Nous Podcast· 11 May 2026· 2:27:37

Why political parties are more chaotic than you think? | Waqar Usmani on Indian Elections

In the backdrop of changing nature of political leadership, student activism, Muslim identity, and electoral politics in contemporary India, Waqar Usmani explores what political consultancy technically does behind election campaigns — from voter behaviour analysis and constituency management to n…

Full Transcript

पार्टी अगर सब कुछ एक क्लासरूम की तरह डिसिप्लिन करने का एक पूरा कोड ऑफ कंटेंट बना दे तो पार्टी नहीं रहेगी। पार्टी का जो थ्रिल है ना पार्टी की जो वर्किंग फिलॉसफी है कॉन्फ्लिक्ट है केओस है। हाउ रेलेवेंट इज एएमयू जामिया और अदर इंस्टीटशंस? आई एम टॉकिंग इन सेंस ऑफ मुस्लिम पॉलिटिक्स? बीजेपी की जो आइडियोलॉजिकल परसेप्शन है वो बेस परसेप्शन है। जी अभी आप कांग्रेस का नहीं कह सकते कि आजादी को मिले बहुत जमाना हो गया। आई वुड वांट टू शिफ्ट द गिय्स एंड ट्राई टू अंडरस्टैंड मुस्लिम पॉलिटिक्स इन इंडिया। व्हेन आई एम टॉकिंग अबाउट रिकॉन्फ़िगरेशन ऑफ मुस्लिम आइडेंटिटी एंड मुस्लिम पॉलिटिक्स इट शुड गो बैक टू कॉन्सिट्यूएंसी। इट शुड गो बैक टू वार्ड्स। कितना कंट्रीब्यूट करती है स्टूडेंट पॉलिटिक्स? नेशनल लेवल इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में। जेएनयू में जो भी हुआ जिसकी वजह से बहुत सारी लीडरशिप निकली। जी और कुछ एक्टिविस्ट के जुमरे में ही रह गए हम और कुछ पिटिकल लीडरशिप में चले गए। मैं कन्हैया जी की बात कर रहा हूं। लेट अस लुक एट एआईएमआईएम बिकॉज़ एक मॉडल जो एकिस्टिंग मॉडल जो हमारे सामने है वो ये है। इशू इज हु इज डिफाइनिंग आवर आइडेंटिटी क्वेश्चन एंड पॉलिटिक्स अराउंड इट? हु इज सेटिंग द डिस्कोर्स अराउंड इट? व्हाट इज इट एक्चुअली दैट पॉलिटिकल कंसलटेंसी डस टेक्निकली स्पीकिंग? आज हमारे सामने मिस्टर वकार उस्मानी हैं। वकार उस्मानी साहब फाउंडर और हेड हैं ओथमैन एडवाइज़री के। इनको 10 साल से ज्यादा का तजुर्बा है पॉलिटिकल कंसल्टिंग में। 6 साल से ज्यादा वकार उस्मानी साहब जो है वो इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी आईपैक के साथ काम कर चुके हैं। 2021 के वेस्ट बंगाल इलेक्शंस में वकार साहब स्टेट हेड थे पॉलिटिकल इंटेलिजेंस यूनिट के आईपैक के और पिछले चार साल से वो ओथमैन एडवाइज़री को शेप कर रहे हैं अलोंग विद एसोसिएट डायरेक्टर मिस्टर मोइन काजी। बहुत शुक्रिया मिस्टर वकार उस्मानी। थैंक यू वेरी मच। थैंक्स अ लॉट फॉर इनवाइटिंग मी हियर। आप स्टूडेंट पॉलिटिक्स में अलीगढ़ में पार्ट रहे। आपने देखा है उसको तो जाहिर सी बात है आप करीब से बहुत करीब से देखा है। इसके बाद क्या होता है? आई वास एसोसिएटेड विथ आईपैक फॉर अ लॉन्ग टाइम। माय लास्ट इलेक्शन वाज़ 202 वेस्ट बंगाल असेंबली इलेक्शन। तो उस वक्त के कुछ आपको बातें बताता हूं या आप या फिर जनरली वहां से चीजें उठाते हैं। तो बेसिकली आपने कहा कि ये मोटिवेशन कैसे बना रहता है? इतना डिस्टेंस है। इतना एक लेवल का मतलब रैंक इन फाइल है। ठीक है? तो लोगों का नीचे कैसे इतना तो देखिए बेसिकली जैसे मैंने कहा कि पार्टीज को फंक्शन कराने में एक लेवल का परसेप्शन गेम होता है। अच्छा और वो परसेप्शन एक तो ये होता है कि इलेक्शन टाइम का परसेप्शन मैं उसकी बात नहीं कर रहा हूं। मैं बात कर रहा हूं कि जो पूरा पार्टीज का पार्टी का जो आइडियोलॉजिकल फ्रेम होता है उसका एक कंटीन्यूअस उसके अंदर चर्निंग चलती रहती है। हम ठीक है? चर्निंग का मतलब मेरा मकसद ये है बताने का कि अपने आप को रेलेवेंट रखना। हम उस परसेप्शन गेम में तरह-तरह के जो है वैलराइजेशन कांसेप्ट होते हैं। तो वैलराइजेशन कांसेप्ट का मतलब ये होता है कि पार्टी के साथ कोई भी कार्डर एकदम निचले स्तर का जो पार्टी का फूड सोल्जर है वो कैसे कनेक्टेड फील करेगा? तो उसको कुछ फिलर चाहिए। जी। उसको कुछ बातें चाहिए। हम बिल्कुल साधारण सी हम जिससे जो उसको जोड़ के रख सके। तो ये कंटीन्यूअसली अगर आप देखेंगे ना किसी भी पार्टी का तो अगर आप टॉप लीडरशिप को उठाएंगे तो उनके रिटोरिक्स में आपको मिलेगा। बेसिकली जब वो रिटोरिकल होते हैं कुछ बातें करते हैं तो आपको लगता है कि यार यह कितनी इनसेन और कितनी साधारण सी बात है क्योंकि वो बहुत बड़े लेवल पे लोगों को नीचे जो है कनेक्ट कर रही है। आप इस चीज को समझिएगा। जैसे आप थराइज़ करते हो इंटेलेक्चुअल मतलब इंटेलेक्चुअली चीजों को प्रपोज करते हो तो लीडर्स जो होते हैं उनका काम जो होता है वो जो कनेक्ट डेवलप करना और कंटीन्यूअसली उसको मेंटेन करके रखना सस्टेन करके रखना हम वो एक एक ऐसा एफर्ट है जिसमें जिसमें इस तरह की रिटोरिक्स इस्तेमाल होती है तो आपने जैसा कहा ना कि ये कनेक्शन कैसे इतना बना रहता है तो एक तो आइडियोलॉजी मैंने बताया लेकिन आइडियोलॉजी एक ऐसी चीज है यू कैन नॉट फीड एवरीडे। हम ठीक है? अगर वो प्रैक्टिस में आ गया है यू नो सम फाइन फाइनल नसेस कि जो उनको पता है कि यू नो दीज़ आर द एक्टिविटी रिफ्लेक्शन आईडियोलॉजी का पार्टी के अ जिसमें पार्टी बिल्ड करती है, बेस करती है। उसके अलावा आपको वो रिटोरिक्स का इस्तेमाल करना पड़ता है। एंड आई वुड नॉट आई विल नॉट टॉक अबाउट इट। आप अक्सर देखते रहते हैं। बीट समाजवादी पार्टी बीट टीएमसी बीट बीजेपी की टॉप लीडरशिप कुछ इस तरह की बहुत ही नॉर्मल से चीजों को रिटोरिक करती है और वो न्यूज़ बनती है एंड दैट इज नॉट आई मीन दैट यू विल सर्टेनली नो ओके एंड यू विल मे बी लोड सम टाइम बट बट दैट इज यू नो दैट हैज़ सर्टेन एजेंडा अह टू परकुलेट विद विथ सर्टेन एट सर्टेन लेवल और कुछ लोगों के लिए मतलब कुछ लोगों के लिए बहुत बड़े लोगों के लिए वो गाइडेड होता है तो एक तो ये है दूसरी चीज मैं बताना चाहूंगा इसमें ऐड करना चाहूंगा कि जो पार्टीज का जब सिस्टम बनता है तो सिस्टम में जैसे मैंने पहले भी अभी आपको बताया है कि पार्टीज जो होती हैं उसमें सेंट्रल कमांड के अलावा जो उनका आइडियोलॉजिकल कोर होता है या फिर आप जिनको कहते हैं कि ये तो कमिटेड आइडियोलॉग हैं। जी ये लीडरशिप है। नीचे ना अह अगर आप जाओगे ना कॉन्स्टिट्यूएंसी लेवल पे या पार्लियामेंट्री कॉन्स्टिट्यूएंसी लेवल पे इलेक्शन के टाइम में ज़्यादा दिखता है हमें क्योंकि हम इलेक्शन साइकिल को ही डेमोक्रेसी का सबसे मतलब ये बड़ा इवेंट है। ठीक है? हम प्रोसेस के डेमोक्रेसी के बारे में [गला साफ़ करने की आवाज़] डिस्कस कम ही करते हैं। तो इस इवेंट को भी अगर आप देखोगे ना तो जो आइडियोलॉग होते हैं अह वो एक लेवल पे मतलब एक लिमिटेड बैंड होता है उनका। बाकी नीचे कॉन्स्टिट्यूएंसी पे या पार्लियामेंट्री कॉन्स या असेंबली का कॉन्स्टिट्यूएंसी पे बड़ा प्रगमेटिक अप्रोच होता है कि कौन बनेगा यू नो आई मीन जैसे कि मैंने कहा कि पार्टी बनती कैसे है उसमें आ जाएगा वो जो आपका सवाल था पहला कि कैसे लोग कनेक्टेड रहते हैं तो मैंने जैसे कहा था कि बहुत प्रगमेटिक होता है इसका कोई बहुत स्ट्रिक्ट रूल नहीं है जैसे मैं आपको एग्जांपल दे सकता हूं यू कैन गो बाय द डेटा कि अगर जनरली समाजवादी वादी पार्टी अभी इलेक्शन आएंगे तो टिकट का बांटेगी तो क्या सारे सोशलिस्ट लोगों को देगी या सारे मे बी मुलायम सिंह यादव जी से जो कमिटेड रहे हैं ओल्ड गार्ड उनको देगी सो आई मीन उसके आगे मैं नहीं जाऊंगा। मेरे कहने का मतलब यह है कि एक बहुत ही प्रगमेटिक फ्रेमवर्क होता है जिसमें चीजें जो होती हैं सिर्फ यही मेरिट बेस नहीं होती है बेस नहीं होता है कि आप आइडियोलॉजिकली कमिटेड हैं बीजेपी के लिए या समाजवादी पार्टी के लिए आप उस कॉन्स्टिट्यूएंसी में कितने बेहतर तरीके से कॉन्स्टिट्यूएंसी की डेमोग्राफी जो है उसकी रियलिटी से अलाइन कर रहे हो। अच्छा दूसरी चीज यह है कि जो पावर रिलेशन है, पावर स्ट्रक्चर्स है उसके साथ कितना अच्छे से एडजस्ट कर पाओगे। जो ऑर्गेनाइजेशन फ्रेम है पार्टी का जिस पार्टी जिस पार्टी ने भी आपको मतलब सोचा है कि आप रेस में हो या फिर आपको टिकट देना चाहिए तो वो एक बहुत इंपॉर्टेंट पहलू हो जाता है। ठीक है? उसके अलावा पार्टी ये भी देखती है कि मैं आपको बता रहा हूं पार्टीज कैसे बनती हैं और कैसे इस तरह के ऊपर से नीचे का स्ट्रक्चर बनता है। कभी-कभी ऐसा भी होगा कि आपने देखा होगा एक डिस्ट्रिक्ट है एक्स। जी उस डिस्ट्रिक्ट में दो बड़े नामवर लीडर हैं और उसमें आठ 10 विधानसभाएं हैं। अब वो नहीं चाहेंगे कोई नामवर नेता कहीं से लड़े और विधानसभाओं से। क्योंकि डिस्ट्रिक्ट का जो पावर स्ट्रक्चर है, पावर रिलेशन है वो डिस्टर्ब होगा। उससे सीधे पार्टी ऊपर भी डिस्टर्ब होगी। जी। तो पार्टी बहुत टाइम ऐसा करती है कि ऊपर का जो सेंट्रल कमांड होता है जो टॉप टियर बॉडी होती है या फिर आप कह लो कि कोर जो होता है उसका वो डिफाई करता है। कभी-कभी वो पुराने बैठे हुए लोगों को जो बिल्कुल कह सकते हैं आप हिंदी में मठाधीश बन गए डिस्ट्रिक्ट के या फिर पार्लियामेंट्री लेवल पे कई पार्लियामेंट्री कॉन्स्टिट्यूएंसी को क्लैप करके आप देखें तो उनको एक लेवल पे जो है चेकमेट करते हैं। अच्छा ठीक है कि अब इनका टाइम आ मतलब हो गया है। ठीक है ना? तो पार्टीज जो होती हैं वो नए लोगों को इस तरीके से इस प्रगमेटिक फ्रेमवर्क में नए लोगों को टेस्ट करती हैं। नए लोगों को रोकती भी हैं ताकि पावर रिलेशन मेंटेन रहे। नए लोगों को लाती हैं ताकि नया पावर रिलेशन डेवलप हो। रिसोर्सेज आए क्यों कॉन्स्टिट्यूएंसी को मैनेज करना है। जब रिसोर्सेज की बात आती है तो देखिए बेसिकली पार्टीज जो है उनका काम क्या है? पार्टीज का अगर एक पॉलिटिकल एड वाले बंदे के हिसाब से पूछे जो कंसल्टिंग कर रहा है उसके हिसाब से पार्टीज का काम है पार्टी को चलाना और इलेक्शन कंटेस्ट करना और लड़की जीत जाना। जी। मैं इसको नहीं मानता कि पार्टीज का काम है इलेक्शन साइकिल के बाद। ठीक है? गवर्नेंस में पार्टिसिपेट करना। पॉलिटिकल एड का ये काम नहीं है। पॉलिटिकल इ एड का जो काम है वो बेसिकली वो जो इवेंट है इलेक्शन का उसमें वो जो पूरा सीमलेस जो फंक्शन होना चाहिए उसके उसके न्स को सेट करने में मदद करना। सो आई मीन या आई मीन वी कैन टॉक अबाउट इट। तो ये पूरा स्ट्रक्चर है और इसी में जो है पूरा आपका ट्रांजैक्शन इनवॉल्व होता है। जब आप गवर्नेंस में आते हैं आप पावर में आते हैं तो आपके पास रिसोर्सेज होते हैं और रिसोर्सेज में लोगों को जो है बिठाना होता है तो ऊपर से नीचे तक जो है एक मोटिवेशन भी आता है कि लोग काम कराते हैं लोगों के साथ मिलकर के। तो वो एक मोटिवेशन होता है जो मैं समझता हूं कि कैंपसेस में वो दायरा नहीं होता है। ठीक है। वहां पे कॉमनर होते हैं। दो एटलीस्ट दो सवाल मेरे ज़हन में आ रहे हैं इस वक्त। एक तो ये कि [नाक से की जाने वाली आवाज़] और मेरा एजम्पशन है ये कि कैंडिडेट कौन सा बेहतर है जो इलेक्शन लड़े? जाहिर सी बात है कोई पेपर पे कागज पे सर्वे तो नहीं होता है। आई एम प्रीटी श्योर मेरा एजंप्शन है कि पार्टी पेपर पे सर्वे तो नहीं करेगी। पार्टी जो है वह एज अ परसेप्शन पे सर्वे करेगी। जो उनके लोग हैं, जो लीडरान हैं या छोटे-छोटे ब्लॉक्स में लोग हैं, उनसे हो सकता है नीचे लेवल पर कंसल्ट करें भी कौन है, क्या है या कोई विज़िबल है, कोई दिखाई दे रहा है तो उससे इंगेज हो। ठीक है? यह चीज ठीक है। लेकिन एक रैंडम चॉइस एकदम रैंडम चॉइस। आपने कभी ख्वाब ख्याल में नहीं सोचा। जैसे जब मैं आपको एक नाम दूंगा जब यूसुफ पठान को बनाया गया कैंडिडेट नहीं ख्वाबो ख्याल में आपने नहीं सोचा कि यूसुफ पठान जो है वो बंगाल में इलेक्शन लड़ेगा हम ठीक है बंगाली तो नहीं है ठीक है और जीत भी जाएगा ठीक है तो ये जो एक परसेप्शन है क्योंकि वो इंसान तो कभी पॉलिटिक्स उसने नहीं किया ठीक है उसका कोई बैकग्राउंड नहीं है। लोगों को जो हटा के आप वहां पे उनको बिठा रहे हैं। इसकी क्या बेसिस है? ठीक है? एक सवाल तो मेरा ये है। बहुत ही हम लोगों को आमतौर पे जो लोग हैं उनको बड़ा रैंडम लगता है। क्या हो गया भाई? ठीक है। जैसे जब योगी आदित्यनाथ को यूपी का चीफ मिनिस्टर बनाया गया था। मेनी पीपल वर शॉक्ड कि ये क्या है भाई? ये कैसे हो सकता है? ठीक है? क्योंकि ये तो समझ ही में नहीं आ रहा है कैसे हो रहा है। है ना? तो एक तो चीज ये है कि ये रैंडम चॉइससेस जो होती हैं ये लेते कैसे हैं इतना कॉन्फिडेंटली लोग? है ना? और वो भी इस कॉन्फिडेंस के साथ कि भाई अच्छा ऐसा भी है कि भ आपका कॉन्फिडेंस खत्म भी हो सकता है। अभी आपकी चॉइस गलत भी हो सकती है। होता भी है। लेकिन फिर भी ये एक रिस्क है। इलेक्शन इज़ अ रिस्क। गिविंग पोजीशन टू समवन इज़ अ रिस्क। तो आप इसका असेसमेंट कैसे कर रहे हैं? विद रिस्पेक्ट टू समवन जिसका जिसने कभी ये काम किया ही नहीं। ठीक है? या दिस आल्सो वर्क्स विद नरेंद्र मोदी ठीक है कि साहब पार्टी का लीडर बना दिया जाए ठीक है या 2004 में सॉरी 14 में कैंडिडेट बना दिया जाए प्राइम मिनिस्टेरियल ठीक है जो कभी लोकसभा में नहीं बैठा ठीक है ये चॉइससेस जो है पॉलिटिकल पार्टीज में कैसे आ रही हैं एक तो चीज ये है दूसरी चीज ये है कि ये पूरा जो आपने स्ट्रक्चर बताया है। हम इसमें कम्युनिकेशन जो होता है, एक दूसरे से बातचीत जो होती है, जो मेरी समझ है वो पॉलिटिकल सिग्नलिंग के थ्रू होती है। जी बिल्कुल। है ना? जैसे अभी राघव चड्ढा की बात हो रही है कि भाई ये आप में नहीं रहेंगे, ये वहां चले जाएंगे, ये होगा। तो आप ओपनली तो कुछ बोलते नहीं हैं। सिग्नलिंग होती है। है ना? तो ये सिग्नलिंग जो है ये कैसे काम करती है? जैसे मैं पब्लिकली आकर बोल दूं कि साहब राहुल गांधी ने बहुत बढ़िया काम किया है। ठीक है। बहुत बढ़िया भारत जोड़ो यात्रा बहुत बढ़िया थी। अब जो काम कर रहे हैं बहुत बढ़िया। ये आपको कब लगेगा कि मैं कांग्रेस के लिए के लायक हूं। ठीक है? हम या [गला साफ़ करने की आवाज़] मुझे कांग्रेस में ले लेना चाहिए। हम क्या कुछ इंटरनल डायनेमिक्स या मैकेनिक्स भी होती है उसकी जो हमको दिखाई नहीं देती। बट विजिबली सिर्फ एक सिग्नलिंग है। देखिए पॉलिटिकल सर्कल्स में सिग्नल्स काम के होते हैं। जी। जैसे कि मैंने कहा कि देखिए इंडिया में पिटिकल पार्टीज मैं एक-एक करके एग्जांपल पे आऊंगा जो आपने सवाल उठाए थे। मैंने कहा कि बहुत ही प्रगमेटिक है। जी। व्हाट यू सी इन बीजेपी? यू नो यू रिमेंबर लाइक 2014 पार्लियामेंट्री इलेक्शन से पहले कांग्रेस के बहुत लीडर्स बीजेपी में गए थे। जी। कंटीन्यूसली बहुत दिनों तक जाते ही रहे। जी। आजकल थोड़ा सा रुका हुआ है क्योंकि कांग्रेस में काफी लीडर जा चुके हैं। एनीवे तो बेसिकली ये है ना कि पार्टीज का जो स्पेस होता है आइडियोलॉजिकल हमें ये लगता है कि एक परसेप्शन लेवल पे, आइडियोलॉजी लेवल पे, एक मैप प्लान काम करता है। नो डाउट। उसके अलावा जो है ना ज्यादातर लोग उसमें पार्टिसिपेट नहीं करते हैं। उनका पार्टिसिपेशन ना लिमिटेड टू दी इलेक्शन साइकिल होता है। जी