Nous Podcast· 28 Oct 2026· 1:33:34

Where do Muslims situate themselves in CJP and anti-SIR protests?

What does Muslim participation in political movements look like in contemporary India? Are Muslims included only as participants and voters, or do they also have the space to shape political narratives, articulate collective demands, and exercise leadership? In this Nous panel discussion, moderat…

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रोलिंग डिस्पेंसेशन में चाहे वो कांग्रेस पावर में हो चाहे बीजीपी वार में हो एक्स्क्रूडेट तो मुस्लिम्स हमेशा रहे हैं लेकिन ओपोजिशन के जो वॉइसेस होती हैं उसमें भी यह कहीं ना कहीं मिसिंग है एजा मुस्लिम बॉडी इनवाइटेड है ह

अपने आर्टिकल में लिखा कि जब बॉडी की बात आती है तो मुसल्मान एक स्पेशल ट्रीटमेंट रिसीव कर रहे हैं पुलिस से और एक अलग तरीकी की ब्रोटालिटी उनके ऊपर हो रही है कंपेर्ट टू अदर पीपल तो आई रिमेंबर इर्फान अहमद को जो किताब

उमर खालिद की बात कर रहे हैं और आप डिस्ट्रैक्ट कर रहे हैं रियल इश्योस से तो यह नैरेटिव बार-बार डिवेलप किया जाता है कि मुसल्मान का अगर कोई इश्यों है तो वह रियल इश्यों नहीं है मुस्लिम्स हाफ फॉर आक्शनी आउटसोस्ट पॉलिटिक्

तो उनसे सवाल should be most important priority. Can we separate identity from these larger demands of development and education and housing? ये 1950 presidential order एक बहुत बड़ा structural problem है जिसके around हमें बात करनी चाहिए और जिसके around हमें mobilize करना चाहिए. It is the way forward is to organize the Muslim organizations. You know, that is the need of an hour.

We have to become a pressure group within ourselves. We will have to sit together. जितने भी नए formations हुए हैं, सबसे पहले क्योंकि मैंने CA के बाद देखा है, कि वो ही pattern repeat हो. हम लोग बोलते हैं कि Congress के अंदर internal democracy नहीं है, फलाने के अंदर, Muslim democracy में internal democracy नहीं है. तो आज हम बात करेंगे Muslim citizenship पर, सियासी नमायंदगी पर, और इंडिया की democracy में, �

आज की गुफतगू में हमारे साथ हैं असद अश्रफ जो के एक independent journalist है, मुहमद अलफॉस जो के fraternity के secretary हैं और अली जावेद जिनका तालुक नाउस से है. सबसे पहला सवाल असद अश्रफ भाई मैं आप से करना चाहती हूँ. लोग SIR को एक backdoor NRC की तरह देख रहे हैं और बता

लेकिन इसमें भी जो implications है वो कई हैं citizenship पर और vote देने के लिए of course citizen होना जरूरी है और Supreme Court ने भी clarify किया है कि representation of people's act के section 16 के अंदर election commission को इजाजत है कि citizenship से related जो भी questions है वो पूछ सकता है SIR के process को verify करने के लिए तो ये relationship है SIR और citizenship की

एक तरीके से SIR में मौजूद होना वोटर लिस्ट में मौजूद होना आपकी सिटिजनशिप की तज़दीक करता है वोटिंग भी सिटिजनशिप की सबसे बुनियादी हकूख में से एक है और वो डिसाइड करता है कि कौन सी आवाज जो है वो मुल्की डिमोक्रिटिक पॉलि

उनको logical discrepancies की category में 20.3% देखा गया जबकि draft roles में उनका share जो है 13.6% था और दूसरी बात यह है कि logical discrepancies में जो 5 categories थी उसमें जैसे name mismatch था, parent age difference, grandparents age difference उसमें एक fifth category थी no reasons mentioned एक undefined category थी इसमें भी मुसल्मानों का share 20% देखा गया

है तो अगर ऐसा यार बैकडोर एनर्सी है और सीए एनर्सी मूवमेंट मुसल्मानों ने लीड किया था क्या हम समझ सकते हैं कि यह जो प्रोटेस्ट से वह डिरेक्ट इनहेरिटेंस है उन प्रोटेस्ट का और इस तरह की फ्रेमिंग से हमारे पर्टिसिपेशन में प्रोटेस्

citizenship rights जैसे आपने राज वो telegraph के editor की बात की और ऐसे बहुत सारे cases आए हैं बेंगॉल में जहां पे passports पे लोग के passports पे असर पर लाया है लोगों को passports नहीं मिल रहे हैं उनके travel documents पे असर पर लाया है और ultimately उनको welfare scheme से भी उनको हिस्सा नहीं मिल रहा है

तो कहीं न कहीं ये कह तो रहे हैं कि I think this is a water cleaning exercise लेकिन this is more of an exercise to actually determine who is the citizen of this country and who is not the citizen of the country which was their objective behind doing the NRC तो ये back doors entry definitely है

और मुझे लगता है कि जहां तक प्रोटेस्ट की बात है जहां तक इनहेरिटेंस की बात है C.A.N.R.C के प्रोटेस्ट से ये कैसे निकल के आ रहा है मुझे लगता है कि अभी जो नारेटिव है पूरा SIR के अराउंड उसमें आम लोगों के वोटर राइट्स की बात की जा रह

चाहे वो बेंगॉल हो जाए आप दिल्ली की बात कर रही है 20% दिल्ली में अगर 13% के हिसाब से अगर आप 20% देखें तो 7% का फर्क है

तो मुसल्मानों का जो representation, disproportionate representation है voting list से गायब होने में, उसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है, इसको एक general narrative की तरह हम देख रहे हैं कि voter rights सबके ओसर पढ़ला है और सबके खिलाफ है, लेकिन I think this needs to be put out very specifically that this is impacting Muslims more than anyone else and this has to be one of the framings that we do when we build a narrative.

that Muslims are disproportionately affected by this entire process and we need to be very clear about it, we need to talk about it very clearly that Muslims are the primary targets. हाँ ठीक है NRC का जो exercise हुआ था Assam में भी उसमें भी non-Muslims थें

और उसमें भी ऐसा नहीं हुआ था कि पूरे मुस्लिम्स को ही उठा के आपने disenfranchise कर दिया था उसमें भी non-muslims थें लेकिन हमें देखना है कि proportion किसका कितना है और जिस तरह से हम देखते हैं कि यहाँ पे मुस्लिमानों का proportion बहुत जादा है लेकिन जो पूरा opposition है उसमें हम कही

तो हाला कि स्टोरीज बहुत सारी आई हैं आज आज भी आप हिंदू में जो कह रही है वह स्टोरी आई है लेकिन यह नारेटिव में नहीं है और यह कहीं ना कहीं मिसिंग है और इस वजह से मुझे लगता है कि जो मुस्लिम लीडरशिप है और हाला कि आशादीन ओवैसी ने क

कि कंक्लूट करना मेरे लिए ऐसे मुश्किल होगा कि यह कह देना कि मुस्लिम लीडरशिप से मुस्लिम लीडरशिप को शायद उससे असर नहीं पड़ लाया क्योंकि यह डिरेक्टली मुस्लिमानों को इंपैक्ट नहीं करें लेकिन अल्टिमेटली जो नारेटिव बनता है उ

यहाँ तक opposition की बात है मुझे लगता है एक और बहुत important सवाल मेरा यह था मैं तीन चार दिन पहले एक press conference में था और मैं देख रहा था कि सारे students bodies जो हैं चाहे वो left के हो यहाँ CJP हो तो ये लोग एक press conference कर रहे थे तो मेरा एक सवाल बहुत बुनियादी सवाल वहाँ पे यह था क

उनको invitation क्यों नहीं गया क्योंकि वो लोग भी लगतार protest में शामिल हो रहे हैं वो लोग भी लगतार SIR के खिलाब जो movement है उसमें लगतार detain हो रहे हैं तो why is it that they were not given space in that press conference तो ये तो सीधी सीधी exclusionary politics है मुझे लगता है opposition में भी मतलब एक तरफ तो power तो हमें exclude करता ही ही करता है �

आपको एक certain language की जरूरत होती है और एक certain articulation की जरूरत होती है जो कि आप जिसको so called progressive articulation कहते हैं मतलब progressiveness क्या है इस पे एक अलग debate हो सकती है और कौन progressive है इस पे एक अलग debate हो सकती है क्योंकि progressiveness तो अपने आप में एक idea है कि मतलब it's very subjective

तो मुझे लगता है कि जिस तरह से categorize करते हैं कि हम progressive student organizations को बुलाएंगे और उसमें आप खुद ही decide कर लेते हैं कि कौन progressive है कौन progressive नहीं है तो ये बहुत problematic है और outrightly अगर आप कोई ऐसी organization है जो किसी community के लिए advocacy कर रही है

मैं मुस्लिम के लिए कर रही है तो आप उसको कैटेगराइज कर देते हैं कि यह सेक्टरियन है तो यह बहुत बड़ी प्रॉब्लम है यह और यह प्रॉब्लम सिर्फ रोलिंग डिस्पेंसेशन में नहीं है रोलिंग डिस्पेंसेशन में चाहे वह कांग्रेस पावर में हो चा

जो leadership emerge करने चाहिए मुस्लिमानों के बीच में वो leadership कभी भी community के अंदर से वो लोग जो अपनी identity को एक मसला मानते हैं और अपनी identity को एक एहम हिस्सा मानते हैं अपनी जिंदगी का उनको space नहीं मिलता है उस leadership की पूरी जद्दो जहद होती है और अगर Muslim leadership आती भी है तो opposition में तो �

