Nous Podcast· 25 Jun 2026· 1:56:27

What Does Citizenship Mean for Indian Muslims? | Prof. Tanweer Fazal

Is the crisis facing Indian Muslims about more than citizenship? In this thought-provoking conversation with Asad Ashraf, Political Sociologist Prof Tanveer Fazal argues that the challenges confronting Muslims in India extend beyond legal citizenship to what is described as a broader process of d…

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सो दैट इज व्हाई से दैट व्हेन इट कम्स टूइंप्यूनिटी इट इज हियर वेयर द मुस्लिम केसलूजेस इट्स स्पेसिफिसिटी।अब मुसलमान अकेले ही नहीं है।जीऑल केसेस ऑफ मास वायलेंस इन इंडिया।हां। वहां पे एक इट इट हैप्स बिकॉज़ देयरइज़ अ गारंटीड इंप्युनिटी।आप बार-बार [संगीत] आपके काम में ल्यूसिवसिटीजनशिप नाम की एक चीज आती है जो किपेपर पर अलग है और प्रैक्टिस में अलग है।व्हाट इज हैपनिंग विथ मुस्लिम्स और हैज़हैपेंड विथ मुस्लिम्स इज़ पॉइंट व्हिच आईहैड रेफर्ड टू अर्लियर आल्सो इज इट नॉटओनली द सिटीजनशिप बट इट इज़ द प्रोजेक्ट ऑफ़डीनेशनलाइजेशन।राइट? जो मुस्लिम्स का सिचुएशन [संगीत]है, जो मुस्लिम्स की पर्टिकुलर सिचुएशनहै, सिटीजनशिप को लेकर, क्या ऐसेएक्सपेरिमेंट्स और भी कम्युनिटीज के साथकिए गए हैं? इट इज नॉट अ कोइंसिडेंस कि आपचाहे देखिए इकबालया जिन्ना या इवन मौदूदी ये लोग सभी एट वनपॉइंट ऑफ टाइमवेरी क्लोजली एसोसिएटेड वि द इंडियननेशनलिस्ट पॉलिटिक्स। हमलेकिन क्या वो आईडियोलॉजी इतनी डीपलीपेनिट्रेट कर गई है [संगीत] समाज में किअब समाज में भी वह ऑटोमेटिकलीहो रहा है मुसलमानों का नो वन हैज़ टू कमएंड से दैट कि मुसलमानों काइजेशन करोजो पॉपुलर आजकल यूपी से खास के निकल केआया है योगी मॉडल जिसको कहा जाता है औरकाफी सेलिब्रेट भी किया जाता हैजीपर बुलडोजर जस्टिस है क्या इट इज़ कंप्लीटडिनायल ऑफ़ एनी कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोसेस इटइज़ अनकस्टिट्यूशनल इज़ इललीगलआप सीएए एनआरसी को इंप्लीमेंट नहीं कर पाएतो आपने एक नया फ्रंट खोल दिया है एसआईआरको और एसआईआर के थ्रू आप वही करना चाह रहेहैं [संगीत] जो आप सीए एनआरसी के थ्रूकरना चाह रहे हैं।नाउ अ डेज मिस्टर असदुद्दीन ओवैसी इजट्राइंग टू बी एज अग्रेसिवली एंड एंटीपाकिस्तान और एज अग्रेसिवली यू नोनेशनलिस्ट एस पॉसिबलट्राइंग टू बी अ स्टेप अहेड ऑफ़ इवन दहिंदुत्व नेशनलिस्ट बट डजंट दैट डजंट मेकएनी डिफरेंस एस मचहेलो सलाम आदाब नाउ नेटवर्क के एक औरपडकास्ट में आप सबका खैरमकदम है। मैं हूंअसद अशरफ और आज हम जिस मौजू पर बात करनेवाले हैं वो मौजू है मुसलमानों से जुड़ेहुए सिटीजनशिप के सवाल और इस मौजू पे बातकरने के लिए हमारे साथ मौजूद हैं प्रोफेसरतनवीर फजल। प्रोफेसर तनवीर फजल एकजानेमाने पॉलिटिकल सोशियोलॉजिस्ट हैं।जिन्होंने स्टेट, माइनॉरिटी राइट्स,एक्सक्लूजन, सिटीजनशिप जैसे फंडामेंटलइश्यूज पे कई सारी किताबें लिखी हैं।कोऑथर की हैं और एडिट भी की है। फिलहाल यहबीएएमएल मंजाल यूनिवर्सिटी में प्रोफेसरहैं। तो मेरा पहला सवाल आपसे यह है कि आपबार-बार आपके काम में ल्यूसिव सिटीजनशिपनाम की एक चीज आती है जो कि पेपर पे अलगहै और प्रैक्टिस में अलग है। तो उसके बारेमें थोड़ा सा हमें बताएंगे कि क्यों यहइंडियन मुस्लिम के संदर्भ में कॉन्टेक्स्टमें बार-बार आती है।इल्यूसिव सिटीजनशिप एक्चुअली एक मेरी हमलोग की भी हाल की किताब है अ मुस्लिम्सएंड मोबिलिटी एंड मार्जिनलिटी करके जिसमेंहमने इल्लुसिव सिटीजनशिप टाइटल में ही रखाहै। बट यू आर राइट कि जो मेरे काम को अगरदेखा जाए तो ज्यादातर काम उसी नजरिए सेसिटीजनशिप के क्वेश्चन को एड्रेस करता है।नाउ सवाल यह है कि सिटीजनशिप एज एन आईडियाजब इमर्ज किया तो इट इमर्ज विद दिस आईडियाकिसिटीजनशिप आपको क्या देता है? मेंबरशिप इनअ स्टेट लीगल मेंबरशिप। इट इज़ अस्यूम किहरसिटीजनकिसी भी स्टेट में इक्वल राइट्स एंजॉयकरता है।जो इंडिया के कॉन्स्टिट्यूशन में भीएनशाइंड है।लेकिन अगर आप उसको गौर से देखें और उसकोजमीन पर उतरते हुए जब देखें तो आपको लगेगाकि यह सिटीजनशिप बहुत हद तकएक शिमरा की तरह है जो है जिसकी जरूरतमतलब जो कॉन्स्टिट्यूशनल राइट टू सिटीजनबीइंग इक्वल सिटीजन वो इंपॉर्टेंट है परवो जमीन पर उतरने की वाली बात जो उसकोलेकर के कही जा सकती है वो बहुत दूर हैउससेइसकी वजह बहुत है। अ समाज के अंदर जो बहुतसारी इनकलिटी है वह भी एक वजह है और उसइनकलिटी को मैं देख रहा हूं कि ओवर दइयर्स दूर होने के बजाय बल्कि रीइंफोर्सहो रही है।और समाज के अंदर के अलावा जो सरकारें हैं,जो सत्ता है, जोसियासत हैवो जो एक इंस्ट्रूमेंट हो सकता था इसकॉन्स्टिट्यूशनल प्रोविजन को इंप्लीमेंटकरने कावो हाल के दौर में कम से कम एक दो डिकेडसे अगर आप देखें खास करकेतो इस सिटीजनशिप के नजरिए से कंप्लीटलीअलग है दूरी बना रखी है। जब से खास करकेहिंदुस्तान में एक हिंदुत्व रिजीम का यूनो एस्टैब्लिशमेंट हुआ है सेंटर में औरबहुत सारे स्टेट्स में हम देख रहे हैं किजो फॉर्मल जो सिटीजनशिप का यू नो प्रॉमिसहै वो भी इरोड हो रहा है बहुत हद तक।यह तो छोड़ दीजिए कि माली हालात में यू नोजो एजुकेशनलस्टेटस या सामाजिक तौर पे जो भी बदहाली हैउसके अलावा जो लीगल राइट्स हैं जोकॉन्स्टिट्यूशनल प्रोविजंस हैं उसमें भीदिन प्रतिदिन देख रहे हैं कि किसी ना किसीतरह उसको कमजोर करने की कोशिश हो रही है।खास के मुसलमानों के नजरिए से अगर देखेंअब आप एक जो पॉपुलर आजकल यूपी से खास केनिकल के आया है योगी मॉडल जिसको कहा जाताहै और काफी सेलिब्रेट भी किया जाता है।जीहमारे मीडिया के डिस्कोर्सेज में हमारे जोमेजॉरिटेरियन पॉलिटिकल डिस्कोर्स है उसमेंभी और वो कहा जाता क्या है कि बुलडोजरजस्टिस। पर बुलडोजर जस्टिस है क्या? इट इजकंप्लीट डिनायल ऑफ एनी कॉन्स्टिट्यूशनलप्रोसेस। इट इज अनक्स्टिट्यूशनल इजइललीगल।राइट?लेकिन हमारेब्यूरोक्रेसी हो, पॉलिटिक्स तो है ही है।पर चाहे ब्यूरोक्रेसी हो जिन्होंने ओथलिया कॉन्स्टिट्यूशन पे पुलिसएडमिनिस्ट्रेशन हो, जुडिशरी हो एक दो आपकोकुछ इंस्ट्रशंस वगैरह बीच में आए थे। परडिस्पाइट दैट किसी ना किसी तरह वो चल रहाहै। जहां पर कि किसी को आप अक्यूज करें औरजाकर के खुद ही पनिशमेंट भी दे दे।राइट?तो यह व्हेन वी टॉकिंग अबाउट इल्यूसिवसिटीजनशिपबहुत सारी इस तरह के जो मसले हैं जो जो डेटू डे जिंदगी से जुड़े हैं और आम इंसानमैं ये नहीं कह रहा हूं कि सिर्फ मुसलमानइसमें यू नो इस इल्ल्यूसिव सिटीजनशिप सेपरेशान हैं। बल्कि बहुत सारे और दूसरे भीकमजोर तबके पर हाल के दौर में खास केमुसलमानों के मामले में माक्या हम देखते हैं कि अपार्ट फ्रॉमइरोडिंग देयर सिटीजनशिप राइट्सदेयर इज अ कंसंट्रेटेडअटेमप्ट कि उसको उनको डीनेशनलाइज किया जाएबाय डीनेशनलाइजिंग आई मीन कि उनका जोजोक्लेम है बीइंग अ कोनलउसको ही उसको ही सवालियों के घेरे में डालदिया गयाचाहे बहुत तरह के दूसरे अलग-अलग तरह केनोमेनक्लेचर दे के उनको बाहरी बता करकेउनको ट्रेटर्स बता करके उनकेपेट्रियोटिज्म पे कास्टेंटली क्वेश्चनमार्क लगा के उनकी हिस्ट्रीज को डिनाईकरकेतो ये है व्हाट आई वुड से इन सम टोटलव्हाट वी सी इलसिवसिटीजनशिप इसका हल क्या है मुसलमानों कोया आप कह रहे हैं जो दूसरे समाज के लोग भीहैं जिनको इल्यूसिव सिटीजनशिप करनी पड़तीहै और कहीं ना कहीं उनके ऑन ऑन द सरफेस तोइक्वल सिटीजंस हैं कागजी तौर पे लेकिनप्रैक्टिस में नहीं है। तो ऐसी कम्युनिटीजको कैसे रिसोंड करना चाहिए इस सिचुएशनमें?वन इज ऑफ कोर्स ऑर्गेनाइजिंग देमसेल्व्स।और मुझे लगता है कि इसमें सॉलिडेरिटी एकबहुत ही जरूरी और अहम चीज है। सॉलिडेरिटीअमंग्स मुस्लिम्स एज वेल एज अक्रॉसमार्जिनल कम्युनिटीज।इस सॉलिडेरिटी कई बार अटेम्प्ट हुई है परवो सस्टेन नहीं रहती है। उसकी वजह यह हैकि मुझे लगता है कि मार्जिनालिटी पे हीअभी तक हमकोई कंसेंससेस पे नहीं पहुंच पाए हैं किमार्जिनलिटी क्या है? किस तरह से अलग-अलगकम्युनिटीज को इंपैक्ट कर रही है। क्यामाली हालात की मार्जिनलिटी मार्जिनलिटीमेंयू नो काउंट होगी कि नहीं? क्या जो कास्टबेस्ड डिस्क्रिमिनेशन है उसको हम किस तरहसे समझ रहे हैं? मुसलमानों के अंदर भी औरदूसरी कम्युनिटीज में भी।हम किस तरह से जो जेंडर के बेसिस पेवायलेंस है। अगेन रूटीन डिस्क्रिमिनेशन हैउसको किस तरह से एड्रेस करेंगेऔर इन सबके साथ-साथ जो कम्युनिटीज हैंउनकी अपनी ऑटोनोमीको को समझनाविदाउट मेकिंग एनी यू नो प्रिस्रिप्टिवडिमांड ऑन देम।तो एक पॉलिटिक्स ऑफ़ सॉलिडेरिटी की जरूरतहै। राइट? दिस पॉलिटिक्स ऑफ़ सेलरिटी कैनइमर्ज कोई ड्राइंग ड्राइंग रूम से या यूनो सेमिनार हॉल से तो नहीं हो सकती।ये कास्टेंटलीअडोमेन ऑफ प्रैक्टिस से ही हो सकता है किलोग लगातार एक दूसरे के सवालों के साथहमदर्दी रखें। उसमें एंगेज करें। राइट?अच्छा सर आपने ये भी कहा कि जो सिटीजन जोइलसिव सिटीजनशिप का मसला है वो कहीं नाकहीं इंटरनल प्रॉब्लम भी है और आपने जोपहला स्टेटमेंट जो आपका था वो आपने कहा किये एक इंटरनल भी सवाल है मुसलमानों के बीचमें और उसको मैं थोड़ा समझने की कोशिश कररहा हूं कि हाउ इज इट एन इंटरनल क्वेश्चनएंड विद इन मुस्लिम्स व्हाट हैपेंस किसिटीजनशिप केसवाल है उसकेनो बाय दैट आई मीन के जो मुसलमानों केअंदर बीच में भी अलग-अलग एक तोफिरके हैं और अलग-अलग तरह के उसको चाहे आपबिरादरियां हैं उनकी अपनी पहचान है। उनकीअपनीआपस की लड़ाईयां हैं वगैरह-वगैरहऔर आल्सो एक सोशल हरार्की भी एक्सिस्टकरती है।औरतों का सवाल है। उन सब चीज जो एकमैं ये मान ये जरूरी नहीं है कि जोवेस्टर्न मॉडर्निटी है उसी के फ्रेमवर्कसे सोचा जाए। जीपर एट द सेम टाइम बहुत सारी जो आजादियांजोपसंद जो तरक्की पसंद थॉट्स हैं वोवेस्टर्न मॉडर्निटी जरूरी नहीं है कि वोवेस्टर्न मॉडर्निटी कोवो इंटरनली भी इमर्ज कर सकती है बायरेफरिंग टू द इंडियन नॉन वेस्टर्न या इवनइस्लामिक हिस्ट्री एंड प्रैक्टिसराइट राइटतो जरूरत है कि वोसही वो लफज़ यूज़ किया कि तरक्की पसंद जोतहरीक हैं जीउनके साथ एसोसिएट करके और उनसे जो फिलफिलॉसफर इमर्ज किया हैजीउसके साथ सीरियस इंगेजमेंट करके एकअल्टरनेटिव विज़ इमर्ज कर सकते हैं।करना सर आपकी 2014 की एक किताब हैमाइनॉरिटी नेशन स्टेट एंड माइनॉरिटीराइट्स और उसमें आप मुस्लिम आइडेंटिटीजिसको उसको तीन कैटेगरी में बांट रहे हैं।कौम मिल्लत और उमा थोड़ा उसके बारे मेंहमें बताएंगे क्या है यह कैटेगरीज और जोपोस्ट कॉलोनियल स्टेट है और जो पार्टीशनका हैंगओवर हैवो कैसे इनको रीइंफोर्स करता हैनहीं ये बहस जो है बेसिकली नेशनहुड केकॉन्टेक्स्ट में ज्यादा आती है जो आईडियाऑफ़ बिलोंगिंगनेस है वगैरह जो पहले मेंशनकिया था डीनेशनलाइजेशन डीनेशनलाइज करने कीजो कोशिश हो रही हैतो एक अराउंडलेट कॉलोनियल पीरियड में भी यह बहस बहुततेज थी और उस उस दौरान में भी कुछ लोगअलग-अलग तरह से वतन वतन परस्ती और वतनियतया कौमत वगैरह को समझने की कोशिश कर रहेथे। रेफरेंस पॉइंट सबका विद अमंग्स दमुस्लिम इंटेलेक्चुअल्स खास इस्लामिकइंटेलेक्चुअल्स रेफरेंस पॉइंट इस्लामिकथियोलॉजी ही थे। दे वर ड्राइंग एग्जांपल्सफ्रॉम डिफरेंटअइस्लामिक ट्रेडिशन और उसके साथ बाद उससेवो अपने कंक्लूजंस में पहुंच रहे थे। तोयह जो बहस थी ये इसमें आप कहिए कि आज केदौर में अगर कहेंगे तो इसमें जमात इस्लामीके फाउंडर मौजूदी हमजमीत उलमा के वन ऑफ़ द वेरी कीस्कॉलर्स हुसैन अहमद मदनी और जो पोएटफिलॉसफर इकबालमौलाना आजाद ये लोग सब वेरी डीपली दे वरडिबेटिंग व्हाट इज ये नेशनहुड का आईडियाजो क्योंकि अल्टीमेटली जो नेशन का जोकंस्ट्रक्ट है वो तो वेस्ट से आया था।राइट?वहां पे जब 16 17 सेंचुरी में काफीलड़ाईयां हो गई रिलीजन के बेसिस पे, सेक्सके बेसिस पे उसके बाद उन्होंने येतय किया।हां। ये फार्मूला इमर्ज किया कि भाई जोजबान बोलने वाले लोग हैं उनका अपना स्टेटहोगा। जीतो फ्रेंच स्टेट जर्मन स्टेट वगैरहइस्टैब्लिश हुए लेकिन उससे मसला तो हलनहीं हुआक्योंकि इसी से माइनॉरिटी का सवाल भीइमर्ज किया कि जो लोग जर्मन स्पीकिंग पीपललिविंग इन फ्रेंच एरियाज अब उनको किस तरहसे आप ट्रीट करेंगे उनकी लॉयल्टी का क्याहोगाजीवो शक के घेरे में हमेशा आ जाते थेतो इस ये बहस जो है हिंदुस्तान में भी आईजब हम वी स्टार्टेड इमेजिनिंग आवरसेल्व्सकि पोस्ट ब्रिटिश किस तरह का नेशन आएगा?क्या [नाक से की जाने वाली आवाज़] उसके जोअलग-अलग कम्युनिटीज है वह किस तरह से कोएक्सिस्ट करेंगे या करेंगे या नहींकरेंगे?अमंग्स मुस्लिम्स जो बहस थी वो बहस आज केदौर में भी इंपॉर्टेंट है टू सम एक्सटेंटकेइस्लामिक थियोलॉजी में पॉलिटिकल थियोलॉजीखास के उसमें एक दारुल हर्ब और दारुलइस्लाम का कांसेप्ट है जो बार-बार आजकल भीकुछ लोगवो कोट करतेहां निकाल के लाते हैं और कोट करते हैं।जीपर जो चीज वो कन्वीनिएंटली भूल जाते हैंकि हिंदुस्तान नहीं मुसलमानों ने और यहांपर जोइस्लामिक थियोलॉजियंस या इंटेलेक्चुअल्सरहे हैं। उन्होंने अपने इनोवेटिवकंट्रीब्यूशन भी किया है। उन्होंने कहा किदारुल इस्लाम और दारुल हर्ब तो सही है एकजगह है। लेकिन एक दारुल अमन का भीकांसेप्ट है।राइट? और दारुल अमन वो है कि जहां दारुलइस्लाम में इस्लामिक रूल इज देयर। पीपल आरफ्री टू यू नो प्रैक्टिस देयर रिलजनएटसेट्रा दारुल हर्ब है जहां ये सब चीजोंपे बंदिशें लग जाती हैं।