Nous Shorts· 15 Jun 2026· 2:23

Why Muslim Politics Remains Reactive

"We have never really developed our own political principles."

Full Transcript

तो हम, जैसा कि मैंने पहले भी कहा, हम रिएक्टिव हैं। हमने खुद से कभी कोई पॉलिटिकल उसूल नहीं बनाया, मुरत्तब नहीं किया। चाहे राइट विंग होता, चाहे लिबरल मूवमेंट या आइडियोलॉजी होती, चाहे लेफ्ट विंग होता — हम किसी से इफेक्ट नहीं होते, कोई हमें गाइड नहीं करता, कोई हमें अट्रैक्ट नहीं करता। हम चीज़ों को अट्रैक्ट कर पाते हैं, या हम चीज़ों को कॉम्प्लीमेंट कर पाते हैं, या हम करेक्शन दे पाते हैं। हमने हर डायरेक्शन में आइडेंटिफाई

होने के बाद खुद को उनके साथ आइडेंटिफाई करने की कोशिश की है, ना कि खुद से एक प्रिंसिपल बना के, खुद इंप्लीमेंट करके, दूसरों को इंस्पायर करने की कोशिश की है। देयर इज़ अ लॉट दैट वी कैन इंस्पायर अदर्स विद, अगर हम दो-तीन चीज़ें छोड़ दें। अगर हम खुद से राइट विंग की ये सोच निकाल दें, कि अथॉरिटेरियनिज़्म होना चाहिए इस्लाम के नाम पे — पहले ये चीज़ अगर हम निकाल दें। दूसरा, अगर वो तसव्वुर निकाल दें कि ये ज़रूरी

है इस्लाम में कि आप जहां भी हैं, इस्लामिक लॉज़ 100% उसी लिटरल तरीके से इंप्लीमेंट होंगे, जिस तरह से हुज़ूर ने मदीना में इंप्लीमेंट किए थे — लॉज़ की बात कर रहा हूं, प्रिंसिपल्स की नहीं। समझ रहे हैं? अगर इसको हम डिबेट करके इस हद तक इवॉल्व हो सकें कि लॉज़ के बजाय हुज़ूर के प्रिंसिपल्स को इंप्लीमेंट करने की ज़रूरत है — उस पे काम करने की ज़रूरत है। लॉज़ को इमिटेट

करने की, ऐज़ दे वर लिटरली, ज़रूरत नहीं है, गुंजाइश नहीं है, और रिक्वायरमेंट भी नहीं है। कुरान ने हमसे ऐसा नहीं मांगा है, सीरत में ऐसा नहीं मिलता, और बाकी जो सिलसिले उसके बाद मिलते हैं उनमें भी हमें ऐसा नहीं मिलता। अगर वो ज़रूरत, उस पे डिबेट हो और उससे कोई नतीजा निकाला जाए, तो हम एक फिलॉसफी बना सकते हैं — जिस फिलॉसफी की बुनियाद पे हम कॉम्प्लीमेंट भी कर सकते हैं और अटैक भी कर सकते हैं। हमें कभी

लेफ्ट विंग गाइड नहीं करेगा, हमें कभी लिबरल मूवमेंट गाइड नहीं करेगी, हमें कभी राइट विंग ना इंटिमिडेट करेगी ना गाइड करेगी। हम चीज़ों को थोड़ा शेप करने में मदद कर सकते हैं।

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