी हुआ है या आरएसएस का मोहरा है अन्ना भी उनको पता नहीं था। मैं बात कर रही हूं उनको पता नहीं था। मैं बात कर रही हूं उनको पता नहीं था। मैं बात कर रही हूं राजीव पारुलेकर की सीनियर जर्नलिस्ट जिनको राजीव पारुलेकर की सीनियर जर्नलिस्ट जिनको राजीव पारुलेकर की सीनियर जर्नलिस्ट जिनको आप बहुत बेबाकी से अपनी बातों को रखते हुए आप बहुत बेबाकी से अपनी बातों को रखते हुए आप बहुत बेबाकी से अपनी बातों को रखते हुए आप देखते हैं। आप देखते हैं कि सत्ता के आप देखते हैं। आप देखते हैं कि सत्ता के आप देखते हैं। आप देखते हैं कि सत्ता के खिलाफ वो जिस तरह का स्टैंड लेते हैं बहुत
खिलाफ वो जिस तरह का स्टैंड लेते हैं बहुत खिलाफ वो जिस तरह का स्टैंड लेते हैं बहुत कम लोग हैं जो इस तरह का स्टैंड लेते हैं कम लोग हैं जो इस तरह का स्टैंड लेते हैं कम लोग हैं जो इस तरह का स्टैंड लेते हैं और उसकी वो भारी कीमत भी चुका चुके हैं और और उसकी वो भारी कीमत भी चुका चुके हैं और और उसकी वो भारी कीमत भी चुका चुके हैं और चुका भी रहे हैं। राजू जी वेलकम टू नाउ चुका भी रहे हैं। राजू जी वेलकम टू नाउ चुका भी रहे हैं। राजू जी वेलकम टू नाउ नेटवर्क। नेटवर्क। नेटवर्क। थैंक हो सकता है कुछ चीजें आपको मेरे थैंक हो सकता है कुछ चीजें आपको मेरे थैंक हो सकता है कुछ चीजें आपको मेरे ओपनिंग की ना पसंद आई हो जो मैंने जो ओपनिंग की ना पसंद आई हो जो मैंने जो ओपनिंग की ना पसंद आई हो जो मैंने जो मैंने कही है जी मैंने कही है जी मैंने कही है जी लेकिन मैं आपसे ये पूछना चाहती हूं कि आप लेकिन मैं आपसे ये पूछना चाहती हूं कि आप लेकिन मैं आपसे ये पूछना चाहती हूं कि आप क्या अन्ना आंदोलन का हिस्सा थे या फिर क्या अन्ना आंदोलन का हिस्सा थे या फिर क्या अन्ना आंदोलन का हिस्सा थे या फिर सिर्फ आप अन्ना तक लिमिटेड थे और उस वक्त सिर्फ आप अन्ना तक लिमिटेड थे और उस वक्त सिर्फ आप अन्ना तक लिमिटेड थे और उस वक्त को आपने कैसे देखा और क्या वो अन्ना को आपने कैसे देखा और क्या वो अन्ना को आपने कैसे देखा और क्या वो अन्ना मूवमेंट आज जो भारत की की दुर्दशा है और
मूवमेंट आज जो भारत की की दुर्दशा है और मूवमेंट आज जो भारत की की दुर्दशा है और जिस तरह से सत्ता पर काबिज होकर बीजेपी है जिस तरह से सत्ता पर काबिज होकर बीजेपी है जिस तरह से सत्ता पर काबिज होकर बीजेपी है वो तमाम इंस्टीटशंस पे जिस तरह से उसने वो तमाम इंस्टीटशंस पे जिस तरह से उसने वो तमाम इंस्टीटशंस पे जिस तरह से उसने कब्जा कर रखा है क्या उस आंदोलन को आप कब्जा कर रखा है क्या उस आंदोलन को आप कब्जा कर रखा है क्या उस आंदोलन को आप उसके लिए जिम्मेदार मानते हैं? 100% उसके लिए जिम्मेदार मानते हैं? 100% उसके लिए जिम्मेदार मानते हैं? 100% देखिए आरएसएस कल्ट का एक महत्वपूर्ण देखिए आरएसएस कल्ट का एक महत्वपूर्ण देखिए आरएसएस कल्ट का एक महत्वपूर्ण स्वभाव जो रहा है उसमें यह है कि ये लोग स्वभाव जो रहा है उसमें यह है कि ये लोग स्वभाव जो रहा है उसमें यह है कि ये लोग स्पेस ऑक्यूुपाई करने में मास्टर है। आपको स्पेस ऑक्यूुपाई करने में मास्टर है। आपको स्पेस ऑक्यूुपाई करने में मास्टर है। आपको पता भी नहीं चलता कि ये स्पेस आरएसएस ने पता भी नहीं चलता कि ये स्पेस आरएसएस ने पता भी नहीं चलता कि ये स्पेस आरएसएस ने ऑक्यूुपाई की क्योंकि आरएसएस का कोई चेहरा ऑक्यूुपाई की क्योंकि आरएसएस का कोई चेहरा ऑक्यूुपाई की क्योंकि आरएसएस का कोई चेहरा नहीं है। वो किसी को भी चेहरा बना सकते
नहीं है। वो किसी को भी चेहरा बना सकते नहीं है। वो किसी को भी चेहरा बना सकते हैं। ये पहले हिंदू माइथोलॉजी में राक्षस हैं। ये पहले हिंदू माइथोलॉजी में राक्षस हैं। ये पहले हिंदू माइथोलॉजी में राक्षस होते थे ना जो किसी का भी रूप धारण करके होते थे ना जो किसी का भी रूप धारण करके होते थे ना जो किसी का भी रूप धारण करके आते थे। यानी भगवान का भी रूप धारण करके आते थे। यानी भगवान का भी रूप धारण करके आते थे। यानी भगवान का भी रूप धारण करके आते हैं। सन्यासी भी बन के भी आते हैं। आते हैं। सन्यासी भी बन के भी आते हैं। आते हैं। सन्यासी भी बन के भी आते हैं। वैसे आरएसएस है। तो अन्ना आंदोलन का चेहरा वैसे आरएसएस है। तो अन्ना आंदोलन का चेहरा वैसे आरएसएस है। तो अन्ना आंदोलन का चेहरा जो था वो अन्ना भले ही हो लेकिन वो जो था वो अन्ना भले ही हो लेकिन वो जो था वो अन्ना भले ही हो लेकिन वो बेसिकली उसका नेतृत्व केजरीवाल कर रहे थे बेसिकली उसका नेतृत्व केजरीवाल कर रहे थे बेसिकली उसका नेतृत्व केजरीवाल कर रहे थे और ही वाज़ नॉट अनअवेयर दैट ही इज़ आरएसएस और ही वाज़ नॉट अनअवेयर दैट ही इज़ आरएसएस और ही वाज़ नॉट अनअवेयर दैट ही इज़ आरएसएस फेस। क्योंकि केजरीवाल जी की शुरुआत ही फेस। क्योंकि केजरीवाल जी की शुरुआत ही फेस। क्योंकि केजरीवाल जी की शुरुआत ही लाइफ की आंदोलन जिससे हुई वो एंटी
लाइफ की आंदोलन जिससे हुई वो एंटी लाइफ की आंदोलन जिससे हुई वो एंटी रिजर्वेशन आंदोलन था। जो इक्विटी और रिजर्वेशन आंदोलन था। जो इक्विटी और रिजर्वेशन आंदोलन था। जो इक्विटी और इक्वलिटी का विरोध करता है। उनकी लाइफ में इक्वलिटी का विरोध करता है। उनकी लाइफ में इक्वलिटी का विरोध करता है। उनकी लाइफ में स्पष्ट है। उनकी बायोडटा आप देखेंगे तो स्पष्ट है। उनकी बायोडटा आप देखेंगे तो स्पष्ट है। उनकी बायोडटा आप देखेंगे तो आपको पता चलेगा। आप थोड़ा ढूंढना पड़ेगा। आपको पता चलेगा। आप थोड़ा ढूंढना पड़ेगा। आपको पता चलेगा। आप थोड़ा ढूंढना पड़ेगा। लेकिन आपको पता चलेगा वो एंटी लेकिन आपको पता चलेगा वो एंटी लेकिन आपको पता चलेगा वो एंटी इसलिए उनका जेएनयू में विरोध भी हुआ था। इसलिए उनका जेएनयू में विरोध भी हुआ था। इसलिए उनका जेएनयू में विरोध भी हुआ था। इसी वजह से इसी वजह से इसी वजह से हां। तो एंटी रिजर्वेशन आंदोलन के आदमी को हां। तो एंटी रिजर्वेशन आंदोलन के आदमी को हां। तो एंटी रिजर्वेशन आंदोलन के आदमी को पंजाब में सरकार आने के बाद लोगों को पंजाब में सरकार आने के बाद लोगों को पंजाब में सरकार आने के बाद लोगों को बहकाने के लिए उन्होंने आंबेडकर की तस्वीर बहकाने के लिए उन्होंने आंबेडकर की तस्वीर बहकाने के लिए उन्होंने आंबेडकर की तस्वीर लगाई और गांधी की हटा दिया। और जबकि उनके लगाई और गांधी की हटा दिया। और जबकि उनके लगाई और गांधी की हटा दिया। और जबकि उनके खिलाफ केसेस होने लगे तो दिल्ली में आकर खिलाफ केसेस होने लगे तो दिल्ली में आकर खिलाफ केसेस होने लगे तो दिल्ली में आकर गांधी के समाधि स्थल पे उन्होंने मत्थ
गांधी के समाधि स्थल पे उन्होंने मत्थ गांधी के समाधि स्थल पे उन्होंने मत्थ टेका। तो उनका कोई फिलॉसफी नहीं है। उनका टेका। तो उनका कोई फिलॉसफी नहीं है। उनका टेका। तो उनका कोई फिलॉसफी नहीं है। उनका कोई दर्शन नहीं है। उनका कोई आत्मिक प्रेम कोई दर्शन नहीं है। उनका कोई आत्मिक प्रेम कोई दर्शन नहीं है। उनका कोई आत्मिक प्रेम यानी ये नहीं है। ये आरएसएस के सारे यानी ये नहीं है। ये आरएसएस के सारे यानी ये नहीं है। ये आरएसएस के सारे स्वभाव है। वो उधर आरएसएस ने बीजेपी यानी स्वभाव है। वो उधर आरएसएस ने बीजेपी यानी स्वभाव है। वो उधर आरएसएस ने बीजेपी यानी ए पार्टी ने अगर राम मंदिर बनाने की सोची ए पार्टी ने अगर राम मंदिर बनाने की सोची ए पार्टी ने अगर राम मंदिर बनाने की सोची है तो दिल्ली में इनके सरकार ने बी पार्टी है तो दिल्ली में इनके सरकार ने बी पार्टी है तो दिल्ली में इनके सरकार ने बी पार्टी ने हनुमान मंदिर की घोषणा की। उधर भजन चल ने हनुमान मंदिर की घोषणा की। उधर भजन चल ने हनुमान मंदिर की घोषणा की। उधर भजन चल रहे थे तो इधर भी भजन शुरू हुए थे। और रहे थे तो इधर भी भजन शुरू हुए थे। और रहे थे तो इधर भी भजन शुरू हुए थे। और आपको याद होगा सीएए एनआरसी के खिलाफ शाहीन आपको याद होगा सीएए एनआरसी के खिलाफ शाहीन आपको याद होगा सीएए एनआरसी के खिलाफ शाहीन बाग में इतना बड़ा आंदोलन हुआ। दिल्ली के बाग में इतना बड़ा आंदोलन हुआ। दिल्ली के बाग में इतना बड़ा आंदोलन हुआ। दिल्ली के मुख्यमंत्री होने के बाद मुख्यमंत्री होने के बाद मुख्यमंत्री होने के बाद भी बावजूद भी
भी बावजूद भी भी बावजूद भी केजरीवाल आए नहीं केजरीवाल आए नहीं केजरीवाल आए नहीं और दूसरी बात मैं आपको बताता हूं दिल्ली और दूसरी बात मैं आपको बताता हूं दिल्ली और दूसरी बात मैं आपको बताता हूं दिल्ली में इतने बड़े दंगे हुए जिसमें मुसलमानों में इतने बड़े दंगे हुए जिसमें मुसलमानों में इतने बड़े दंगे हुए जिसमें मुसलमानों को बिना वजह बेवजह पुलिस ने और को बिना वजह बेवजह पुलिस ने और को बिना वजह बेवजह पुलिस ने और एनफोर्समेंट एजेंसी ने बहुत सताया उसमें एनफोर्समेंट एजेंसी ने बहुत सताया उसमें एनफोर्समेंट एजेंसी ने बहुत सताया उसमें केजरीवाल की भूमिका उसको प्रो रही तो ये केजरीवाल की भूमिका उसको प्रो रही तो ये केजरीवाल की भूमिका उसको प्रो रही तो ये सारी जो बातें हैं नहीं मैं ये कह नहीं सारी जो बातें हैं नहीं मैं ये कह नहीं सारी जो बातें हैं नहीं मैं ये कह नहीं रहा हूं आप ऑन पेपर देख सकते हैं और वो तब रहा हूं आप ऑन पेपर देख सकते हैं और वो तब रहा हूं आप ऑन पेपर देख सकते हैं और वो तब से मुझे मालूम था से मुझे मालूम था से मुझे मालूम था क्योंकि आईएससी के आंदोलन का सारा सारा जो क्योंकि आईएससी के आंदोलन का सारा सारा जो क्योंकि आईएससी के आंदोलन का सारा सारा जो इंतजाम होता था वो जेटली जी के साथ बैठ के इंतजाम होता था वो जेटली जी के साथ बैठ के इंतजाम होता था वो जेटली जी के साथ बैठ के होता था। होता था। होता था। तो पूरा जेटली जसवंत सिंह ये लोग बैठे
तो पूरा जेटली जसवंत सिंह ये लोग बैठे तो पूरा जेटली जसवंत सिंह ये लोग बैठे जसवंत सिंह तो कभी-कभी बैठे थे लेकिन जसवंत सिंह तो कभी-कभी बैठे थे लेकिन जसवंत सिंह तो कभी-कभी बैठे थे लेकिन जेटली तो मेनली बैठे थे और उनके साथ जेटली तो मेनली बैठे थे और उनके साथ जेटली तो मेनली बैठे थे और उनके साथ केजरीवाल और ये बाकी सारे बैठे थे। केजरीवाल और ये बाकी सारे बैठे थे। केजरीवाल और ये बाकी सारे बैठे थे। केजरीवाल, किरण बेदी, मनीष सिसोदिया तो केजरीवाल, किरण बेदी, मनीष सिसोदिया तो केजरीवाल, किरण बेदी, मनीष सिसोदिया तो 100% बीजेपीियन थे और प्रशांत भूषण एंटी 100% बीजेपीियन थे और प्रशांत भूषण एंटी 100% बीजेपीियन थे और प्रशांत भूषण एंटी कांग्रेस थे। बीजेपीियन थे नहीं वो। कांग्रेस थे। बीजेपीियन थे नहीं वो। कांग्रेस थे। बीजेपीियन थे नहीं वो। प्रॉब्लम ये थी कि मैं जब अन्ना के अन्ना प्रॉब्लम ये थी कि मैं जब अन्ना के अन्ना प्रॉब्लम ये थी कि मैं जब अन्ना के अन्ना को हम पहचानते बहुत पहले से थे। अन्ना को हम पहचानते बहुत पहले से थे। अन्ना को हम पहचानते बहुत पहले से थे। अन्ना संघी वंगी कुछ नहीं है। अन्ना संघी वंगी कुछ नहीं है। अन्ना संघी वंगी कुछ नहीं है। अन्ना अपॉर्चुनिस्ट थे। अन्ना को जो मुख्यमंत्री अपॉर्चुनिस्ट थे। अन्ना को जो मुख्यमंत्री अपॉर्चुनिस्ट थे। अन्ना को जो मुख्यमंत्री है उसको और मंत्रियों को
है उसको और मंत्रियों को है उसको और मंत्रियों को चारप मंत्रियों के उन्होंने रेसिग्नेशन ले चारप मंत्रियों के उन्होंने रेसिग्नेशन ले चारप मंत्रियों के उन्होंने रेसिग्नेशन ले लिए अनशन का वो करके उम्र उनकी और ये सब लिए अनशन का वो करके उम्र उनकी और ये सब लिए अनशन का वो करके उम्र उनकी और ये सब कांग्रेस बहुत सॉफ्ट रहती थी इनके प्रति कांग्रेस बहुत सॉफ्ट रहती थी इनके प्रति कांग्रेस बहुत सॉफ्ट रहती थी इनके प्रति अन्ना के प्रति। अन्ना के प्रति। अन्ना के प्रति। तो अनशन किया तो जो भी है वो लेना देना तो अनशन किया तो जो भी है वो लेना देना तो अनशन किया तो जो भी है वो लेना देना होके वो सेटल हो जाता था। होके वो सेटल हो जाता था। होके वो सेटल हो जाता था। तब से मैं अन्ना को जानता हूं। तो अन्ना तब से मैं अन्ना को जानता हूं। तो अन्ना तब से मैं अन्ना को जानता हूं। तो अन्ना का मैंने इंटरव्यू किया था जब उन्होंने का मैंने इंटरव्यू किया था जब उन्होंने का मैंने इंटरव्यू किया था जब उन्होंने शिवसेना के तीन शिवसेना के तीन शिवसेना के तीन मंत्रियों का रेसिग्नेशन लिया था। उसके मंत्रियों का रेसिग्नेशन लिया था। उसके मंत्रियों का रेसिग्नेशन लिया था। उसके ऊपर उन्होंने बात की थी तो मैं मैंने बहुत ऊपर उन्होंने बात की थी तो मैं मैंने बहुत ऊपर उन्होंने बात की थी तो मैं मैंने बहुत बाद में उसके 10 साल बाद शायद उनका बाद में उसके 10 साल बाद शायद उनका बाद में उसके 10 साल बाद शायद उनका इंटरव्यू किया था पहली बार इंटरव्यू किया था पहली बार इंटरव्यू किया था पहली बार तो उसके बाद दो-तीन ऐसे मौके आए जो तो उसके बाद दो-तीन ऐसे मौके आए जो तो उसके बाद दो-तीन ऐसे मौके आए जो सार्वजनिक रूप से उनका इंटरव्यू मुझे लेना
सार्वजनिक रूप से उनका इंटरव्यू मुझे लेना सार्वजनिक रूप से उनका इंटरव्यू मुझे लेना पड़ा जब किसी ने पूछा तो मैंने ले लिया तो पड़ा जब किसी ने पूछा तो मैंने ले लिया तो पड़ा जब किसी ने पूछा तो मैंने ले लिया तो अन्ना की और अपनी दोस्ती हो गई अच्छी अन्ना की और अपनी दोस्ती हो गई अच्छी अन्ना की और अपनी दोस्ती हो गई अच्छी रिलेशन थे और मैं अन्ना की या समाजसेवी वो रिलेशन थे और मैं अन्ना की या समाजसेवी वो रिलेशन थे और मैं अन्ना की या समाजसेवी वो और अन्ना भी जानते थे कि मैं उनके और अन्ना भी जानते थे कि मैं उनके और अन्ना भी जानते थे कि मैं उनके समाजसेवी उसको मानता नहीं हूं। उनकी उम्र समाजसेवी उसको मानता नहीं हूं। उनकी उम्र समाजसेवी उसको मानता नहीं हूं। उनकी उम्र को मैं मानता था और उनके यहां वेज खाते को मैं मानता था और उनके यहां वेज खाते को मैं मानता था और उनके यहां वेज खाते हैं अन्ना लेकिन खाना बहुत अच्छा मिलता हैं अन्ना लेकिन खाना बहुत अच्छा मिलता हैं अन्ना लेकिन खाना बहुत अच्छा मिलता था। वो तब उस जमाने में मैं स्पाइसी खाता था। वो तब उस जमाने में मैं स्पाइसी खाता था। वो तब उस जमाने में मैं स्पाइसी खाता था। 10 साल पहले मैं बहुत स्पाइसी खाता था था। 10 साल पहले मैं बहुत स्पाइसी खाता था था। 10 साल पहले मैं बहुत स्पाइसी खाता था और राेगंज में इतना बढ़िया खाना बनता था और राेगंज में इतना बढ़िया खाना बनता था और राेगंज में इतना बढ़िया खाना बनता था और मैं आपको एक एकमात्र जो फोटो है मेरी और मैं आपको एक एकमात्र जो फोटो है मेरी और मैं आपको एक एकमात्र जो फोटो है मेरी अन्ना अन्ना अन्ना केजरीवाल बेदी और प्रशांत भूषण उसमें जो