पर दारुल अमन वो है जहां पे को एक्सिस्टकर सकते हैं।मुस्लिम्स आर को शेयरर्स ऑफ़ पावरऔर मौलाना आजाद इन लोगों का यही आईडिया थाकि ये शुरू होता है अगर इसकी कॉनसेप्चुअलहिस्ट्री देखें तो वी कैन गो बैक टू सरसैयद वगैरह जो दारुल अहद या दारुल अमन कीबात कर रहे थे। तो जो कुछ लोग अभी आजकल येसब कहते हैं दारुल अमन सॉरी दारुल दारुलइस्लाम वगैरहमुझे याद है कि एक पुलिस ऑफिसर तमिलनाडुमें बैठे हुए हैं बीच-बीच में ये सब चीजेंउठाते रहते हैं। थोड़ी भी हिस्ट्रीउन्होंने पढ़ रखी है।हमलेकिन बहुत कन्वीनिएंटली इस इस हिस्ट्रीके ये एस्पेक्ट कोनिगेट कर देते हैं। कि इंडियन मुस्लिम्सने दारुल अहद के रास्ते को समझा और उसकोथियोलॉजिकली जो है इस्टैब्लिश करने कीकोशिश की और उसको उन्होंने इस्लामिकहिस्ट्री में भी जो[गला साफ़ करने की आवाज़]प्रॉफेट का जो एककिसी तरह का अलायंस बना था मदीना के जस केबीच सेउसको एक यू नो जिसमें प्रॉफेट ने डिक्लेअकिया कि ये भी हमारे हम वतन हैं। जीभले ही अलग रिलजन के होजीतो इस आईडिया के साथ दारुल अहद और दारुलअमन के फाउंडेशन हुआ। तो ये बहस जो मैंकौम मिल्लत और उमा के थी उसमें मैं यहीदारुल अहद के आईडिया के साथ समझने कीकोशिश कर रहा था। जीतो कौम की बात तो यह है कि कई बार लोगकहते हैं कि भाई मुसलमान जो है एक कौम हैजीऔर एककौम जो है नेशन के साथ भी जोड़ा जाता हैराइट मतलब टेरिटोरियल आईडिया हैवही थाहांऔर उमा जो है उसकोउसी उम्मा के आईडिया के साथ ही मुस्लिम केकी जो पेटियोटिक यू नो उनके जो अर्ज हैउसको तो उसको उसके सवालिया निशान लगायाजाता है कि आप जो है अपने आप[गला साफ़ करने की आवाज़] को एक उम्मा काहिस्सा मानते हैं तो आप किसी स्टेट केकिसी कंट्री के किसी टेरिटरी से एसोसिएटनहीं करेंगेकरेंगेलेकिन मुस्लिम मुसलमानों के बीच में इसकोलेकर के बहुत सारी हर हर कंट्री में इसकोलेकर के बहुत सारे बहसें हुई हैं और बहुततरह के इनोवेटिव आइडियाज इमर्ज की औरइंडियन कॉन्टेक्स्ट में उमा को हमेशा एकस्पिरिचुअल आईडिया माना गया हम नॉनटेरिटोरियलऔर यह देखा गया कि ऐसा कोई कॉन्टेस्टेशननहीं है। आप एक अच्छे मुसलमान के तौर परहिंदुस्तान में रह सकते हैं। और एट द सेमटाइम हांअपने को रिलीजनिस्ट जो दूसरी जगहों पे हैंउनके साथ भी खास के स्पिरिचुअल मामले मेंनॉट नेसेसरी ऑन पॉलिटिकल क्वेश्चंस परस्पिरिचुअल मामले में आप एक तरह से सोचसकते हैं। तो इस तरह से ये चीजें रॉल्वहुई हैं।मेरा अगला सवाल आपसे यह है कि आपनेमुसलमानों के अराउंड जो सवाल हैं जोसिटीजनशिप को लेकर सवाल है आपने उसको सिखसे भी कंपेयर किया हैऔर कई पैरेलल्स ड्रॉ किए हैंऔर उसमें मैं ये समझना चाहता हूं कि वोडायवर्ज कहां पे करता हैहमऔर इंडियन स्टेट जो है वो माइनॉरिटीज कोअलग-अलग कैटेगरीज में ट्रीट करती है यामाइनॉरिटीज को एक एक कॉमन कैटेगरी मान केट्रीट करती हैया दैटमाय एक्चुअली द फर्स्ट बुक यू आर रेफरिंगटूनेशन स्टेट एंड माइनॉरिटी राइट्सकंपेरेटिव पर्सेक्टिव ऑन मुस्लिम एंड सिखआइडेंटिटीजनाउ मुस्लिम्स और सिख ये दो केसेस कोमैंने स्टडी करने की कोशिश इसलिए कीक्योंकि दोनों के अंदर अ एक हिस्टोरिकलीएक आईडिया ऑफ नेशन इमर्ज किया था। ठीक है?हमऔर वो उसका कोई थियोलॉजिकल नेसेसरी ओरिजिननहीं था। उसका पॉलिटिकल एंड सोशल ओरिजिनही था। पर अ व्हाट इज इंटरेस्टिंग इज किइन प्रीडमिनेंट हिंदुत्व डिस्कोर्स और टूसम एक्सटेंट ये डिस्कोर्स जो है इंडियननेशनलिस्ट इससे भी एग्री या कन्वर्ज करजाता था कि अगर आप उसकोयू नो एनालाइज करें, एनालिटिकली सेपरेटकरें। तो देखिए कि माइनॉरिटी ऑलदो देयर इजअ लिस्ट ऑफ माइनॉरिटीज इन इंडिया नेशनलमाइनॉरिटीज। उसमें मुस्लिम्स भी हैं,सिख्स भी हैं। अब शायद जैस भी आ गए हैं।बुद्धिस्ट हैं वगैरह-वगैरह।लेकिन ऑन मेनी काउंट्स देयर इज़ अडिस्टिंशन मेंटेन बिटवीन रिलीजंस व्हिच आरऑफ इंडियन ओरिजिन एंड दोज़ व्हिच आरकंसीडर्ड टू बी ऑफ़ नॉन इंडियन ओरिजिन। औरयह एक्चुअलीदिस आईडिया ऑफ डिस्टिंशन बिटवीन रिलीजंसऑफ डिफरेंट काइंड्स एंड देयर फॉर पीपल हुआर डेयर टू दोज़ रिलीजंस। यह शुरू होता हैसावरकर के हिंदुत्व के पब्लिकेशन के बाद।पर उसका इन्फ्लुएंस काफी रहा है इंडियनथॉट में। तो द होल आईडिया वाज़ कि दोज़ हुआर ऑफ़ नॉन अब्राहमिक ओरिजिन।देयर फादर लैंड्स लाई आउटसाइड ऑफ इंडियाएंड देयर फॉर दे कैन नॉट बी ट्रस्टेड ऑनकाउंट ऑफ देर लॉयल्टी और कुछ लोग तो इस हदतक जाकर कहते थे कि इनको सेकंड क्लाससिटीजन बना दिया जाए लाइक गोलवर्कर और सबवर्कर वगैरह वो चीजें अब इन प्रैक्टिसरिवील हो रही है।तो यह दो सेपरेट केसेस मैंने इसलिए लियाथा कि एक तो है ऑफ इंडिक या इंडियन ओरिजिनसो कॉल्ड और दूसरा सो कॉल्ड ऑफ नॉन इंडिकऔर नॉन इंडियन ओरिजिनअब्राहमिक एंड नॉनहां दैट वे यू कैन से एंड देन ट्राई टू सीदैट इन दोनों के बीच में जो पॉलिटिकलआइडेंटिटी है उस किस तरह से डेवलप हुईहिस्टोरिकली और हमने देखा कि दोनोंमुसलमानों में भी एक टाइम में ऐसा दौर थाजब अपने आप को एक सेक्शन ऑफ़ मुस्लिम्स लुकसीइंग देमसेल्व्स एस डिस्टिंक्ट नेशन। देहैड सर्टेन आर्गुमेंट्स व्हिच मे बी टुडेइंपेरिकली नॉट वेरी वैलिड। अ उसी तरह सेसिखों के अंदर भी जो बाद में हमने देखा किखिस्तान का आईडिया आया। उसका ओरिजिन जो हैबोथ मुस्लिम नेशनलिज्म एज वेल ऐ सिखनेशनलिज्म। दोनों का ओरिजिन जो है वोडिस्कोर्सेस अराउंड पार्टीशन जो हो रहे थेवो ऑल कम्युनिटीज़ वास लुकिंग एट अ फ्यूचरएंड दे वर अनश्योर के हाउ विल इंडियननेशनलिज्मअकोमोडेट देयर कंसर्न्स।सो सम हु फ्ट दैट इट इज़ इनकेबल ऑफ़अटेंडिंग टू देयर कंसर्न्स।तो उन्होंने अपना अलग रास्ता एडवोकेटकिया। इट इज़ नॉट अ कोइंसिडेंस कि आप चाहेदेखिए अगवाल या जिन्ना या इवन मौदूदी येलोग सभी एट वन पॉइंट ऑफ टाइम इन वेर वेरीक्लोजली एसोसिएटेड वि द इंडियन नेशनलिस्टपॉलिटिक्सअजिन्ना वास सेक्रेटरी ऑफ़ तिलकमौदूदी रोट अ बायोग्राफी ऑफ गांधी अहएंड देन द इकबाल साहब ऑफ कोर्स वाज़ वन वनऑफ़ दोज़ वेरी की फिगर्स इन टर्म्स ऑफ़ सारेजहां से अच्छा है।हां उस जो हु रोट द नेशनल सॉन्ग एंड ऑलदैटबट एट सम पॉइंट अ वो चीजें समझनी जरूरी थीये कि इट इज़ नॉट समथिंग इंस्टिंक्टिवलीदेयर इन द इस्लामिक थॉट और नॉन अब्रहमिकरिलजन बट पॉलिटिक्स टेक्स अ कोर्सऔर ये पॉलिटिक्स कोई आइसोलेशन में नहींहै। वह पॉलिटिक्स इन कॉन्टेस्टेशन विद दनेशनलिस्ट पॉलिटिक्स है और वहां पर वहजहां पर देखते हैं कि वीकनेसेस हैं दे समऑफ देम शिफ्ट टू अ डिफरेंट आईडिया देस्टार्ट ड्रीमिंग डिफरेंटली।यही कोर्स जो है वी सॉ इन द सिख मूवमेंटएज वेल। अह अल्टीमेटली आई एम नॉट वन हुवुड एडवोकेट रिलीजियस नेशनलिज्म।राइट?आई वुड सी से दैट इनफैक्टअह इट इज़ एन अनसस्टेनेबल आईडिया।राइट?और औरदेयर फॉर मैं तो अपने जो नेशन स्टेट एंडमाइनॉरिटी राइट्स वाली किताब है उसमें आईहैव ट्राइड टू फॉलो माय यू नो अ सुपरवाइजरप्रोफेसर टी के वुमंस वर्कराइटवेयर ही हैज़ एम्फेसाइज अपॉन द आईडिया ऑफ़मल्टीीनेशनलिज्म। आज की डेट में इस पे बातकरने ही एंटीनेशनल माना जाएगा। जीपर इट इट इट एक्चुअली वाज़ एन आईडिया व्हिचसेड कि एवरीवन आइडेंटिटी एटसेट्रा कैन बीअकोमोडेटेड विद इन अ सिंगल स्टेट सिस्टमएंड सो इन दैट सेंस अ इंडिया एज एनअकोमोडेटिव नेशनलिज्म वुड वुड बी अमल्टीीनेशनलिस्ट प्रोजेक्ट व्हिच वुड वर्कफार बेटर देन अ नेशनलिस्ट आईडियातोसिख और और मुस्लिम नेशनलिज्म जो हैअल्टीमेटलीइवन इफ मुस्लिम नेशनलिज्म सक्सीडइस्टैब्लिशिंग पाकिस्तानबट इट डिड नॉट सेटल पाकिस्तान प्रॉब्लम्सराइट71 में वो एक लैंग्वेज के क्वेश्चन पे अलगहो गएऔर वो सवाल अभी भी पाकिस्तान के अंदर है।फाइव नेशनलिटीज हैं। वहां भी बलूचिस्तानहै वगैरह-वगैरह है। और कहते हैं किपाकिस्तान नहीं है, पंजाबिस्तान है। सो मचऑफ़ पंजाबी डोमिनेशन।दूसरी तरफ सिख नेशनलिज्मकुछ दिन तो चला लेकिन उसके बाद अमंग्स दसिक्स देमसेल्व्स आल्सो एंड देयर वरडिफरेंसेस एंड इट कुड नॉट बी सस्टेंडद आर्गुमेंट व्हिच आई वाज़ ट्राइंग टू पुटफॉरवर्ड इज़ दैट रादर देन यू नो सीइंगअह नॉन अब्राहमिक रिलीजंस एज़ इन एसइंट्रिंसिकली जो है डिसलॉयल और समथिंगलाइक दैट यू यू शुड कंसंट्रेट ऑन दअनफोल्डिंग ऑफ़ हिस्ट्री एंड पॉलिटिक्स एंडदेन यू ट्राई टू अंडरस्टैंड यू विल कम टूबेटर रिजल्ट्स आफ्टर ऑल व्हाई डिड सिक्सस्टार्ट सीइंग देमसेल्व्स एस अ डिफरेंटनेशनराइटहै ना तो तो अ इफ दे वर ऑफ हिंदू ओरिजिनइफ दे वर ऑफ़ इंटीग्रेटेड टू द इंडियननेशनलिस्ट आइडियातोउसकी समझ अब हम तभी कर सकते हैं इफ वी लीवद थियोलॉजिकल आईडिया एंड गो इनू द डोमेनऑफ पॉलिटिक्स हिस्ट्री मे बी पॉलिटिकलइकॉनमीटू फाइंड द आंसर राइटसर मुस्लिम नेशनलिज्म कहीं ना कहीं जोमुस्लिम पॉलिटिकल थॉट है वहां से निकलताभी है लेकिन जो सिख सिख सिख नेशनलिज्म हैवो क्या उनके धार्मिकजो अंडरस्टैंडिंग है वहां पर उसका स्पेसहै सिख सिख नेशनलिज्म का और क्या उस बेसजो बेसिस था सिख नेशनलिज्म का जो खिस्तानका पूरा मूवमेंट था हिंदुस्तान में उसकीबेसिक वजह क्या थी इज इट जस्ट बिकॉज़मुस्लिम्स गॉट अ डिफरेंट कंट्री एंड देथॉट दैट इक्वल शेयर वाज़ नॉट गिवन टू देमएंड देयर फॉर दे डिमांडेड अदर स्टेट फॉरसेक्स टू और इज़ इट समथिंग इंट्रेंसिक टूदेयर ओन रिलजन एंड कल्चर व्हिच लेड टू दडिमा कमांड ऑफ खिस्ताननथिंग इंट्रिंसिक टू रिलजनबट अगेन आई वुड से कि द पॉलिटिक्स पोस्टपार्टी पार्टीशन एंड पोस्ट पार्टीशनपॉलिटिक्स इफ वी सी द थिएटर इज पंजाबपंजाब वाज़ अ स्टेट अ लार्ज स्टेट वि थ्रीप्रीडमिनेंट कम्युनिटीज रिलीजियसकम्युनिटीजद हिंदूस द मुस्लिम्स द लार्जेस्ट बीइंग दमुस्लिम्स द सिख एस वेलवंस द पार्टीशन टूक प्लेस ईस्ट एंड वेस्टपाकिस्तानद मुस्लिम पापुलेशन एंटायरली फ्रॉम ईस्टपंजाब मूव्ड इंटू द वेस्ट पंजाब इट वासटोटल ऑलमोस्ट ट्रांसफर पपुलेशनइनफैक्ट पार्टीशन इंपैक्टेड डीपली ओनली टूस्टेट्स ऑफ इंडिया बंगाल एंड पंजाबअह सोनाउ इट इट कंप्लीटली नाउ चेंज दडेमोग्राफी देयरद सिक्स हु व अरर्लियर सीइंग देमसेल्व्सएस पार्ट ऑफ इन सम सेंस द इंडियननेशनलिस्ट डिस्कोर्सनाउवर इन पंजाब बट इन अ लार्जर पंजाब व्हिचआल्सो इंक्लूडेड पार्ट्स ऑफ़ हरियाणा एंडपेप्सू स्टेट्स एंड यू नो हिमाचल प्रदेशएटसेट्रा दे वर स्टिल अ माइनॉरिटीसो सिक्सफेल्ट एट सम टाइमएंड लॉट ऑफ इट इज आल्सो अराउंड द क्वेश्चनअबाउट बिकॉज़ इट्स लार्जली एन एग्रीकल्चरलस्टेट एंड मोस्ट ऑफ द सिक्स व पर्टिकुलरलीद डोमिनेंट सिक्स वर जाट्सअह द क्वेश्चन ऑफ यू नो इरीगेशन कनालवेरियस अदर क्वेश्चंस वर आल्सो वेरीेंटफॉर देम तो सेक्स स्टार्टेड फीलिंग एट समपॉइंट ऑफ़ टाइम कि अनलेस एंड अंटिल दे हैवअ स्टेट ऑफ़ देयर ओन दे विल नॉट बी एबल टूमेंटेन देयर डिस्टिंक्टिवनेस इन अइन अ मल्टीकल्चरल इंडियाएंड पंजाब वाज़ द सेक्रेट लैंड।राइट?सो फर्स्ट दे स्टार्टेड पंजाबी सुबहमूवमेंट 1960उसमें ये आर्गुमेंट था कि पंजाबी बोलनेवाले एरियाज जो हैं उनको अलग कर दिया जाए।दे फेल्ट कि आफ्टर दैट सिक्स विल कम इंटूअ मेजोरिटी। व्हिच हैपेंड व्हिचअल्टीमेटली आफ्टर बट दैट पंजाबी सुपरमूवमेंट आल्सो टूक एट ऑल। उसमें कुछ वेरीप्रीडम प्री प्रोमिनेंट सिखगुरु एंड ज्ञानीज दे हैड टू फतेह सिंहवगैरह उनकी जाने चली गई अल्टीमेटलीदे सक्सीडेड देयर पर एट द सेम टाइम एकबड़ा सिख डायस्पोरा तैयार हो गया थाराइटव्हिच वाज़ आल्सो लुकिंग टुवर्ड्स सम काइंडऑफ़ अ यू नोस्पेस व्हिच इज़एक्सक्लूसिवली फॉर फिजिक्स हां तो वो वोएक शुरू हुआ बट देयर वाज़ आल्सो अ लॉट ऑफ़मिस हैंडलिंग फ्रॉम द इंडियन साइडअल्टीमेटली ऑपरेशन ब्लू स्टार एटसेट्रा तोसिख नेशनलिज्म वाज़ अ शॉर्टलिव्ड वन परसिख नेशनलिज्म इज़ स्टिल देयर व्हाट इज़ नॉटदेयर इज़ द सेपरेटिज़्मसेपरेटिज़्महांतो वो द आईडिया कि सिख आर पंजाबी दे कॉलइट एट आई रिमेंबर फकरी कौम लेट इज़सेपरेट डिस्टिंक्ट नेशन द वर्ड कॉम इजयूज्ड इन देयर एस वेलतो वो आईडिया अभी भी हैएंड दैट इज द रीज़न व्हाई दे डोंट वांट टूबी कोऑप्टेड विद इन अ लार्जर हिंदुत्वआईडिया हां तो बट एट द सेम टाइमसेपरेटिज्म इज़ नॉट इंसिस्टेड अपॉन बिकॉज़दे फाउंड दैट इट वाज़ फ्यूटाइल राइटअह लॉट ऑफ़ लाइफ्स आर लॉस्ट एंड एट द सेमटाइम टू फॉर अ डिस्टिंक्ट पंजाब एस असेपरेट स्टेट टू सर्वाइव एंड एक्सिस्ट विलबी अ चैलेंज आई थिंक। सो हमसो दैट वाज़ वन वे इन व्हिच सो द होल थिंगइज़ अह टू से दैट वेल इट इज़ नॉट नेसेसरली दथियोलॉजीनॉट रिलीजन बट वी हैव टू एड्रेस दक्वेश्चन ऑफ़ पॉलिटिक्स द क्वेश्चन ऑफ़हिस्ट्री अह द क्वेश्चन ऑफ़ अगेन पॉलिटिकलइकॉनमी एटसेट्रा एंड देन अंडरस्टैंड अहदीज़ काइंड्स ऑफ़ अह मोबिलाइजेशंस। तो शायदहम कुछ और बेहतर समझदारी पर पहुंच पाएंगे।राइट सर सर आपने बात करी टीम साहब की औरआपने बोला कि मल्टीपल नेशनलिटीज विद इन अनेशन स्टेट रह सकती है और एक साथ एक तरफहम बात कंपोजिट नेशनलिज्म की कर रहे थेजहां पे अलग-अलग तरह के लोग जो है एकनेशनल आईडिया के साथ वो हिंदुस्तान के साथसाथ रहे और हम लोगों ने इस प्रोजेक्ट कोमाना था कि ये एक सक्सेसफुल प्रोजेक्टरहेगा जिसमें सबको अकोमोडेट कर लिया जाएगाएंड टू बी वेरी असर्टली सेइंग दैट कि वीपर्सनली रिजेक्टद [नाक से की जाने वाली आवाज़] थ्योरी ऑफ़पार्टीशनएंड एनी थ्योरी ऑफ़ ससेशन फ्रॉम ऑफ दइंडियन स्टेट और और द स्टेट फॉर दैट मैटर।