लेकिन इस प्रगमेटिज्म पार्टी के इस जैसे कि आपने कहा कि टीएमसी ने अब लेके चली आई गुजरात से पठान बंधु को एक तो अब इसमें ये देखिएगा कि ही वाज़ आल्सो पार्ट ऑफ़ केका केकेआर राइट। हां। तो केकेआर के पार्ट थे कोलकाता नाइट राइडर के लिए खेला था। ठीक मकबूलियत है मशहूर है। अच्छा जिस तरह के डिस्ट्रिक्ट की आप बात कर रहे हैं अच्छा खासा मतलब एक मुस्लिम कॉन्स्टिट्यूएंस का कॉन्स्टिटुएंट का डोमिनेशन है वहां पे एक तरीके से देखें तो एटलीस्ट इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन में। ठीक है? तो वो भी चीजें दिख रही है। तो ये जो पार्टीज करती हैं वो करती हैं। ठीक है? और इसमें पार्टीज डिसीजन लेती हैं। उसी तरीके से आपने कहा कि यह राघव चड्ढा जी का जो सिग्नल सिग्नलिंग की बात की आपने तो राघव चड्डा जी के बारे में तो आई आई रिमेंबर लाइक यू नो वी वर पार्ट ऑफ़ यू नो 2017 असेंबली इलेक्शन इन पंजाब। आई आई डोंट रिमेंबर ही वाज़ वेरी रेलेवेंट देन बट ही वाज़ मेड रेलेवेंट। ऑफ़ कोर्स आई मीन ही ही हैड दोज़ कैपेबिलिटी मे बी इंटेलेक्चुअल साइड मे बी यू नो दैट दैट दोज़ फीचर्स पॉलिटिकल फीचर्स वेयर पार्टी वाज़ बिलीविंग ही मे बी यूज़्ड। सो ही वा ही ही वाज़ ही वास् डूइंग दोज़ स्टफ। अ बट व्हाट इज गोइंग ऑन अराउंड फॉर नाउ वो एक लेवल का कुछ पॉलिटिकली जो मिस एडवेंचर दिख रहा है उनकी तरफ से वो होता है। मैंने कहा ना कि ये सिर्फ पार्टीज की तरफ से नहीं होता है। वो लीडरशिप की तरफ से होता है। वो भी एक एक जो मैंने बोला ना बार-बार मैं कह रहा हूं कि एक बड़ा प्रगमेटिक फ्रेमवर्क है जिसमें सब लोग अपने आप को टटोलते हैं कि गुंजाइशें क्या हैं? उन्होंने भी उस उस तरह के सिग्नल भेजे बीजेपी को भेजे मे बी कांग्रेस को भी भेजे होंगे ठीक है तो तो लीडरशिप ये करती रहती है और परमानेंट पार्टी होती है ठीक है और मे बी यू नो कोर लीडरशिप उसकी बाकी मेरे हिसाब से जो मैं अभी देखता हूं चीजें कॉन्स्टिट्यूएंसी में चेहरे बदलते हैं जी उसी तरीके से ऑर्गेनाइजेशन रिव भी होता है संगठन का भी बदलाव होता है तो पार्टीज ही निर्धारित करती है और पार्टी ही पार्टी इस तरह की डिसीजन इसलिए लेती है कि पार्टी को रेलेवेंट रहना है और हमेशा ये जैसे कि आपने बोला कि हम यूसुफ पठान की जो बात आपने कहा जी तो यूसुफ पठान का मैंने केकेआर का कनेक्शन बताया कि भाई केकेआर से खेले हुए थे और एक एक तरीके से वो जो है सेलिब्रिटी हैं। सेलिब्रिटी क्रिकेटर हैं। तो वो वो सारी चीजें तो मतलब लेके ही आए ना वो। हालांकि कांग्रेस के बहुत दिग्गज नेता। के खिलाफ लड़े वो। मैं वही कहा ना कि आपको कैसे समझ में आया कि वो उसको हरा देगा भाई। ठीक है। अब मामला यह है कि ये भी था कि ऑफ कोर्स लाइक यू नो कंसोलिडेट किया उन्होंने। शायद जो सेलिब्रिटी वाला फैक्टर था वो डोमिनेट किया। शायद कांग्रेस पार्टी की भी कुछ वीकनेस रही होगी। वो एक अलग डिस्कशन हो जाएगा। तो मेरे हिसाब से जो है पार्टीज इस तरह के इस तरह के डिसीजन लेती हैं जो आपको बहुत चौंकाने वाले लगेंगे। लेकिन उनको उसमें फायदे दिखते हैं। उनको एक तरह का उसमें चर्न दिखता है। उनको एक तरह का प्रॉफिट दिखता है। ठीक है? मे बी वो शॉर्ट टर्म के लिए हो। ठीक है? कि मे बी कुछ उसका एक अलग एक अलग नेचर हो ट्रांजैक्शनल पिटिकली ट्रांजैक्शनल जो बाद में वो बेनिफिट उससे रीप करें पार्टी तो वो चलता रहता है और इसी तर्ज पे आप देखेंगे कि मेनी ऑफ़ द टाइम स्टेट के बाहर के लोग इनवाइट किए जाते हैं। ठीक है? अब जैसे कांग्रेस पार्टी ने राज्यसभा भेजा है। इमरान प्रतापगढ़ जी को महाराष्ट्र से भेजा है। जी तो तोकि राज्यसभा की सीट वगैरह थोड़ा सा ये भी है कि नहीं वो नहीं बल्कि मैं आपको और इंटरेस्टिंग एग्जांपल मैंने कहा गुरुस्वामी हां मैंने कहा गुरुस्वामी राज्यसभा कैसे पहुंच सकती हैं? वो क्या बेसिस है? कैसे? तो वो मैंने बताया आपको कि पार्टीज जो है वो सिर्फ इसी तरीके से फंक्शन नहीं करती हैं कि हमें आपको ऐसा लगता है कि बस पॉलिटिकली कॉन्स्टिट्यूएंसी में जो लोग पार्टी के फ्लैग को डोमिनेंट करा सकते हैं। दे शुड बी यू नो दे शुड बी काउंटेड ऑन अ पार्टी पार्टीज का उसके अलावा भी बहुत सारा पोस्टरिंग है। ठीक है? और वो पोश्चरिंग जो है इट जस्ट यू नो देयर टू सेट द टोन एंड टेनर ऑफ़ द पार्टी इन लॉन्ग टर्म आई मीन यू नो आई मीन इट इट ब्रिंग्स वाइटलिटी टू द पार्टी टू बी वैरी ऑनेस्ट सो आई मीन दीज़ पीपल एंड स्पेशली राज्यसभा राज्यसभा हैज़ बीन यू नो हैज़ बीन दी हाउस वेरी रेलेवेंट फॉर ऑल पार्टीज टू थिंक ऑन दिस लाइन टू सेंड पीपल हु कुड लाइक यू नो ब्रिंग दोज़ थिंग ऑन टेबल फरद पार्टी मोर लेकिन ये जो आप कह रहे हैं वकार साहब कि क्या नाम है? पार्टीज [नाक से की जाने वाली आवाज़] बड़ी प्रगमेटिक होती हैं। बड़ी प्रैक्टिकल होती हैं। पॉलिटिक्स बड़ी ही प्रैक्टिकल, बड़ी प्रगमेटिक क्या काम करेगा वही काम करना है। बहुत ज्यादा प्रिंसिपल बेस्ड आइडियोलॉजिकल बातें नहीं है। होंगी बिल्कुल होंगी। लेकिन ये कि डिसीजंस बड़े प्रैगटिक होते हैं। क्या काम करेगा? लेट्स सी। है ना? अगर ऐसा है और उसके साथ आप यह कह रहे हैं कि पार्टीज या पार्टी के मेंबर्स या पार्टी के पॉलिटिशियंस हमेशा एक दूसरे को टटोलते रहते हैं। ठीक है? या अपने आप को टटोलते रहते हैं कि मेरी इमेज चल रही है या नहीं? मैं परफॉर्म कर रहा हूं या नहीं। मेरी जो एक्सपेक्टेशन है वो है या नहीं। ठीक है? या पार्टी जो है मुझे दबा तो नहीं रही है। साइड लाइन तो नहीं कर रही है। बहुत सारी चीजें हैं। पार्टी आपको देखती है कि भ आप धोखा तो नहीं दे रहे हो। जो विप होता है। ठीक है? कि साहब आप वोट अगेंस्ट नहीं जा सकते। जो पार्टी ने कहा है। पार्लियामेंट में जब वोटिंग होती है या फिर कोई छोड़ के तो नहीं चला जाएगा। तो [गला साफ़ करने की आवाज़] अगर यह सारी चीजें हैं और यह एवरीडे लाइफ का पार्ट है। हम सवाल मेरा यह है कि लोग एक दूसरे को ट्रस्ट कैसे करते हैं? पार्टी अपने आप को स्टेबलाइज कैसे करती है फिर? क्योंकि अगर आप भी पॉलिटिशियन, मैं भी पॉलिटिशियन और हम एक दूसरे के साथ काम तो कर रहे हैं लेकिन एक दूसरे को टटोल भी रहे हैं साथ-साथ क्योंकि भ प्रोफेशनल है ना हम वो फॉलोअ वाला मामला नहीं है। हम प्रोफेशनल पॉलिटिशियंस हैं। तो हम एक दूसरे को हमेशा जज करते रहेंगे। एक दूसरे को हमेशा टटोलते रहेंगे। हम्म। तो पार्टी एज अ होल एज एन ऑर्गेनाइजेशन उसमें स्टेबिलिटी कहां से आएगी? कैसे आती है? आपका जो सवाल था कि सारे इसी प्राइमेटिक फ्रेमवर्क पे काम कर रहे हैं और लीडर्स जो है एक दूसरे विद इन द विद इन यू नो सेम पार्टी यू नो डिफरेंट लीडरशिप जो है ऐसा करती है नो डाउट कि एक तरह का कंटेस्टेशन होता है कि कौन सेंट्रल लीडरशिप के पास या टॉप लीडरशिप के पास किसकी आवाजाही ज्यादा है कौन ज्यादा इंटरेक्ट कर रहा है किसकी से ज्यादा है उस तरह के आप स्टेट लीडरशिप में देखोगे कि जो सेंट्रल कमांड होता है उसके तक किसकी पहुंच है? उसकी बातें कितनी मानी जा रही हैं? संगठन को लेकर के, टिकट को लेकर के इवन रीजनल लीडरशिप में भी सेंट्रल कमांड को लेकर के इस तरह के चीजें होती हैं। आप अक्सर पढ़ोगे। तो बेसिकली ये है ना कि देखिए एक तो ये है कि पार्टीज जो है ना पॉलिटिक्स करती हैं। पार्टी अगर सब कुछ एक क्लासरूम की तरह डिसिप्लिन करने का एक पूरा कोड ऑफ कंडक्ट बना दे तो पार्टी नहीं रहेगी। हम पार्टी का जो थ्रिल है ना पार्टी की जो वर्किंग फिलॉसफी है वो कॉन्फ्लिक्ट है केओस है क्या बात कर रहे हैं आप ये बड़ी इंटरेस्टिंग चीज है ये कओस ही डिफाइन करती है और केओस का जो मैनेजमेंट है वो पार्टी के फ्लो को बरकरार रखता है। मतलब एक आपकी ये एजम्पशन है जो एक नॉर्मल लोग स्टेबिलिटी को ढूंढते हैं या स्टेबिलिटी के एजंपशन पे काम करते हैं। पॉलिटिकल पार्टी केस के एजम्पशन पे काम करती है। बिल्कुल करती है। कि हमेशा कंफ्लिक्ट रहेगा इसमें। बिल्कुल करती है। कंट्रोलोल्ड केओस उसको कंट्रोल करती हैं बस। उसको खत्म नहीं करती। केस को मैनेज करना। कंट्रोलोल्ड केओस हमेशा रहना चाहिए। किसी ना किसी कोई भी पार्टी में। उसका रीजन ये है कि पार्टी को रेलेवेंट रहने के लिए हम चार्ज्ड अप रहने के लिए अब आप अब देखिए आर यू टेकिंग नेम ऑफ़ बीएसपी दी डेज बहुजन समाज पार्टी नहीं देयर वास अ टाइम इन उत्तर प्रदेश यू विल टॉक अबाउट यू नो डिफरेंट लीडर लीडरशिप लाइक स्वामी प्रसाद मौर्या फ्रॉम योर प्लेस ओनली या फिर नसीम नसीमुद्दीन सिद्दीकी अभी तो शायद समाजवादी पार्टी में चले गए हैं यह सारे तरह के लीडर थी। नो डाउट बहन जी का एक अपना ओरा था। उनके बचपन की बात है। इस कॉलेज में आए थे तो रिस्पेक्ट भी था। लेकिन आप सुनते थे कि कौन ऊपर आ रहा है, कौन नीचे जा रहा है। मुलायम सिंह तो ये पार्टीज का इननेट नेचर है कि एक एक एक कंट्रोलोल्ड केओसो। एंड इट इज वेरीेंट फॉर दी लाइफ ऑफ द पार्टी। एंड दैट यू वुड सी इन बीजेपी एस वेल। बीजेपी इज बीइंग वेरी स्मार्टली मैनेज्ड। व्हाटएवर यू से आई मीन दे आर वेरी स्मार्ट। सो या आई मीन केस इज़ेंट एंड एंड दैट इज व्हाई इट इज़ वेरी नेचुरल दैट अ पर्टिकुलर लीडर एक्स मे बी यू नो अ वो एक साथ एक कार्यक्रम भी करा रहे हैं राज्य स्तर का और सेंट्रल कमांड को रिपोर्ट कर रहे हैं कि हमने एक कैंपेन करा दिया। लेकिन वो एक दूसरे से स्पेस के लिए कंटेस्ट भी कर रहे हैं कि कौन बैठेगा कहां कौन किसके लोगों को बिठाएगा। दैट गोज़ ऑन। आपस में म्यूचुअल ट्रस्ट कैसे आता है? वही मैं कह रहा हूं कि जो मैंने कहा ना कि ये भी प्रगमेटिज्म का पार्ट है। कि आपने एक एक मान लीजिए कि मोटा-मोटे एक आइडियोलॉजी पे बिलीव किया। हम और मे बी आप बहुत स्ट्रांग साइड पे हो। हम क्योंकि वो आपकी पार्टी का परसेप्शन जैसे वो बेस परसेप्शन हो गया। जैसे मैं आपको बताऊं बीजेपी है बीजेपी की जो आईडियोलॉजिकल परसेप्शन है वो बेस परसेप्शन है। जी अभी आप कांग्रेस का नहीं कह सकते कि आजादी को मिले बहुत जमाना हो गया। वो बेस परसेप्शन नहीं है। लेकिन हिंदुत्व इज़ अ इज़ अ लिविंग रियलिटी। यू नो आई मीन व्हिच बीजेपी इज़ यू नो काइंड ऑफ़ काइंड ऑफ़ चैंपियनिंग अराउंड। जी। और ये मैसेज ऑलमोस्ट सारे लीडरशिप को रीजनल हो या डिस्ट्रिक्ट लेवल की हो। ये ट्लेट सबके पास है। हम आप मेरी बात समझ रहे हो ना? समझ रहे हो? तो ये ये बिलीफ जो है ना बहुत स्ट्रांग बिलीफ है उनका। हम क्योंकि ये ये वर्क करता रहा है। हम समझ गए? ये वर्क करता रहा है। इसने ओल्ड सिस्टम को जो कांग्रेस कांग्रेस का जो मतलब प्लैंक था उसको इररेलेवेंट किया इसने। हम जिसमें माइनॉरिटीज़ भी आती है कि मुस्लिम इरिलेवेंट हो गया इलेक्टोरली। ऑफ कोर्स पार्टिसिपेशन रहा है। बारगेन एजेंसी खत्म हो गई। जी। ठीक है। तो दैट्स व्हाट आई बिलीव कि ये ये एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज है बीजेपी के लिए। अब दूसरी चीज़ ये है कि कुछ चीजें ऐसी भी होती हैं कि जो अचानक से होती हैं। जी। कोई टेक्टोनिक शिफ्ट हो गया। ड्यू टू जिओपॉलिटिक्स ड्यू टू इकोनमिक मेल्टाउन हम ड्यू टू यू नो मे बी एक्सटर्नल डेंजर एट द बॉर्डर एंड मे बी लाइक यू नो बिकॉज़ ऑफ़ एनिमी कंट्रीज इस तरह के भी इश्यूज हो सकते हैं। उसकी हैंडलिंग कैसे हुई है? अगर कोई रूलिंग पार्टी है जी। तो उसके लिए वो भी चीजें नहीं गड़ सकते हैं। हम ठीक है? नैरेटिव लेवल पे। हम हम तो मेरा यह मानना है कि वह एक प्लैंक जो है किसी भी पार्टी का वो बरकर अच्छा आपने अभी राहुल जी के लिए बात किया था कि ही वेंट फॉर दिस भारत जोड़ो यात्रा भारत जोड़ो यात्रा भारत जोड़ो यात्रा बहुत यू नो बहुत करेजियस स्टेप था जी और बहुत बड़ा मोमेंट था मतलब पॉलिटिकल एड करने वालों की समझ से मेरी समझ से यह ऐसा ही मोमेंट था जैसे 2014 से पहले का बिल्ड अप मोमेंट था मोदी जी का मतलब यू नो मीन नए तरीके से चीजों को करना कैंपेन को करना तो एक एक मोदी जी का जो मतलब पूरा जो सिस्टम चला आ रहा था उस बीच में एक नए तरह का एक्सपेरिमेंट जो हुआ था तो उस तरीके से हम भारत जोड़ो यात्रा को समझते हैं। लेकिन जानते हैं एक चीज़ क्या है। भारत जोड़ो यात्रा ने ना एक लेवल पे राहुल जी के लिए बहुत सारा काम कर दिया। ये भी समझिएगा ये भी एक परसेप्शन गेम ही है। जी पार्टीज कैसे पोजीशन करती है। राहुल जी बहुत मकबूल है इस वक्त चीजें करने की कोशिश कर रहे हैं और करते भी हैं बेहतर। तो उसमें ये है ना कि उनको इस कैंपेन ने एक लेवल पे इंडिविजुअली बहुत प्रॉमिनेंट कर दिया। मतलब उनकी उनका जो परसोना था पिटिकल पर्सोना उसको बहुत रेलेवेंट कर दिया जो पहले दिखाई नहीं दे रहा था क्या कर रहे हैं क्या करना चाहते हैं इट्स नॉट ओनली दैट हम यू नो अ लीडर इज नोन आई मीन ही इज़ अराउंड ही इज़ गांधी वो एक अलग चीज है व्हेन यू वॉक यू नो फॉर दिस लॉन्ग एंड यू ईटिंग मीटिंग टॉकिंग तो लोग पॉज कर करके भी देखेंगे आपको। लोग देखेंगे आप हैंडशेक कैसे कर रहे हो। आप कैसे लोगों से मिल रहे हो। कितने विनम्र हो। जी। कितने हंबल हो या कितने मे बी हॉर्टी हो। ठीक है? वो सारी चीजें लोग वो लोगों को देखने का मौका मिला। ही इज़ वॉकिंग ही इज़ अनशेवन। ठीक है? आप मेरी बात समझ रहे हो ना? समझ रहा है तो लेकिन अब इसमें एक खामी है जो मैं मेरी समझ में मैं हो सकता है कि गलत भी हो सकता हूं लेकिन इससे पार्टी को पर से जी कांग्रेस पार्टी को मतलब मुझे ऐसा लगता है कि इस हालांकि मे बी इस कैंपेन का पूरा जो हिस्सा था उसमें वॉक करना था लेकिन मेरे हिसाब से जो है पार्टी इससे कितनी मजबूत हुई है या संगठन कितना मजबूत हुआ दैट इज वन यू नो वन क्वेश्चन व्हिच व्हिच स्टिल यू नो आई एम आई आई एम थिंकिंग अबाउट एंड एंड हाउ रेलेवेंट वाज़ इट फॉर पार्टी हम क्योंकि आप पूरे राज्यों में चल के गए हैं। सो दैट दैट वन थिंग तो परसेप्शन गेम में आइडियोलॉजी भी है जिसमें बीजेपी ने काफी काम किया है। उनका पूरा एक पैकेज रेडी है। आई वुड वांट टू शिफ्ट अ लिटिल थोड़ा सा शिफ्ट करना चाहूंगा मैं कन्वर्सेशन को एंड टू जिसको कहते हैं ना मोर पर्टिकुलर थिंग और वो है मुस्लिम पॉलिटिक्स और मैं भारत जोड़ो यात्रा से ही चीज को उठाता हूं कि ये जो आपने कहा ना कि एक यात्रा हुई परसेप्शन बिल्ड अप हुआ एक इंसान का विजिबिलिटी बढ़ी प्रोबेबबली एक्सेप्टेंस बढ़ा है ना प्रॉमिनेंस बढ़ा बढ़ा लोगों को देखना शुरू किया समझ में आया चलो राहुल गांधी है तो एक एजेंसी मिली उनको कि साहब वो अब कुछ बोल सकते हैं उनकी बात सुनी जाएगी इंपैक्ट है बहुत सारी चीजें कैरिज्मा है बहुत सारी चीजें [नाक से की जाने वाली आवाज़] उससे पॉलिटिकल पार्टी को कितना फायदा हुआ वी डू नॉट नो क्योंकि एक पॉलिटिकल स्ट्रक्चर भी खड़ा होना चाहिए पॉलिटिकल पार्टी इंसान सेंट्रिक नहीं होती है वो ऑर्गेनाइजेशन सेंट्रिक होती है उसका एक स्ट्रक्चर होता है मुस्लिम पॉलिटिक्स में दोनों ही एलिमेंट्स गायब हैं। पहला तो ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर तो बाद में आएंगे। फिर