Nous Podcast· 07 Apr 2026· 53:26

Is Himanta Biswa Sarma Losing? What’s Really Happening in Assam Elections”

Assam Elections are at a निर्णायक मोड़.

Full Transcript

को आसाम वोट करने जा रहा है। सवाल यह है कि क्या एंटी इनकंबेंसी तो पवन खेरा जी ने क्या कहा? बोल के दिखाए कि इनके परिवार का दुबई में प्रॉपर्टीज नहीं है। और पैसा किसका पैसा है? लोगों का पैसा है। उनको पता है कि ये सबसे करप्ट चीफ मिनिस्टर हैं। इन्होंने वायदा किया था कि हर हर साल 1 लाख नौकरी देंगे। कि क्या मुसलमानों का वोट कंसोलिडेट होकर एक तरफ जा रहा है? पहले मुसलमानों के लिए 31 टू 34 सीट थे। अब टीवी चैनल पर खुले तौर पर बैठ के ये कह रहे थे कि परेशान करना है मुझे। मैं जानकर इनको परेशान करता हूं ताकि यह परेशान होकर छोड़कर चले जाए। जो ये हेट स्पीच है उनके खिलाफ उसके खिलाफ कानून लाया जाएगा। जो किसी भी धर्म के खिलाफ इस तरीके की बातें करेगा उनको 5 साल जेल होगा। जो वोटर्स डिलीट किए गए हैं उसमें ये क्लेम किया जा रहा है कि मेजॉरिटी उसमें मुसलमान है और जो डीलिमिटेशन भी किया गया है जो बॉर्डर्स जो बदले गए हैं क्योंकि सीट्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यू नो अमेरिका में इसको जेरीमेंडरिंग प्रोसेस कहते हैं। एक रिप्रेजेंटेशन एक कॉन्स्टिट्यूशनल राइट है। ये पूरे डेलिमिटेशन पॉलिटिकल जस्टिस के खिलाफ है। लेकिन मेरा सवाल आपसे ये है कि जो लोग एनआरसी से एक्सक्लूड हुए हैं। मुसलमानों को सिटीजनशिप के जो लिस्ट है उससे बाहर कर घुसपैठिया जैसा जो इशू है वो क्या आसाम में बड़ा इशू है? एिक्शन एक बहुत बड़ा मुद्दा ये बना चुका है। तो कोई बांग्लादेश को पैसा देगा क्या? भारत के मुसलमान को ही ये घुसपैठी बोलता है। बाहर के लोगों को नहीं बोलता है घुसपैठी। ये मेरा नहीं है। अरुण जेटली का ये फिगर है 2015 में। लेकिन एिक्शन सिर्फ एक ही धर्म का लोगों को होता है। हिंदुस्तान के इतिहास में यह जो पूरा इनफ्लांटेशन का जो बोगी है यह सबसे बड़ा प्रोपेगेंडा रहा है। डर और खौफ का माहौल तो है। एट लेडी वास आई थिंक प्रेग्नेंट टू कोई भी अपर आसाम के कोई कोई भी नागरिक किसी मुसलमान को मारा है। अगर आपका बेटा कुछ लिखता है इस सरकार के खिलाफ तो आपका अरुणोदय का जो स्कीम है जो आपको 12 से 50 वो आपको आपका काट दिया जाएगा। जो चुनाव प्रक्रिया है दैट इज इलेक्शन कमीशन एंड बीजेपी वर्सेस द पीपल ऑफ इंडिया। थ्री एंड फेयर इलेक्शन में हिमंत विश्वा शर्मा इज गोइंग टू लूज दिस इलेक्शन। आदाब न्यूज़ नेटवर्क देख रहे हैं आप। मैं हूं आपके साथ बुशरा खानम फहाद। 9 तारीख को यानी कि 9 अप्रैल को आसाम वोट करने जा रहा है। कुछ ही घंटों का वक्त बचा है और उसके बाद आसाम अपना फैसला ईवीएम में कैद कर देगा। सवाल यह है कि क्या एंटी इनकंबेंसी कोई जैसी कोई चीज क्या आसाम में देखने के लिए मिल रही है? क्या आसाम इस बार बदलाव के लिए वोट करने जा रहा है या एक बार फिर से हेमंत विश्व शर्मा सीएम की कुर्सी पर बैठने जा रहे हैं। इस पूरे इलेक्शन कैंपेन के दौरान जो हेमंत विश्व शर्मा पर इल्जाम लगे हैं जो कम्युनल उनका हेट्रिट है जाहिर सी बात है वो किसी से छिपा नहीं है। मुसलमानों को लेकर जिस तरह की खुले तौर पर वो नफरत भरी बातें करते हैं। जिस तरह से वह ज़हर उगलते हैं वो भी किसी से छिपा नहीं है। एसआर जैसी प्रक्रिया हुई है जिसमें 10.5 लाख के करीब जो वोटर्स हैं उनको डिलीट कर दिया गया है। हेमंत विश्व शर्मा पर कांग्रेस ने बड़े करप्शन के चार्जेस लगाए हैं और जब इलेक्शन में कुछ ही दिन बचे हैं उसी दौर में कांग्रेस ने यह भी कहा है कि हेमंत विश्व शर्मा की जो पत्नी हैं जो उनकी वाइफ हैं उनके पास तीन पासपोर्ट्स हैं और दो उनके पास मुस्लिम कंट्रीज के पासपोर्ट हैं। इस सबको लेकर भी जो पूरी सियासत है वो अपने पूरे शबाब पर है। लेकिन अहम सवाल यहां पर यह बना हुआ है कि इस बार आसाम के दिल में क्या है? आसाम क्या सोच रहा है? या बदलाव सोच रहा है या फिर एक बार फिर से हेमंत विश्व शर्मा को ही चुनने जा रहा है? इसके अलावा भी डीलिमिटेशन से लेकर, मियां मुसलमान से लेकर और तमाम ऐसे इशूज़ हैं आसाम को लेकर जिस पर बात करना बहुत जरूरी है। आज इसी पर हम चर्चा करेंगे। इसी पर बात करेंगे। मेरे साथ बेहद खास मेहमान जुड़ गए हैं जिनका इंट्रोडक्शन मैं आपसे कराना चाहूंगी। मेरे साथ अमन वदूद जुड़ गए हैं जो कि ह्यूमन राइट्स लॉयर हैं। प्रैक्टिस कर रहे हैं गुवाहाटी हाई कोर्ट में। इससे पहले वो सुप्रीम कोर्ट में लॉयर रहे हैं। अ फॉर्मर फुल ब्राइट स्कॉलर रहे हैं। ही अर्न हिज मास्टर्स ऑफ लॉज़ फ्रॉम द यूनिवर्सिटी ऑफ़ टैक्सेस स्कूल ऑफ लॉ। और उनका एक नया इंट्रोडक्शन यह भी है कि वो कांग्रेस के स्पोक्सपर्सन भी हैं आसाम में। अमन वूद साहब आपका बहुत-बहुत इस्तकबाल। वेलकम टू नाउ नेटवर्क। अस्सलाम वालेकुम। बहुत शुक्रिया आपका जुड़ने के लिए और मेरा पहला सवाल आपसे यह अमन कि इस पूरे इलेक्शन को आप किधर जाता हुआ देख रहे हैं? चंद घंटे बचे हैं और उसके बाद जाहिर सी बात है कि आसाम के लोग अपना फैसला सुना देंगे। ईवीएम में वो कैद हो जाएगा। लेकिन आसाम के लोग क्या सोच रहे हैं और आसाम के मुसलमान खासतौर पर इस इलेक्शन को लेकर क्या सोच रहे हैं? देखिए अगर अगर आप चीफ मिनिस्टर का जो कुछ महीनों में या पिछले एक साल से जो उनका रिएक्शन रहा है, जिस तरीके से वो बर्ताव कर रहा है, उससे आपको एक आईडिया मिलता है कि आसाम में क्या माहौल है। अ जिस तरीके से वो एक कम्युनिटी को टारगेट करता है और और वो वो वो यू नो इट्स वेरी डिफिकल्ट टू एक्सप्लेन इन लैंग्वेज। अह यू नो आई आई आई आई डोंट हैव यू नो एनी लैंग्वेज इन अ सिविलाइज़्ड वोकबलरी टू एक्सप्लेन कि वह किस तरीके से बात करते हैं और किस तरह किस तरीके के उनका भाषा भाषा है। अ तो ये जो बौखलाहट है ये जो डर है ये इसीलिए है कि उनको डर है कि वो पावर खो देंगे। वो सियासत ये जो इलेक्शन आ रहे हैं उसमें वो हार जाएंगे। और इसलिए सिर्फ धर्म के आधार पर वह यह चुनाव लड़ना चाहता है और बार-बार कोशिश किया जा रहा है और हर कोशिश में मैं बहुत हमंबली में यह बोलना चाहता हूं कि वो फेल हुआ है। अगर आप अपर आसाम में जाएंगे जो इनके जो खरीदे हुए कुछ संगठन है वो बड़े संगठन नहीं है। कुछ छोटे संगठन कुछ लोग जो है वही लोग इनके भाषा के प्रयोग करते हैं। जो आम जनता जो है जो आम जनता इस तरीके के चीज़ के चीज़ों के साथ रिलेट नहीं करता है। ऑफ़ कोर्स एक बीजेपी का एक वोट बैंक है। एक एक राइट विंग पॉपुलेशन हर जगह पे है। अह वो रिलेट कर पाएंगे। बट जो मेजॉरिटी एसमीस लोग हैं अपर आसाम कहिए, मिडिल आसाम कहिए, लोअर आसाम कहिए या पूरे आसाम में वो ये ये यहां का जो है यहां का ट्रेडिशन नहीं है। हिमंत बिश्वा का जो भाषा है जो हेट हेट मगरिंग है जिस तरीके से वो लोगों को अब्यूज करता है। उनके उनके जो डिग्निटी है उसको हार्ट करता है वो यहां का ट्रेडिशन नहीं है। और यहां पर वो रिलेट नहीं कर पा रहे हैं लोग। तो अब वो क्लेम करते हैं कि हमने बड़े-बड़े फ्लाई ओवर बनाया। हमने इतना डेवलपमेंट की है। लेकिन आपको ये समझना पड़ेगा कि वो डेवलपमेंट की बात नहीं कर रहा है। क्यों नहीं कर रहा है? क्योंकि देखिए आसाम में हर कोई जानता है। इवन पीपल हु सपोर्ट्स हिम। उनको पता है कि यह सबसे करप्ट चीफ मिनिस्टर है। सिर्फ चीफ मिनिस्टर ही नहीं उनके परिवार उनके जो इर्दगिर्द जो कुछ चुनिंदे कुछ मंत्री है वो सब लोग अमीर बन चुका है और बहुत ज्यादा जो वेल्थ है वो एक्यूमुलेट कर चुका है। यह पैसा कहां से आया? क्वाइट ऑब्वियसली अच्छा गवर्नेंस से तो ऐसा तो पैसा नहीं आएगा। ऑब्वियसली करप्ट पैसा है। आप किसी कहीं पे भी चले जाइए। यह लंबे रोड, चौड़ा रोड, लंबे फ्लाई ओवर सब सब स्टैंडर्ड काम होते हैं वहां पे और चुनिंदे कुछ कॉन्ट्रैक्टर को ही काम मिलता है। तो यह सब जो है यह करप्शन का एक जरिया है। डेवलपमेंट कम अनप्लंड अनसाइटिफिक कंस्ट्रक्शन ज्यादा है। तो उनका जो डेवलपमेंट का जो जो