जिन लोगों ने आपकी language को adopt कर लिया आपकी language को adapt कर लिया या आपके political line को adapt कर लिया तो आपने बोला कि चलो ये ठीक है इसको हम fit कर लेंगे कहीं न कहीं तो I think this is not what democracy we are all after all we are all fighting for a democratic country and in a democracy we all have different shades of people and different shades of color तो मुझे लगता है कि सबकी जगा होनी चाहिए और सबकी जगा बरखरा

और दूसरी organizations को आप non-progressive, inferior करके categorize कर देते हैं, sectarian करके categorize कर देते हैं, तो यह एक बहुत बड़ा मसला है, और यह साफ दिख रहा है आज के जो protest हो रहे हैं, उसपे मुझे नहीं लगता है कि एक भी Muslim नाम जो prominent हो opposition में, और दूसरी बात यह है कि, थोड़ा मैं लंबा बोल र

उनकी फ्रेमिंग जो है उनको डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स कहा जाता है विच इज ओके विच इज नॉट अ नॉट अ प्रॉब्लम ऐसे एडिवन हुए डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स गुड थिंग बट वाइड यू डिफरेंशिएट वाइड यू डोंट

कि आप political आवाज नहीं बन सकते हो आपकी categorization fixed है अगर आप ज्यादा से ज्यादा कहीं जा सकते हो तो आप human rights defender बन सकते हो तो all these things are very problematic I can go on talking about it but then I think we will open up as we go along with this discussion

अलफास आपने अपने आर्टिकल में लिखा कि जब बॉडी की बात आती है तो मुसल्मान एक special treatment receive कर रहे हैं पुलीस से और एक अलग तरीकी की brutality उनके उपर हो रही है compared to other people मैं ये नहीं कह रही कि और लोगों के साथ police brutality नहीं हो रही है but specifically नाम लेकर गाली देकर मुसल्मान को ज

कई लोगों ने शुरू में मुसल्मानों को मशरा दिया back in July कि आप in protest में ना जाएं क्योंकि आप ज्यादा vulnerable हैं और जो भी cases होंगे वो आपके उपर होंगे, detentions होंगे तो आपके होंगे, jail जाएंगे तो आप जाएंगे और leadership आपको नहीं दी जाएगी at the same time.

तो किस हद तक ये suggestion सही है और इसे आप compare कर सकते हैं जुलाई की protest जो need protest थी उसको एक side रखें और फिर in continuation आज की protest जो कि SIR की protest है उसमें कुछ difference है क्या वो advice जो उस वक्त अगर वो सही था तो क्या वो आज भी apply करता है या फिर अगर ये advice दिया जा रहा है तो इससे हमारी youth, Muslim youth की

जब किसी movement में शिर्कत करने की कीमत हर community के लिए अगर एक नहीं है तो सबको एक तरीके से participate करना क्या justified है या मतलब इंसाफ पर मबनी है देखिए जो आपका सवाल है whether we can see this in the continuation of NEET protest and SIR

फिर उसी में एक दूसरा सवाल जो सब क्वेश्चन उसमें यह है कि कुछ सेविल सोसाइटी के लोगों के तरफ से और कुछ मुस्लिम इंटेलिजेंसिया ग्रूप के तरफ से अडवाइज आया कि मुसल्मानों को इससे इन सब प्रोटेस्ट से दूर रहना चाहिए और बिकॉ

और जो मेन सवाल जो है continuation का need से लेकर SIR से इसका मेरे understanding में एक historical burden है suggestion को लेकर और जब हम compare करते है movements को वो अब मैं वो महीं से शुरू कर रहा हूँ जहाँ पे असद भाई ने खत्म किया था regarding political leadership और फिर जो आपका भी सवाल था कि इससे leadership महदूद हद तक रह जाती है उसमे historical burden जो

जितना violence हो रहा है उसको देखते हुए मेरी understanding में एक चीज यह है कि हमें

वह पॉलिटिकल लिटरशिप भी जरूरी है लेकिन उसके साथ साथ एक सिविल राइट लीटर्स भी चाहिए यू कैन रेफर टू मार्टिन मूथर किंग मैलकॉम एक्स फैनन वेन ग्लैक लाइव्स मेटर का इन ऑफ थिंग्स कम सब तो जब मुसलमानों का बात होता है हम मॉ�

तो बेसिकल ये डायरेक्ट अटैक है फंडामेंटल राइट्स के मुसल्मानों का तो एक तो जरिया है पॉलिटिकल लिटरिशिप से सॉल्व करने का दूसरा जो जरिया होता है वो सिविल जो असद भाई ने जैसे बोला कि ह्यूमन राइट डिफेंडर उनको बोल देते है और

मैं ये इस बेसिस पे मैं ये कहना चाह रहा हूँ कि जब लेफ्ट लिबरल सेक्लर पॉलिटी की बात आती है उसमें जब हम बात करते हैं एलियन्स का especially जब लिबरल और लेफ्ट लॉबी की तरफ से बोला जाता है कि we are in natural alliance जितना भी oppressed community है वो एक natural alliance के साथ है तो वो लोग ये define

अब जब वो लोग decide करते है alliance का nature क्या होगा then this is what you referred what I wrote in my one of the piece कि आप as a Muslim body invited है हमारे call the way protest में but not as a with your

थेयरीज ऑफ यू नो मुस्लिम पॉलिटिकल एक्टिविजिम फॉर एन एग्जांपल सीजेपी का जो पहला प्रोटेस्ट था नीट का उसके अब उसके जस्ट फॉरन उसी टाइम जो है एक प्रिंट में आर्टिकल छपता है अब इम्निया खल्दून भारती के पेंस पेंड

इंग्लिश में था मैं उसका तर्जूमा अब उसमें यह कहने कोशिश कर रहे हैं कि मुझे खुशी हुई कि मुसल्मान पुछ आए यहां पर प्रोटेस्ट में बट आइम मोर हैपी दे जस्ट केम एजन इंडिवीजुअल नॉट आज अब मुस्लिम उसको बोल रहे हैं एंड

वो उनका किताब है वो बोल रही है वो बिसिकली मार्क्स का जो एक किताब है जूइश क्वेश्चन विच केम इन सेवेंटीन एटी टू सम्थिंग अनुवर्ड तो कहते हैं वह कि मार्क्स इज आस्किंग कार्ड मार्क्स इज आस्किंग वेदर द जूइश क्वेश्चन इन �

तो उस argument को extend करते हुए इन्होर्टन बोल ली Muslim question पे और इन्होर्टन is criticising the left and secular polity और वो बोल रही है कि same as Muslim question जो address किया जा रहा है आज के multicultural और liberal framework में it is being solved more from the lens of western political theory anxiety

वो एक anxiety है कि हमारा secular जो framework है उसको उसका definition जो हमारा जो liberal political fit करता है उसको कहीं नुखसान ना पहुचे तो वो एक anxiety है उस anxiety के basis में Muslim question address हो रहा है and the same thing which is happening in today's protest now coming back to this primary question कि need से लेके यहां पर नीट पर भी हमने देखा कि जब आप first of all आप एक

student community को monolithic body नहीं बोल सकते हैं वहाँ पे एक Muslim student भी है एक Dalit student भी एक Adivasi student भी है that's why constitution में भी reservation की बात हो रही है तो आप सबको एक pedestal पे नहीं रख सकते है now here why civil rights movement is more important कि एक hijab वाली लड़की को Jaipur के exam hall में रोक दिया जा रहा है कि भाई आप hijab पहन के exam नहीं लिख सकती है

तो वो चीज इन सब प्रोटेस्ट में address नहीं हो रही है और this is obviously these are part of civil light broader civil light movement so this is the continuation and the continuation is also how the Muslims are being marginalized from these kind of movements अगर हम Muslim term पे बात करते है then we are called as communal people you know because we are not

अगर मसाजी डेमॉलिश हो रही है हमारी दर्गा डेमॉलिश हो रही है घर डेमॉलिश हो रही है और हम direct on a Muslim identity हम उसको condemn कर रहे हैं then this is not a Communalism अगर आपका वो definition Communalism में है तो we are not ready to buy that definition of Communalism

सवाल यह था कि जनरेज की तरफ से कि हम देखते हैं कि यहां पर स्टेज से भारत माता की जय और वंदे मातरम जैसे नारे लग रहे हैं और हमने देखा है कि लेफ्ट की तमाम तंजीमें जो है इस नारे को कंटम करती आ रही है लेकिन आज यह नारे लेफ्ट की तंजीम यहां

वो बोलती है कि हम सारे नारों कंडम करते हैं और हमें ये भी मालूम है कि इन नारों के विज़ासे मुसल्मानों की जान गई है वो सब कंडम करती है लेकिन वो जवाब का एंड इस तरीके से कर रही है कि हमें एक broader movement बनाने के लिए कुछ चीज़ा tolerate करनी पड़ती है you see this vocabulary you are ready to sacrifice

और अभीजी दिपके के लिए, जब नीट प्रोटेंस शुरू हो गया तो यहां पर हिंदु-मुस्लिम पॉलिटिक्स मत कीजिये। तो जब आप हिंदु-मुस्लिम पॉलिटिक्स को उपयोग करते हैं, तो मैं रिमेंबर इर्फान अहमद को जो किताब है, एलजेबर और वार

