2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
"The biggest issue in the 2024 election was whether the Constitution would survive."
देखिए 2024 का लोकसभा इलेक्शन आप देखें तो उसमें सबसे बड़ा इशू क्या था? मुद्दा था कि इस देश में संविधान बचेगा या नहीं बचेगा? क्योंकि जो करंट डिस्पेंसेशन है जो उस वक्त भी पावर में था उसके कई नेताओं ने यह बात कही कि अबकी बार 400 पार और 400 पार का मतलब यह था कि हम 400 पार अगर हो जाएंगे लोकसभा में तो फिर हम इस देश के संविधान को बदलेंगे। जो के जिसके बारे में सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला है कि इसके बेसिक टेनेंट्स को नहीं बदला जा सकता। चाहे जितनी बड़ी आप बहुमत लोकसभा
जा सकता। चाहे जितनी बड़ी आप बहुमत लोकसभा में आ जाए, राज्यसभा में आ जाए, आप 100% भी आ जाए तब भी आप जो उसके बेसिक स्ट्रक्चर है केशवानंद भारती मामले में उसको स्पष्ट कर दिया गया। लेकिन अफसोस की बात यह है कि जो पार्टी इस वक्त सत्ता में है उसने ना तो कभी इस देश के संविधान को दिल से कुबूल किया और ना ही डेमोक्रेसी को सोशलिज्म को सेकुलरिज्म को बल्कि सोशलिज्म और सेकुलरिज्म दो ये उनके लिए तो ऐसे स्टिग्मा है कि वो कहते रहे हैं बहुत
स्टिग्मा है कि वो कहते रहे हैं बहुत जमाने से कि इनको कॉन्स्टिट्यूशन के प्रबल में जबरदस्ती शामिल किया गया। अंबेडकर ने जो संविधान बनाया था। उसके प्रबल में ये दोनों शब्द नहीं थे। टेक्निकली यह बात सही है कि ये इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी में संविधान में संशोधन कर इन दोनों शब्दों को शामिल किया। लेकिन हमारा संविधान है क्या? उसकी बेसिक स्पिरिट क्या है? वो यही है के सबसे पहले तो डेमोक्रेसी वो सबसे सुप्रीम
सबसे पहले तो डेमोक्रेसी वो सबसे सुप्रीम है। वो होगी होनी चाहिए। और उसके अलावा अगर आप इन दो शब्दों का भी इस्तेमाल ना करें तो बंधुत्व की बात करते हैं, भाईचारे की बात करते हैं उसका कॉन्स्टिट्यूशन का प्रबल और उसी पर ये देश पिछले 80 वर्षों में जब से आजाद हुआ है तब से चला है। लेकिन जिन लोगों का इसमें यकीन नहीं है जो कांग्रेस पार्टी और इंदिरा गांधी पर ये आरोप लगाते थे जब इमरजेंसी इंदिरा गांधी
ने लगाई थी कि साहब उन्होंने तानाशाही थोप दी देश पर सेंसरशिप लागू कर दी पोलिटिकल पार्टीज के वर्कर को जेल में डाल दिया लेकिन अभी तो हम देख रहे हैं कि इंदिरा गांधी ने तो जो कुछ किया वो घोषित तरीके से किया और उसकी सजा भी उन्हें 77 में मिली जब उनको वो खुद चुनाव हार गई और पूरे उत्तर भारत में उनका सफाया हो हो गया। लेकिन जो लोग उस वक्त उनसे लड़ने की बात करते थे और जो आज सत्ता में बैठे हुए हैं वो ना तो डेमोक्रेसी में यकीन करते ना सोशलिज्म और सेकुलरिज्म में और बाकी
सोशलिज्म और सेकुलरिज्म में और बाकी संविधान के हिस्से में
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
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