केजरीवाल बेदी और प्रशांत भूषण उसमें जो केजरीवाल बेदी और प्रशांत भूषण उसमें जो मैंने कई बार बोला है जो पकोड़े सामने रखे मैंने कई बार बोला है जो पकोड़े सामने रखे मैंने कई बार बोला है जो पकोड़े सामने रखे हुए हैं आलू के वैसे पकोड़े मैंने आज तक हुए हैं आलू के वैसे पकोड़े मैंने आज तक हुए हैं आलू के वैसे पकोड़े मैंने आज तक उसके बाद नहीं खाए लास्ट खाए 30 अक्टूबर उसके बाद नहीं खाए लास्ट खाए 30 अक्टूबर उसके बाद नहीं खाए लास्ट खाए 30 अक्टूबर 2011 को। उसके बाद पकोड़े बहुत खाए लेकिन 2011 को। उसके बाद पकोड़े बहुत खाए लेकिन 2011 को। उसके बाद पकोड़े बहुत खाए लेकिन वैसे नहीं खाया तो अन्ना के यहां जाना आना वैसे नहीं खाया तो अन्ना के यहां जाना आना वैसे नहीं खाया तो अन्ना के यहां जाना आना तो मेरा तो मेरा तो मेरा क्या अन्ना तो अन्ना आंदोलन के साथ भी थे क्या अन्ना तो अन्ना आंदोलन के साथ भी थे क्या अन्ना तो अन्ना आंदोलन के साथ भी थे आप क्या आप क्या आप क्या नहीं नहीं नहीं मैं अन्ना आंदोलन के टाइम नहीं नहीं नहीं मैं अन्ना आंदोलन के टाइम नहीं नहीं नहीं मैं अन्ना आंदोलन के टाइम था ही नहीं यहां मैं हिंदुस्तान में था था ही नहीं यहां मैं हिंदुस्तान में था था ही नहीं यहां मैं हिंदुस्तान में था नहीं कि कान को अभी लोग जाते हैं ना उस नहीं कि कान को अभी लोग जाते हैं ना उस नहीं कि कान को अभी लोग जाते हैं ना उस वक्त कोई जाता नहीं था वक्त कोई जाता नहीं था वक्त कोई जाता नहीं था यानी इतना आम नहीं हुआ था कान कान यानी इतना आम नहीं हुआ था कान कान यानी इतना आम नहीं हुआ था कान कान फेस्टिवल
फेस्टिवल फेस्टिवल तो वहां पर मैं मिपकॉम नाम की एक वो होता तो वहां पर मैं मिपकॉम नाम की एक वो होता तो वहां पर मैं मिपकॉम नाम की एक वो होता है फेस्टिवल कान के हिस्सा ही है वो और है फेस्टिवल कान के हिस्सा ही है वो और है फेस्टिवल कान के हिस्सा ही है वो और टेलीविजन मार्केट पूरा वहां आता है टेलीविजन मार्केट पूरा वहां आता है टेलीविजन मार्केट पूरा वहां आता है यानी टेलीविजन सीरीज डॉक्यूमेंट यानी टेलीविजन सीरीज डॉक्यूमेंट यानी टेलीविजन सीरीज डॉक्यूमेंट फिल्म्स जो बनाते हैं वो सारे दुनिया के फिल्म्स जो बनाते हैं वो सारे दुनिया के फिल्म्स जो बनाते हैं वो सारे दुनिया के इटली के जर्मनी के इंडिया के पाकिस्तान के इटली के जर्मनी के इंडिया के पाकिस्तान के इटली के जर्मनी के इंडिया के पाकिस्तान के ईरान के सब लोग वहां आते हैं। उनके ईरान के सब लोग वहां आते हैं। उनके ईरान के सब लोग वहां आते हैं। उनके स्टॉल्स लगते हैं और वो सब देखने के लिए स्टॉल्स लगते हैं और वो सब देखने के लिए स्टॉल्स लगते हैं और वो सब देखने के लिए मैं गया था और मैं साल में दो बार उस मैं गया था और मैं साल में दो बार उस मैं गया था और मैं साल में दो बार उस जमाने में जाया करता था अपने पैसे खर्च जमाने में जाया करता था अपने पैसे खर्च जमाने में जाया करता था अपने पैसे खर्च करके चाहे तो या मैं जिनकी कंसलटेंसी करता करके चाहे तो या मैं जिनकी कंसलटेंसी करता करके चाहे तो या मैं जिनकी कंसलटेंसी करता था जो मीडिया हाउस की उनकी तरफ से
था जो मीडिया हाउस की उनकी तरफ से था जो मीडिया हाउस की उनकी तरफ से तो मैं गया उधर गया था तो वहां से मैं तो मैं गया उधर गया था तो वहां से मैं तो मैं गया उधर गया था तो वहां से मैं कांग फिस्ट फेस्टिवल होने के बाद हम लोग कांग फिस्ट फेस्टिवल होने के बाद हम लोग कांग फिस्ट फेस्टिवल होने के बाद हम लोग ब्रिटिश लावा गए स्लोवा वहां पर अन्ना का ब्रिटिश लावा गए स्लोवा वहां पर अन्ना का ब्रिटिश लावा गए स्लोवा वहां पर अन्ना का मोबाइल पे फोन आया कि राज हो [हंसी] मोबाइल पे फोन आया कि राज हो [हंसी] मोबाइल पे फोन आया कि राज हो [हंसी] तो मैंने समझा तब उनका अनशन जो दिल्ली तो मैंने समझा तब उनका अनशन जो दिल्ली तो मैंने समझा तब उनका अनशन जो दिल्ली वाला था जो आप लोगों ने बहुत सराहा रहा था वाला था जो आप लोगों ने बहुत सराहा रहा था वाला था जो आप लोगों ने बहुत सराहा रहा था तो वह खत्म हुआ था और अन्ना त्रिहान के तो वह खत्म हुआ था और अन्ना त्रिहान के तो वह खत्म हुआ था और अन्ना त्रिहान के हॉस्पिटल से मेधा पाटकर की मदद लेकर भाग हॉस्पिटल से मेधा पाटकर की मदद लेकर भाग हॉस्पिटल से मेधा पाटकर की मदद लेकर भाग गए थे और राग पहुंचे थे क्योंकि केजरीवाल गए थे और राग पहुंचे थे क्योंकि केजरीवाल गए थे और राग पहुंचे थे क्योंकि केजरीवाल चाहते थे वो शहीद हो जाए यहीं पे और अन्ना चाहते थे वो शहीद हो जाए यहीं पे और अन्ना चाहते थे वो शहीद हो जाए यहीं पे और अन्ना डर गए थे कि ये शहादत देके रहे लेके रहेगा
डर गए थे कि ये शहादत देके रहे लेके रहेगा डर गए थे कि ये शहादत देके रहे लेके रहेगा मेरी मेरी मेरी जब उनका आमरण अनशन चला जब उनका आमरण अनशन चला जब उनका आमरण अनशन चला तो उनका मन खट्टा हुआ था केजरीवाल प्रशांत तो उनका मन खट्टा हुआ था केजरीवाल प्रशांत तो उनका मन खट्टा हुआ था केजरीवाल प्रशांत भूषण भूषण भूषण मनीष सिसोदिया और किरण बेदी के प्रति तो मनीष सिसोदिया और किरण बेदी के प्रति तो मनीष सिसोदिया और किरण बेदी के प्रति तो उन्होंने एक्चुअली यह सोच के मुझे बुलाया उन्होंने एक्चुअली यह सोच के मुझे बुलाया उन्होंने एक्चुअली यह सोच के मुझे बुलाया कि उनको कोर कमेटी को भंग करना है लेकिन कि उनको कोर कमेटी को भंग करना है लेकिन कि उनको कोर कमेटी को भंग करना है लेकिन वो अन्ना के बुद्धि की बात नहीं थी तो वो अन्ना के बुद्धि की बात नहीं थी तो वो अन्ना के बुद्धि की बात नहीं थी तो उन्होंने मुझे फोन करके बोला कि तुम यहां उन्होंने मुझे फोन करके बोला कि तुम यहां उन्होंने मुझे फोन करके बोला कि तुम यहां हिंदुस्तान आओगे तो फौरन लाड़ेगढ़ आना तो हिंदुस्तान आओगे तो फौरन लाड़ेगढ़ आना तो हिंदुस्तान आओगे तो फौरन लाड़ेगढ़ आना तो मैं आया मैं आया मैं आया तो मुंबई से पुणे आके पुणे रुका फिर पुणे तो मुंबई से पुणे आके पुणे रुका फिर पुणे तो मुंबई से पुणे आके पुणे रुका फिर पुणे से राग आया राग में उनको मिला तब उन्होंने से राग आया राग में उनको मिला तब उन्होंने से राग आया राग में उनको मिला तब उन्होंने बोला मेरी आवाज तो पहुंच ही नहीं रही है बोला मेरी आवाज तो पहुंच ही नहीं रही है बोला मेरी आवाज तो पहुंच ही नहीं रही है लोगों को लगता है मैं मैं कर रहा हूं ये
लोगों को लगता है मैं मैं कर रहा हूं ये लोगों को लगता है मैं मैं कर रहा हूं ये सब सब सब तो ये कोर कमेटी कर रही है तो उनको ना तो ये कोर कमेटी कर रही है तो उनको ना तो ये कोर कमेटी कर रही है तो उनको ना एक्चुअली अन्ना का प्रॉब्लम क्या था कि धन एक्चुअली अन्ना का प्रॉब्लम क्या था कि धन एक्चुअली अन्ना का प्रॉब्लम क्या था कि धन का बरसात हो रही थी इनके ऊपर केजरीवाल का बरसात हो रही थी इनके ऊपर केजरीवाल का बरसात हो रही थी इनके ऊपर केजरीवाल अन्ना इन लोगों देश की आरएसएस को पॉलिटिकल अन्ना इन लोगों देश की आरएसएस को पॉलिटिकल अन्ना इन लोगों देश की आरएसएस को पॉलिटिकल पावर से मतलब था धन की बरसात होती होने पावर से मतलब था धन की बरसात होती होने पावर से मतलब था धन की बरसात होती होने दो। जबकि इनके एनजीओस थे केजरीवाल और बेदी दो। जबकि इनके एनजीओस थे केजरीवाल और बेदी दो। जबकि इनके एनजीओस थे केजरीवाल और बेदी साहब के बेदी मैडम के तो वो एनजीओस के साहब के बेदी मैडम के तो वो एनजीओस के साहब के बेदी मैडम के तो वो एनजीओस के एफसीआर रहे थे। कांग्रेस चाहती तो एफसीआर रहे थे। कांग्रेस चाहती तो एफसीआर रहे थे। कांग्रेस चाहती तो देशद्रोह के मुकदमे लगा सकती थी लेकिन देशद्रोह के मुकदमे लगा सकती थी लेकिन देशद्रोह के मुकदमे लगा सकती थी लेकिन कांग्रेस ने कुछ नहीं किया ये। इनफैक्ट कांग्रेस ने कुछ नहीं किया ये। इनफैक्ट कांग्रेस ने कुछ नहीं किया ये। इनफैक्ट मैंने एक एफआईआर किसी को मारा पीटा गया।
मैंने एक एफआईआर किसी को मारा पीटा गया। मैंने एक एफआईआर किसी को मारा पीटा गया। तब वो अभी बीजेपी में गई ना वो कौन? तब वो अभी बीजेपी में गई ना वो कौन? तब वो अभी बीजेपी में गई ना वो कौन? स्वाति मालीवाल। स्वाति मालीवाल। स्वाति मालीवाल। तो उसके सामने मारा पीटा गया किसी तो उसके सामने मारा पीटा गया किसी तो उसके सामने मारा पीटा गया किसी कार्यकर्ता को। तो उसका एफआईआर करने के कार्यकर्ता को। तो उसका एफआईआर करने के कार्यकर्ता को। तो उसका एफआईआर करने के लिए हमें डीसीपी साहब तक मिला तो दिल्ली लिए हमें डीसीपी साहब तक मिला तो दिल्ली लिए हमें डीसीपी साहब तक मिला तो दिल्ली पे उसका एफआईआर लेते नहीं थे केजरीवाल का। पे उसका एफआईआर लेते नहीं थे केजरीवाल का। पे उसका एफआईआर लेते नहीं थे केजरीवाल का। जबकि शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी जबकि शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी जबकि शीला दीक्षित मुख्यमंत्री थी और मुख्यमंत्री जी के खिलाफ उनकी शीला और मुख्यमंत्री जी के खिलाफ उनकी शीला और मुख्यमंत्री जी के खिलाफ उनकी शीला दीक्षित जैसी बेहतरीन मुख्यमंत्री दीक्षित जैसी बेहतरीन मुख्यमंत्री दीक्षित जैसी बेहतरीन मुख्यमंत्री दिल्ली को नहीं मिले आज तक दिल्ली को नहीं मिले आज तक दिल्ली को नहीं मिले आज तक राजू जी क्या जब आप अन्ना के साथ थे या या राजू जी क्या जब आप अन्ना के साथ थे या या राजू जी क्या जब आप अन्ना के साथ थे या या जिस भी वक्त तक थे आप थोड़े से टाइम के जिस भी वक्त तक थे आप थोड़े से टाइम के जिस भी वक्त तक थे आप थोड़े से टाइम के लिए थे और ये जब अन्ना मूवमेंट चल रहा था लिए थे और ये जब अन्ना मूवमेंट चल रहा था लिए थे और ये जब अन्ना मूवमेंट चल रहा था क्या आपको तब भी पता था ये आरएसएस बैक्ड
क्या आपको तब भी पता था ये आरएसएस बैक्ड क्या आपको तब भी पता था ये आरएसएस बैक्ड है क्या जो लोग वहां पर थे क्या उनको पता है क्या जो लोग वहां पर थे क्या उनको पता है क्या जो लोग वहां पर थे क्या उनको पता था ये आरएसएस बैक्ड है जो अब उस था ये आरएसएस बैक्ड है जो अब उस था ये आरएसएस बैक्ड है जो अब उस आईडियोलॉजी के या उस उस ग्रुप के साथ नहीं आईडियोलॉजी के या उस उस ग्रुप के साथ नहीं आईडियोलॉजी के या उस उस ग्रुप के साथ नहीं आईडियोलॉजी नहीं कहूंगी उस ग्रुप के साथ आईडियोलॉजी नहीं कहूंगी उस ग्रुप के साथ आईडियोलॉजी नहीं कहूंगी उस ग्रुप के साथ नहीं है जिसमें प्रशांत भूषण है और दूसरी नहीं है जिसमें प्रशांत भूषण है और दूसरी नहीं है जिसमें प्रशांत भूषण है और दूसरी तरह के जो लोग हैं जब अलग हो गए हैं तो तरह के जो लोग हैं जब अलग हो गए हैं तो तरह के जो लोग हैं जब अलग हो गए हैं तो क्या उन लोगों को यह पता था और ये अगर पता क्या उन लोगों को यह पता था और ये अगर पता क्या उन लोगों को यह पता था और ये अगर पता था तो फिर वो उसके साथ क्यों थे और क्यों था तो फिर वो उसके साथ क्यों थे और क्यों था तो फिर वो उसके साथ क्यों थे और क्यों उनको ये लग रहा था कि अगर कांग्रेस जाएगी उनको ये लग रहा था कि अगर कांग्रेस जाएगी उनको ये लग रहा था कि अगर कांग्रेस जाएगी तो कौन आएगा फिर सत्ता में जाहिर सी बात तो कौन आएगा फिर सत्ता में जाहिर सी बात तो कौन आएगा फिर सत्ता में जाहिर सी बात है बीजेपी आएगी है बीजेपी आएगी है बीजेपी आएगी नहीं मैं आपको बताता हूं वही बात बता रहा नहीं मैं आपको बताता हूं वही बात बता रहा नहीं मैं आपको बताता हूं वही बात बता रहा हूं कि मैं ये तो स्थिति थी कांग्रेस इतना
हूं कि मैं ये तो स्थिति थी कांग्रेस इतना हूं कि मैं ये तो स्थिति थी कांग्रेस इतना दुर्बल हो चुकी थी कि शीला जी जैसे दुर्बल हो चुकी थी कि शीला जी जैसे दुर्बल हो चुकी थी कि शीला जी जैसे मुख्यमंत्री होने के बाद यहां एफआईआर नहीं मुख्यमंत्री होने के बाद यहां एफआईआर नहीं मुख्यमंत्री होने के बाद यहां एफआईआर नहीं लेते थे अरविंद के खिलाफ समझिए लेते थे अरविंद के खिलाफ समझिए लेते थे अरविंद के खिलाफ समझिए तो यानी सरकारी अधिकारी अंदर से संघी थे तो यानी सरकारी अधिकारी अंदर से संघी थे तो यानी सरकारी अधिकारी अंदर से संघी थे जो अभी अभी तो पूरी ओपनली वो जो काम कर जो अभी अभी तो पूरी ओपनली वो जो काम कर जो अभी अभी तो पूरी ओपनली वो जो काम कर रहे हैं दिल्ली पुलिस जिस तरह से रहे हैं दिल्ली पुलिस जिस तरह से रहे हैं दिल्ली पुलिस जिस तरह से वैसे उस टाइम भी कर रही थी जो आरएसएस की वैसे उस टाइम भी कर रही थी जो आरएसएस की वैसे उस टाइम भी कर रही थी जो आरएसएस की जो हुकुम वही सराखों पे थी जो हुकुम वही सराखों पे थी जो हुकुम वही सराखों पे थी लेकिन इससे मैं पहले जानता नहीं था यस जब लेकिन इससे मैं पहले जानता नहीं था यस जब लेकिन इससे मैं पहले जानता नहीं था यस जब मैं वापस आया और अन्ना के पास गया तो मैं वापस आया और अन्ना के पास गया तो मैं वापस आया और अन्ना के पास गया तो अन्ना से बात की तो अन्ना को अपॉर्चुनिज्म अन्ना से बात की तो अन्ना को अपॉर्चुनिज्म अन्ना से बात की तो अन्ना को अपॉर्चुनिज्म ज्यादा इंपॉर्टेंट था। उसमें पैसे दिख रहे
ज्यादा इंपॉर्टेंट था। उसमें पैसे दिख रहे ज्यादा इंपॉर्टेंट था। उसमें पैसे दिख रहे थे अन्ना को शायद कि वो निधि जो आ रहा था थे अन्ना को शायद कि वो निधि जो आ रहा था थे अन्ना को शायद कि वो निधि जो आ रहा था उसमें से बंटवारा ठीक से नहीं हो रहा था उसमें से बंटवारा ठीक से नहीं हो रहा था उसमें से बंटवारा ठीक से नहीं हो रहा था केजरीवाल की तरफ से क्योंकि इंडिया केजरीवाल की तरफ से क्योंकि इंडिया केजरीवाल की तरफ से क्योंकि इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम की जैसे आरएसएसआई वही अगेंस्ट करप्शन नाम की जैसे आरएसएसआई वही अगेंस्ट करप्शन नाम की जैसे आरएसएसआई वही स्ट्रेटजी थी केजरीवाल की इंडिया अगेंस्ट स्ट्रेटजी थी केजरीवाल की इंडिया अगेंस्ट स्ट्रेटजी थी केजरीवाल की इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम की कोई संस्था ही नहीं थी कागज करप्शन नाम की कोई संस्था ही नहीं थी कागज करप्शन नाम की कोई संस्था ही नहीं थी कागज पे पे पे ओके ओके ओके हां संस्था तो उनकी अपनी एनजीओ थी अलग-अलग हां संस्था तो उनकी अपनी एनजीओ थी अलग-अलग हां संस्था तो उनकी अपनी एनजीओ थी अलग-अलग उस पे पैसे जाते थे पैसे इंडिया अगेंस्ट उस पे पैसे जाते थे पैसे इंडिया अगेंस्ट उस पे पैसे जाते थे पैसे इंडिया अगेंस्ट करप्शन नाम का कुछ नहीं था करप्शन नाम का कुछ नहीं था करप्शन नाम का कुछ नहीं था तो अण्णा को ये लिखा पीढ़ी में मार खा गए तो अण्णा को ये लिखा पीढ़ी में मार खा गए तो अण्णा को ये लिखा पीढ़ी में मार खा गए अना तो वो अना तो वो अना तो वो करप्शन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे और करप्शन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे और करप्शन के खिलाफ आवाज उठा रहे थे और करप्शन ही कर रहे थे करप्शन ही कर रहे थे करप्शन ही कर रहे थे करप्शन हां हां यानी देश के खिलाफ तो करप्शन हां हां यानी देश के खिलाफ तो