कि वह कम्युनिजम जो हो रहा है जो वॉयलेंस हो रहा है वह हिंदू की तरफ से हो रहा है तो आप जब यह कहते हैं हिंदू-मुस्लिम पॉलिटिक्स मत कीजिए इन्स यू आप समाना को भी बोल रही है कि समान जो है हिंदू और लिंच कर रहा है डेमोलिश कर रहा है वह सिव

कंटिनियसली जो जोड़ दिया गया है कि कम्यूनल पॉलिटिक्स नहीं होगी यहां पर और रियल इश्यूस पर बात करते हैं हाउजिंग पर बात करते हैं डिवेलपमेंट पर एजुकेशन पर बात करते हैं यहां तक कि जब उमर खालिद की बात आई तो यह कहा गया कि यहां

उमर खालिद की बात कर रहे हैं और आप डिस्ट्रैक्ट कर रहे हैं रियल इश्योस से तो यह नैरेटिव बार-बार डिवेलप किया जाता है कि मुसल्मान का अगर कोई इश्यों है तो वह रियल इश्यों नहीं है और रियल इश्यों जो है वह कंट्री के जो नेशन वाइड �

वह इस प्रदर्ड बैकवर्ड अपने आपको पाते हैं तो जब हम

इन रियल इशूज की बात करते हैं तो क्या हम आइडेंटिटी को पीछे छोड़कर इसकी बात कर सकते हैं क्योंकि जब हम मुल्क की एक कलेक्टिव नैशनल आइडेंटिटी और नैशनल फैब्रिक में आपको जब इंक्लूट किया ही नहीं जा रहा है तो अगर बाई चैन्स क

दिमांड्स ऑफ डिवेलपमेंट एंड एडुकेशन एंड हाउसिंग इंटरसेक्शनालिटी कि इंसान के जो होता है वह किसी एक इससे से नहीं बनता इंदुस्तान में कास्ट क्लास जेंडर रिलिजियन सारी वह और भी बहुत सारी ऐडेंटिटीव हैं ऑक्यूपेशन रीज

CA के बीच में equivalence की बात हुई तो of course similarity तो आप लोगों ने बायान कर दिये जो उसमें कोई दुराही नहीं है दुराह नहीं है लेकिन difference भी है एक major difference यह है कि उस जमाने में जब CA हो रहा था तो emergency of जो loss था वो Muslim perception में था और क्योंकि वो vote से directly जुड़ता हुआ नहीं दिख रहा था

तो ये जो सब political parties हैं, जो Muslim bodies को so-called एक vote bank की तरह समझती हैं, उनको ये महसूस नहीं हुआ कि इसके लिए, या जैसे वक्स है, हिजाब है, इसके लिए हमें mobilize करने की जरूरत है. हाला कि अगर आप SIR का case भी देखें, SIR भी जब broadly backdoor NRC बोले जा रहा है, तो ऐसा क्यों हो रहा है क

experience of this process क्योंकि अब जो immediate उसका नुकसान है वो उनको खुद है तो जब वो उनको खुद है तो फिर जो उसकी पूरी reasoning है फिर वो एकदम से अपनी vocabulary में भी आ जाती है उसको operationalize भी किया जाता है तो लेकिन फिर जब वो define कर दिया गया कि हम जो हैं इसको as a larger issue raise करेंगे तो एक जमा

तो उन्होंने बोला 2017-16 में हमने डिसाइड गया कि मुस्लिम डिस्कोर्ट्स को हम नैशनल डिस्कोर्ट्स का पार्ट नहीं रखें, otherwise it will polarize. So strategically speaking, it is not a decision that is not well informed. It's a strategic decision which is informed by their political theory. Political theory क्या है? Political theory यह है कि liberal, social, secular, यह जो loaded terminologies हैं, democracy, यह loaded...

जो terminologies हैं, इनके पीछे की metaphysical world view है या philosophical world view है कि इसमें इंसान का तसबुर, humanism का तसबुर, rights का तसबुर, duties का तसबुर, hierarchy का तसबुर, citizenry का तसबुर ये सब किसी न किसी philosophical assumption से आता है मतलब liberalism liberalism तो postmodern भी है, modern भी है, critical theory में भी है जब वो postmodernity में आता है तो वो absolute subjectivity की तरफ चल �

जब वो पॉजिटिविजम में रहता है या मॉडरनिजम में रहता है तो वो लिबर्टेरियन हो जाता है कि जहाँ पे आपकी एक पर्टिकुलर पर्स्पेक्टिव है कि वो क्वालिफाइज आट डाट ऑडर पर आप ठीक है आप लोगों को झेल रहे एक जगह पे है कि वहाँ

डिस्कोर्स करेंगे उसमें पार्टिसिपेट करेंगे तो वर्ल्डव्यू चेंज हो सकता है तो यह जो अजम्शंस है जो कैटेगरीज है जिससे हम बात कर रहे हैं इसमें भी बहुत सारी बातें बोल दी गई हैं कि मुसल्मानों को क्यों और कैसे एनहिलेट किया जाता है लेक

या जो technology of self-defined हुआ कि कौन है इंसान जो इस नए nation में participate कर रहा है उसका दस्तूर क्या है उसकी philosophy क्या है उस दस्तूर की अपनी जिसे कहते हैं कि contextual inheritance क्या है बट अगर हम देखें जो हमारी legacy organization है जो Muslim leadership है उनको भी कोई clarity नहीं उनको नहीं पता है कि Muslim as a subject individual है क्या आप

उन लेगेसी थेरीज को जो आजादी से पहले इमेजिन की गई इस तरहा की पॉलिटिकल रियालिटी के लिए जो उस वक्त मैनिफेस्ट नहीं हुई थी इंटेंडेड रियालिटी इस कुछ और थी उसमें अल्लामा एकबाल बोल रहे हैं, मौलाना आजाद बोल रहे हैं, उफ

उसमें जो देवबंध की position है, say for example, मुत्ताहिदा कौमियत की, वो as a political technology तो सही रही, कि बई आप अपने आपको citizenry में कैसे define करते हैं, लेकिन उसकी holism में वो defunct होगी, कि अब इसके beyond आपकी activity क्या होगी, यह आपको बता ही नहीं है, दूसरी तरफ जमात इस्लामी है, जिसने �

रेसिस्टेंस भी ला सकते हैं उसमें आप कंटेंप्रेरी मोडरनिटी से डील भी कर सकते हैं आप देख रहे हैं इस एक कॉंटरडिक्शन कि दोनों जगह पर एक्शन भी है इन एक्शन भी है लेकिन होलिजम और कंप्लीटनेस नहीं है क्या आप एजन इंडियन मुस्लिम क्या

आपको जो demand करता है as a body वो इसलिए करता है कि democracy में you are a statistical position which is necessary for that vote to be there for governance अगर वो आपको space दे देगा as a fraternity as fraternity के leader तो उसकी जो political technology वो ले कर आ रहा है वो उस space को भी change करेगा it is not about कि वो आपको बहुत जिसे कहते हैं कि बस कर दे रहे हैं कि वो आपका interaction नहीं वो इसलिए कर रहे है

पुड़ा सा भी space देंगे तो ये एक तरह का human being जो modern India में conceive होगा mainstream में जो एक alternative discourse कर पाएगा तो उसके पीछे लोग खड़े हो जाएगे असत दिन हो गई सी आप कुछ भी कह लीजिए एक form of political representation है इंडिया में जो एक जिसे कहते हैं एक regular way of politicking से हट के एक तरह का critical mass को align कर पा रह

आप उनसे disagree कीजिए, agree कीजिए, एक हजार बात है. Fraternity Movement, despite whatever we can critique, not critique about it, it is a political technology, जिसमें एक student, जो activism करना चाहरा है as a Muslim, वो engage कर सकता है उस process के साथ, जिससे वो जो public sphere है, उसमें कुछ ना कुछ contribute कर सकता है. तो दूसरा ही जो सबसे बड़ा challenge, जिसबे अक्सर मुसल्मान भी नहीं

आपकी खुद की youth organization और आपकी parent organization से conceptually aligned नहीं है चाहे वो कितना भी ज्यादा super structure की वज़े से functioning जिसे तौर पर agree करती हूँ but क्योंकि मैं closely देखता हूँ मतलब I tend to read political movements while also reading इंदुस्तान में हो क्या रहा है वो वाले part के अगर बात नहीं होगी कि भी आज की date में what is it that we need

to be able to make ourselves readily accessible to the public sphere जहांपे आपके पास इन बच्चों को जो fraternity के jail में जा रहे हैं या कहीं और पर जा रहे हैं detention में या जो Sharjeel हैं वो हैं उस जमाने में leadership ने उनको give up किया including OBC तो वो SIR जो CA में लोग निगल कर आये थे उनके जहनों में इतना डर बैट गया कि आप एक तरीके से orphan

within the constitutional framework उसके बाद भी आपकी जो leadership है आपको space नहीं देगी क्योंकि वो existing hegemonic जो structures हैं internally वो volatile हो जाएगी तो क्योंकि एक हिस्से पर आप लोग कर चुके हैं ऐसे मैं ये नहीं कह रहा हूँ कि वो हिस्सा exist नहीं करता है पर दो structures हैं तो दोनो structures पर बहुत focus करने की जरूरत है और इ

recommendation के आप ना join करें और अब भी आ गया मेरा मानना है के मैं ये नहीं गहर हूँ वो सही तैयार अलग था मेरा अपना मानना ये है के किसी एक ही protest में एक दिन ऐसा हो सकता है के आपकी justification कम हो given the context दूसरे में आपको पता जा लगता है दूसरे दिन में के माकल बदल गया है बहुत scale ह