स्लोगन है वो नहीं बिक रहा है। इन्होंने वायदा किया था कि हर हर साल 1 लाख नौकरी देंगे। तो 5 इयर्स में 5 लाख नौकरी ये देंगे। पूरे 5 साल में 1.3 43 लाख नौकरी ही दे पाए। और वो भी कोई न्यू जॉब क्रिएशन नहीं था। इसमें ज्यादातर वैकेंसी फिल अप था और इन्होंने बोला था कि प्राइवेट सेक्टर में हम 8 लाख जॉब देंगे। कहा है वो नौकरी? जो यहां पे छह कम्युनिटीज है। देयर आर सिक्स कम्युनिटीज और और वो एक ओवरवेल पापुलेशन है। एक अच्छा पापुलेशन है। उन्होंने उनका ये डिमांड था कि हमें एसटी स्टेटस दिया जाए। शेड्यूल ट्राइब का स्टेटस 2014 में, 2016 में, 2021 में हमेशा से नरेंद्र मोदी जी, किरण रिज जी, हेमंत विश्व शर्मा जी प्रॉमिस करते आ रहे हैं कि हम आपको शेड्यूल ट्राइब का स्टेटस देंगे। आज तक नहीं दिया। इस मैनिफेस्टो में उसका जिक्र भी नहीं है। बीजेपी भी झूठ बोल-बोल के थक चुके हैं। तो, यह इस ये हर एंगल से यह फेल हो चुका है। दे आर फेल इन ऑल फ्रंट्स। एंड दैट इज व्हाई दे आर टारगेटिंग वन रिलीजन दैट इज आल्सो फेलिंग। अगर देखिए जो चुनाव का जो प्रक्रिया है आप जानते हैं कि इलेक्शन कमीशन उनके फेवर में रहते हैं हमेशा। कोई न्यूट्रल एंपायर है नहीं। फ्री एंड फेयर इलेक्शन में हिमंत विश्वा शर्मा इज गोइंग टू लूज दिस इलेक्शन। प्लीज राइट इट डाउन। तो आपने एक अंडरलाइन कर दिया है कि फ्री एंड फेयर इलेक्शन में ही इज़ गोइंग टू लूज़। लेकिन सवाल वही है कि क्या फ्री एंड फेयर इलेक्शंस हो रहे हैं? मैं इस पर आऊंगी अमन। लेकिन उससे पहले मेरा सवाल ये है कि अगर हम मोटे तौर पर देखते हैं आसाम में तो लगभग 62% वहां पर हिंदूस हैं और 34% के आसपास वहां पर मुसलमान हैं। मुसलमान एक पॉकेट में लोअर आसाम और और जो बैरक वैली है वहां पर एक तरह से कंसोलिडेट वहां पर हैं। मेरा यह सवाल है आपसे कि क्या मुसलमानों का वोट कंसोलिडेट होकर एक तरफ जा रहा है? या फिर आपको लग रहा है क्योंकि एआईडीएफ से आपका कांग्रेस का इस बार अलायंस नहीं हुआ है बल्कि एआईएमएम ने उनको सपोर्ट किया है और क्या आपको लग रहा है उसकी वजह से पिछले बार से अब में जो कंडीशन है जो सिचुएशन है कांग्रेस की वो पूरी तरीके से बदली हुई है और उधर जो एक हिंदू वोट बैंक है वो क्या आपको लग रहा है कंसोलिडेट होकर एक तरफ जा रहा है एक कांग्रेस पर्सन स्पोक्सपर्सन के अलावा एक अदरवाइज एक ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट या फिर एक लॉयर के तौर पर या एक एक आसाम के सिटीजन के तौर पर अगर आप मुझे आप बता सके फर्स्ट ऑफ ऑल ये पोलराइज्ड इलेक्शन नहीं है कि यू नो एक धर्म के लोग एक एक एक एक साइड में वोट करेगा अलग धर्म के लोग अलग साइड में वोट वोट करेगा अलग पार्टी के लिए वोट तो ये पोलराइज्ड इलेक्शन नहीं है। जैसे मैंने आपको कहा है कि अगर आप अपर आसाम जाएंगे अगर अब आप मिडिल आसाम कहीं पे भी आप देखेंगे तो ओवरवेल्मिंग सपोर्ट कांग्रेस को मिल रहा है। बहुत लोग यह बोलने की कोशिश करता है कि देखो कांग्रेस के मीटिंग में जो मुसलमान यू नो माइनॉरिटी डोमिनेटेड बेल्ट में उसमें बहुत ज़्यादा लोग हो रहे हैं। ऑफ़ कोर्स हो रहा है। सिमिलरली आज जितने भी मीटिंग हुए आप बिहपुरिया में मीटिंग है, लखीमपुर में मीटिंग है, आपका रोहा में मीटिंग है। यहां पे ज्यादातर ज्यादातर यू नो हिंदू लोग हैं और वहां पे आप टर्न आउट देख लीजिए। मैसिव टर्न आउट है। इसमें कोई डाउट नहीं है। हां, एक चीज ये है कि जो जो मुसलमान कॉन्स्टिट्यूएंसी जहां पे मुसलमान लोग ज्यादा है वहां पे पॉपुलेशन ज्यादा है। क्योंकि यू नो पहले मुसलमानों के लिए 31 टू 34 सीट थे। अब जैसे मैंने कहा यू नो कि ज्यादातर मुसलमान को यू नो एक सीट में धकेल के वो सीट कम करके 21 या 22 कर दिया है। तो ऑफ कोर्स एक कॉन्सिट्यूशन में लोग ज्यादा है। मीटिंग होगा तो लोग भी ज्यादा दिखेगा। बट यह पोलराइज इलेक्शन नहीं है। कांग्रेस को हर जगह पर सपोर्ट मिल रहा है। और आपने एमआईएम की बात की है तो मैं बहुत ही रेस्पेक्टफुली ओवैसी साहब के बारे में बोलना चाहूंगा। देखिए उन्होंने आके बोला है कि जो बार-बार सुप्रीम कोर्ट जाता है कौम के लिए यू नो कौम के यू नो मुसलमानों के अधिकारों के लिए उनको वोट मिलना चाहिए। जो हिमानता के खिलाफ खड़े हो उनको वोट मिलना चाहिए। अब देखिए हिमानता के खिलाफ कौन खड़ा होता है? ऑफ कोर्स कांग्रेस खड़ा होता है। एआईडीएफ के ज्यादातर लोग तो मिले हुए हैं। अजमल साहब का भी उनके साथ एकदम डायरेक्ट रिलेशन है। तो यह जो ये जो बातें हैं ये ज्यादा लोग से रिलेट नहीं करता है। ओवैसी साहब का एक स्टार पावर है। बट वो जो बातें कह रहे हैं उससे तो कांग्रेस कैंडिडेट को सपोर्ट मिल रहा है। जैसे हमारा एक कैंडिडेट है सेंगा कॉन्स्टिट्यूएंसी में अब्दुल रहीम अहमद तो वो भाई साहब यू नो एनआरसी केस में वो लीड किए थे जब वो आमसू के प्रेसिडेंट हुआ करते थे। गांव पंचायत सेक्रेटरी सर्टिफिकेट में भाई साहब ने लीड किया था। अह सिक्स ए का जो केस था उन्होंने भाई साहब में लीड किया था। तो उस कांस्टेंट में जाके अगर ओवैसी साहब बोले कि जो ज्यादातर सुप्रीम कोर्ट जाता है कम्युनिटी के राइट्स के लिए आप उनको वोट दो। तो वो आए थे यूडीएफ के कैंडिडेट के लिए बट वो प्रचार तो रो रहीम भाई का करके चला गया। है कि नहीं? तो लोगों को ये सच्चाई समझ में आता है और उनके आने से एक यू नो लोग बहुत जमा तो होते हैं उनको देखने के लिए। बट वो जो बातें करते हैं कि यू यू नो वोट अगेंस्ट यू नो पीपल हु कैन जो आंख हिमंता के आंख में आंख डाल के बात कर सकते हैं तो वो कौन कर सकता है? वो तो कांग्रेस ही कर सकता है ना। हम ये आप क्लेम कर रहे हैं कि ये सिर्फ कांग्रेस कर सकती है। मेरा सवाल ये है कि कांग्रेस ने इन 5 सालों में पिछले 5 सालों में मुसलमानों के लिए क्या किया है? ऐसे वक्त में जब हेमंत विश्व शर्मा यह कह रहे थे कि अगर ₹5 कोई रिक्शे वाला मांगता है तो आप ₹4 दें। वो एक टीवी चैनल पर खुले तौर पर बैठ के ये कह रहे थे कि परेशान करना है मुझे। मैं जानकर इनको परेशान करता हूं ताकि यह परेशान होकर छोड़कर चले जाएं। और उनका कहना था कि मैं एसमीस जो मुस्लिम्स हैं मैं उनके लिए नहीं कह रहा हूं। ये मैं मियां मुसलमानों के लिए कह रहा हूं। वो बार-बार इसको डिफरेंशिएट करते हैं कि मियां मुसलमानों के लिए यह बात कह रहा हूं। जो जाहिर सी बात है जो बंगाली बोलने वाले जो मुसलमान हैं जिनको जिनके ऊपर ये इल्जाम भी लगाया जाता है कि वो बांग्लादेश से आए हैं और एनआरसी जैसी प्रोसेस और तमाम चीजें ये उनके लिए लाई गई हैं। मेरा सवाल यह है कि जब हेमंत विश्व शर्मा इस तरह के तमाम बयान दे रहे हैं। लगातार सीधे तौर पर मुसलमानों को टारगेट कर रहे हैं तो कांग्रेस ने क्या किया? और दूसरा अगर कांग्रेस पावर में आती है तो क्या करने जा रही है? आपके मेनिफेस्टो में इस सबको लेकर क्या आखिर लिखा गया है? क्या वादे किए गए हैं? क्योंकि मैं देख रही थी जुबिन गर्ग को लेकर वादे किए गए हैं। भ्रष्टाचार को लेकर और भी कई चीजें हैं जो पॉइंट वाइज इसमें शामिल की गई हैं। लेकिन व्हाट अबाउट मुस्लिम्स ऑफ आसाम? देखिए गौरव गोगोई जी का जो हमारे अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। तो उन्होंने खुले तौर पे कहा है कि जब हमारा सरकार आएगा हम ऐसे कानून लाएंगे जो ये हेट स्पीच है उनके खिलाफ उसके खिलाफ कानून लाया जाएगा। जो किसी भी धर्म के खिलाफ इस तरीके की बातें करेगा उनको 5 साल जेल होगा तो यह हम कानून लाएंगे इसके लिए और आप अगर आपका प्रश्न है कि कांग्रेस ने किया क्या लास्ट फाइव इयर्स में कांग्रेस का प्रवक्ता यहां पे बैठे हुए हैं आप किसी को भी पूछ लीजिए हमेशा से हमेशा ही जब भी हेमंत विश्व शर्मा मुसलमान के खिलाफ या किसी धर्म के खिलाफ या संविधान को जब वो वायलेट करता था डंके की चोट पे उनके आंखों में आंखें डाल के हम बात करते थे और अभी भी बात करते हैं मरते दम तक करते रहेंगे तो प्रवक्ता सामने आप पूछ लीजिए मेरा आप सोशल मीडिया देख लीजिए मेरा ट्वीट देख