2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
Professor Tanweer Fazal in conversation with Asad Ashraf on Muslims and the question of citizenship in India. Watch here: https://youtu.be/rrWE5Ob5z3E
सो दैट इज व्हाई से दैट व्हेन इट कम्स टू इंप्यूनिटी इट इज हियर वेयर द मुस्लिम केस लूजेस इट्स स्पेसिफिसिटी। अब मुसलमान अकेले ही नहीं है। जी ऑल केसेस ऑफ मास वायलेंस इन इंडिया। हां। वहां पे एक इट हैप्स बिकॉज़ देयर हां। वहां पे एक इट हैप्स बिकॉज़ देयर इज़ अ गारंटीड इंप्युनिटी। आप बार-बार आपके काम में ल्यूसिव सिटीजनशिप नाम की एक चीज आती है जो कि पेपर पर अलग है और प्रैक्टिस में अलग है। व्हाट इज हैपनिंग विथ मुस्लिम्स और हैज़ हैपेंड विथ मुस्लिम्स इज़ पॉइंट व्हिच आई हैड रेफर्ड टू अर्लियर आल्सो इज इट नॉट ओनली द सिटीजनशिप बट इट इज़ द प्रोजेक्ट ऑफ़ डीनेशनलाइजेशन। राइट? जो मुस्लिम्स का सिचुएशन है, जो मुस्लिम्स की पर्टिकुलर सिचुएशन है, सिटीजनशिप को लेकर, क्या ऐसे एक्सपेरिमेंट्स और भी कम्युनिटीज के साथ किए गए हैं? इट इज नॉट अ कोइंसिडेंस कि आप चाहे देखिए इकबाल या जिन्ना या इवन मौदूदी ये लोग सभी एट वन पॉइंट ऑफ टाइम वेरी क्लोजली एसोसिएटेड वि द इंडियन नेशनलिस्ट पॉलिटिक्स। लेकिन क्या वो आईडियोलॉजी इतनी डीपली पेनिट्रेट कर गई है समाज में कि अब समाज में भी वो ऑटोमेटिकली हो रहा है मुसलमानों का नो वन हैज़ टू कम एंड से दैट कि मुसलमानों काइजेशन करो जो पॉपुलर आजकल यूपी से खास के निकल के आया है योगी मॉडल जिसको कहा जाता है और काफी सेलिब्रेट भी किया जाता है जी पर बुलडोजर जस्टिस है क्या इट इज कंप्लीट डिनायल ऑफ़ एनी कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोसेस इट इज़ अनकस्टिट्यूशनल इज़ इललीगल आप सीएए एनआरसी को इंप्लीमेंट नहीं कर पाए तो आपने एक नया फ्रंट खोल दिया है एसआईआर को और एसआईआर के थ्रू आप वही करना चाह रहे हैं जो आप सीए एनआरसी के थ्रू करना चाह रहे हैं। नाउ अ डेज मिस्टर असदुद्दीन ओवैसी इज ट्राइंग टू बी एज अग्रेसिवली एंड एंटी पाकिस्तान और एज अग्रेसिवली यू नो नेशनलिस्ट एस पॉसिबल ट्राइंग टू बी अ स्टेप अहेड ऑफ़ इवन द हिंदुत्व नेशनलिस्ट बट डजंट दैट डजंट मेक एनी डिफरेंस एस मच
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
Discussion
0Readers only · Comments are reviewed by the desk before they appear
The journalism is free for everyone — create a free account to join the discussion.