आज भी है लेकिन उतने सॉलिड नहीं है तो उस टाइम पे पब्लिक मेमरी में जो लास्ट हमारा जो जैसे कहते हैं एंगेजमेंट रहा है CA और दूसरा फार्मर्स प्रोटेस्ट फार्मर्स प्रोटेस्ट में सरदारों ने और फार्मर्स ने पूरा एरा कर लिया है एक साल तक

मुसल्मानों को 7 साल हो गए तो वो डर रियल भी है लेकिन अगर पूरे मुसल्मान ओर्गनाइजेशन्स आज की डेट में इस लेवल पे भी जब मस्लिदे शहीद हो रही हैं लिंचिंग हो रही हैं अगर मुत्तहिद होके एक साथ बैठ के उस जैसे कहते हैं अक्टिविस्ट क

जिस तरह अली भाई ने बात की कि हमारी क्या expectation इस point पर Muslim leadership से है जब हमारी body इसको use किया जा रहा है लेकिन participation हमें leadership के level पर नहीं दिया जा रहा है and let me know if I am going in the wrong direction but क्या कोई expectation हम ये जो left liberal leadership है इससे भी रख सकते हैं कि भाई when you know

that we are there and we are giving you our presence किस तरह आप हमें protection प्रोवाइड करेंगे क्योंकि ये चीज बिलकुल missing थी need के protest में के जो FIRs हुई उस पर बहुत कमी से बात हुई तो इस तरह इस leadership को उभरने का मौका

कहीं न कहीं थोड़ा बहुत जो है हम एक्सपेक्ट कर सकते हैं कि यह लीडरशिप भी हमें वह स्पेस प्रोवाइड करेगी और वह प्रोटेक्शन गैरंटी करेगी तब हम या फिर हमारी प्रेजेंस उस तरह रिक्वाइड ही नहीं है यह हमारी चॉइस है कि हम वहां पर प्र

तो जब उन लोग ने मुझे डिटेइन किया नियर अकाश्वाणी भवन जो पार्लिमेंट से कुछ दूरी पर है तो उसमें सब सड़क पर लाठिया सबको बराबर पड़ रही थी नो अमिन डेड नो डाउटिंग लेकिन कुछ लाठिया थी जो कैमरे के पीछे पड़ रही थ

एक incident ये हुआ कि मुझे भी मारते उन्होंने बस में ढकेला तो मैं देख रहा हूँ खिड़की के बाहर से एक लड़के को वो लोग बहुत मार रहे हैं वो CJP ने अपने handle से भी वो वीडियो डाला था जहाँ एक लड़का पूरा shirtless हो गया था उसको बहुत मार रहे थे तो basically उ

बहुत मारा और फिर सेम बस में डाला जिसमें मुझे डाला था मारते हुए लेकर आया था फिर बाहर से जब उसको बहुत बुरी तरह माराओ बस के शील्ड को बनाकर बस के तक कोई कैमरा रिकॉर्ड में करें उसको फिर उसने जब मैं बैठा था फिर पुलिस वाले ने कुछ

तो उसमें मेरे एक साथी भी था तो जब वो तीन पुलिस वाले अंदर आये बाहर खीचने के लिए तो मैंने तो एक बस का रॉट पकड़ा तो दोस्त ने मेरा हाथ जो है वो जाने नहीं दिया में भार तो उस पुलिस वाले ना बस को अंदर से लॉक किया उसके बाद जो है �

वो फोन आज तक हमारे पास नहीं आया तो उसके बाद जब वो डिटेइन करते हैं, 76 साल स्ट्रेडियम ले जाते हैं I'm sorry, I'm explaining because I want to say something regarding expectations तो जब वो 76 साल स्ट्रेडियम ले जाते हैं तो वहाँ पे एक IPS level के एक officer होते हैं तो मैं उनसे जानर बात करने के लिए जाता हूँ regarding my phone मै

बालूम कीजिए तो उन्हें से सवाल कीजिए तुझे ही मारा बस के अंदर तो मैंने कहा हाँ तो क्या कर सकते है वो तुम आते ही वैसे कम्यूनिटी से सबको एक ही लाटी से हाकना पड़ता है थर्ड इंसिडेंट जब वो फिर उसके बाद मैमो वगैरह साइन ख़रा के वो ज

बात करते तो मेरे साथ तीन लड़के और थे एक आईएटी मदरास का था और एक महाराष्ट्रा से आया था नामदेड़ से तो जब मेरी बारी आई तो भाई मैंने बताया कि भाई कहां से उसमें जामिया से तो कहते तेरा तो समझ में आ रहा है तो आती ही ऐसी जंगा से है तो

opinion piece में भी मैंने mention किया. Now the point is there was no solidarity statement from anyone. You know, I'm not saying that I was expecting. I'm saying when anything happens on left, in a broader term, whether ISA का हो, ISF का हो, irrespective of their ideological differences, parliamentary left or mainstream left, एक वो निकालते है statement, solidarity.

लेकिन जब मुसल्मानों के साथ होता है, मैं बहुत मुसल्मानों के साथ हुआ। ना मैं पहला था, ना मैं आखरी हूँ, ना आखरी रहूंगा। जो उन लोग की तरफ से कभी भी इस ट्रेटमेंट नहीं आता। Because they deliberately they ignore, right? Having said this, if you see the constitutional position on this, right? The question is why? You know, ये लोग solidarity क्यों नहीं �

तो अगर मैं इसे तनवीर फजल के लिए क्योंकि किताब है तो उसमें introduction में एक word इस्तेमाल कर रहे है epistemological production of unruly margin तो basically वो ये कहना चाह रहे है कि एक ऐसा तपका है एक community है मुसल्मान जिसको ये मान लिया गया है कि ये एक socialized नहीं है law के लिए तो उनको socialized

करने के लिए जो है उनके ऊपर ये right wing forces violence करता है मारेगा लाडे मारेगा चल तू बोल भारत माता की जय यहाँ तो ये तो एक सब के साबने तो कही ना कही जो है left भी समझ रहा है ये कि हम उनके ऊपर कुछ बोलेंगे तो we will also face a setback in a larger vote bank politics right

तो कहीं ना मेरे नज़दिक, अगर वे नहीं बता रहे हैं, अगर वे शालेंट स्पेक्टेटर हैं, तो वे भी इस अर्गुमेंट के बारे में अपने अपने सोशल मार्जेंस के बारे में बात कर रहे हैं। कि ठीक है इनके साथ जो हो रहा होने दो। तो इन विशेष में मैं

एंड एडिशनल क्वेश्चन डा वांट टो आस्क यू इस कि इंडिया की फ्यूचर जो पॉलिटिकल इमेजिनेशन है उसमें एक दाड़ी रखने वाला हिजाब पहने वाली लड़की या दाड़ी रखने वाला लड़का या कोई मदरसा बैकग्राउंड से पढ़े हुए ब

और जिस तरह से हम इमेजन करते हैं एक फ्यूचर को और जिस तरह से मेंस्ट्रीम लेफ्ट या सेंटर इमेजन करती है फ्यूचर को उसमें दाड़ी टोपी रखने वाले की जगह या हिजाबी मुस्लिम की जगह शायद ना के बराबर है

और this is not a new phenomenon again, this has been something जो काफी पहले से चला आ रहा है अभी हम एक नई चीज़ में देख रहे हैं कि आज के डेट में बहुत सारे मुस्लिम नौजवान जो हैं, मुस्लिम यंग्स्टर्स जो हैं उसको question कर रहे हैं और वो एक agency की बात कर रहे हैं

वो बात कर रहा है कि मुस्लिम पॉलिटिक्स है वो जरूरी नहीं है कि आप किसी और के किसी और की एजेंसी में जाकर करें चाहे वो लेफ्ट की एजेंसी हो चाहे वो NACY हो चाहे वो you can actually build your own agency and do politics from there तो मुझे लगता है कि जब तक इस एजेंसी का consolidation नहीं होगा जब तक मुस्ल

तब तक आपकी identity के जो markers हैं वो अपने आप में बहुत problematic होंगे और उसकी कोई जगा नहीं होगी जो future imagination of politics है आपकी जहां पे आप एक progressive समाज चाते हैं जहां पे आप एक democratic समाज चाते हैं उस progressive समाज में भी उस democratic समाज में भी आपकी identity को लेकर आप पे हमेशा सवाल खड़े किय

और बुर्खे को लेकर डिबेट हैं क्या यह सेल्फ चॉइस है या पेट्रियाकली इंपोज है और किस तरह का एविल है यह तो मुझे लगता है कि कहीं ना कहीं जो इमाजिनेशन है उसमें इस तरह की आइडेंटिटी के मार्कर्स जो है और उसकी जगह नहीं अब देखिए इ

तो कहीं न कहीं उनकी identity के जो markers है वो accepted है mainstream politics में और mainstream public life में आप imagine कर सकते हैं कि एक सरदार जो है वो अपने turban के साथ liberal space में भी उनको liberal की तरह identify किया जाए progressive की तरह identify किया जाए लेकिन that cannot happen with a Muslim skull cap and that cannot happen with a Muslim hijab

तो उन सब बजाहत के वज़े से ये future में हमेशा problem रहेगी आज अगर BJP power से चली भी जाएगी कल कोई और government power में आ जाएगी तो उसमें भी जो Muslim identity है उसको कोई space नहीं मिलने वाला है

और हमने चाहे यह देखा है चाहे आप पिछली का कांग्रेस की करमेंट उठाकर देख लीजिए या कोई और गर्मेंट उठाकर देख लीजिए वहां पर जो मुस्लिम पार्टिसिपेशन भी है गर्मेंट के अंदर वह एक सोटन एलीट तप्खे का है जिन्होंने अपने आइ