करप्शन हां हां यानी देश के खिलाफ तो एफसीआर एक जब आपको एनजीओ को दी जाती है तो एफसीआर एक जब आपको एनजीओ को दी जाती है तो एफसीआर एक जब आपको एनजीओ को दी जाती है तो आप पॉलिटिकल मैटर्स में वो धन इस्तेमाल आप पॉलिटिकल मैटर्स में वो धन इस्तेमाल आप पॉलिटिकल मैटर्स में वो धन इस्तेमाल नहीं कर सकते। तो वो करके उन्होंने नहीं कर सकते। तो वो करके उन्होंने नहीं कर सकते। तो वो करके उन्होंने देशद्रोह किया है। करप्शन ही नहीं मैं ये देशद्रोह किया है। करप्शन ही नहीं मैं ये देशद्रोह किया है। करप्शन ही नहीं मैं ये मानता हूं। लेकिन इसमें से मैं आपको बताऊं मानता हूं। लेकिन इसमें से मैं आपको बताऊं मानता हूं। लेकिन इसमें से मैं आपको बताऊं कि मुझे प्रशांत जी का एक वो उनका जो कि मुझे प्रशांत जी का एक वो उनका जो कि मुझे प्रशांत जी का एक वो उनका जो मैंने इंटरव्यू देखा उसमें मुझे ये लगा कि मैंने इंटरव्यू देखा उसमें मुझे ये लगा कि मैंने इंटरव्यू देखा उसमें मुझे ये लगा कि कई लोग थे। सोशालिस्ट लोग थे उस मूवमेंट कई लोग थे। सोशालिस्ट लोग थे उस मूवमेंट कई लोग थे। सोशालिस्ट लोग थे उस मूवमेंट में टॉप लेवल पे नहीं थे। नीचे भी थे। मैं में टॉप लेवल पे नहीं थे। नीचे भी थे। मैं में टॉप लेवल पे नहीं थे। नीचे भी थे। मैं उनको जानता हूं सोशलिस्ट किसी भी एंटी उनको जानता हूं सोशलिस्ट किसी भी एंटी उनको जानता हूं सोशलिस्ट किसी भी एंटी कांग्रेस मूवमेंट पे शामिल हो जाते थे। ये कांग्रेस मूवमेंट पे शामिल हो जाते थे। ये कांग्रेस मूवमेंट पे शामिल हो जाते थे। ये सोचे बिना कि कौन क्या होगा
सोचे बिना कि कौन क्या होगा सोचे बिना कि कौन क्या होगा तो लोहिया से लेके यहां तक देखो नितीश तो लोहिया से लेके यहां तक देखो नितीश तो लोहिया से लेके यहां तक देखो नितीश आखिर में गए हैं ना वहां पर एक लालू छोड़ आखिर में गए हैं ना वहां पर एक लालू छोड़ आखिर में गए हैं ना वहां पर एक लालू छोड़ के और मधुलिमी के और मधुलिमी के और मधुलिमी ये दो लोग छोड़ के और भाई वैद्य ये तीन ये दो लोग छोड़ के और भाई वैद्य ये तीन ये दो लोग छोड़ के और भाई वैद्य ये तीन लोग छोड़ के तो सभी लोग ऐसे ही हुए कि लोग छोड़ के तो सभी लोग ऐसे ही हुए कि लोग छोड़ के तो सभी लोग ऐसे ही हुए कि कैसे गए वो उनके साथ कैसे गए वो उनके साथ कैसे गए वो उनके साथ तो लेकिन मैं केजरीवाल के खिलाफ इतना तो लेकिन मैं केजरीवाल के खिलाफ इतना तो लेकिन मैं केजरीवाल के खिलाफ इतना बोलता हूं इसके पर्सनल कुछ नहीं है मेरा बोलता हूं इसके पर्सनल कुछ नहीं है मेरा बोलता हूं इसके पर्सनल कुछ नहीं है मेरा उनकी आईडियोलॉजी आरएसएस के थी उनको जानते उनकी आईडियोलॉजी आरएसएस के थी उनको जानते उनकी आईडियोलॉजी आरएसएस के थी उनको जानते थे वो बाकी तो मिसगाइड ऐसा कह सकते हैं थे वो बाकी तो मिसगाइड ऐसा कह सकते हैं थे वो बाकी तो मिसगाइड ऐसा कह सकते हैं लेकिन केजरीवाल किरण बेदी किरण बेदी तो
लेकिन केजरीवाल किरण बेदी किरण बेदी तो लेकिन केजरीवाल किरण बेदी किरण बेदी तो बाद में राज्यपाल भी बनी बीजेपी बाद में राज्यपाल भी बनी बीजेपी बाद में राज्यपाल भी बनी बीजेपी और मनीष सिसोदिया इनको मालूम था कि इसमें और मनीष सिसोदिया इनको मालूम था कि इसमें और मनीष सिसोदिया इनको मालूम था कि इसमें उस उनका तर्क क्या देते थे मालूम है मैं उस उनका तर्क क्या देते थे मालूम है मैं उस उनका तर्क क्या देते थे मालूम है मैं अरागंज में उनसे मिला तो तर्क क्या दिया अरागंज में उनसे मिला तो तर्क क्या दिया अरागंज में उनसे मिला तो तर्क क्या दिया तो विपक्ष ही आएगा ना साथ में हम लोग तो विपक्ष ही आएगा ना साथ में हम लोग तो विपक्ष ही आएगा ना साथ में हम लोग आंदोलनकारियों के साथ आंदोलनकारियों के साथ आंदोलनकारियों के साथ हमारे आंदोलनकारी के साथ सत्ता पक्ष थोड़ी हमारे आंदोलनकारी के साथ सत्ता पक्ष थोड़ी हमारे आंदोलनकारी के साथ सत्ता पक्ष थोड़ी आएगा आएगा आएगा तो इसका मतलब आईडियोलॉजी आपके लिए कोई तो इसका मतलब आईडियोलॉजी आपके लिए कोई तो इसका मतलब आईडियोलॉजी आपके लिए कोई मायने नहीं रखती मायने नहीं रखती मायने नहीं रखती हां ये बात उनके उन्होंने कही थी तो अन्ना हां ये बात उनके उन्होंने कही थी तो अन्ना हां ये बात उनके उन्होंने कही थी तो अन्ना को ये उस वक्त अन्ना अपॉर्चुनिस्ट होने के को ये उस वक्त अन्ना अपॉर्चुनिस्ट होने के को ये उस वक्त अन्ना अपॉर्चुनिस्ट होने के बावजूद उनको लगा हां विपक्ष हमारे साथ है बावजूद उनको लगा हां विपक्ष हमारे साथ है बावजूद उनको लगा हां विपक्ष हमारे साथ है हम तो वो यह मामला हिंदूवादी और देखिए ऐसा
हम तो वो यह मामला हिंदूवादी और देखिए ऐसा हम तो वो यह मामला हिंदूवादी और देखिए ऐसा है कि पहले वाजपेयी सरकार हो गई थी तो है कि पहले वाजपेयी सरकार हो गई थी तो है कि पहले वाजपेयी सरकार हो गई थी तो उन्होंने सोचा भी नहीं था 2011 में कि उन्होंने सोचा भी नहीं था 2011 में कि उन्होंने सोचा भी नहीं था 2011 में कि मोदी सरकार आएगी करके मोदी सरकार आएगी करके मोदी सरकार आएगी करके वो सोच रहे थे कि बीजेपी की सरकार आएगी वो सोच रहे थे कि बीजेपी की सरकार आएगी वो सोच रहे थे कि बीजेपी की सरकार आएगी मैंने कितना समझाने की कोशिश की अण्णा को मैंने कितना समझाने की कोशिश की अण्णा को मैंने कितना समझाने की कोशिश की अण्णा को कि आरएसएस एक बहुत बड़ा डेंजरस टेररिस्ट कि आरएसएस एक बहुत बड़ा डेंजरस टेररिस्ट कि आरएसएस एक बहुत बड़ा डेंजरस टेररिस्ट ऑर्गेनाइजेशन की तरह जाएगा सत्ता में आने ऑर्गेनाइजेशन की तरह जाएगा सत्ता में आने ऑर्गेनाइजेशन की तरह जाएगा सत्ता में आने के बाद तो उन्होंने माना नहीं और केजरीवाल के बाद तो उन्होंने माना नहीं और केजरीवाल के बाद तो उन्होंने माना नहीं और केजरीवाल तो मेरी बात नहीं वो मुझसे वो तो मेरी बात नहीं वो मुझसे वो तो मेरी बात नहीं वो मुझसे वो या फिर उनको मैटर नहीं करती थी ये बात या फिर उनको मैटर नहीं करती थी ये बात या फिर उनको मैटर नहीं करती थी ये बात उनको उनको उनको नहीं उनको उनको उनको तानाशाही चाहिए चाहिए नहीं उनको उनको उनको तानाशाही चाहिए चाहिए नहीं उनको उनको उनको तानाशाही चाहिए चाहिए थी लेकिन वो खुद की आएगी ऐसा उनको लगा
थी लेकिन वो खुद की आएगी ऐसा उनको लगा थी लेकिन वो खुद की आएगी ऐसा उनको लगा लेकिन वो हो ना सका क्योंकि उस वक्त का आप लेकिन वो हो ना सका क्योंकि उस वक्त का आप लेकिन वो हो ना सका क्योंकि उस वक्त का आप चरम पे जो आंदोलन था आप याद कीजिए अन्ना चरम पे जो आंदोलन था आप याद कीजिए अन्ना चरम पे जो आंदोलन था आप याद कीजिए अन्ना अगर यहां पर शहादत दे देते तो अगर यहां पर शहादत दे देते तो अगर यहां पर शहादत दे देते तो प्रधानमंत्री तो केजरीवाल ही बनने थे ऐसा प्रधानमंत्री तो केजरीवाल ही बनने थे ऐसा प्रधानमंत्री तो केजरीवाल ही बनने थे ऐसा केजरीवाल का गणित था केजरीवाल का गणित था केजरीवाल का गणित था और वो फेल हो गया वो अन्ना ने फेल कर दिया और वो फेल हो गया वो अन्ना ने फेल कर दिया और वो फेल हो गया वो अन्ना ने फेल कर दिया अन्ना भाग गया और वहां से मैंने वो ब्लॉग अन्ना भाग गया और वहां से मैंने वो ब्लॉग अन्ना भाग गया और वहां से मैंने वो ब्लॉग लिखा ना उसकी वजह से केजरीवाल के सपने लिखा ना उसकी वजह से केजरीवाल के सपने लिखा ना उसकी वजह से केजरीवाल के सपने सारे धाराशाही हो गए सारे धाराशाही हो गए सारे धाराशाही हो गए जिस ब्लॉग को ये कहा गया कि वो वो अन्ना जिस ब्लॉग को ये कहा गया कि वो वो अन्ना जिस ब्लॉग को ये कहा गया कि वो वो अन्ना ने नहीं कहा है वो आपने अपनी मर्जी के ने नहीं कहा है वो आपने अपनी मर्जी के ने नहीं कहा है वो आपने अपनी मर्जी के हस्ताक्षर में लिखा हुआ मराठी ब्लॉग मैंने हस्ताक्षर में लिखा हुआ मराठी ब्लॉग मैंने हस्ताक्षर में लिखा हुआ मराठी ब्लॉग मैंने डाल दिया दूसरे दिन जिसमें किशन हजारे की डाल दिया दूसरे दिन जिसमें किशन हजारे की डाल दिया दूसरे दिन जिसमें किशन हजारे की सिग्नेचर है नीचे
सिग्नेचर है नीचे सिग्नेचर है नीचे तो इसलिए अच्छा हुआ कि उन्होंने लिखा था तो इसलिए अच्छा हुआ कि उन्होंने लिखा था तो इसलिए अच्छा हुआ कि उन्होंने लिखा था खुद खुद खुद तो उसके ऊपर कोई किसी का आर्गुमेंट ही तो उसके ऊपर कोई किसी का आर्गुमेंट ही तो उसके ऊपर कोई किसी का आर्गुमेंट ही नहीं रहा नहीं रहा नहीं रहा लेकिन ये आर्गुमेंट दिया जा सकता है कि तब लेकिन ये आर्गुमेंट दिया जा सकता है कि तब लेकिन ये आर्गुमेंट दिया जा सकता है कि तब से अगर अब हम आ जाए कट टू नाउ जब आम आदमी से अगर अब हम आ जाए कट टू नाउ जब आम आदमी से अगर अब हम आ जाए कट टू नाउ जब आम आदमी पार्टी बनी और आम आदमी पार्टी से फिर पार्टी बनी और आम आदमी पार्टी से फिर पार्टी बनी और आम आदमी पार्टी से फिर धीरे-धीरे करके लोग गए भी और आए भी वो ये धीरे-धीरे करके लोग गए भी और आए भी वो ये धीरे-धीरे करके लोग गए भी और आए भी वो ये कहेंगे कि देखिए अगर हम आरएसएस के अगर हम कहेंगे कि देखिए अगर हम आरएसएस के अगर हम कहेंगे कि देखिए अगर हम आरएसएस के अगर हम बी टीम या बीजेपी की बी टीम अगर हम होते बी टीम या बीजेपी की बी टीम अगर हम होते बी टीम या बीजेपी की बी टीम अगर हम होते तो हमारे ऊपर इतनी शराब नीति को लेकर जो तो हमारे ऊपर इतनी शराब नीति को लेकर जो तो हमारे ऊपर इतनी शराब नीति को लेकर जो हमारे ऊपर केसेस लगे हैं। हमें सबको जेल हमारे ऊपर केसेस लगे हैं। हमें सबको जेल हमारे ऊपर केसेस लगे हैं। हमें सबको जेल भेजा गया। वो कहते हैं ना केजरीवाल कि
भेजा गया। वो कहते हैं ना केजरीवाल कि भेजा गया। वो कहते हैं ना केजरीवाल कि कांग्रेस के तो किसी को नहीं भेजा गया। कांग्रेस के तो किसी को नहीं भेजा गया। कांग्रेस के तो किसी को नहीं भेजा गया। देखिए हमें तो भेजा गया है। हमें जेल भेजा देखिए हमें तो भेजा गया है। हमें जेल भेजा देखिए हमें तो भेजा गया है। हमें जेल भेजा गया है और हमारे ऊपर लगातार हमारी पार्टी गया है और हमारे ऊपर लगातार हमारी पार्टी गया है और हमारे ऊपर लगातार हमारी पार्टी को खत्म किया जा रहा है। अब हमारे सांसद को खत्म किया जा रहा है। अब हमारे सांसद को खत्म किया जा रहा है। अब हमारे सांसद जो है राज्यसभा से तोड़ लिए गए हैं। तो वो जो है राज्यसभा से तोड़ लिए गए हैं। तो वो जो है राज्यसभा से तोड़ लिए गए हैं। तो वो ये अपना आर्गुमेंट दे सकते हैं और जो दिया ये अपना आर्गुमेंट दे सकते हैं और जो दिया ये अपना आर्गुमेंट दे सकते हैं और जो दिया जाता है कि कि हम तो आरएसएस या बीजेपी की जाता है कि कि हम तो आरएसएस या बीजेपी की जाता है कि कि हम तो आरएसएस या बीजेपी की बी टीम हमें कहा जाता है। लेकिन अगर ऐसा बी टीम हमें कहा जाता है। लेकिन अगर ऐसा बी टीम हमें कहा जाता है। लेकिन अगर ऐसा होता तो हमारे साथ यह नहीं हो रहा होता। होता तो हमारे साथ यह नहीं हो रहा होता। होता तो हमारे साथ यह नहीं हो रहा होता। फिर फिर फिर असली झगड़ा भाई भाइयों में होता है। असली झगड़ा भाई भाइयों में होता है। असली झगड़ा भाई भाइयों में होता है। आप किसी भी कोर्ट में जाइए। अनजान दो लोग आप किसी भी कोर्ट में जाइए। अनजान दो लोग आप किसी भी कोर्ट में जाइए। अनजान दो लोग एक दूसरे के खिलाफ सिविल वो नहीं करते एक दूसरे के खिलाफ सिविल वो नहीं करते एक दूसरे के खिलाफ सिविल वो नहीं करते फाइल फाइल फाइल की याचिका कि जिसमें संपत्ति का मैटर हो
की याचिका कि जिसमें संपत्ति का मैटर हो की याचिका कि जिसमें संपत्ति का मैटर हो पावर हो मनी हो इसके ऊपर जो झगड़ा करते पावर हो मनी हो इसके ऊपर जो झगड़ा करते पावर हो मनी हो इसके ऊपर जो झगड़ा करते हैं वो भाई होते हैं ज्यादातर या दोस्त हैं वो भाई होते हैं ज्यादातर या दोस्त हैं वो भाई होते हैं ज्यादातर या दोस्त होते हैं या पार्टनर्स होते हैं इन क्राइम होते हैं या पार्टनर्स होते हैं इन क्राइम होते हैं या पार्टनर्स होते हैं इन क्राइम हम हम हम और आपको यह मालूम होगा ये ये अगर केजरीवाल और आपको यह मालूम होगा ये ये अगर केजरीवाल और आपको यह मालूम होगा ये ये अगर केजरीवाल का सत्य माने तो संजय जोशी के लिए क्या का सत्य माने तो संजय जोशी के लिए क्या का सत्य माने तो संजय जोशी के लिए क्या कहेंगे आप कहेंगे आप कहेंगे आप वो तो आरएसएस के हैं प्रचारक रहे हैं मोदी वो तो आरएसएस के हैं प्रचारक रहे हैं मोदी वो तो आरएसएस के हैं प्रचारक रहे हैं मोदी जी के साथ जी के साथ जी के साथ जब झगड़ा हुआ तो सत्ता से सबसे दूर गुरु जब झगड़ा हुआ तो सत्ता से सबसे दूर गुरु जब झगड़ा हुआ तो सत्ता से सबसे दूर गुरु संजय जोशी हुए तो सबसे करीबी है उसी से संजय जोशी हुए तो सबसे करीबी है उसी से संजय जोशी हुए तो सबसे करीबी है उसी से झगड़ा होता है। उसी को जेल में कांग्रेस झगड़ा होता है। उसी को जेल में कांग्रेस झगड़ा होता है। उसी को जेल में कांग्रेस को क्यों नहीं डालते? क्योंकि हमेशा को क्यों नहीं डालते? क्योंकि हमेशा को क्यों नहीं डालते? क्योंकि हमेशा दुश्मन ही रहे वो दुश्मन ही रहे वो दुश्मन ही रहे वो तो कांग्रेस का कोई लेना देना नहीं है। ये
तो कांग्रेस का कोई लेना देना नहीं है। ये तो कांग्रेस का कोई लेना देना नहीं है। ये तो अपना है। तो केजरीवाल का जो गणित था तो अपना है। तो केजरीवाल का जो गणित था तो अपना है। तो केजरीवाल का जो गणित था उसके हिसाब से उनको अपना तानाशाह खुद की उसके हिसाब से उनको अपना तानाशाह खुद की उसके हिसाब से उनको अपना तानाशाह खुद की तानाशाही लानी थी। वो ना ला सके तो फिर तानाशाही लानी थी। वो ना ला सके तो फिर तानाशाही लानी थी। वो ना ला सके तो फिर उन्होंने कहा कि देश में मोदी दिल्ली में उन्होंने कहा कि देश में मोदी दिल्ली में उन्होंने कहा कि देश में मोदी दिल्ली में अरविंद देश में नरेंद्र दिल्ली में अरविंद अरविंद देश में नरेंद्र दिल्ली में अरविंद अरविंद देश में नरेंद्र दिल्ली में अरविंद ये कहा। हम ये कहा। हम ये कहा। हम फिर दिल्ली में पेट नहीं भरा तो पंजाब फिर दिल्ली में पेट नहीं भरा तो पंजाब फिर दिल्ली में पेट नहीं भरा तो पंजाब पंजाब का इलेक्शन एक स्टडी केस है। केस पंजाब का इलेक्शन एक स्टडी केस है। केस पंजाब का इलेक्शन एक स्टडी केस है। केस स्टडी है क्योंकि वह केस स्टडी इसलिए है स्टडी है क्योंकि वह केस स्टडी इसलिए है स्टडी है क्योंकि वह केस स्टडी इसलिए है क्योंकि पंजाब से उन्होंने पगड इंडिया खोल क्योंकि पंजाब से उन्होंने पगड इंडिया खोल क्योंकि पंजाब से उन्होंने पगड इंडिया खोल डाली इलेक्शन तंत्र का यूज़ करा बीजेपी ने
डाली इलेक्शन तंत्र का यूज़ करा बीजेपी ने डाली इलेक्शन तंत्र का यूज़ करा बीजेपी ने वो खुद के पास सत्ता लेके नहीं किया वो वो खुद के पास सत्ता लेके नहीं किया वो वो खुद के पास सत्ता लेके नहीं किया वो टाइप नया बदला जो इलेक्शन चोरी तो पहले से टाइप नया बदला जो इलेक्शन चोरी तो पहले से टाइप नया बदला जो इलेक्शन चोरी तो पहले से कर रही है बीजेपी लेकिन पंजाब का टाइप है कर रही है बीजेपी लेकिन पंजाब का टाइप है कर रही है बीजेपी लेकिन पंजाब का टाइप है वो अलग है उन्होंने खोल दिया पगडंडी खोल वो अलग है उन्होंने खोल दिया पगडंडी खोल वो अलग है उन्होंने खोल दिया पगडंडी खोल दी अब नेक्स्ट में वो उसका हाईवे बना के दी अब नेक्स्ट में वो उसका हाईवे बना के दी अब नेक्स्ट में वो उसका हाईवे बना के खुद आएंगे ऐसे कई राज्यों में उन्होंने खुद आएंगे ऐसे कई राज्यों में उन्होंने खुद आएंगे ऐसे कई राज्यों में उन्होंने तो आपको ये लगता है कि आम आदमी पार्टी तो आपको ये लगता है कि आम आदमी पार्टी तो आपको ये लगता है कि आम आदमी पार्टी अस्तित्व में इसलिए आई है आरएसएस बीजेपी अस्तित्व में इसलिए आई है आरएसएस बीजेपी अस्तित्व में इसलिए आई है आरएसएस बीजेपी उसको इसलिए लेके आए खास तौर पे आए बीजेपी उसको इसलिए लेके आए खास तौर पे आए बीजेपी उसको इसलिए लेके आए खास तौर पे आए बीजेपी अगर मैं ना कहूं कि जहां-जहां कांग्रेस अगर मैं ना कहूं कि जहां-जहां कांग्रेस अगर मैं ना कहूं कि जहां-जहां कांग्रेस मजबूत है वहांजहां बीजेपी नहीं आ सकती है मजबूत है वहांजहां बीजेपी नहीं आ सकती है मजबूत है वहांजहां बीजेपी नहीं आ सकती है डायरेक्टली वहां आम आदमी पार्टी आए और फिर डायरेक्टली वहां आम आदमी पार्टी आए और फिर डायरेक्टली वहां आम आदमी पार्टी आए और फिर उससे सत्ता सत्ता ली जाए और फिर वहां से