कुछ ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर कोई पॉलिटिकल पार्टी तो है जैसे असदुद्दीन ओवैसी हैं। उनका एक ऑर्गेनाइजेशनल स्ट्रक्चर है। उस पे वो काम करते हैं। विल कम टू दैट है ना? बट मोरेंटली जो एक मूवमेंट है भाई राहुल गांधी मेरा जो अंडरस्टैंडिंग है कि मूवमेंट से पार्टी बनती है और अगर कोई पार्टी मूवमेंट पे आ जाए व्हिच इट मींस वो फिर से पीछे जा रही है और फिर अपने आप को रीइनेंट करने की कोशिश कर रही है। ये मेरी अंडरस्टैंडिंग है। हम तो मूवमेंट के बिना पॉलिटिकल पार्टी तो खड़ी नहीं होती है। आपको किसी ना किसी तरीके का मूवमेंट बनाना होता है। और मूवमेंट के लिए आपको कुछ ऐसे एंट्री पॉइंट्स चाहिए होते हैं जहां पे आप पब्लिक कन्वर्सेशंस कर सकें। हम्म जहां पे आप डेमोक्रेसी से इंगेज हो सके। एक प्रोटेस्ट जो लोगों के ज़हन में है, बड़ा लिखा गया, बड़ा सेलिब्रेट हुआ। सारी चीजें सीएनआरसी प्रोटेस्ट है हम जिसमें कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ एंट्री पॉइंट्स मिले लोगों को बातें करने के वो प्रोटेस्ट से ऊपर नहीं उठा हम उसकी बहुत सारी वजूहात हो सकती हैं। एक तो ये हो सकता है कि बहुत जल्दी बहुत कुछ हुआ या यह हो सकता है कि साहब जो लोग कर रहे थे वो एक्सपीरियंस्ड नहीं थे या यह हो सकता है कि उसका गियर ही शिफ्ट हो गया था। पहले ए था फिर बाद में बी बन गया। ठीक है क्योंकि शजील इमाम जो बड़ा नाम हुआ कि साहब उन्होंने सीए एनआरसी प्रोटेस्ट में लीड किया यह वो एक स्टेज वो भी थी जब शजील इमाम खुद ही वांटेड टू राइट कि भ मैं इसको छोड़ रहा हूं ठीक है दिस इज़ गोइंग इन अ डिफरेंट डायरेक्शन है ना भ मैं जो चाह रहा था या जो सोचा था हमने वहां नहीं जा रहा दूसरी डायरेक्शन में चली गई ये चीज तो उसके कई सारी वजूहात हो सकती हैं कि वो नहीं हुआ लेकिन मैं ये जानना चाह रहा हूं कि एक तो ऑर्गेनाइज ेशनल जो मैं आपसे बाद में पूछूंगा मूवमेंट एग्जिस्ट नहीं करता है। मूवमेंट से पहले एंट्री पॉइंट्स जो हैं मेरी नजर में एंट्री पॉइंट्स भी एक्सिस्ट नहीं करते जिससे आप डेमोक्रेसी में एंट्री ले सके। मैं आपको एग्जांपल देता हूं जो मैंने ऑब्जरवेशन किया उस वक्त कि जो प्रोटेस्ट हो रहे थे उसमें ये लोग कोशिश कर रहे थे कि जितनी सेुलर लैंग्वेज यूज़ कर सकें करें। है ना? तो साहब अंबेडकर का भी नाम लिया जा रहा है। गांधी का भी नाम लिया जा रहा है। आजाद का भी लिया जा रहा है। कॉन्स्टिट्यूशन को हाथ में लिया जा रहा है। ठीक है? प्लेटफार्म पर सबको अलऊ किया जा रहा है। कोई भी आकर बोले तो लेफ्ट वाले भी आ जा रहे हैं। कोई भी आकर बोल रहा है। तो झंडा भी वहां पर लगा दिया गया बहुत बड़ा सा है ना। इंडिया का मैप भी लगा दिया गया वहां बहुत बड़ा सा। फिर वहां सिख लोग भी आ रहे हैं। खिला रहे हैं खाना। तो एक अलग टाइप का कैंपेन चल रहा है। वो बिल्कुल ठीक है। वो एक सेकुलर बनाने की कोशिश है। उसी के साथ फिर दिल्ली राइट्स होते हैं और उसी के साथ फिर दिल्ली इलेक्शन होता है आसपास। और वो पूरा जो लैंग्वेज है वो यह लैंग्वेज है कि साहब यह कम्युनल है। ठीक है? द इलेक्शन इज कम्युनल। ये जो कंट्री को ब्रेक करना चाहते हैं। ये है वो है। तो कहने का मतलब ये कि अगर आप आपने कोशिश की डेमोक्रेटिक प्रोसेस में एंट्री पॉइंट लेने की। आपने मैं मुस्लिम पर्सेक्टिव से कह रहा हूं। आपने कोशिश की उसमें एंट्री पॉइंट लेने की। आपने कोशिश की वह लैंग्वेज यूज़ करने की जो सब यूज़ कर रहे हैं। हम आपने वह काम करने की कोशिश की जो सब कर रहे हैं। आपने अपने को इतना ओपन किया कि आपने सबको अपने साथ रखने की कोशिश की कि जो भी आए जो बोलना चाहे बोले सबके लिए प्लेटफार्म है। एंड इवन देन इट टर्न्स इंटू अ कम्युनल थिंग। ठीक है? एट द एंड ऑफ़ द डे। तो मूवमेंट तो छोड़ दीजिए। मेरी अंडरस्टैंडिंग में क्या यह सच है कि एंट्री पॉइंट भी आपको नहीं समझ में आ रहा है कि आपका डेमोक्रेसी में इंडियन डेमोक्रेसी में आपके थ्रू आपकी एजेंसी के थ्रू मुस्लिम इश्यूज क्या हैं और आपका क्या एंट्री पॉइंट है इस डेमोक्रेसी में? मेरे हिसाब से जो आइडेंटिटी का क्वेश्चन है मुस्लिम्स का पॉलिटिकल आइडेंटिटी का मैं इसको ना थोड़ा सा ब्रेक करके देखता हूं। जी। क्यों ब्रेक करता हूं? क्योंकि वह मुझे सहूलत देता है अच्छी समझ बनाने के लिए। जैसे कि मैं अगर आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में जाऊं जो कि उत्तर आंध्र में आता है। और एक तेलुगु मुस्लिम से मिलूं जिसकी हो सकती है अपनी सब कास्ट भी हो। कोई कास्ट भी हो। उसके अपने इंगेजमेंट्स हैं। वहां के लीडरशिप से, वहां के डेमोक्रेटिक प्रोसेससेस से, इलेक्शंस से, तमाम उसकी रियलिटीज हैं। उसकी अपनी लैंग्वेज है, खानपीन है। तो पहली चीज तो ये है कि मैं इसको बहुत ही एक डवर्स कैनवस पे देखता हूं। मतलब एक रेनबो कैनवस पे देखता हूं। मतलब बहुत ही डवर्सिफाइड अह एक एक अह चीज़ जो चीज़ मुझे अपील भी करती हैं जो मुझे अपील भी करती हैं और क्यों अपील करती हैं मैं आपको बताता हूं। आपने कहा कि मूवमेंट से पार्टीज बनती हैं। हमेशा ऐसा नहीं होता। अ मूवमेंट से पार्टीज बनती हैं। ऐसा हमेशा होता भी है। पार्टी आपने देखा होगा कि एनसीपी दो भागों में टूट गई। कोई मूवमेंट थोड़ी हुआ था तो भाटी बन गई [हंसी] शिवसेना दो भाग में बंट गई तो कोई मूवमेंट थोड़ी हुआ था तो बेसिकली आई मीन पुन इंटेंडेड बट या दैट हैपेंड इन फ्रंट ऑफ यू सो द थिंग इज यू नो कमिंग बैक टू द लार्जर मुस्लिम क्वेश्चन और मुस्लिम आइडेंटिटी क्वेश्चन पिटिकल आइडेंटिटी क्वेश्चन आपको भी पता है कि मुस्लिम्स का पिटिकल पार्टिसिपेशन देयर इज नो डाउट अबाउट इट। आई मीन यू विल टॉक अबाउट इट। दे इलेक्टोरली पार्टिसिपेट कमिंग इन ह्यूज नंबर। दे आर वोटिंग देयर आई मीन आई एम आई एम नॉट गोइंग टू दिस रीसेंट एसआईआर एंड अदर स्टाफ। व्हाट आई एम सेइंग इज अ दे पार्टिसिपेट दे गो टू वोट दैट पार्टिसिपेशन इज़ देयर राइट जी यू विल एग्री एब्सोल्युटली 2027 इलेक्शंस कमिंग यू विल एग्री राइट दे विल पार्टिसिपेट अगेन द इशू इज़ हु इज़ डिफाइनिंग आवर आइडेंटिटी क्वेश्चन एंड पॉलिटिक्स अराउंड इट हु इज़ सेटिंग द डिस्कोर्स अराउंड इट यू गॉट माय पॉइंट जी आई मीन मे बी यू नो मेनी ऑफ़ द टाइम वी बिलीव वी नो मच ऑफ़ द डील अबाउट मुस्लिम आइडेंटिटी पॉलिटिक्स एंड यू टॉक अबाउट एआईएमआईएम जी एंड यू नो आई मीन असदुद्दीन साहिब एंड द काइंड ऑफ़ वर्क हिज़ पार्टी इज़ डूइंग यू नो आई मीन ही हैज़ ऑल कॉन्स्टिट्यूशनल राइट टू गो अक्रॉस एंड चैंपियन बिकॉज़ ऑफ़ ऑल द इलेक्टोरेट्स व्हेयरवर ही इज़ गोइंग इन व्हाटएवर कॉन्स्टिट्यूएंसी इज़ गोइंग या बट आई बिलीव इट इज़ शॉर्ट ऑफ़ इट इज़ शॉर्ट ऑफ़ दोज़ क्वेश्चन यू प्रपोज्ड जी दैट इज इट अ इज इट बीइंग डन इन पर्सुएशन ऑफ़ लाइक दैट टू सॉल्व दिस दैट मुस्लिम अ पिटिकल आइडेंटिटी वाला क्वेश्चन और गिविंग सम रिलीफ टू दैट क्वेश्चन व्हिच यू बिलीव हैज़ कॉज मच ऑफ़ द पॉलिटिकल अपहिवेल इन योर माइंड। यू गॉट माय पॉइंट? आई अंडरस्टैंड? या सो, आई एम व्हाट आई बिलीव इज़ इट हैज़ वन और टू प्रॉब्लम। आई आई विल आई विल ब्रीफली जस्ट टॉक अबाउट इट। दैट मुस्लिम आइडेंटिटी क्वेश्चन, मुस्लिम पॉलिटिकल आइडेंटिटी क्वेश्चन नीडेड टू बी ब्रोकन डाउन। अच्छा। यू नो व्हाई बिकॉज़ समबडी इज सेटिंग द टोन ऑफ द डिस्कोर्स अराउंड मुस्लिम पिटिकल आइडेंटिटी क्वेश्चन फ्रॉम आउटसाइड एक्सटर्नली बीइंग सेट इट इज़ नॉट कॉन्स्टिट्यूएंसी लेड गॉट माय पॉइंट एंड व्हेन आई एम अवेयर व्हेन आई एम अवेयर दैट अ लार्जर पॉलिटिकल सेटिंग इन इंडिया हम इज़ बीइंग डन इन दिस नेम दैट देयर इज़ एन देयर इज़ अ होमोजनियस मुस्लिम आइडेंटिटी पर से ऑफ कोर्स लाइक यू नो रिलीजियसली यस यू आर बट कल्चरली लिंग्विस्टिकली फूड वाइज व्हाटएवर लाइक यू नो डिफरेंट ट्रेड्स एंड बिहेवियर ज्योग्राफिकली आर वी टॉकिंग अबाउट दैट आर वी टॉकिंग अबाउट दोज़ मुस्लिम पिटिकल आइडेंटिटीज टू क्रिएट दोज़ फ्रेमवर्क वेयर दे आर क्रिएटिंग लोकल बारगे, लोकल पिटिकल बारगे एंड मे बी यू नो मे बी वी आर इनफ्लेटिंग द एंटायर डिस्कोर्स अराउंड इट मे बी आर कन्फ्यूज्ड मे बी वी आर लाइक यू नो कन्फ्लिक्टेड इन आवर ओपिनियन इफ यू गो टू आंध्र प्रदेश इफ यू गो टू महाराष्ट्र इफ यू गो टू तमिलनाडु इफ यू गो टू केरला एवरीवेयर आई मीन यू नो व्हाई नॉट टू लाइक यू नो ब्रिंग दोज़ लुक लोकलाइज कॉल गो बैक टू द कॉन्स्टिट्यूएंसी क्रिएट योर ओन बारगेन फ्रेमवर्क वर्क ऑन इट तो वकार साहब वी हैव ऑलरेडी डिस्कस्ड अबाउट पॉलिटिकल पार्टीज का स्ट्रक्चर कैसे होता है पॉलिटिकल पार्टीज फंक्शन कैसे करती हैं सिग्नलिंग कैसे होती है कैंडिडेट्स को वो आइडेंटिफाई कैसे करते हैं अ मूवमेंट और पॉलिटिकल पार्टी में क्या कनेक्शन है ना अ पॉलिटिकल पार्टीज का एक बहुत इंटरेस्टिंग बात जो आपने बोली कि कस और कॉन्फ्लिक्ट जो है वो उसको कंट्रोल करते हैं लेकिन खत्म नहीं करते क्योंकि एसेंशियल है फंडामेंटल है क्योंकि उनको रेलेवेंट रहना है और पॉलिटिक्स ही करनी है उनका कोर ही पॉलिटिक्स है तो उसको खत्म नहीं कर सकते ऑल ऑफ दिस इज़ इंटरेस्टिंग बहुत इंपॉर्टेंट है लेकिन आई वुड वांट टू शिफ्ट द गिय्स एंड ट्राई टू अंडरस्टैंड मुस्लिम पॉलिटिक्स इन इंडिया है ना? स्टेट क्या है? व्हाट इज द स्टेट ऑफ मुस्लिम पॉलिटिक्स इन इंडिया? लेट अस स्टार्ट विद दिस क्वेश्चन। और यह जो आप जो भी आपका रिस्पांस होगा उस पे हम बिल्ड करने की कोशिश करेंगे और फदर क्वेश्चन से आपका असेसमेंट क्या है? किस स्टेट में है मुस्लिम पॉलिटिक्स इन इंडिया? बिल्कुल खत्म की स्टेज पर है या रिवाइवल की स्टेज पर है। या एग्जिस्ट करती है उसको सिर्फ मैनेज करना है या समझ में नहीं आ रहा है क्या है। हाउ डू यू लुक एट इट? बेसिकली जैसा कि मैंने इससे पहले की कॉन्वर्सेशन में बोला भी था कि सीइंग दी अह काइंड ऑफ़ पार्टिसिपेशन ऑफ द मुस्लिम कम्युनिटी। आई विल कीप दी अह मुस्लिम पॉलिटिकल आइडेंटिटी साइड जी। फॉर सम टाइम ओवे एंड वुड ओनली टॉक अबाउट लाइक यू नो दिस पर्टिकुलर प्रॉब्लम स्टेटमेंट आई बिलीव यू नो इट इज़ बीइंग रिकॉन्फिगरर्ड एक रिकॉन्फ़िगरेशन चल रहा है अ क्योंकि मुझे पता है कि जैसे हमने कहा कि भाई अभी हम इलेक्शन और डेमोक्रेसी की बात कर रहे थे इन अ प्रीवियस डिस्कशन तो मैंने कहा कि वो इवेंट है भाई भाई इलेक्शन जो इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन है वो इवेंट है। हम प्रोसेस को भूल जाते हैं और उस प्रोसेस में बहुत सारी चीजें सेट होती हैं। तो बेसिकली मेरा यह मानना है कि मुस्लिम्स का जो इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन है वो पार्टिसिपेशन ऑफ कोर्स यू नो देयर आर यू नो डिफरेंट लेवल ऑफ यू नो चर्निंग अराउंड इट मे बी नेगेटिव पॉजिटिव अ जो इसको थोड़ा सा एक लेवल पे बहस का मौजू बनाते हैं कि ये जा कहां रहा है जी क्या ये बिल्कुल आपको क्रिपल कर देगा। जैसा आपने कहा कि नॉन एकिस्टेंट है। आई डोंट बाय दैट आर्गुमेंट। उसका रीज़न ये है कि इस स्कीम ऑफ थिंग्स में जो ग्रैंड स्कीम ऑफ थिंग्स हैं जो डेमोक्रेसी के साथ हम कर रहे हैं इंडिया में। अ वो इस रियलिटी को अवॉइड नहीं कर सकता। तो इसको इसको इसको नए तरीके से मे बी रिफैक्शन करना होगा अपने आपको या यह ऑलरेडी रिफैक्शन कर रही है। अ फिर मैं इसको इसलिए कह रहा हूं कि रिफैक्शन कर रही है या फिर रिक कॉन्फिगर करेगी। उसकी वजह ये है कि फिर ये वही नजरिया है कि क्या हम उसके लिए तैयार हैं जो मैं कॉन्स्टिट्यूएंसी बारगेन के बारे में बात कर रहा था। जो मैं कह रहा था कि हम तो पार्टीज के ऊपर राइड करते हैं और पार्टीज हमारे ऊपर राइड करती हैं। वाइसवरसा तो और काफी दिनों तक चलता रहता है। तो उसका नजरिया थोड़ा सा टेक्निकली हम दूसरे मुद्दों पे चले गए थे। मैं फिर से उस पे आना चाहूंगा जो कि आपके इस सीधे वाले सवाल से जुड़ा हुआ है कि आपको माइनॉरिटी मतलब मुस्लिम पॉलिटिक्स का जो पार्टिसिपेशन है वो इसका जो अभी शेप और साइज है या अभी जो उसके इर्द-गिर्द जो नजरिया है क्या वो आपको लगता है बिल्कुल बिखर चुका है यही सवाल था आपका शायद जी बिल्कुल [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो मेरे हिसाब से वो रिकॉन्फिगर कर रहा है अपने आपको रिफैशन कर रहा है क्योंकि हम एक लेवल पे जो चीजों को देखते हैं एक बहुत बड़ी पॉलिटिकल एंटिटी है और उनका इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन बल्कि एस्पिरेशनल पार्टिसिपेशन इंडियन डेमोक्रेसी के मे बी अभी हम इलेक्टोरल इवेंट पे ज्यादा फोकस कर रहे हैं लेकिन जब प्रोसेस सेटिंग पे हम आएंगे और इसके लिए मैं बहुत ऑप्टिमिस्टिक हूं हम मे बी मैं मैं कुछ ज्यादा ही ऑप्टिमिस्टिक हूं कि ये होगा तो मुझे लगता है कि वो होने वाला और हम रिकॉन्फिगर करेंगे। वो कैसे करेंगे? एक तो यह है कि हमें हम आपको एक छोटा सा एग्जांपल देते हैं। आपने देखा होगा कि तमाम तरह की अदर बैकवर्ड क्लासेस कम्युनिटीज का जो पिटिकल स्पेस एंड ओरा है पार्टिसिपेशन का उसको बीजेपी ने रिीफाइन किया है। यू वुड सी इन बिहार यू वुड सी इन उत्तर प्रदेश पर्टिकुलरली आफ्टर द कमिंग ऑफ [गला साफ़ करने की आवाज़] बीजेपी गवर्नमेंट एंड अंडर द लीडरशिप चीफ मिनिस्टर आदित्यनाथ योगी तो वो उस तरह के जो पूरी के पूरे जो प्लैंक खड़े किए जाते हैं तो इसमें ऐसा नहीं होता है कि पार्टीज जाती हैं और कम्युनिटीज को कहती है यू आर अंडर रिप्रेजेंटेड यू आर सो एंड सो अ एक्सट्रीमली बैकवर्ड कम्युनिटी सो यू कम विद अस यू गॉट माय पॉइंट द रीज़न इज दैट दीज़ कम्युनिटीज़ आर ऑलरेडी क्रिएटिंग दोज़ स्पेसेस टू टू इंटरेक्ट एंड बारगेन जी एंड इट इज नॉट ओनली द केस वि बीजेपी अदर पार्टीज विल डू एंड आर डूइंग एल्सवेयर इन अदर स्टेट्स एस वेल। सो मेरा ये तकाजा है मेरा ये समझ है कि जो हमारा रिकॉन्फ़िगरेशन है जो मुस्लिम पॉलिटिक्स का मैं उसको जो बेस रियलिटी है उसको मैं क्वेश्चन नहीं कर रहा हूं। जो आपने कहा कि यू नो देयर आर इश्यूज ऑफकोर्स अगर आपको डेमोक्रेसी में अगर आपको लगता है कि जेनुइन जेनुइनली आपके जो कॉन्स्टिट्यूशनल राइट्स हैं लीगल राइट्स हैं आपका जो वोटिंग राइट है एसेंशियली सबसे बेसिक है अगर वो क्वेश्चन होने लगे वो क्वेश्चन होने लगे तो फिर डेमोक्रेसी का ही सवाल खड़ा हो गया आपके सामने क्योंकि आप पार्टिसिपेट ही नहीं कर रहे हो अब्सोलुटली ठीक है तो बेसिकली इसमें दो तरह के नजरियात हैं। मेरी जो समझ है एस अ पॉलिटिकल एड मैं समझता हूं कि कोई भी पॉलिटिकल पार्टी जो पावर में आती है तो उसकी अपनी रियलिटी होती है जिसका मैं बेस परसेप्शन कहता हूं। उस बेस परसेप्शन या आईडियोलॉजी को वो कहीं ना कहीं वो सिग्नल आउट करते हैं। नीचे तक जाती है चीजें। उसके इर्द-गिर्द चीजों को करने की कोशिश भी करते हैं। एंड बीजेपी काफी हद तक इस चीज को करती आई है और करने की कोशिश करती है। तो उससे हमें इस चीज को कनेक्ट करने की जरूरत नहीं है। जैसे मैंने कास्टटुएंसी