लेकिन कमियां कहां रह गई थी कंपोजिटनेशनलिज्म में कि हिंदुत्व इतना ज्यादाउजागर हो गया और इतना मजबूत फोर्स बनके आजके टाइम में इस्टैब्लिश कर लिया अपने आपकोकि एक तरह से पूरे स्टेज स्टेट को कैप्चरकर लियाराइट इट्स अ गुड क्वेश्चन व्हिच यू रेस्डएंड दिस इज़ समथिंग व्हिच आई हैव बीनआर्गुइंग एंड मतलब इट डजंट कट आइस अमंग्समोस्ट पीपलपर जैसे मैंने पहले भी कहा है कि हिस्ट्रीइज़ वेरीेंट वी हैव टू पे अटेंशन टू दक्वेश्चन ऑफ़ हिस्ट्री एंड नॉट[नाक से की जाने वाली आवाज़] नेसेसरी टूटेक अ रिवेंज। हिस्ट्री शुड नॉट बीवेपनाइज्ड बट एटलीस्ट टू अंडरस्टैंडथिंग्स बिकॉज़ विदाउट दैट प्रोबब्ली इफ वीडू नॉट कम टू एनी एक कंप्लीटअंडरस्टैंडिंग तो चीजें हाफ बेक ही रहजाती हैं। राइट।अब जहां तक कंपोजिट नेशनलिज्म का सवाल था,आई थिंक इट सर्व मोर एज अ स्लोगनसम अमाउंट ऑफ कमिटमेंट बट वाज़ नॉट यू नोइवन अमंग्स दोज़ हु द प्रोपोनेंट्स ऑफ़कंपोजिट नेशनलिज्म। उनके बीच में भी वोपूरी तरह से कन्विक्शन नहीं था।इस वजह से ही एक मेजॉरिटेरियन टेंडेंसीशुरू से ही रही।औरपार्टीशन का रीजन भी पार्टली वो था।जी।दोज़ हिस्टोरियंस वुड से कि भाई एक मुस्लिमनेशनलिज्म या मुस्लिम लीग वगैरह एकतरफ़ा हीएक अभियान चला रखा था उन्होंने।पीपल लाइक आयशा जलाल एंड ऑल वुडहां वुड हैव अ डिफरेंट व्यू।और इन एनीवेज़ कॉमन सेंस वुड आल्सो टेल यूकि दो हाथ से एक हाथ से ताली तो बजती नहींहै।राइट? [नाक से की जाने वाली आवाज़]तो व्हाट वाज़ देयर? व्हाई डिड दैटक्वेश्चन व्हिच आईरेड्ड अर्लियर कि इकबाल जिन्ना ऑल दप्रॉमिनेंट फिगर्स ऑफ सेपरेटिज्म इफ यू सेव्हाई वर दे ऑल नेशनलिस्ट अर्लियर एंडव्हाट वास दैट मोमेंट ऑफ़ ब्रेक व्हाई डिडदे स्टार्ट थिंकिंग डिफरेंटली और उस वोपीरियड को उस उस दौर की पॉलिटिक्स को समझेबिना हम आज के दौर में जो राइज ऑफहिंदुत्व एक फैशिस्ट टेंडेंसी इन इंडियनपॉलिटिक्स इमर्ज किया है उसको समझने मेंइनकंप्लीट रहेंगे।तो मेरी तो यह समझदार है कि अगर आपकॉन्स्टिट्यूशन असेंबली डिबेट्स देखें,डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स देखें, बहुत सारेकॉन्स्टिट्यूशनल प्रोविज़ंस भी हैं जो किएक मेजॉरिटेरियन टेंडेंसीज को यू नो उसकेसाथ फ्लर्ट भी करते हैं और उसको उसकोअकोमोडेट भी करते हैं। अब देखो हिंदी कासवाल है जैसे लैंग्वेज का क्वेश्चन था एकआईडिया जो इंडियन नेशनलिस्ट पॉलिटिक्स सेइमर्ज किया था कि भ एक जबान होगी जोहिंदुस्तान के अलग-अलग जबानों से मिलजुलके बनी हुई हिंदुस्तानी होगी।लेकिन आते-आते उसको हिंदी कर दिया गया औरउसमें भी अंडरलाइन किया गया कि हिंदीड्रॉन लार्जली फ्रॉम संस्कृत एंडपार्शियली फ्रॉम अदर लैंग्वेज। हम यहीनहीं 1955 में इफ आई एम करेक्ट एक संस्कृतकमीशन इंस्टीट्यूट किया गया। संस्कृतकमीशन का अ जो टर्म्स ऑफ रेफरेंस था उसमेंये था कि टू सी वेदर संस्कृत कैन बिकम दनेशनल लैंग्वेज ऑफ़ इंडिया।अब हमें पता है कि संस्कृत का क्या है? वोइट इज़ नॉट अ स्पोकन लैंग्वेज। इट इज़ नॉट अवर्किंग लैंग्वेज। बट एट द सेम टाइम एककाफी तरह का इमोशनल एसोसिएशन विद संस्कृतहै। एंड सरप्राइजिंगली दिस संस्कृत कमीशनजो है उसने रेकमेंड किया कि हां संस्कृतइज द ओनली लैंग्वेज इन इंडिया व्हिचडिर्व्स टू बी द नेशनल लैंग्वेज बिकॉज़एव्री अदर लैंग्वेज ड्रॉ सम वोकैबलरी और दअदर फ्रॉम संस्कृत। थैंकफुली वो नहीं हुआक्योंकि वो शायद प्रैक्टिकल नहीं था। इसवजह से उसको नहीं लाया जाएगा।इसी तरह से जोहम आर्टिकल 341 देखते हैं अ खास करके जिसजो सवाल जो शेड्यूल कास्ट का हैहमउसमें हम देखते हैं किस तरह से क्रिश्चियनऔर मुस्लिम दलित्स कोउससे बाहर कर दिया गया।दो ही उसमें कंसेशन किए गए हैं। उसमेंसाफ-साफ लिखा हुआ है क्लॉज़ थ्री में कि जोअनटचेबल कास्ट वो हैं जो हिंदू धर्म सेनिकलते हैं।बट दो कंसेशन उसमें किए गए। एक था सिख1956 में सम सिख कास्ट व इंक्लूडेड एज अशेड्यूल कास्ट।राइट? एंड देन 1990 में वीपी सिंह केसरकार के टाइम में न्यू बुद्धिस्ट को भीवो इंक्लूड किया गया।इफ यू सी द पैटर्न क्रिश्चियन एंडइस्लामिक कम्युनिटीज हु अदरवाइज फॉलो सेमकाइंड ऑफ ऑक्यूपेशन वो सफर करते हैं उसीतरह के ह्यूमिलेशन सेपर इसके बावजूद वो उसमें अकोमोडेटेड नहींहोंगे और एज अ रिजल्ट व्हेन यू कंपेयर दीज़कम्युनिटीज़ हु आर अ क्रिश्चियन और मुस्लिमओरिजिनएंड देयर सिमिलर काइंड ऑफ़ ऑक्युपेशंसव्हिच अदर्स डू और यूज़्ड टू डू अर्लियररिजर्वेशन के बेनिफिट की वजह से वहां पेएक तरह कामतलब मोबिलिटी अपवर्ड मोबिलिटी हुई है जोमुसलमानों में खास करके बिल्कुल एब्सेंटहै।जीतो वी अगेन सी दैट सेम डिस्टिंशन दहिंदुत्व डिस्टिंशन बिटवीन द अब्राहमिकएंड नॉन अब्राहमिक रिलीजंस इज़ वेरी वेरीरीएविडेंट इन द कॉन्स्टिट्यूशनल प्रोविज़न।राइट?तो इसी तरह से बहुत सारे डायरेक्टिवप्रिंसिपल्स हैं जो उस डायरेक्शन में जातेहैं। और अपार्ट फ्रॉम दैट सून आफ्टर दअस्टइंडिपेंडेंट गवर्नमेंट वाज़ इस्टैब्लिश्ड।इवन व्हेन नेहरू वाज़ द प्राइम मिनिस्टर वीसी दैट एट द स्टेट लेवल बहुत सारे ऐसे लॉज़पास हुए जो प्रीडमिनेंटली वो हैं जैसे किएंटी कन्वर्शन लॉ जैसे कि एंटी काउस लॉटललॉ वगैरह जो कि अकोमोडेट करते हैंटेंडेंसी उनके कंसर्न्स को तो दैट इजव्हाई आई से कि इवन इफ कंपोजिट नेशनलिज्मवाज़ देयर कंपोजिट नेशनलिज्म इफ इट वी सीअंडरस्टैंड इट इट इट बिटड इट्स ओन आईडियाराइटइट वाज़ नॉट अकोमोडेटिव टू द एक्सटेंट इटशुड हैव बीन इंडिया इज़ अ ह्यूजली डवर्सकंट्री रिलीजियस डायवर्सिटी के अलावालिंग्विस्टिक डायवर्सिटी वगैरह भी बहुतज्यादा है और इसके बावजूद अह इट एट द सेमटाइम आई मस्ट टेल यू किजो एक एक यू नो नेशनलिस्ट थिंकिंग होती हैकि हम होमोजेनिटी ले आएंगेतो उससे जो हैजो लॉयल्टी वगैरह का सवाल रिॉल्व होजाएगा। स्टेट की तरफ पीपल हु आरपार्ट ऑफ अ सिमिलर काइंड ऑफ़ अ कल्चरलप्रैक्टिस, सिमिलर काइंड ऑफ़ रिलीजन,लैंग्वेज, एटसेट्रा दे विल बी मोर लॉयल।कम बनिस्बत दूसरों के।लेकिन फैक्ट ऑफ द मैटर डायवर्सिटी आल्सोब्रिंग्स इन स्टेबिलिटी।आज की डेट में दिस इज़ अ रियलिटी।डिस्पाइट द फैक्ट कि देयर इज़ ह्यूज यू नोइनकलिटी इन इंडिया। डिस्पाइट द फैक्ट दैटअह देयर इज़ अ ह्यूज अनइवन डेवलपमेंट। हमदेयर आर सर्टन स्टेट्स बंगाल, बिहार, आसामयू कैन नेम अस फ्यू मोर हमकंपेयर टू दोज़ हु ऑन द वेस्टर्न कोस्ट्सगुजरात, महाराष्ट्र या सदर्न स्टेट्स देयरपर कैपिटा इनकम, देयर यू नो वेल्थ, देयरयू नो प्रोस्पेरिटीकोई कोई कंपैरिजन ही नहीं है। डिस्पाइट ऑलदीज़ अनइवन यू डू नॉट हैव अदोज़ काइंड्स ऑफ टेंडेंसी व्हिच वेरियस अदरकंट्रीज इन द वर्ल्ड हैव फेस एंड दिस इज़वन ऑफ द रीज़ंस इज़ बिकॉज़ ऑफ़ द डायवर्सिटीबिक इट अ तो तो बिकॉज़ ऑफ़ द डायवर्सिटी एकऑर्गेनाइज्ड काइंड ऑफ जो हमने देखाबांग्लादेश में हुआ जो हमने देखा नेपालमें हुआ श्रीलंका में हुआवो हिंदुस्तान में शायदउसी उस हद तक मुश्किल हैऔर इसलिएजो लोग इस तरह की सोच छोटी सोच नैरोथिंकिंग ये है कि सबको वन लैंग्वेज वन वननेशन वन कल्चर वन पीपल वगैरह जो है वोकाउंटर प्रोडक्टिव है। इनफैक्ट दे शुडरियलाइज कि इट इज़ डायवर्सिटी व्हिच इज़गिविंग सस्टेनेंस टू द स्टेट रादर देनहोमोजेनिटी।सर वी आर टॉकिंग अबाउट सिटीजनशिप राइट्स।वी आर टॉकिंग अबाउट इनकलिटी इट्स वेरीऑब्वियस दैट द क्वेश्चन ऑफ़ मुस्लिमपॉलिटिकल मोबिलाइजेशन आल्सो कम्स टू दफोर।और मुस्लिम पॉलिटिकल मोबिलाइजेशन जब भी जबभी होने की कोशिश की गई है वो पूरी तरह सेहुआ भी है या नहीं हुआ है लेकिन आईडिया केआईडिया के तौर पे आज भी इवॉल्व आज भीजिंदा है और जहां पे एक हमारे हैदराबाद केएमपी जो है उसको कहीं ना कहीं मटेरियलाइजकरने की कोशिश करते हैं। तो पहले शबुद्दीनसाहब थे जो उस आईडिया पर काम करने कीकोशिश कर रहे थे। तोऐसे मोबिलाइजेशन को आप कैसे देखते हैं? येक्या फ्रूटफुल हो सकते हैं कम्युनिटी केलिए? और मेरा दूसरा सवाल वहीं से यहनिकलता है कि एक तरफ तो हमें एक तरफ तो यहसमझने की कोशिश कि यह कम्युनिटी के लिएवाकई फ्रूटफुल है या नहीं है। लेकिन दूसरीतरफ जो सेकुलर लेंस से भी हम ऐसेमोबिलाइजेशन को देखते हैंतो कहीं ना कहीं हम उनको हम उनको सस्पेशनके नजरिए से देखते हैंऔर जो कांसेप्ट ऑफ उ्मा है सॉरी जोकांसेप्ट ऑफ कौम हैऔर कौम का कांसेप्ट वहां पे फिर आ जाता हैकि अगर मुस्लिम पॉलिटिकल मोबिलाइजेशन होताहैतो वो कहीं वापस वही स्थिति ना पैदा होजाए जो 1947 से पहले थी। नाउ फर्स्ट ऑफ ऑलइन अ डेमोक्रेसीअ पॉलिटिक्स विल टेक डिफरेंट शेड्स राइटकोई एक तरह का प्रिस्रिप्टिव पॉलिटिक्स आपकहते हैं कि यही होना चाहिए दूसरा नहींहोगावो तो पॉसिबल नहीं है इन अ इफ इट इज़ अट्रूली अ डेमोक्रेसीराइटतो कुछ ऐसे भी होंगे पॉलिटिकल प्रक्सेस जोकि से फॉर एग्जांपल क्लास बेस्ड होंगेकम्युनिस्ट काइंड ऑफ़ पॉलिटिक्स थेजो वर्किंग क्लास का सवालों को सबसेइंपॉर्टेंट सवाल के तौर पर उठाएंगे।वो अपने मीन्स एंड मैकेनिज्म्स भी डेवलपकरेंगे उस पॉलिटिक्स को आर्टिकुलेट करनेका।कुछ ऐसे होंगे जो जो इंडियन इसमें कास्टके सवाल को सबसे जरूरी सवाल समझते हैं।उनको लगता है कि हर चीज जो है सब कास्ट केही आपके अराउंड है। और वही सबसेप्रॉमिनेंट ये है औरउसी के बेसिस पे पॉलिटिक्स भी ऑर्गेनाइजहोनी चाहिए। एंड देयर आर अदर्स आल्सोव्हिचकुड फील दैट रिलीजन इज वेरीेंट एंडपर्टिकुलरली इन दिस सिचुएशन व्हेन देयर इज़अ आई वुड से अ मेजोरिटेरियन ऑन स्लॉटहिंदुत्व मेजॉरिटेरियन ऑन स्लॉटऐसे सिचुएशन में रिस्पांससेस कैन बी वैरिडमाइनॉरिटीज़ माइट सी और सी यू कैन सेरिफ्यूज इन सर्टेन काइंड ऑफ़ कम्युनिटेरियनडिस्कोर्स। क्यों ना कि एक्सक्लूसिवपॉलिटिक्स वगैरह की तरफ ही ड्रॉ मतलबड्रॉन हो सकते हैं। तो टू सी देम विदसस्पिशन तो वो तो मतलब कि कंप्लीटली यू नोअनएक्सेप्टेबल है क्योंकि इफ यू इफ यूरियली अ डेमोक्रेसी इफ यू थिंकिंग अबाउटडेमोक्रेसी इन दैट सेंस इट कैन नॉट टेक असिंगुलर पाथ। उसका वो तो प्लूरलिटीज हीहोती है उसमें।अ पर एट द सेम टाइम जो मुझे लगता है किहिंदुस्तान में डवोर्स है और मुसलमान भीयहां पे अलग-अलगहां और एक्सपीरियंसेस भी उनके अलग हैं।एक्सपीरियंसेस अलग हैं।जैसे कि मैं जब बिहार और ये नॉर्थ इंडियाके मुसलमानों को देखता हूं।तो आई कैन से कि इट्स अ थर्ली एमावरिश्डकम्युनिटी। एक स्माल सेक्शन ऑफ़ एलिटफॉरेशन है।जी। जीलेकिन 80 टू 90% मुसलमान जो हैवो खास के अर्बन पावर्टी देखो ह्यूज अमंगमुस्लिम्सजीलेकिन अगर आप यहां से डाउनवर्ड्स आप चलेजाइए साउथ वगैरह की तरफ तो आपको कुछ दूसरानजारा दिखेगा खास केरला में याजो हैदराबाद का एक पार्ट है वगैरह तो वहांलगेगा कि वो मुसलमान सिर्फ गरीब ही नहींहोते हैं दे कैन बी ऑफ डिफरेंट काइंड देआर इन बिनेस दे आर इन प्रोफेशंसदे आर रनिंग देर ओन इस्टैब्लिशमेंट सब चीजहै। तो उसी तरह से पॉलिटिक्स भी जो हैमुसलमानों की भी अगर पॉलिटिक्स होगी तो हरजगह उसके अपने डिफरेंट कंसर्न्स होंगे। दप्रॉब्लम वि हैदराबाद मॉडलराइट?कि वो हैदराबाद के लिए सूटेबल हो सकता है।लेकिन वो बिहार के लिए भी सूटेबल हो,बंगाल के लिए भी सूटेबल हो क्योंकि यहांका एक्सपीरियंस अलग है।अलग-अलग एक्सपीरियंस[गला साफ़ करने की आवाज़] है?हां। जैसे बिहार में एक लॉन्ग पीरियड ऑफ़सोशलिस्ट पॉलिटिक्स रही है।जीऔर जिसमें कि अह वही डिफरेंट ग्रुप्सकम्युनिटीज़ एंड मुस्लिम्स हैव जनरली बीनपार्ट ऑफ़ दैट सोशलिस्ट आईडिया।लाइक टू स्टॉप यू ओवर देयर एंड देन अक्वेश्चन कम्स फ्रॉम देयर कि अडिस्पाइट द फैक्ट कि बिहार में एकसोशलिस्ट पॉलिटिक्स रही है। बंगाल में भीलेफ्ट की पॉलिटिक्स बहुत टाइम तक डोमिनेटकी है। लेकिन हम दोनों स्टेट्स को उठा केदेखते हैं और उनके माइनॉरिटीज केइंडिकेटर्स को देखते हैंतो दोनों जगह बहुत ही बैकवर्ड कम्युनिटीरही है मुसलमान।तो वहां पे आके अगर कोई तीसरा प्लेयरबोलता है किआपका मॉडल फेल हो चुका है। एंड नाउ वी विलटॉक अबाउट अ डिफरेंट मॉडल। हाउ डू यू सीदैट?सी द व्हाट अ लिटिल बिट प्रोस्पेरिटीव्हिच यू सी इन सदर्न स्टेट्स अमंग्समुस्लिम्स। इवन ऑन इन सदर्न स्टेट्स देयरकैन बी रिलेटिवली प्रोस्पेरस यू कैन सेव्हेन कंपेयर टू द नॉर्दन स्टेट्सपर्टिकुलरली ईस्टर्न स्टेट्स हस के पर अगरवहां मैं कम्युनिटीज के बीच में कंपैरिजनकरो तो वहां भी मुसलमानों के सिचुएशन सबसेखराब है अमंग्स अदर कम्युनिटीजतो ऐसा नहीं कि उनका मॉडल जो है बहुतसक्सेसफुल रहा है। है ना?दूसरी चीज है कि पॉलिटिक्स के थ्रू तोअचीव नहीं हुआ है। जो भी हुआ है।उसकी अपनी एक हिस्ट्री रही है।जी।और जो बिहार और बंगाल आसाम में है जोसच्चाई ये है कि जो अ मुस्लिम्स वैसे कहाजाता है कि आर एन अर्बन कम्युनिटी अर्बनसेंटर्स में उनका ज्यादा पापुलेशन रहाहोता है। लेकिन बिहार, बंगाल, आसाम मेंमुसलमानपेजेंट्स बहुत हैं। रूरल अ सेटअप्स मेंबहुत ज्यादा नंबर्स में है। खास के बंगालऔर आसाम में तो पेजेंट्री ही लार्जलीमुस्लिम्स आर पार्ट ऑफ द प्रेजेंट्स। तोवहां जो है जो गरीबी अगर काउंट होगी तोजाहिर सी बात है उसमें मुसलमान अच्छे खासेनंबर में रहेंगे।क्योंकि जहां एग्रीक जो इंडस्ट्रियलस्टेट्स नहीं है जो डेवलप नहीं हो पाए। तोवहां जो पावर्टी है उस पावर्टी का असरमुसलमानों पर ज्यादा है।