उससे सत्ता सत्ता ली जाए और फिर वहां से उससे सत्ता सत्ता ली जाए और फिर वहां से ऐसा पहले था लेकिन बाद में मोदी आने के ऐसा पहले था लेकिन बाद में मोदी आने के ऐसा पहले था लेकिन बाद में मोदी आने के बाद सारे इक्वेशन बदल गए। मोदी जी को बाद सारे इक्वेशन बदल गए। मोदी जी को बाद सारे इक्वेशन बदल गए। मोदी जी को इजराइल का सपोर्ट था। इजराइल का सपोर्ट था। इजराइल का सपोर्ट था। एक डीप स्टेट का सपोर्ट था और उन्होंने एक डीप स्टेट का सपोर्ट था और उन्होंने एक डीप स्टेट का सपोर्ट था और उन्होंने अलग अपने हाईवेज ओपन किए थे। लेकिन उसमें अलग अपने हाईवेज ओपन किए थे। लेकिन उसमें अलग अपने हाईवेज ओपन किए थे। लेकिन उसमें एक दिक्कत थी कि उसके लिए आपको देश की देश एक दिक्कत थी कि उसके लिए आपको देश की देश एक दिक्कत थी कि उसके लिए आपको देश की देश के इंटरेस्ट जो आज बिक रहे हैं जैसे तेल के इंटरेस्ट जो आज बिक रहे हैं जैसे तेल के इंटरेस्ट जो आज बिक रहे हैं जैसे तेल सामरिक ताकत रशिया आपको टेक्नोलॉजी सामरिक ताकत रशिया आपको टेक्नोलॉजी सामरिक ताकत रशिया आपको टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करता है जिसकी हथियारों की वो
ट्रांसफर करता है जिसकी हथियारों की वो ट्रांसफर करता है जिसकी हथियारों की वो सारी कॉम्प्रोमाइज करके आप वेस्ट से लेना सारी कॉम्प्रोमाइज करके आप वेस्ट से लेना सारी कॉम्प्रोमाइज करके आप वेस्ट से लेना शुरू करो अमेरिका से लेना ये कॉम्प्रोमाइज शुरू करो अमेरिका से लेना ये कॉम्प्रोमाइज शुरू करो अमेरिका से लेना ये कॉम्प्रोमाइज देश का करना है तो आपको ये मदद करेंगे तो देश का करना है तो आपको ये मदद करेंगे तो देश का करना है तो आपको ये मदद करेंगे तो ये कॉम्प्रोमाइज करने के लिए मोदी तैयार ये कॉम्प्रोमाइज करने के लिए मोदी तैयार ये कॉम्प्रोमाइज करने के लिए मोदी तैयार थे तो उनको केजरीवाल की कोई जरूरत ही नहीं थे तो उनको केजरीवाल की कोई जरूरत ही नहीं थे तो उनको केजरीवाल की कोई जरूरत ही नहीं थी और फिर एक बार सत्ता और संपत्ति आ जाती थी और फिर एक बार सत्ता और संपत्ति आ जाती थी और फिर एक बार सत्ता और संपत्ति आ जाती है आपको देश की है आपको देश की है आपको देश की तो फिर आरएसएस भी मोदी के साथ खींचती चली तो फिर आरएसएस भी मोदी के साथ खींचती चली तो फिर आरएसएस भी मोदी के साथ खींचती चली गई। गई। गई। लेकिन बीजेपी आरएसएस को क्यों जरूरत होगी लेकिन बीजेपी आरएसएस को क्यों जरूरत होगी लेकिन बीजेपी आरएसएस को क्यों जरूरत होगी अरविंद केजरीवाल की? अरविंद केजरीवाल की? अरविंद केजरीवाल की? नहीं नहीं वो खत्म हो गई ना। मैंने कहा कि नहीं नहीं वो खत्म हो गई ना। मैंने कहा कि नहीं नहीं वो खत्म हो गई ना। मैंने कहा कि उसकी खत्म हो गई। लेकिन अब उनको उसकी खत्म हो गई। लेकिन अब उनको उसकी खत्म हो गई। लेकिन अब उनको जैसे केजरीवाल ने कई लोगों को यूज़ एंड जैसे केजरीवाल ने कई लोगों को यूज़ एंड जैसे केजरीवाल ने कई लोगों को यूज़ एंड ट्रो किया वैसे ही जो बड़ी ताकत देखिए ऐसे
ट्रो किया वैसे ही जो बड़ी ताकत देखिए ऐसे ट्रो किया वैसे ही जो बड़ी ताकत देखिए ऐसे लोगों में अपॉर्चुनिस्ट और राइट विंग लोगों में अपॉर्चुनिस्ट और राइट विंग लोगों में अपॉर्चुनिस्ट और राइट विंग पावरफुल जो फंडामेंटलिस्ट होते हैं। चाहे पावरफुल जो फंडामेंटलिस्ट होते हैं। चाहे पावरफुल जो फंडामेंटलिस्ट होते हैं। चाहे वो केजरीवाल हो, चाहे मोदी हो, चाहे वो केजरीवाल हो, चाहे मोदी हो, चाहे वो केजरीवाल हो, चाहे मोदी हो, चाहे आरएसएस हो। वो लोग अपने से पावरफुल होते आरएसएस हो। वो लोग अपने से पावरफुल होते आरएसएस हो। वो लोग अपने से पावरफुल होते हैं। उनके पैर छूते हैं और अपने से दुर्बल हैं। उनके पैर छूते हैं और अपने से दुर्बल हैं। उनके पैर छूते हैं और अपने से दुर्बल होते हैं। उनको कुचल डालते हैं। जो होते हैं। उनको कुचल डालते हैं। जो होते हैं। उनको कुचल डालते हैं। जो केजरीवाल ने अपने से दुर्बलों के साथ किया केजरीवाल ने अपने से दुर्बलों के साथ किया केजरीवाल ने अपने से दुर्बलों के साथ किया और अपने पावरफुलों के साथ किया वही मोदी और अपने पावरफुलों के साथ किया वही मोदी और अपने पावरफुलों के साथ किया वही मोदी जी ने अपने दुर्बलों के साथ किया और अपने जी ने अपने दुर्बलों के साथ किया और अपने जी ने अपने दुर्बलों के साथ किया और अपने पावरफुलों के साथ कर रहे हैं। तो केजरीवाल पावरफुलों के साथ कर रहे हैं। तो केजरीवाल पावरफुलों के साथ कर रहे हैं। तो केजरीवाल दुर्बल हो गए मोदी के सामने। तो उनको कुचल दुर्बल हो गए मोदी के सामने। तो उनको कुचल दुर्बल हो गए मोदी के सामने। तो उनको कुचल जाना ही था। जाना ही था। जाना ही था। तो आप क्या फ्यूचर देख रहे हैं आम आदमी
तो आप क्या फ्यूचर देख रहे हैं आम आदमी तो आप क्या फ्यूचर देख रहे हैं आम आदमी पार्टी का? पार्टी का? पार्टी का? आम आदमी पार्टी एक ऐसी न्यूसेंस वैल्यू आम आदमी पार्टी एक ऐसी न्यूसेंस वैल्यू आम आदमी पार्टी एक ऐसी न्यूसेंस वैल्यू लेकर पैदा हुई है कि जो जिसमें डीएनए लेकर पैदा हुई है कि जो जिसमें डीएनए लेकर पैदा हुई है कि जो जिसमें डीएनए बेसिकली आरएसएस का है। अब कॉकरोच जनता बेसिकली आरएसएस का है। अब कॉकरोच जनता बेसिकली आरएसएस का है। अब कॉकरोच जनता पार्टी जो डिजिटल आ गई है वो आम आदमी पार्टी जो डिजिटल आ गई है वो आम आदमी पार्टी जो डिजिटल आ गई है वो आम आदमी पार्टी का ही स्पेस ऑक्यूपेशन है पार्टी का ही स्पेस ऑक्यूपेशन है पार्टी का ही स्पेस ऑक्यूपेशन है जो आज यूथ जो निरा आप देखिए वो जो उसके जो जो आज यूथ जो निरा आप देखिए वो जो उसके जो जो आज यूथ जो निरा आप देखिए वो जो उसके जो मेन है दीप के साहब उनकी बायो देखिए मेन है दीप के साहब उनकी बायो देखिए मेन है दीप के साहब उनकी बायो देखिए उन्होंने गायब कर दिया लेकिन उसमें बायो उन्होंने गायब कर दिया लेकिन उसमें बायो उन्होंने गायब कर दिया लेकिन उसमें बायो आपको मैंने भेज दिया है उसमें उन्होंने आपको मैंने भेज दिया है उसमें उन्होंने आपको मैंने भेज दिया है उसमें उन्होंने सारा काम जो लाइफ में किया है वो आम आदमी सारा काम जो लाइफ में किया है वो आम आदमी सारा काम जो लाइफ में किया है वो आम आदमी पार्टी के साथ किया है
पार्टी के साथ किया है पार्टी के साथ किया है वो दिल्ली के मुख्यमंत्री के कंसलटेंट है। वो दिल्ली के मुख्यमंत्री के कंसलटेंट है। वो दिल्ली के मुख्यमंत्री के कंसलटेंट है। फिर आम आदमी पार्टी के साथ काम किया है। फिर आम आदमी पार्टी के साथ काम किया है। फिर आम आदमी पार्टी के साथ काम किया है। फिर उन्होंने सारे काम आम आदमी एजुकेशन फिर उन्होंने सारे काम आम आदमी एजुकेशन फिर उन्होंने सारे काम आम आदमी एजुकेशन डिपार्टमेंट के साथ काम किया है। तो यह डिपार्टमेंट के साथ काम किया है। तो यह डिपार्टमेंट के साथ काम किया है। तो यह क्या आप कह रहे हैं आम आदमी पार्टी की बी क्या आप कह रहे हैं आम आदमी पार्टी की बी क्या आप कह रहे हैं आम आदमी पार्टी की बी टीम है? टीम है? टीम है? हां हां आप मैं आपको लोगों को यह चेतावनी हां हां आप मैं आपको लोगों को यह चेतावनी हां हां आप मैं आपको लोगों को यह चेतावनी फिर एक बार देना चाहता हूं। 2011 के बाद फिर एक बार देना चाहता हूं। 2011 के बाद फिर एक बार देना चाहता हूं। 2011 के बाद ऐसी स्थिति में देश में कोई बड़ा आंदोलन ऐसी स्थिति में देश में कोई बड़ा आंदोलन ऐसी स्थिति में देश में कोई बड़ा आंदोलन अगर खड़ा हो सकता है तो वो कॉकरोच जनता अगर खड़ा हो सकता है तो वो कॉकरोच जनता अगर खड़ा हो सकता है तो वो कॉकरोच जनता पार्टी नहीं है। क्योंकि उसको एक फिलॉसफी पार्टी नहीं है। क्योंकि उसको एक फिलॉसफी पार्टी नहीं है। क्योंकि उसको एक फिलॉसफी होनी चाहिए। देखिए उनकी जो मांगे हैं होनी चाहिए। देखिए उनकी जो मांगे हैं होनी चाहिए। देखिए उनकी जो मांगे हैं उसमें मुसलमानों के लिए क्या है? उसमें मुसलमानों के लिए क्या है? उसमें मुसलमानों के लिए क्या है? जबकि सबसे ज्यादा भुगत भोगी मुसलमान है।
जबकि सबसे ज्यादा भुगत भोगी मुसलमान है। जबकि सबसे ज्यादा भुगत भोगी मुसलमान है। क्या है? वो सेम राइट विंग स्टाइल जरा आज क्या है? वो सेम राइट विंग स्टाइल जरा आज क्या है? वो सेम राइट विंग स्टाइल जरा आज से हटके से हटके से हटके यानी आपने कोलगेट में वो स्वाद नहीं है यानी आपने कोलगेट में वो स्वाद नहीं है यानी आपने कोलगेट में वो स्वाद नहीं है इसलिए क्लोज अप हिंदुस्तान लीवर ही ला रही इसलिए क्लोज अप हिंदुस्तान लीवर ही ला रही इसलिए क्लोज अप हिंदुस्तान लीवर ही ला रही है। तो क्रॉकरोच जनता पार्टी आज की आम है। तो क्रॉकरोच जनता पार्टी आज की आम है। तो क्रॉकरोच जनता पार्टी आज की आम आदमी पार्टी है। आम आदमी पार्टी हमेशा आदमी पार्टी है। आम आदमी पार्टी हमेशा आदमी पार्टी है। आम आदमी पार्टी हमेशा जैसे आरएसएस ना आम आदमी पार्टी हो या और जैसे आरएसएस ना आम आदमी पार्टी हो या और जैसे आरएसएस ना आम आदमी पार्टी हो या और कोई हो या विश्व हिंदू परिषद हो फिर बजरंग कोई हो या विश्व हिंदू परिषद हो फिर बजरंग कोई हो या विश्व हिंदू परिषद हो फिर बजरंग दल हो फिर हिंदू युवा वाहिनी हो फिर हिंदू दल हो फिर हिंदू युवा वाहिनी हो फिर हिंदू दल हो फिर हिंदू युवा वाहिनी हो फिर हिंदू जागरण मंच हो फिर हिंदू हिंदू हो राष्ट्र जागरण मंच हो फिर हिंदू हिंदू हो राष्ट्र जागरण मंच हो फिर हिंदू हिंदू हो राष्ट्र प्रथम हो ऐसे कोई ऑर्गेनाइजेशन करके अपनी
प्रथम हो ऐसे कोई ऑर्गेनाइजेशन करके अपनी प्रथम हो ऐसे कोई ऑर्गेनाइजेशन करके अपनी स्पेस ऑक्यूुपाई करती रहती है। वैसे आम स्पेस ऑक्यूुपाई करती रहती है। वैसे आम स्पेस ऑक्यूुपाई करती रहती है। वैसे आम आदमी पार्टी की भी है कि वो अपने एक आदमी पार्टी की भी है कि वो अपने एक आदमी पार्टी की भी है कि वो अपने एक अमीबिक वो है वो डिसेंट्री देश को अमीबिक वो है वो डिसेंट्री देश को अमीबिक वो है वो डिसेंट्री देश को वो नया अमीबा फैलाती रहेगी। तो कॉकरोच वो नया अमीबा फैलाती रहेगी। तो कॉकरोच वो नया अमीबा फैलाती रहेगी। तो कॉकरोच जनता पार्टी उसी का हिस्सा है और वो मुझे जनता पार्टी उसी का हिस्सा है और वो मुझे जनता पार्टी उसी का हिस्सा है और वो मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है। मैं इतना मंच पे इसमें कोई संदेह नहीं है। मैं इतना मंच पे इसमें कोई संदेह नहीं है। मैं इतना मंच पे बोल रहा हूं तो उनका बायोडटा डिक्लेअर बोल रहा हूं तो उनका बायोडटा डिक्लेअर बोल रहा हूं तो उनका बायोडटा डिक्लेअर करें करें करें और मैं यहां पर अपनेप जो ऑडियंस है उसको और मैं यहां पर अपनेप जो ऑडियंस है उसको और मैं यहां पर अपनेप जो ऑडियंस है उसको यही बता दूं कि जिनको नहीं पता है कि ये यही बता दूं कि जिनको नहीं पता है कि ये यही बता दूं कि जिनको नहीं पता है कि ये कॉकरोच पार्टी क्या है? जब सीजी कॉकरोच पार्टी क्या है? जब सीजी कॉकरोच पार्टी क्या है? जब सीजी ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। कि सीजीआई ने जब कॉकरोच वाला जो कमेंट
कि सीजीआई ने जब कॉकरोच वाला जो कमेंट कि सीजीआई ने जब कॉकरोच वाला जो कमेंट किया कि ये जो देश के युवा हैं बेरोजगार किया कि ये जो देश के युवा हैं बेरोजगार किया कि ये जो देश के युवा हैं बेरोजगार युवा वो दरअसल कॉकरोच है। कुछ मीडिया में युवा वो दरअसल कॉकरोच है। कुछ मीडिया में युवा वो दरअसल कॉकरोच है। कुछ मीडिया में चले जाते हैं। कुछ सोशल मीडिया में चले चले जाते हैं। कुछ सोशल मीडिया में चले चले जाते हैं। कुछ सोशल मीडिया में चले जाते हैं। कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते जाते हैं। कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते जाते हैं। कुछ आरटीआई एक्टिविस्ट बन जाते हैं। तो उसके बाद एक तरह का एक एक मुहिम हैं। तो उसके बाद एक तरह का एक एक मुहिम हैं। तो उसके बाद एक तरह का एक एक मुहिम चलाई गई। उसके बाद भारतीय कॉकरोच पार्टी चलाई गई। उसके बाद भारतीय कॉकरोच पार्टी चलाई गई। उसके बाद भारतीय कॉकरोच पार्टी जनता पार्टी बनाई गई। उसका Twitter हैंडल जनता पार्टी बनाई गई। उसका Twitter हैंडल जनता पार्टी बनाई गई। उसका Twitter हैंडल है। उसका Instagram हैंडल है। बाकायदा तौर है। उसका Instagram हैंडल है। बाकायदा तौर है। उसका Instagram हैंडल है। बाकायदा तौर पर दो लोग हैं जिनके नाम हमारे सामने हैं पर दो लोग हैं जिनके नाम हमारे सामने हैं पर दो लोग हैं जिनके नाम हमारे सामने हैं जो इसको रन कर रहे हैं। उन्होंने एक जो इसको रन कर रहे हैं। उन्होंने एक जो इसको रन कर रहे हैं। उन्होंने एक एजेंडा बाकायदा तौर पर अपने देश के सामने एजेंडा बाकायदा तौर पर अपने देश के सामने एजेंडा बाकायदा तौर पर अपने देश के सामने रखा है। बड़े-बड़े लोग मेंबरशिप लेकर उसको रखा है। बड़े-बड़े लोग मेंबरशिप लेकर उसको रखा है। बड़े-बड़े लोग मेंबरशिप लेकर उसको ज्वाइन कर रहे हैं। जॉइ करने के लिए कह ज्वाइन कर रहे हैं। जॉइ करने के लिए कह ज्वाइन कर रहे हैं। जॉइ करने के लिए कह रहे हैं और लाखों से सीधे मिलियंस में
रहे हैं और लाखों से सीधे मिलियंस में रहे हैं और लाखों से सीधे मिलियंस में हजारों से लाखों लाखों से मिलियन में उनको हजारों से लाखों लाखों से मिलियन में उनको हजारों से लाखों लाखों से मिलियन में उनको बहुत जाने में जो है वो वक्त नहीं लगा। हम बहुत जाने में जो है वो वक्त नहीं लगा। हम बहुत जाने में जो है वो वक्त नहीं लगा। हम उसी की बात कर रहे हैं कि क्या ये एक और उसी की बात कर रहे हैं कि क्या ये एक और उसी की बात कर रहे हैं कि क्या ये एक और ट्रैप है। ट्रैप है। ट्रैप है। जी। अरे मिलियन फॉलोअर्स इतने छोटे अवधि जी। अरे मिलियन फॉलोअर्स इतने छोटे अवधि जी। अरे मिलियन फॉलोअर्स इतने छोटे अवधि में होना यह अपने आप में समझ में आता है में होना यह अपने आप में समझ में आता है में होना यह अपने आप में समझ में आता है कि आरएसएस का वो हैंड है कि आरएसएस का वो हैंड है कि आरएसएस का वो हैंड है या आप पार्टी क्योंकि ये मिलियन जिन लोगों या आप पार्टी क्योंकि ये मिलियन जिन लोगों या आप पार्टी क्योंकि ये मिलियन जिन लोगों के हैं जो विदेश में रहते हैं ये एक तो के हैं जो विदेश में रहते हैं ये एक तो के हैं जो विदेश में रहते हैं ये एक तो संस्थापक विदेश में रहते हैं संस्थापक विदेश में रहते हैं संस्थापक विदेश में रहते हैं एक दो यूबर भी हैं जो अच्छा काम करते हैं। एक दो यूबर भी हैं जो अच्छा काम करते हैं। एक दो यूबर भी हैं जो अच्छा काम करते हैं। मैं ये नहीं कहूंगा मैं ये नहीं कहता कि मैं ये नहीं कहूंगा मैं ये नहीं कहता कि मैं ये नहीं कहूंगा मैं ये नहीं कहता कि ये अच्छा है बुरा है। आपको आम आदमी पार्टी