बारगेन की बात करी या कॉन्स्टिट्यूएंसी में पॉलिटिकल रिकॉन्फ़िगरेशन करने की बात की तो मैं पार्टिसिपेशन की बात कर रहा हूं। और जब मैं पार्टिसिपेशन की बात कर रहा हूं तो मैं उसमें ये नहीं कह रहा हूं कि आपका बेस रियलिटी जो है बेस रियलिटी जैसे आप मुझसे पूछे क्या है? ऑफकोर्स लाइक यू नो देयर इज अ न्यू पोलिटिकल रियलिटी वेयर मुस्लिम्स पोलिटिकली मे बी हैव बीन रिडंडेंट फॉर लाइक यू नो पास्ट 10 12 13 इयर्स मे बी नेक्स्ट इलेक्शन एज वेल आई डोंट नो आई मीन एनीथिंग कैन हैपन सो दैट्स हाउ यू रीड इट राइट बिलकुल दैट्स हाउ यू रीड इट दैट्स हाउ एवरीवन एल्स इज़ रीड इट यस बट आई मीन मे बी लाइक यू नो आई विल रीड इट डिफरेंटली आई विल रीड इट डिफरेंटली अह बिकॉज़ यू नो मे बी यू नो इफ यू बिलीव मे बी बिफोर 2014 यू हैड ऑल चांसेस राइट सो यू वर हैप्पी राइट इवन देन यू वर पार्टिसिपेटिंग वोटिंग मे बी यू हैड मोर एजेंसी मोर वॉइसेस इन इन पावर कॉरिडोरस मे बी आई डोंट नो आई मीन मे बी बट आई बिलीव मे बी राइट नाउ इट इज़ एबिस्मल राइट सो द थिंग इज़ यू नो दैट इज हाउ वी आर गोइंग आउट आई मीन गोइंग अहेड काउंटिंग ऑन यू नो आवर डेस्टिनी आवर पोलिटिकल पार्टिसिपेशन एंड पोलिटिकल पार्टिसिपेशन लेट मी टेल यू वी हेव ऑलवेज बीन वेरी हैप्पी पार्टिसिपेटिंग वोटिंग बट दैट इज वेयर वी आर स्टक वी हाव बीन वोटिंग यू गट माई पॉइंट आई मीन आई आई विल आई विल एक्सप्रेस इट मोर लाइक क्लियरली | वी हाव बीन वोटिंग फॉर वेरी वेरीरी लॉन्ग टाइम वी वोट इट फॉर ऑल रीजनल पार्टीज मे बी एवरीवेयर एनीवेयर वी फाउंड लाइक यू नो देयर कुड बी सम एजेंसी वेयर वी कुड फंक्शन इन अ मैनर वेयर वी आर हर्ड और मे बी वी कैन कॉल इट लाइक यू नो मोर सॉर्ट ऑफ़ लाइक द बेसिक पॉलिटिकल कन्वीनियंस व्हिच वी कुड रिसीव फ्रॉम एनी पार्टी दैट्स आई मीन वी आर अबाउट टू डू इट इन उत्तर प्रदेश 27 इलेक्शन आई एम टेलिंग यू हियर अच्छा देयर इज़ नो कॉन्स्टिट्यूएंसी बारगेन यस देयर इज़ नो म्युनिसिपल फ्रेमवर्क यू गॉट माय पॉइंट राइट यस देयर इज़ नो इशू नथिंग देयर इज़ नो म्युनिसिपल बिहेवियर नो म्युनिसिपल फ्रेम नो सिविक डेवलपमेंटल इश्यूज नथिंग कुछ नहीं सो व्हाट आई एम सेइंग इज व्हेन आई एम टॉकिंग अबाउट रिकॉन्फिगरेशन ऑफ मुस्लिम आइडेंटिटी एंड मुस्लिम पॉलिटिक्स इट शुड गो बैक टू कॉन्स्टिट्यूएंसी इट शुड गो बैक टू वार्ड्स इट शुड टॉक अबाउट मे बी रियली शुड एंड आई एम टेलिंग यू डोंट डोंट ट्राई टू लुक फॉर अ पैरेलल यू नो व्हाई आई एम सेइंग पैरेलल यू आर सेइंग दैट मेजोरिटी और एक्स वाई जी कम्युनिटी इज़ नॉट डूइंग इट दे आर नॉट टॉकिंग अबाउट सिविक राइट्स दे आर नॉट टॉकिंग अबाउट डेवलपमेंटल इश्यूज दे आर नॉट टॉकिंग अबाउट म्युनिसिसिसिसिसिसिसिसिसिसिसप राइट्स दे आर नॉट टॉकिंग अबाउट अर्बन रूरल राइट्स व्हाटएवर एंड दैट्स व्हाई यू शुड नॉट डू इट | यू गॉट माय पॉइंट | बट द थिंग इज़ व्हाट दे आर डूइंग इट इफ यू बिलीव दे इफ यू बिलीव दे आर डूइंग इट एंड ऑफ कोर्स लाइक यू नीड शुड वर्क इन अपोजिशन टू देम सो कार्व आउट योर ओन प्लान यू नीड टू रिकॉन्फिगर इट एंड व्हेन आई एम सेइंग रिकॉन्फिगरेशन आई एम नॉट टॉकिंग अबाउट दैट दैट बेस स्ट्रक्चर बेस स्ट्रक्चर इज देयर टेल मी आई आई अंडरस्टैंड आप जो कह रहे हैं आई अंडरस्टैंड बेस रियलिटी बेस स्ट्रक्चर ऑफ द परसेप्शन और मे बी आवर आवर आइडेंटिटी क्वेश्चन द परसेप्शन कमिंग आउट ऑफ आइडेंटिटी क्वेश्चन व्हिच व्हिच व्हिच बिकम्स रेलेवेंट व्हेन वी इनवोक जिओपॉलिटिक्स और मे बी लाइक यू नो ग्लोबल उमा और ब्रदरहुड बट दैट प्रोबेब्ली नॉट द लैंग्वेज दैट प्रोबेबब्ली शुडंट बी द लैंग्वेज फॉर डेमोक्रेटिक पार्टिसिपेशन इन अ वेरी क्लीनिकल मैनर मैनर एंड एट द कॉन्स्टीट्यूएंसी लेवल कमिंग अप अगेन सपोज लाइक यू नो आई एम गोइंग टू बिहार और लाइक मे बी इन एनी कॉन्स्टिट्यूएंसी फॉर दैट मैटर इन सिद्धार्थ नगर इन योर डिस्ट्रिक्ट राइट एक्स डिस्ट्रिक्ट एक्स कॉन्स्टिट्यूएंसी एंड यू बिलीव दैट यू शुड वोट फॉर मे बी ए पार्टी और बी पार्टी और सी पार्टी जी यू यू आर ऑलरेडी डिसाइडेड आई मीन एंड देयर इज नो मे बी लाइक यू नो नो डिस्कशन अमोंग दी इंटेलेक्चुअल्स मे बी आई मीन व्हाटएवर लाइक यू नो इंटेलेक्चुअल अवेलेबल और पर्सनालिटीज़ अवेलेबल हु कुड लाइक यू रियली थिंक अबाउट इट यू नो हुम टू वोट एंड व्हाई टू वोट एंड व्हाट इज़ आवर एजेंडा ऑफ़ वोटिंग इन दिस इलेक्शन बिकॉज़ यू आर एक्सटर्नली बीइंग कंट्रोल्ड। यू आर वोटिंग दैट यू नो इफ वी विल नॉट वोट दिस पर्सन बीजेपी इज़ कमिंग अह अह कमिंग अप विद यू नो ah यूनिफार्म सिविल कोड। यू गॉट माय पॉइंट्स। सो आई अंडरस्टैंड अनलेस यू डू नॉट रिकॉन्फिगर योर ओन कॉन्स्टिट्यूएंसी पॉलिटिक्स एंड आई एम नॉट सेइंग दैट यू नो कॉन्स्टिट्यूएंसी व्हेन यू रिकॉन्फिगर योर कॉन्स्टीट्यूएंसी पॉलिटिक्स यू एसेंशियली लुक फॉर युवर ओन कैंडिडेचर। यू डोंट ऑलवेज लुक फॉर योर ओन कैंडिडेचर। यू लुक फॉर मे बी इट्स वेरी आइडियल। मे बी यू कैन से आई ऍम टॉकिंग वेरी आइडियली। इट डजंट हैपन। बट आई एम टेलिंग यू यू कैन नॉट डू द थिंग वि यू बिलीव योर अपोनेंट्स आर डूइंग इट्स ओनली मेकिंग देम रेलेवेंट देयर अगेन दो सवाल यहां पे आते हैं मेरे ज़हन में [नाक से की जाने वाली आवाज़] एक सवाल तो यह कि अगर आपको पॉलिटिक्स करनी है और पॉलिटिक्स जो है वो पॉलिटिक्स ऑफ वोटिंग नहीं करनी पॉलिटिक्स ऑफ पार्टिसिपेशन करना है। दैट्स व्हाट यू आर सेइंग। ठीक है? वोटिंग को ही मैं पार्टिसिपेशन मान रहा हूं। मैं देखिए जो हमारा राइट है वोटिंग का थोड़ा सा समय लेता हूं आपका और हम एज एज अ वोटर ये हमारा सिटीजन राइट है। ठीक है? और ये मैच्योर होता है। जी उस प्रोसेस में जो इलेक्टोरल इवेंट पहला हुआ उसका 5 साल का जो पीरियड है उसके बाद दूसरा होता है। उस बीच का जो प्रोसेस है वहां पे डेमोक्रेसी पॉलिश होती है। क्योंकि वहां पे सरकारें ग्रीवेंस रेड रेसल का मैकेनिज्म ओपन करती हैं। सुनती हैं, समझती हैं। वहां पर सिटीजनशिप के दायरे बनते हैं। मतलब थ्योरेटिकली स्पीकिंग मतलब हर जगह यही समझ है। तो वहां पे दायरे बनते हैं। तो मैं जो कहना चाह रहा था आपसे कि पार्टिसिपेट तो हम करते ही आए हैं। आज भी कहीं उठाइए और अगर कॉन्स्टिट्यूएंसी में सिग्निफिकेंट मुस्लिम पापुलेशन है तो यू विल फाइंड कि ठीक-ठाक जाकर के वोट करके चले आए। तो पीपल आर अवेयर ऑफ दिस राइट एंड इट्स ओके इट्स फैंटास्टिक आई एम टेलिंग यू। व्हाट आई एम सेइंग इज यू नो नाउ कम बैक टू योर कॉन्सीट्यूएंसी। बिकॉज़ यू आर बीइंग एक्सटर्नली ड्रिवन। हम एक्सटर्नल कॉज कुछ भी हो सकते हैं। मैं और आप बैठकर के इंटेलेक्चुअलाइज कर सकते हैं। देयर इज़ अ बिग ह्यूज डेंजर यू नो आई मीन इजराइल मे न्यूक ईरान हां हां ओके आई मीन यू कैन टॉक अबाउट इट एंड मे बी यू नो दे आर पीपल हु माइट गेट अफेक्टेड एंड मे राइट समथिंग ऑन सोशल मीडिया एंड एंड ही इज़ अ बिग चैप एंड मे इन्फ्लुएंस एंड नंबर ऑफ़ पीपल अराउंड यू नो बट डस दैट सफाइस आवर क्वेश्चन मे बी इन शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म व्हाटएवर यू स्पीक सो या रिटर्न टू कॉन्सिट्यूएंसी लेट्स स्टिक टू दिस आईडिया या रिटर्न टू कॉन्स्टिट्यूएंसी इन अ सेंस वर्क लोकली ट्राई टू सी थिंग्स और वहां से फिर बिल्ड अप कीजिए उसको आई अंडरस्टैंड दैट बट [नाक से की जाने वाली आवाज़] लेट अस लुक एट एआईएमआईएम बिकॉज़ एक मॉडल जो एकिस्टिंग मॉडल जो हमारे सामने है वो ये है वो क्या कर रही है क्या नहीं कर रही है एक जो चीज उसकी उसकी आइडेंट िटी के साथ अटैच्ड है वो मुस्लिम है। तो वो जो कुछ भी अचीव कर रही है वो उस आइडेंटिटी की वजह से कर रही है और जो कुछ भी लूज कर रही है उस आइडेंटिटी की वजह से कर रही है। दैट इज वन आर्गुमेंट। दूसरा आर्गुमेंट यह है कि साहब उसमें आइडेंटिटी का कोई क्वेश्चन नहीं है। ये उनकी स्ट्रेटजी की वजह से यू लूज और गेन कर रहे हैं। ठीक है? ये सिर्फ नाम नहीं होता। तो यह जो आप बात कर रहे हैं कि गो बैक टू कॉनस्टीटुएंसी बिल्ड योरसेल्फ एंड ऑल दैट और फिर पार्टिसिपेट करो जैसे पार्टिसिपेट करते हुए आए हो बट मोर इनफॉर्म्ड पार्टिसिपेशन होना चाहिए और एक्टिव पार्टिसिपेशन होना चाहिए और जिसको कहते हैं फ्रीक्वेंट इंगेजमेंट होना चाहिए और डेमोक्रेटिक होना चाहिए इंसिडेंटल नहीं होना चाहिए कि साहब कुछ हो गया तो बोल रहे हैं। ठीक है? कुछ इवेंट हो गया तो बोलना स्टार्ट किया। एक रेगुलर इंगेज्ड कन्वर्सेशन होनी जरूरी है। ठीक है? दैट इज व्हाट एआईएमआईएम इज डूइंग इन योर असेसमेंट। डस दैट वर्क और डस दैट नॉट वर्क? आई डोंट थिंक एमआईएम इज़ वर्किंग दैट वे एंड आई स्टिल बिलीव एमआईएम इज़ हैविंग ऑल पॉलिटिकल एफर्ट टू बी रेलेवेंट अराउंड। आई एम आई आई विल स्पीक एज अ पिटिकल कंसल्टिंग और एड चैप। सो द थिंग इज यू नो आई मीन यू आर वेरी राइट दे दे हैव बीन फाइंडिंग गुड लक अराउंड आई मीन मे बी इन तेलंगाना दे कास्ट नॉट कंटेस्ट ओनली इन हैदराबाद सिटी एरिया बट दे गो आउटसाइड एस वेल यू नो आई मीन इंटरेस्टिंग थिंग इज दैट नो डाउट इफ यू वुड सी लाइक यू नो दिस दिस स्पेस ऑफ़ यू नो मुस्लिम बीइंग पोलिटिकली कॉर्नर्ड र्ड सो यू टॉक अबाउट मुस्लिम बीइंग पोलिटिकली कॉर्नर्ड देयर इज़ एन आइडेंटिटी बीइंग कॉर्नर्ड राइट सो देयर इज़ एन आइडेंटिटी ऑफ़ एआईएमआईएम राइट एनी सक्सेस स्टोरी विल क्रिएट थ्रिल अराउंड महाराष्ट्र इलेक्शन यू नो दे वन ह्यूज नंबर ऑफ़ सीट्स इन लोकल नगर निकाय चुनाव राइट यू नो आई मीन इलेक्शंस लोकल म्युनिसिपल इलेक्शन एंड काउंसिल इलेक्शन काउंसिल इलेक्शन यू टॉक अबाउट इट्स वेरी आई मीन वेरी वेरी नेचुरल आई मीन टू रिएक्ट और मे बी रिस्प्स रिस्पोंड टू इट राइट कमिंग बैक टू व्हाट दे आर डूइंग दे आर डूइंग फैंटास्टिक जॉब बट लेट मी टेल यू लास्ट आई आई मीन करेक्ट मी इफ आई एम रोंग आई मीन आल्सो गेट चेक द डेटा इन उत्तर प्रदेश इन 2017 दे कंटेस्टेड ऑलमोस्ट ऑन 36 और 37 सीट्स इन यूपी इन उत्तर प्रदेश अच्छा एंड उनकी जमानत ज्त हुई है 36 सीटों पे दे लॉस्ट ऑल एक पे शायद नहीं हुई थी या 36 या 36 या 37 पे पूरे पे हो गई थी और उसके बाद जो है चेक करना होगा इसको उसके [नाक से की जाने वाली आवाज़] बाद इन्होंने 22 में 90 प्लस सीट्स पे कंटेस्ट किया इन्होंने उत्तर प्रदेश में उत्तर प्रदेश में एक को छोड़ के सब में जमानत जब्त हुई मेरा कहने का मतलब यह है कि मैंने कहा ना कि सम टाइम व्हाट हैपेंस इज लाइक यू नो देयर वास अ टाइम व्हेन एआई एमआईएम आई मीन हैपेंस टू बी अ ट्रेडिशनलिस्ट पार्टी यू नो आई मीन एंड हैज़ यू नो इट हैज़ अ हिस्ट्री अ ऑफ़ अप्रोचिंग डिफरेंट इशूज़ स्पेशली इन कनेक्शन टू हैदराबाद इन एडजेसेंट रीजन लेकिन एक समय एक वक्त के साथ-साथ जो है ना एआईएमआईएम का जो पूरा फ्रेमवर्क था जिसको मैं आपको बता दूं जेनुइनली बता रहा हूं व्हेन आई वास इन अ लीडर आई हैड नॉट आई मीन येट गॉन टू फॉर मास्टर्स पोस्ट ग्रैंड तो मुझे उम्मीद थी कि हो सकता है कि वो एक स्पेस बनाएंगे लेकिन पार्टी ने जो कायद बनाया जिनको बहुत लोग कायद भी कहते हैं असद साहब को असद साहब पार्टी से बड़े बन गए मैं जानता हूं उनकी पार्टी में बहुत डेमोक्रेसी होगी, बहुत सारी चीजें होंगी। लेकिन बाहर ऐसा अपील आता है, ऐसा समझ में आता है कि पार्टी जो है उनके पीछे चलती है। वो पार्टी के बहुत आगे चलते हैं। आप मेरी बात समझिएगा कि जब पार्टी शायद अभी बहुत सारी पार्टीज के साथ ये केस है। लेकिन एआईएमआईएम के साथ ये काफी दिनों से है। इसीलिए [नाक से की जाने वाली आवाज़] मैं अगर आपसे झटके में पूछूं कि पॉपुलर स्टेट्स जहां पे एमआईएम चुनाव लड़ती है। अगर कॉम्बिनर से पूछें कि वहां के स्टेट प्रेसिडेंट का नाम बता दीजिए हम क्योंकि आप इलेक्शन लड़ने जाते हो और आप बहुत मेहनत करते हो दो-ती महीने 4 महीने तो आप नाम बता हालांकि एफर्ट ले रहे हैं लेकिन मैं इसको जेनुइनली मानता हूं कि ये हमारे उस एस्पिरेशन के ना पूरा होने की वजह से आ रही है। जिसमें हम ये कहते हैं कि हम तो हर तरफ से कॉर्नर्ड हैं। अब एक ही पार्टी है जो कुछ कर पा रही है। हालांकि उस पार्टी के पास मुझे ऐसा नहीं लगता कि कोई फुल प्रूफ कोई प्लान है। लोगों को लगता होगा क्योंकि लोग लोगों की मेमोरी शॉर्ट है। मेरी भी मेमोरी शॉर्ट है। क्योंकि मैं भी विजुअल्स देखता हूं Instagram और एक्स पे चीजें बदलती रहती है। इट्स क्वाइट एफएमएल अराउंड यू नो थिंग्स आर आई मीन डिसअपीयर होती रहती हैं। उसमें ये लोग आते हैं इलेक्शन लड़ते हैं। आई डोंट थिंक यू नो, आई डोंट थिंक आई आई स्टिल बिलीव एंड आई स्ट्रोंगली बिलीव। [नाक से की जाने वाली आवाज़] मेनी ऑफ़ माय फ्रेंड्स आर लाइक यू नो वर्किंग अराउंड एंड डूइंग गुड विद इन दिस पार्टी। बट आई स्टिल बिलीव दैट हमारा जो एप्रिसिएशन फॉर फॉर दिस पार्टी डस कम फ्रॉम वही जो हमारी कॉर्नर्ड पिटिकल सेंसिबिलिटी है। हम तो कॉर्नर्ड है तो कम से कम ये तो कम से कम कोई ना कोई है। आप मेरी बात समझिएगा। मैं समझ गया। नहीं। लेकिन फिर अगेन लेट्स गो बैक टू आवर इनिशियल डिस्कशन। ठीक है? मुझे याद है आपने यह कहा पॉलिट पार्टीज इंटेलिजेंट होती हैं। पार्टीज प्रगमेटिक होती हैं। ठीक है? पार्टीज [नाक से की जाने वाली आवाज़] प्रैक्टिकल देखती हैं। यू नो दे आर प्रैक्टिकल। बहुत आइडियोलॉजिकल नहीं होती। उनका रिस्क भी जो होता है वो कैलकुलेटेड रिस्क होता है। और वो इंक्लाइंड होता है टुवर्ड्स डिविडेंड कि सब कुछ रिटर्न मिलेगा। ठीक है? अंटिल एंड अनलेस कोई पार्टी इस प्रोसेस में हो कि वह अपने आप को टूटने से या खत्म होने से नहीं बचा पा रही है। जैसे [नाक से की जाने वाली आवाज़] बीएसपी है। ठीक है? क्या वजूहात हैं जो भी है लेकिन वो अपने को खत्म होने से बचा नहीं पा रही है। अब वो कैसे रिवाइव होगी या रिवाइव हो रही है? हमको नजर नहीं आ रहा। दैट्स अ डिफरेंट थिंग। या फिर बिहार में जेडीयू है। ठीक है? वो रिवाइव होगी नहीं होगी खत्म हो रही है। एक ट्रेंड है। ठीक है? [नाक से की जाने वाली आवाज़] कोई पार्टी एक्टिवली इस आर्गुमेंट को अगर हम बाय करें। कोई पार्टी एक्टिवली ऐसा लाइन ऑफ थॉट या एक्शन अडॉप्ट नहीं करेगी जिससे वो इररेलेवेंट हो जाए। हम जिससे वो डाइल्यूट हो जाए। गोइंग बाय दैट यू बीइंग अ पॉलिटिकल एड पर्सन बहुत से दूसरे लोग हैं। बहुत आम फहम बात है। जो भी थोड़ा बहुत पॉलिटिक्स को देखता है, समझता है, जानने की कोशिश करता है, वो यह कहता है कि साहब स्ट्रेटजी गलत है। ये आप हर जगह जाके इलेक्शन लड़ रहे हैं। आप बहुत डाइलट कर रहे हैं। मैनेज भी नहीं कर पा रहे हैं। क्या कर रहे हैं आप? पैन इंडिया बनाना चाह रहे हैं। ठीक है? दूसरी पार्टी को बेनिफिट हो रहा है। कम्युनल हो जा रही है चीज। बट द क्वेश्चन इज यू आर स्टिल डूइंग इट। तो क्या यह जानबूझकर बेवकूफी है? व्हिच आई डोंट थिंक बिकॉज़ वी आर गोइंग वि द लॉजिक दैट पार्टीज आर प्रगमेटिक। है ना? जो उस बिजनेस में है लुक एट असदुद्दीन ओवैसी। जो उस बिजनेस में है