2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
"The question is not about Hindutva—it is about the character of India."
ये सिर्फ हिंदुत्व पे सवाल नहीं, ये कैरेक्टर पे सवाल है। मैं यह कहूंगा, ये कैरेक्टर जो ये पेश कर रहे हैं, वो नहीं था असल में हिंदुस्तान का कैरेक्टर — वही था और है भी, जो उस वक्त आउटरीच हुआ था। केरला तक जो आउटरीच हुआ था, जिस कॉन्ट्रैक्ट की बुनियाद पे, जिन प्रॉमिसेस पे कश्मीर तक आउटरीच हुआ था, नॉर्थ ईस्ट से लेके गुजरात तक जिस कॉन्ट्रैक्ट की, जिस कॉन्स्टिट्यूशन की, जिस इक्वलिटी की, जस्टिस की बुनियाद पे आउटरीच हुआ था — इंडिया के कैरेक्टर में वही है। यह हिंदुत्व नहीं है, यह राइट विंग नहीं है, किसी भी मजहब के नाम पे राइट विंग नहीं है। तो सवाल इन पे है, हम पे नहीं है — इनका सवाल इट ब्रिंग्स अ डिसगस्टिंग क्वेश्चन टू द एग्जिस्टेंस ऑफ इंडिया — हिंदुस्तान है क्या? और मैं इस सवाल के जवाब को यहीं पे कंक्लूड करूंगा। मैं आगे रिफ्लेक्ट करना चाहूंगा — इंडिया हैड अ ग्रेट अपॉर्चुनिटी, व्हिच इट अवेल्ड फॉर गुड फाइव-सिक्स डेकेड्स। पहले सवाल में जो एग्जांपल्स दिए — क्राइसिस, वेस्टर्न वर्ल्ड के विजावी सेकुलरिज्म, उनके कल्चरल क्राइसिस, उनके आइडेंटिटी क्राइसिस, किस तरह से क्लैशेज हुए और वो मिसफिट कैसे हो रहे — उनकी रिलीजियस एस्पिरेशंस, आइडेंटिटीज, पॉलिटिकल एस्पिरेशन, इकोनॉमिक एस्पिरेशंस का क्लैश कैसे बना, फिर रिलिजन उसका कैसे कुर्बानी बना — इंडिया हैड एन अपॉर्चुनिटी, एंड इट अवेल्ड दैट अपॉर्चुनिटी फॉर गुड फाइव-सिक्स डेकेड्स, टू प्रूव टू द रेस्ट ऑफ द वर्ल्ड कि सेकुलरिज्म की असली इंटरप्रिटेशन क्या है।
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
Discussion
0Readers only · Comments are reviewed by the desk before they appear
The journalism is free for everyone — create a free account to join the discussion.