ये अच्छा है बुरा है। आपको आम आदमी पार्टी ये अच्छा है बुरा है। आपको आम आदमी पार्टी के साथ जाना है। आपको केजरीवाल के साथ के साथ जाना है। आपको केजरीवाल के साथ के साथ जाना है। आपको केजरीवाल के साथ जाना है। आपको आरएसएस को सॉफ्ट बनना है। जाना है। आपको आरएसएस को सॉफ्ट बनना है। जाना है। आपको आरएसएस को सॉफ्ट बनना है। सॉफ्ट आरएसएस बनना है। तो आप जाइए इनके सॉफ्ट आरएसएस बनना है। तो आप जाइए इनके सॉफ्ट आरएसएस बनना है। तो आप जाइए इनके साथ। लेकिन आपके नसीब में अलग कुछ नहीं साथ। लेकिन आपके नसीब में अलग कुछ नहीं साथ। लेकिन आपके नसीब में अलग कुछ नहीं आएगा। यही आएगा जो मोदी काल में आया। हम आएगा। यही आएगा जो मोदी काल में आया। हम आएगा। यही आएगा जो मोदी काल में आया। हम तो आप समझिए कि यह भी एक ट्रैप है विदेश तो आप समझिए कि यह भी एक ट्रैप है विदेश तो आप समझिए कि यह भी एक ट्रैप है विदेश से संचालन करने वाले लोग हैं जो आम आदमी से संचालन करने वाले लोग हैं जो आम आदमी से संचालन करने वाले लोग हैं जो आम आदमी पार्टी के साथ हमेशा जुड़े हुए हैं। और भी पार्टी के साथ हमेशा जुड़े हुए हैं। और भी पार्टी के साथ हमेशा जुड़े हुए हैं। और भी है मुझे अन्य नाम नहीं लेना है लेकिन और है मुझे अन्य नाम नहीं लेना है लेकिन और है मुझे अन्य नाम नहीं लेना है लेकिन और भी हैं। यूरोप में है या यूएस में है। तो भी हैं। यूरोप में है या यूएस में है। तो भी हैं। यूरोप में है या यूएस में है। तो अगर आप देखो आप अंधे बनकर मत दौड़ो। हम
अगर आप देखो आप अंधे बनकर मत दौड़ो। हम अगर आप देखो आप अंधे बनकर मत दौड़ो। हम आप जागृत हो जाइए और उनके साथ जा उनके साथ आप जागृत हो जाइए और उनके साथ जा उनके साथ आप जागृत हो जाइए और उनके साथ जा उनके साथ जाना मैं यह नहीं कहूंगा कि किसी पॉलिटिकल जाना मैं यह नहीं कहूंगा कि किसी पॉलिटिकल जाना मैं यह नहीं कहूंगा कि किसी पॉलिटिकल पार्टी के साथ जाना या मैं मैं बीजेपी या पार्टी के साथ जाना या मैं मैं बीजेपी या पार्टी के साथ जाना या मैं मैं बीजेपी या नहीं हूं तो आपको किसी भी पॉलिटिकल पार्टी नहीं हूं तो आपको किसी भी पॉलिटिकल पार्टी नहीं हूं तो आपको किसी भी पॉलिटिकल पार्टी के साथ अन्य पार्टी के साथ जाना या किसी अ के साथ अन्य पार्टी के साथ जाना या किसी अ के साथ अन्य पार्टी के साथ जाना या किसी अ गुट के साथ जाना जब तक उस पे बैन नहीं गुट के साथ जाना जब तक उस पे बैन नहीं गुट के साथ जाना जब तक उस पे बैन नहीं होता या संवैधानिक ढांचे के अंडर उसको होता या संवैधानिक ढांचे के अंडर उसको होता या संवैधानिक ढांचे के अंडर उसको पूरी तरह से उसको बाहर नहीं किया जाता देश पूरी तरह से उसको बाहर नहीं किया जाता देश पूरी तरह से उसको बाहर नहीं किया जाता देश से तब तक आप जा सकते हैं उसमें लेकिन आपको से तब तक आप जा सकते हैं उसमें लेकिन आपको से तब तक आप जा सकते हैं उसमें लेकिन आपको मालूम होना चाहिए क्या है मालूम होना चाहिए क्या है मालूम होना चाहिए क्या है हम्म तो आप जनता पार्टी यह समझे कि नया
हम्म तो आप जनता पार्टी यह समझे कि नया हम्म तो आप जनता पार्टी यह समझे कि नया स्वतंत्रता संग्राम है। तो 2011 में जो स्वतंत्रता संग्राम है। तो 2011 में जो स्वतंत्रता संग्राम है। तो 2011 में जो समझा था इंडिया अगेंस्ट करप्शन वही यह नए समझा था इंडिया अगेंस्ट करप्शन वही यह नए समझा था इंडिया अगेंस्ट करप्शन वही यह नए नाम से आए। यह कोई रजिस्टर ऑर्गेनाइजेशन नाम से आए। यह कोई रजिस्टर ऑर्गेनाइजेशन नाम से आए। यह कोई रजिस्टर ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। ये सारे के सारे सर्वदेव नहीं है। ये सारे के सारे सर्वदेव नहीं है। ये सारे के सारे सर्वदेव नमस्कारा केशवं प्रतिगच्छति। तो अंततः ये नमस्कारा केशवं प्रतिगच्छति। तो अंततः ये नमस्कारा केशवं प्रतिगच्छति। तो अंततः ये केशव के पास जाएगा या केशव बेराम केशव के पास जाएगा या केशव बेराम केशव के पास जाएगा या केशव बेराम हेडगेवार। हेडगेवार। हेडगेवार। ओ बहुत इंपॉर्टेंट बात बड़ा इंटरेस्टिंग है ओ बहुत इंपॉर्टेंट बात बड़ा इंटरेस्टिंग है ओ बहुत इंपॉर्टेंट बात बड़ा इंटरेस्टिंग है ये। लेकिन ये बताइए कि ये स्पेस विपक्ष ये। लेकिन ये बताइए कि ये स्पेस विपक्ष ये। लेकिन ये बताइए कि ये स्पेस विपक्ष क्यों नहीं ऑक्यूुपाई कर पा रहा? क्यों नहीं ऑक्यूुपाई कर पा रहा? क्यों नहीं ऑक्यूुपाई कर पा रहा? विपक्ष को बुद्धि कहां है? विपक्ष इतना विपक्ष को बुद्धि कहां है? विपक्ष इतना विपक्ष को बुद्धि कहां है? विपक्ष इतना लेकिन राहुल गांधी तो युवाओं से सीधे बात लेकिन राहुल गांधी तो युवाओं से सीधे बात लेकिन राहुल गांधी तो युवाओं से सीधे बात कर कर कर देखिए राहुल गांधी अकेले क्या ही कर सकते
देखिए राहुल गांधी अकेले क्या ही कर सकते देखिए राहुल गांधी अकेले क्या ही कर सकते हैं उनकी हैं उनकी हैं उनकी लेकिन इतना तो कर सकते हैं इतनी स्पेस तो लेकिन इतना तो कर सकते हैं इतनी स्पेस तो लेकिन इतना तो कर सकते हैं इतनी स्पेस तो ऑक्यूुपाई कर सकते ऑक्यूुपाई कर सकते ऑक्यूुपाई कर सकते देखिए एक बात मैं आपको बताता हूं कि राहुल देखिए एक बात मैं आपको बताता हूं कि राहुल देखिए एक बात मैं आपको बताता हूं कि राहुल गांधी रियल आंदोलन करने के पीछे हैं गांधी रियल आंदोलन करने के पीछे हैं गांधी रियल आंदोलन करने के पीछे हैं हम हम हम क्योंकि प्रियंका ने भी ऐलान कर दिया है क्योंकि प्रियंका ने भी ऐलान कर दिया है क्योंकि प्रियंका ने भी ऐलान कर दिया है डिजिटल आंदोलन के पीछे उनको वो मुझे मालूम डिजिटल आंदोलन के पीछे उनको वो मुझे मालूम डिजिटल आंदोलन के पीछे उनको वो मुझे मालूम मुझे या मालूम है कि डिजिटल ऐसा आंदोलन मुझे या मालूम है कि डिजिटल ऐसा आंदोलन मुझे या मालूम है कि डिजिटल ऐसा आंदोलन करना आसान भी है और मुश्किल भी है। उसकी करना आसान भी है और मुश्किल भी है। उसकी करना आसान भी है और मुश्किल भी है। उसकी दो मुश्किलें हैं। कोई भी हाईजैक कर सकता दो मुश्किलें हैं। कोई भी हाईजैक कर सकता दो मुश्किलें हैं। कोई भी हाईजैक कर सकता है। यह मिलियन है ना यह आरएसएस के और या है। यह मिलियन है ना यह आरएसएस के और या है। यह मिलियन है ना यह आरएसएस के और या बड़ी ताकतों की मदद के सिवाय आ ही नहीं
बड़ी ताकतों की मदद के सिवाय आ ही नहीं बड़ी ताकतों की मदद के सिवाय आ ही नहीं सकते सकते सकते इतने दिनों में इतने दिनों में इतने दिनों में क्या वो लोग जो पहले इस इंडिया अगेंस्ट क्या वो लोग जो पहले इस इंडिया अगेंस्ट क्या वो लोग जो पहले इस इंडिया अगेंस्ट करप्शन मुहिम का हिस्सा थे उस वक्त उन्हें करप्शन मुहिम का हिस्सा थे उस वक्त उन्हें करप्शन मुहिम का हिस्सा थे उस वक्त उन्हें लगा कि कांग्रेस से बुरा कोई नहीं हो सकता लगा कि कांग्रेस से बुरा कोई नहीं हो सकता लगा कि कांग्रेस से बुरा कोई नहीं हो सकता और उसका हिस्सा रहे कांग्रेस सत्ता से गई और उसका हिस्सा रहे कांग्रेस सत्ता से गई और उसका हिस्सा रहे कांग्रेस सत्ता से गई अब वो लोग उसी भारतीय जनता पार्टी को अब वो लोग उसी भारतीय जनता पार्टी को अब वो लोग उसी भारतीय जनता पार्टी को क्रिटिसाइज कर रहे हैं जो मुसलमानों के क्रिटिसाइज कर रहे हैं जो मुसलमानों के क्रिटिसाइज कर रहे हैं जो मुसलमानों के साथ दलितों के साथ इनके साथ हो रहा है कि साथ दलितों के साथ इनके साथ हो रहा है कि साथ दलितों के साथ इनके साथ हो रहा है कि एजेंसीज का पे कब्जा कर लिया क्या उन एजेंसीज का पे कब्जा कर लिया क्या उन एजेंसीज का पे कब्जा कर लिया क्या उन लोगों की आप हिपोक्रेसी नहीं मानते हैं लोगों की आप हिपोक्रेसी नहीं मानते हैं लोगों की आप हिपोक्रेसी नहीं मानते हैं इसको? इसको? इसको? देखिए इस देश में अच्छे-अच्छे लोग जो देखिए इस देश में अच्छे-अच्छे लोग जो देखिए इस देश में अच्छे-अच्छे लोग जो डेमोक्रेसी पे विश्वास रखते हैं। सो कॉल्ड
डेमोक्रेसी पे विश्वास रखते हैं। सो कॉल्ड डेमोक्रेसी पे विश्वास रखते हैं। सो कॉल्ड सो कॉल्ड संविधान पे रखते हैं उनको भी ना सो कॉल्ड संविधान पे रखते हैं उनको भी ना सो कॉल्ड संविधान पे रखते हैं उनको भी ना मुसलमानों के प्रति इतना प्यार नहीं है। मुसलमानों के प्रति इतना प्यार नहीं है। मुसलमानों के प्रति इतना प्यार नहीं है। आप उनको इक्वल सिटीजन वो भी नहीं मानते। आप उनको इक्वल सिटीजन वो भी नहीं मानते। आप उनको इक्वल सिटीजन वो भी नहीं मानते। आप समझ जाइए कि कांग्रेस के मैं बड़े आप समझ जाइए कि कांग्रेस के मैं बड़े आप समझ जाइए कि कांग्रेस के मैं बड़े नेता, बड़े वकील कांग्रेस में काम करते नेता, बड़े वकील कांग्रेस में काम करते नेता, बड़े वकील कांग्रेस में काम करते हैं। वो भी ऐसे सनातनी है। कट्टर सनातनी हैं। वो भी ऐसे सनातनी है। कट्टर सनातनी हैं। वो भी ऐसे सनातनी है। कट्टर सनातनी है कि वो मुसलमानों को आज भी मिलेंच वगैरह है कि वो मुसलमानों को आज भी मिलेंच वगैरह है कि वो मुसलमानों को आज भी मिलेंच वगैरह ऐसे शब्दों से वो करते हैं। ऐसे शब्दों से वो करते हैं। ऐसे शब्दों से वो करते हैं। तो कांग्रेस में अंतर्विरोध इतने हैं तो कांग्रेस में अंतर्विरोध इतने हैं तो कांग्रेस में अंतर्विरोध इतने हैं क्योंकि कांग्रेस इज़ अ डेमोक्रेटिक क्योंकि कांग्रेस इज़ अ डेमोक्रेटिक क्योंकि कांग्रेस इज़ अ डेमोक्रेटिक पार्टी। बेसिकली
पार्टी। बेसिकली पार्टी। बेसिकली वो वो ऐसी कैडर बेस पार्टी तो है नहीं। वो वो ऐसी कैडर बेस पार्टी तो है नहीं। वो वो ऐसी कैडर बेस पार्टी तो है नहीं। हम् हम् हम् हम् हम् हम् कि राहुल जी खुद भी चाहे तो कांग्रेस को कि राहुल जी खुद भी चाहे तो कांग्रेस को कि राहुल जी खुद भी चाहे तो कांग्रेस को एकदम न्यूबरल एकदम यूथ सेंट्रिक या ऐसी एकदम न्यूबरल एकदम यूथ सेंट्रिक या ऐसी एकदम न्यूबरल एकदम यूथ सेंट्रिक या ऐसी पार्टी नहीं बना सकते। पार्टी नहीं बना सकते। पार्टी नहीं बना सकते। हम् हम् हम् आप समझिए उनको दो मालगाड़ियां पांच ट्रक आप समझिए उनको दो मालगाड़ियां पांच ट्रक आप समझिए उनको दो मालगाड़ियां पांच ट्रक दो Maruti 800 और एक कैडलैग लेके आगे जाना दो Maruti 800 और एक कैडलैग लेके आगे जाना दो Maruti 800 और एक कैडलैग लेके आगे जाना है। कैडलैग उनकी है भले लेकिन ये सब सामान है। कैडलैग उनकी है भले लेकिन ये सब सामान है। कैडलैग उनकी है भले लेकिन ये सब सामान कैसे जाएगा? कैसे जाएगा? कैसे जाएगा? लेकिन राजू जी ये तो इस तरह से हुआ ना कि लेकिन राजू जी ये तो इस तरह से हुआ ना कि लेकिन राजू जी ये तो इस तरह से हुआ ना कि तब आपको वहां से कुछ मिल रहा था। वहां से तब आपको वहां से कुछ मिल रहा था। वहां से तब आपको वहां से कुछ मिल रहा था। वहां से ओपोरर्चुनिटी मिल रही थी तो आपने उसको गैब ओपोरर्चुनिटी मिल रही थी तो आपने उसको गैब ओपोरर्चुनिटी मिल रही थी तो आपने उसको गैब किया। उसका फायदा उठाया। फिर आप 2014 में
किया। उसका फायदा उठाया। फिर आप 2014 में किया। उसका फायदा उठाया। फिर आप 2014 में सत्ता बदली और शायद आपको लगा कि उसमें आप सत्ता बदली और शायद आपको लगा कि उसमें आप सत्ता बदली और शायद आपको लगा कि उसमें आप उतने कंफर्टेबल नहीं हो पा रहे हैं तो आप उतने कंफर्टेबल नहीं हो पा रहे हैं तो आप उतने कंफर्टेबल नहीं हो पा रहे हैं तो आप उनके अगेंस्ट हो गए। अब आप दूसरे तरीके से उनके अगेंस्ट हो गए। अब आप दूसरे तरीके से उनके अगेंस्ट हो गए। अब आप दूसरे तरीके से उसका फायदा ले रहे हैं। तो मतलब फायदा उसका फायदा ले रहे हैं। तो मतलब फायदा उसका फायदा ले रहे हैं। तो मतलब फायदा सिर्फ आपका हो। इधर भी रहकर हो इधर भी सिर्फ आपका हो। इधर भी रहकर हो इधर भी सिर्फ आपका हो। इधर भी रहकर हो इधर भी रहकर हो। आप सारा विपक्ष आप सारा स्पेस तो रहकर हो। आप सारा विपक्ष आप सारा स्पेस तो रहकर हो। आप सारा विपक्ष आप सारा स्पेस तो आप ही ऑक्यूुपाई कर रहे हैं कि तब भी आप ही ऑक्यूुपाई कर रहे हैं कि तब भी आप ही ऑक्यूुपाई कर रहे हैं कि तब भी हमारा था स्पेस और अब भी हमारा है स्पेस। हमारा था स्पेस और अब भी हमारा है स्पेस। हमारा था स्पेस और अब भी हमारा है स्पेस। देखिए विरोधी लोगों की स्पेस ऑक्यूुपाई देखिए विरोधी लोगों की स्पेस ऑक्यूुपाई देखिए विरोधी लोगों की स्पेस ऑक्यूुपाई करने वाले कई लोग सत्ता पक्षी फैला देता करने वाले कई लोग सत्ता पक्षी फैला देता करने वाले कई लोग सत्ता पक्षी फैला देता है। आप Twitter पे भी वगैरह देखते होंगे है। आप Twitter पे भी वगैरह देखते होंगे है। आप Twitter पे भी वगैरह देखते होंगे कि कहीं एक एक घर में दो भाई है। एक
कि कहीं एक एक घर में दो भाई है। एक कि कहीं एक एक घर में दो भाई है। एक बीजेपी में एक विरोधी में होने का नाटक कर बीजेपी में एक विरोधी में होने का नाटक कर बीजेपी में एक विरोधी में होने का नाटक कर रहा है। जो दोनों उद्योग यानी रहा है। जो दोनों उद्योग यानी रहा है। जो दोनों उद्योग यानी एंटरप्रेन्योर है। एक्चुअली उनका एम एंटरप्रेन्योर है। एक्चुअली उनका एम एंटरप्रेन्योर है। एक्चुअली उनका एम ऑब्जेक्ट अचीवमेंट एंड गोल पैसा ही है। तो ऑब्जेक्ट अचीवमेंट एंड गोल पैसा ही है। तो ऑब्जेक्ट अचीवमेंट एंड गोल पैसा ही है। तो यह सारी जो चीजें हैं ना यह अंतत आप समझिए यह सारी जो चीजें हैं ना यह अंतत आप समझिए यह सारी जो चीजें हैं ना यह अंतत आप समझिए कि अपॉर्चुनिज्म पे आती है और मैं यह कि अपॉर्चुनिज्म पे आती है और मैं यह कि अपॉर्चुनिज्म पे आती है और मैं यह मानता हूं कि उस वक्त 2011 में बीजेपी को मानता हूं कि उस वक्त 2011 में बीजेपी को मानता हूं कि उस वक्त 2011 में बीजेपी को विपक्ष मानना कोई बड़ा गलत नहीं था कदम विपक्ष मानना कोई बड़ा गलत नहीं था कदम विपक्ष मानना कोई बड़ा गलत नहीं था कदम क्योंकि बहुत सारे विपक्ष थे वो भी साथ थे क्योंकि बहुत सारे विपक्ष थे वो भी साथ थे क्योंकि बहुत सारे विपक्ष थे वो भी साथ थे क्योंकि चाहते थे कांग्रेस को बोर हो गए
क्योंकि चाहते थे कांग्रेस को बोर हो गए क्योंकि चाहते थे कांग्रेस को बोर हो गए थे 10 साल में लोग थे 10 साल में लोग थे 10 साल में लोग किस चीज के बोर हो गए थे मैं समझा नहीं आप किस चीज के बोर हो गए थे मैं समझा नहीं आप किस चीज के बोर हो गए थे मैं समझा नहीं आप समझ में मैं आया है लोगों को कई लोगों को समझ में मैं आया है लोगों को कई लोगों को समझ में मैं आया है लोगों को कई लोगों को लेकिन उन्होंने यह नहीं समझा यह नहीं उनको लेकिन उन्होंने यह नहीं समझा यह नहीं उनको लेकिन उन्होंने यह नहीं समझा यह नहीं उनको लगा कि बीजेपी की सत्ता का मतलब एक सत्ता लगा कि बीजेपी की सत्ता का मतलब एक सत्ता लगा कि बीजेपी की सत्ता का मतलब एक सत्ता परिवर्तन। उसके बाद फिर सत्ता परिवर्तन परिवर्तन। उसके बाद फिर सत्ता परिवर्तन परिवर्तन। उसके बाद फिर सत्ता परिवर्तन होगा। उसके बाद फिर उन्होंने यह समझा ही होगा। उसके बाद फिर उन्होंने यह समझा ही होगा। उसके बाद फिर उन्होंने यह समझा ही नहीं कि बहुमत में मोदी जैसे व्यक्ति वो नहीं कि बहुमत में मोदी जैसे व्यक्ति वो नहीं कि बहुमत में मोदी जैसे व्यक्ति वो सत्ता में आएंगे जो बाहरी ताकतों को सत्ता में आएंगे जो बाहरी ताकतों को सत्ता में आएंगे जो बाहरी ताकतों को हिंदुस्तान में एंट्री देंगे और बाद में हिंदुस्तान में एंट्री देंगे और बाद में हिंदुस्तान में एंट्री देंगे और बाद में हिंदुस्तान का ऐसा भट्टा बैठेगा कि कोई हिंदुस्तान का ऐसा भट्टा बैठेगा कि कोई हिंदुस्तान का ऐसा भट्टा बैठेगा कि कोई कुछ नहीं कर पाएगा। तो ये सब इतना फोर्स