उन्होंने उसको वॉलिंटरली छोड़ दिया है तो उनको अकोमेडेट कर लिया जाता है एक तपके को लेकिन जो तपका अपनी आइडेंटिटी को बरकरार रखना चाहता है और उसकी चॉइस यह होती है कि वह मुस्लिम बनकर पब्लिक स्पेस में रहे तो उसको कोई जगह न

कि अक्चुली सिट बैक एंड ब्रेइनस्टॉर्म थे टॉपिस टॉपिस मुझे लगता है कि बहुत सारी जो आज बहसें चल रही हैं आज कि कंटेंप्रेटी इंडिया में जो मुस्लमानों के एक तरह के नई तरह के आवाज देख रही है उसकी वजह से मुझे लगता है कोई

उस language का कहीं न कहीं असर पढ़ रहा है और वो प्रेशर के रूप में काम कर रहा है कि ऐसे spaces में उनको जगह मिल रही है तो मुझे लगता है कि ये जो प्रेशर है इसको तभी बढ़ाया जा सकता है जब आपकी एक political agency हो जब आपकी एक intellectual agency हो जिसको इंदुस्तान में मुसल्मान

बिल्कुल एक उस तरह से छोड़ दिया है कि they have come I think it has been mentioned several times by Asawuddin Owaisi also and other Muslim political leaders also not just Asawuddin Owaisi that Muslims have actually outsourced their politics to others and Muslims have outsourced their intellectual traditions to others तो जब तक ये चलता रहेगा

तब तक आपकी identity के हवाले से ये जो सवाल है ये बना रहेगा कि आपकी जो future imagination है democracy को लेकर आपकी जो future imagination है progressive समाच को लेकर वहाँ पे आपको रहने तो दिया जाएगा आपको रहने का हख शायद हो सकता है कि आज के मुखाबले आपकी lynching ना हो आज के मुखाबले आपको मारा �

वह ऐसे ही चलता रहेगा वहां पर आपको एक सेलेक्टिव मुस्लिम वॉइसेज होंगी जिनको पब्लिक लाइफ में पार्टिसिपेशन करने का मौखा मिलेगा और तो मुझे लगता है कि आज का जो हेजमिनिक डिस्कोर्स है पॉलिटिकल डिस्कोर्स है उसमें भी मुस्लिम

तो इस हवाले से मैं यह कहना चाहता हूँ कि जो लोग काम कर रहे हैं एक पॉलिटिकल कंसोलिडेशन की पॉलिटिकली मुसल्मानों को कंसोलिडेट करने का, कॉंशियस्नस डेवलप करने का, वो काम बहुत इंपोर्टेंट है और अगर वो काम ठीक से हो पाए और आप मुसल्म

कोई भी नई गवर्नमेंट आती है या एक future होता है तो आप bargain कर सकते हैं आप उनसे आप और politics में भी यही होता है मतलब कई बार लोग यह कहते हैं कि I am taking Asauddin OIC's name again and again because of the fact that he is the only political leader who is visibly outcasted right now

सब्सक्राइब करने की बात है तो मुझे लगता है कि ऐसे फेसेस जो हमेशा आपको किसी और

एजेंसी की बात करेंगे बोलेंगे कि आपकी अपनी आवाज होनी चाहिए आपकी अपनी वोट होनी चाहिए आप बार्गेन करने के पोजिशन में हो अब बहुत सारे लोग यह कह रहे हैं कि यूपी में जो असरदीन ओवैसी का कॉल था

और जब आप position of power के साथ किसी के साथ alliance करते हैं तो आप अपने terms पर alliance करते हैं आपकी certain demands होती हैं कि आपकी ये demands जो हैं वो meet करेगी तभी आप alliance करेंगे तभी आप किसी को support करेंगे so that is the reason why we talk about why I talk about political agency of Muslims बहुत सारे लोग ये कहते हैं कि मुसल्मानों की political agency से हो क्या जाएगा मु

और 13-14% की population है कहीं भी consolidated population नहीं है जब मुहिंद कश्मीर को छोड़के और आसाम में एक हद तक जहां आसाम में बिल्कुल खत्म हो चुके हैं despite the fact that they are geographically consolidated to an extent तो मुझे लगता है कि अगर आप कहीं किसी state में कम भी हैं अगर आप दिल्ली में 13-14% भी हैं लेकिन अगर आप 13-14%

so called secular parties के साथ bargaining के स्थिति में आते हैं bargaining के position में आते हैं और अपनी बात मनवा सकते हैं या फिर you know it's their choice if they don't want to listen to you then that's their choice if they want to form the government or not want to form the government तो कई लोग इस प्रोटेस्ट को नरेंद्र मोधी के ओजिम इंडिया मॉर्मेंट की तरह देख रहे हैं कि maybe you know in the future this is hopefully a fast race towards the end of this rule

If that is true और हमारी community अगर future action की बैठ कर एक जगह बात करें

और हम imagine करें कि कोई नई political alliance emerge करती है in place of the current government for example वो center left भी हो सकती है वो regional parties की भी alliance हो सकती है और वो जो है इंडिया block type की भी कोई चीज हो सकती है तो हर हाल में जैसे कि असद भाई ने कहा कि हम अगर negotiation की power रखते हैं तो फिर वो क्या बुन्यादी उसूल होंगे जिन पर हम negotiate करेंग

को लेकर welfare को लेकर और

कैसे ensure किया जा सकता है कि उस वक्त पर जो electoral promises होंगे उनको हम उनके इख्तिताम तक पहुचा पाएं for example UAPA के बारे में हम क्या बात करेंगे places of worship का क्या होगा political prisoners जो मुसल्मान हैं और generally जो मुसल्मानों की prison में population है उसका क्या होगा UCC का mob lynchings का इन सब पर हम बात करेंगे या फिर

पहली बात तो यह है कि 13-14 साल हो गए इस government 2014 में आई पहला सवाल तो यह है कि चाहे वो congress हो चाहे वो दूसरी समाचवादी parties हो चाहे वो left हो चाहे liberal हो चाहे वो Muslim leadership हो इस 12 साल में कोई भी positive agenda to what an India would be beyond what it is today क्या होगा even the fact after 2006 there was intense debate

that within the logic of the secular space Muslims had been marginalized तो पहली बात तो यह है कि हमने वुलामी के बाद जुल्म देखा और अब जुल्म के बाद फिर से वुलामी की तरफ भट रहे हैं क्योंकि मैं यह observe कर रहा था कि अब इन लोगों को यह अंदाजा होने लगा है कि कुछ change आ रहा है जब इनकी government आ थी मैं एकसर ब

European Peer के दूसरी जगहों का example देख रहा था कि two party या two ideology ecosystem में overall देश की politics बढ़ जाती है तो आप Republican और Democrats देखेंगे और दोनों में से किसी के पास भी material जैसे कहते हैं change का real program नहीं है मतलब जैसे कि really आप material change ला पाएं हर किसी की life में जो participate कर रहा है nation building में या जो citizen है

तो होता है कि हर दो टर्म्स में आपकी anti-incumbency आ जाती है because of those failures तो एक तो तरीका यह है कि आपकी politics positive agenda से governed हो रही हो decide हो रही हो कि आप एक तरीके का civil rights movement कर रहे हैं जैसे black lives movement है या Dalit का movement था Ambedkar के context में तो एक positive agenda है community को लेकर identity को लेकर जिसके behalf पर आप demand कर रहे हैं तो उसके लिए

theory of self होना चाहिए मतलब मैं कौन हूँ मेरा यहाँ पे क्या relation है मेरा larger समाज से क्या relation है मेरे हाँ पे जो मुफ्तलिफ world views है उनका क्या relation है तो सबसे पहली unfortunate जो बात है जिसके ऊपर सबसे पहले काम होना चाहिए क्योंकि जब आप आपस में बात नहीं कर पाएंगे तो आप state से भ

दूसरे नंबर भी यह है कि जितने भी लोग चाहे वो legacy organizations हो चाहे वो hold guard bureaucrats हो retired चाहे वो ex politicians हो इन सब लोगों ने चुटी-चुटी organizations बना ली हैं जो एक तरीखे से अपने आप गुठ में हैं और उससे वो larger जो civil society naturally emerge हो रही है उसको बाहर रखते हैं एक even जो legacy organizations हैं

उन्होंने space बना लिया, किस वजह से, क्योंकि space बनाने के लिए resources restrict हो गई, left liberal groups के बाद भी, क्योंकि majority ने तो अपना part of secularism completely give up कर दिया, तो बचा क्या, जो मुसल्मानों के पास थोड़ा बहुत पैसा था, जो organizations थी, जिनके पास कुछ resources थे, उन्होंने forums बनाया, उन forums पे अब व

जिन पे लोग आते हैं लेकिन उस पे कोई vocabulary नहीं है उल्टा जो आपकी political philosophy या आपकी theory of agency अपनी organization के आप उसको बाहर रखते हैं अब आप ये देखे के एक तरफ anti-incumbency है बिल्ड अप हो रही है which is very true मतलब थोड़ा थोड़ा ये बिल्ड अप हो रहा है के एक तरफ से वो Hindu ज

कहीं ना कहीं उसका active involvement in defense और दूसरी तरफ एक वो critical mass वो ज्यादा active हो गया है क्योंकि उसको ये दिख रहा है कि there is lot of anti-incumbency जब लोग जा रहे हैं जैसे कहते हैं elections लड़ने हो तो लोग पता लगता है अब इस बीच में हो रहा ये है कि जो ये सारी politics है जिसमें ISA है जिसमें Congress ह