इंसान वह पैदा पॉलिटिक्स में हुआ है। उसके अब्बा पॉलिटिक्स में थे। उसका छोटा भाई पॉलिटिक्स में था। वो पूरी जिंदगी उसने पॉलिटिक्स में गुजारी है। वो इतना बड़ा ब्लंडर जानबूझ के कैसे कर सकता है जो सबको समझ में आ रहा है कि ब्लंडर है। हाउ डू यू रीड दिस? आई डोंट कॉल इट ब्लंडर। देखिए पिटिकल पार्टी जैसे मैंने कहा कि ये प्रसीड करते हैं। उनके फादर भी प्रसीड करते थे। जी पार्टी उसके बाद ही आती थी। तो अगर यह कहीं इलेक्शन लड़ने जाते हैं तो बिल्कुल इलेक्शन लड़ना उनका राइट भी है। जाना भी चाहिए पार्टी के लिए जरूरी भी है। एक होता है सीजनल आप गए इलेक्शन लड़े और आप चले आए। और आपने एफर्ट भी लिया। बहुत सारे स्टेट में एफर्ट भी ले रहे हैं। इवन आई आई आई वुड सी लाइक यू नो महाराष्ट्र दे हैव बीन स्पेशली फोकसिंग ऑन लोकल यू नो मिनिसिपल काउंसिल एंड कॉर्पोरेशन इलेक्शन फैंटास्टिक मेरा तो वो कहना ही नहीं है और मैं ये मानता हूं कि ये उनका पूरापूरा हक है। किसी भी पार्टी का हक है। जी बिल्कुल यहां असद साहब का हक है। पार्टी को वही लेके जा रहे हैं। और जो यह इल्जाम और यह सब बातें मतलब यह मेरे पल्ले नहीं पड़ती है। और यह एक तरीके से दिल्ली में उनको रेलेवेंट बनाती है। आप ये समझिएगा कि असद साहब दिल्ली में हैदराबाद के इश्यूज से रेलेवेंट होते हैं। नो दिल्ली में जब वो लेवेंट होते हैं तो बहुत सारे इश्यूज उठाते हैं। बहुत ही मैच्योर पार्लियामेंटेरियन है। काफी जमाने से हमने देख के बड़े हुए हैं हम लोग उनको लेकिन उनके पास उनकी थाली में बहुत सारे इश्यूज होते हैं। वो बंगाल से, आसाम से, यूपी से। ठीक है? इसलिए भी पार्टी को कहीं ना कहीं थोड़ा सा जाते रहना पड़ेगा। जाते रहना चाहिए। वो रेलेवेंट है उनकी नजर में। मैं उस पे तो जा ही नहीं रहा हूं। वो करना भी चाहिए। उसमें कोई गुरेज भी नहीं है और उनकी पार्टी इसी तरीके से फंक्शन करती है। जो दूसरी बात मैंने बताई थी इससे पहले वाले कॉन्वर्सेशन में कि एक प्रॉब्लम है कि महाराष्ट्र में इससे शुरू हुआ है कि अब थोड़ा बहुत एक दो स्टेट में लोग रिकॉग्नाइज करने लगे हैं लीडरशिप को। लेकिन लीडरशिप बहुत सारी स्टेट में नहीं है। इम्तियाज जलील साहब हैं तो औरंगाबाद से तो थोड़ी विज़िबल लीडरशिप है महाराष्ट्र में। राइट? उस तरीके से यूपी में भी शायद आने वाले वक्त में हो जाए। उनका पूरा राइट है लड़ सकते हैं। लेकिन मेरा सिर्फ इतना कहना है कि इलेक्शन एक ऐसी कम्युनिटी के लिए आप अगर आप रिप्रेजेंट करने की बात बोल रहे हैं। हालांकि देखिए कॉन्स्टिट्यूशनली स्पीकिंग आपको भी पता है कि बहुत सारी चीजें बड़ी आइडियल है जी। और यहां पर हम पॉलिटिकली स्पीकिंग करते हैं कि हम वो कर क्या रहे हैं। बीइंग अ पार्टी आई मीन दे क्लेम टू रिप्रेजेंट मुस्लिम्स एंड दे वुड वांट टू अक्रॉस इंडिया यस या राइट दैट्स दे वांट दैट्स दे वांट एंड दैट्स आई मीन फैंटास्टिक दे शुड डू दैट राइट दे शुड गो एवरीवेयर आई मीन गो टू दिल्ली गो टू पंजाब हिमाचल आई मीन हिमाचल में बहुत कम है मुस्लिम बट उत्तराखंड इफ दे आर गोइंग बट अब यही तो सवाल आता है कि सपोज यू आर 10% पापुलेशन यू वंट गो देयर सपोज़ यू आर 40% ऑफ़ द पापुलेशन यू गो टू बंगाल राइट 35 33 34% पापुलेशन और 30% पापुलेशन 27% पापुलेशन इनफैक्ट दैट्स फॉर आसाम सो व्हाट आई एम सेइंग इज़ अ इट्स नॉट मिशन इन पॉलिटिक्स इट्स बीइंग रेलेवेंट एस अ पार्टी आई मीन यू यू वुड वांट टू बिकम रेलेवेंट एंड इट्स वन ऑफ़ द ड्राइव यू वुड डू आई मीन इट इट्स लाइक इट हैज़ कॉन्सक्वेंसेस कॉन्सक्वेंशियल इन टर्म्स ऑफ लाइक यू नो यू गेटिंग मीडिया अटेंशन पीपल आर टॉकिंग अबाउट यू तेजस्वी यादव इस टॉकिंग अबाउट यू एंड मे बी लाइक यू नो अपोजिशन का जो पूरा खमा है एक तरफ का जो यू नो आई मीन जो सेुलर पार्टीज हैं जी जो अपने आप को उस टेनर में डिफाइन करती हैं इन पब्लिक स्पेस और मीडिया स्पेस वो कहती है कि देखिए आ गए वोट काटने के लिए लेट्स टेक अ स्टेफ फदर दैट जो आप बात कर रहे हैं। लेट्स [नाक से की जाने वाली आवाज़] टाई दिस। इसको कनेक्ट करते हैं आपकी उस बात से। लेट्स गो बैक टू कंस्टीट्यूएंसी। या ठीक है? ये जो आपका कहना है कि भ लोकल काम करके कंस्टीट्यूएंसी में जाइए। वहां सिविक बिहेवियर देखिए। वहां के इश्यूज को देखिए। वहां से बिल्ड कीजिए। ठीक है? आप एक्टिविज्म कर सकते हैं लोकली। लेकिन अगर आप पॉलिटिक्स करना चाहें तो आपको कोई ना कोई बैनर चाहिए, कोई ना कोई आइडेंटिटी चाहिए, कोई ना कोई जिसको कहते हैं प्लेटफार्म चाहिए जिसके बेसिस पर आप करें और जिसकी बेसिस पर आप बढ़े डोंट यू थिंक एआईएमआईएम इज गिविंग यू दैट बाय गोइंग टू दीज़ प्लेसेस। वहां पहुंच गई। आई बिलीव सो एंड व्हाई ओनली एमआईएम नहीं आईआईएमआईएम को अभी स्टिक करते हैं। लेट अस लेट अस स्टिक टू एआईएमआईएम मुस्लिम पॉलिटिक्स की बात कीजिए। आई मीन जस्ट लाइक मेकिंग इट क्लियर ऑफ कोर्स लाइक एमआईएम दैट्स दैट्स व्हाट आई वास टेलिंग यू दैट मे बी यू वी बिलीव एंड मे बी अ मुस्लिम कम्युनिटी बिलीव दैट दे आर पॉलिटिकली सो मच कॉर्नर्ड दैट दे बिलीव दैट एमआईएम इज़ देयर टू रेस्क्यू देम पॉलिटिकली बट आई बिलीव इट्स नॉट द केस एंड दैट्स व्हाई इवन इन कॉन्स्टिट्यूशन कॉन्स्टिट्यूएंसी रिकॉन्फिगरेशन अह मुस्लिम इलेक्टोरेट अह शुड यू नो आई मीन बिलीव दैट दे मेनी पिटिकल स्टेकहोल्डर्स टू रिलाई ऑन दैट्स व्हाट आई बिलीव व्हिच मींस व्हिच व्हिच मींस पार्टीज टू रिलाई ऑन व्हिच मींस आप उसको और इंटरेस्टिंग बना दें व्हिच मींस इट्स नॉट ओनली कि आप एक बैनर ढूंढिए जो आपकी आइडेंटिटी पे स्टिक करता है आप उसको पकड़े और उसके थ्रू ग्रो करें आप वहां भी अपने ऑप्शंस ढूंढिए बिकॉज़ पॉलिटिक्स इज इनहेरेंटली जो आपने बात बोली थी पॉलिटिक्स इज़ इनहेरेंटली क्यटिक मैं सर एक बात बता दूं आपको इफ आई आस्क माय प्रजापति फ्रेंड इन उत्तर प्रदेश जी दैट दिस टाइम इन इलेक्शन सपोज लाइक हाइपोथेटिकल सिचुएशन इट्स इट्स इट्स अ बिग कम्युनिटी राइट एंड देयर इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन इज़ यू नो समवेयर मेकिंग सम पार्टी सक्सेसफुल और अनसक्सेसफुल यू नो सो व्हाट आई एम सेइंग इज़ इफ [नाक से की जाने वाली आवाज़] इफ दे और इवन अ माइक्रो कम्युनिटी ओबीसी और एससी और एसटी नॉट एस एसटी बिकॉज़ उत्तर प्रदेश में एसटी बहुत कम है। तो इन्हीं का एग्जांपल लेते हैं। मैं तो बेसिक बात बता रहा हूं। जब आप पढ़ते हैं कि राजपूत या ब्राह्मिन हिल रहे हैं। एक विंडो ऑफ अपॉर्चुनिटी एक डिस्कशन टॉक एक बारगेन ओपन कर रहे हैं पिटिकल यू नो आई मीन बहुत हो गया यह रीजन है उनका स्पेसिफिक अब तो हम यू नो व्हाट द कम्युनिटीज आर शेपिंग द पॉलिटिक्स दे क्रिएटिंग दोज़ बार्गेन स्ट्रक्चर दे आर प्रगमेटिक व्हाट आई एम सेइंग इज़ व्हेन आई एम टॉकिंग अबाउट कॉन्स्टिट्यूएंसी रिकॉन्फिगरेशन और मे बी कॉन्फिगरेशन व्हाटएवर यू कॉल इट हमारे हमारे बीच में हम उसको वहां पर निर्धारित कर सके। यार एक बात बताइए यू आस्क एनी मुस्लिम बिकॉज़ यू नो आई मीन ऑफ कोर्स देयर इज अ लार्जर क्वेश्चन ऑफ यू नो आल्सो लाइक यू नो मेनी ऑफ़ द पब्लिक सर्वेंट। व्हेन नॉर्थ इंडियन प्लेन स्पेशली द एमएलएस एंड अदर ऑफिसेस। दे आर नॉट वेरी ओपन एंड रिसेप्टिव टू टू सिटीजंस। देयर हैज़ बीन केस। आई मीन आई आई विल हैव टू चेक इफ आई आई एम रोंग बट इट हैज़ बीन द केस व्हेन वी वर देयर एंड आई स्टिल बिलीव इट इज़ द केस। यू नो यू आर ऑलरेडी सो अफ्रेड ऑफ लाइक यू नो टॉकिंग टू ऑल दीज़ अथॉरिटीज़। आई एम टॉकिंग अबाउट आस्किंग फॉर दिस बारगेन एस बेसिक एस वी कुड आई मीन इमेजिन एट द बेस्ट लेवल। हूं, हम हूं, हाउ मेनी पीपल आर यू नो गोइंग टू एमएलए ऑफिस एंड टॉकिंग अबाउट सम लाइक यू नो थिंग टू हैपेन यू नो डेवलपमेंट और हेल्थ और व्हाटएवर। आई एम आई एम आई एम नॉट टॉकिंग अबाउट एनीथिंग व्हिच इज़ कमिंग फ्रॉम यू नो मे बी डिफरेंट गैलेक्सी इट्स ऑल देयर एंड दैट्स व्हाई इट बिकम्सेंट। दैट्स व्हाई एमआईएम इजेंट आई एम सेइंग एमआईएम इजेंट एआई एमआईएम इजेंट बट इट कैन नॉट रेस्क्यू इन दैट सेंस कि आप साहब कहें कि यही रेस्क्यूअर है हमारा एंड अगेन यही प्लैंक यूज़ करना अगेन आई एम टॉकिंग अबाउट प्रजापति ब्राह्मणस ई ईच एंड एव्री इलेक्शन इन उत्तर प्रदेश एवरीवेयर यू गो टू बिहार यू यू वुड सी लाइक यू नो यू वुड सी देयर आर महादलिस ओबीसीस एंड एंड एंड दे दे अगेन लाइक यू नो दे हैव एक्सट्रीमली बैकवर्ड कम्युनिटीज़। हम् सो ऑल आर लाइक यू नो एडजिस्टिंग एंड रीऐड। ऑफ़ कोर्स थ्रू डिफरेंट अलायंस पार्टनर्स एज वेल। जी। बट दे दे हैव देयर बार्गेन टैक्टिस ओपन। यू नो पोलिटिकली वी नीड दैट। वी नो वी वुड वांट दैट। इफ यू कुड गिव अस, वी विल कम टुगेदर एंड वी हैव लो लॉस्ट दैट प्लैंक। ओनली बिकॉज़ आवर वी मे बी लाइक यू नो आवर डिस्कशन अराउंड दैट सुपर बेस वी क्रिएटेड द परसेप्शन वी आर ब्रिंगिंग एव्री फ्रॉम एवरीवेयर कनेक्टिंग इट टू जिओपॉलिटिक्स कनेक्टिंग इट टू लार्जर क्वेश्चन व्हाट इज हैपनिंग आई नो देयर आर इश्यूज समझ गया आई नो दैट इज मेकिंग यू नॉट टू बिलीव इन योर लोकल कॉन्स्टिट्यूएंसी दैट इज मेकिंग यू श योर कॉल्स पोलिटिकल कॉल्स अगेन अगर ऐसा है व्हेन आई अंडरस्टैंड व्हाट यू आर सेइंग आर यू हिंटिंग दैट द स्टार्टिंग पॉइंट फॉर पॉलिटिक्स इज़ एक्टिविज़्म आई आई आई रियली बिलीव दैट एक्टिव एक्टिविज़्म इज़ अ नोबल यू नो जॉब और मे बी पीपल आई मीन ट्राई टू गेट इन्वॉल्व्ड सॉर्ट ऑफ़ यू नो थिंग्स चैंपेनिंग अबाउट राइट्स एंड अ ऑफ़ डिफरेंट यू नो ऑन डिफरेंट इश्यूज आई आई रियली रिस्पेक्ट ऑल दी थिंग्स बट आई बिलीव टू एसेंशियली मेक मेक अ लार्जर केस इन इन यू नो पॉलिटिकल स्पेस आई थिंक एक्टिविज़्म मे गिव यू अ वन आइडेंटिटी पुश बट इट इज़ ऑल ऑलमोस्ट लाइक यू नो नॉन एक्टिविज़्म स्पेस अह व्हिच व्हिच क्रिएट्स दोज़ स्ट्रक्चर व्हिच इज़ व्हिच इज़ नीडेड इन डेमोक्रेसी एंड दैट हैज़ बीन यू नो दिस द सिस्टेटिक अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ माइंड। नहीं। आई अंडरस्टैंड। आई कंप्लीट गॉट आई कंप्लीट गॉट माय माइंड। आई आई कंप्लीट रिलेट टू यू व्हाट यू आर सेइंग व्हेन आप वो इलेक्शन फॉर द फर्स्ट टाइम आम आदमी पार्टी ये समझना मुश्किल था कि वो पॉलिटिकल पार्टी है या एक्टिविस्ट ग्रुप है। जब बातें नहीं होती थी। जब गवर्नर से उनकी बातें नहीं हो पाती थी लेफ्टिनेंट गवर्नर से तो धरना देते थे। तो लोग ये कहते थे भ आप पॉलिटिकल पार्टी हो कि ग्रुप ऑफ एक्टिविस्ट हो। ठीक है? सो आई कंप्लीटली अंडरस्टैंड व्हाट यू आर सेइंग कि द लैंग्वेज ऑफ एक्टिविज्म इज़ेंट वेरी वेरीेंट बट प्रोबेबबली दैट इज़ नॉट द लैंग्वेज टू बिल्ड पॉलिटिक्स दैट वी आर टॉकिंग अबाउट इलेक्टोरल पॉलिटिक्स की जो बात कर रहे हैं आप आई मीन सी इट्स लाइक यू नो इट्स बीइंग इंपल्सिव फॉर सर्टेन कॉज यस अह बट इम्पल्सिवस आर देयर फॉर सर्टेन टाइम यू नो मे बी लाइक यू नो टू टू जस्ट स्टार्ट द डिस्कशन मे बी एंड देन यू हैव दोज़ पीसफुल टाइम्स टू बिल्ड ऑन इट एंड दैट रिक्वायर्स मे बी नॉन एक्टिविज़्म साइड ऑफ़ यू यर्स आई मीन या दैट्स इट नाउ इफ इफ दैट इज द केस लेट मी ब्रेक इट डाउन फर्दर वी स्टार्टेड विद पॉलिटिकल पार्टी स्ट्रक्चर नहीं है मुश्किल है पॉलिटिक्स नहीं है मुश्किल है उसको और फ्रेगमेंट कीजिए लोकल आइए लोकली बात कीजिए कंस्टीट्यूएंसी लेवल पे बात कीजिए बिल्ड कीजिए देन आई आस्क यू कि अच्छा ठीक है यह लोकल लेवल पे क्या पॉलिटिकल पार्टीज रेलेवेंट होती हैं तो देन यू आर सेइंग कि पॉलिटिकल पार्टीज रेलेवेंट है लेकिन इतनी रेलेवेंट नहीं है क्योंकि वो फिर आउटसाइड के थ्रू आपके कन्वर्सेशन को डिफाइन करती हैं आपको खुद अपनी कन्वर्सेशंस फर्ज करनी चाहिए खुद डिफाइन करनी चाहिए खुद इश्यूज बनाने चाहिए अंडरस्टुड क्या इस प्रोसेस में एक्टिविज्म इंपॉर्टेंट है यू आर सेइंग एक्टिविज्म की अपनी लिमिट है बिकॉज़ यू नीड नॉन एक्टिविज्म साइड टू गो अहेड विद इट मैच्योर होना चाहिए चाहिए। लेट मी फ्रेगमेंट इट अ बिट मोर। डस पॉलिटिक्स कम आउट फ्रॉम कम्युनिटी बिल्डिंग? क्या कम्युनिटी बिल्डिंग करना चाहिए? सो व्हाट आई बिलीव इज़ द क्वेश्चन यू आस्क लाइक यू नो यू जस्ट पोज्ड दिस पर्टिकुलर थिंग एक्टिविज्म एंड पैसिविटी। व्हाई पैसिविटी इजेंट? यू नो वी लिव इन अ कंट्री। वेयर इट इजेंट टू बी पॉलिटिकल एंड बिकॉज़ वी पार्टिसिपेट इन पॉलिटिक्स एंड थ्रू पॉलिटिक्स [नाक से की जाने वाली आवाज़] वी गेट इलेक्शंस एंड पार्टीज फंक्शन लीडर्स फंक्शनंस एंड देन डायरेक्ट एक्सरसाइज हैपेंस इन डेमोक्रेसी एंड कॉन्स्टिट्यूशनली एंड यू विल टॉक अबाउट इट एज वेल आई नो आई मीन मे बी लेटर ऑन सो आई थिंक यू नो पैसिविटी व्हाई पैसिविटी इज़ेंट बिकॉज़ रिएक्शन रिएक्शन इफ यू हैव अ रिएक्शन पैकेज फॉर एनी थिंग्स टू टू गेट सॉर्टेड इन अ पॉलिटिकल स्पेस वेयर मल्टीपल स्टेक होल्डर्स आर फंक्शनिंग हम्म हम्म एंड वेयर योर बार्गेन पावर इज हिस्टोरिकल हिस्टोरिकली लो देर इफ यू बिलीव दैट यू विल यू विल कम अप विद यू नो ग्रैंड डुअर एक्टिविजम फ्रेमवर्क एंड यू जस्ट लाइक यू जस्ट यू विल मेक इट और ब्रेक इट। आई मीन दैट इज गोइंग टू ब्रेक। व्हाट आई एम सेइंग इज यू नो पार्टिसिपेशन अह अह एन कम्युनिटी बिल्डिंग अह सपोज़ लाइक यू नो यू वर टॉकिंग अबाउट लाइक यू नो हाउ टू टू बी अवेयर ऑफ़ सर्टेन पार्टिसिपेशन विथ पोलिटिकल विथ पोलीटिकल पार्टीज़। सो सपोज लाइक यू नो पॉडकास्ट लाइक यर्स इफ यू स्टार्टेड टॉकिंग अबाउट लाइक यू नो इन उत्तर प्रदेश व्हाट हेड हैपेंड इन पास्ट फोर इलेक्शन व्हाट आर द डेवलपमेंटल ट्रैजेक्टरी आई मीन मे बी लाइक यू नो समवेयर समाजवादी पार्टी विल सर्टेनली फेयर ah बेटर आई मीन अह एंड मे बी यू नो देयर आर देयर वुड बी इंस्टेंसेस वेयर बीजेपी इज़ डूइंग फैंटास्टिक सो आई मीन सपोज यू स्टार्टेड टॉकिंग अबाउट इट विदाउट यू नो सपोर्टिंग एनी पार्टी और विदाउट लोदिंग एनीवन। सो व्हाट विल हैपन? आई मीन ऑफ कोर्स पीपल विल हियर इट आउट। हम इट डिपेंड्स यू नो व्हाट हाउ यू पास ऑन द इनफेशन। आई मीन कितना सरल तरीके से आप उन तक पहुंचाते हो। तो वो लोग जानेंगे और जब जानेंगे तो ऐसा तो नहीं वो रोड पर उतर रहे हैं। वो अपना एडल्ट फ्रेंचाइज यूज़ करेंगे। इनफॉर्म होंगे। और कम्युनिटी बिल्डिंग आई डोंट फाइंड इट लाइक यू नो आई मीन इफ यू वुड आस्क मी हाउ आई रिसीव दिस पर्टिकुलर क्वेश्चन का मैसेज कि कम्युनिटी बिल्डिंग क्या है? आई आई विल रीड इट पोलिटिकली। आई एम आस्किंग यू पोलिटिकली। पोलिटिकल पार्टिसिपेशन। हाउ हाउ डू यू क्रिएट इट? एंड यू क्रिएट इट थ्रू थ्रू अगेन थ्रू लाइक यू नो योर डिस्कसिंग अराउंड इश्यूज। नो नो नॉट डिस्कशन अराउंड सी द थिंग दिस इज़ व्हाट वी बिलीव पीपल आर अवेयर इफ यू गो टू स्मॉल रूरल कॉन्स्टिट्यूएंसी इन उत्तर प्रदेश। आई मीन लोगों को पता है कि नहर में पानी कब आने वाला है। हम उसका टाइम होता है। खाद कब मिलेगी? लोगों को पता है कि तहसील पर ग्राम प्रधानों की