कुछ नहीं कर पाएगा। तो ये सब इतना फोर्स कुछ नहीं कर पाएगा। तो ये सब इतना फोर्स ही कोई 2011 में कर ही नहीं पा रहा था। ही कोई 2011 में कर ही नहीं पा रहा था। ही कोई 2011 में कर ही नहीं पा रहा था। समझिए आप। हम समझिए आप। हम समझिए आप। हम तो 2000 अभी मैं देख रहा हूं कि 2019 तक तो 2000 अभी मैं देख रहा हूं कि 2019 तक तो 2000 अभी मैं देख रहा हूं कि 2019 तक लोगों को लग रहा था कि ये सत्ता परिवर्तन लोगों को लग रहा था कि ये सत्ता परिवर्तन लोगों को लग रहा था कि ये सत्ता परिवर्तन होगा। तो मैं यह मानता हूं कि होगा। तो मैं यह मानता हूं कि होगा। तो मैं यह मानता हूं कि अपॉर्चुनिज्म तो है लेकिन नाइविटी भी थी अपॉर्चुनिज्म तो है लेकिन नाइविटी भी थी अपॉर्चुनिज्म तो है लेकिन नाइविटी भी थी हम हम हम कि ये हमेशा यानी जबकि मनमोहन सिंह ने कि ये हमेशा यानी जबकि मनमोहन सिंह ने कि ये हमेशा यानी जबकि मनमोहन सिंह ने बोला था एक इंटरव्यू में मनमोहन सिंह जी बोला था एक इंटरव्यू में मनमोहन सिंह जी बोला था एक इंटरव्यू में मनमोहन सिंह जी ने बोला था ने बोला था ने बोला था कि आप नहीं वो नहीं उन्होंने ये बोला था कि आप नहीं वो नहीं उन्होंने ये बोला था कि आप नहीं वो नहीं उन्होंने ये बोला था कि आप हमेशा डेमोक्रेसी को ग्रांटेड मत कि आप हमेशा डेमोक्रेसी को ग्रांटेड मत कि आप हमेशा डेमोक्रेसी को ग्रांटेड मत लीजिए। हम लीजिए। हम लीजिए। हम हमेशा नहीं रहती डेमोक्रेसी और अच्छे दिन
हमेशा नहीं रहती डेमोक्रेसी और अच्छे दिन हमेशा नहीं रहती डेमोक्रेसी और अच्छे दिन ये जो चल रहे हैं यानी स्पॉरेस्ट रिजर्व ये जो चल रहे हैं यानी स्पॉरेस्ट रिजर्व ये जो चल रहे हैं यानी स्पॉरेस्ट रिजर्व है डॉलर 60 में है तो यह सब हमेशा नहीं है डॉलर 60 में है तो यह सब हमेशा नहीं है डॉलर 60 में है तो यह सब हमेशा नहीं रहेगा अगर आप उसकी रक्षा करेंगे तो रहेगा रहेगा अगर आप उसकी रक्षा करेंगे तो रहेगा रहेगा अगर आप उसकी रक्षा करेंगे तो रहेगा तो हमने रक्षा करना छोड़ दिया तो हमने रक्षा करना छोड़ दिया तो हमने रक्षा करना छोड़ दिया हम उन्हीं के हाथ मिलाएं जो इसको लूटना हम उन्हीं के हाथ मिलाएं जो इसको लूटना हम उन्हीं के हाथ मिलाएं जो इसको लूटना चाहते थे कारवा लूट गया अब बैठो चाहते थे कारवा लूट गया अब बैठो चाहते थे कारवा लूट गया अब बैठो लेकिन आप ये देखें कि लेकिन आप ये देखें कि लेकिन आप ये देखें कि अगर दिल्ली की ही बात करते हैं तो जो लोग अगर दिल्ली की ही बात करते हैं तो जो लोग अगर दिल्ली की ही बात करते हैं तो जो लोग जो मुसलमान कांग्रेस से जिनका दिल खट्टा जो मुसलमान कांग्रेस से जिनका दिल खट्टा जो मुसलमान कांग्रेस से जिनका दिल खट्टा हुआ या जो उसको एक ऑप्शन के तौर पर नहीं हुआ या जो उसको एक ऑप्शन के तौर पर नहीं हुआ या जो उसको एक ऑप्शन के तौर पर नहीं देखते थे। बीजेपी में वोट नहीं कर सकते
देखते थे। बीजेपी में वोट नहीं कर सकते देखते थे। बीजेपी में वोट नहीं कर सकते थे। उन्होंने भर-भर के वोट किया केजरीवाल थे। उन्होंने भर-भर के वोट किया केजरीवाल थे। उन्होंने भर-भर के वोट किया केजरीवाल को और एक बार नहीं दो-दो बार उन्होंने वोट को और एक बार नहीं दो-दो बार उन्होंने वोट को और एक बार नहीं दो-दो बार उन्होंने वोट किया अरविंद केजरीवाल। किया अरविंद केजरीवाल। किया अरविंद केजरीवाल। एक बात बताता हूं। केजरीवाल के पर्दे के एक बात बताता हूं। केजरीवाल के पर्दे के एक बात बताता हूं। केजरीवाल के पर्दे के पीछे रह के एक कॉकरोच जनता पार्टी भी पीछे रह के एक कॉकरोच जनता पार्टी भी पीछे रह के एक कॉकरोच जनता पार्टी भी दिल्ली में आए हैं तो भी लोग वोटिंग दिल्ली में आए हैं तो भी लोग वोटिंग दिल्ली में आए हैं तो भी लोग वोटिंग करेंगे। आशा में करेंगे। आशा में करेंगे। आशा में लोग इस स्थिति में पहुंच गए हैं। जिस लोग इस स्थिति में पहुंच गए हैं। जिस लोग इस स्थिति में पहुंच गए हैं। जिस स्थिति में एक पंगू ही पहुंचता है। यानी स्थिति में एक पंगू ही पहुंचता है। यानी स्थिति में एक पंगू ही पहुंचता है। यानी उसको हाथ, पैर, आंख, कान कुछ भी वो नहीं उसको हाथ, पैर, आंख, कान कुछ भी वो नहीं उसको हाथ, पैर, आंख, कान कुछ भी वो नहीं करता। दे आर अब अब मतलब वो लोग वो सिटीजंस करता। दे आर अब अब मतलब वो लोग वो सिटीजंस करता। दे आर अब अब मतलब वो लोग वो सिटीजंस जो हैं जो इसको सपोर्ट कर रहे हैं ऐसी ऐसे
जो हैं जो इसको सपोर्ट कर रहे हैं ऐसी ऐसे जो हैं जो इसको सपोर्ट कर रहे हैं ऐसी ऐसे जो बेतुके आंदोलन है उनको वो रियल आंदोलन जो बेतुके आंदोलन है उनको वो रियल आंदोलन जो बेतुके आंदोलन है उनको वो रियल आंदोलन को मारना चाहते हैं तो आप समझिए कि इस तरह को मारना चाहते हैं तो आप समझिए कि इस तरह को मारना चाहते हैं तो आप समझिए कि इस तरह से ही ये होता है बार-बार से ही ये होता है बार-बार से ही ये होता है बार-बार तो क्या अभी लोग ये रियलाइज कर रहे हैं कि तो क्या अभी लोग ये रियलाइज कर रहे हैं कि तो क्या अभी लोग ये रियलाइज कर रहे हैं कि ये एक आइडियोलॉजिकल पॉलिटिकल वॉर है। इट्स ये एक आइडियोलॉजिकल पॉलिटिकल वॉर है। इट्स ये एक आइडियोलॉजिकल पॉलिटिकल वॉर है। इट्स दिस इज नॉट द सिंपल थिंग। ये आप ये लड़ाई दिस इज नॉट द सिंपल थिंग। ये आप ये लड़ाई दिस इज नॉट द सिंपल थिंग। ये आप ये लड़ाई ऐसी नहीं है कि कौन विपक्ष में है, कौन ऐसी नहीं है कि कौन विपक्ष में है, कौन ऐसी नहीं है कि कौन विपक्ष में है, कौन सत्ता में है, कौन यह है बल्कि ये एक सत्ता में है, कौन यह है बल्कि ये एक सत्ता में है, कौन यह है बल्कि ये एक आईडियोलॉजी की जो है वो लड़ाई है। या आईडियोलॉजी की जो है वो लड़ाई है। या आईडियोलॉजी की जो है वो लड़ाई है। या आइडियोलॉजिकल पॉलिटिकल वॉर है। क्या इस आइडियोलॉजिकल पॉलिटिकल वॉर है। क्या इस आइडियोलॉजिकल पॉलिटिकल वॉर है। क्या इस तरीके से इस मजबूती से जब तक विपक्ष अपनी तरीके से इस मजबूती से जब तक विपक्ष अपनी तरीके से इस मजबूती से जब तक विपक्ष अपनी बात को नहीं रखेगा तब तक वो बीजेपी के
बात को नहीं रखेगा तब तक वो बीजेपी के बात को नहीं रखेगा तब तक वो बीजेपी के खिलाफ एक जो अल्टरनेटिव बनने की वो कोशिश खिलाफ एक जो अल्टरनेटिव बनने की वो कोशिश खिलाफ एक जो अल्टरनेटिव बनने की वो कोशिश कर रहा है या सत्ता में आने की वो बात कर कर रहा है या सत्ता में आने की वो बात कर कर रहा है या सत्ता में आने की वो बात कर रहा है वो तब तक नहीं कर पाएगा। तीन बातें रहा है वो तब तक नहीं कर पाएगा। तीन बातें रहा है वो तब तक नहीं कर पाएगा। तीन बातें हैं। मैं यह मानता हूं कि एक बात तो यह है हैं। मैं यह मानता हूं कि एक बात तो यह है हैं। मैं यह मानता हूं कि एक बात तो यह है कि जब तक विपक्ष केजरीवाल और शरद पवार कि जब तक विपक्ष केजरीवाल और शरद पवार कि जब तक विपक्ष केजरीवाल और शरद पवार साहब की पार्टी दोनों को बाहर करके इंडिया साहब की पार्टी दोनों को बाहर करके इंडिया साहब की पार्टी दोनों को बाहर करके इंडिया गठबंधन पूरा अलाइन नहीं होता। अब ममता का गठबंधन पूरा अलाइन नहीं होता। अब ममता का गठबंधन पूरा अलाइन नहीं होता। अब ममता का हार होने के बाद आप उसको ताने मार रहे हो। हार होने के बाद आप उसको ताने मार रहे हो। हार होने के बाद आप उसको ताने मार रहे हो। क्या ही मिलेगा आपको? क्या ही मिलेगा आपको? क्या ही मिलेगा आपको? ममता के पास तो है ही नहीं कुछ देने के ममता के पास तो है ही नहीं कुछ देने के ममता के पास तो है ही नहीं कुछ देने के लिए। जो था वो लूट लिया गया। समझे? तो अब लिए। जो था वो लूट लिया गया। समझे? तो अब लिए। जो था वो लूट लिया गया। समझे? तो अब उसको ताने नहीं मारी। वो उनकी गलती उनको उसको ताने नहीं मारी। वो उनकी गलती उनको उसको ताने नहीं मारी। वो उनकी गलती उनको मान वो समझ गई होगी। यानी समझा दो उसको
मान वो समझ गई होगी। यानी समझा दो उसको मान वो समझ गई होगी। यानी समझा दो उसको बंद कमरे में। बंद कमरे में। बंद कमरे में। आप चौराहे पे क्यों ताने मार रहे हो? आपने आप चौराहे पे क्यों ताने मार रहे हो? आपने आप चौराहे पे क्यों ताने मार रहे हो? आपने भी बहुत गलतियां की। 2004 से 14 तक गुजरात भी बहुत गलतियां की। 2004 से 14 तक गुजरात भी बहुत गलतियां की। 2004 से 14 तक गुजरात को बरकरार किसने रखा? तो ये सारी गलतियां को बरकरार किसने रखा? तो ये सारी गलतियां को बरकरार किसने रखा? तो ये सारी गलतियां निकालने का वक्त नहीं है। आपको अलाइन करना निकालने का वक्त नहीं है। आपको अलाइन करना निकालने का वक्त नहीं है। आपको अलाइन करना चाहिए सारे विपक्ष को। ये दोनों को बाहर चाहिए सारे विपक्ष को। ये दोनों को बाहर चाहिए सारे विपक्ष को। ये दोनों को बाहर करके शरद पवार साहब की पार्टी और केजरीवाल करके शरद पवार साहब की पार्टी और केजरीवाल करके शरद पवार साहब की पार्टी और केजरीवाल क्योंकि ये मोल है बेसिकली बीजेपी के मोदी क्योंकि ये मोल है बेसिकली बीजेपी के मोदी क्योंकि ये मोल है बेसिकली बीजेपी के मोदी साहब के और ये और ये अगर मैं यह कहूं कि साहब के और ये और ये अगर मैं यह कहूं कि साहब के और ये और ये अगर मैं यह कहूं कि केजरीवाल मोल नहीं है क्योंकि उनके सारे केजरीवाल मोल नहीं है क्योंकि उनके सारे केजरीवाल मोल नहीं है क्योंकि उनके सारे जेल में गए हैं। तो लार्जर पर्सपेक्टिव जेल में गए हैं। तो लार्जर पर्सपेक्टिव जेल में गए हैं। तो लार्जर पर्सपेक्टिव में मोल है ही। आरएसएस उसकी थॉट प्रोसेस
में मोल है ही। आरएसएस उसकी थॉट प्रोसेस में मोल है ही। आरएसएस उसकी थॉट प्रोसेस जो है सारी वो आरएसएससीएन है वो थॉट जो है सारी वो आरएसएससीएन है वो थॉट जो है सारी वो आरएसएससीएन है वो थॉट प्रोसेस एंटी रिजर्वेशन प्रोसेस एंटी रिजर्वेशन प्रोसेस एंटी रिजर्वेशन अ सॉफ्ट हिंदुत्व अ सॉफ्ट हिंदुत्व अ सॉफ्ट हिंदुत्व हम हम हम माय ऑटोक्रेसी और नो ऑटोक्रेसी माय वे और माय ऑटोक्रेसी और नो ऑटोक्रेसी माय वे और माय ऑटोक्रेसी और नो ऑटोक्रेसी माय वे और हाईवे हाईवे हाईवे हम हम हम ये सारा जो है वो आपको अलग बॉटल में सेम ये सारा जो है वो आपको अलग बॉटल में सेम ये सारा जो है वो आपको अलग बॉटल में सेम लिक्विड मिल रहा है बराबर लिक्विड मिल रहा है बराबर लिक्विड मिल रहा है बराबर तो उसको अंदर रखने का कोई मतलब नहीं है आप तो उसको अंदर रखने का कोई मतलब नहीं है आप तो उसको अंदर रखने का कोई मतलब नहीं है आप डेमोक्रेटिक आई में और केजरीवाल को अपना डेमोक्रेटिक आई में और केजरीवाल को अपना डेमोक्रेटिक आई में और केजरीवाल को अपना खुद को करने दो ऑटोक्रेसी खुद को करने दो ऑटोक्रेसी खुद को करने दो ऑटोक्रेसी तो संजय सिंह को कैसे देखते हैं संजय सिंह तो संजय सिंह को कैसे देखते हैं संजय सिंह तो संजय सिंह को कैसे देखते हैं संजय सिंह तो मुझे लगता है ओनली लीडर देखिए तो मुझे लगता है ओनली लीडर देखिए तो मुझे लगता है ओनली लीडर देखिए जिसमें जो आम आदमी पार्टी पावर में एक संघ
जिसमें जो आम आदमी पार्टी पावर में एक संघ जिसमें जो आम आदमी पार्टी पावर में एक संघ नहीं आया था तो उनको भी शाहनवाज हुसैन और नहीं आया था तो उनको भी शाहनवाज हुसैन और नहीं आया था तो उनको भी शाहनवाज हुसैन और अन्य लोगों को आगे रखना पड़ता था अन्य लोगों को आगे रखना पड़ता था अन्य लोगों को आगे रखना पड़ता था मुसलमानों को वैसे संजय सिंह जैसा एक मुसलमानों को वैसे संजय सिंह जैसा एक मुसलमानों को वैसे संजय सिंह जैसा एक यूटिलिटी के लिए लिबरल को रखना पड़ता है यूटिलिटी के लिए लिबरल को रखना पड़ता है यूटिलिटी के लिए लिबरल को रखना पड़ता है आप पार्टी को आप पार्टी को आप पार्टी को तो आप उसी तरह से उसको देखिए उससे ज्यादा तो आप उसी तरह से उसको देखिए उससे ज्यादा तो आप उसी तरह से उसको देखिए उससे ज्यादा ना देखिए उसमें ना देखिए उसमें ना देखिए उसमें तो मैं ये कहता हूं कि ये जो अलाइनमेंट है तो मैं ये कहता हूं कि ये जो अलाइनमेंट है तो मैं ये कहता हूं कि ये जो अलाइनमेंट है ये एक बात हो गई उसके बाद लोगों का आंदोलन ये एक बात हो गई उसके बाद लोगों का आंदोलन ये एक बात हो गई उसके बाद लोगों का आंदोलन हम हम हम और तीसरी बात ऐसे जो भोपु आंदोलन है और तीसरी बात ऐसे जो भोपु आंदोलन है और तीसरी बात ऐसे जो भोपु आंदोलन है क्रॉकरोच जनता पार्टी वगैरह उसको जवाब क्रॉकरोच जनता पार्टी वगैरह उसको जवाब
क्रॉकरोच जनता पार्टी वगैरह उसको जवाब देने के लिए एक सशक्त अल्टरनेटिव डार्शन देने के लिए एक सशक्त अल्टरनेटिव डार्शन देने के लिए एक सशक्त अल्टरनेटिव डार्शन यानी आईडियोलॉजी तैयार करना ये तीन चीजें यानी आईडियोलॉजी तैयार करना ये तीन चीजें यानी आईडियोलॉजी तैयार करना ये तीन चीजें बहुत जरूरी है। बहुत जरूरी है। बहुत जरूरी है। ये पांच पॉइंट क्या लिखे उन्होंने तो यूथ ये पांच पॉइंट क्या लिखे उन्होंने तो यूथ ये पांच पॉइंट क्या लिखे उन्होंने तो यूथ कांग्रेस के लोग ही उसमें घुस रहे हैं। कांग्रेस के लोग ही उसमें घुस रहे हैं। कांग्रेस के लोग ही उसमें घुस रहे हैं। मतलब मतलब मतलब तो कांग्रेस के लोगों को ये समझाना तो कांग्रेस के लोगों को ये समझाना तो कांग्रेस के लोगों को ये समझाना नेतृत्व हाईकमांड की तरफ से समझाना जरूरी नेतृत्व हाईकमांड की तरफ से समझाना जरूरी नेतृत्व हाईकमांड की तरफ से समझाना जरूरी है। है। है। कि हमारी अपनी पार्टी है। हम आंदोलन कि हमारी अपनी पार्टी है। हम आंदोलन कि हमारी अपनी पार्टी है। हम आंदोलन करेंगे तो हम आपको बता देंगे। हम् करेंगे तो हम आपको बता देंगे। हम् करेंगे तो हम आपको बता देंगे। हम् यह हमारा आंदोलन नहीं है। कृपया इससे दूर यह हमारा आंदोलन नहीं है। कृपया इससे दूर यह हमारा आंदोलन नहीं है। कृपया इससे दूर रहे। ऐसे हर पार्टी को बताना जरूरी है। रहे। ऐसे हर पार्टी को बताना जरूरी है। रहे। ऐसे हर पार्टी को बताना जरूरी है। तो अपने आप अपना आंदोलन जब शुरू हो जाएगा तो अपने आप अपना आंदोलन जब शुरू हो जाएगा तो अपने आप अपना आंदोलन जब शुरू हो जाएगा तो पावर में वह आ जाएगा।
तो पावर में वह आ जाएगा। तो पावर में वह आ जाएगा। तो आपको यह जो न्यू वर्ल्ड ऑर्डर जो हो तो आपको यह जो न्यू वर्ल्ड ऑर्डर जो हो तो आपको यह जो न्यू वर्ल्ड ऑर्डर जो हो रही है उसमें नई-नई एलाइनमेंट्स जो रही है उसमें नई-नई एलाइनमेंट्स जो रही है उसमें नई-नई एलाइनमेंट्स जो इंटरनेशनल लेवल पे हो रहे हैं उसका इंटरनेशनल लेवल पे हो रहे हैं उसका इंटरनेशनल लेवल पे हो रहे हैं उसका प्रतिबिंब जो है वो देश में भी हो रहा है। प्रतिबिंब जो है वो देश में भी हो रहा है। प्रतिबिंब जो है वो देश में भी हो रहा है। हम हम हम तो उसमें आपको बहुत सजग रहने की आवश्यकता तो उसमें आपको बहुत सजग रहने की आवश्यकता तो उसमें आपको बहुत सजग रहने की आवश्यकता है क्योंकि डिजिटली आपको कोई भी बना के जा है क्योंकि डिजिटली आपको कोई भी बना के जा है क्योंकि डिजिटली आपको कोई भी बना के जा सकता है। सकता है। सकता है। हम हम हम जैसे डिजिटल अरेस्ट करते हैं ना वैसे जैसे डिजिटल अरेस्ट करते हैं ना वैसे जैसे डिजिटल अरेस्ट करते हैं ना वैसे कॉकरोच जनता पार्टी डिजिटल अरेस्ट कर रही कॉकरोच जनता पार्टी डिजिटल अरेस्ट कर रही कॉकरोच जनता पार्टी डिजिटल अरेस्ट कर रही है आपको पॉलिटिकली। है आपको पॉलिटिकली। है आपको पॉलिटिकली। हम हम हम तो उसमें मत पढ़िए आप। आप उसको ऑफ कर तो उसमें मत पढ़िए आप। आप उसको ऑफ कर तो उसमें मत पढ़िए आप। आप उसको ऑफ कर दीजिए। दीजिए। दीजिए। बहुत मुश्किल एक तरह से दौर है कि आप बहुत मुश्किल एक तरह से दौर है कि आप बहुत मुश्किल एक तरह से दौर है कि आप किसको सही माने, किसको सही नहीं माने, किस