[गला साफ़ करने की आवाज़]नाउ वेदर पॉलिटिक्स कैन चेंज इट। ऑफकोर्सपॉलिटिक्स इज़ व्हाट अ व्हाट हैज़ द व्हिचहैज़ द कैपेसिटी? बिकॉज़ ऑल डिसीजंस आरजनरली पॉलिटिकल डिसीजंस। अह व्हाट काइंडऑफ़ अ पॉलिटिक्स इमज़ एंड व्हाट इज़ इट्सगोल? व्हाट इज़ दिस एजेंडा? हाउ डस इट लुकएट टुवर्ड्स मुस्लिम्स एटसेट्रा?वो तो एक अ मतलब पॉलिटिकली डिसाइड होताहै। तो पॉलिटिक्स ऑफ कोर्स हैज़ द ये अपोटेंशियल कि उसको अल्टरनेट ऑल्टर कर सके।इस सिचुएशन को चेंज कर सके ओवर अ पीरियडऑफ़ टाइम। हमहां एक कंसंट्रेटेड अटेम्प्ट तो नहीं हुआहैऔर वो सिर्फ मुसलमानों के मामले में नहींहै। गुरबत जिन स्टेट्स की मैं बात कर रहाहूं उसमें दूसरी कम्युनिटीज उतनी ही गरीबहै।और इवन इफ सोशलिस्ट पॉलिटिक्स इमर्जहमपर हाल का डाटा आप देखिएअ बिहार में फॉर एग्जांपल बिहार ने कास्टसेंसस कराया। हमबिहार का डाटा देखिए तो बिहार में करीब 3035 साल से ओबीसी पॉलिटिक्स हो रही है।हमलेकिन ओबीसी अभी भी अमंग द पोरेस्ट है।पोरेस्ट है।तो कोई ट्रांसफॉर्मेटिव चेंज तो हुआ नहींहै।जिसके लिए आई थिंक अलग तरह का वेयर विद ऑलऔर डिटरमिनेशन चाहिए।अभी जो है कि वो रिप्रेजेंटेटिवरिप्रेजेंटेशन के मामले में हो सकता है किचीजें बेहतर हुई हो। लेकिन उसको लेकर केसोशल और इकोनमिक ट्रांसफॉर्मेशन हुआ वोअचीव नहीं हुआ है।राइट?और वो लॉन्ग डाउन प्रोसेस भी होता है।और अगर वो जब अगर कोई ऐसी कोशिशकंसंट्रेटेड कोशिश होगी जैसे कि नक्सलाइटपॉलिटिक्स ने कोशिश की थी।पर वो उसके वो एक पेनफुल प्रोसेस भी होताहै। वो इट मे नॉट नेसेसरी सक्सीड ऑलवेज।तो दैट वे यू कैन से से कि हांआई डोंट सी दैट मतलब व्हाट मुस्लिमपॉलिटिक्स एट द मोस्ट कैन डू इन समप्लेसेस इट कैन इंक्रीस मुस्लिमरिप्रेजेंटेशनराइटडिपेंडिंग ऑन द डेमोग्राफिक सिचुएशनडिपेंडिंग ऑन द एक्सटेंट ऑफ इकोनमिकडेवलपमेंटराइटडिपेंडिंग आल्सो अपॉन द एक्सटेंट टू व्हिचद पॉलिटिकल पोलराइजेशन हैज़ टेकन प्लेसजहां-जहां पोलराइजेशन बहुत ज्यादा हैजीवहां पे मुस्लिम मुस्लिम कैंडिडेट्स काजितना भी डिफिकल्ट है क्योंकि अकेले तो आपनहीं जीततेतो पहला टास्क तो यह है कि आप ऐसीपॉलिटिक्स के बारे में सोचिए जो किपोलराइजेशन को डिफिट करके डिफीट कर सकेविदाउट व्हिच इट विल बी डिफिकल्ट टू अचीववी विश टू अचीवसो कमिंग बैक टूसिटीजनशिप अगेन आपने बांग्लादेशीपैराडॉक्स के बारे मेंसीएए एनआरसी के बहुत पहले बात की है।हालांकि बांग्लादेश पैराडॉक्स जो है वोऐसा लगता है कि अभी रीसेंट फिनोमिना है 14के बाद ज्यादा उसके बारे में बात होने लगीहै। उससे पहले तो अदराइजेशन है पाकिस्तानको ही एक इमेज क्रिएट किया गया था। लेकिनये बांग्लादेशी पैराडॉक्स जो है और उसकेअराउंड जो पॉलिटिक्स है और उसके अराउंडफिर जो मोबिलाइजेशन होता है सीएए एनआरसीके बाद में उसको आप कैसे देखते हैं?इनफैक्ट सीए एनआरसी एंटीसीए एनआरसी जोमोबिलाइजेशन था आई हैव रिटन आल्सो समलिटिल हियर एंड देयर आई सी अ ह्यूजपॉसिबिलिटी इन इट फर्स्ट ऑफ ऑल जो अगरउसकी देखिए उसको उसका जो कैरेक्टर था वोजो मोबिलाइजेशन हुआ जो एजिटेशंस हुए तो वनआई कुड नोटिस कि एंड दिस वाज़ आल्सोइंडिकेट िंग कि किस तरह से मुस्लिमसोसाइटी में बदलाव आ रहे हैं।राइट?एक तो आप देखिएगा कि प्रोमिनेंट वॉइसेसमेनी ऑफ़ देम वुमेनराइट?वेरी आर्टिकुलेट वुमेनराइट?एंड नॉट ओनली वो नंबर्स में थी पर दे वरआल्सो इन लीडरशिप रोल्स। दे वर टेकिंगडिसीजंस एटसेट्रा।राइट?अह बसाइड्सजो रिलीजियस ऑर्थोडॉक्सी हैवो नियरली एब्सेंट थी इन मोबिज्म दिस वासमोर और लेस अ सिटीजनशिप प्रोटेस्ट सिटीजंसका प्रोटेस्ट था।हां बिल्कुल अभी तक लोग कहते थे कि भाई आपज्यादातर जो है कल्चरल सवालों पे हीमोबिलाइज होते हैं। सिंबॉलिक क्वेश्चंस पेज्यादा एजिटेट हो जाते हैं।लेकिन ये था बिल्कुल मटेरियल क्वेश्चन पेकि हमारा जो एकिस्टेंस इटसेल्फ इज़ बीइंगचैलेंज्ड। वी देयर इज़ एन अटेम्प्ट टूडीनेशनलाइज अस। और यहां पर जो है सडनली जोहै अलग-अलग शहरों में ह्यूज नंबर्स मेंलोग आए और दे पुट अक्रॉस द पॉइंट वेरीस्ट्रांगली एंड एट द सेम टाइम दे वर ओपनटू बिल्डिंग सॉलिडेरिटीज विथ अदर्स तो[नाक से की जाने वाली आवाज़] मुझे उस पूरेइस दौर में बड़ा मैंने देखा कि घर के मेंके भी लोग आम औरतें हमहु वुड जनरली नॉट स्टेप आउटसाइड देयरहोम्स और इवन इफ दे वुड गो बट दे विल नेवरबी सी देमसेल्व्स एस पार्ट ऑफ़ एनीपॉलिटिकल मोबिलाइजेशन। वो जा रही थी से जोसिटिं्स हो रहे थे वगैरह उसमेंपार्टिसिपेट कर रही थी। दे वर नेगोशिएटिंगवि द स्टेट। [गला साफ़ करने की आवाज़]दे वर चैलेंजिंग सम ऑफ़ द मतलब एस्टैब्लिशआइडियाज ऑफ़ पॉलिटिक्स जो है कि कुछ लोगआके उनको प्रिस प्रिस्रिप्टिवपॉलिटिक्स का दे देते थे कि आपको ये करनाहै ये नहीं करना है। एंड दे वरक्वेश्चनिंग देम एज वेल।राइट?तो एक इंडिपेंडेंट जो है ट्रेजरी डेवलप होरही न्यू इमेजिनेशनऔर देयर वाज़ लॉट ऑफ़ होप देयर। आई आई आईवुड से कि थिंग्स आर लॉस्ट।अ दो चीजें हुई। एक तो कोविड की वजह से जोलॉकडाउन और उसकी वजह से एक उसी इमीडिएटलीजो है पूरा डीमोबिलाइजेशन का प्रोसेस वोशुरू हो गया। और दूसरे ह्यूज रिप्रेशनफ्रॉम द इंडियन स्टेट। एक पीसफुलप्रोटेस्ट लार्जली। स्टूडेंट्स, यंग पीपल,वुमेन लेड प्रोटेस्टप्रोटेस्ट जिसमें कि ज्यादातर मैंने देखाकि लोग जो नेशनल फ्लैग के अंडर वोप्रोटेस्ट कर रहे थे और उस प्रोटेस्ट कोजिस तरह से स्टेट ने रिसोंड किया इट सीम्डएज़ इफ कि दे वर डीलिंग विथ एनिमेटेडयू नो एलिमेंट्स।तो इट वास ऑलमोस्ट लाइक अ वॉर वेस्अगेंस्ट द मुस्लिम प्रोटेस्टर्स। राइट?20 22 लोग यूपी में मार दिए गए।राइट?जामिया के अंदर जो है कैंपस के अंदर घुसके लोगों को मारा गया। स्टूडेंट्स कोअलीगढ़ में भी सिमिलर काइंड ऑफ। सो एंडदिस वाज़ अ पैटर्न फाउंड वेरी मेनीप्लेसेस।या बगलोर में आई थिंक हॉस्पिटल में घुस केप्रोटेस्टर्स को पीटा गया है। मारा गयाहै।तो अ मतलब दिस काइंड ऑफ़ अ रिप्रेशनप्रोबब्ली द कॉलोनियल पुलिस मतलब इटरिमाइंडेड वन ऑफ़ जालियांवाला बाग काइंड ऑफ़सिचुएशन।आई थिंक दिस वाज़ फर्स्ट ऑफ़ इट्स काइंड एंडइंडिपेंडेंट इंडिया दैट सच अरेशन वाज़टेकिंग प्लेस अगेंस्ट प्रोटेस्टर्स वेयरपीपल वेर बीइंग फायर्ड अपॉन। पहले भी हुएहैं कुछ केसेस आई थिंकनहीं जैसे जोएमकेएसएस बिहार का अरवल में हुआ था जिसमेंकि पर ये अर्ली 80ज वगैरहआज के फज़ में खास करके जबपीपल आर सो कॉन्शियस देयर इज़ अ लॉट ऑफ़आल्सो [नाक से की जाने वाली आवाज़] आईडियाअबाउट पुलिसिंग न्यू वेज़ ऑफ़ पुलिसिंग औरवहां पे जो इस जिस तरह से जो अह अह लोगोंके खिलाफ जो स्टेट रिप्रेशन का जो देखतेहैं पूरा नजारा तो इट लुक्ड एस इफ वी आरअंडर इदर अंडर एनी कॉलोनियल पावर या फिरकोई डिक्टेटरशिप है जहां पर कि आप सवालउठाते ही आपको जो है क्रश कर दिया जाएगा।राइट?तो दैट काइंड ऑफ़ दैट आल्सो हैज़ बीन असेटबैक बिकॉज़ ऑफ़ वि थोड़ा सा आई थिंकमुस्लिम जोएक्टिविस्ट प्रोटेस्टर्स वगैरह थेवो इट डिसरेज देम प्रोबब्ली पर दिस आल्सोइंडिकेटेड कि एक न्यू मिडिल क्लास इमर्जकर रहा है मुसलमानों केअब्सोलुटली एंड आई हैव रिटन अबाउट इट किमुझे लगता है कि एक नई तरह की सिविलसोसाइटी भी इमर्ज कर रही है मुसलमानों केबीच में हमजो कि इंडिपेंडेंटली बहुत कुछ कर पा रहीहैऔर वो इंडिपेंडेंटली मोबिलाइज भी कर रहीहै रिसोर्सेज को जाके मेवात में काम भी कररही है कश्मीर में काम भी कर रही है तोमुझे लगता है कि उसके आउटकम्स ऐसे भी रहेहैंहांमेरे लगता है इन हाउस इटसेल्फ इटसेल्फसमथिंग व्हिच हैज़ इमर्ज आउट ऑफ़ राइटऔर ऐसे भी कोई भी मूवमेंट जो होता हैहम लोग सोशल मूवमेंट वगैरह पढ़ाते हैं तोमूवमेंट का जो आप जो सक्सेस या उसके जोफेलियर्स हैं वो वो आप इमीडिएटली देख नहींसकतेक्योंकि अ मूवमेंट लीव्स एन इंपैक्टह्यूजली ऑन डिफरेंट सेक्शंसऔर वो जो है इवन व्हेन द मूवमेंट ऑन पेपरडजंट एक्सिस्ट पर उसके इन्फ्लुएंस ऐसेहोते हैं जो कि मतलब काफी डीप होता है। तोयू आर राइट कि सब मेनी कई तरह के मैं देखरहा हूं यंग लोगसिविल सोसाइटी एक्टिविज्म नए तरह कापुराने पैटर्न पे नहीं कर रहे हैं जो किफंडिंग के लिए ऑल द टाइम या यूएन का जोरेजोल्यूशन के हिसाब से अपना एजेंडा शिफ्टकर देते थे वगैरह पर दे आर वेरी वेरीरूटेड अमोंग्स द मुस्लिम्स एट द सेम टाइमदेयर इज़ अ ह्यूज कंसर्न फॉर व्हाट इज़हैपनिंग इन टुडेज़ इंडिया एंड अह दीज़ आरआल्सो काइंड ऑफ़ सिविल सोसाइटी एक्टिविज़्मव्हिच इज़ सम एक्सटेंट पॉलिटिकल दैटअंडरस्टैंड्सअह जोवेज़ इन डिफरेंट वेज़ इन व्हिच द मुस्लिम्ससिटीजनशिप क्वेस्ट इज़ बीइंग इरोडेड। तो वोउन सवालों को एड्रेस कर रहे हैं। वो मतलबकि पुराने तरह के आइडेंटिटी मॉडल वगैरह कोभी आई डोंट थिंक हां दे आर सो मचएक्साइटेड अबाउट इट।राइट?तो दैट इज अ डेवलपमेंट व्हिच इज हां व्हिचव्हिच गिव्स सम प्रॉमिस सम होपसर जब अदराइजेशन की बात करते हैं व्हेन वीटॉक अबाउट अदराइजेशन ऑफ़ मुस्लिम्स मे बीअदर ग्रुप्स टूआप कहते हैं कि अदराइजेशन जो एक डेलीबेटप्रोजेक्ट है जो कि अनलिश किया जा रहा हैमुस्लिम माइनॉरिटीज पे और कल्चरलइनविटेटिबिलिटी का प्रोसेस से नहीं आ रहाहै।क्योंकि एक आर्गुममेंट ये भी है कि कल्चरलहै। मुसलमान कल्चरली बहुत अलग है और अपनेआपको एडवाइस करना खुद पसंद करते हैं।लेकिन यू वर टॉकिंग अबाउट इट एस अ डेबेटप्रोजेक्ट और जहां पर सोशल तरीके सेइकोनमिक तरीके से अदराइज किया जाता हैमाइनॉरिटीज को मुसलमानों को तो उस पेथोड़ा सा शेड कैन यू प्लीज शेड सम लाइट ऑनदैट दैट व्हाट डू यू मीन बाय दैट अगर उसकोआम जबान में हमको अपने ऑडियंस को समझानाहो उस के प्रोसेस को तो आप उसको थोड़ा साबताने की कोशिश करेंगे।आप अदराइजेशन एज अ प्रोजेक्ट व्हेन आई एमसेइंगलुक एट अ चीफ मिनिस्टर एक है हेमंता विश्वशर्मा आसाम केवो डे इन एंड डे आउट कोई ना कोई तरीकेढूंढ रहे हैं कि किस तरह से जो मुसलमानखास करके आसाम में है और ज्यादातर आसाम केमुसलमान बंगाली आर जिनके एक स्माल सेक्शनहै जो अपने को आसामिया भी समझता है। वोसोच रहा है कि वो स्पयर्ड है।राइट?बट उनका पता नहीं क्या दैट इज अनदर थिंगऑल टुगेदर पर ये दिस चीफ मिनिस्टर हु हैज़टेकन द ओर्थ ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशनपर उनके रवैया उनकेअटरेंसेस उनका पूरे एक्शंस आप देखिए किकिसी ना किसी तरीके से चाहे उनका पापुलेशनपॉलिसी हो चाहे उनका लैंड पॉलिसी हो वोइसीदिमागी इससे चल रहा है कि किस तरह सेज्यादा से ज्यादा तकलीफ मैं मुसलमानों मेंखास करके जो बंगाली मुसलमान हो उनकोपहुंचा सकूं।अदराइजेशन व्हेन आई सी इट इट इज़ नॉटसिंपली मतलब पॉलिटिक्स ऑफ कोर्स इज़ दइंस्ट्रूमेंटराइटबट इट इज़ नॉट सिंपली थ्रू द अह इट डजंटअनविलइटसेल्फ जस्ट इन पॉलिटिक्स। बट आल्सो इफयू लुक इंटू हिस्ट्री अह वे इन व्हिचकल्चरल प्रोडक्शन इज़ टेकिंग प्लेस टू दहोल काइंड ऑफ़ फिल्म्स ऑफ़ वेरियस डिफरेंटकाइंड्स व्हिच आर कमिंग अप नाउ बहुत सारेगाने ऐसे बन रहे हैं जो कि खास करके है नामुसलमानों को टारगेट करते हुएहिंदुत्व पॉप कल्चरहिंदुत्व पॉप कल्चर बहुत पॉपुलर भी हैबहुत सारे जगह पेअरीरीडिंग ऑफ़ हिस्ट्री व्हिच इज़ हैपनिंग दवे इन व्हिच व्हिच आवर डोमेस्टिक एंडफॉरेन पॉलिसी आर बीइंग शेप्ड ऑलमोस्ट सेमहो रहा है। जबकि पहले कुछ डिस्टिंशन होताथा हर जगह का होता है। पर आज की डेट मेंलग रहा है कि एक्सटेंशन है। अ तोअदराइजेशन दैट वे इज़ अ प्रोजेक्ट व्हिच अहहैज़ वेरियस डिफरेंट फसेस एंड यू नोकंट्रीब्यूटिंग फैक्टर्स।लेकिन अल्टीमेटलीइट इज़ डेलीबेट। यू आर राइट इट इज़ डेली इटइज़ नॉट समथिंग व्हिच इज़ यू नो हैपनिंगस्पॉनटेनियसलीबिकॉज़ कम्युनिटीज़ लिव टुगेदर एटसेट्रा इटइज़ डेलीबेट अबद चेंजिंग ऑफ़ नेम्स फॉर एग्जांपल ऐसे तोसिंबॉलिक चीज है। आपको लगेगा कि क्या फर्कपड़ता है मटेरियली बट इट इज़ डिनाइंग यू योरएकज़िस्टेंस इन हिस्ट्री।राइट?इट इज़मतलब कि इन सम वेज़लैंग्वेज मेंइन द वे इन व्हिचसबसे बड़ा इसका जो इंपैक्ट और जो जोलीव्स मी वि सम काइंड ऑफ़ अ यू नो कंसर्नएटसेट्रा इज़ अबाउट व्हाट इज़ हैपनिंग इन दलेबर मार्केट।अगर आप अब आज की डेट में देखें तो मेराअपना जनरल ऑब्जरवेशन है। आई डोंट हैव अफिगर एस सच विथ मी राइट नाउ कि अगर आप एकफोन करें किसी भी यू नो सर्विस रिक्वेस्टसेराइटलेकर के तो एट आउट ऑफ 10 चांसेस होगा कि दपर्सन विल कम टू प्रोवाइड दैटसर्विस विल बी अ मुस्लिम राइटऔरवो जो है सबसे लोली पेड वर्क होगामोस्ट आडुस वर्कएक सस्टेन प्रोसेस ऑफइनफॉर्मलाइजेशन, कैजुअलाइजेशन वैसे जनरलहै, हो रहा है बिकॉज़ ऑफ न्यू इकॉनमीआल्सो। पर इसका इंपैक्ट मुसलमानों मेंबहुत ज्यादा है। एंड द रीज़न इज़ बेसिकलीदिस हेट कैंपेन व्हिच इज़ हैपनिंग। पीपल आरफियरफुल ऑफ़ एंप्लॉयंगमुस्लिम्स।और दे आर डूइंग इट डेलीबेटली।अह इट इज़ फार मोर डिफिकल्ट फॉर अ मुस्लिमएट वेरियस डिफरेंट लेवल्स। इवन एज एनएकेडमिक टुडे हु नेवर आइडेंटिफाइडहिमसेल्फ एस अ मुस्लिम आई कैन से टुडे दैटदैट काउंट्स अ लॉट कि आज की डेट में आप इफयू अप्रोच योर एंप्लयर एट द बैक ऑफ दमाइंड ऑफ़ द एंप्लॉयर इज़ दैट योर आइडेंटिटीएज वेलअपार्ट फ्रॉम व्हाटएवर प्रोफेशनलअचीवमेंट्स अकम्प्लिशमेंट्स व्हिच यू हैवऔर यही जो सबसे वनरेबल सेक्शन है उसकोसबसे ज्यादा ये फेस करना पड़ा तो अदराइजेशनका जो ये डायडायमेंशन है। इट इज़ रियली समथिंग ऑफ़ अकंसर्न व्हिच इज़ रियली डिफिकल्ट टू चेंजइवन इफ द चेंज ऑफ़ गवर्नमेंट एटसेक्टर।