लड़ाई हुई है। ठीक है? और लोगों को यह पता है किस कौन सा ग्राम प्रधान का सेक्रेटरी काम नहीं कर रहा है। जी। किसने क्या गमन किया है। फिर लोकल मीडिया, प्रेस सब में छप खबरें छपती हैं। लोगों को पता है कि कहां पे पेन पॉइंट्स हैं। इस जो सरकार चल रही है उसके विधायक के लिए। अगर वहां पर उसका विधायक है तो लोगों को पता है कि वो कितनी मीटिंग्स कर चुका है। लोगों को पता है कि वहां के हेल्थ इंस्टीट्यूशन के क्या हालात है पीएससी सेंटर्स के या व्हाटएवर लाइक यू नो अवेलेबल देयर। लोगों को पता है। आई मीन व्हाट आर यू इनफॉर्मिंग अबाउट दे आर ऑलरेडी अवेयर। मैं क्या कह रहा हूं? मैं कह रहा हूं कि देयर इज़ नो ड्थ ऑफ़ इन देयर इज़ नो ड्थ ऑफ़ इनफेशन। आप अगर मुस्लिम क्वेश्चन को भी लाते हो उनको भी पढ़ाई लिखाई में आता है वो। मैं बार-बार कह रहा हूं एक सवाल आपके आपको यह बताने की मैं कोशिश कर रहा हूं कि व्हाई वी आर नॉट एबल टू रिसीव दोस मैसेजेस। आई एम टेलिंग यू रिसेंटली शायद ये अजीब हो सकती है। जी द काइंड ऑफ़ यू नो फोकस व्हिच एंटायर मिडिल ईस्टर्न कंट्रीज का फियास्को मतलब द वॉर थिंग यू नो द जिओपॉलिटिकल थिंग द ब्रॉल व्हिच हैज़ हैपेंड जी उसने इनवाइट किया है अगर एक इसका असेसमेंट किया जाए मुस्लिम्स का मुस्लिम माइनॉरिटीज कैसे इसको देखती है इंडिया में कैसे देखती आप तो आप पाओगे कि पीपल आर क्वाइट वोकल पीपल आर वेरी वोकल पीपल आई मीन उनको लगता है कि ये एक ऐसी चीज है कि जिंदगियां बनने और बिगड़ने की चीज है जी एंड [नाक से की जाने वाली आवाज़] तो टू सम एक्सटेंट देर राइट क्योंकि उससे ग्लोबल साउथ पूरा इंपैक्ट हो रहा था लेकिन आपको क्या लगता है कि आपकी कम्युनिटी या फिर मुस्लिम पर उस तरीके से अप्रोच कर रही थी उसको कि ग्लोबल साउथ में रिसेशन आ जाएगा आप मेरी बात समझ रहे हो ना? मैं क्या कह रहा हूं? वो एसेंशियली एक कम्युनिटेरियन पिटिकल एंगल से सोच रही थी जो मैंने अभी बताया भी। जी। तो मुझे लगता है कि वो सोच सकती है कि उसकी कॉन्स्टिट्यूएंसी बारगेन क्या है? यही तो सोचना है। तुम्हारे ऊपर कौन आ रहा है। तुम्हारी कौन मतलब पांच पार्टी हैं। मैं कह रहा हूं एक कांस्टीट्यूएंसी में। यू वुड वांट टू बी ऑर्गेनाइज्ड। राइट? माय क्वेश्चन इज कि लेट्स लुक एट न्यूटंस फर्स्ट लॉ। ओके? ठीक है? न्यूटंस फर्स्ट लॉ इज कोई भी बॉडी अपनी पोजीशन में या अपनी जो उसकी जो उसकी स्टेट है कोई भी गाड़ी खड़ी है तो खड़ी रहेगी। कोई चीज मूव कर रही है तो मूव करेगी। अंटिल एंड अनलेस एन एक्सटर्नल फोर्स इज अपाइड टू इट। यह फर्स्ट लॉ है। हम ठीक है। अगर यह इतना ही क्लियर है कि कम्युनिटी के पास इंफॉर्मेशन है, सारी चीजें मिल रही हैं। उसको समझना है, देखना है। ये ऑटोमेटिक प्रोसेस तो नहीं है। कोई तो एक्सटर्नल फोर्स होता है ना। एक्सटर्नल फोर्स का मतलब बाहर से नहीं कह रहा हूं मैं। एक्सटर्नल फोर्स मैं यहां कह रहा हूं। कोई तो ऐसा इंसान होगा ना जिसको इनिशिएटिव लेना होगा टू फर्ज कन्वर्सेशंस। कोई तो होगा जिसको डायरेक्शन देना होगा कि इस डायरेक्शन में कन्वर्सेशन होनी चाहिए। कोई तो होगा यह जो कहेगा कि साहब इस तरीके के इश्यूज होने चाहिए। कोई तो लोगों को ग्रुप करेगा। कोई तो लोगों को साथ में बुला के बिठाएगा। कहेगा साहब चलिए कम्युनिटी बिल्डिंग करते हैं। रोज हम लोग शाम में मिलेंगे। हम लोग मूव करेंगे। आई एम आस्किंग यू व्हाट इज द मेथड फॉर दैट पर्सन बिकॉज़ इट्स नॉट ऑटोमेटिक। इट कैन नॉट बी ऑटोमेटिक। क्योंकि अगर ऑटोमेटिक होता तो होता। मैं इसको मानता हूं कि ये हमारी कम्युनिटी पे एक तरह का एक्सेप्शन है। पूछिए कैसे? आपने कहा कि एक्सटर्नल फोर्सेस कुछ है। मैं कह रहा हूं। एक्सटर्नल उस सेंस में नहीं कह रहा हूं। आपकी कम्युनिटी के ही किसी इंसान को इनिशिएटिव लेना पड़ेगा। दैट्स व्हाट आई एम सेइंग। मैं मैं बता रहा हूं कि आपकी तो पूरी पॉलिटिक्स ही एक्सटर्नली सेट हो रही है। लेकिन तब भी आप आइडल पड़े हुए हो। नहीं समझ रहे आप। आप बिल्कुल हरकत नहीं कर रहे हो। जी। आपकी पॉलिटिक्स तो मैं कह रहा हूं उत्तर प्रदेश है। समाजवादी पार्टी के मुखिया को ये पता है कि उत्तर प्रदेश में मुसलमानों के सबसे बड़े नेता वो है। ये बावर किसने कराया उनको? आपके पास कोई क्लीनिकल डाटा प्रूवन कोई स्टफ तो है नहीं। जी। आप मूड गेज कर लेते हो मोटा-मोटा। क्यों भाई? क्योंकि बाईपोलर स्टेट हो गया है। स्टेट बायपोलर है क्योंकि कांग्रेस नहीं है वहां पे। हम कांग्रेस नहीं है। एक दिन सवेरे उठे और कांग्रेस की 1520 डिस्ट्रिक्ट के ऑफिसिसेस का फोन नंबर निकाले सिद्धार्थ नगर से लेकर के संत कबीर नगर तक हम और सब जगह फोन करें। ऑफिस खुल गया क्या? जी। तो पता चल जाएगा कांग्रेस कहां है। तो इसका मतलब स्टेट बायपुलर है तो उस उनको लग गया ना कि मुस्लिम हमारी तरफ आ रहे हैं तो आएंगे ही। अभी सद किसका रहा है? मैं प्रॉब्लम बता रहा हूं आपको। अभी सद उनका रहा है कि जो उस बारगेन में कह रहे हैं कि भैया अब तो बहुत हो गया। जी। आप तो वहां नहीं हो। आपके क्वेश्चन तो वही के वही है। आपके क्वेश्चन क्या है? आई मीन डोंट टेक मी अदरवाइज आई एम नॉट नेगेटिंग ऑन दोज़ पॉइंट्स द क्रूशियल पॉइंट वेयर ऑल द इवेंट्स आर शेपिंग अराउंड एसआईआर द कन्फ्यूजन एंड कॉन्फ्लिक्ट इन द कम्युनिटीज़ माइंड व्हिच एक्चुअली देयर आई एम नॉट डिनाइंग दोज़ थिंग्स व्हाट आई एम सेइंग इज़ यस दे आर देयर एंड अदर पार्टीज आर आल्सो टेकिंग बेनि बेनिफिट ऑफ़ इट लाइक समाजवादी पार्टी विल शोरली एंड दे हैव ऑल राइट बीइंग अ पॉलिटिकल पार्टी। अब्सोलुटली दे आर इन एब्सोल्यूट स्टेट टू री बेनिफिट आउट ऑफ इट एंड दैट इज़ दैट इज़ दे आर वेरी राइट। सो वेयर वी आर वेयर वी आर एस एस एस यू यू बिलीव एस अ कम्युनिटी व्हाट शुड वी डू? आई एम सेइंग वी आर इनफॉर्म्ड इनफ टू बिलीव दैट वी आर वी हैव पोटेंशियल पिटिकल डेंजर दैट्स व्हाई वी आर वोटिंग फॉर समवन टू बिकम प्रोमिनेंट इट मींस वी आर वी हैव सम विज़डम राइट वी ओ मे बी वी डू दैट राइट व्हेन आई एम सेइंग एक्सप्लसिटली सेइंग वी मीन्स मुस्लिम्स हां दैट इज अंडरस्टुड हां दैट सो वी डू दैट वी हैव बीन डूइंग इट एंड आई डोंट बिलीव दैट ऑल दी कम्युनिटीस हैव बीन वेरी ऑब्जेक्टिव व्हाइल वोटिंग। आई एम नॉट क्लेमिंग इट दैट वी शुड इबाइब दोज़ प्रैक्टिससेस फ्रॉम फ्रॉम देयर एक्सपीरियंसेस। नो ऑल आई हैव बीन डूइंग इट। दैट्स व्हाई यू वुड सी अबाउट आई आई टॉक अबाउट प्रजापति। आई टॉक अबाउट लाइक यू नो मुसहर कम्युनिटी। आई कैन टॉक अबाउट। आई कैन टॉक अबाउट महादली इन इन बिहार। कुर्मी कोरी का सीन तो आपको पता ही है कैसे वो अलाइन करते हैं। उसके बाद इस बार आपने राजपूतों का भी देखा होगा सॉरी राजपूतों का और उनका देखा होगा भूमिहारों का। दे ऑल आर वाइंग फॉर बार्गेन पिटिकल बारगेन। सो व्हाट इज व्हाट आर दोस पिटिकल बारगेन? हमारे लिए क्या है? हमारे लिए तो वही लिमिट कर दिया ना एक्सटर्नल फोर्सेस ने। कि आपका तो यही बेस पे ही रहेगा। मतलब यू आर सो चोक्ड दैट यू कैन नॉट टॉक अबाउट लाइक यू नो योर म्युनिसिपल स्टफ। योर म्युनिसिपल राइट्स। व्हिच मींस कन्वर्सेशन आर फंडामेंटल। कन्वर्सेशन योर योर आई मीन व्हाट यू आर योर आई मीन यू ईट? समझ गया ना? मंडेन कन्वर्सेशन सिकनेस बिकॉज़ ऑफ़ वेदर चेंज। व्हाई वुड यू नॉट टॉक अबाउट लाइक यू नो मे बी हेल्थ सेंटर्स, मे बी यू नो स्कूल्स एंड एजुकेशन एंड एंड यू डू दैट। आई एम नॉट सेइंग यू आर नॉट डूइंग इट। व्हाट आई एम सेइंग इज यू नो मे बी यू पॉलिटिक्स अराउंड इट। मे बी पॉलिटिक्स अराउंड यू पर्टिकुलरली अराउंड मुस्लिम्स इज सो मे बी लाइक यू नो रिजिडली डिफाइंड बाय दी एक्सटर्नल बेस रियलिटीज एक्सटर्नल बेस रियलिटीज समझ गया जिसमें जिओपॉलिटिक्स भी है एंड तमाम तरह की चीज़ व्हिच सडनली मेक इट यू नो अ कन्फ्यूजन वेरी कन्फ्यूजिंग फ्रेमवर्क यू ऑलरेडी नोइंग दिस फैक्ट दैट देयर इज़ अ पोटेंशियल एसआईआर का इश इशू ठीक है जिससे पोटेंशियली मास डिस इनफ्रेंचाइजमेंट हो सकता है और हो रहा है क्वेश्चन मार्क हम व्हाट इज द गेम इन मे बी लाइक यू नो दोज़ पार्टीज यू नो हु वर स्टिल इन ऑोजिशन व्हाट व्हाट आर दे डूइंग फॉर यू सी वी वर इन लॉ स्कूल जी व्हाट वी वर डूइंग वी वर रीडिंग कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ वी वर टोल्ड टू रीड इट एस एस अ लीगल मैन राइट एस अ लीगल डॉक्यूमेंट। यस। सो आई मीन हु आर शेपिंग दोज़ रियलिटीज़ अराउंड इट। कॉन्स्टिट्यूशन इज़ अ डॉक्यूमेंट यू नो शेपिंग अह मे बी लाइक यू नो क्रिएटिंग बाउंड्रीज़ फॉर फॉर फॉर फॉर द स्टेट टू फंक्शन। अब्सोलुटली। राइट। ओके, बट हु इज़- शेपिंग दोज़ बाउंड्रीज़, पॉलिटिक्स, एंड दैट्स व्हाई इट इज इम्पोर्टेन्ट। यू कैन डू योर वर्क। हम्म। आय कैन डू माय वर्क। इफ पॉलिटिक्स इज नॉट बीइंग टेस्टेड ऑन ग्राउंड व्हेन आई एम सेइंग बीइंग टेस्टेड वी नीड अ लार्जर आउटरीच हम व्हेन आई एम सीइंग लार्जर आउटरीच आई एम टॉकिंग अबाउट लाइक यू नो ग्रास कम्युनिटी कनेक्शंस हम्म इंटरेक्शन नेटवर्क्स यू गॉट माय पॉइंट अब्सोलुटली आवर ओन हम्म यू नो आई मीन मे बी मॉडल्ड ऑन मे बी लाइक यू नो सम काइंड ऑफ मोरल फ्रेम वेरी इस्लामिक इस्लाम डस टीचेस अ लॉट ऑफ थिंग्स यू नो व्हिच कैन बी यूज्ड यस एंड इट इज़ वेरी बेसिक एंड फंडामेंटल आप घर से निकलते हो कोई काम करने के लिए आई मीन तो नियत पे बोला जाता है बिल्कुल दुरुस्त करिए पहले आई मीन मे बी आई मीन आई डोंट नो आई मीन आई एम नॉट अ क्लेरिक बट यस होता है राइट तो आप वहां पे चीजें सही करिए ना आप सुपरस्ट्रक्चर के बारे में सोच सोच रहे हैं एंड आई बिलीव इट कैन हैपन। आपको सबसे बढ़िया एग्जांपल मैं थोड़ा सा और वक्त लूंगा आपका इस पे। आप म्युनिसिपल इलेक्शन को देख लीजिए। आई बिलीव इट्स अ गोल्डन अपॉर्चुनिटी हम इट्स अ गोल्डन अपॉर्चुनिटी अक्रॉस अर्बन वार्ड्स एंड सेंटर्स वेयर पर से मुस्लिम कम्युनिटी कैन पार्टिसिपेट थ्रू इलेक्शन वर्किंग एस अ सिविक कॉरपोरेटर एंड ब्रिंगिंग द रिक्वायर्ड चेंज। आप मेरी बात समझ रहे हो? समझ रहा हूं मैं बात आपकी और वो बेस हो सकता है वहां पर आपको ईरान और इराक की वॉर की बात करने की जरूरत नहीं है। तो वकार साहब आई अंडरस्टैंड व्हेन यू टॉक अबाउट यू नो कॉन्स्टिट्यूएंसी लेवल पॉलिटिक्स कि आप साहब कॉन्स्टिट्यूएंसी में जाइए आप। वहां इशूज़ को फ्रेम कीजिए। वहां कन्वर्सेशंस फॉर कीजिए। [नाक से की जाने वाली आवाज़] वहां जिसको कहते हैं नेटवर्क्स बनाइए और वहां से फिर बिल्ड कीजिए। ठीक है? कि कोई जरूरी नहीं है कि आप किसी एक पॉलिटिकल पार्टी के प्लैंक को देख के काम करें या पॉलिटिकल पार्टीज के प्लैंक को देख के काम करें। खुद ही कॉन्शियसनेस जनरेट होती है और उससे चीजें खुद होती हैं। दैट्स वन थिंग बट बिय्ड कॉन्स्टिट्यूएंसी जो हमारी म्युनिसिपल कॉन्स्टिट्यूएंसी हैं, यू नो म्युनिसिपल लेवल इक्शंस हैं वो सारी चीजें हैं। उसके अलावा और भी स्पसेस हैं जहां पे पॉलिटिक्स होती है। जैसे यूनिवर्सिटी है। ठीक है? यूनिवर्सिटी स्पसेस में पॉलिटिक्स होती है और यूनिवर्सिटी स्पसेस में जो पॉलिटिक्स होती है वो बड़ी इंटरेस्टिंग है। इनफैक्ट वी स्टार्टेड विद दैट पॉइंट हम कि जहां पे आप का जो लीडर है इमीडिएट जिसको आप क्र यू नो जिसको आप आइडेंटिफाई करना चाहते हैं या जिसको पुश करना चाहते हैं वो आप ही में से है। और अह एक बहुत ही क्लियर कट बैटल ग्राउंड है। जहां पे इशूज़ जो हैं वह बड़े ही स्टूडेंट सेंट्रिक इशूज़ हैं। कोई ऐसा नहीं कि सिर्फ आप नेशनल लेवल के इश्यूज की बातें कर रहे हैं। आप अपने इश्यूज की भी बातें करते हैं। व्हिच इज़ सिमिलर टू व्हाट यू आर टॉकिंग अबाउट म्युनिसिपल लेवल के इलेक्शंस के। है ना? यह चीजें होती हैं। ऑफलेट हमने यह देखा है कि यूनिवर्सिटीज में जो स्टूडेंट इलेक्शंस हैं इनको काफी रेस्ट्रिक्ट कर दिया गया है। यू नो दैट काइंड ऑफ़ स्पेस इज़ नाउ रेस्ट्रिक्टेड अ लॉट। हैविंग सेड दैट यही वो स्पेसेस हैं जहां से नेक्स्ट जनरेशन ऑफ पॉलिटिशियंस भी निकलते हैं। यू नो दिल्ली यूनिवर्सिटी इलेक्शन, जेएनयू इलेक्शन बैटल ग्राउंड है ये। है ना? लेफ्ट की आईडियोलॉजी का, कांग्रेस का, बीजेपी का बैटल ग्राउंड है ये। लेकिन वहीं पे अगर आप देखें यू नो इंस्टीटशंस लाइक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, जामिया मिलिया इस्लामिया या इस तरीके के और यूनिवर्सिटीज जो हैं जो मुस्लिम सेंट्रिक यूनिवर्सिटीज हैं और जिनकी एक पास्ट जिनका एक ट्रेडिशन है, स्टोरी है जहां से उन्होंने लीडर्स निकाले हैं। है ना? और अगर वो लीडर्स नहीं भी बने तो वो प्रॉमिनेंट पीपल बने एंड दे आर टेकिंग इनिशिएटिव्स है ना दे आर [नाक से की जाने वाली आवाज़] लीडिंग इन देयर ओन प्रोफेशन तो वहां पे मुस्लिम पॉलिटिक्स नहीं हो रही है क्योंकि इक्शंस नहीं है वो कॉन्शियसनेस ही नहीं है वो पॉलिटिक्स नहीं हो रही है इलेक्शंस भी नहीं हो रहा सारी चीजें हैं तो उसका क्या इंपैक्ट है मुस्लिम पॉलिटिक्स पे दैट्स माय फर्स्ट क्वेश्चन लार्जर मुस्लिम पॉलिटिक्स पे क्योंकि कॉनस्टीट्यूएंसी से अलग है वो चीज और उसमें भी दो तरीके की चीजें हो सकती हैं। जैसे जहां पे मुस्लिम मेजॉरिटी है अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी जामिया जामे मुस्लिम मेजॉरिटी है तो वो एक पॉलिटिक्स फर्ज हो सकती है। और वही पॉलिटिक्स जो है वो वहां भी हो सकती है जहां पे वो मेजॉरिटी नहीं है। बट माइनॉरिटी है। ठीक है? जैसे जेएनयू है या दिल्ली यूनिवर्सिटी है। क्या वहां भी फर्ज हो सकती है पॉलिटिक्स? वहां किस तरीके की पॉलिटिक्स होगी? और इन द लार्जर सेंस क्या यह पॉलिटिक्स रेलेवेंट है फॉर नेशनल लेवल इलेक्टोरल पॉलिटिक्स कितना कंट्रीब्यूट करती है स्टूडेंट पॉलिटिक्स नेशनल लेवल इलेक्टोरल पॉलिटिक्स में देखिए पहली पहले सवाल का पहले जवाब देता हूं मैं अह कि इंपोर्टेंस ऑफ़ स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन अह दैट टू पर्टिकुलरली इन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एंड जामिया मिल्ले इस्लामिया अह बिकॉज़ यू गो बाई द नंबर्स राइट मेजरिटी स्टूडेंट वहां पे पढ़ते हैं तो दे पिटिकल आर्टिकुलेशन कम आउट यू नो इन दोज़ स्पसेस। देखिए बात दरअसली ये है कि स्टूडेंट यूनियन का इलेक्शन जो है इसको मैं बड़ा इनेट फंक्शन मानता हूं किसी भी यूनिवर्सिटी का। मतलब जैसे एकेडमिक डिस्कोर्सेज होते हैं या फिर टॉक्स होते हैं और एकेडमिक एक्टिविटीज होती हैं, एग्जाम्स होते हैं, सारी चीजें होती हैं। उसी तरीके से वहां पे जो लोग पढ़ने जाते हैं वो सारे मेजर होते हैं। तो उनकी पॉलिटिकल शूर के लिए, उनकी समझ के लिए, हालात हाजरा पे और तमाम दीगर चीजों पे जो सियासी राय है जी उसको एक बनाने की तरतीब है वो। तो यह तो बिल्कुल होना चाहिए। अब यह क्यों नहीं है? और इसके क्या-क्या फायदे हैं? क्या यह इंपैक्ट करती है नेशनल लेवल पे या स्टेट लेवल पे? उस पे लेटर हम आएंगे। लेकिन पहले इसके एटीट्यूड को समझते हैं कि कहां