किसको सही माने, किसको सही नहीं माने, किस किसको सही माने, किसको सही नहीं माने, किस तरह से देखें, किस तरह से नहीं देखें। अब तरह से देखें, किस तरह से नहीं देखें। अब तरह से देखें, किस तरह से नहीं देखें। अब आप यह देखिए कि उन्होंने कहा कि कोई भी आप यह देखिए कि उन्होंने कहा कि कोई भी आप यह देखिए कि उन्होंने कहा कि कोई भी गोदी एंकर्स जो हैं या गोदी चैनल जो हैं गोदी एंकर्स जो हैं या गोदी चैनल जो हैं गोदी एंकर्स जो हैं या गोदी चैनल जो हैं हमें कांटेक्ट ना करें। हम उनके साथ किसी हमें कांटेक्ट ना करें। हम उनके साथ किसी हमें कांटेक्ट ना करें। हम उनके साथ किसी भी तरह का कोई इंटरव्यू जो है वो नहीं भी तरह का कोई इंटरव्यू जो है वो नहीं भी तरह का कोई इंटरव्यू जो है वो नहीं देंगे। उसके स्क्रीनशॉट लगा रहे हैं। बाय देंगे। उसके स्क्रीनशॉट लगा रहे हैं। बाय देंगे। उसके स्क्रीनशॉट लगा रहे हैं। बाय हाथ हाई मोरल ग्राउंड वो लेते हुए नजर आ हाथ हाई मोरल ग्राउंड वो लेते हुए नजर आ हाथ हाई मोरल ग्राउंड वो लेते हुए नजर आ रहे हैं। आई एम श्योर इसमें भी अक्रॉस रहे हैं। आई एम श्योर इसमें भी अक्रॉस रहे हैं। आई एम श्योर इसमें भी अक्रॉस रिलीजन और कास्ट लोगों ने जाकर इस कॉकरोच रिलीजन और कास्ट लोगों ने जाकर इस कॉकरोच रिलीजन और कास्ट लोगों ने जाकर इस कॉकरोच पार्टी को जितने भी अगर ऑर्गेनिक है तो पार्टी को जितने भी अगर ऑर्गेनिक है तो पार्टी को जितने भी अगर ऑर्गेनिक है तो जॉइन किया होगा। तो ये क्या अनदर ट्रैप आप जॉइन किया होगा। तो ये क्या अनदर ट्रैप आप जॉइन किया होगा। तो ये क्या अनदर ट्रैप आप इसको मान रहे हैं? इसको मान रहे हैं? इसको मान रहे हैं? आप पार्टी हो। मैं बच्चों की कसम खाता आप पार्टी हो। मैं बच्चों की कसम खाता आप पार्टी हो। मैं बच्चों की कसम खाता हूं। हम लोग गाड़ी नहीं लेंगे। हम लोग एक
हूं। हम लोग गाड़ी नहीं लेंगे। हम लोग एक हूं। हम लोग गाड़ी नहीं लेंगे। हम लोग एक वक्त खाना खाएंगे। एक वक्त खाना नहीं वक्त खाना खाएंगे। एक वक्त खाना नहीं वक्त खाना खाएंगे। एक वक्त खाना नहीं खाएंगे। लेकिन हम कांग्रेस के साथ कभी खाएंगे। लेकिन हम कांग्रेस के साथ कभी खाएंगे। लेकिन हम कांग्रेस के साथ कभी नहीं जाएंगे। नहीं जाएंगे। नहीं जाएंगे। हम बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे। हम बंगला हम बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे। हम बंगला हम बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे। हम बंगला नहीं लेंगे। हम सादगी भरा जीवन बिताएंगे। नहीं लेंगे। हम सादगी भरा जीवन बिताएंगे। नहीं लेंगे। हम सादगी भरा जीवन बिताएंगे। ये आपने केजरीवाल से सुना था। ये आपने केजरीवाल से सुना था। ये आपने केजरीवाल से सुना था। यही आपने संघ के साथ सुना था। संघ से सुना यही आपने संघ के साथ सुना था। संघ से सुना यही आपने संघ के साथ सुना था। संघ से सुना था। सुना था कि नहीं? संघ का प्रचारक हो। था। सुना था कि नहीं? संघ का प्रचारक हो। था। सुना था कि नहीं? संघ का प्रचारक हो। फटी चड्डी पहनता है, भीख मांग के खाता है। फटी चड्डी पहनता है, भीख मांग के खाता है। फटी चड्डी पहनता है, भीख मांग के खाता है। यह वो सब हाई मोरल ग्राउंड पे जो बात करता यह वो सब हाई मोरल ग्राउंड पे जो बात करता यह वो सब हाई मोरल ग्राउंड पे जो बात करता है वो देश का दुश्मन है। यह पता चला। आप है वो देश का दुश्मन है। यह पता चला। आप है वो देश का दुश्मन है। यह पता चला। आप कभी भी ना ये इसमें बुद्ध ने बहुत अच्छा कभी भी ना ये इसमें बुद्ध ने बहुत अच्छा कभी भी ना ये इसमें बुद्ध ने बहुत अच्छा कहा है। आपको हमेशा मध्यम निकाय मध्यम
कहा है। आपको हमेशा मध्यम निकाय मध्यम कहा है। आपको हमेशा मध्यम निकाय मध्यम मार्गी जो है उसी के साथ रहो। क्योंकि मार्गी जो है उसी के साथ रहो। क्योंकि मार्गी जो है उसी के साथ रहो। क्योंकि वीणा की तार ना टाइट कर सकते हैं आप ना वीणा की तार ना टाइट कर सकते हैं आप ना वीणा की तार ना टाइट कर सकते हैं आप ना लूज छोड़ सकते हैं। वीणा तभी बचती है जब लूज छोड़ सकते हैं। वीणा तभी बचती है जब लूज छोड़ सकते हैं। वीणा तभी बचती है जब मध्यम में रहती है। तो जीवन का भी ऐसे ही मध्यम में रहती है। तो जीवन का भी ऐसे ही मध्यम में रहती है। तो जीवन का भी ऐसे ही है। कोई भी पॉलिटिशियन हाई मोरल ग्राउंड है। कोई भी पॉलिटिशियन हाई मोरल ग्राउंड है। कोई भी पॉलिटिशियन हाई मोरल ग्राउंड पे बात नहीं करता है जो रियल पॉलिटिशियन पे बात नहीं करता है जो रियल पॉलिटिशियन पे बात नहीं करता है जो रियल पॉलिटिशियन है और वो जो तानाशाह नहीं है। है और वो जो तानाशाह नहीं है। है और वो जो तानाशाह नहीं है। तो ये दे बेसिकली तो ये दे बेसिकली तो ये दे बेसिकली अंडरवर्ड की डॉन जो होते हैं उनकी जो अपनी अंडरवर्ड की डॉन जो होते हैं उनकी जो अपनी अंडरवर्ड की डॉन जो होते हैं उनकी जो अपनी गिरोह होते हैं उसके ऐसे नियम होते हैं। गिरोह होते हैं उसके ऐसे नियम होते हैं। गिरोह होते हैं उसके ऐसे नियम होते हैं। हाई मोरल। हम हाई मोरल। हम हाई मोरल। हम जो काम क्योंकि गलत कर रहे हैं इसके मोरल
जो काम क्योंकि गलत कर रहे हैं इसके मोरल जो काम क्योंकि गलत कर रहे हैं इसके मोरल हाई होना चाहिए। यह है आप काम ही ठीक कर हाई होना चाहिए। यह है आप काम ही ठीक कर हाई होना चाहिए। यह है आप काम ही ठीक कर रहे हैं तो आप हाई मोरल आपको कबीर ने कभी रहे हैं तो आप हाई मोरल आपको कबीर ने कभी रहे हैं तो आप हाई मोरल आपको कबीर ने कभी कहा हाई मोरल कुछ आपको याद है बुद्धा ने कहा हाई मोरल कुछ आपको याद है बुद्धा ने कहा हाई मोरल कुछ आपको याद है बुद्धा ने कहा कभी हाई मोरल ग्राउंड पे कोई भी महान कहा कभी हाई मोरल ग्राउंड पे कोई भी महान कहा कभी हाई मोरल ग्राउंड पे कोई भी महान रियल महान है या जो आपका भला करने वाला है रियल महान है या जो आपका भला करने वाला है रियल महान है या जो आपका भला करने वाला है नानक साहब ने कहा कभी ना हुसैन साहब ने नानक साहब ने कहा कभी ना हुसैन साहब ने नानक साहब ने कहा कभी ना हुसैन साहब ने कहा हाई मोरल हाई मोरल ग्राउंड का क्या कहा हाई मोरल हाई मोरल ग्राउंड का क्या कहा हाई मोरल हाई मोरल ग्राउंड का क्या मतलब आपका जीवन ही आपका मोरल ग्राउंड है मतलब आपका जीवन ही आपका मोरल ग्राउंड है मतलब आपका जीवन ही आपका मोरल ग्राउंड है हम हम हम आपके जीवन में जो आप कर नहीं सकेंगे वो आपके जीवन में जो आप कर नहीं सकेंगे वो आपके जीवन में जो आप कर नहीं सकेंगे वो बकबक करना ये हाई मोरल ग्राउंड पार्टी का बकबक करना ये हाई मोरल ग्राउंड पार्टी का बकबक करना ये हाई मोरल ग्राउंड पार्टी का ये होता है वो केजरीवाल ने आपको करके
ये होता है वो केजरीवाल ने आपको करके ये होता है वो केजरीवाल ने आपको करके दिखाया आप फिर भी दूसरा टाइम क्यों नहीं दिखाया आप फिर भी दूसरा टाइम क्यों नहीं दिखाया आप फिर भी दूसरा टाइम क्यों नहीं हिस्ट्री रिपीट्स इटसेल्फ फर्स्ट टाइम हिस्ट्री रिपीट्स इटसेल्फ फर्स्ट टाइम हिस्ट्री रिपीट्स इटसेल्फ फर्स्ट टाइम इट्स अ ट्रेजडी एंड सेकंड टाइम इट्स फार्स इट्स अ ट्रेजडी एंड सेकंड टाइम इट्स फार्स इट्स अ ट्रेजडी एंड सेकंड टाइम इट्स फार्स तो कॉकरोच जनता पार्टी एक फार्स है आप तो कॉकरोच जनता पार्टी एक फार्स है आप तो कॉकरोच जनता पार्टी एक फार्स है आप उससे बच के रहिए आपके जीवन का कॉमेडी में उससे बच के रहिए आपके जीवन का कॉमेडी में उससे बच के रहिए आपके जीवन का कॉमेडी में ट्रेजडी हो जाएगी ट्रेजडी हो जाएगी ट्रेजडी हो जाएगी बहुत बहुत इंपॉर्टेंट बात आप कह रहे हैं बहुत बहुत इंपॉर्टेंट बात आप कह रहे हैं बहुत बहुत इंपॉर्टेंट बात आप कह रहे हैं और जाहिर सी बात है कि इससे पहले इट्स टू और जाहिर सी बात है कि इससे पहले इट्स टू और जाहिर सी बात है कि इससे पहले इट्स टू लेट पीपल शुड अंडरस्टैंड क्योंकि मुझे लेट पीपल शुड अंडरस्टैंड क्योंकि मुझे लेट पीपल शुड अंडरस्टैंड क्योंकि मुझे लगता है कि शायद आम आदमी पार्टी और इन लगता है कि शायद आम आदमी पार्टी और इन लगता है कि शायद आम आदमी पार्टी और इन सबको लेकर सबको लेकर सबको लेकर आम आदमी पार्टी बी है ये आम आदमी पार्टी बी है ये आम आदमी पार्टी बी है ये आम आदमी पार्टी बी है आप ये तो बहुत सारी आम आदमी पार्टी बी है आप ये तो बहुत सारी आम आदमी पार्टी बी है आप ये तो बहुत सारी बी बी पार्टीज जो हैं टीम्स
बी बी पार्टीज जो हैं टीम्स बी बी पार्टीज जो हैं टीम्स आम आदमी पार्टी का डीएनए वही है ना जो आम आदमी पार्टी का डीएनए वही है ना जो आम आदमी पार्टी का डीएनए वही है ना जो रजिस्टर्ड कुछ करना नहीं सकता। रजिस्टर्ड कुछ करना नहीं सकता। रजिस्टर्ड कुछ करना नहीं सकता। विजय को भी आप इस कैटेगरी में रखते? विजय को भी आप इस कैटेगरी में रखते? विजय को भी आप इस कैटेगरी में रखते? नहीं मैं विजय का अलग पकड़ता हूं। विजय की नहीं मैं विजय का अलग पकड़ता हूं। विजय की नहीं मैं विजय का अलग पकड़ता हूं। विजय की देखिए हां वो बात तो अलग ही है। मैं तो देखिए हां वो बात तो अलग ही है। मैं तो देखिए हां वो बात तो अलग ही है। मैं तो बेसिकली ये मानता हूं। आप एक मोरल एक बेसिकली ये मानता हूं। आप एक मोरल एक बेसिकली ये मानता हूं। आप एक मोरल एक स्टैंड लिया आपने कि इलेक्शन लूट रहे हैं। स्टैंड लिया आपने कि इलेक्शन लूट रहे हैं। स्टैंड लिया आपने कि इलेक्शन लूट रहे हैं। हम हम हम चुनाव आयोग और भाजपा और अन्य लोग मिलके चुनाव आयोग और भाजपा और अन्य लोग मिलके चुनाव आयोग और भाजपा और अन्य लोग मिलके ईवीएम वगैरह सब। ईवीएम वगैरह सब। ईवीएम वगैरह सब। तो क्या ही बंगाल, क्या ही आसाम, क्या ही तो क्या ही बंगाल, क्या ही आसाम, क्या ही तो क्या ही बंगाल, क्या ही आसाम, क्या ही तमिलनाडु और क्या ही केरला तमिलनाडु और क्या ही केरला तमिलनाडु और क्या ही केरला ऐसा मैं मानता हूं। यह चारों जगह की जीत
ऐसा मैं मानता हूं। यह चारों जगह की जीत ऐसा मैं मानता हूं। यह चारों जगह की जीत झूठ है क्योंकि मैं मानता हूं कि स्टिन का झूठ है क्योंकि मैं मानता हूं कि स्टिन का झूठ है क्योंकि मैं मानता हूं कि स्टिन का पराजय ही इसीलिए हुआ क्योंकि एसआईआर में पराजय ही इसीलिए हुआ क्योंकि एसआईआर में पराजय ही इसीलिए हुआ क्योंकि एसआईआर में लोग उनका नाम काटा गया उनकी लोग उनका नाम काटा गया उनकी लोग उनका नाम काटा गया उनकी कॉन्स्टिट्यूएंसी उनकी पार्टी की हार ये कॉन्स्टिट्यूएंसी उनकी पार्टी की हार ये कॉन्स्टिट्यूएंसी उनकी पार्टी की हार ये ऑर्गेनिक हार नहीं है। ऑर्गेनिक हार नहीं है। ऑर्गेनिक हार नहीं है। हम हम हम वो भी इतने बड़े पैमाना वो भी इतने बड़े पैमाना वो भी इतने बड़े पैमाना विजय जीते क्योंकि वो खड़े रहे विजय जीते क्योंकि वो खड़े रहे विजय जीते क्योंकि वो खड़े रहे हम हम हम वरना बीजेपी डायरेक्ट जीत नहीं सकती। वही वरना बीजेपी डायरेक्ट जीत नहीं सकती। वही वरना बीजेपी डायरेक्ट जीत नहीं सकती। वही बात मैंने बोली थी आपको कांग्रेस और एक बात मैंने बोली थी आपको कांग्रेस और एक बात मैंने बोली थी आपको कांग्रेस और एक छोटी प्रादेशिक पार्टी को जिताएंगे पगडंडी छोटी प्रादेशिक पार्टी को जिताएंगे पगडंडी छोटी प्रादेशिक पार्टी को जिताएंगे पगडंडी बनाएंगे और खुद घुस जाएंगे।
बनाएंगे और खुद घुस जाएंगे। बनाएंगे और खुद घुस जाएंगे। वही बात हमेशा याद रखिएगा देश का सबसे वही बात हमेशा याद रखिएगा देश का सबसे वही बात हमेशा याद रखिएगा देश का सबसे बड़ा नुकसान बड़ा नुकसान बड़ा नुकसान हम हम हम मैं लेफ्टिस्ट नहीं हूं। मैं गांधीियन हूं मैं लेफ्टिस्ट नहीं हूं। मैं गांधीियन हूं मैं लेफ्टिस्ट नहीं हूं। मैं गांधीियन हूं लेकिन इस देश में शक अब्सॉर्बर का लेकिन इस देश में शक अब्सॉर्बर का लेकिन इस देश में शक अब्सॉर्बर का पॉलिटिकली काम हमेशा लेफ्ट ने किया है। पॉलिटिकली काम हमेशा लेफ्ट ने किया है। पॉलिटिकली काम हमेशा लेफ्ट ने किया है। जहां-जहां आपने लेफ्ट को कुचल डाला वहां जहां-जहां आपने लेफ्ट को कुचल डाला वहां जहां-जहां आपने लेफ्ट को कुचल डाला वहां बीजेपी घुस गई। बंगाल उसका बहुत बीजेपी घुस गई। बंगाल उसका बहुत बीजेपी घुस गई। बंगाल उसका बहुत लेकिन यह तो बड़ा बड़ा अजीब है कि लेफ्ट लेकिन यह तो बड़ा बड़ा अजीब है कि लेफ्ट लेकिन यह तो बड़ा बड़ा अजीब है कि लेफ्ट में थे और फिर उसके बाद चेंज हुए तो सीधा में थे और फिर उसके बाद चेंज हुए तो सीधा में थे और फिर उसके बाद चेंज हुए तो सीधा राइट में चले गए। यानी कि जो उनके राइट में चले गए। यानी कि जो उनके राइट में चले गए। यानी कि जो उनके कार्यकर्ता नेता मैं आपको बताता हूं कि कार्यकर्ता नेता मैं आपको बताता हूं कि कार्यकर्ता नेता मैं आपको बताता हूं कि लेफ्ट पार्टीज जो है जैसे केरल से दूर कर लेफ्ट पार्टीज जो है जैसे केरल से दूर कर लेफ्ट पार्टीज जो है जैसे केरल से दूर कर गई हम
गई हम गई हम लेफ्ट को जिंदा रखना जरूरी है। ट्रेड लेफ्ट को जिंदा रखना जरूरी है। ट्रेड लेफ्ट को जिंदा रखना जरूरी है। ट्रेड यूनियंस लेफ्ट पार्टी मजदूर किसान एकता ये यूनियंस लेफ्ट पार्टी मजदूर किसान एकता ये यूनियंस लेफ्ट पार्टी मजदूर किसान एकता ये सारी चीजें जो है ना वो आरएसएस और उनकी सारी चीजें जो है ना वो आरएसएस और उनकी सारी चीजें जो है ना वो आरएसएस और उनकी सत्ता उसके बीच में एक रोड़ा बनके रह जाती सत्ता उसके बीच में एक रोड़ा बनके रह जाती सत्ता उसके बीच में एक रोड़ा बनके रह जाती है। भले वो सत्ता में ना हो। उनका जिंदा है। भले वो सत्ता में ना हो। उनका जिंदा है। भले वो सत्ता में ना हो। उनका जिंदा रहना जरूरी है। कांग्रेस ने जब परम चरम पे रहना जरूरी है। कांग्रेस ने जब परम चरम पे रहना जरूरी है। कांग्रेस ने जब परम चरम पे थी सत्ता में तो राइट को उन्होंने हवा दी। थी सत्ता में तो राइट को उन्होंने हवा दी। थी सत्ता में तो राइट को उन्होंने हवा दी। यानी आरएसएस का ऐसा कोई नुकसान नहीं किया। यानी आरएसएस का ऐसा कोई नुकसान नहीं किया। यानी आरएसएस का ऐसा कोई नुकसान नहीं किया। उनके स्मारक बने, उनके ऑफिसिसेस बने, उनकी उनके स्मारक बने, उनके ऑफिसिसेस बने, उनकी उनके स्मारक बने, उनके ऑफिसिसेस बने, उनकी स्कूलें बनी जो आज हमारे गले गर्दन काट स्कूलें बनी जो आज हमारे गले गर्दन काट स्कूलें बनी जो आज हमारे गले गर्दन काट रही है। लेकिन लेफ्ट के यूनियन खत्म किए,