सर आपकी एक को एडिट एडिटेड वॉल्यूम आई हैजिसमें आप बात कर रहे हैं अमार्केट स्पेस में अशमतलब बेसिकली व्हाट यू आर टॉकिंग अबाउट इज़दैट सिटीजनशिप जो है वो अलग-अलग स्पेयर्समें अलग-अलग तरह से काम कर रही हैं। चाहेवो एक नेशन के नेशन के स्फेयर में हो औरनेबरहुड के स्फेयर में हो, मार्केट केस्फेयर में हो।सिटी के स्पेयर में हो तो कैन यू वक असथ्रू दैट अ बिट प्लीज एंड आल्सो एक्सप्लेनदैट हाउ इज इट हाउ इज इट हाउ इज़ असिटीजनशिप हाउ इज़ द आईडिया ऑफ़ सिटीजनशिपडिफरेंट यू लुक एट इट थ्रू द प्रिज़्म ऑफ़नेशन [गला साफ़ करने की आवाज़] एंड थ्रू दप्रिज़्म ऑफ़ मार्केट फॉर एन एग्जांपल।सीमार्केट का तो मैंने एक जैसे एग्जांपलदिया कि लेबर मार्केट के सिचुएशन जो हैआई रिमेंबर प्राइम मिनिस्टर मेड अ कमेंटऑन पंचरवालाज़राइटजो कि एक्चुअली डायरेक्टेड टुवर्ड्समुस्लिम्स जो कि बहुत मेनी ऑफ़ दोज़ हु आरइन द पंचर रिपेयर शॉप्स आर मुस्लिम्स।एंड दिस इज़ प्रोबब्ली द मोस्ट वन ऑफ़ दमोस्ट लो पेइंग काइंड ऑफ़ अ जॉब।अह दिस रेफरेंस टू देम कैन आल्सो बी सीनएज अ डॉग वेसल। हमकि यह है वहां पे हमअएट द सेम टाइम इट वाज़ आल्सो रिसीव्ड एज अस्टिगमेटाइजेशन का कि ये लोग तो पंचर वालेहैं। इस तरह से भी उसको समझा गया। कईलोगों केमार्केट में यह प्रोसेस ऑफ़ जो कि अदरवाइजनॉन इकोनॉमिक प्रोसेस है बट इंपैक्ट्स दइकोनॉमिक रिलेशंस आल्सो इज़ थ्रूस्टिगमेटाइजेशनथ्रू अदराइजेशनवगैरहअहमार्केट मार्केट इटसेल्फ इज़ बीइंग आल्सोपोलराइज़ ऑन वेरियस ग्राउंड्स।से फॉर एग्जांपल यूपी में अगेन एक कैंपेनचला कि हलाल फूड वाला जो लेबल है उसको हमकरने नहीं देंगे।कई जगह जो है मुसलमानों को अपनी दुकानेंलगाने नहीं दी जा रही है। अ दे आर बीइंगआस्क कि इफ यू आर अब नाम लगा भी रहे होदुकान तो नाम फला रखना पड़ेगा, फला नहींरखना पड़ेगा। हम्।एंड मैसेज इज़ बीइंग सेंट टु पीपल दैट दीज़आर मुस्लिम ओन शॉप्स। सो अवॉयड देम।ऑलराइट।अहमार्केट व्हिच इज़ अदरवाइज़ सपोज़ टू बी एनइकोनमिक इंस्टीट्यूशन। द आईडिया ऑफ़ दमार्केट इज़ दैट इट इज़ ऑफ़ कोर्सप्रोड्यूसेस इनकलिटी। क्योंकि अलग-अलग लोगअलग-अलग कैपेसिटीज से मार्केट में एंटरकरते हैं। और यह माना जाता था मार्केट मेंअल्टीमेटली क्या मैटर करता है कि बाय एंडसेलरबाय एंड सेलर कॉम्पिटिटिवनेसहां वगैरह लेकिन अभी क्या हम देख रहे हैंकि कल्चरल पॉलिटिकलसारे तरह के प्रोसेससेस मार्केट को किसतरह से ऑर्गेनाइज हो रहा है।राइटवी हैव बी मुस्लिमक्रिएट किया जा रहा है।राइट?व्हेन यू टॉक अबाउटद आईडिया ऑफ अदराइजेशन कनेक्टेड टूसिटीजनशिप एंड द नोशन ऑफ नेशनहुडअगेन अ सिमिलर द होल आईडिया अबाउट नेशनवाज़ कि नेशन क्रिएट्स अ सर्टेन काइंड ऑफ़ अहॉरिजॉन्टल कॉमरेटशिपकि भाई इररेिस्पेक्टिव ऑफ किस कास्टक्या-क्या है। वी आर कोशनल्सबट डेफिनेटली वि द राइज़ ऑफ़ हिंदूनेशनलिज्म दैट इज नॉट देयरइट इज़ वेइंग वेइंग वेरी क्लियरली इनसमटाइ्स रेटोरिक सेंस में भी कहा जाता हैकि आप पाकिस्तान चले जाइएअदरवाइज इट इज़ डीपली आल्सो मतलब डीप डाउनइट इज़ देयर इन प्रैक्टिसेस एस वेल कि जिसतरह से जो सीएए अमेंडमेंट किया गया जिसतरह से एनआरसी के थ्रू 1.9 लाख 9 मिलियन1.9 मिलियन पीपल बट व्हिच आर आल्सोइंक्लूड्स अदर बंगाली स्प्रेकर्सराइटको एक्सक्लूड किया गयाऔर अगर आप देखें एसआईआर इज़ अ सिमिलर काइंडऑफ़ प्रोसेसतो होल अ यू नो यू वुड से दैटइट इज़ नॉट समथिंग व्हिच इज़ इंपैक्टिंगजस्ट वन सेक्टर इफ यू विल लुक एट द सिटीज़सिटीज़ आर बिकमिंग इंक्रीसिंगली मोरसेग्रिगेटेडगेटवाइज़ेशन है इज़ टेकगेट इज़ अहयू नो टू द मैक्सिमम राइट नाउ एंडइवन इफ यू वांट टू नो अवॉयड दैट वांट टूएस्केप इट कॉन्शियसली ट्राई टू लिवआउटसाइड अ कैटो बट यू विल बी कॉन्स्टेंटलीपुच्ड टू योर लेफ्ट विथ लिटिल चॉइस बिकॉज़दूसरी जगहों पे थिंग्स आर नॉट बीइंग मेडअवेलेबल टु यू |राइटतो पूरा जो एक अह विज़न ऑफ़ कंपोज़िटनेशनलिज़्म व्हिच यू रेफरिंग टु अर्लियरव्हिच ऑल्सो इंक्लूड इंक्लुडेड कि मिक्सनेबरहुड्स वर्ज एटसेक्ट्रा वगैरहराइट राइटबट वो सब तो अब थ्रू आई एम नॉट सेइंग इटइज़ सिंपली एट द सोसाइटल लेवल दैट दीज़थिंग्स आर हैपनिंग देयर इज़ अ कंसंट्रेटेडवे इन व्हिच द वे इन व्हिच द जुडिशरी इज़रिस्पोंडिंग द वे इन व्हिच द पुलिस और दस्टेट सिविल एडमिनिस्ट्रेशन इज़रिस्पॉन्डिंग द न्यू लॉज़ आर बीइंग यू नोइनएक्टेड तो उसके थ्रू भी जैसे कि कुछगुजरात में मुझे ये है कि इल्म है कि कुछलैंड रिलेटेड लॉस के कि आप फला जगह पे लेसकते फला जगह में नहीं ले सकते वोवगैरह वगैरहतो ये सारी चीजें जो है ये एक अल्टीमेटलीटारगेटेड टुवर्ड्स मेकिंग मुस्लिम्स एजनॉन सिटीजंस और इवन इफ देयर आर सिटीजंसदेयर सिटीजंस हु सी देमसेल्व्सयू [नाक से की जाने वाली आवाज़] नो और हुआर मेड टू सी देमसेल्व्स एज एस सेकंडसेकंड क्लासराइट राइट सर एक तरफ तो यू आर टॉकिंगअबाउट स्टेट व्हिच इज़ डेलिबेटली डूइंग इटद गवर्नमेंट दैट इज़ डेलिबेटली डूइंग इटराइटतो एक तरफ तो वो है लेकिन क्या वोआईडियोलॉजी इतनी डीपली पेनिट्रेट कर गई हैसमाज में कि अब समाज में भी वो ऑटोमेटिकलीहो रहा है मुसलमानों का नो वन हैज़ टू कमएंड से दैट कि मुसलमानों का अदराइजेशन करोइट इज़ बीइंग डन एट द लेवल ऑफ़ इंडिविजुअल्सदेमसेल्व्सकि अगर ये मुसलमान है तो थोड़ा अलग तरीकेसे सी वन इज दैट आई वुड टेल यू दैटपॉलिटिक्स इटसेल्फ इज अ एक्सट्रीमलीपावरफुल इंस्ट्रूमेंटइट इंपैक्ट्स एव्री सेक्शन यू नो एंडव्हेन अ पॉलिटिकल नैरेटिव सो पावरफुल फॉरद लास्ट 10 12 इयर्स और मोर देन दैट हैज़बीन फोकस्ड अबाउटपोट्रेइंग अ सर्टेन काइंड ऑफ़ अ पिक्चरअबाउट मुस्लिम्स स्टिग्विटाइजिंग देम एंडअह यू नो क्रिएटिंग अ सर्टेन काइंड ऑफ़नो डेमन आउट ऑफ देम है ना भाई तो अ उसउसका तो अपने आप में ही इंपैक्ट हर जगह हरलेवल पे काफी होता है फ्रॉम द रेड फोर्टइफ द प्राइम मिनिस्टर हिमसेल्फ मेक्स इनदोज़ काइंड्स ऑफ़ यू नो स्पीचेस इन दइलेक्शन स्पीचेस इफ अह यू आर टू[गला साफ़ करने की आवाज़]दैटयू नो इन वेरियस डिफरेंटमेटोफोरिकल वेज़ आल्सोद रेफरेंस टू मुस्लिम इन अ वेरी नेगेटिवसेंस इज मेड। तो उसका तो एक सोसाइटलइंपैक्ट भी होता ही है। राइट?वी कैन सी दैट दैट काइंड ऑफ़ अ पोलराइजेशनइज़ एविडेंट। अ इट हैज़ डेफिनेटली अफेक्टेडलार्ज सेक्शंस ऑफ़ इंडियन पापुलेशन।राइट?आई वुड नॉट से कि इट्स अ होपलेस सिचुएशन।हमबिकॉज़खैर मुझे लगता है कि पार्टीशन के आसपास जोवायलेंस हुआ था वगैरह उसके आसपास भी बहुतअच्छी सिचुएशन सोशल प्लेन पे नहीं थी।लेकिन ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम सोसाइटीरिसरेक्टेड इटसेल्फबहुत सारी चीजों को मतलब एक अनसेड एंडअनरिटन प्रोसेस के थ्रू रिकंसिलेशन भीहुए।[नाक से की जाने वाली आवाज़]एंड बसाइड्सदिस 100 एंड थाउजेंड्स इयर्स ऑफ़ कोएकिस्टेंस। तो बहुत सारी चीजें जो है जोकल्चरली बहुत यू नो इंटरमिक्स्ड हैं।बट एज वी सी टुडेआई कैन सी दैट बिकॉज़ दिस पॉलिटिकलडिस्कोर्स आल्सो हैज़सम हाउ इंपैक्टेड ह्यूजली द मीडियाडिस्कोर्स। टुडे मीडिया इज़ हैज़ अ ह्यूजप्रेजेंस यू नोथ्रू वेरियस डिफरेंट काइंड्स ऑफ़ऑर्गेनाइज्ड मीडिया एज वेल एज अ लार्जसेक्शन अनऑर्गेनाइज्ड मीडियातो इस वजह सेद मैसेजिंग वगैरह हैज़ लेफ्ट एन इंपैक्ट इटइज़ इजी टू सर्कुलेट हिटराइटकम्युनिटीज़ हैव सम आईडिया अबाउट दी अदर्सइन सम सेंस होता है सर्टन काइंड ऑफ़स्टिपिशन इज़ आल्सो देयर पर उसी को अगर हमजो है एक ऑर्गेनाइज पॉलिटिक्स का पार्टबना ले तो इट इट बिकम्स पोटेंशियलीवेरी डेंजरस वेरी परशियस तो वो चीजें जोहै वो हो रही हैं। राइट सर ये सीएए एनआरसीका जब हमारा बिल पास हुआ जब वो कानून कीतरह बन गए और और आज के डेट में जो एसआईआरहै सीए एनआरसी को तो बहुत हद तक प्रोटेस्टके वजह से स्टॉल कर दिया गया था और बहुतहद तक वो इंप्लीमेंट नहीं हो पाया। लेकिनजो एसआईआर आज के डेट में कर रहे हैं बंगालमें हमने देखा कि 90 मोर देन 90 लाख पीपलहैव बीन एक्सक्लूडेड हमअलग-अलग स्टेट्स में भी हो रहे हैं। तोक्या ये पैरेलल हैं? मतलब आप सीएए एनआरसीको इंप्लीमेंट नहीं कर पाए तो आपने एक नयाफ्रंट खोल दिया है एसआईआर को और एसआईआर केथ्रू आप वही करना चाह रहे हैं जो आप सीएएनआरसी के थ्रू करना चाह रहे थे।यू आर राइट इन सम वेज़ सीएए, एनआरसी,एसआईआर शुड बी सीन इन कंटिन्यूएशन।अहसीएपूरी तरह से इंप्लीमेंट नहीं हो पाया।उसकी एक वजह ऑफ कोर्स जो मैसिव प्रोटेस्टहुए जो इंटरनेशनलली जो है नोटिस भी हुआ।तो, उसका एक बहुत इंपॉर्टेंट रोल रहा। तो,दैट इज़ व्हाई वी से कि मूवमेंट्स हैव देरइंपैक्ट। इवन इफ वी कैन नॉट नेसेसरीलीटेंजिबल वे में उनको मिले ये ना कर सके।लेकिन एट द सेम टाइम सीएए के इंप्लीमेंटकरने में जो कुछ और भी रुकावटें हैं।एक सबसे बड़ी रुकावट ये है कि टू अवेलसीएए यू हैव टू फर्स्ट डिक्लेअर योरसेल्फएज एन इमीग्रेंट। हमतो दोज़ पीपल हु हैव ऑलरेडी गॉटसिटीजनशिप [गला साफ़ करने की आवाज़]दे हैव द डॉक्यूमेंट्स दे हैव पासपोर्ट देहैव दे आर ऑन द वोटिंग लिस्टव्हाई विल दे मेक दैट डिक्लेरेशन बिकॉज़वंस दे मेक दैट डिक्लेरेशन दे फियर कि आजनहीं तो कल कभी भी दैट कैन बी यूज़्डअगेंस्ट देम।राइट?सो नेचुरली सो आई एम टॉकिंग अबाउट जो एकसेक्शन ऑफ हिंदू बंगाली जो सीए यूज करसकते हैं या फिर मटुआज़ इन बंगाल वगैरहराइट इवन अ वै स्मॉल पोर्शन ऑफ़ पाकिस्तानीहिंदू वुड कम एंड देम इन इंडियासेटल डाउन इन पेफरीज़ ऑफ़ दिल्ली एंडतो कुछ तो उसके जो क्लॉज़ वगैरह हैं इटदेयर इज़ अ टेक्निकल डायमेंशन व्हिच आल्सोइज नॉटएनकरेजिंग पीपल नेसेसरी टू मेक सीएएसक्सेस एस सचव्हाट अ एनटीसीए प्रोटेस्ट सीम टू हैवडेफिनेटली अचीव्ड इज़ कि जो ऑल इंडियाएनआरसी होने वाला था वो इंस्टॉल हो चुकाहै कंप्लीटली इट लुक्स लाइक दिस एंड दैटइज़ व्हाई प्रोबब्ली यू आर राइट कि उसको एकअनदर इंस्ट्रूमेंट इलेक्ट्रोरलजो रोल है उसके उसके थ्रू उसको इंप्लीमेंटकरने की कोशिश कोशिश हो रही है और एसआईआरजो हैना ऑल दिस प्रोसेस वेयर सीए एनआरसीएटसेट्रा दिस हैव दिस न्यूट्रलिटी एज अकवर सीए वाज़ आल्सो सेलिब्रेटेड बाय सम ऑफ़द नॉट सॉरी द एनआरसी वाज़ सेलिब्रेटेड बायसम ऑफ़ द वेरी सेकुलर इंटेलेक्चुअल्स ऑफ़आसामहमआर्गुइंग दैट हाउ इट इज़ गोइंग टू सेटल दिसप्रॉब्लम वंस एंड फॉर ऑल दैट हाउ न्यूट्रलद प्रोसेस इज़ दैट टेक्निक टेक्नोलॉजिकलीकाफी द यूज़ ऑफ आईटी एंड ऑल दैट वासकंसिस्ट कि ये जो है बड़ाउस पे जो है ह्यूमन जो प्रिजुडिसेस होतेहैं उसको मिनिमाइज कर दिया है।लेकिन अह एज़ वी सी दैट द इंटेंट वाज़डिफरेंटसेम विद सी एसआईआर आल्सो। सो इवन इफ दआर्गुमेंट इज दैट दे आर गोइंग टू यू नोक्लीन द इलेक्टोरलिस्ट रिमूव द फेक वोटर्सऔर दोज़ हु हैव ऑलरेडी नो लगर इन द कंट्रीऔर हैव माइग्रेटेड और डाइड व्हाटएवरपर एसआईआर वन वन थिंग इज़ दैट इट हैज़ बीनमतलब ये कोई नई चीज नहीं है होती रही हैपहले भी लेकिन द इंटेंसिटी विथ व्हिच दएक्सक्लूजंस हैव टेकन प्लेस दिस टाइम इट्सटाइमिंग जस्ट बिफोर इलेक्शंस इन दोज़स्टेट्सअ ये सब जो है उसको सस्पिशन केदायरे में ले आए एंड देन व्हेन वी वनस्टार्टेड नोटिस अ न्यू काइंड्स ऑफ़कैटेगरीज वेर इंट्रोड्यूस्डहम्मलाइक अह इन बंगालअह व्हाट इज़ कॉल्ड द लॉजिकल इनकंसिस्टेंसीलॉजिकल इनकंसिस्टेंसी राइट राइट राइटराइट।सो दैट एज अ न्यू कैटेगरी वाज़ इंट्रोड्यूसअनडिफाइंड कैटेगरीएंड विद इन व्हिच इवन इफ देयर इज़ अस्पेलिंग मिस्टेक और देयर इज़ सम लिटिल बिटवेरिएशन इन द नेम्स ऑफ द पेरेंट्स वगैरहतो वो इमीडिएटली जो है वो उस कैटेगरी मेंचला जाता है। एंड एज अ रिजल्ट योर वोटिंगराइट एटलीस्ट फॉर दैट इलेक्शन वाज़ टेकनअवे।राइट? और ये इस तो ऐसा लग रहा था किएसआईआर अदरवाइज इलेक्शन कमीशन इन अडेमोक्रेसी शुड बी इंक्लाइंड टुवर्ड्समेकिंग द इलेक्ट्रोरल लिस्टएज यू नो इंक्लूसिव एस पॉसिबलज्यादा से ज्यादा लोगों को हम इलेक्ट्रोरलरोल पे ला पाएं ये उनकी कोशिश होनी चाहिएथीबट हियर द टास्क दे हैव टेकन अपॉनदेमसेल्व्स डिफरेंट कि कैसे मैक्सिममलोगों को एक्सक्लूड करें जो नहींएक्सक्लूड कर हो पा रहे हैं उनको नईकैटेगरी के थ्रू एक्सक्लूड कर देंऔर एज अ रिजल्ट वहां देखा हमने कि 90 लाखतो वो टोटल बट 35 36 लैक्स अदरवाइज अंडर दलॉजिकल इनकंसिस्टेंसीएंड देन अह देयर आर रिपोर्ट्स दैट आउट ऑफदैट 35 36 लैक्स इन अस इन बंगाल हु वरएक्सक्लूडेड थ्रू एसआईआर अंडर लॉजिकलइनकंसिस्टेंसी 65% वर मुस्लिम्स है ना?सिमिलरली 90 लाख में भी मुस्लिमप्रोपोर्शन इज़ फार मोर देन देयर शेयर इन दपपुलेशन पापुलेशन।तो इट इज़ राइट दैट मुस्लिम्स आर नॉट दओनली कैटेगरी ऑफ़ पीपल हु आर बीइंगएक्सक्लूडेड। बट व्हाई इज़ इट दैट दप्रोपोर्शन ऑफ़ मुस्लिम इज़ फार मोर देनदेयर नंबर्स।दैट इज़ समथिंग व्हिच इज़ सब्जेक्ट ऑफ़इन्वेस्टिगेशन। हम[गला साफ़ करने की आवाज़]अ डाटा एंटायरली इज़ नेवर रिवील्ड हमसोएज अ रिजल्ट द प्रोसेस इज़ नॉट वेरीट्रांसपेरेंट आल्सोहम [नाक से की जाने वाली आवाज़]तो एस एसआईआर आई सी एसआईआर एज अ डबल एज्डवेपन डबल एज इन द सेंस कि एक तो एसआईआर केथ्रू आपके नाम एक्सक्लूड कर दिए गए आपकेवोटिंग राइट्स चले गए इन बंगाल इट इज़रिपोर्टेड दैट विलेजेस आफ्टर विलेजेसपर्टिकुलरली दोज़ इन व्हिच व्हिच लार्जप्रोपोर्शन ऑफ़ मुस्लिम्स हु वर लिविंगविलेजेस आफ्टर विलेजेस द नेम्स टू सिंपलीरिमूव फ्रॉम द इलेक्ट्रोलिस्ट एंड व्हिचआल्सो वी सॉ दैट इंपैक्ट एंड ऑन पॉलिटिकलआउटकम वाज़ वेरी वेरीरी एविडेंटतो एक तो उस तरह से कि आपको इलेक्ट्रोरललिस्ट से बाहर कर दिया। उसकी वजह से जोआपका जो इलेक्टोरल पॉलिटिकल वॉइस है उसकोवीकन कर दिया। राइट।