हम कहां हमसे गलतियां हो रही है या फिर क्यों हम इससे दूर जा रहे हैं। तो देखिए बेसिकली ये है कि कोई भी पॉपुलर लीडरशिप स्टूडेंट यूनियन पॉलिटिक्स से पिछले 30 सालों में मेरी जो जानकारी है नहीं आती है। ऑनेस्टली बोलूं तो मैं एक इवेंट को लेकर के अगर बात करूं तो जेएनयू में जो भी हुआ जिसकी वजह से बहुत सारी लीडरशिप निकली जी और कुछ एक्टिविस्ट के जुमरे में ही रह गए हम और कुछ पिटिकल लीडरशिप में चले गए। मैं कन्हैया जी की बात कर रहा हूं और दीगर लोगों की बात कर रहा हूं। मतलब सैफ एरिस्ट वही दिखते हैं। लेकिन अगर आप रेडिकल लेवल पर अगर स्टूडेंट पॉलिटिक्स को मतलब एक तरीके से क्रॉस करके हम कॉन्स्टिट्यूएंसी लेवल पे चीजों को मैनेज करके पार्लियामेंट्री या असेंबली अपने दम पे कोई जीत के विधानसभा या फिर लोकसभा पहुंचा है तो मैं समझता हूं कन्हैया जी भी नहीं पहुंच पाए। बिल्कुल। अब आते हैं अलीगढ़ पे। जी देखिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी या जामिया मिलिया इस्लामिया दे आल्सो फंक्शन इन सर्टेन सोशल एंड पॉलिटिकल रियलिटी इन अ टाइम यू नो इन अ टाइम फ्रेम अ द काइंड ऑफ़ टाइम फ्रेम दे बिलीव दे आर फंक्शनिंग इन डस नॉट परमिट देम टू मैनुअ अ लॉट जी जैसा कि आपने पिछले एक डिस्कशन में बोला था लेकिन मुझे मुझे लगता है कि ये एक लेवल का एक एक एस्केपिस्ट [नाक से की जाने वाली आवाज़] स्टैंड है। मतलब आप एस्केप करना चाह रहे हैं चीजों से हम क्योंकि कोई भी इंस्टीट्यूशन है और इतना बड़ा इंस्टीट्यूशन है तो बेसिकली वहां पे डिस्कशंस जो हैं पॉलिटिकल डिस्कशंस वो कंटिन्यू होने चाहिए हम और हो सकता है कि उसकी जो जायज चीजें हैं उसको करने में या करवाने में आपको मुश्किलें आए ठीक है लेकिन उसके लिए हमेशा मतलब डायलॉग्स ओपन हो उसके लिए इंस्टीट्यूशन बनाइए उसके लिए सिस्टम बनाइए जो उसको करवाए यह कहना कि ये यूनिवर्सिटीज क्यों नहीं करा पा रही हैं? तो मैं इसमें क्लियरली देखता हूं कि ये एक लेवल पे एक लेवल पे अ के विन करने जैसा हो गया। ठीक है? आप यह चाहते नहीं हैं कि वह जो बच्चे वहां पढ़ते हैं आई रिमेंबर 35,000 प्लस स्टूडेंट्स आर देयर इन अलीगढ़ एंड जामिया मिले इस्लामिया आई थिंक रफ्ली 10,000 प्लस राइट मोर देन मोर देन दैट राइट 20,000 सो द थिंग इज़ यू नो दे कम फ्रॉम डिफरेंट ज्योग्राफीज़ एंड दे दे हैव देयर ओन एक्सपीरियंसेस अह विद सोशल रियलिटीज़, इकोनमिक रियलिटीज़, पॉलिटिकल रियलिटीज़। सो दे नीड टू स्पीक अप दे नीड टू टॉक अबाउट इट मे बी इन अ यू नो स्पेस वेयर लाइक यू नो मेनी पीपल आर बीइंग हर्ड एंड मेनी ऑफ देम आर टेलिंग देयर स्टोरीज तो मैं स्टूडेंट यूनियन के इलेक्शन को इसी का एक रूप मानता हूं इसी का एक वो ये मकसद है तो बेसिकली क्या है एक नर्सरी है एक नर्सरी है जिसमें आप समझते हो कि स्टूडेंट पॉलिटिक्स के जरिए पॉलिटिक्स को कैसे समझा जाए डिफरेंट तरह के आर्टिकुलेशन को कैसे समझा जाए असरेशन को कैसे समझा जाए। अपनी बातें कैसी रखी जाए। ठीक है? क्योंकि आप फिर लार्जर पार्टिसिपेशन के लिए रास्ता खोलते हो कि उनमें से जो इंटरेस्टेड होंगे वो कम्युनिटी को लीडरशिप देंगे। ठीक है? भले वो ग्राम पंचायत का इलेक्शन लड़े, जिला परिषद का इलेक्शन लड़े, वार्ड का इलेक्शन लड़े, असेंबली कॉन्स्टिट्यूएंसी का इलेक्शन लड़े। मतलब एमएलए बनना चाह रहे हैं। या लोकसभा का इलेक्शन लड़े। यह उनके लिए ओपन रहता है। तो मेरे नजर में जो है कोई भी यूनिवर्सिटी खास तरीके से इन यूनिवर्सिटीज के ऊपर मैं समझता हूं जिस तरह की बातें हमारे बीच में डिस्कशन हुआ है। जिस तरह की जिम्मेदारियां इनके ऊपर हैं। हर यूनिवर्सिटी के ऊपर जिम्मेदारी है। अ वो ये इनको इस बात से बाबर होना चाहिए कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया इस्लामिया बोथ यूनिवर्सिटीज अ मस्ट अ यू नो एंटरटेन अ गुड अ यू नो स्टूडेंट पॉलिटिक्स आई मीन व्हेन आई एम सेइंग गुड मे बी आई एम मे बी लाइक यू नो आई एम टू आइडियल टू रीड द करंट सिचुएशन आई मीन यू नो आई रियली रीडिंग द करंट सिचुएशन बट आई बिलीव दैट पॉलिटिक्स इज़ अ रिस्की गेम नो डाउट बट इट डस गिव यू अपॉर्चुनिटी टू ट्रेड केयरफुली एंड मेक योर मूव्स इन क्राइसिस एंड दैट इज वेयर योर ट्रेनिंग कम्स कम्स इन एंड स्टूडेंट नीड्स यू नो दे दे नीड दोज़ ट्रेनिंग्स राइट यस सो आई मीन बैनिंग स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन और नॉट कंडक्टिंग स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन इज़ नॉट द वे फॉरवर्ड इज नॉट द सशन एंड मे बी दे कुड कम अप विद वेज़ टू लाइक यू नो डू इट मे बी यू बिलीव दैट यू नो सिचुएशन इज़ नॉट सो कन पॉलिटिकली कंडिसिव और मे बी लाइक यू बिलीव दैट अह देयर विल बी सम प्रॉब्लम्स अराउंड एंड थिंग्स विल नॉट बी इन अह इन कंट्रोल अह आई थिंक लाइक यू नो देयर देयर आर ऑलवेज वेज़ टू लाइक यू नो बिलीव इन अह गुड स्टाफ आई मीन पर्टिकुलरली रेस्टोरिंग अ स्टूडेंट यूनियन रिलेशन। जी लेट मी कनेक्ट ट्राई टू कनेक्ट एक तो एक जो आपने बात बोली कि स्टूडेंट्स यूनियन इलेक्शंस के जरिए द ट्रेंड टेल्स अस पॉपुलर लीडरशिप नहीं निकली है। आई एम सेइंग दैट इन पास्ट 30 इयर्स इन पास्ट 30 इयर्स दैट दैट हैज़ बीन द ट्रेंड। इट इज़ इट इज़ वेरीेंट एज़ वेल टू रीड एएमयू स्टूडेंट यूनियन यू नो आई मीन कॉन्सक्यूटिव इलेक्शंस। जी। इफ यू वुड सी लाइक लीडरशिप व्हाट दे आर डूइंग? अ फ्यू ऑफ़ देम आर लाइक यू नो। यस। अब्सोलुटली यू आर राइट। वेल इफ आई एम नॉट रोंग। यस यस। अब्सोल्युटली। तो इन दैट कॉन्टेक्स्ट यस। सो लेट अस टेक दिस आर्ग्यूुमेंट दैट स्टूडेंट्स यूनियन इलेक्शंस से इन द पास्ट 30 इयर्स, द ट्रेंड शोज़ कि पॉपुलर लीडरशिप नहीं निकली। ठीक है? एंड पॉपुलर लीडरशिप का मतलब वी आर टाइंग इट विद इलेक्टोरल पॉलिटिक्स। 100% पोलिटिकली यस वुड रेकमेंड हाईली रेकमेंड टू टो दैट लाइन यस नाउ हाउ वुड यू अंडरस्टैंड या आप पॉलिटिक्स बिय्ड इलेक्शंस भी होती है ना पॉलिटिक्स कल्चर के थ्रू भी होती है। यू नो जैसे फॉर एग्जांपल आई टेल यू दी एंटायर जरिस प्रूडेंस एंड यू आर अ लॉ स्टूडेंट सो यू अंडरस्टैंड दिस द एंटायर जरिस प्रूडेंस ऑफ एलजीबीटी क्यू राइट्स इन इंडिया इज डेवलप्ड थ्रू कल्चर ठीक है थ्रू आप चाहे मूवीस कहें मीडिया कहें या म्यूजिक [नाक से की जाने वाली आवाज़] कहें या लिटरेचर कहें या नवेल कहें नॉट ओनली हियर थ्रू आउट द वर्ल्ड पेलेस्टीनियन पॉलिटिक्स को देख लीजिए थ्रू मीडिया कल्चर म्यूजिक लिटरेचर ठीक है इन एलजीबीटी केस एलजीबीटी क्यू केस इन इंडिया द पॉलिटिक्स वाज़ वैलिडेटेड बाय द जुडिशरी ठीक है तो एक वैलिडेशन पॉलिटिक्स का जुडिशियल इंस्टीट्यूशन के थ्रू भी आ रहा है वो भी एक पॉलिटिक्स है इफ नॉट इलेक्टोरल पॉलिटिक्स दैट इज़ आल्सो पार्ट ऑफ़ पॉलिटिक्स अगर हम यूनिवर्सिटीज को इलेक्टोरल पॉलिटिक्स के लिए इनसफिशिएंट माने। लेट अस्यूम कि दे आर नॉट सफिशिएंट टू क्रिएट इलेक्टोरल पॉलिटिक्स डिविडेंड। क्या इस पॉलिटिक्स के लिए वो सफिशिएंट नहीं है? और क्या यह पॉलिटिक्स जो है व्हिच इज नॉन इलेक्टोरल एज अ पॉलिटिकल यू नो जिसको कहते हैं एड इस पॉलिटिक्स की रेलेवेंस क्या है? स्टूडेंट यूनियन इलेक्शंस और स्टूडेंट यू नो पिटिकल पार्टिसिपेशन शुड बी टेकन एज इट इज जी ऑन फेस वैल्यू आई मीन इफ आई टेल यू लाइक यू नो एक्स वाई जी यूनिवर्सिटी इज़ कंडक्टिंग स्टूडेंट यूनियन इलेक्शन आई मीन यू विल इमीडिएटली रिकॉग्नाइज दैट देयर इज़ अ स्टूडेंट बॉडी बीइंग इलेक्टेड बाय द स्टूडेंट यूजिंग देयर राइट टू वोट एंड चूज़ राइट आई बिलीव इट्स ट्रेनिंग इट्स ऑन फेस इट्स देयर ठीक नाउ कम्स अनदर क्वेश्चन आई मीन एंड व्हाई इट इज़ेंट आई मीन इट इज़ेंट सपोज लाइक यू नो एंड टॉकिंग अबाउट लाइक एलजीबीटी क्यू राइट्स एंड यू नो हाउ द कल्चरल साइड ऑफ इट एंड हाउ द मीडिया यू नो आई मीन कवर्ड इट एंड एंड एंड एंड थ्रू डिफरेंट यू नो मूवीस एंड टॉक शोज़ एंड मे बी लाइक यू नो रैप एंड डिफरेंट लेवल ऑफ़ थिंग्स यू नो अ कल्चरल आर्टिकुलेशन वास् क्रिएटेड अराउंड इट एंड इट वास मेड अ यू नो आई मीन बिग थिंग एंड दे वर हर्ड राइट एंड दैट्स अ पोलिटिकल थिंग यू नो आई मीन ऑफ़ कोर्स आई एग्री टू इट टू योर पॉइंट व्हाई इट इज़ पॉलिटिकल बिकॉज़ यू आर कन्नेंसिंग सम अथॉरिटी टू एक्सेप्ट देम टू रिकॉग्नाइज़ देम राइट राइट सो इन अ सिमिलर फ़ैशन अह देयर इज़ अ कल्चर ऑफ़ स्टूडेंट पॉलिटिक्स सो इफ द स्टूडेंट्स आर प्रोटेस्टिंग एजिटेटिंग इट इज़ नॉट यूनिक टू अलीगढ़ और जामिया मिल इस्लामिया इन डिफरेंट शेप एंड फॉर्म इट इज़ आई मीन इट्स अ ग्लोबल थिंग यू नो आई मीन इन मोस्ट ऑफ़ द डेमोक्रेसी इफ यू गो आई मीन एल्सवेयर इन वेस्टर्न हेमिस्फेयर आई मीन यूनिवर्सिटीज यू विल फाइंड इट यू नो मे बी इन डिफरेंट फॉर्म एंड शेप यस काउंसिल के तरीके से और डिफरेंट तरीके से लोकल लेवल पे हो जाता है। डिपार्टमेंट लेवल पे इलेक्शन हो जाता है। होता है ना? बिल्कुल होता है। तो मैं ये समझता हूं कि एजिटेशनल होना उसके लिए भी उस राइट के लिए भी लड़ाई करना वो भी पॉलिटिकल मूव है। और अगर यहां पे जुडिशरी लड़ रही है आपके लिए मीडिया स्पेक्टिकल बना रहा है या फिर उस तरीके से इंटेलेक्चुअल्स लिख रहे हैं। स्ट्रांग राइटर आपके लिए स्ट्रांग लिख रहे हैं। मैं एलजीबीटी क्यू की बात कर रहा हूं दूसरी साइड की या फिर आपके लिए कोई रैप कर रहा है। जी तो एक तरह का ये प्रोटेस्ट है। आपके लिए स्पेस क्लेम किया जा रहा है। आपकी पॉलिटिकल राइट्स के लिए क्लेम किया किया जा रहा है। राइट? जी। तो उसी सिमिलर फैशन में आपके कल्चरल राइट के लिए पॉलिटिकल प्रेशर बिल्ड किया जा रहा है। राइट? यूनिवर्सिटीज में भी स्टूडेंट को हक है और कि वो एजिटेट करें अपने राइट्स के लिए। अच्छा ये ये एक बात मैं अब ये भी बताऊं कि एक वक्त था अलीगढ़ में। आपको याद होगा कि इट्स नॉट वेरी वेरी अ प्लेन थिंग टू टॉक अबाउट। आई मीन इट हैज़ सो मेनी ऑफ़ अप्स एंड डाउन्स यू नो इफ वी इनवोक आवर एक्सपीरियंसेस ऑफ़ क्सक्यूटिव यूनियन इन अ लीडर पर्टिकुलरली सो व्हाट वी सॉ ऑफ़ यू नो लंपिन एलिमेंट्स गेटिंग इन्वॉल्व्ड इंटू इलेक्शन सिस्टम एंड यू नो देन इवेंचुअली यू नो आई मीन क्रिएटिंग वायलेंस अराउंड इन कैंपस एंड एंड मेकिंग मेकिंग यू नो स्टूडेंट एंड अथॉरिटी सफर आई एम बीइंग वेरी ब्लंड अबाउट इट। सो दैट आई हैव सीन अराउंड। सो आई मीन दैट इज वेयर यू नो दीज़ अथॉरिटीज़ आर यू नो रियली अवेयर। दैट इज़ दे आर दीज़ अथॉरिटीज़ आर नॉट ओनली अवेयर दे आर कैलकुलेटिव ऑफ़ देयर स्टेप्स। यू नो व्हाट टू जी। दीज़ बंच ऑफ़ पीपल यू नो दे दे विल सडनली यू नो दे विल सडनली कम आउट एज़ अ पॉलिटिकल एंटिटी एंड दे विल यू नो पुट प्रेशर गुड और बैड व्हाटएवर। सो इट इज आल्सोेंट टू मेक एन अपील टू यू नो ऑल दी स्टूडेंट बॉडीज एंड इंस्टीटश दोज़ हु आर डूइंग स्टूडेंट पॉलिटिक्स एंड पर्टिकुलरली इन अलीगढ़ एंड जामिया मिलिया इस्लामिया टू कम फॉरवर्ड विद विद विद अ रियल यू नो डेमोक्रेटिक स्पेस वेयर थिंग्स आर डिस्कस्ड एंड डिबेटेड अनलाइक दोज़ टाइम्स यू नो आई रिमेंबर यू यू आई मीन यू आल्सो हैव बीन थ्रू ऑल दोज़ टाइम्स यू नो आई मीन दोज़ डार्क डेज इन अलीगढ़ व्हेन स्टूडेंट यूनियन नॉट स्टूडेंट यूनिवर्स रेस्पोंसिबल बट आफ्टर स्टूडेंट यूनियन वंस स्टूडेंट यूनियन डस कम टू पावर दे बिलीव दैट दे कैन हाईजैक यूनिवर्सिटी सो दैट इज़ वेयर लाइक यू नो दे दे शुड लिमिट देमसेल्फ एंड अह दे कैन लिमिट देमसेल्फ इफ दी अथॉरिटीज़ आर रेडी टू एक्सेप्ट देम अह और क्रिएट दोज़ कंडसिव एनवायरमेंट वेयर दे आर गिवन दोस फ्रीडम टू डिस्कस एंड डिबेट हम अनदर थिंग इज सी वी आर नॉट लाइक यू नो फंक्शनिंग इन साइलो इवन यूनिवर्सिटी अथॉरिटीज आर यू नो रिपोर्टिंग टू टू डिस्प्सेसिएशन ऑफ़ द टाइम या सो दे दे हैव देयर ओन यू नो वेज़ टू डील विथ थिंग्स और डिसाइड ऑन इशूज़ जी एंड दे आर फुल्ली अवेयर दे आर फुल्ली अवेयर दैट दीज़ आर द लिमिट्स ऑफ़ थिंग्स टू डू फॉर देम एंड मे बी लाइक यू नो दे दे डोंट फाइंड इट कन्वीनिएंट टू टू डू इट नाउ बट आई बिलीव फॉर देम टू बी रियल अह यू नो रियल गुड यूनिवर्सिटी इज़ टू इज़ टू इज़ टू इज़ टू मेक अ स्टूडेंट यूनियन रिलेशन हैपन एज़ सून ऐज़ पॉसिबल एंड स्टूडेंट्स शुड पार्टिसिपेट इन अ वेरी डेमोक्रेटिक फ़ैशन इन अ इन अ मैनर व्हिच इज़ लाइक यू नो नॉट हार्मिंग द प्रोस्पेक्ट ऑफ़ यूनिवर्सिटी अंडरस्टुड बट अब आई विल ट्राई टू कनेक्ट दी टू थिंग्स वन इज द इलेक्टोरल पॉलिटिक्स इलेक्शंस वोटिंग रिप्रेजेंटेशन गवर्नमेंट अथॉरिटी एक पाथ यह है। दूसरा पाथ है कल्चर दैट वी जस्ट डिस्कस्ड। लेट अस ट्राई टू लुक एट इट फ्रॉम द पर्सपेक्टिव ऑफ मुस्लिम पॉलिटिक्स दैट वी वर डिस्कसिंग। वी हैव ऑलरेडी डिस्कस्ड दैट इलेक्टोरली इट्स अ चैलेंज। इट्स बीन अ चैलेंज बिकॉज़ कोई ना कोई वजह है। कोई ना कोई सिचुएशन है, सरकमस्टेंस है जिसकी वजह से आप इलेक्टोरली इनसिग्निफिकेंट या रिडंडेंट होते हैं। चॉइससेस आप नहीं कर पा रहे हैं। इशूज़ फ्रेम नहीं कर पा रहे, आइडेंटिफाई नहीं कर पा रहे। दैट्स वन थिंग इन योर अंडरस्टैंडिंग एज एज अ पॉलिटिकल एड डू यू आल्सो थिंक दैट द कल्चर ऑफ मुस्लिम पॉलिटिक्स व्हिच इंक्लूड्स मीडिया यू नो राइटिंग्स स्पीचेस अ आई वुड से लिटरेचर म्यूजिक एवरीथिंग एल्स क्या यह इतना डाइल्यूट हो गया है कि हम कल्चरली भी मुस्लिम आइडेंटिटी को क्रिएट या फर्ज नहीं कर पा रहे हैं। सो दैट देयर कैन बी अ मुस्लिम पॉलिटिक्स दैट कैन इमर्ज आउट ऑफ इट एंड प्रोबेबबली दैट कैन टुमारो ट्रांसफॉर्म इंटू इलेक्टोरल गेंस। इज दैट आल्सो द केस? सी द थिंग इज यू नो आई मीन अह मच ऑफ़ द थिंग इज़ रेस्पोंसिबल बिकॉज़ ऑफ़ आवर यू नो बिलीविंग ऑन दिस लाइक यू नो सस्टेंड एजेंडा ऑफ मेंटल पोलिटिकल सीज ऑफ़ मुस्लिम कम्युनिटी हम्म हम्म व्हिच इज़ नॉट प्रोडूसिंग एनी कल्चरल कैपिटल जी अ व्हिच आई बिलीव इज़ लाइक लार्जली अनट्रू। दैट पीपल वर डूइंग गुड। आई मीन ऑफ़ कोर्स लाइक इट इज़ ऑलवेज देयर दैट देयर दे देयर मस्ट बी मेनी मेनी ऑफ़ देम हु वुड नॉट डू गुड। हम ऑलवेज फ्यूअर हु आर डूइंग गुड राइट अब्सोलुटली एवरीवेयर सो आई बिलीव दैट यस ऑफकोर्स यू नो पॉलिटिक्स मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स यू नो वेयर यू पार्टिसिपेट बट यू आर नॉट गेटिंग दैट विंडो ऑफ़ बार्गेन वेयर यू कुड लाइक यू नो टॉक ऑफ यू नो फ्यूचर यू नो लेट्स टॉक डांस यू नो आई आई आई पार्टिसिपेट विद यू एंड आई आई गिव यू माय वोट्स आई नीड दिस आई नीड दैट एंड वेयर आई एम फिटेड सो दैट स्पेस इज गॉन हम सो दी द थिंग इज यू नो आई बिलीव कि अगर इसको ऐसे आप समझे कि राजनीतिक [गला साफ़ करने की आवाज़] रूप से अगर कोई समाज ये समझ के बैठ जाए कि वो बहुत मार्जिनलाइज हो गया है। और उसके बाद उसका पार्टिसिपेशन ठीक-ठाक है। मतलब पार्टिसिपेशन है। रिप्रेजेंटेशन नहीं है। जी और ये बात उसके अंदर घर कर जाए। हम हम तो उसका सबसे बड़ा नुकसान क्या होगा पता है? उसके