लीजिए कि हमारा क्या स्टैंड है और किस तरीके से हम किसी से डरने वाले हम है नहीं हम नहीं डरते लेकिन अमन अमन मेरा सवाल ये है कि क्या क्या सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंसेस करना ट्वीट्स करना या फिर अपनी बाइट्स दे देना क्या क्या ये आपको लगता है कि इनफ है क्योंकि लड़ाई तो जमीन की लड़ाई है। जमीन पर आप कितना एक्टिव नजर आ रहे हैं? अगर किसी मुसलमान की लिंचिंग अगर होती है तो वहां पर कांग्रेस कितनी एक्टिव है? उनके केस किस तरह से लड़े जा रहे हैं? क्योंकि कांग्रेस आसाम में मजबूत है और ये सीधी लड़ाई जो है ये कांग्रेस और बीजेपी के बीच में हो रही है आसाम में और हमेशा से रही है। तो मेरा सवाल यही है कि क्या ट्वीट्स कर देना, प्रेस कॉन्फ्रेंसेस करना, टीवी चैनल्स में बात करना, क्या यह इनफ है? क्या इससे मुसलमानों को इस तरह का इंसाफ मिल जाएगा? जो उनका ह्यूमिलिएशन हर रोज किया जाता है। जिस तरह के जबान का ना सिर्फ इस्तेमाल किया जाता है बल्कि सिस्टमेटिकली डीह्यूमनाइजेशन जो उनका किया जा रहा है। देखिए मैंने आपको कुछ एग्जांपल दिया है कि किस तरीके से हम लोग काम करते हैं। सिर्फ मैं नहीं यू नो हमारे पार्टी भी इस तरीके से काम करती है। मैंने आपको ट्वीट्स का एग्जांपल दिया, सोशल मीडिया का एग्जांपल दिया, टीवी का एग्जांपल दिया। एग्जांपल इसलिए दिया मोड्स ऑफ़ कम्युनिकेशन। जमीन के जो चीजें होते हैं आप इसी से लोगों से कम्युनिकेट होते हैं। आपको समझना पड़ेगा कि इसी मीडियम के द्वारा भी हेमंत विश्व शर्मा जहर उगा तो जिस मीडियम के द्वारा वो जहर उगलते हैं उसी मीडियम के द्वारा आप उसको काउंटर कीजिए। जहां तक तो ये भी मेरे हिसाब से एक जमीनी लड़ाई है। बट उसके अलावा भी उसके देखिए ये एक एक सियासी मुद्दा है। एक पॉलिटिकल मुद्दा है। अब पॉलिटिकली हम उनको टारगेट करना पड़ेगा। हमें उनको हराना पड़ेगा। हमारा संगठन मजबूत करना होगा। जबजब वह किसी के डिग्निटी वायलेट करता है, जबजब किसी का अधिकार ले जाता है, हमें उनके खिलाफ बात करना पड़ेगा। हमें दुनिया को बताना पड़ेगा कि देखिए ये एक इंसान है जो मुख्यमंत्री है जो संविधान के ऊपर शपथ ले मुख्यमंत्री बने हैं वो इस प्रकार के बात कर रहे हैं। कहीं पे अगर एिक्शन होता है तो हमारे जैसे मैं 20 21 में जहां जो दरंग में जो एविक्शन हुआ था हमारे एलओपी देवव्रत सहका जी वो हाई कोर्ट गए और वहां पे कम से कम 700 लोगों को 700 लोगों को वहां पे आपको रिहबिलिटेशन मिला। जब भी हेट स्पीच करता है हमारे पार्टी उनके खिलाफ बाकायदा जब ये अभी बोला था कि यू नो ₹4 ₹5 बोले तो ₹4 देना उसके बाद तब हमने एफआईआर की थी हमारे पार्टी ने एफआईआर किया था जब उन्होंने जो वो वो भद्दा वीडियो जो था यू नो उस भाषा में प्रकाश करना यू नो एक्सप्लेन करना थोड़ा मुश्किल है मेरे लिए जैसे मैंने पहले ही कहा कि कोई सिविलाइज्ड वोकैबलरी में वैसे चीज है नहीं भाषा है नहीं वर्ड्स है नहीं जो एक्सप्लेन कर पाए बट वो जो वो जो वीडियोस था उनके खिलाफ भी हमने एफआईआर डाला है। अब देखिए चीज होता क्या है सिस्टमेटिकली वो लोग काम करते हैं और यह जो इंस्टीटश है ये इंस्टीट्यूशन भी खराब हो चुका है। तो ये ये जो पूरे पूरे लड़ाई है ये लड़ाई इंस्टीट्यूशन को बचाने के लिए है। डेमोक्रेसी को बचाने के लिए है और ज्यादातर जो इंस्टीट्यूशन है वो कॉम्प्रोमाइज्ड हो चुका है। बीजेपी सिर्फ चुनाव लोगों के वोट से चुनाव नहीं जीतता है। बीजेपी चुनाव जीतता है। उनके पास पैसे हैं। बीजेपी चुनाव जीते हैं। उनके पास मीडिया है। बीजेपी चुनाव जीतता है। उनके पास सारे इंस्टीट्यूशन है। पुलिस आप जाके एफआईआर कीजिए। वो एक्शन नहीं लेगा। ईडी, सीबीआई इलेक्शन कमीशन तो भाई साहब अब क्या ही बोले उनको तो थप्पा लग ही चुका है बीजेपी का। तो देखिए ये जो पूरा लड़ाई है ये लड़ाई डेमोक्रेसी को बचाने के लिए लड़ाई है। हम जो भी करते हैं जो भी हम लोग रूट लेते हैं हम हम हम किसी भी इंस्टीट्यूशन को अप्रोच करते हैं वो एंटरटेन नहीं करता है। वो एक न्यूट्रल एजेंसी नहीं बन बनके बैठे हैं। वो बहुत ही पार्टीशन है। तो आपको इस इस लड़ाई का जो जो यू नो पैरामीटर है वो आपको समझना पड़ेगा कि किस हिसाब से इंस्टीट्यूशन का डिप्लेशन हुआ है और हम किस यू नो अपोनेंट के साथ हम लड़ रहे हैं। मुझे ये बताइए आप कि डीलिमिटेशन जैसी जो प्रोसेस है जो उसको किया गया है और एसआईआर नहीं बल्कि आसाम में एसआर किया गया है। स्पेशल रिवीजन किया गया है। इंटेंस रिवीजन नहीं किया और उसमें कहा सिटीजनशिप जो लॉ है उसका हवाला दिया गया कि इसलिए और एनआरसी का वहां हवाला दिया गया इलेक्शन कमीशन की तरफ से इसलिए वहां पर एसआईआर नहीं हो रहा है। हालांकि कांग्रेस ने इसको लेकर सवाल उठाए थे। इससे इस इलेक्शन का ये पूरा इलेक्शन आपको कितना बदला हुआ नजर आ रहा है आफ्टर डीलिमिटेशन और एसआर की जो पूरी का पूरा प्रोसेस जो हुआ है उसके बाद क्योंकि 10 लाख जो वोटर्स डिलीट किए गए हैं उसमें ये क्लेम किया जा रहा है कि मेजॉरिटी उसमें मुसलमान है और जो डीलिमिटेशन भी किया गया है जो बॉर्डर्स जो बदले गए हैं क्योंकि सीट्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तो जो एक तरह से बॉर्डरर्स जो बदले हैं जो इन तमाम असेंबली हलके हैं उसमें तो उसमें भी यह कहा जा रहा है कि जाहिर सी बात है यह भी कहीं ना कहीं जो मुस्लिम मेजॉरिटी सीट्स हैं उनको टारगेट करने के लिए किया जा रहा है। 100% यू नो अह इले ये जो डीलिपिटीशन का प्रोसेस है अ ये रिस्पोंसिबिलिटी किसका है? एक कॉन्स्टिट्यूशनल बॉडी है इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया उनको करना चाहिए था। आप आसाम में किसी को भी पूछ लीजिए। वो आपको यही बोलेगा कि यहां पे एक मंत्री अशोक सिंघल करके जो कि हिमता विश्व शर्मा के काफी करीबी है। हर कोई बोलते हैं कि उनके लैपटॉप में हुआ था सब कुछ और हिमता विश्व शर्मा खुद इन इस एक्सरसाइज को लीड किए थे। तो यू कैन अंडरस्टैंड जो मैं इंस्टिट्यूशन के बात कर रहा हूं जो कि इस लड़ाई का जो अहमियत है जो मैं बात कर रहा हूं। आपको समझना पड़ेगा कि हम किस-किस से लड़ रहे हैं। हम सिर्फ बीजेपी से नहीं लड़ रहे हैं। हम पूरे इंस्टीट्यूशन से लड़ रहे हैं। तो डीलिमिटेशन देखिए अ जैसे मैंने कहा है कि मुसलमानों का अराउंड 30 31 टू 34 सीट्स पहले थे जहां से मुसलमान चुन के आ सकते थे। वो घटा के 21 या 22 कर दिया है। अभी कम से कम 10 सीट चले गए हैं। यू नो अमेरिका में इसको जेरीमेंडरिंग प्रोसेस कहते हैं कि यू नो यू स्टफ पीपल फ्रॉम वन रिलीजन टू वन कॉन्स्टिट्यूएंसी एंड स्टफ पीपल फ्रॉम अनदर रिलजन टू अनदर कॉन्स्टिट्यूंसी। ये द आईडिया इज बेसिकली ऑफ द मुस्लिम लीग कि यू नो एक धर्म के लोग एक धर्म के उसे उसको ही वोट करेंगे। तो एक बहुत ही जहरीला जो है एक आईडिया है और उसको इंप्लीमेंट किया है भारतीय जनता पार्टी ने। तो एक मुसलमान का रिप्रेजेंटेशन कम हो गया है। कम से कम 10 जो जो सीट्स है जहां पे यू नो मुसलमान अपने नुमाइंदी की जो रिप्रेजेंटेशन कर सकते थे वो कम हो गया है। अब अब दूसरे सवाल कि इससे इफेक्ट क्या होगा? मैंने आपको पहले ही बताया देखिए आसाम के लोग थक चुके हैं। वो एकदम यू नो हदिया से लेकर धबरी तक पूरे लेंथ एंड ब्रीथ लोग थक चुके हैं। तो जहां पे भी हो लोग बीजेपी के खिलाफ वोट करेगा। मेरा यह यकीन है आई रिपीट यू नो इन ए फ्री एंड फेयर इलेक्शन ये डीलिमिटेशन कर ले। हां हमारा नुकसान हुआ है। उसमें कोई डाउट नहीं है। कम्युनिटी का बहुत नुकसान हुआ है। रिप्रेजेंटेशन एक कॉन्स्टिट्यूशनल राइट है। यू नो प्रोपोशननेट रिप्रेजेंटेशन होना चाहिए था। अगर आप पॉलिटिकल जस्टिस को एक्सप्लेन कर करें तो ये पूरे डेलिमिटेशन पॉलिटिकल जस्टिस के खिलाफ है। जो कॉन्स्टिट्यूशनल आईडिया है जो प्रएमबल में लिखा हुआ है उसका वायलेशन हुआ है। अब्सोलुटली नो डाउट अबाउट इट। बट मेरा ये यकीन है अगर फ्री अनफेयर इलेक्शन हो तो चुनावी जो नतीजा होगा उससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। हम्म। तो