बट दूसरा है कि द दूसरा डायमेंशन ऑफएसआईआर इज़ इट्स वर्किंग लाइक अ पोलराइजिंगटूल।हम्मसो इट इज़ मोर लाइक अ सिमिलर काइंड ऑफ़ अडॉग वेसल एज़ व्हाट यू वुड से इज़ बुलडोजर।सो एज़ अ रिजल्ट इफ यू से दैट आई एमएक्सक्लूडेड फ्रॉम बिकॉज़ ऑफ़ द एसआईआर देयरइज़ अ सेक्शन ऑफ़ द पॉपुलेशन व्हिच इट डज़ंटअफेक्ट देम इट इनफैक्ट इज़ हैप्पी अबाउट इटबिकॉज़ अह दे डू फील दैट यू आर अननेसेसरीलीबीइंग ग्रांटेड इक्वल सिटीजनशिप यू नो तोएक पोलराइजिंग वेपन की तरह भी उसको यूजकिया जा रहा है। एंड दैट इज वाइज़ ऑल दप्रोटेस्ट अगेंस्ट एसआईआर इन बंगालडिड नॉट जनरेट क्रॉस सेक्शनल एंगर। राइट?इट ओनली इंपैक्टेड माइनॉरिटीज और सम अदरस्मॉलर सेक्शंस ऑफ़ द पपुलेशन।पर एक जो इतना बड़ा नंबर्स में लोगों कोएक्सक्लूड किया गया। लेकिन कॉस्ट सेक्शनलएंगर नहीं हुआ।बिकॉज़ द मैसेजिंग वाज़ दैट दैट वी आरटारगेटिंग मुस्लिम्स।हां। एंड देयर अदर्स विथ फेल्ट दैट दे आरजस्टली बीइंग टारगेटेड, राइट? राइट। याआई विल कम बैक टू द क्वेश्चन ऑफ इलुसिवसिटीजनशिपफ्रॉम वेयर वी स्टार्टेड दिस कन्वर्सेशन[नाक से की जाने वाली आवाज़]एंड वी डिड टॉक अबाउट हाउ मुस्लिम्स आरबीइंगएल्यूडेड फ्रॉम फ्रॉम फ्रॉम सिटीजनशिपराइट्स एटलीस्ट ऑन एटलीस्ट प्रैक्टिकलीअगर पेपर पे नहीं हो रहा है तोप्रैक्टिकली हो रहा हैतो जो ये इल्यूसिव सिटीजनशिप अगर हमइंडिपेंडेंस इंडिया की हिस्ट्री में देखतेहैं। सिर्फ मुसलमान ही इसके टारगेट्स रहेहैं या और भी कम्युनिटीज के अगेंस्ट इसकोयूज किया गया है और और भी कम्युनिटीज कोइस तरह से ट्रीट किया गया है जहां पे उनकोसेकंड क्लास सिटीजनशिप डिक सेकंड क्लाससिटीजन डिक्लेअ कर दिया जाए। अगर हम सोशलग्रुप्स की बात करें तो डेफिनेटली कास्टमें हम देखते हैं कि दलित्स को हिरारकीमें आप बिल्कुल हीनीचे रखते हैं। आप छुआछूत करते हैं। आपभेदभाव करते हैं। लेकिन पॉलिटिकलमोबिलाइजेशन होने के बाद दलित्स का वोसिचुएशन थोड़ी बदली है। हालांकि वो आज भीएक्सिस्ट करती है। लेकिनजो मुस्लिम्स का सिचुएशन है, जो मुस्लिम्सकी पर्टिकुलर सिचुएशन है, सिटीजनशिप कोलेकर, क्या ऐसे एक्सपेरिमेंट्स और भीकम्युनिटीज के साथ किए गए हैं?अ मोमेंटली इट हैज़ हैपन।इट इज़ नॉट मुस्लिम्स अलोन हु सफर फ्रॉमदिस काइंड ऑफ़ असिटीजनशिप राइट्स बीइंग यू नो इरोडेड इनसम वेज़ और द अदर। आई वुड से दैट एट वनपॉइंट ऑफ़ टाइम ऑफ कोर्स द सिक्स वर दे वरसीन एस सस्पेक्ट कम्युनिटी अआई हैव मायसेल्फ ऑब्ज़र्व्ड हाउ व्हाइलट्रेवलिंग द ट्रेन एटसेट्रा देयर लगेजेसवुड बी चेक एंड अदर्स वुड बी स्पर्डसोयस इट इट इन दैट सेंस आई वुड से किमुस्लिम्स वर नॉट अलोनहाउएवरव्हाट हैज़ हैपनिंग वि मुस्लिम्स और हैज़हैपन वि मुस्लिम्स इज अ पॉइंट व्हिच आईहैड रेफर्ड टू अरर्लियर आल्सो इज़ इट नॉटओनली द सिटीजनशिप बट इट इज़ द प्रोजेक्ट ऑफ़डीनेशनलाइजेशनराइटव्हिच अ कॉम्बिनेशन ऑफ़ टू मेक्स द मुस्लिमकेस फार मोर यू नोएड्स टू द स्पेसिफिसिटी ऑफ़ द मुस्लिम केसऔर खास करके उसके वो जो हैपोटेंशियली ज्यादा नोखतरनाक या डेंजरस यू कैन से इट हैप्स यूनो इन मुस्लिम मुस्लिम केस। सो व्हाटडीनेशनलाइजेशन डज़ इज़ कि एक तो आपके क्लेमऑनइंडिया एज अ मदर लैंड एज अ नेशन इटसेल्फइट क्वेश्चंस दैटयू कैन नॉट मेक इक्वल क्लेम।एवरी टाइम यू ट्राई टू मेक इट।जितना आप बोलेंगे उतना ही आप सस्पिशन केघेरे में आते हैं। लाइक फॉर एग्जांपल आईनो दैट नाउ अ डेज मिस्टर असदुद्दीन ओवैसीइज़ ट्राइंग टू बी एज अग्रेसिवली एंड एंटीपाकिस्तान और एज अग्रेसिवली यू नोनेशनलिस्ट एस पॉसिबलट्राइंग टू बी अ स्टेप अहेड ऑफ़ इवन दहिंदुत्व नेशनलिस्टबट डजंट दैट डजंट मेक एनी डिफरेंस एज़ सचबिकॉज़ डीनेशन प्रोजेक्ट इज़ सो डीप एंडइन द इंडियन सबकॉन्शियस दैटइट एव्री अदर एक्सरसाइज वुड बी सीन एसओनली अ सिंबॉलिक वन एज समथिंग व्हिच वेयरयोर हार्ट इज़ नॉट इंटू इट बट यू आर डूइंगइट एस फॉर परफॉर्मेंसअदिस कॉम्बिनेशन जो सिटीजनशिपइरोजन एंड डीनेशनलाइजेशनयहटेक्स यू नो द डायरेक्शन ऑफ क्वेश्चनिंग दलॉयल्टीडायरेक्शन ऑफइन विअनवारंटेड वायलेंस यू नो यू आर फेस्ड विथअनवरेंट इन द सेंस दैट द वे इन व्हिच वीहैव हर्ड स्टोरीज अबाउट लिंचिंग एटसेट्रायू आर ट्रैवलिंग इन अ ट्रेन और यू आर अहगोइंगयू आर इन मार्केट प्लेस और यू आरएक्सक्लूडेड इन अ स्कूल और समथिंग दिस इज़समथिंग व्हिच इज़ बीइंग नॉर्मलाइज नाउतोयू यू टूक द एग्जांपल ऑफ दलित दलित हैव अडिफरेंट व्हिच इज़ व्हिच इज़ स्ट्रक्चरल इनद सेंस। मैं उसको समझने की कोशिश करकरूंगा कि वो क्यों अलग है और उसको अगर आपबता पाए किसो दलित क्वेश्चन इज़ एनेंट क्वेश्चन दैटवे अ बट एट द सेम टाइम इफ यू सी दैट दलितक्वेश्चन इज़ नॉट एसोसिएटेड विद द नेशनल नोवन इज़ क्वेश्चनिंग द नेशनलिटीनेशनलिटी है ना अह इनफैक्टअह राइट फ्रॉम द फाउंडिंग ऑफ द इंडियनस्टेट अ दैटअ दलित हैव पे फेस्ड इंट्रेंससोशल यू कैन से ऑपरेशन है नाडोमिनेंट ग्रुप्स हैव अटैक्ड देम आल्सोदेयर हैव बीन वायलेंस अगेंस्ट देम अह बटव्हेन इट कम्स टू लार्जली द पॉलिटिकलडायनामिक्सनन ऑफ़ द पॉलिटिकल प्रोसेस इवन दोज़ ऑफ़ दहिंदुत्व वैरायटीहमइन टर्म्स ऑफ़ एटलीस्ट दे डिस्कोर्स देअटरेंसेस देयर कैंपेनकैन क्लेम देमसेल्व्स टू बी एंड बिल्डदेयर पॉलिटिक्सबीइंग एंटी दलितदे माइट बी एंटी दलित इनइन टर्म्स ऑफ़ देयर थॉट एटसेट्रा बट व्हेनइट कम्स टू अट्रेंसेस कम्स टू देयर अह यूनो ऑर्गेनाइजिंग पॉलिटिक्स एटसेट्रादे अह अहदैट डायनेमिक्स व्हिच व्हिच व्हिचमुस्लिम्स आर फेस्ड विथ इज़ नॉट वेयर दैटडज़।सो दलित आर सीन एस पार्ट ऑफ़ द नाउ एटप्रेजेंट बाय द हिंदुत्व थरी एज़ पार्ट ऑफ़द हिंदुत्व प्रोजेक्ट।राइटअह इनफैक्ट देयर इज़ अटेम्प्ट बाय दहिंदुत्व नेशनल टू अकोमोडेट देम विद इनएंड दैट इज़ व्हाई यू सी दैट एटलीस्ट इफमेनी ऑफ़ देयर प्रॉमिनेंट फिगर्स आर आल्सोदलित्स। दे आर आल्सो प्रोमिनेंट फिगर्सइंक्लूडिंग द प्राइम मिनिस्टर क्लेम्स दैटही इज़ एन ओबीसी। तो जो अ मार्जिनलाइज्डपॉलिटिक्स आइडेंटिटी फ्रेमवर्क में हो रहीथी।हमउसको हिंदुत्व पॉलिटिक्स इज़ ट्राइंग टूअकोमोडेट इन सम वेज़। बट दैट द सेम थिंग देविल नॉट डू विथ मुस्लिम्स। यू नो बिकॉज़मुस्लिम्स हैव टू बी एन अदर इट इट इज़ इटइज़ेंट फॉर देम।टू रिमेन एस द अदर राइटविदाउट वि हिंदुत्व इटसेल्फविल नॉट सर्वाइवराइट तो सर यहां पे हम जो डीनेशनलाइजेशनकी बात कर रहे हैं और आपने बोला कि येएक्सपेरिमेंट सिक्स के साथ भी एक छोटेदायरे छोटे पीरियड में किया गया है। लेकिनएस फ एस मुस्लिम्स आर कंसर्न येएक्सपेरिमेंट काफी लंबे दौर से चल रहा है।पिछले 10 सालों में 12 सालों में ये बहुततेजी से आगे गया है। क्योंकि एक प्रेफर्डएस्टैब्लिशमेंट है जो इस पॉलिटिक्स को आगेबढ़ाती है। लेकिन ये एक्सपेरिमेंट लगातारचल रहा है एटलीस्ट एट द लेवल ऑफ आरएसएस कीपॉलिटिक्स और बीजेपी की पॉलिटिक्स पे तोजो मुसलमानों के बीच जो मुसलमानों काडीनेशनलाइजेशन है और जो सिखों काडीनेशनलाइजेशन है उसको आप कैसे डिफरेंशिएटकरते हैं क्योंकि बहुत सारे लोग ये भीसोचेंगे कि जो मुसलमानों के एक्सपीरियंसेसहैं वो सिमिलर है सिख एक्सपीरियंसेस सेडीनेशनलाइजेशन के दम्स में उसको आप क्याआपको लगता है कि जो ग्लोबल इस्लामोफोबियाहै स्पेशली इन द लास्ट 202 इयर्स जोवर्ल्ड ट्रेड सेंटर के अटैक के बाद उसनेभी कहीं ना कहींडीमैक्सिनेशन के प्रोसेस को आसान बनाया हैहिंदुत्व पॉलिटिक्स के लिए।लेट मी टेक योर फर्स्ट क्वेश्चन फर्स्ट। दकंपैरिजन बिटवीन सिख एंड मुस्लिम केससी मेनी टाइम्स कंपैरिजनस आर नॉटनेसेसरीली नीडेडराइटहां मैंने बस इसलिए पूछा क्योंकि शायद जोलोग देख रहे हैं वो ये समझने की कोशिशकरेंगे कि वो एक्सपीरियंसेस कैसे हैंहालांकि मैं बिल्कुल उस तरह से समझ पाताहूं ये कंपैरिजन जरूरी नहीं है सबके अपनेअलग-अलग एक्सपीरियसेस होते हैं।[नाक से की जाने वाली आवाज़]बिकॉज़ सिक्स आल्सो फेस ह्यूज अमाउंट ऑफ़वायलेंस। जी।अह यू नो अह एंड फॉर देम इट वाज़ अ बिग शॉकबिकॉज़ सिक्स सॉ देमसेल्वज़ इंटीग्रेटेड टूद आइडिया ऑफ़ द इंडियन नेशन एट अ सिक्स वेरलार्ज नंबर्स इन द आर्मी देयर वर अ यू नोइन एनी अ सच नेशनलिस्ट मोबिलाइज़ेशन सिक्सवुड ऑल्सो बी इन अ इन गुड नंबर्स एटसेट्राअह लॉट ऑफ़ लेवल अमोंग्स द सिक्सदेमसेल्व्स अह अह अ सेक्शन ऑफ़ देम इज़आल्सो इन द आरएसएस एंड ऑल दैट।अह सो फॉर देम इट वाज़ अ इट वाज़ अ शॉक अहव्हेन सिक्स केम टू बी टारगेटेड सीइंगदेमसेल्व्स एज़ डिसलॉयल टू द नेशन और सीइंगदेम देम एज़ असेसनिस्ट एंड आल्सो दैट लेबलटेररिस्ट एट वन पॉइंट ऑफ़ वाइल्ड टाइम स्टकटू द सिक्स। बट द सिक केस वाज़ इन दैट सेंसशॉट लिव्ड। याह।यू नो, एक्सट्रीमली बैड एक्सपीरियंस वेंटथ्रू द हॉरर ऑफ़ अह ह्यूज वायलेंसएज़ आई से अह बट अगेनफोर फाइव इयर्स। एंड देन अह इट डेफिनेटलीअह वाज़ नॉट समथिंग व्हिच वाज़ परपीचुअलीप्रेजेंट।हिंदुत्व पॉलिटिक्स फॉर एग्जांपल कैन नॉटऑर्गेनाइज इटसेल्फ टू द सेम वे एनएक्सटेंट बाय टारगेटिंग सिक्स एज इट कैनबी द मुस्लिमअह सो इन दैट वे इन वन ऑफ़ द स्टेटमेंट्सआई थिंक आई मिस्टर मोहन भागवत हु इज़ दआरएसएस चीफ उन्होंने कहा कि भाई हम तोइमेजिन ही नहीं कर सकते हिंदू को विदाउट दमुस्लिम्सही इज़ राइट बिकॉज़इन देयर पॉलिटिक्स इज़ सेंटर्ड अराउंडफ्रॉम द बिगनिंगजीऑफ ऑफ यू नो हां मुस्लिम्स इन एव्री वेसीइंग अ ऑर्डिनरी मुस्लिम एस लेचरसलेटवियस ऑर्डिनरी मुस्लिम एस वन हु इज़ अजिहादी इफ नॉट दिस जिहादी दैट जिहादी हीइज़ लव जिहादी लैंड जिहादी सम जिहादी ही इज़यू नो तो उस एक्सटेंट तक वो जो जो ये हेटको उन्होंने सर्कुलेट किया है उसको थराइज़किया है हिस्ट्री से लेकर के प्रेजेंट तक।दैट इज़ नॉट व्हाट एनी अदर कम्युनिटी एस सचह स्पेस। द मुस्लिम केसेस इज़ आल्सो बिकॉज़आई वुड से दैट इट इज़ समथिंग वाज़ इनग्रेनइन द इंडियन नेशनलिज्म इंडियन नेशनलआइडियोलॉजी आल्सोएंड सो इट दैट सो इफ हिंदुत्वकॉन्क्रेटाइज्ड इट मेड इट अ प्रोजेक्ट विथअ सिंगुलर फोकस।बट इट इजंट दैट इट वास कंप्लीटली एब्सेंटद रिसोर्स द कल्चरल पॉलिटिकल इडलॉजिकलरिसोर्सेज अवेलेबल इट हैड सर्टन काइंड ऑफ़अ लेजिटिमेसी कि यू कैन टारगेट यू नो अकम्युनिटीफॉर फॉर व्हाटएवर रीज़ंसअह तो वो चीजें अर्लियर एज वेल इट वाज़देयर इन द इंडियन नेशनल आइडियोलॉजीइट वाज़ नॉट नेसेसरी ली कंप्लीटली बिल्ट ऑनट्रूली सेुलर फाउंडेशंसराइटएंड दैट हेल्प्डहिंदुत्व टू ईलीएक्वायर हां लेजिटिमेसी एंड कंसोलिडेटराइटराइट सर यू आल्सो टॉक अबाउट कलेक्टिववायलेंस एंड इंप्यूनिटी एंड आप बात कर रहेहैं कि कलेक्टिव वायलेंस हो रहा है साथमें इंप्यूनिटी भी है एक वायलेंस के बादइम्प्युरिटी की वजह से दूसरा वायलेंसअनलीच हो जाता है क्योंकि लोग देखते हैंकि वहां पर कुछ हुआ नहीं। हालांकि अभीहमने कल देखा है कि काऊ विजिलांटिस कोमध्य प्रदेश में शायद सजा हुई है लाइफटर्म की। लेकिन[नाक से की जाने वाली आवाज़] इंप्युरिटीएक लार्जर एक्सटेंट पे है और कई बार ऐसादेखते हैं कि जो जो विक्टिम है उसी पे केसकर दिया जाता है। परपट्रेटर को छोड़ दियाजाता है। तो ये कैसे अनकल सिटीजनशिपपरपचुएट करती है?हाउ डस दिस इंप्यूनिटी परपचुएट अनकलसिटीजनशिप अमोंग मुस्लिम्स एंड दैट आईडियाऑफइनफैक्ट जो इंप्यूनिटी हैदैट इज व्हाट मेक्स इंडियन मुस्लिम्सइन मेनी वेज़क्लोज़र टू अदर मार्जिनलाइज कम्युनिटीज़ टूक्योंकि आप अगर देखें कि ये जो मासवायलेंस व्हिच हैज़ आल्सो इंपैक्टेडदलित्स इन सम एरियाज लाइक फॉर एग्जांपल आईएम डूइंग रिसर्च ऑन लक्ष्मणपुर बाथे इनबिहारअराउंड 65 पीपल वर किल्ड वन नाइट बाय दरणवीर सिन्हालोअर कोर्ट से सजा हुई जो परपिट्रेटर्स थेएज दे मूव्ड हायर कोर्ट्सएवरीवन वास एक्विटेडजीआज की डेट में लक्ष्मणपुर पाथ थे व्हेन आईरिसेंटली विजिटेड लास्ट 10 10 15 डेज एगोद सोशल रिलेशंस हैव चेंज्ड कंप्लीटलीव्हेन इन दिस विजिट आई सॉ दैट दैट एपिटफइन वि द नेम्स ऑफ एवरीवन हु वाज़ किल्ड वाज़पुट अप हैज़ आल्सो बीन नाउ रिमूव्ड टू अलिटिल रिमोटर साइड ऑफ द विलेजअहकई सारी चीजें चेंज हो गई और उसकी वजह जोजो दोज़ हु आर द पॉलिटिकल एक्टिविस्ट देयरदे वर आल्सो सेइंग दैट हाउ पीपल हैव लॉस्टइंटरेस्ट एटसेट्राएंड दोज़ क्वेश्चंस व्हिच वर अर्लियर देयरअबाउट वेजेस अबाउट लैंड एटसेट्रा इज़ नो वनइज़ इंटरेस्टेड इन इट एनी लगरएंड दैट इज़ प्रोबब्ली आई थिंक आई विलकनेक्ट इट विद इंप्युनिटी पीपल पुट ह्यूजएफर्ट इन सीकिंग जस्टिस है ना तो दे टूकरिस्क दे वेंट एंड डिपोज्ड इन द कोर्ट एंडअल्टीमेट ली थ्रू वन मैकेनिज्म और द अदरऑल ऑफ़ देम हु वर नेम्ड अक्यूज़्ड वर यू नोएक्विटेडअ दिस मस्ट हैव डिरेज्ड द प्रोसेस ऑफ़जस्टिस एंड दोज़ हु वर पुटिंग होप्स इन दप्रोसेस इटसेल्फ। और यही चीज मैंनेभागलपुर के केस में देखा कि भागलपुर 1989इंप्युनिटी इटसेल्फ इज़ अ स्ट्रक्चर।इट बिगिंस एट वेरियस डिफरेंट लेवल्सएंड नेटवर्क्सआर देयर व्हिच व्हिच अल्टीमेटली यू नो कमइंटू प्ले जैसे ही केसेस ऑफ़ वायलेंस होताहै एंड द प्रोसेस ऑफ़ जस्टिस बिगिंस। फॉरएग्जांपल इन द केस ऑफ़ भागलपुर आई सॉ दैटअराउंड 2000 पीपल वर किल्ड।