रही है। लेकिन लेफ्ट के यूनियन खत्म किए, रही है। लेकिन लेफ्ट के यूनियन खत्म किए, लेफ्ट का सारा ऑफिस खत्म किया। लेफ्ट के लेफ्ट का सारा ऑफिस खत्म किया। लेफ्ट के लेफ्ट का सारा ऑफिस खत्म किया। लेफ्ट के पीछे 10 एजेंसीज लगाई। ये कांग्रेस ने पीछे 10 एजेंसीज लगाई। ये कांग्रेस ने पीछे 10 एजेंसीज लगाई। ये कांग्रेस ने किया। तो कांग्रेस ने अपने आप के पैरों पे किया। तो कांग्रेस ने अपने आप के पैरों पे किया। तो कांग्रेस ने अपने आप के पैरों पे कुल्हाड़ी मार दी। जबकि पहली यूपीआई कुल्हाड़ी मार दी। जबकि पहली यूपीआई कुल्हाड़ी मार दी। जबकि पहली यूपीआई गवर्नमेंट सबसे कामयाब गवर्नमेंट मानी गवर्नमेंट सबसे कामयाब गवर्नमेंट मानी गवर्नमेंट सबसे कामयाब गवर्नमेंट मानी जाती है देश के इतिहास में। उसमें 83 जाती है देश के इतिहास में। उसमें 83 जाती है देश के इतिहास में। उसमें 83 सांसद यू लेफ्ट के थे। हम सांसद यू लेफ्ट के थे। हम सांसद यू लेफ्ट के थे। हम तो पूरी योजना और पॉलिसीज पे उनका प्रभाव तो पूरी योजना और पॉलिसीज पे उनका प्रभाव तो पूरी योजना और पॉलिसीज पे उनका प्रभाव था। था। था। बिल्कुल बहुत बिल्कुल बहुत बिल्कुल बहुत इसलिए वेलफेयर स्टेट बन सका। पहले ही इसलिए वेलफेयर स्टेट बन सका। पहले ही इसलिए वेलफेयर स्टेट बन सका। पहले ही यूपीए गवर्नमेंट फर्स्ट यूपीए गवर्नमेंट फर्स्ट यूपीए गवर्नमेंट फर्स्ट तो आप वेलफेयर स्टेट बनाने के लेफ्ट होना
तो आप वेलफेयर स्टेट बनाने के लेफ्ट होना तो आप वेलफेयर स्टेट बनाने के लेफ्ट होना नेचुरल है। नेचुरल है। नेचुरल है। लेफ्ट कोई ऐसी बाहरी वो नहीं है शब्द। लेफ्ट कोई ऐसी बाहरी वो नहीं है शब्द। लेफ्ट कोई ऐसी बाहरी वो नहीं है शब्द। मैं बोलता हूं कि वेलफेयर स्टेट को लेफ्ट मैं बोलता हूं कि वेलफेयर स्टेट को लेफ्ट मैं बोलता हूं कि वेलफेयर स्टेट को लेफ्ट कहिए। गांधी जी भी एक तरह से लेफ्ट ही थे। कहिए। गांधी जी भी एक तरह से लेफ्ट ही थे। कहिए। गांधी जी भी एक तरह से लेफ्ट ही थे। अंत्योदय की कल्पना ही लेफ्ट की कल्पना। अंत्योदय की कल्पना ही लेफ्ट की कल्पना। अंत्योदय की कल्पना ही लेफ्ट की कल्पना। अंत्योदय और प्लोरियन में क्या फर्क है? अंत्योदय और प्लोरियन में क्या फर्क है? अंत्योदय और प्लोरियन में क्या फर्क है? अंत्योदय का मतलब आखिरी आदमी का उदय। हम अंत्योदय का मतलब आखिरी आदमी का उदय। हम अंत्योदय का मतलब आखिरी आदमी का उदय। हम तो पुरुत्रियन का उदय का क्या मतलब है? तो पुरुत्रियन का उदय का क्या मतलब है? तो पुरुत्रियन का उदय का क्या मतलब है? वही है ना सेम कोई फर्क नहीं है। वही है ना सेम कोई फर्क नहीं है। वही है ना सेम कोई फर्क नहीं है। बिल्कुल तो बहुत ही जाहिर सी बात है एक बिल्कुल तो बहुत ही जाहिर सी बात है एक बिल्कुल तो बहुत ही जाहिर सी बात है एक अजीब बड़े इंटरेस्टिंग से टाइम्स हैं। अजीब बड़े इंटरेस्टिंग से टाइम्स हैं। अजीब बड़े इंटरेस्टिंग से टाइम्स हैं। यहां पर कुछ भी हो रहा है और शायद यहां पर कुछ भी हो रहा है और शायद यहां पर कुछ भी हो रहा है और शायद कांग्रेस कोई बात कांग्रेस कोई बात कांग्रेस कोई बात और मैं कुछ भी बोल रहा हूं।
और मैं कुछ भी बोल रहा हूं। और मैं कुछ भी बोल रहा हूं। नहीं नहीं ये मेकिंग अ लॉट ऑफ सेंस। मुझे नहीं नहीं ये मेकिंग अ लॉट ऑफ सेंस। मुझे नहीं नहीं ये मेकिंग अ लॉट ऑफ सेंस। मुझे लगता है कि एक तरह से आंखें खोलने वाला ये लगता है कि एक तरह से आंखें खोलने वाला ये लगता है कि एक तरह से आंखें खोलने वाला ये मैं कह सकती हूं कि ये पॉडकास्ट रहा। आपने मैं कह सकती हूं कि ये पॉडकास्ट रहा। आपने मैं कह सकती हूं कि ये पॉडकास्ट रहा। आपने आप यहां आए स्टूडियो में आए आपने बहुत आप यहां आए स्टूडियो में आए आपने बहुत आप यहां आए स्टूडियो में आए आपने बहुत वक्त दिया। थैंक यू सो मच राजू जी। इट वास वक्त दिया। थैंक यू सो मच राजू जी। इट वास वक्त दिया। थैंक यू सो मच राजू जी। इट वास वंडरफुल टू हैव यू हियर एंड नाउ थैंक यू वंडरफुल टू हैव यू हियर एंड नाउ थैंक यू वंडरफुल टू हैव यू हियर एंड नाउ थैंक यू मैं एक लास्ट बताना चाहता हूं कि आज जो मैं एक लास्ट बताना चाहता हूं कि आज जो मैं एक लास्ट बताना चाहता हूं कि आज जो सबसे ज्यादा पीसते पीसे जा रहे हैं सबसे ज्यादा पीसते पीसे जा रहे हैं सबसे ज्यादा पीसते पीसे जा रहे हैं मुस्लिम्स मुस्लिम्स मुस्लिम्स दलित आदिवासी किसान और मजदूर दलित आदिवासी किसान और मजदूर दलित आदिवासी किसान और मजदूर उनको ऐसी डिजिटल पार्टीज में उनको ऐसी डिजिटल पार्टीज में उनको ऐसी डिजिटल पार्टीज में लॉगिन भी नहीं करना चाहिए। उससे 10 हाथ 10
लॉगिन भी नहीं करना चाहिए। उससे 10 हाथ 10 लॉगिन भी नहीं करना चाहिए। उससे 10 हाथ 10 कदम दूर रहना चाहिए। जो जमीन पर खड़े हैं कदम दूर रहना चाहिए। जो जमीन पर खड़े हैं कदम दूर रहना चाहिए। जो जमीन पर खड़े हैं उनके साथ कंधे को कंधा मिलाकर खड़े हैं। उनके साथ कंधे को कंधा मिलाकर खड़े हैं। उनके साथ कंधे को कंधा मिलाकर खड़े हैं। वह भले ही बहुत ज्यादा मायावी मैजिशियन ना वह भले ही बहुत ज्यादा मायावी मैजिशियन ना वह भले ही बहुत ज्यादा मायावी मैजिशियन ना हो उनके उस नेतृत्व के साथ उनको खड़ा रहना हो उनके उस नेतृत्व के साथ उनको खड़ा रहना हो उनके उस नेतृत्व के साथ उनको खड़ा रहना चाहिए। क्योंकि उनसे इस इस अंद अंधे युग चाहिए। क्योंकि उनसे इस इस अंद अंधे युग चाहिए। क्योंकि उनसे इस इस अंद अंधे युग से बाहर आने का रास्ता जमीन से निकलता है। से बाहर आने का रास्ता जमीन से निकलता है। से बाहर आने का रास्ता जमीन से निकलता है। ना सात समंदर पर के पार जो आसमान है वहां ना सात समंदर पर के पार जो आसमान है वहां ना सात समंदर पर के पार जो आसमान है वहां से नहीं निकलता। से नहीं निकलता। से नहीं निकलता। जी बिल्कुल थैंक यू।
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Companion article
A Friendship That Began Over Pakoras
Raju Parulekar has built a reputation as one of Indian journalism's more unsparing critics of power, regardless of who holds it. In conversation with Nous Podcast host Bushra Khanum Fahad, he revisited a subject he returns to often: the 2011 India Against Corruption movement led by Anna Hazare, and his conviction that it was, from early on, an operation with the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) working behind it.
Parulekar's connection to Hazare predates the movement by roughly a decade. He first interviewed the activist after Hazare forced the resignation of three Maharashtra ministers through a hunger strike, and a friendship followed. He recalled visiting Hazare's ashram in Ralegan Siddhi often enough that he could date, precisely, the last time he ate a plate of the potato pakoras served there: 30 October 2011. He was not present, however, for the Ramlila Maidan protests that made Hazare a national figure that same year — he was in France for the Cannes television market, he said, at a time when the festival was not yet the tourist draw it later became.
The Core Committee's Falling Out
What pulled Parulekar back into the story, he said, was a phone call from Hazare himself, placed while Parulekar was travelling in Europe. He flew back, made his way from Mumbai to Pune and on to Ralegan Siddhi, and found Hazare frustrated: his voice, Hazare told him, was no longer reaching the public — it was the movement's "core committee," led by Arvind Kejriwal, Kiran Bedi, Manish Sisodia and Prashant Bhushan, that was effectively speaking for him. Hazare wanted that committee dissolved, Parulekar said, though he was talked out of it.
Underlying the rift, in Parulekar's account, was money. India Against Corruption, he said, was never a registered organisation — donations instead flowed into the separate NGOs run by Kejriwal and Bedi, with no unified accounting. Since those NGOs held FCRA registration for receiving funds, Parulekar argued, diverting that money into political activity was itself an offence, regardless of any RSS connection: "They were raising a voice against corruption while committing corruption," he said of the arrangement.
He described the movement's most dangerous moment as the point when Hazare's fast intensified and, in Parulekar's telling, Kejriwal calculated that a martyred Hazare would clear his own path to national leadership. Hazare, alarmed, left the hospital near Ramlila Maidan with the activist Medha Patkar's help and returned to Ralegan Siddhi — a rupture Parulekar said he made public himself, posting a Marathi blog under Hazare's own signature.
Reading the RSS Into the Movement
Parulekar's central claim is that the RSS specialises in occupying political space without ever presenting its own face — he compared the organisation to a shape-shifting demon of Hindu mythology, capable of appearing as a monk, a reformer or, in this case, an anti-corruption crusader. Hazare, he argued, was the movement's public face, but Kejriwal was always its operational head, and Kejriwal's own political biography — beginning with opposition to caste-based reservations that drew protest from students at JNU — shows an ideological throughline to the RSS that predates the movement itself. As evidence of coordination, he said planning for the movement routinely involved BJP leader Arun Jaitley, with Jaswant Singh occasionally present alongside Kejriwal's team.
He drew a contrast between the restraint the Congress-led government showed the movement in 2011 and the aggressive prosecutions AAP leaders face today — including jail terms tied to Delhi's excise policy case — arguing that this apparent contradiction doesn't disprove RSS backing but reflects a falling-out within an aligned camp: "the real fights are between brothers," he said, pointing to the BJP's own treatment of the sidelined party functionary Sanjay Joshi as a precedent. Even under Sheila Dikshit's Congress government, he said, Delhi Police were reluctant to register a case against Kejriwal after a party worker was assaulted in front of a young activist named Swati Maliwal — who later became a BJP Rajya Sabha MP.
A New Party, the Same Playbook
Parulekar extended the same suspicion to a newly formed outfit he referred to as the "Cockroach Janata Party" — a name, he said, that grew out of a public remark dismissing India's unemployed youth as "cockroaches," which the new party's founders adopted as a badge rather than an insult. He noted that its founders are based overseas, that its social media following grew from the low thousands into the millions within a strikingly short window, and that its opening pitch — pledges of austerity, refusals of official cars or bungalows, claims of incorruptibility — echoes both Kejriwal's original messaging in 2011 and, further back, the RSS pracharak's ascetic self-presentation. "History repeats itself — the second time as farce," he told Fahad, urging viewers not to mistake the new party's rapid growth for organic support.
He extended this into a broader argument about what he called "high moral ground" politics: that no serious ethical or political tradition — not the Buddha's middle path, not Kabir, not Guru Nanak, not Hussain ibn Ali — built its authority on claiming moral superiority over others, and that any movement leaning heavily on that posture, whether Kejriwal's in 2011 or a new claimant's today, should be read warily rather than taken at face value.
What the Opposition Keeps Getting Wrong
Turned to opposition strategy, Parulekar offered a three-part prescription for the INDIA bloc: full alignment among its constituent parties, an end to public sniping — his example was criticism of Mamata Banerjee following the Trinamool Congress's setbacks, which he said should be handled privately rather than "at the crossroads" — and the sidelining, though not formal expulsion, of Kejriwal's AAP and the Sharad Pawar–led faction of the NCP, both of which he described as effectively serving BJP interests.
He also disputed the legitimacy of recent opposition defeats in West Bengal, Assam, Tamil Nadu and Kerala, attributing them to the Election Commission's Special Intensive Revision of electoral rolls, which he said struck voters from constituencies where opposition parties were strong, rather than to any organic decline in support.
His sharpest historical claim concerned the Congress party's own record: that its greatest strategic error was not tolerance of the RSS but its role, over decades, in weakening the organised Left — trade unions and farmer and worker federations that Parulekar described as India's political "shock absorber," regardless of whether the Left held office. He pointed to the first UPA government, which depended on the outside support of 83 Left MPs, as independent India's most successful administration for building out welfare provisions, and argued that the Gandhian idea of antyodaya — the upliftment of society's last person — is functionally identical to the socialist idea of proletarian uplift. "Call the welfare state Left if you like," he said. "I'm not a leftist, I'm a Gandhian, but the two words mean the same thing."
"Ten Steps Away"
Parulekar closed with a direct appeal to the groups he said are paying the steepest price for India's current political direction — Muslims, Dalits, Adivasis, farmers and labourers — urging them to stay clear of movements that exist primarily online and instead back leaders rooted in physical, local struggle, whatever their limitations. The way out of what he called a period of political blindness, he told Fahad, does not descend from some distant horizon — it rises from the ground.
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