जो लोग एनआरसी से एक्सक्लूड हुए हैं क्या वो आपको लग रहा है कि इफेक्टिवली सॉरी आपका आपका वो क्वेश्चन था एसआर के बारे में उससे एक्चुअली जो ड्राफ्ट था उसमें 10 लाख लोग यू नो बाहर थे उसके बाद जो फाइनल उसमें 2.43 लैक्स लोग बाहर है तो मुझे लगता है सो यू सेइंग कि अभी जो फाइनल ड्राफ्ट आया है उसमें सिर्फ 2.34 लाख लोग ही बाहर है जो उससे पहले ड्राफ्ट था उसमें 10 लाख लोग थे करीब 10 लाख लोग थे उसके बाद जो फाइनल आया है उसमें 2.43 लाख। सो मुझे लगता है कि इससे ज्यादा कुछ चुनावी नतीजे में कुछ-कुछ कास्टीट्यूएंसी है जहां पे आसाम के कुछ कॉन्स्टिट्यूएंसी है जहां पे मुसलमान पॉपुलेशन है तो उसमें उन्होंने रिड्यूस करने का काम किया है। उसमें वोटर डिलेशन बट मैं फिर भी ये मानता हूं कि इस सरकार के खिलाफ इतना गुस्सा है। इतना ज्यादा करप्शन हुआ है। इस सरकार ने इतना मनमानी की है। इतना लोगों के साथ मजाक किए हैं। उनका जो ट्रस्ट था उससे बिटरे हुआ है। तो मुझे मुझे लगता है कि इन्होंने हर कोशिश की है। दे हैव लेफ्ट नो स्टोन अनटर्न बट फिर भी फ्री अनफेयर इलेक्शन बीजेपी इस गोइंग टू लूज़। ओके। मैं इस पर आउंगी और मैं उस पर भी आउंगी कि पोलस्टर्स का क्या कहना है कांग्रेस को लेकर इस इलेक्शन को लेकर? चाहे आप उस पर यकीन करें या ना करें? जाहिर सी बात है जब फाइनल हमारे पास रिजल्ट होगा उस पर हम फिर बात करेंगे। लेकिन मेरा सवाल आपसे यह है कि जो लोग एनआरसी से एक्सक्लूड हुए हैं क्या आपको लग रहा है कि वो इफेक्टिवली जो पूरा यह इलेक्ट्रोल प्रोसेस है उससे भी पूरी तरीके से बाहर हो गए हैं? क्या वो सिर्फ जो एनआरसी से जो 19 लाख जो बाहर थे ये 1931 अगस्त में ये एनआरसी का फाइनल लिस्ट आया था और ये फाइनल एनआरसी था। अब पहले बीजेपी बोल रही थी कि एनआरसी लाओ एनआरसी लाओ यू नो घुसपैटि को भगाओ। हम पूरा प्रोसेस सर्वंदर सोनवाल गवर्नमेंट ने एग्जीक्यूट किया। सुप्रीम कोर्ट ने मॉनिटर किया और बहुत ही स्ट्रिंजेंट एक यू नो एक एक प्रोसेस था। उसमें 19 लाख लोग बाहर थे और उसमें मुसलमान का जो जो नंबर थे उसमें कम थे। अब इनका यह मानना था कि बहुत 50 60 70 लाख लोग बाहर होंगे। जब इनका एक्सपेक्टेशन मीट नहीं हुआ। अब बोलते वी आर नॉट हैप्पी वि द एनआरसी। अब भैया तुमको खुश करने के लिए क्या करें फिर? बाहर चला जाए एनआरसी से तो होगा नहीं अगर तो यह फिर बोलने लगे कि हमें रिवेरिफिकेशन चाहिए और एक एनआरसी चाहिए तो बेसिकली ये जिसको ये चाहता नहीं है मुसलमानों को सिटीजनशिप के जो लिस्ट है उससे बाहर करना चाहता है। ये उनका प्लान रहा है हमेशा बीजेपी का और इनके इनके आईडियोलॉजी में जो यकीन करता है। अब रहा सवाल कि इससे क्या इफेक्ट पड़ेगा? इससे कोई इफेक्ट नहीं पड़ेगा। इसलिए नहीं पड़ेगा क्योंकि देखिए यह सुप्रीम कोर्ट का आर्डर है कि कोई कोर्सिव एक्शन नहीं होना चाहिए। जो एनआरसी से जो बाहर है उनका वोटिंग राइट्स नहीं जाएगा। वो नॉन सिटीजन नहीं बन गए हैं। वो सिर्फ उनको एक मौका मिलेगा अपील करने के लिए फॉरेनर्स ट्राइबल में ट्राइबनल में। उसके लिए उसको एक रिजक्शन स्लिप चाहिए कि आपको एनआरसी से क्यों बाहर निकाला? क्योंकि बीजेपी इस एनआरसी को एक्सेप्ट नहीं करता है। उन्होंने स्लिप नहीं दिया। अगर वो स्लीप देता है, अगर रिजेक्शन स्लीप देता है, अगर लोगों को एक फेयर ओपोरर्चुनिटी दिया जाता है, तो यहां पे कोई बांग्लादेश मिलेगा नहीं। नहीं। आप ये कह रहे हैं कि जो बार-बार चाहे मोदी हो या फिर अमित शाह हो और इसके साथ-साथ खैर हेमंत विश्व शर्मा तो कहते ही रहे हैं जो घुसपैठियों की बात लगातार की जा रही है बंगाल से लेकर आसाम और पिछले 12 साल से वो सत्ता में है और डबल इंजन की सरकार आसाम में है। लेकिन उसके बाद भी अभी भी हर बार वो वही घुसपैठियों की बात वो करते हैं। तो आपको आपको ये लग रहा है कि इस बार घुसपैठियां जैसा जो इशू है वो क्या आसाम में बड़ा इशू है? क्या कम्युनल जो पोलराइजेशन है क्या वो एक बड़ा इशू है? क्या या फिर आपको लगता है करप्शन डेवलपमेंट इस तरह के इशूज़ ज्यादा हैं? क्योंकि जब हेमंत विश्व शर्मा को हम बड़ी स्क्रीन पर देखते हैं टीवी चैनल्स पर सोशल मीडिया और अलग-अलग जगहों पर जिस तरह की वो बातें करते हैं लगता है कि वो एक तरह से जो आसाम की जो पूरी पॉलिटिक्स है उसको एक तरह से उन्होंने बांट कर रख दिया है और एक तस्वीर ये उभर कर आती है कि शायद आसाम अब ऐसा ही बन गया है क्योंकि जब वो ₹5 की जगह ₹4 की बात करते हैं तो हम देखते हैं कि एक लड़की जाकर एक रिक्शे वाले से किस तरह से बिहेव करती है और अगर ऐसा आसाम नहीं है तो फिर आसाम के लोग उस तरह से उठ खड़े होकर यू नो उसके खिलाफ क्यों नहीं बात करते हैं? आई नो देयर आर टू मेनी क्वेश्चंस लेकिन अगर आप जवाब दे सके। देखिए पहली बात मैंने आपको पहले ही बताया कि जो ये यू नो हेट हिंसा की जो राजनीति रहा है ये हेट्रेट की जो राजनीति रहा है वो मेरे हिसाब से वेरी रेस्पेक्टली आई सबमिट दैट वो फेल हो चुका है। अब जो घुसपैठ घुसपैठी करता रहता है। देखिए लोग इससे भी थक चुके हैं। अभी ये क्या कहेगा जो लोगों को एिक्ट करेगा अपने घर से। एिक्शन एक बहुत बड़ा मुद्दा यह बना चुका है। अपर आसाम के कुछ जगह है जैसे उरियम घाट तो वहां से जो लोग फॉरेस्ट लैंड में थे जिनको वहां से एिक्ट किया मुख्यमंत्री खुद बोल रहे हैं कि ये लोग ये लोग लाहौरी घाट से है ये लोग ढंग से है। मतलब मिडिल आसाम के डिस्ट्रिक्ट से है। तो जितने भी लोगों को एिक्ट किया है ये बोलता है कि घुसपैठी है। ये बोलता है कि बांग्लादेशी है। तो ये लोग कहां गए? आसाम में ही है ना सरकार आपका है सो कॉल्ड डबल जी का आपका सरकार है तो कितने लोगों को आपने बाहर निकाला है पॉइंट नंबर वन पॉइंट नंबर टू मैंने आपको कहा है कि दरांग में जो एिक्शन हुआ है उसमें 700 800 लोगों को रिहबिलिटेट कर चुका है कोर्ट के आर्डर के बाद भूपरी में एिक्शन हुआ था जिनको एिक्ट किया उनको ₹50000 दिया जस्ट टू शिफ्ट फ्रॉम दैट प्लेस टू अनदर प्लेस तो कोई बांग्लादेश को पैसा देगा क्या तो ये जो है मुसलमान मुसलमान का जो पॉपुलेशन में उसको वो इललीगल माइग्रेंट बोलते हैं। उसको बांग्लादेशी बोलते हैं। यह बांग्लादेश से आए हुए लोगों को नहीं बोलते बांग्लादेशी या जो और बांग्लादेश से लोग आएंगे कैसे? आपका बॉर्डर है। यू नो इतने 12 सालों से आपका सरकार चल रहा है सेंटर में और अगर यू नो 10 सालों से यहां पे आपके सरकार है। पूरे जो बॉर्डर स्टेट है यहां पे आपके अलायंस का सरकार है। तो आपने बॉर्डर पे आपने क्या किया है? बॉर्डर आपने बंद नहीं किया क्या? और जो बांग्लादेश से आते हैं आप उनको नागरिकता देता है धर्म के आधार के ऊपर। को यह जो पूरा जो पॉलिटिक्स है इतना ज्यादा इसका रीप्ले हुआ है पिछले कुछ सालों में पिछले कुछ दशक में तो यह लोगों को पता चल चुका है कि ये सिर्फ घुसपैठी घुसपैठी बोलता है फिर कानून लाता है धर्म के ऊपर सीएए लाया उसके बाद यू नो पिछले साल जो जो ऑर्डर लाया है एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर लाया है एक्सेंपशन ऑर्डर वो सीएए की तरह ही है या उससे ज्यादा खतरनाक है वो भी धर्म के ऊपर तो लोगों को लोगों को यह पता चल चुका है कि ये भारत के मुसलमान को को ही यह घुसपैठी बोलता है। बाहर के लोगों को नहीं बोलता है घुसपैठी। यह उनका पॉलिटिक्स है। अब अब जहां तक ये एिक्शन की बात है। ये मेरा नहीं अरुण जेटली का ये फिगर है 2015 में। अब उनका देहांत हो चुका है। 2015 में उन्होंने एक फिगर दिया था कि 30 करोड़ पीपल इन इंडिया आर लैंडलेस। व्हिच मेक्स अप अराउंड 20% ऑफ इंडियन पापुलेशन। मुसलमान से काफी ज्यादा पापुलेशन लैंडलेस है। तो ये कौन लोग हैं फिर? देखिए लैंडलेसनेस एक फिनोमिनन है। हर जाति का हर धर्म का लोग जो है सरकारी जमीन में बैठते हैं। आसाम में एक बाकायदा अब आप अब आप उनका बीजेपी का रिपोर्ट उठा के देख लीजिए कि हर साल कितना कटौती होते हैं। आई थिंक अराउंड 8000 हेक्टेयर्स ए्री ईयर अराउंड 8000 हेक्टेयर्स। तो 1950 से ऑलमोस्ट 7% ऑफ आसाम लैंड मास वो नदी में जा चुका है। तो यह जो मुसलमान पापुलेशन ज्यादा है जब से माइग्रेशन शुरू हुआ था यू नो लेट यू नो 1850 के बाद से तो ज्यादातर ये ब्रह्मपुत्र नदी से माइग्रेशन हुआ था। लोग फर्टाइल लैंड में बैठे थे। अब वो कटौती बहुत ज्यादा है। कई-कई जगह पे जो जहां पे ये एक दुबरी में एक ब्रिज बन रहा है 17 कि.