लेकिन मोस्ट ऑफ़ द केसेस में एफआईआर नहींहुए। एफआईआर हुए भी तो उसमें अननोन पीपलकेनाम डाल दिए गए। सो इट कैन नॉट बीप्रोसेस्ड अहेड।और इवन इफ देर नेम्ड एफ एफआईआर दस्पेलिंग्स व रोंगएंड एज अ रिजल्ट ऑफ़ व्हिच दोज़ पीपल कुडईज़ली क्लेम दैट वी आर नॉट द पर्सन हु हैज़बीन नेम्ड एंड गॉट ऑफ। बसाइड्सजानबूझकर के एफआईआर करने में डिले कियागया। उस दैट डिले वास यूज्ड इन द कोर्ट टूसे दैट एफआईआर वाज़ एन आफ्टर थॉट। व्हाईवाज़ देयर सच अ बिग डिले? वन मंथ डिले औरसो। सो व्हिच मींस दैट दैट द विक्टिम्सइनिशियली वर नॉट नेमिंग दोज़ परपर्पिट्रेटर्स, बट दे मस्ट हैव बीन टॉटबाइ अदर्स एंड देयर फोर दे केम इन। सो इटवाज़ अ कॉन्ट्राइब प्रोजेक्ट।राइट।सो, दैट बिगिंस एट द लोअर लेवल। देन यूमूव टू द अह कोर्ट्स वेयर द गेम ऑफ़ दजजेस, द प्रोसकटर एज़ वेल एज़ द दोज़ आर अदरलॉयर्स, डाउट्स, एवरीथिंग कम्स इन टू प्लेएंड सीकिंग जस्टिस इटसेल्फ इज़ अ लॉन्ग[नाक से की जाने वाली आवाज़] ड्रोन एंडएक्सट्रीमली एक्सपेंसिव प्रोसेस।सो दैट इज़ व्हाई से दैट व्हेन इट कम्स टूइंप्यूनिटी इट इज़ हियर वेयर द मुस्लिम केसलूजेस इट्स स्पेसिफिसिटी।अब मुसलमान अकेले ही नहीं है।जी। ऑल केसेस ऑफ मास वायलेंस इन इंडियामोर और लेसिटी वहां पे एक इट इट हैपेंसबिकॉज़ देयर इज़ अ गारंटेड इंप्युनिटीराइटफ्रॉम बिगिनिंग फ्रॉम द पार्टीशन वायलेंसराइटटू ऑल दैट केसेस ऑफ़ वायलेंस व्हिच वी कैनराइट नाउ यू नो एंटी सिख वायलेंसराइटऑल दोज़ वायलेंस बाय रणवीर सेना इन वेरियसपार्ट्स ऑफ़ बिहार सब में तो याद वायलेंसजो तमिलनाडु में दलितों के खिलाफ हुआ सबमें अल्टीमेट जो आउटकम होता हैवो कि पीपल विल गो एस गॉट फ्रीजीअ न्यू ट्रेंड ऑफ कोर्स व्हाट वी हैव बीनवी हैव नोटिस्ड इज़एंड प्रोबब्ली दिस मेक द मुस्लिम केसअपार्ट इज़दनॉट ओनली द इंप्युनिटी बट व्हेन दपपिटेटर्स आर फ्रीड दे आर सेलिब्रेटेडदेयर इज़ अ जुबिलेशन अराउंड दैटराइट देयर इज़ अ लॉट ऑफ व्हाट यू सेयाव्हिच इज अगेन ट्राइंग टू ग्लोटिंग टेक्सप्लेस व्हिच वी सॉ इन द केस ऑफ़ बिल्किसबानो और दोज़ हुऔर वो झारखंड में जोझारखंड में जोजहां पे आपके यशवंत सिन्हा केगलैंड पहनाया थाएंड दिस इज़ रूटीन हैपेंस इन हरियाणाराजस्थान एवरीवेयरसो दैट इज़ प्रोबब्ली यू नो दीज़ आर ट्रीटेडएस हीरोज़ हमनॉट सिंपली एस दोज़ हु सम हाउ ओके मैनेज टूगेट अवे एंड यू नो सेव देमसेल्व्स बट नाउदे आर ऑल नॉट ओनली दैट बट दे आर एक्चुअलीहीरोज़ बिकॉज़ दे इनक्टेड समथिंग दैटदैट हैज़ वाइडर अप्रूवल तो तकरीबन हमारीसारी बातें हो चुकी हैं। मतलब जो बातेंआपसे करनी थी सिटीजन के हवाले सेमुसलमानों के बारे में क्योंकि आज एक बहुतबड़ा प्रॉमिनेंट मुद्दा बना हुआ है। चाहेवो सीए एनआरसी के डिबेट के बाद हो याएसआईआर के क्वेश्चन पे हो। मुसलमानों कीसिटीजनशिप अपने आप में एक एकिस्टेंशियलक्वेश्चन है। तो मेरा एक आखरी सवाल आपसेयह है कि अगर हम पिछले 12 साल को देखतेहैं जहां पे ये सरकाररही है। उस 12 साल में सबसे बड़ा थ्रेटकौन सा मोमेंट था मुसलमानों के लिए जहांपे उनकी सिटीजनशिप को एकदम डायरेक्टडायरेक्टली चैलेंज किया जा रहा था। नो सीएऑफ कोर्स वास वन सच अटेम्प्ट बट देयर आरसी यू कांट सी एनीथिंग इन आइसोलेशनफॉर एग्जांपल आई कांट सेपरेट एसआईआर फ्रॉमसीएए हमअ उसका भी एंड गोल सेम हैइफ नॉट आपकी सिटीजनशिप लीगल सिटीजनशिपनहीं ले सकता तो आपको के पॉलिटिकल राइट्सजो है वो छीना जा सकता है। हमयोर वॉइस बिकम्स इन इफेक्टिव बिकॉज़ इन हांइवन इफ यू वोट योर नंबर्स आर नॉटरिड्यूस्ड है नाराइटऔर अपार्ट फ्रॉम दैट इट्स एन ऑनगोइंगप्रोजेक्ट नाउ अभी रिसेंटली आई थिंक लास्ट15 डेज में एक न्यू कमीशन का अनाउंसगवर्नमेंट ने किया है। इट इज़ कॉल्ड अडेमोग्राफी कमीशन। हम्।एंड उसके टर्म्स ऑफ़ रेफरेंस में है कि लुकइंटू द अननेचुरल ग्रोथ ऑफपापुलेशन इन सर्टेन कम्युनिटीज़। ऑलराइट दकम्युनिटी हैज़ नॉट बीन नेम।इन सर्टेन कम्युनिटीज़ व्हिच मींसकम्युनिटी वाइज़ डेटा दे कैनदेखा जाएगा।हां इट इज़ देयर दे हैव द मैंडेट टू डूदैट।राइट?अ वी नो इफ यू अंडरस्टैंड द पॉलिटिक्स ऑफद करंट टाइम्स वी नो दैट व्हाट इट इजइंटेंडेड टू डूराइट अ तो ये चीज तो एक यू नो वी कैन नॉटआइसोलेट वन फ्रॉम द अदर एव्री मोमेंट दबिकॉज़ द प्रोजेक्ट इज़ ऑन इट इज़ नॉट इट इज़नॉट लाइक रीच्ड इट्स बैक गोल एज़ सच सो इटइज़ अ कंटीन्यूअस प्रोजेक्ट प्राइस आईस्टिल हैव लॉट ऑफ़ होप। होप बिकॉज़वन हिस्ट्री टेल्स अस दैटथिंग्स डू चेंज।राइटएंड इफ फ़ैशिज़म इन यूरोप वाज़ डिफिटेड।विथ इट्स मैसिव वेयर विद ऑल।राइट।इट इट इट एंड इन मेनी अदर प्लेसेस अस वेल।वी हैव सीन द डाउनफॉल ऑफ डिक्टेटर्स हुहैव बीन देयर फॉर 30 35 इयर्स एंड देन अरबस्प्रेइंग एंड ऑल दैट व्हिचचेंज्ड इट ऑल टुगेदर व्हाट वाज़ द आउटकम वीडोंट नो बट दैट कैन नॉट बी प्रेडिक्टेडआल्सोदैट्स ट्रूबट नेवर द लेसदेयर इज़ समथिंग व्हिच इज़ अ यू नो इनह्यूमन यू नो स्पिरिट एंड ह्यूमन एनर्जीव्हिच वुड नॉट रेस्ट विथ आई बिलीवअ कास्टेंट कंटीन्यूस ऑपरेशनइट एट सम मोमेंट और द अदर अ दैट दैटपॉइंट ऑफ़ ब्रेक डज़ मच।सो वी हैव सीन द कोलैप्स ऑफ़ कॉलोनियलिज्मइन अफ्रीका इन अल्जीरिया इन इंडियाएटसेट्रामैंने हालांकि कह दिया था।सो हिस्ट्री गिव्स मी होप दैट इज़ राइट।मेरा अगला क्वेश्चन यही था कि पॉलिटिकलसोशियोलॉजिस्ट होने के नाते आपका आपको होपकहां से आता है? आपने खुद बता दिया किहिस्ट्री से आपको होप आता है। लेकिन मैंएक सवाल आपसे और करूंगा इस गुफ्तगू कोखत्म करने से पहले। जो इंडियन मुस्लिम्सका एग्जांपल है। मैं कई बार उसकोरोहिंग्यास के साथ कंपेयर करने की कोशिशकरता हूं। पर्सनली आई ट्राई टू ड्रॉपैरेलल्स। एंड ट्रस्ट मी शायद जब 13 सालपहले 14 साल पहले मैं रोहिंग्यास को कवरकर रहा था तो मुझे एक कई बार ऐसेथॉट्स भी आए हैं कि क्या हिंदुस्तानहिंदुस्तान के मुसलमानों का मुस्तकबिल मेंक्या ऐसा होने वाला है क्योंकि ठीक हैपिछले 12 साल में एक्सक्लूजन का प्रोसेसजो है बहुत ज्यादा बढ़ गया है और बहुतज्यादा रिप्रेशन है लेकिन उससे पहले भीचीजें खराब थी और और शायद मैं उस वक्त सेही यह एसोसिएशन ड्रॉ कर रहा हूं कि क्यामुस्लिम्स भी रोहिंग्या के पोजीशन में कभीआ सकते हैं या नहीं आ सकते हैं जहां पेआपकोइललीगल चैनल्स से माइग्रेट करना पड़ जाएदूसरे स्टेट मेंजहां पे आप वाटर रूट्स के थ्रू भाग रहेहैं अपनी जान बचाने के लिएतो आपको लगता है क्या हिंदुस्तान में इसकापोटेंशियल है या हिंदुस्तान के जोडेमोक्रेटिक और सोशल स्ट्रक्चर्स हैं वोइसको कंटेन कर लेंगे और ऐसा नहीं हो पायाहोगा हिंदुस्तान में नो सो देयर आर समकमेंटेटर्स हु मेंशन दैट हाउ इंडियाइंडियन सिचुएशन विज़ अवे मुस्लिम्स टुडे इज़सम वन स्टेज और द अदर ऑफ़ जेनोसाइड औरसमथिंग लाइक दैट अ रीज़ रिसेंटलीद यूएससेनेटर हैज़ आल्सो मेड दैट कमेंटसो देयर आर पैरेलल्स यू कैन से इन सम वेज़और द अदर द ओनली थिंग वि आई बिलीवमे नॉट लीड अस टू अ सिमिलर सिचुएशन इज वनअ द डायवर्सिटी इन इंडियाहमसो अ यूनिलटरलसिमिलर काइंड ऑफ़ अ प्रोजेक्ट व्हिच रंसअक्रॉस द लेंथ एंड ब्रेथ ऑफ इंडियाहमफ्रॉम केरला टू कन्याकुमारी और फ्रॉम दवेस्ट कोस्ट टू द ईस्ट कोस्ट और समथिंगलाइक दैटदैट मे नॉट बी प्रोबब्ली पॉसिबल हमअहबिकॉज़यू नोदेयर आर रीजंस दे दोज़ रीजंस इवन इफ दे कमटू बीकंज्यूम्ड बाय सम काइंड ऑफ़ अ यू नोमेजॉरिटेरियन फ्रेमवर्क बट दे देयरयू नो रिस्पांस टू मुस्लिम्स अमोंग्स देममे वेरीरी बिकॉज़ इन सम प्लेसेस मुस्लिम्सएंड सच स्मॉल नंबर्सएंड अदर प्लेसेस दे कुड बी सीन एज अ थ्रेटएटसेट्रा सो द सिचुएशन इज़ नॉट सेम लाइकफॉर एग्जांपल द एसएम सिचुएशन इज़ नॉट सेमएज से द सिचुएशन इन केरलाकेरला राइट अ सेकंडलीद प्रोपोर्शनमुस्लिम्स इन इंडिया आर नॉट लेस देन आईथिंक 200 मिलियनएंड व्हिच इज अ ह्यूज प्रोपोर्शनफॉर फॉरअ एनी सच काइंड ऑफ़ अ एक्सरसाइज टू टेकप्लेस।राइट?अह सो व्हाट विल हैपन इज़ अ न्यू काइंड ऑफ़अ यू नो प्रोजेक्ट ऑल टुगेदर अ न्यू काइंडऑफ़ अ राइट विंग इमेजिनेशन।इन विइट इज नॉट नेसेसरी विल नॉट रिक्वायरअ यू नोएनी एक्सटर्मिनेशनएक्सटर्मिनेशन ऑफ़ मुस्लिम्स एस सच बट देनकंटिन्यूस ऑपरेशनतो आप कह रहे हैं कि विद इन द टेरिटरी वोकंटीन्यूअस ऑपरेशन बना रहेगाऔर आप ये भी कह रहे हैं और शायददैट्स बना रहेगा नहीं दैट्स दैट्स दप्रोजेक्टदैट्स प्रोजेक्ट राइट राइट औरएक सच्चाई यह भी है कि और शायद मेरी भीअंडरस्टैंडिंग यही है जो आपकीअंडरस्टैंडिंग है कि हिंदुत्व पॉलिटिक्सजो है वो अदराइजेशन ऑफ़ मुसलमानों पेडिपेंड करती है।और अगर मुसलमान नहीं रहेंगे इस प्रोजेक्टमें तो वो हिंदुस्तान हिंदुत्व पॉलिटिक्ससक्सीड ही नहीं कर पाएगी।वो आगे थ्राई भी नहीं कर पाएगी।आई विल जस्ट वांट टू ऐड टू इट इज़ दैट देयरआर सम पीपल इवन अमंग्स मुस्लिमइंटेलेक्चुअल्स एटसेट्रा। आई रिसेंटली वाज़पार्ट ऑफ़ अ स्माल डिस्कशन। हम्मइन इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर फाइवसिक्स पीपल वर देयर एंड वन ऑफ़ देम वाज़ दोवाज़ दोज़ हु वाज़ बीन अ फॉर्मर इलेक्शनकमिश्नरएंड वाज़ इज़ आल्सो ही इज़ अ पार्ट ऑफ़ दैटग्रुप व्हिच व्हिच फील्स दैटमुस्लिम शुड एंगेजविथ इंगेज विद आरएसएस दे आर एक्चुअलीएंगेजिंग विथ आरएसएस चीफ मोहन भागवत एंडसो ऑननाउ अह माय कंसर्न इज़ दैट हाउ डू वी सीफर्स्ट ऑफ़ ऑल ऑल यू हैव टू अंडरस्टैंड दिसएंटायर डिस्पेंसेशन दिस द होल यू नो अह100 इयर्स ऑफ द ऑर्गेनाइजेशन एंड इट्सपॉलिटिक्स इट्स आइडियोलॉजिकलयू नोअहकंस्ट्रक्ट्स थ्रू व्हिच इट वर्क्सएटसेट्रातो अगर हमारी यह समझदारी है कि मुसलमानोंको टारगेट करना सिर्फ उनका पॉलिटिकल नीडहै।वी मे स्टिल थिंक दैट ओके लेट अस ट्राई टूशिफ्ट द पॉलिटिक्स। इफ दे वांट नंबर्स वीविल जॉइन आरएसएस वी विल जॉइन बीजेपी एंडदेन दिस विल बी ओवर ऑल टुगेदर।तो ऐसे कई लोग हैं जैसे कि मुस्लिमराष्ट्रीय मंच वाले लोग हैं जो कि सोच रहेहैं कि ज्यादातर तो हो सकता है किपावर हैज़ इट्स ओन फ्रेंड्सराइटतो वो देख रहे हैं कि चाहिए यही है मौसमका उसी मौसम के हिसाब से अपने आप को भीढाल लिया जाएलेकिन उसमें हो सकता है कुछ लोग ये भी सोचरहे हो के अगर हम उनसे करीब आएंगेतो जो वेनम है जो पोइजन है वो वो हम जो हैमिनिमाइज कर देंगे।जैसे भगवान शंकर ने जो है विष पी लिया था।है ना? तो उस तरह से हम करके जो है अपनेआप को प्रूफ करें कि हम भी आपसे कोई अलगनहीं है। हम आप ही की तरह हैं वगैरह।तो एक तो यह है कि इट इज नॉट बिकॉज़ ऑफ़ एनीमिसअंडरस्टैंडिंग।राइट? कि मुसलमानों को ठीक से समझ नहींपाए हैं। इसलिए वह जो है इस तरह की चीजेंकर रहे हैं कि उन्होंने हिस्ट्री में किसीने उनको बहका दिया है कि आपके जो हैऔरंगजेब ने ऐसे नहीं किया था। ऐसे कियाथा। आपकी समझदारी हिस्ट्री की गलत है। तोउसके बाद जो है सब चीजें सही हो जाएंगी।तो ये तो नाइविटी है। इसको मुझे यही समझमें आता है कि आपने या तो समझा नहीं हैइसको। यह कोई हिंदुस्तान का अकेलाएक्सपीरियंस नहीं है। ये हर जगह कई जगह पेइस तरह इसी तरह के फैश आइडियोलॉजिकलमूवमेंट्स हुए हैं और बहुत हद तक सिमिलरभी है। कोई ज्यादा डिफरेंस नहीं है। आपइंडियन फैशिजम्म जो हिंदुत्व के थ्रूडेवलप हुआ है उसको ईली आप जर्मन फैशिम सेकंपेयर कर सकते हैं। उसके ज्यादातर जो हैमैकेनिज्म मेथडऔर यू नोइडलॉजी वगैरह जो है ऑलमोस्ट सेम है। कोईफर्क नहीं है। एक्सेप्ट फॉर मे बी हाउ देयू नो अनफोल्ड इट इन प्रैक्टिस वो डिफर करसकता है। जैसे जर्मन फैशज़्म एक्सपेंशनिस्टहो गया था। एडवेंचरिस्ट हो गया था।ये शायद नहीं कर रहे हैं। टेरिटरीहां बिय्ड टेरिटरीज चला।यहां पे भी एक ऐसी सोच तो है कि भारत कीहां राइट नाउ आई थिंक दे अंडरस्टैंड देयरमिलिट्री लिमिटेशंस एंड दैट इज नॉट ऑन दकार्ड।ओके?तो वो मैं नहीं देख रहा हूं एस सच। तोमुझे लगता है कि दैट इज़ व्हाट दे हैव लर्नफ्रॉम जर्मन फैशज़्म इज़ कि इफ जर्मन फैशज़्महैड रिमेन प्रोबब्ली विद इन देयर ओन येविद इन देयर ओनटेरिटरी बाउंड्रीज़। तो शायद जर्मंस को कोईज़्यादा प्रॉब्लम तो था नहीं कि इस जस कोजो है टारगेट किया जा रहा है। इनफैक्ट कुछकई सारे जूस जो थे वो कोलैबोरेट भी कर रहेथे।एंडअ बट व्हेन दे बिकम एक्सपेंशनिस्ट देनव्हेन दे कॉनक्वट फ्रांस सेंट आर्मीज़ टूरशिया हियर एंड देयर ब्रिटेन वाज़ अंडरथ्रेड दैट इज़ व्हाट द अलाइड फोर्सेस केमटुगेदर राइटतो शायद वो एक उन्होंने सीखी है वहां सेऔर प्रोब्ली वो एक्सपेंशनिस्टआईडिया अभी उस तरह से तो दिखता नहीं ऑलदोदे एंड देयर आईडियोलॉजी इट इज देयरयस यसदैट इज व्हाट आई मीन टू से व्हेन दे टॉकअबाउट अखंड भारत एन एक्सपेंशनिस्ट आईडियाइटसेल्फबट नेवर द लेस बहुत-बहुत शुक्रिया सर आपकाकि आपने हमें टाइम दिया और एक बहुत अच्छीगुफ्तगू को अंजाम दिया। मुझे लगता है किजो लोग भी [संगीत] ये शो देखेंगे उनकोउनके ना सिर्फ नॉलेज में इजाफा होगा बल्किसाथ-साथ जो मुसलमानों के सिटीजनशिप के जोसवाल है उसको लेकर बहुत क्लेरिटी बनेगी।तो बहुत-बहुत शुक्रिया आपने टाइम दियाहमें और हम उम्मीद करते हैं कि फिर हमदोबारा आपके साथ कभी कनेक्ट करेंगे।थैंक्स अाउस फॉरवहैविंग मी ओवर। इट वास अ वंडरफुलएक्सपीरियंस।थैंक यू सर।