सरकारी मुसलमान बिठा रहे हैं किसी वक्त हो रहा है ये सब और उस वक्त जो हमारा पूरा का पूरा रोड मैफ है वो अभी भी क्लूलेस है कि हमें क्या करना है क्योंकि जैसा इन्होंने कहा कि जब भी लेफ्ट के बीच में मैं जेनियू में रहा इतना डिफरेंस होने के बा�

या हमने conceive ही नहीं करा गिनी चुनी बातें की जाती हैं कि भई law होना चाहिए, lynching पे, hate crime पे बात होनी चाहिए, UAPA का वो नहीं होना चाहिए I mean these are the easy parts I think they are the visible and easy parts सवाल यह है कि कस्तूर में, directive principles में UCC का प्रापधान है ही क्यों आप जब constitutional logic की direction को

fundamentally, structurally एक तरफ align कर देंगे या cow protection के नाम पर या आपको body of constitution में Indian Muslim as an identity या religion as an identity जब religious deprivation है तो वो challenge क्यों? बारा साल में हमारे को जब 2007 में पता लग गया कि data एकठटा करना है where is the Muslim data? मतलब data bank की हर दो साल में एक नई चीज की demand होती है दो तीन साल मेले media वड़ा हववा था

मक्तूब जिस background से आता है जिस movement के background से आता है उससे उसको institutional support नहीं है क्यों नहीं है why does an organization like मक्तूब have to struggle हम लोग तो basically हमारा कोई background ही नहीं है तो समझ आता है ये struggle को न उन organizations के लोगों को जो इस तरहा के frameworks जो successfully काम कर रहे है think tanks

लोग यूजित आप अपना एग्जांपल ली जा सकते है you know you are one of the first people who literally built के बही mainstream perspective से बोलते वे Indian Muslim क्या कह सकता है deal breaker था what happened तो पहली बात तो यह है के we have to become a pressure group within ourselves we will have to sit together जितने भी नए formations हुए हैं सबसे बहले क्योंकि मैंने CA के बाद देखा है के एक

वही पैटर्न रिपीट हुआ लोगों ने जिससे human rights violation को एक शॉप बना दिया आप इन बंदे का पीटा गया इनके साथ फोटो खीचिये ये रो रहे हैं आप उनके सर पे हाथ रख रहे हैं और आप उतना branded gift pack दे दे दे आप उनके लिए कुछ बना रहे हैं तो आपका sticker है हर ज

आपने मुसलमानों को बिखारी बना दिया। जो इंसान टीवी पे बैठके, न्यूज रियल में जिसका यह आ गया, जहाँ वाइरल हो रही है कि इसको पैसे दिये जाते हैं सर्वाइफ करने के लिए। उसकी लोकैलिटी में उसकी इजद्ध खतर में दिया। इसलाम में यह प

जब वो आपकी activism के करने वाले सबसे बड़े चेहरों में वो will वो morality completely खतम हो जाए तो आप क्या demand करेंगे दूसर से जिसका मतलब ये नहीं है कि demand खतम हो जाएगी इसका मतलब ये नहीं है इसका मतलब ये है कि वो तो खुद morally defunct है कि जो बोल रहा है कि मैं liberal हूँ और मुझे य

ये वाला लिबरल बुरा था अब मैं हूँ हर दस साल में पहले कोई तीस्ता से तलवार थी अब मुसल्मान भी उस occupation में लग गए हैं but the question is कि why is there a moral deficiency in the production of resistance जो रोग resist कर रहे हैं उनकी अगर morality और उनकी अगर आप जिसे कह सकते हैं कि उनके बारे में जो उनके अखलाग हैं

या उनका style of operation है अगर आप उसमें जिसे कहते हैं problem पाएंगे तो यही हुआ ना पहले जो हमारे leaders हैं जिनको हम elite बोलते हैं उनमें बहुत सारे लोग elite नहीं भी थे they rose from their own subjective experiences अपने movements है तो मिजे जो understanding है जितना भी मैंने 4-5 साल देखा है काम किया है जो malice है ना वो state से भी ज्या

उसकी लीडरशिप का क्राइसिस है लीडर है ही नहीं हम बेट कर एक अकेला दलित समाज को SCST राइट्स उस जमाने में जिस जमाने में दलित डिस्कोर्स ही नहीं था मतलब non-existent discourse था एक अकेला आदमी with all the other people के गांधी को भी हरिजन की category को invent करना पड़ा क्योंकि उसको ये लग

कि अगर वो किसी organization में fit नहीं हो रहे हैं तो जो हम ये बात बोल रहे हैं कि हमें वो लोग space नहीं देते हैं आपको आपके लोग space नहीं देते हैं ये तो हमारा privilege है कि हम लोग इस तरह का entity बना पाए चला पाए 99% of the activists मैंने ऐसे भी देखे हैं कि activists पहले भी ये बात हुई है कि व

अब जब resistance एक वो बन गया, form बन गया, तो academic में अगर focus कर भी रहे होते, तो भी वो जो लिखना चाहते हैं, वो लिखने नहीं दिया जा रहा है. तो ये एक circular position है, कि जिसमें जो Muslim political life है, जिसके अंदर अब ताकत बची भी है, उसको community भी fail कर रही है, erase कर रही है, और उसको ये भ

उनसे सवाल करें, दो साल पहले वक्स के ऊपर चीज़े हुई थी, हम लोगों ने बारा वीडियोस करें, हमने बोला मस्जिते शहीद होंगी, लिखवा के ले लीजे, क्योंकि आपका हिंदु राइट की पे नजर ही नहीं है, आप ये जानी नहीं रहे हैं कि रंगनाथन क्या �

पूरा microcosm में बदल दिया, अब चले जाया, सरकार, तो क्या वो churning चलती नहीं रही, क्या वो वापस नहीं आएंगे, so it's a deep philosophical crisis, we should organize first among ourselves, try to conceive an ideal, where is the think times, where are the media houses, where is the negotiation between, यह सवाल कब अधीप साथ से पूछा जाएगा, कि आपने यह जो 50 की leadership को तैकिया है, उसमें young लोग कितने ह

किस behalf पे आपने उनको choose किया उनकी क्या achievements है पिछले 50 साल में जिसको गिनवा के आप ये बोल सके ये आपकी क्या achievement है आपने ऐसा क्या बनाया है जो sustain कर रहा है या मुशावरत के leaders उसमें क्या कर रहे है या milly council के leaders उसमें क्या कर रहे है या jamaat के leaders उसमें क्या कर रहे है where is the new Indian Muslim को

जो लोग करने को देखने के लिए जो लोग करने को देखने

आप कॉल दे दीजिये वहाँ पे वक्ष के प्रोटेस्ट में 50 लोग आभी खट्टे नहीं कर पा रहे हैं और आधी मुसल्मानों को ये लग गया कि हो गया प्रोटेस्ट खतम एनर्जी खतम कर दे रहे हैं आप लिटरली देखिया कॉम की एनर्जी जाया कर दे रहे हैं दूसर

बहुत इंपोर्टेंट है कि जो ओल्ड लीडरशिप थी जो लेगेसी लीडरशिप थी मुसल्मानों के बीच में पहले तो उनका असेस्टमेंट करने की जरूरत है कि अगर 70 साल से आप लीडरशिप में थे तो आपने किया किया और आज जो इस कंडेशन मुस्लिम्स हैं जिस �

तो इफ यू वर फेलियर देन वीडिंग टू रीथिंग वीडिंग टू रीथिंग बाउट डिपॉलिटिक्स थैंक यू हव डन सो फार एंड वीडिंग टू अंदर और बिल्कुल बिल्कुल तो मुझे लगता है कि जिस तरह से फिर हम आप बोल रहे थे कि लेगसी वाले लो

तो मुझे लगता है कि ऐसे टाइम में important है कि हम इन लोगों को identify करें उनके बारे में बात करें और at the same time हम उन पे सवाल खड़े करें कि आपने किया किया community के लिए तो ये सब सवाल community के अंदर ही होगा मतलब I think don't think non-Muslims have to do anything with this

this is something that we have to do within the community that if you have to expose some, not expose is not the right word, but then if you have to make someone accountable, you have to bring that person in front of the community and ask them that what have you done? अगर आप majority में हैं, आपकी ऊपर है सारी जिम्मेदारी, आप मोदी से demand कर रहे हैं, तो आपका मोदी कौन है, आप यह insight की सकते हैं?