मी. लंबा है। पूरे ब्रह्मपुत्र के ऊपर 10 कि.मी. 15 कि.मी. ब्रेथ है नदी का। इतना कटौती हो चुका है। इतना एरोन हो चुका है। तो ये लोग कहां जाता है इनको अगर जमीन नहीं है तो कई सरकारी जमीन में बैठते हैं। और सिर्फ एक धर्म के लोग नहीं बैठते सरकारी जमीन पे। लेकिन एिक्शन सिर्फ एक ही धर्म का लोगों को होता है। चेरीपिक होता है। और उनको विदेशी कहा जाता है। उनको बांग्लादेशी कहा जाता है। आपने उनका नागरिकता प्रमाण किया है। वह आपका हिम्मत नहीं है। हिम्मत नहीं है आपका। आप खुद बोलते हैं। आप खुद आप पैसे देते हैं कि भाई तुम यहां से शिफ्ट हो जाओ। आपने खुद कई जगह पे रिहबिलिटेशन दिया है। आप बांग्लादेश को कैसे रिहबिलिटेशन दोगे? तो ये देखिए हिंदुस्तान के इतिहास में ये जो पूरा इनफ्लांटेशन का जो बोगी है ये सबसे बड़ा प्रोपेगेंडा रहा है। पिछले 10-15 सालों में हमने बहुत काम किया है इसके ऊपर। इसको बस्ट करने के लिए। मैं आपको डाटा दूंगा कि यह जो इनका जो प्रोपगेंडा है यह सबसे बड़ा यह मिथ रहा है और मिथ बस्ट हो चुका है। जैसे मैंने कहा हिंदुस्तान के इतिहास में सबसे बड़ा प्रोपेगेंडा बीजेपी या उनके आईडियोलॉजी में विश्वास करता है उनका रहा है। लेकिन अमन डर और खौफ का माहौल तो है मुसलमानों के बीच आसाम की जब हम बात करते हैं और डर और खौफ का माहौल है। इसके अलावा हमने ये भी देखा कि कुछ लोगों को जिस तरह से डिपोर्ट किया गया। फिर जाहिर सी बात है केस लड़ा गया और उसके बाद वो वापस आई। इस तरह के कई एग्जांपल्स हैं। दैट लेडी वाज़ आई थिंक प्रेग्नेंट टू। मैं उनका नाम भूल रही हूं। वो वापस आई फिर तो जी तो मेरा सवाल ये है कि देखिए एक चाहे एक मैसेजिंग के लिए ही सही वो काम तो किया जा रहा है और वो मैसेज मीडिया के जरिए सोशल मीडिया के जरिए अपने पूरे तंत्र के जरिए वो लोगों तक तो पहुंचाया जा रहा है। तो एक डर एक खौफ तो है ही और उस डर और खौफ के बाद जो हिंदूस की जो एक यू नो कंसोलिडेशन जो किया जा रहा है वो भी वो भी एक रियलिटी है। आप उससे आंख तो नहीं मूंद सकते। देखिए ये मैंने आपको पहले ही कहा कि ये पोलराइज्ड इलेक्शन नहीं है। अगर हिमता मिसा शर्मा बोलना व्हाई डू से दैट आई मान यू आपने ये दो-तीन बार कहा। आप आपका बेसिस क्या है? क्यों आपको लग रहा है कि ये इलेक्शन दिस पर्टिकुलर इलेक्शन इज नॉट अ कम्युनल इलेक्शन। क्योंकि हम जितने इलेक्शन देख रहे हैं आसाम का तो ये कहा जा रहा है कि ये सबसे कम्युन इलेक्शन सबसे ज्यादा जिसमें जहर एक तरह से उगला गया है और ये पहले से ही ये पूरा हेमंत विश्व शर्मा ने शुरू कर दिया था सिस्टमैटिक ढंग से। सो व्हाई डू यू से कि दिस इलेक्शन इज नॉट अ कम्युनल इलेक्शन? मैं इसलिए बोल रहा हूं मैं मैं आपको मैं आपको ये पूरा यू नो तथ्य के आधार पर बात करूंगा जो जो ग्राउंड का जो रियलिटी है आपने ही कहा है कि ये सबसे ज्यादा हेट्रेट मुसलमान के खिलाफ इन्होंने उगाला है जिस तरीके से भाषा का प्रयोग की है वो मतलब सिविलाइज्ड कोई टेबल में आप उसको बात नहीं कर सकते तो जिस तरीके से जिस तरीके से पोलराइजेशन जैसे यूपी बिहार में होता है या जहां पे लिंचिंग होता है मुसलमान को खिलाफ जिस तरीके से हिंसा होते हैं आप मुझे आसाम में बताइए कि कोई भी अपर आसाम के कोई कोई भी नागरिक किसी मुसलमान को मारा है? नहीं मारा है। नहीं मारा। इतना हिंसा होने के बाद उन्होंने इस हिंसा को रिजेक्ट इसलिए तो बोल रहा हूं मैं कि इन्फ्लुएंस नहीं हो रहा है। बीजेपी के कुछ भाड़े के कुछ ऑर्गेनाइजेशन, बीजेपी के कुछ ट्रोल आर्मी, बीजेपी के संगठन के कुछ लोग या इनके आईडियोलॉजी में जो यकीन करते हैं ये जो लोग ये लोग बिलीव करते हैं इसमें। ये लोग हिंसा फैलाता है। लेकिन जो आम जनता है अगर इतना नफरत होता तो उनको तो फिर मारता। ये हिंसा का जो आफ्टर आफ्टर इफेक्ट होता वो होता वो नहीं हो रहा है। इसलिए मैं आपको बोल रहा हूं ये एक बहुत ही पॉजिटिव पॉजिटिव डेवलपमेंट है कि जो बात हिमता विश्वा शर्मा कर रहा है जो ज्यादातर लोग उसको एक्सेप्ट नहीं कर रहा है। दे आर नॉट एक्सेप्टिंग दिस। इसलिए मैं बोलता हूं कि यह पोलराइज इलेक्शन नहीं है और यह फ्री एंड फेयर इलेक्शन होगा तो यह बंदा हारेगा। यह हारेगा और इनका अगर यह इतना डेवलपमेंट कर चुका है तो भाई मुसलमान के खिलाफ इतना क्यों जहर उगा हो आप? इतना क्यों जहर उगा हो? तो ये इस तरीके की राजनीति पीपल हैव रिजेक्टेड दिस पॉलिटिक्स। और मैं इसलिए बार-बार बोल रहा हूं कि हिंसा इनको ज्यादा फायदा नहीं कर रहा है। और इस नहीं कर रहा है इसलिए बार-बार ये बढ़ाता जा रहा है। बढ़ाता जा रहा है। अगर स्टेट पोलराइज होता तो इलेक्शन तक इतना हिंसा क्यों फैलाता ये? लास्ट मोमेंट तक इतना हिंसा क्यों फैलाता बिकॉज़ इट्स नॉट वर्किंग कांग्रेस को या हमारे जो अलायंस है यू नो जातियों परिषद है राइजोर दल है जिस तरीके से लोग उनको प्यार दे रहा है हमारे मीटिंग में जो लोग आ रहा है अभी हमारा एक समय परिवर्तन का यात्रा था मैं खुद गया था मार गिरिटा तक 5 दिन तक मैं यात्रा में रहा मैं खुद देख चुका हूं जितने भी कॉन्स्टिट्यूंसी है आप जाके देखिए किस तरीके से लोग उभर के आ रहे हैं हमारी यात्रा में वहां पे तो इतना मुसलमान पॉपुलेशन नहीं है ये लोग कौन है ये लोग तो ऐसा मींस हिंदू यह लोग इतना क्यों सपोर्ट कांग्रेस को दे रहा है? जो हमारा जो आईडियोलॉजी है उसको क्यों इतना प्यार दे रहा है? घर से लोग क्यों बाहर आ रहा है? देखिए यहां पे एक स्कीम है अरुणदय करके जो महिलाओं को ₹1250 दिया जाता है। पता है कैसे दिया जाता है? आपको बीजेपी के मीटिंग में जाना पड़ेगा। अगर आपका बेटा कुछ लिखता है सरकार के खिलाफ, तो आपका अरुणोदय का जो स्कीम है जो आपको 1250 वो आपको आपका काट दिया जाएगा। देखिए बीजेपी किसी को डिग्निटी से ट्रीट नहीं करता है। जब तक आप इनका चर्चा करो इनको प्रेस करो इनको वोट करो इनके मीटिंग में जाओ तभी आप अच्छे लोग हैं। अगर आप फ्री विल से बात करें अगर आप सच बोले तब आप इनके लिए अच्छे लोग नहीं है। चाहे आप हिंदू हो या मुसलमान हो। तो ये साल के बाद यू नो इन द लास्ट 10 10 12 इयर्स लोगों को समझ आ चुका है। ये मैं इसीलिए बोल रहा हूं कि इनका जो पॉलिटिक्स है इनका पॉलिटिक्स डिग्निफाइड पॉलिटिक्स नहीं है। हर किसी का मर्यादा ये ये वायलेट करता है। हर किसी का मुसलमान को टारगेट ज्यादा करता है। लेकिन ऐसा नहीं है कि किसी कम्युनिटी के लिए इनका बहुत प्रे इनको सिर्फ वोट चाहिए। इनको सिर्फ पावर में रहना चाहिए। इनको सिर्फ पैसा कमाना है। बस ओके। फेयर इनफ और सवाल ये भी है कि देखिए अल्टीमेटली मैटर ये करता है मेरे कुछ लास्ट सवाल है आई नो इलेक्शन चल रहा है और आप बिजी हैं और आपने वक्त निकाला है अमन लेकिन मेरे कुछ सवाल है बस लास्ट आपसे कि जब हम बात करते हैं कि जाहिर सी बात है इलेक्शन में हार या जीत ही तमाम चीजों का फैसला करेगी। आप इलेक्शन में आप मुद्दे उठा रहे हैं। आप बहुत ऑर्गेनाइज्ड तरीके से आप काम कर रहे हैं। हमने देखा राहुल गांधी ने वहां पर यात्रा भी निकाली थी। तब भी हमने देखा था कि किस तरह का हमने वहां पर एक तरह से देखा था कि हिंसा तकरीबन होते-होते वहां पर बची थी। गौरव गोगोई भी वहां पर मेहनत कर रहे हैं। वो भी हम देख रहे हैं। एक यंग चेहरा है, एक यंग लीडर हैं। बहुत बेबाकी से अपनी बातों को उठाते हैं। सवाल ये है कि एआईयूडीएफ के साथ इस बार आपका अलायंस जो नहीं हुआ है। तो पहला सवाल कि क्यों नहीं हुआ है? क्या उनकी तरफ से किसी तरह के कोई रिजर्वेशंस थे या फिर क्योंकि वह एक मुस्लिम पार्टी हैं, एक दाढ़ी टोपी वाले हैं और