Companion article

Citizenship on paper and in practice

Prof. Tanweer Fazal, a political sociologist who has written extensively on minority rights, exclusion and citizenship, uses the phrase "illusive citizenship" for the gap between what the Constitution promises and what Muslims in India experience. In a conversation with the host Asad Ashraf, he explained that citizenship in principle means legal membership of a state with equal rights. In practice, he argued, that promise has always been thin for the marginalised, and it has thinned further as social inequalities have been reinforced instead of narrowed and as the state has stopped acting as an instrument for delivering constitutional rights.

Fazal traced the sharpest deterioration to the establishment of what he called a Hindutva regime at the centre and in many states. As an example, he pointed to what is celebrated as the Yogi model, or bulldozer justice, which he described as a complete denial of constitutional process: accusation and punishment collapsed into a single act, with bureaucracy, police and even the judiciary in his view failing to stop it. He was careful to say that Muslims are not the only ones affected by fragile citizenship, but he argued that in their case there is a concentrated attempt at what he called denationalisation: questioning their claim to belong at all, through labels such as outsider and traitor, constant doubts about their patriotism, and the denial of their history.

Solidarity, and an alternative from within

Asked what a community facing this should do, Fazal's first answer was organisation and solidarity, among Muslims and across other marginalised communities. Such efforts have been attempted before but have not lasted, he said, partly because there is no consensus on what marginality means: whether economic deprivation counts, how to understand caste discrimination inside Muslim communities as well as outside them, and how to address gender-based violence. A politics of solidarity, he said, cannot be produced in a seminar room; it comes from sustained practice, from people engaging seriously with one another's questions while respecting each community's autonomy.

The host suggested that Muslim communities also face internal questions of sect, caste-like biradari divisions and gender. Fazal agreed and argued that progressive thinking need not be imported from Western modernity, because Indian and Islamic history and practice can themselves generate progressive alternatives. He said the answer is to engage with those traditions and with the progressive movements that have grown up around them.

Qaum, millat, ummah and the idea of darul aman

Fazal's 2014 book distinguishes three ideas of collective belonging among Muslim thinkers: qaum, millat and ummah. He described the debate as an old one, alive in the late colonial period when figures as different as Maududi, Hussain Ahmad Madani, Iqbal and Maulana Azad argued about nationhood, a concept that had itself arrived from Europe after its wars of religion. Islamic theology, he noted, is often quoted selectively today, with the concepts of darul harb and darul Islam pulled out to raise doubts about Muslim loyalty. What is forgotten, he said, is that Indian Muslim thinkers, going back to Sir Syed, developed the idea of darul aman or darul ahd, a land where communities coexist and Muslims share power, and pointed to the Prophet's covenant in Medina with people of other faiths as a precedent.

On the ummah, he argued that in the Indian context it has always been understood as a spiritual idea, not a territorial or political claim. One can be a good Muslim in India and feel spiritual kinship with Muslims elsewhere without that becoming a political contest over loyalty.

What the Sikh comparison shows

Fazal compared Muslim and Sikh experience because both communities once developed distinct ideas of nationhood, and neither, he argued, out of theological necessity. In his account, the dominant Hindutva discourse, and to some degree Indian nationalism more broadly, has distinguished religions of Indian origin from those of "non-Indian" origin, a distinction he traces to Savarkar's writing on Hindutva, whose influence spread widely. Those whose holy land lies outside India were therefore not to be trusted, and some thinkers, he said, went as far as suggesting they be made second-class citizens.

The rise of Muslim and Sikh nationalisms, he argued, should be understood as responses to anxiety about whether Indian nationalism could accommodate their concerns, in the run-up to Partition and after it. Pakistan, he noted, did not settle the national question for its own people, given the 1971 split over language. Sikh nationalism, in his account, grew out of the demographic shift Partition produced in Punjab, the Punjabi Suba movement, and the mishandling that ended in Operation Blue Star; separatism proved short-lived and costly, though the idea of a distinct Sikh identity persists. Fazal said he does not advocate religious nationalism, which he considers unsustainable, and preferred the framework of multinationalism associated with his own supervisor, T. K. Oommen, in which many identities can be accommodated inside one state.

He also cited reservation policy as a sign of the same distinction. Under Article 341, Muslim and Christian Dalits were excluded from Scheduled Caste status while Sikhs were included in 1956 and Buddhists in 1990. Communities that do similar work and suffer similar humiliation, he said, have seen upward mobility among those covered by reservation and almost none among those left out.

Why composite nationalism fell short

The host asked why composite nationalism, which many assumed had succeeded, allowed Hindutva to become as dominant as it is. Fazal said history must be examined without turning it into a weapon. In his view, composite nationalism served more as a slogan than as a conviction even among its proponents, and a majoritarian tendency was present from the start. He pointed to the language question, where the idea of a shared Hindustani gave way to a Sanskritised Hindi and a 1955 Sanskrit Commission was asked to consider Sanskrit as a national language, and to state-level laws on conversion and cow slaughter that accommodated majoritarian concerns. He also argued that understanding why leaders such as Iqbal and Jinnah, both once nationalists, turned to separatism is necessary for understanding how Hindutva rose.

Yet Fazal was not pessimistic about India's diversity. Diversity, he argued, has historically given the state stability, and homogenising ideas of one language, one nation and one culture are counterproductive. He suggested that the sort of upheaval seen in Bangladesh, Nepal or Sri Lanka would be harder to organise in so varied a country.

Muslim politics and its limits

Asked about attempts at Muslim political mobilisation, such as the one associated with Hyderabad's MP, Fazal said democracy allows many kinds of politics, and that treating Muslim political assertion with suspicion, as if it might revive the pre-1947 situation, is unacceptable. But he noted that Muslim experiences differ by region: relatively prosperous and professional in parts of the south, largely poor and in urban poverty in much of the north and east. A model that suits Hyderabad may not suit Bihar or Bengal.

He was equally sober about the record of secular parties. Bihar has had decades of socialist politics and Bengal long Left rule, yet Muslim indicators in both remain poor, and Bihar's caste survey showed OBCs still among the poorest despite three decades of OBC politics. Politics can improve representation, he said, but social and economic transformation requires a sustained, concentrated effort, and where polarisation is intense it is hard for Muslim candidates to win at all. The first task, in his view, is a politics that can defeat polarisation.

The anti-CAA protests and what followed

Fazal saw the 2019-20 protests against the CAA and NRC as a significant sign of change. They were led largely by women, students and young people, they were notable for the near-absence of religious orthodoxy, and they were, in his description, a citizenship protest conducted under the national flag that also reached out to others. He argued that the state's response, including the deaths of around 20 to 22 people in Uttar Pradesh and police action inside Jamia, resembled a war against the protesters, and that the Covid lockdown then completed the demobilisation. He nonetheless saw the movement's legacy in a new Muslim middle class and a new civil society, more rooted and less dependent on donor agendas, working in places such as Mewat and Kashmir.

Othering as a project

When the host asked whether othering is deliberate, Fazal said it is, and that it works through several channels at once. He pointed to Assam's chief minister and to population and land policies aimed at Bengali Muslims; to Hindutva-inflected popular culture, films and songs; to the renaming of places, which he called symbolic but a denial of a community's presence in history; and to the labour market. Ask for a service call, he said, and eight in ten times the person will be a Muslim doing the lowest-paid work, while employers now fear hiring Muslims. He cited the prime minister's remark about puncture repairers as an example of language read as stigmatising. Boycott calls over halal labels and shop names, he said, show even the market being polarised.

On SIR, the special intensive revision of electoral rolls, Fazal said CAA, NRC and SIR should be seen as one continuum. In his reading, the anti-CAA protests were effective in one respect: a nationwide NRC did not happen, and the aim has shifted to other instruments. He noted the scale of deletions in Bengal, about 90 lakh names by the figures he cited, and the introduction of an undefined category of logical inconsistency, under which minor spelling differences in parents' names were enough to lose the vote. He cited reports that around 65 percent of the roughly 35 to 36 lakh people removed under that category were Muslim, a share far above their proportion of the population, and said the data has not been fully disclosed. He also argued that SIR works as a polarising tool, since the anger over deletions did not become cross-sectional: those not affected, he said, may even welcome it.

He said the CAA itself was hard to implement because applicants must first declare themselves immigrants, which people who already hold documents have little reason to do. And he pointed to a newly announced demographic commission whose terms of reference, he said, include looking into the unnatural growth of population in certain communities, without naming them.

Impunity and hope

Fazal argued that impunity is what makes Muslim experience distinct even though it is not unique to Muslims. Drawing on his research, he cited the Laxmanpur-Bathe killings in Bihar, where lower courts convicted but higher courts acquitted everyone, and the Bhagalpur violence of 1989, where he said most cases never produced usable FIRs or were undermined by delays and misspelled names. What is different now, he said, is that perpetrators are celebrated, citing the release of the Bilkis Bano convicts and a garlanding in Jharkhand.

On the possibility of a Rohingya-like fate, he said Indian Muslims number around 200 million and live across a diverse country, which makes a uniform project of that kind implausible. What he expects instead is a continuous operation of othering, because Hindutva politics depends on the Muslim as its adversary. He compared Indian Hindutva with German fascism in its methods and ideology, though not in expansionism, and said he finds hope in history: fascism in Europe was defeated, colonialism collapsed, long-standing dictatorships fell, and human energy does not rest indefinitely under constant repression.

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