बिलकुल बिलकुल तो ये बहुत important point आपने रखा है मैं आपकी speech देख रही थी जो भी आपने JNU में दी या talk जो आपने JNU में दी उसमें आप कह रहे हैं कि मुसल्मान जब भी इस तरह के activism में निकलते हैं बाहर तो वो एक existential crisis

कि अगर सिचुएशन होती है तो ही निकलते हैं कोई डिवेलपमेंटल डिस्कोर्स नहीं है मुसलमानों के पास या अगर है भी तो जब भी वह उसका जिकर करते हैं तो उन्हें एक सब्सक्राइब की नजर से देखा जाता है कि इसमें इसका पॉलिटिकल एजेंडा और इसका �

या फिर एक ब्रॉडर डिवेलपमेंट ऑफ इंडिया एक तो प्रॉब्लम हमारे कम्यूनिटी में भी यह है कि हम इमिडिएट फिर स्टीक है मतलब इमिडिएट फिर है हमारे उससे रिस्पॉंड करना है हमें अगर लेंचिंग हो रही है तो वह एक इमिडिएट फिर है हमारा

communal violence क्यों हो रहे हैं, उसके structural problems क्या है, और जहां तक हम mobilize करने की बात कर रहा, जहां तक मैं mobilize करने की बात कर रहा था, कि generally लोग ऐसे सवालों पे mobilize हो जाते हैं, जो immediate questions होते हैं, जो हाँ पे आपका existential crisis हो जाता है, उस पे mobilize हो जाते हैं, उस पे लोग पैसा देते हैं, लेकिन लोगो

मोबिलाइज करना पड़ेगा रिसोर्स थैंक टाइम को खड़े करने के लिए आपको मोबिलाइज मोबिलाइज करना पड़ेगा रिसोर्स लीडरशिप को खड़ा करने के लिए और यह सब चीजें जो है लोग शायद इमीडिएट क्राइसिस का पार्ट नहीं देखते हैं और

आप पुरानी दिल्ली में रहें, आप आराम से रहें, खाते पीते रहें, आपको कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए, मतलब as long as you are happy with that, you are okay, लेकिन आपकी security पे सवाल ना आना चाहिए, security पे सवाल आ गया, तो फिर ठीक है, आप थोड़ा बहुत mobilize करोगे, लेकिन I think we have to look beyond it, now it

सब्सक्राइब करने के जरूरत है ना ही और कहीं ना कहीं हम यह देखते हैं कि हमारी सॉलिडारिटी भी जो है जो सॉलिडारिटी में लोग खड़े होते हैं वह लिंचिंग अगर होगी तो कुछ लोग आ जाएंगे आपके साथ खड़े होने के लिए लेकिन अगर आप कल जाक

उसके खिलाब बोलने के लिए आप अकेले पड़ जाएंगे, अभी JNU में जब मैं बात ही कर रहा था, वो recorded नहीं है, लेकिन last में सब लोग कुछ structural, ना उसके हवाले से ही किसी ने सवाल पूछा था, कि ना उस structural problems की बात करता है, मुसल्मानों की, जिसके वज़े से मुसल्मान

और उसके अलावा SIR एक problem है ये सब structural problems है लेकिन मैंने कहा कि 1950 presidential order अपने आप में सबसे बड़ा structural problem है क्योंकि वो आपकी right to religion को आप छील लेता है

तो आपका जो राइट टू रिलिजिन है जो आपका चॉइस फ्रीडम ऑफ रिलिजिन है अगर आप दलित है और आप मुसलमान हो जाएंगे तो क्या आपकी आपकी बैकवर्डनेस ऑटोमेटिकली चली जाएगी और क्या आप अभी तो आप खुद भी आइडेंटिफाई कर र

लेकिन that is not that is not the reality the reality is that there is caste system within Muslims too and we need to address that question as well we need to think about that too तो ये 1950 presidential order एक बहुत बड़ा structural problem है जिसके around हमें बात करनी चाहिए और जिसके around हमें mobilize करना चाहिए पहले लोगों ने कोशिश की है

डॉक्टर अजाज अली ने भी कोशिश की है, और भी लोगों ने भी कोशिश की है, लेकिन मुझे लगता है कि हमें और भी ज़्यादा बात करने की, यह बहुत बड़ी जड़ है, 1950 presidential order, actually बहुत सारे चीजों का जड़ है, जिसके वज़े से बहुत सारी problems हैं, तो जब तक हम इ

मुस्लिम प्लिटिकल लीडरशिप और मुस्लिम रिलिजिस लीडरशिप दोनों का क्या रोल रहेगा कि एक जो इमीडियट एग्जिस्टेंशियल थ्रेट्स की वजह से जो हम मोबिलाइज करते हैं वर्सिस टो मोबिलाइज अराउंड अदर डेवेलपमेंटल इश्यूस नही

अब ये वो बात हो गई कि बहुत दिनों से ISA, SFI ये बोला जा रहा है कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट कर रहे थे, CJP या Fraternity जा रही है वो, फिर जा रहे थे वो जा रहे। Congress ने एक प्रोटेस्ट किया, इंडिया ब्लॉक ने, तो आप उसकी माइट देखिये। तो पहली बात

नए जो leaders form हुए पिछले कई सालों में he has made congress a certain kind of a political entity where he could consume a lot of new energy and give them shape and direction as opposed to others so that kind of thing happens needs to happen here problem with Rahul Gandhi is that he is not radical enough मतलब जो एक kind of radical understanding

इंडिया as a पॉलिटिकी चाहिए, जो गांधी में थी, नेहरू में थी, despite our disagreements with them, they were massive mobilizers, और वो categories of belief को ही बदल देते थे, especially गांधी, you can criticize him all much, जितना आप चाहें, लेकिन he was a genius of a thinker, that he could conceive categories for others, खिलाफत movement में जोड़ दिया, तो non-cooperation को, तो Muslim को साथ ले लिया, Harijan question raised, सब में problem �

अगर राहुल गांधी भी मैं देखता हूँ कि दलित कम्यूनिटी से बहुत राडिकल लोग कांग्रेस चले जा रहे हैं

वो तो राहुल गांधी को पता भी नहीं होगा कि something like this is happening within the Muslim community तो it's not राहुल गांधी's fault as much as it is the fault of the community leaders तो सबसे बड़ा challenge तो यह है कि जैसे आपने पहले बोला था कि आपकी Muslim masses पे कोई पकड़ ही नहीं है

तो वो जो Muslim leadership है जैसे development का discourse है दिखे मैंने भी ठीक ठाक पढ़ा है चीज़ों को philosophy, politics, economics रागरण भी रागरण भी रागरण बाकी सारी चीज़ें भी अलफादल अम्दुल्ला बहुत पढ़ने है देख रहा है बहुत सारी चीज़ें आपने बहुत पढ़ा है मैंने इतना पढ

सेकेंड मैं अपने वालिस साफ का केस देखा है मैंने मतलब I have not seen a more original thinker after 1947 than him प्रॉफर जावेज जमील I am not celebrating him because of he is being my father उनके और मेरे इतना जगड़ा रहता ideological के भी वो हमारी एक एक महीना भी बात नहीं होती कई बार ideas के ओपर I am saying that on screen so that people do not misconceive this and I know he is an incomplete thinker जैसे all of us are but the point is what is the value

I think he is the first person who could really use Islam as a discourse while positively constructing a demand जैसे Muslim vision में था अब इस ज़कात है, wealth inequality है अच्छा तो wealth tax है तो उस literature को अच्छा for example आपका पूरा का पूरा मान लीजिए जो सबसादा violence हो रहा है जो औरतों के ऊपर मर्थ कर रहा है बहुत स्यादा उसमें बहुत सादा alcohol का involvement है तो आप उस आप अपनी

आप एक जिसे कहते हैं ऐसे impact पे जो generally सबको परिशान कर रहा है और उसमें आप एक policy intervention को imagine कर पाएं that has not happened what has not happened is क्योंकि आपको लग रहा है कि Islam ये problem ही solve नहीं कर सकता है तो ये मतलब you have given on the idea that your belief has the potential तो फिर आप follow क्यों कर रहे हो गए why are you a Muslim अगर आपके अंदर वो capacity ही नहीं है

ये claim करने की कि मैं universal claim कर सकता हूँ गांधी despite being coming from a hierarchical structure की society को he could conceive a non-hierarchy in a certain fashion and manner that required a certain kind of intellectual exercise इकबाल मुझे फैसल देवशी के साथ क्योंकि मेरा podcast था I came to know for the first time because I was looking for anti-caste thinkers इकबाल he is an anti-caste thinker but elites ने उसको शायर बना के

और पाकिस्तान ने उसको फादर ऑफ नेशन बना के जो उनकी रियल राडिकल थॉट है मुस्लिम एजेंसी की खुदी की और उसमें हायरार्कीस को कैसे उत्सा भी रेस कर दिया तो वो जो पॉजिटिव अजेंडा है वो होनी नहीं सकता वो भी स्ट्रक्चरल इश्यू है वो �

मुत्ताहिदा कौमियत unfortunately that kind of ambitious intellectual thinking which can lead to positive programs in relation with the other is not happening और ऐसा नहीं है कि हुआ नहीं है मतलब I have you know told about Dr. Jamil and I come from that legacy in a sense of reading भरा पड़ा है but because of the hegemony space नहीं दुनिया भर के institutions सबने खोल रखे हैं Islamic research के नाम पे पैसा भी जा रहा है media houses भी खुले रहे हैं

कोई production नहीं हो रहा है जिसको आप value बोल सके वो पैसा किसका है और for what end इसका जवाब कौन देगा ऐसे हजार होंगे जावेज जमील्स जो क्योंकि मैं बेटा हूँ तो मुझे पता है लेकिन चलते फिरते आप लोग मिलने लगे हैं कि जिन्होंने अपनी जिंदगी लगा दी अ

there is going to be a change sooner or later. आपको अगर अब जुन्द से वापिस घुलामी नहीं जाना है, वही सच्चर कमिटी एरा, वही घुर्बत, बस सेक्योरिटी के नाम पे वो, आपके पास अगर इदारे और इंस्टिटूशन्स नहीं होगे, जो ambitiously conceive कर सकें, आपकी engagement state के साथ, या दूसरे मुक्त

तो उनसे सवाल शुड़ बी मोस्ट इंपोर्टन प्रायरिटी वाइल आस्किंग इन लोगों को इसका मतलब इन्हें छोड़ना नहीं है कि हमारे इनसे भी आपको रेप्रेजेंटेशन की बात करेंगे हमें क्यों नहीं ये डबल डबल लड़ाई है सिंगल पे अगर आप छो�

अगला सवाल मेरा आपसे यही था कि आप चुके फ्रेटरनिटी के सेकरेटरी हैं तो आप किस तरह देखते हैं कि कैसे जैसे सीए के दौरान मुस्लिम लीडरशिप यंग मुस्लिम लीडरशिप इमर्ज हुई जो कि अब खत्म कर दी गई है सिस्टेमाटिकली वह दुबारा कै

पर्टिकुलर मोमेंट इन टाइम है हमारे पास जो बहुत ही अक्टिव है जहां पर पॉलिटिक्स और आइडियास का एक्सचेंज हो रहा है और एक बहुत अच्छा चेंज का एट्मस्फियर और स्पेस नजर आ रही है कुछ होपफुल हो रहे हैं लोग

तो फिर इसमें लीडरशिप कैसे मर्च करेगी उसके स्ट्रेटीजिक स्टेप्स क्या होंगे किस तरह से और लोगों को आप जोड़ेंगे कोलीशन बिल्डिंग कैसे होगी और फ्रेटरनिटी दूसरी ऑग्नाइजेशंस के साथ कैसे कोलाबरेट करेगा और इसमें सपोर्ट �

उसमें जो आपने सवाल किया उसके जवाब में एक हमारी understanding जो developed मेरी personal understanding जो developed हुई यहां तक ये situation कैसे आई तो I mean on a very broad canvas you know I mean why the Muslim organic Muslim leadership I mean not mainstream Muslim leadership since 1950s

एक ऑर्गैनिक मुस्लिम लिडरशिप है ग्राउंड पे वो कुछ लिडरशिप 1950s में भी रही होगी जिसका अन्दागा हमें नहीं है और जिनको रिकॉर्डेड भी नहीं किया गया होगा आर्काईलन तो वो क्यों नहीं हुआ और

हो सकता है उस टाइम की भी पॉलिटिक हो उस टाइम की पॉलिटिक जो है इस्पेशली फिर सीधा कॉंग्रेस पॉलिटिक उस टाइम का भी जो हम लोग ने स्कूल में अंसियाटिक किताबे पढ़ी वह बेसिकली कॉंग्रेस हिस्ट्री नेशनल मुवमेंट जो पढ़ रहे हैं

ने फातिमा शेख हमने नहीं पढ़ा एट लिस्ट मैंने नहीं पढ़ा एंसीआटी किताबों में तो मैं क्यों कह रहा हूं क्योंकि एक तो लार्जर अब अब आर्ग्यूमेंट आता है कि ठीक है इसे हम इंडिपेंडेंस नहीं बोलते ट्रांसफर ऑफ पावर है क्लास स्ट्र

डेवलपमेंट के स्टेज पर कुदा है विदाउट फेसिंग एनी रेवोलूशन राइट एम एन 47 एंड एल एमिन फॉर्टी सर्टी एमिन इसे नॉट रेवोलूशन विच आप से वेन यू कंप्लेट फ्रेंच रेवोलूशन रशन उस तरीके का रेवोलूशन हिंदुस्तान

है तो वह एक काफी इलीट तरीके से डिफाइंड है और इसको प्रैक्टिस किया गया जरूर हम पर हिंदुस्तान जो है महरू बोल रहा है फॉरन फिफ्टीज में सिक्सटीज में कि अब डैम्स आर आदम मॉडर्न टेंपल ऑफ इंडिया राइट तो वह जो मॉडर्निटी है �

तो वह जो नीचे से आवाज आ रही है सबॉर्टन वॉयस्ट है उसमें भी काफी कंटेस्टेशन है कि सबॉर्टन किसे कहते है किसे नहीं कहते तो उसमें यह हमारा जो मुस्लिम इंटरेक्शन जो है जो इग्नोर हुआ है उसकी बहुत बड़ी वजह यह भी रही है कि हिंदु

इसलिए शर्जील ने अभी प्रिजन से लिखा कि I derive my optimism from my faith तो बहुत से लिबरल और लेफ्ट लोगों को बात सही नहीं लगी वो आगेन that is constitutional democracy जो हमने already discuss कर लिया है इसमें Now way forward is let's consider SIR protest जो अभी चल रहा है

तो हम लोग देख रहे हैं कि हमारी तरफ से भी उसका participant काफी अच्छे तरीके से हुआ ये वो जो अली जावेद भाई कह रहे थे regarding Muslim organization, Jamaat-e-Islami, Jammat-ul-Bahim, there are many more organizations हमारा अभी ये immediate role ये होना चाहिए कि how to decentralize this protest for example Delhi तो for example APCR का report है उसमें Okhla is the second most affected region in SIR

तो यहां के लोगों को मोबिलाइस कैसे किया जाएं मुसल्मानों को एक तो जो पोटकाइस शुरुआत में सबाल निकल के आ रहा है कि एक डर है मुस्लिम कमिनिटी बीच में कि आप प्रोटेस्ट जॉइन करें ना करें तो इस डर की सबसे बड़ी वजह यह है कि ये तनजीमे

अभी way forward इसको अभी भी chance है SIR जो हो रहा है can we organize SIR protest in Okhla in Shaheen Bagh you know can we say it openly that now we want to build Shaheen Bagh 2.0 in context of constitutional rights right so वो इस broader SIR protest जो हो रहा है वो जंतर मंतर Central Delhi से हटा के

हिजाब के रिलेट इश्यूज आ रहे हैं स्कूल से कॉलेजेस से कोई नमास पढ़ रहा है किसी कोने में कॉलेज की बिल्डिंग में तो वहां इशूट किया रहा है हाउ डो कॉंटर दिस सो आवर अमिन व्हाट वी आ थिंकिंग इस टू स्टार्ट एक कैंपेइन अराम टू �

तो एक anti-stomaphobic cell is a need of an hour to set up in schools and educational institutions. So, these are the two way forward. Now, I mean, regarding, I mean, I'm totally agreement with Alibhai, you know.

जब शाहिन बाग हुआ यहां पर यू नो डेट वर्ड बेस्ट टाइम टू यू नो अब ग्रूम ड ऑर्गेनिक लिडरशिप फ्रॉम द ग्राउंड यू नो फॉर एग्जांपल ऑर्गेनिक जो ग्रामशी बोल रहा है अब इन ऑर्गेनिक इंटेलेक्ट्यूअल ऑर्गेनि

शाइन बाग में तो एक साहब आते हैं अब एक खेले पर बहुत सारा बिर्यानी का देख रहता है तो वह कैसे भाई यह हमारे तरफ से जो है यह कंट्रीब्यूशन प्रोटेस्ट साइट के लिए आत्र आत्र खाना मारी तरफ से तो वहां के जो लड़के बैठे हैं और उन्हो

अगर हम चले, मतलब मेरे लिए कोई भी हो, so, I mean, I am just broadly speaking what Ali Bhai has said. No, it is the way forward is to organize the Muslim organizations. You know, that is the need of an hour. वो हम लोग बोलते हैं कि, भाई, Congress के अंदर internal democracy नहीं है, फलाने के अंदर, Muslim organization के अंदर internal democracy नहीं है. You know, I mean, I am not pointing out any particular organization, but,

कि आपके पास कुछ wealth है आप उसको एक वक्त करते हैं community के लिए अब वो community के लिए वक्त हुआ है तो आप हमें खुद बताइए उसमें community का कितना फैदा हुआ है I am not blaming the Muslim community directly but I have to because there is corruption right उसमें now these people I mean उन्होंने देखा है corruption है तो उन्होंने मौका चाहिए है तो अब आपने खुला

ब्रिल्यन्ट रिसर्चर्स बड़ देर एम दे है ब्रिल्यन्ट प्रोजेक्ट्स इन देर माइंड यू नो बड़ दे डू नॉट हव एनी यू नो बैक ऐम इन सपोर्ट सिस्टम टू टू टू बिल्ड संथिंग लाइक दाइट यू नो तो आप हर चीज को ऐसा यार से प्रो

इसी तरह आपकी जो student organization है सारी चीज़ में इस पूरे protest में मैंने the kind of organizational interaction they have with each other or the kind of minimum common ground to come on to protest

I think that is not even visible in young Muslim organizations and young Muslim initiatives. That is the point I made a few hours ago. जब हमीं ओर्गनाइज़ नहीं हो रहे हैं, ये तो बड़े लोग हैं, जिनकी बड़ी अना है, एगो है. आप समझ रहे हैं, इतनी बड़ी है, अगर आप और हमीं ओर्गनाइज़ नहीं हो रहे हैं, तो I am sorry to say the burden on us. मैं हमेशा ये बोलता हू

और उस movement में वो भी revolutionary थे, तो आज भी लोग जो movement से निकले हैं, वो भी यही बन रहे हैं, that is what I see, there is no difference generationally, सिवाई वो जो गिने चुने लोग हैं, वो पिछली generation में भी थे, जो अच्छे लोग हैं, वो marginalize हो जाते हैं, वो इस generation में भी हैं, तो अगर हम लोग organize, पिछली generation में भी

कि वे नौट रेडी टू सिट ऑन दे टेबल एम टेलिंग यू फी स्टार्ट सिटिंग ऑन दे टेबल अंदर वाले घर भी कभरा जाएंगे कि वे ऑर्गनाइजिंग अमंक्स देंसेल और आज की रेट में अल्हम्दुलिल्लाह नई ऑर्गनाइजेशंस के पास कितनी रिसोर्

अगर हमने कर दिया तो we will become the third front within the Muslim community and really become a pressure group here.

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