क्या बीजेपी को आपको टारगेट करने का ज्यादा इससे मौका मिल जाता? और दूसरा इसी से जुड़ा सवाल मेरा यह कि क्या उनके अलग लड़ने से और ओवैसी के उनके साथ आने से क्या मुस्लिम वोट में एक डिवाइड होता आप देख रहे हैं जो ऑलरेडी एसआर और इसके अलावा जो डेमोग्राफी जिस तरह से बदली गई है उसका पहले ही असर वहां देखने के लिए मिल रहा है। देखिए ईआईडीएफ के साथ हमारा अलायंस इसलिए नहीं हुआ है कि लास्ट टाइम हमने अलायंस किया था के साथ 2021 का जो चुनाव है वो उनके साथ लड़े यहां उसके बाद इनके जो कुछ एमएलए हैं उन्होंने राज्यसभा में उनको वोट किया बीजेपी को वोट किया एनए के कैंडिडेट को वोट किया प्रेसिडेंशियल इलेक्शन में उनको वोट किया तो तो यू नो लास्ट 202 इलेक्शन में हम इनके साथ अलायंस में थे अ लेकिन इसके बाद आप देखिए इनका सिराजुद्दीन अजमल जो बदरुद्दीन अजमल साहब का जो भाई है इन्होंने बोला कि हिमता विश्व शर्मा का हिमता विश्व शर्मा भारत का सबसे सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री है। सेम चीज अजमल साहब ने भी बोला है। तो इट इज वेरी देखिए अजमल साहब एक बिजनेस फैमिली से आते हैं। यू नो यूएई में उनका परफ्यूम का बिजनेस है। अल्लाह उनको तरक्की करे अच्छी बात है। वो अच्छे बिजनेसमैन में अच्छी बात है। लेकिन वो राजनेता नहीं है। वो अपने बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहता है। यही उनका मानसा है। आप जो जो भी बोले वो मौलाना साहब है। लेकिन आप मुझे बताइए कि 2006 से वो राजनीति कर रहा है। क्या उसका इमैक्ट क्या रहा है? वो जब ये एडिक्शन होता है जब मुसलमान का राइट्स वायलेट होता है तो वो बात करता है क्या? वो नहीं करता है बात। ये हर किसी को पता है कि हेमंत विश्व शर्मा और अजमल साहब का बहुत अच्छा रिलेशन है। तो जब एक एक पॉलिटिकल पार्टी जिसका इतना अच्छा रिलेशन बीजेपी के साथ हो उनके साथ अलायंस कैसे हो सकता है? बताइए मुझे। हां, कहीं के जगह पे कैंडिडेट सेंट्रिक कुछ वोट यहां हुआ होगा। मैं आपको जेन्युइनली बताता हूं कि कहीं पे यू नो कैंडिडेट सिलेक्शन के ऊपर। बट मैं कांग्रेस का सभा आप देख लीजिए। आज सेंगा में एक एक रैली हुआ। कन्हैया कुमार जी वहां पे थे। आई थिंक 3000 से ज्यादा लोग थे। यू नो वहां पे आप धबरी में मनकाचार में आप देखिए जब गौरव गोगोई जी गए थे। और जो हर जगह पे जो मुंदिया में गए थे गौरव गोगोई जी उनका अब आप अब आप अब आप रैली देख लीजिए कितने लोग उभर के आ रहे हैं तो इट इज क्वाइट अपेरेंट कि ज्यादातर लोग कांग्रेस को सपोर्ट करता है एक पॉलिटिकल पार्टी है उनका कैंडिडेट है उनको ऑब्वियसली कुछ वोट मिलेगा कोई भी आदमी इंडिपेंडेंट खड़ा है भैया उसको वोट मिलता है है कि नहीं एक जगह पे एक अच्छा अगर कोई अच्छा वोट बटने का आपको डर नहीं है मुस्लिम वोट बटने का आपको डर नहीं है देखिए वोट है। वोट हर किसी को मिलेगा। लेकिन यू नो ये ये एक ये एन ब्लॉक कोई किसी को वोट नहीं करता है। मैं ये नहीं बोल रहा हूं कि हमें हर कोई एन ब्लॉक वोट करेगा। एक धर्म के लोग किसी को एन ब्लॉक वोट करता है। वो तो आप उत्तर भारत के हैं। आपको पता ही है कि मुसलमान एन ब्लॉक वोट नहीं करता है। हर जगह पे जो है मुसलमान एन ब्लॉक वोट नहीं करता है। पूरे हर कोई एक पार्टी को वोट नहीं करता है। लेकिन ज्यादातर वोट ज्यादातर वोट कांग्रेस को आएगा। अब जब नतीजा आएगा तब आपको पता चलेगा कि ज्यादातर वोट कांग्रेस को मिलेगा और सिर्फ लोअर मुसलमान का वोट नहीं हिंदू का वोट क्रिश्चियन का वोट हर किसी का वोट जितना जाति जनजाति यहां पे है आप फ्री एंड फेयर इलेक्शन कराइए और आपको पता चलेगा कि कांग्रेस और जो अलायंस पार्टीज है अखिल गोगोई ड्यूरिंग ज्योति गोगोई जो पहाड़ में हमारा पार्टी है जो सीपीआई में हमारा पार्टी है आप देखिए कारबंगों हो या लो हर हर जगह पे कांग्रेस के मीटिंग में जो भीड़ उभर के अरे बोकाज में आप देखिए जब राहुल गांधी जी आए थे वो तो ट्राइबल एरिया है वो ऑटोनमस ऑटोनमस एरिया है उनका वो देखिए कितना भीड़ वहां पे उभर के वहां पे तो इतना मुसलमान नहीं है देखिए कितना ट्राइबल उभर के आए हैं वहां पे तो हर किसी का वोट कांग्रेस के तरफ है इसका मेन रीजन ये है कि बीजेपी सिर्फ पावर गैब करने के लिए लोगों को डरा के धमका के लोगों का डिग वायलेट करके उनका राइट लेके वोट लेना चाहता है जिससे कि लोग अब थक चुके अब पांच ऐसे मुद्दे क्या बताएंगे आप कि जिस पर इस बार आसाम वोट करने जा रहा है। नंबर वन करप्शन जिस तरीके से इन्होंने करप्शन की है। आप चीफ मिनिस्टर की संपत्ति देख लीजिए। उनके पत्नी के उनके परिवार के संपत्ति देख लीजिए। उनके जो इर्द-गिर्द में जो मिनिस्टर्स है उनकी आप संपत्ति देख लीजिए। नंबर वन करप्शन है। नंबर टू ये जो डेवलपमेंट का जो नाटक है कि आज सड़क एक ब्रिज एक फ्लाई ओवर इलगेट होता है। कल से उसमें रिटायरमेंट का काम शुरू हो जाता है। गुवाहाटी में ये जिहाद जिहाद करके फ्लड जिहाद ये जिहाद फलाना जिहाद सब ब्लेम किसी के ऊपर डालना बट इतने दिन में अब आधा घंटा अगर बारिश होता है तो सड़क पे पानी आ जाता है। अर्बन डेवलपमेंट ये लोग मजाक बना के रख चुका है। तो पीपल आर फेड अप विथ इट। नंबर थ्री जो है वो सिंडिकेट हर चीज पे सिंडिकेट है इनका हर चीज के ऊपर इनका सिंडिकेट है आप पान खरीद दीजिए आप इनो सुपारी खरीद दीजिए आप सैंड खरीद सैंड उसमें सिंडिकेट है कोल माइनिंग में सिंडिकेट है सिंडिकेट मतलब एक्स्ट्रा टैक्स उनका जो इललीगल टैक्स है इससे दाम बहुत यू नो जो हाई यू नो प्राइस बहुत हाई हो चुका है नंबर फोर जो छह कम्युनिटीज है उनको एसटी स्टेटस देने का इन्होंने बात किया था इन्होंने नहीं दिया और नंबर फाइव मैं जो जो इनका इनका जो ओवरऑल पॉलिटिक्स है हिंसा का पॉलिटिक्स बांटने का पॉलिटिक्स लोग इससे फ्रीडम चाहते हैं। जुबिन का कोई इशू है क्योंकि कांग्रेस ने इसको बहुत जोर शोर से उठाया। हमने तमाम कंट्रोवर्सी देखी। अभी मेनिफेस्टो में भी आपने शामिल किया है। 100 दिन में आप इंसाफ की बात कह रहे हैं। लेकिन विश्लेषक जो है उनका ये कहना है। मुझे मुझे मुझे मुझे आई थिंक ये इसको इसको बोलना चाहिए था। मेरे दिमाग से निकल गया। जुबिनर का इशू यू नो यह रिफ्लेक्ट करता है कि जो भी जो भी फ्री विल से बात करता है उसको बीजेपी सरकार नहीं चाहता है जुबिन गार्ग एक पब्लिक का एक एक दो हर किसी का दोस्त था वो वो पब्लिक का सिंगर था वो आसाम के लोगों का सिंगर था वो सबका हार्ट थ्रोप था उनका देहांत के बाद जिस तरीके से पॉलिटिक्स इन्होंने किया है जो चार्जशीट जो चार्जशीट इन्होंने दिया है वो बहुत वीक है। इनका डीफ्रीज हो चुका है इनके अकाउंट। इनका जो वाटर बॉटल प्लांट है एक्यूज़्ड का वो खुल चुका है। तो सरकार का जो यू नो डिफरेंस पहले बोला था कि अगर हम जस्टिस नहीं दे पाएंगे तो आप हमें वोट मत दीजिए। अब बोलता है कि हम जस्टिस हम नहीं दे पाएंगे। आप कोर्ट चले जाइए। तो लोगों को ये समझ में आ गया है कि भैया हिमांता विश्वा के शर्मा के सरकार ये किसी को इंसाफ नहीं दे पाएंगे। गार को इंसाफ नहीं दे पाएंगे। तो जो जितने भी ये मिस गवर्नेंस के इशू है ये टॉप में है और ये बहुत बड़ा मुद्दा है। ये बहुत बड़ा मुद्दा है और क्योंकि इंसाफ नहीं दे पाया और हमने हमारा हमारा जो मेनिफेस्टो है जो हमारा पांच बड़ा प्रॉमिस है उसमें एक प्रॉमिस है कि हम 100 दिन के अंदर जुबिंदगार को न्याय देंगे और ये एक बहुत बड़ा मुद्दा है और इसके ऊपर वोट होगा। हम ये पॉलिटिसाइज नहीं कर रहे हैं। लेकिन अगर अगर इंसाफ मांगना पॉलिटिक्स है तो आई थिंक हर किसी को पॉलिटिशियन बनना चाहिए। हर किसी को पॉलिटिक्स करना चाहिए। इंसाफ की बात है। जस्टिस की बात है। इंसाफ मांगने में क्या प्रॉब्लम है? लेकिन हेमंत विश्व शर्मा कह रहे हैं कि पवन खेड़ा को अपने आखिरी जिंदगी के आखिरी दिन जो है वो आसाम की जेल में सड़ना पड़ेगा उनको। जो इल्जाम आपकी तरफ से लगाए गए हैं उस पर उनका काउंटर भी आया है और वो उसको पूरी तरीके से बेबुनियाद बता रहे हैं। कह रहे हैं कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया से लेकर सबको हमने बता दिया है। एफआईआर शायद हुई है उसके खिलाफ। क्या ये मुद्दा आसाम के इलेक्शन में कोई मुद्दा बन पा रहा है या फिर कांग्रेस पर ये बैकफायर कर सकता है। सी बैकफायर ऑब्वियसली नहीं होगा। मैंने जो हम आधे घंटे या 40 मिनट जो बात हमने की है इसका तात्पर्य ये ये है कि ये अह यू नो बहुत ही करप्ट भ्रष्ट मुख्यमंत्री है। पावर के लिए पैसे के लिए गद्दी पर बैठा हुआ है। तो पवन खेरा जी ने क्या कहा कि आप बाहर जाके आप यू नो 5200 करोड़ 52000 करोड़ आपने इन्वेस्ट की है। दुबई में आपका प्रॉपर्टीज है। ये बोल के दिखाए ना कि नहीं है प्रॉपर्टीज। बोल के दिखाए कि इनके परिवार का दुबई में प्रॉपर्टीज नहीं है। ये बोल के दिखाए कि आपका अमेरिका में आपका प्रॉपर्टीज नहीं है या कंपनी नहीं है। तो इनका जो पैसा है पैसा जाता कहां है? और पैसा किसका पैसा है? लोगों का पैसा है। है ना? ना इनके पास पैसा का कोई मशीन तो है नहीं तो अगर अगर जमीनी इशू अगर लोगों का मुद्दा उठाना गलत बात है अगर ये इललीगल है तो तो भाई फिर लोग हिंदुस्तान के ज्यादा लोग ये सब काम करना चाहेंगे ये देखिए ये ये लोगों का मुद्दा है ये ये करप्शन का मुद्दा है इसके लिए आप जेल भेजोगे उसको वाओ क्या ही बात है फिर लास्ट मेरा सवाल आपसे कई जो पोलस्टर्स हैं उनका ये कहना है कि हेमंत विश्व शर्मा की वापसी होने जा रही है। आपका पूरा हक है कि आप उसे डिसए्री करें और वह यह कह रहे हैं कि जो एक तरह की ज़ील और जो एक लड़ने की जो एक पूरी इच्छाशक्ति है जिस तरह से जमीन पर दिखनी चाहिए थी कांग्रेस की वो कहीं ना कहीं मिसिंग रही और जो फिलहाल एक पूरा माहौल है वो कहीं ना कहीं हेमंत विश्व शर्मा के फेवर में बनता हुआ नजर आ रहा है। हालांकि उनकी सीटें कम होंगी पिछले बार की तुलना में। आप अपने लिए क्या अनुमान लगा रहे हैं कि 126 में से कांग्रेस कितनी सीटें हासिल करने जा रही है? क्योंकि आपने थ्रू आउट दिस इंटरव्यू आपने क्लेम किया कि कांग्रेस वापस आने जा रही है और हर कम्युनिटी के हर कास्ट के हर तरह के लोग जो हैं वो आपको वोट करने जा रहे हैं। देखिए मैं कोई पोल स्टार तो हूं नहीं। एंड थैंक गॉड आई एम अ पोल। थैंक गॉड आई एम नॉट अ तो देखिए इनका इनके बातों पे अब क्या ही भरोसा। मैं आपको जमीन के बातें बता रहा हूं। ये आप बोल रहे कि जी दिन रात हम लोग काम मैं कांग्रेस का कार्यकर्ता हूं। दिन रात हम लोग काम कर रहे हैं। ये इसको झील नहीं कहते। मतलब Facebook में जाके फोटो करके एचडी क्वालिटी में फोटो डालने से वो झील बन जाता है। गाड़ी के ऊपर खड़े खड़े होकर नाचने से वो झील बन जाता है। देखिए कांग्रेस के जो कार्यकर्ता है वो वो काम कर रहा है। हमारे जितने भी नेता है आप देखिए कितने और ये आज से नहीं आप गौरव गोगोई का लास्ट एक साल का शेड्यूल देख लीजिए। कितना मेहनत ग्राउंड पे कर रहे हैं। हम एक-एक नेता का आप डिस्ट्रिक्ट प्रेसिडेंट हो, ब्लॉक प्रेसिडेंट हो, मंडल प्रेसिडेंट हो। हर जगह पर आप देखिए कितना मेहनत हम लोग कर रहे हैं। आपको एक चीज समझना पड़ेगा। देखिए चुनाव जो बीजेपी चुनाव लड़ते हैं बीजेपी सिर्फ यू नो दो तीन काम के लिए मशहूर है। चुनाव लड़ना क्योंकि उनके पास पैसे बखेरे हैं। पैसे का कोई कमी नहीं है। एडमिनिस्ट्रेशन इनके साथ तो जो चाहे वो वो वो कर सकता है। कई जगह पे हमारा मीटिंग कैंसिल हो जाता है। बीजेपी का नहीं होता है। जो पैसा जो सो कॉल्ड जेल जो शो ऑफ है जो एकदम फैंसी तरीके से चीजों को पेश करना अगर वो जेल कहते हैं ओ या आई मीन दैट्स व्हाई आई आई एम हैप्पी दैट आई नॉट अ पोल स्टार तो पैसा बहुत खर्चे करते हैं इनके पैसे का कोई कमी नहीं है हमारे पास ऑफ कोर्स उतना पैसा नहीं है हर कोई एजेंसी आपके साथ है तो आप जब रिजल्ट आएगा मैं फिर से आपको बता रहा हूं देखिए आपने मध्य प्रदेश का चुनाव देखा है आपने हरियाणा का चुनाव देखा है आपने महाराष्ट्र का चुनाव देखा है राहुल जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एविडेंस के साथ प्रूफ किया है। किस तरीके से वोट चोरी होता है। फ्री एंड फेयर इलेक्शन मैं रिपीट कर रहा हूं मैं और ये बहुत रिसोंसिबल मैं आपको बताता हूं वि ऑल कमिटमेंट। आप फ्री एंड फेयर इलेक्शन आप कराइए। हमारे लिमिटेड रिसोर्स से ये जो यू नो जो जहां कोई लेवल प्लेइंग फील्ड नहीं है वहां पे हम आपको चुनाव जीत के दिखाएंगे। अमन क्योंकि आपने लास्ट में एक बात ऐड कर दी इसलिए मेरा काउंटर क्वेश्चन आ रहा है। मैंने हरियाणा इलेक्शन जमीन से कवर किया। लगभग एक महीने में वहां पर रही। मैंने महाराष्ट्र इलेक्शन कवर किया जमीन से। मैं वहां पर भी मैंने तमाम चीजों को देखा। लगभग अभी पिछले जो इलेक्शन असेंबली इलेक्शंस हुए हैं फ्रॉम लोकसभा इलेक्शन टू ऑल द असेंबली इलेक्शंस। मैंने सब जाकर जमीन से मैंने कवर किए हैं। और मैं कुछ जगहों की तो मैं खुद गवाही दे सकती हूं कि हरियाणा या महाराष्ट्र इन तमाम जगहों पर क्लियरली ये लग रहा था कि कांग्रेस सीधे तौर पर यहां पर सत्ता में वापसी अपनी करने जा रही है और फिर से सरकार बनाने जा रही है। लेकिन हमने रिजल्ट देखा रिजल्ट बिल्कुल उसके उसके बरक्स था। आपके हम सीधे तौर पर ये कहा गया कि लेवल प्लेइंग फील्ड जो है वो नहीं है। जाहिर सी बात है ईडी सीबीआई आईटी का इस्तेमाल दुरुपयोग और इसके साथ-साथ इलेक्शन कमीशन जिसको कांग्रेस कहती है कि अब बीजेपी की बी पार्टी बनकर काम कर रहा है। एसआईआर जैसी प्रक्रिया दूसरी जगहों पर हुई है। यहां पर एसआर हुआ है। यहां पर डीलिमिटेशन हुआ है। यहां पर जाहिर सी बात है कि पुलिस प्रशासन तमाम चीजों से आपको लड़ना पड़ रहा है। और उस सब के बाद भी अगर रिजल्ट हरियाणा, महाराष्ट्र इस जैसा आता है तो फिर आपके लिए यह जो पूरी पॉलिटिकल यह जंग है ये और कितनी ज्यादा आप लोगों के लिए मुश्किल होने जा रही है क्योंकि ये फिर से एक ऐसा स्टेट है आसाम जहां सीधी लड़ाई आपकी और और बीजेपी की है। देखिए जो बात आपने कही है मतलब जमीनी तौर पे तो यही बात है कि हर इंस्टिट्यूशन इनके पास है। हम जितनी भी कोशिश ना कर ले यह लोग जिस तरीके से इनका इनका जो इंस्टिट्यूशन के ऊपर जो कैप्चर है जो इंडिपेंडेंट एजेंसी होना चाहिए था वो इंडिपेंडेंट एजेंसी है नहीं हम क्या कर सकते हैं हम लड़ सकते हैं पूरे कमिटमेंट के साथ हम लड़ सकते हैं चुनाव और चुनाव हम लोग लड़ रहे हैं विथ ऑल कमिटमेंट विद ऑल रिस्पांसिबिलिटी हम लोग लड़ रहे हैं और ना हमारे पास मीडिया है ना इनके जैसे इतना पैसे है लिमिटेड रिसोर्स से पूरे ऑनेस्ट के साथ हम लोग चुनाव लड़े। ये भारत के जनता को यह पता लग चुका है कि किस तरीके से चुनाव होता है। तो ये जो चुनाव आजकल होता है ये लोगों में चुनाव होना चाहिए था। अब चुनाव लोगों में नहीं होता। द इलेक्शन जो चुनाव प्रक्रिया है दैट इज इलेक्शन कमीशन एंड बीजेपी वर्सेस द पीपल ऑफ इंडिया। वेरी सैडली ज्यादातर जगह पर लोग जो वी पीपल है उनको हराया जा रहा है। लेकिन देश का जनता है उससे ऊपर कोई नहीं है। ये जितने भी कोशिश ना कर ले बीजेपी और इलेक्शन कमीशन हारेगा। चलिए आप एक पार्टी के कार्यकर्ता हैं। स्पोक्सपर्सन है। जाहिर सी बात है अगर आपको ये यकीन नहीं होगा तो ये कन्विक्शन नहीं होगा तो फिर कैसे आप उस पार्टी में हैं? तो आपका कन्विक्शन है लेकिन अब ये रिजल्ट बताएगा कि आपके दावों में आपके वादों में कितना दम है। क्या एक बार फिर से हरियाणा, महाराष्ट्र इन तमाम जगहों पर हम होता देखेंगे या फिर जैसा आप कह रहे हैं कि लोग अगर उठ खड़े होंगे तो लोग अगर लोगों से बड़ा कुछ नहीं है या फिर हम उनकी जीत होता देखेंगे। बहुत-बहुत शुक्रिया अमन साहब आपका कार्यक्रम का हिस्सा बनने के लिए, नाउ के साथ जुड़ने के लिए, अपना वक्त देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। थैंक यू। थैंक यू फॉर हैविंग मी। थैंक यू सो मच। अह तमाम हम जो हमारी ऑडियंस है जिन्होंने इस कार्यक्रम को जो देखा उसके लिए भी बहुत-बहुत शुक्रिया।

