2:30Ottoman Caliph: What Happened After 1924?
“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
"Helplessly, you watch people die in front of you."
और कोविड फॉर मी वाज़ अबाउट डेथ, एंड इट वाज़ नॉट यू नो इन माय सर्कल। और समवन दैट आई न्यू — जितने भी लोग जिनसे मिली, या जिनके मैंने आखिरी चेहरे देखे, दे वर स्ट्रेंजर्स। लेकिन डेथ बहुत ही अनसेटलिंग होता है, एंड स्पेशली एट अ यंग एज। और उस वक्त तो बिल्कुल कोई पॉज़ था नहीं, तो ऐसा रिफ्लेक्ट नहीं कर पा रहे थे कि व्हाट इट मीन्स टू विटनेस डेथ एंड राइट अबाउट इट। एंड लेटर, व्हेन आई स्टार्टेड
राइटिंग, बिकॉज़ द मोस्ट डिफिकल्ट पार्ट ऑफ दिस बुक वाज़ रिपोर्टिंग, क्योंकि वो तो एकदम डेडली था, और आप किस तरह से उस वायरस के अटैक से बच के आ जाएं। फिर लिखना भी मेरे लिए बहुत आसान नहीं था। कई बार सोचा क्या नैरेटिव हो, किस स्टोरी को किस तरह से लिखा जाए। फिर हमने सोचा कि रिपोर्टर के लेंस से लिखते हैं इसको, क्रोनोलॉजिकली लिखते हैं, स्टार्ट करते हैं दिल्ली से, और एक डिस्ट्रिक्ट, एक थीम, विल लीड टू अनदर। कि अगर जौनपुर में लोग
आए तो फिर उसके बाद क्या हुआ, वाराणसी के गांव में क्या हुआ। वाराणसी से फिर हम बक्सर पहुंचते हैं, वहां हॉस्पिटल में वेंटिलेटर नहीं है। तो ये सब हमने डिसाइड किया। लिखते वक्त भी मैं बहुत इसको अवॉइड कर रही थी, क्योंकि दिमाग में सब ताज़ा हो जाती है। तो जब मैं लिखने बैठती थी, 2022 में भी, 23 में भी, और मैं काम भी कर रही थी लगातार, लेकिन लिखते ही वो सारी ड्रेडफुल मेमोरीज़, यू नो, जस्ट कम बैक — यू फाइंड योरसेल्फ इन दैट हॉस्पिटल, जहां पे एक-एक सिलेंडर से
चार पेशेंट हांफ रहे हैं, और आप हेल्पलेसली सिर्फ यू वाच पीपल डाई इन फ्रंट ऑफ यू। यू आर नॉट अ डॉक्टर, यू आर नॉट अ नर्स, यू आर नॉट एन एडमिनिस्ट्रेटर — क्या कर सकते हैं आप, उसमें आप ऐसे खड़े हैं। तो था, लेकिन आई हैव नेवर सॉट एनी प्रोफेशनल हेल्प, कि मैंने इस तरह की कवरेज की है और मुझे मेरी नॉर्मल लाइफ में उस तरह का कुछ आए। लेकिन अभी जैसे मैं अपनी फैमिली में जब हम बैठकर बात करते
हैं, तो हम सबसे ज़्यादा जो मेरे दिमाग में आता है, जब मैं खुद भी वापस देखती हूं अपनी फोटो — सो आई वाज़, इफ यू लुक एट माय फोटो, सम ऑफ द फोटोज़, आई वाज़ माइल्ड्ली मलनरिश्ड। आई वाज़ नॉट हैविंग प्रॉपर मील्स, क्योंकि हाइड्रेशन ही नहीं था। सुबह पानी पी के निकलो तो तीन मास्क लगा के आप उतारना नहीं चाहते, क्योंकि आपको लगता है कि हॉस्पिटल में खड़े हो तो आपको ही हो जाएगा। तो बहुत बुरी हालत में, अपनी हेल्थ के हिसाब से कहूं तो, आई वाज़ वीकर,
फिज़िकली वीक एंड मेंटली तो एकदम कुछ था ही नहीं।
2:30“He embodied all the complexity and contradictions of the late Ottoman experience.”
1:47“I Will Protect Mosque & Temple Both”- MP Imran Masood
1:04Aakar Patel examines how public mobilisation can shape government decisions—from the protests against the NRC and farm laws to the question of institutional accountability.
Discussion
0Readers only · Comments are reviewed by the desk before they appear
The journalism is free for everyone — create a free account to join the discussion.