Companion article

With hours left before Assam's polls closed, Aadab News Network host Bushra Khan Fahad put a blunt question to her guest: is Chief Minister Himanta Biswa Sarma about to lose power, or is he about to be re-elected despite an election campaign built, by his own admission, on targeting one community? The guest was Aman Wadud, a human rights lawyer practising at the Guwahati High Court, a former Supreme Court advocate and Fulbright scholar with a law degree from the University of Texas, who is also a Congress spokesperson in Assam. Over roughly forty minutes, Wadud laid out the case his party is making against Sarma's government — a case built less on the chief minister's rhetoric about Muslims, he insisted, than on corruption, unmet promises and an election machinery he believes is stacked against a fair contest.

"This is not a polarised election"

Fahad opened by pressing Wadud on communal politics: Assam is roughly 62 percent Hindu and 34 percent Muslim, with Muslim voters concentrated in Lower Assam and the Barak Valley. Given Sarma's open hostility toward Muslims through the campaign, was this a straightforward polarised contest? Wadud disagreed. Congress rallies, he said, were drawing large crowds across Upper, Middle and Lower Assam, including in Hindu-majority constituencies such as Bihpuria, Lakhimpur and Roha — evidence, in his telling, that Sarma's language was not resonating even with voters the BJP hoped to consolidate. His sharper argument was that the hate speech had produced no violence: despite what he called the most communal rhetoric the state had seen, no Muslim had been killed by a fellow citizen in Upper Assam during the campaign, which he read as proof that ordinary Assamese were rejecting the politics of division rather than absorbing it. "Himanta Biswa Sarma is going to lose this election," he said flatly, attaching a condition he repeated throughout the conversation — provided the vote was free and fair.

Corruption, unmet promises and a broken pledge

Pressed on what Congress was actually offering beyond opposition to Sarma, Wadud pivoted to what he called the government's record. He alleged that the chief minister, his family and a small circle of ministers had accumulated wealth impossible to explain through clean governance, and pointed to Congress leader Pawan Khera's public allegations — repeated on this programme — that Sarma's family holds undisclosed properties in Dubai and the United States, challenges Wadud said the family has not rebutted. He also cited the government's jobs record: against a pledge of one lakh government jobs a year for five years, he said only about 1.43 lakh were delivered over the full term, and mostly through filling existing vacancies rather than new hiring, while a promised 8 lakh private-sector jobs went undelivered. A long-standing demand for Scheduled Tribe status for six communities in Assam — promised, he said, in 2014, 2016 and 2021 by Narendra Modi, Kiren Rijiju and Sarma himself — remains unmet and unmentioned in the BJP's current manifesto. Wadud also alleged an economy of "syndicates" controlling everything from betel nut and sand to coal mining, which he said function as an illegal tax driving up prices for ordinary Assamese.

Deleted voters, redrawn seats

The conversation turned to two processes that reshaped the electoral map ahead of this vote: a Special Revision of electoral rolls — distinct, Wadud noted, from the Special Intensive Revision conducted elsewhere in India, and justified by the Election Commission with reference to citizenship law and the National Register of Citizens — and a delimitation exercise that redrew constituency boundaries without changing the total number of seats. Roughly 10 lakh voters were removed in the draft revision, a number that fell to about 2.43 lakh in the final list; Wadud said the deletions disproportionately affected Muslim voters. On delimitation, he alleged the exercise was effectively led by Sarma and a close aide, minister Ashok Singhal, rather than being independently conducted by the Election Commission, and that it had reduced the number of seats where Muslim candidates had a realistic chance of winning from roughly 31–34 to about 21–22 — a process he compared to gerrymandering in the United States. He called the redrawing a violation of proportionate representation as a constitutional right, while maintaining his view that it would not be decisive: "I still believe this government will lose the free and fair election," he said, arguing that anger over governance outweighed the effect of the boundary changes.

"Miya Muslims" and the eviction question

Much of the interview turned on Sarma's practice of distinguishing between Assamese-origin Muslims and Bengali-origin Muslims, whom he refers to as "Miya" Muslims and has repeatedly linked to alleged illegal migration from Bangladesh. Wadud argued the distinction is deliberate: the chief minister, he said, targets Indian citizens of Bengali Muslim origin as "infiltrators" while never applying the label to non-Muslims. He pointed to the 2019 National Register of Citizens process — court-monitored and executed under the previous Sarbananda Sonowal government — which excluded about 19 lakh people, a smaller share of them Muslim than the BJP had expected or wanted, he said, prompting the party to demand a re-verification it had once said it did not need. He also raised the case of evictions from forest and riverine land, including a 2021 eviction in Darrang district after which, he said, the opposition leader in the assembly took the matter to the Guwahati High Court and secured rehabilitation for 700–800 people; a similar eviction in Bhuragaon, he said, saw affected families paid roughly ₹50,000 to relocate rather than being expelled from the country. He connected the scale of eviction to a separate driver of landlessness: river erosion, which he said claims roughly 8,000 hectares of Assam's land a year and has consumed close to 7 percent of the state's land mass since 1950, displacing people onto government land regardless of religion even as, in his account, enforcement action falls overwhelmingly on Muslim settlers. He also referenced the case of a pregnant woman who was deported before a court battle secured her return, as an example, he said, of a climate of fear built more through messaging than through mass action.

A fractured opposition

Fahad also asked why Congress had not renewed its 2021 alliance with the All India United Democratic Front (AIUDF), whose leader Badruddin Ajmal's brother, Sirajuddin Ajmal, has publicly called Sarma India's best chief minister — a remark Wadud cited as evidence the AIUDF was too closely aligned with the BJP to be a credible ally. He noted that AIUDF legislators had voted with the BJP in Rajya Sabha and presidential elections after 2021, and argued that Asaduddin Owaisi's campaign appearances for AIUDF candidates, while drawing crowds, had in practice benefited Congress candidates such as Abdur Rahim Ahmed, a former AASU leader involved in NRC litigation who ran on the Congress ticket in the Sengra constituency. Congress is contesting instead alongside the Jatiya Parishad, Raijor Dal and CPI(M), and Wadud rejected the idea that a split opposition would fracture the Muslim vote in the BJP's favour, arguing Muslim voters in Assam, like anywhere else, do not vote as a bloc.

Zubeen Garg and the limits of institutions

Two other threads ran through the interview. One was the death of singer Zubeen Garg, whose case Congress has made a manifesto commitment, pledging justice within 100 days of taking office; Wadud called the government's chargesheet weak and noted that an accused's frozen bank accounts and a water-bottling plant linked to the case had since been unfrozen and reopened, which he read as evidence the government would not deliver accountability. The other was Wadud's repeated argument that even a strong anti-incumbency mood might not translate into a Congress government, because he believes the Election Commission, police, and central agencies such as the ED and CBI function, in practice, as extensions of the BJP. Fahad pushed back directly, noting that ground reporting ahead of the Haryana and Maharashtra elections had also pointed to Congress victories that did not materialise. Wadud did not dispute the comparison, arguing instead that it strengthened his underlying point: that Assam's contest, as he put it, is less "Congress versus BJP" than "the Election Commission and the BJP versus the people of India" — and that whatever the institutional odds, his party was contesting, in his words, with limited resources but full commitment.

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