कल्चरल साइड पे होगा। हम हम किसी भी फॉर्म में। अच्छा। क्यों होगा? क्योंकि आपको पता है कि इन रिवर्स जो है जो जिनको आप जिम्मेदार मानते हो। हालांकि मैं समझता हूं कि जो हमारी बात हुई थी इससे पहले जी कि खुद से शुरू होनी चाहिए बातें। लेकिन वो जाहिर सी बात है आपके अपोजिशन में खड़े हैं। जी ठीक है। वो एक पूरा का पूरा प्लैंक जो खड़ा है वो वो सस्टेन कर रहा है उसी एजेंडे पे। तो नो डाउट लाइक यू नो जो कल्चरल कैपिटल मैं उसको कल्चरल कैपिटल पॉलिटिक्स नहीं कहूंगा मैं उसको। हम हम मैं समझता हूं कि एक अच्छी पॉलिटिक्स एक अच्छा रिप्रेजेंटेशन आपका कल्चरल कैपिटल बनाता है। हम कैसे बनाता है? आप ट्रेड करो। आप म्यूजिक इंडस्ट्री में हो, आप आर्ट्स एंड सिनेमा में हो, कहीं भी हो। ठीक है? एक जो पिटिकली रेपजेंटेड कम्युनिटीज होती है ना उनके अंदर एक अलग सा कॉन्फिडेंस होता है और वो आप पाओगे। लेकिन यहां पर मैं कुछ आपको थोड़ा सा वो भी दे देता हूं। एक्सेप्शन भी दे देता हूं। वो क्यों आता है? जैसे यू नो व्हाइल वर्किंग इन बंगाल स्पेशली इन मुस्लिम पॉकेट आई मीन इन मालदा उत्तर दिनाजपुर एंड दक्षिण दिनाजपुर। जी। एंड फॉर सम टाइम इन मुर्शिदाबाद एज वेल। व्हाट आई फाउंड इज़ लाइक बंगाल हैप्पेंस टू बी अहपेंस टू बी अ स्टेट वेयर यू कैन इज़ली फाइंड इफ यू यू आर अराउंड कोलकाता। यू विल फाइंड यू नो पीपल आर गोइंग अब्रॉड फॉर पीएचडीस एंड ऑल। आई मीन। एंड अ वे क्वाइट वोकल। आई मीन बट यू नो आई मीन व्हेन इट आई स्टार्टेड लाइक यू नो फिगरिंग आउट अ मुस्लिम लीडरशिप अक्रोस यस देयर आर ट्रेडिशनल मुस्लिम लीडरशिप कमिंग फ्रॉम दोज़ बड़ा घराना जो होता है आजादी के बाद से ही एक्टिव थे लेकिन जो यंगर जनरेशन की लीडरशिप है या फिर जो अभी एक दो टर्म से एक फैमिली इनवॉल्व लीडरशिप में उनमें कोई स्पार्क नहीं है। उनमें कोई स्पार्क नहीं है। जी लेकिन वो पार्टिसिपेट कर रहे हैं। उनको मे बी आई मीन फॉर गुड और बैड रीज़न आई मीन आई बिलीव यू नो दी टीएमसी का जो पूरा पॉलिटिकल स्ट्रक्चर है उसमें दे आर वेल रेप्रेजेंटेड। दे हैव बीन वेल रेप्रेजेंटेड। एटलीस्ट मुझे ऐसा लगता है कि काउंट कर सकते हो। आई डोंट नो अबाउट दी एक्चुअल पावर द एक्सरसाइज और मे बी दे आस्क द गवर्नमेंट टू डू सर्टेन थिंग्स देयर वे जी बट आई बिलीव दे आर नंबर वाइज दे आर रियली गुड जी बट अगर हम जब उनका आकलन करते हैं तो हम ये पाते हैं कि उनके अंदर वो स्पार्क नहीं है। स्पार्क का मतलब मैं पॉलिटिकल स्पार्क की बात कर रहा हूं। इस पार्क का मतलब यह कह रहा हूं कि कोलकाता में क्या चीजें वो करा सकते हैं जो हमारा वो म्युनिसिपल बिहेवियर वाला पूरा फ्रेमवर्क है कि हमारी इमीडिएट नेसेसिटी क्या है? हमारी जरुरीरियात क्या है? लोगों की जरूररियात क्या है? और आप मुझे बता सकते हैं अगर उंगली पे बंगाल की पॉलिटिक्स काफी डिस्कस की जाती है। जी। आप एक लीडर का नाम बता दीजिए। लोग बताएंगे फिर हकीम। जी। ही लिव्स इन कोलकाता ऑलरेडी बिग शॉट बिग नेम गुड पिटिकल इशू बट इफ यू गो टू रूरल पॉकेट्स नेम वन लीडर नेम वन लीडर आई मीन अक्रॉस सो आई मीन सो व्हाट आई बिलीव इज़ यू नो पॉलिटिक्स एंड रिप्रेजेंटेशन सेट योर कोर्स फॉर कल्चरल रिसेशन नॉट द अदर वे अराउंड नॉट द अदर वे अराउंड एंड ऑफ कोर्स लाइक यू नो आई अगेन एलजीबीटी यू जस्ट लाइक यू नो स्पोक अबाउट व्हाट दे डिड दे यूज़ मीडिया और मे बी मीडिया हेल्प देम मे बी म्यूजिक इंडस्ट्री हेल्प देम मे बी रैपर हेल्प देम बट इफ यू सी इट फ्रॉम अदर साइड दे वर इनवाइटेड ऑन अ पॉलिटिकल नोट बाय एलजीबीटी ग्रुप्स कम एंड सपोर्ट अस इट्स अ पॉलिटिक्स राइट दे वर इनवाइटेड मींस द पॉलिटिशियंस। नो, आई एम सेइंग दैट इट्स अ कल्चरल पॉलिटिक्स। हम् हम् एलजीबीटी [नाक से की जाने वाली आवाज़] क्यू पीपल दे आर बीइंग सपोर्टेड बाय मीडिया हम् हम् बाय रैपर बाय म्यूजिक इंडस्ट्री बाय सिनेमा या ओके एंड इवन हाईकोर्ट्स इन देयर आई मीन इन देयर जुडिशियल डिसीजन एंड टेक्स राइट कमेंट्रीज व्हाटएवर। सो व्हाट दे आर डूइंग इज इज़ दैट दे हैव क्रिएटेड दिस पॉलिटिकल प्लान व्हेयर दे आर टॉकिंग अबाउट इट सो दैट दे कुड गेट हर्ड सो ऑटोमेटिकली सम मीडिया स्टूडेंट्स स्टार्टेड राइटिंग सो यू कैन सी दैट दे दे आर दे दे आर बीइंग इनवाइटेड बाय एलजीबीटी क्यू प्लस थ्रू देयर कल्चरल एप्रोचेस यू नो आई मीन दे आर इन्फ्लुएंसिंग हम थ्रू देयर कल्चर बट वुड दैट बी सफिशिएंट विदाउट एनी पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन जैसे फॉर एग्जांपल वकार साहब यू हैव बोरा इन इंडिया ठीक है यू हैव पारसी इन इंडिया यू हैव यू नो मेनी अदर कम्युनिटीज इन इंडिया हु डू नॉट हैव मच ऑफ़ पॉलिटिकल रिप्रेजेंटेशन बट दे हैव अ ह्यूज कैपिटल कल्चरल कैपिटल प्रोबेबबली पॉलिटिकल कैपिटल टू स्व थिंग्स इन देयर फेवर तो क्या यह दूसरा मेथड नहीं है पॉलिटिक्स करने का कैन कैन कैन दिस नॉट बी डन विदाउट लुकिंग एट दी रिप्रेजेंट ेशन पार्ट इफ दैट इज टू टफ वन ऑफ़ द वेरीेंट असशन ऑफ़ माय अंडरस्टैंडिंग ऑफ़ कॉन्सीटुएंसी आई मीन रिटर्निंग टू कॉन्सीट्यूएंसी और कॉन्सीट्यूएंसी कॉल [नाक से की जाने वाली आवाज़] और कॉन्स्टिट्यूएंसी कॉन्फ़िगरेशन अंडरस्टैंडिंग आई मीन यू नो गोइंग बैक टू कॉन्स्टिट्यूएंसी इज़ टू लिमिट योर एस्पिरेशन पॉलिटिकल एस्पिरेशन एंड रीइविजनिंग इट रिकारविंग इट अगेन व्हेन आई एम सेइंग इट नन ऑफ़ द बोरा यू मीट इन बॉम्बे और गुजरात और एनीवेयर दे वुड नॉट एनीवेयर क्लेम दैट दे आर नॉट मुस्लिम दे आर मुस्लिम दे आर वेरी पार्ट ऑफ़ मुस्लिम वर्ल्ड एंड दे आर मुस्लिम दे दे आल्सो गो टू हाजी उमर एंड डू ऑल दीज़ स्टफ दे वेरी रिलीजियस पीपल व्हाट दे आर डूइंग इज़ व्हाट दे आर डूइंग इज़ दे दे हैव क्रिएटेड देयर ओन यूनिक आइडेंटिटी दैट इज़ खोजा बोरा यू नो आई मीन एंड ऑल दिस ट्रेडिंग क्लास मुस्लिम दे हैव ह्यूज कैपिटल नाउ गिव यू वेरीेंट रिफ्लेक्शन खोजा एंड एंड एंड व्हाई वी शुड यू नो इंबाइब दोज़ कैरेक्टरिस्टिक्स आई [नाक से की जाने वाली आवाज़] मीन इन आवर ओन वेज़ हम व्हेन आई एम सीइंग सेइंग दैट दैट अ मुस्लिम लिविंग इन मददुराई एंड अ मुस्लिम पार्टिसिपेटिंग डेमोक्रेसी थ्रू इलेक्शन और कंटेस्टिंग इलेक्शन और एक्सरसाइजिंग वोटिंग राइट्स इन सिद्धार्थ नगर एट योर प्लेस और मे बी इन बस्ती आई मीन ऑफ कोर्स दे आर इक्वल सिटीजन राइट दे आर मुस्लिम बट द वे दे पार्टिसिपेट द वे दे आर्टिकुलेट द वे दे एक्सपीरियंस रियलिटी पिटिकल रियलिटी अराउंड आर कंप्लीटली डिफरेंट इन देयर ओन यूनिक वेज़ आई एम ट्राइंग टू टेल यू टू सेलिब्रेट दैट यूनिकनेस। टू अप्रोच इट फ्रॉम दैट यूनिकनेस। डोंट कन्फ्यूज दी इलेक्टोरल डेमोक्रेसी विथ बिग जॉर्गन्स। गो बैक टू कॉन्स्टिट्यूएंसी। अगेन आई एम टेलिंग यू एंड क्रिएट दोज़ पॉलिटिकल स्पेस एंड दैट पॉलिटिकल स्पेस इफ यू आर सिद्दीकी विल क्रिएट कल्चरल कैपिटल फॉर यू। ओके। आई गिव यू वन एग्जांपल। यू नो आई वाज़ इन बॉम्बे डूइंग माय कॉलेज मुंबई इनफैक्ट सो आई आई आई आई आई वाच्ड अ देयर वाज़ अ फेमस दिस फेमस एडवर्टाइजमेंट ऑफ वन ऑफ दी स्कूटर स्कूटी फॉर गर्ल्स लाइक मोस्टली गर्ल्स यूज दिस स्कूटर आई मीन एक्टिवा और समथिंग आई मीन Honda का एक्टिवा आई बिलीव इट वास शॉट समवेयर इन बैंड्रा एंड सम प्लेस आई डोंट नो एंड गर्ल गर्ल्स फ्रॉम डिफरेंट हु एंड क्राई आई मीन डिफरेंट कल्चर वर रिप्रेजेंटिंग दे ड्राइविंग एंड देन वन साड़ी क्लड आई मीन यू नो वमेन आई मीन देन वन जींस एंड टीशर्ट एंड इन शॉर्ट स्कर्ट इन एंड देन वन गर्ल इन बुर्का एंड दैट बुर्का वाज़ रेपजेंटिंग बोर कम्युनिटी आई एम टॉकिंग अबाउट दैट एडवर्टाइजमेंट अंडरस्टैंड व्हाट यू आर सेइंग? यू डू नॉट अप्रोच इट फ्रॉम द सेंस ऑफ मार्जिनलाइजेशन और नेगेटिविटी और बीइंग कॉर्नर्ड यू अप्रोच इट फ्रॉम द सेंस ऑफ आई वुड से योर यूनिकनेस यूनिकनेस यू नो यू कैन डू समथिंग यस यू कैन कंट्रीब्यूट टू समथिंग व्हिच इज़ वैरी पॉजिटिव थिंग आई अंडरस्टैंड आई आई विल जस्ट आस्क यू दिस लास्ट सेगमेंट द क्वेश्चन इज मोर अबाउट द वर्क दैट पॉलिटिकल कंसलटेंसी डस है ना एंड आई वुड [नाक से की जाने वाली आवाज़] अप्रोच इट लाइक दिस 2014 बीजेपी इलेक्शंस यू नो लोकसभा इलेक्शंस नरेंद्र मोदी इज द कैंडिडेट व्हाई वुड ही रिलाई ऑन एन इंडिपेंडेंट एक इंडिपेंडेंट एजेंसी जो इलेक्शन कराए वो क्यों रिलाई करें 2019 में आज पॉलिटिकल पार्टी पार्टीज पॉलिटिकल कंसलटेंसी से इंगेज क्यों होती हैं? व्हाट इज देयर इन द पॉलिटिकल पार्टी जो लैक करता है या व्हाट इज देयर इन अ पॉलिटिकल कंसलटेंसी जो एड करता है एक पॉलिटिकल पार्टी को सक्सेसफुल होने के लिए और क्या वो चीज है जो पॉलिटिकल पार्टी खुद नहीं क्रिएट कर सकती उसको असिस्टेंस लेना पड़ता है कंसलटेंसी का व्हाट इज इट ah सी द थिंग इज यू नो आई मीन स्टार्टिंग फ्रॉम योर फर्स्ट आर्गुमेंट लाइक यू नो व्हाई इन 2014 मोदी जी केम टू पावर इट्स लाइक यू नो इट्स अ फैक्ट नोन टू एवरीवन दैट बीजेपी एट दैट टाइम एंड मोदी जीस लीडरशिप बिकॉज़ ही वाज़ ऑलरेडी डिक्लेअर्ड प्राइम मिनिस्टर कैंडिडेट देयर वर एजेंसीज़ एंड इंक्लुडिंग सीएजी एंड ऑल दे वर सपोर्टिंग आई मीन दे वर एडिंग और मे बी लाइक डूइंग काइंड ऑफ़ स्टफ लाइक यू नो रिक्वायर्ड ऑन देयर पार्ट द थिंग इज सी दे वेरी नेचर ऑफ पोलिटिकल पार्टीज एंड लीडरशिप हैव चेंज्ड नाउ वी विल लिव इन सोशल मीडिया वर्ल्ड थिंग्स आर चेंजिंग फास्ट व्हाई थिंग्स आर चेंजिंग फ़ास्ट बिकॉज़ यू गेट टू नो थिंग्स चेंजिंग अर्लियर यू अर्लिएर यू डोंट यू आर नॉट हैविंग द मैकेनिज्म टू नो व्हाट इज गोइंग ऑन इन अलीगढ़ इमीडिएटली यू विल नो व्हाट इज गोइंग ऑन इन वाराणसी और एनीवेयर एवरीवेयर यू यू अंडरस्टैंड। सो द वेरी नेचर ऑफ़ पॉलिटिकल ऑर्गेनाइजेशन द वेरी नेचर ऑफ़ पार्टीज एंड लीडरशिप इज चेंज। हाउ इट इज़ चेंज? इंफॉर्मेशन वाइज इट हैज़ चेंज। यू गॉट माय पॉइंट। आई मीन व्हाई आई एम सेइंग इनेशन वाइज़ इट हैज़ चेंज। आई मीन टू से दैट पार्टीज वर मोस्टली फंक्शनिंग इन अ वेरी ट्रेडिशनल मैनर बिफोर दी कमिंग ऑफ़ सोशल मीडिया एंड मे बी लीडिंग टेक्नोलॉजीस व्हिच आर मेकिंग यू नो इंफॉर्मेशन क्विक बट देयर इज अ प्रॉब्लम एस वेल प्रॉब्लम इज दैट पीआर वास ऑलवेज देयर इट इज बीइंग डन फॉर वेरी वेरीरी लॉन्ग टाइम थ्रू यस थ्रू अवेलेबल मीडिया यस सो व्हाई अ व्हाई दी वेरी ऑर्गेनाइज्ड फंक्शन ऑफ पिटिकल एड एजेंसीज आर देयर नाउ सो द थिंग इज यू नो इफ यू रिमेंबर आफ्टर 2005 पर्टिकुलरली ईयर 2005 एंड ऑनवर्ड यू वुड सी लाइक यू नो वी हैव सीन अ वेरी रोबस्ट एक्सपेंशन ऑफ यू नो आवर कम्युनिकेशन कैपेबिलिटीज एंड इट इज़ नॉट ओनली अबाउट कम्युनिकेशन इट्स अबाउट यू नो अ रिस्क इनवॉल्व इन दोज़ कम्युनिकेशन एंड एंड रिस्क इनवॉल्व इन दोज़ कैपेबिलिटीज़ टू टू होल्ड ऑन टू मैनुवर टू मेक पार्टी फंक्शन एंड लीडरशिप फंक्शन दिस। कैन यू एक्सप्लेन दिस? आई एम सेइंग इज यू नो 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यू नो बिग पोलिटिकल क्रैकआउट सो दैट फर्स्ट न्यूज़ इज़ गॉन राइट यस सो वर्किंग ऑन वर्किंग ऑन वर्किंग इन कंटिन्यूएशन ऑन दोस पैटर्न्स वेयर यू बिलीव दैट अ सर्टन और सर्टन सेट ऑफ मैसेजेस कुड रीच टारगेटेड इंडिविजुअल और पॉपुलेस नीडेड टू बी वर्क्ड ऑन सो आई टॉक अबाउट कम्युनिकेशन पैटर्न्स एंड टेक्नोलॉजी इमर्जिट टेक्नोलॉजीस व्हिच आफ्टर 2005 यू नो वर जगलिंग अराउंड एंड लीडरशिप पिटिकल लीडरशिप इज़ अक्रॉस द पार्टी दे आर वै स्मार्ट इट इज़ अबाउट यू नो टाइमली यूजिंग ऑफ इट और टाइमली टेकिंग कॉल अराउंड टाइमली टेकिंग कॉल अराउंड इट यू नो दैट वी नीड आई मीन वी हैव दिस बिग एन ऑर्गेनाइजेशन लाइक बीजेपी इज़ अ ह्यूज ह्यूज मशीनरी ह्यूज अह यू नो ऑर्गेनाइजेशन तो दे नी दे नीड टू हैव सम मैकेनिज्म स्टार्टिंग फ्रॉम बूथ टु टु टू टू टू सेंट्रल ऑफिस राइट यू नो दे नीड सम लेवल ऑफ़ कनेक्शन एंड इफ एक्स एजेंसी इज़ रेडी टू गिव दैट सलूशन टू एटलीस्ट यू नो मेक इट वर्क पीसफुली इट इज़ नॉट दैट इट इज़ नॉट वर्किंग इट इज़ ऑलरेडी वर्किंग यू यू आर डूइंग जस्ट डेथ एडिशनल वर्क मेकिंग मोर रिबर्स मे बी लाइक यू नो इनट्यून और मे बी लाइक यू नो वर्किंग एफ्फिसिएंटली अ बिट इट टेकिंग केयर ऑफ इट एंड मेनी ऑफ़ द टाइम सी द पिटल कंसल्टिंग व्हाट यू सी नाउ इज़ बाय प्रोडक्ट ऑफ दैट पर्टिकुलर यू नो लीडरशिप एंड पार्टीज अंडरस्टैंडिंग दैट थिंग्स आर थिंग्स आर गोइंग हे वायर आई मीन स्वेलिंग अराउंड कंट्रोल में नहीं है। नहीं कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं। दे आर कंट्रोलिंग। दैट्स व्हाट आई एम सेइंग दे कैन कंट्रोल विदाउट पिटिकल एड एजेंसी और पिटिकल कंसल्टिंग ग्रुप्स दे कैन बट फॉर योर इनफार्मेशन आई मस्ट टेल यू मेनी ऑफ़ द पोलिटिकल पार्टीज दे ऑलवेज हैड इनबाउंड सिस्टम। वेयर दे हैव दिस लाइक यू नो वेरी मैच्योर पॉलिटिकल कंसलटेंट टेकिंग केयर ऑफ़ थिंग्स इंटरनली। नॉट एज एन एजेंसी बट बीइंग पार्ट ऑफ द पार्टी ऑफिशियली बीइंग पेड एंड टेकिंग केयर ऑफ़ थिंग्स बट मोदी जी हैज़ गिवेन इट अ डिफरेंट टर्न इफ यू रिमेंबर 2014 इलेक्शन वाज़ लाइक यू नो वेरी आई मीन इट वाज़ अ कैंपेन हैवी इलेक्शन। यस यस यस। न्यूज़पेपर में तो आ रहा था स्नेक चार आर आल्सो यूज्ड एंड स्टोरी टेलर्स आर यूज्ड मतलब कुछ भी न्यूज़ बन रही थी भाई दिस दिस व्हाट आई टेलिंग यू सो नाउ रिमेंबर दैट द काइंड ऑफ़ यू नो द काइंड ऑफ़ एक्सपेरिमेंट्स यू नो मिस्टर मोदी क्रिएटेड अराउंड हिम इट क्रिएटेड इट इट हैज़ क्रिएटेड दिस पॉलिटिकल एजेंसीज़ टू वर्क फॉर हिम इट वाज़ नॉट दैट पॉलिटिकल एजेंसीज़ वर वर्किंग िंग फॉर हिम टू यू नो गेट हिम विन द इलेक्शन। यू गॉट माय पॉइंट्स बिकॉज़ ऑफ़ दैट दैट दे हैव इट वाज़ अ नेसेसिटी क्रिएटेड बाय मिस्टर मोदी हम आई आई आई आई स्ट्रांगली बिलीव एंड आई आई एम आई मस्ट ऑनेस्टली टेल यू दैट इट वाज़ ऑनेस्टली हिज़ मैनुअर अराउंड एंड हिज़ पॉलिटिकल पर्सनैलिटी एंड अह हिस कैपेबिलिटीज़ व्हिच नेसेसिटेड ऑल दिस यू नो अह एफर्ट्स टु कम टुगेदर। एंड मे बी गिव इट अ शेप व्हाट इज इट एक्चुअली दैट पॉलिटिकल कंसलटेंसी डस टेक्निकली स्पीकिंग सो द थिंग इज यू आई मीन फॉर नाउ एज आई टोल्ड यू दैट पॉलिटिक्स इज आई वुड से लाइक इट वै सिंपल बट कॉम्प्लेक्स जी हाउ इट इज़ सिंपल अ पॉलिटिशियन आई मीन यू नो इफ यू गो बाय अ पिटिकल पर्सनालिटी लाइफ इट इज़ वन ऑफ़ द मोस्ट चैलेंजिंग लाइफ अ चैलेंजिंग लाइफ एनीवेयर इफ आई सी प्रोफेशनली लाइक यू नो इट इज़ वन ऑफ द मोस्ट चैलेंजिंग लाइफ सो द काइंड ऑफ़ यू नो स्टफ दे डू दे टेक केयर ऑफ़ पार्टी एंड इंस्टीट्यूशन एंड इफ देयर दे आर इन रूलिंग गवर्नमेंट दे टेक केयर सो मेनी थिंग्स सो दे आर दे दे आर द हार्डेस्ट पीपल अराउंड लेट मी टेल यू आई एम बीइंग वेरी ऑनेस्ट अराउंड एंड दे आर वेरी जेन्युइन एंड वेरी ऑनेस्ट अबाउट देयर वर्क देयर काइंड ऑफ़ व्हाटएवर दे बिलीव इन द दे दे आर रूटेड टू इट दे आर कमिटेड टू इट एंड व्हाई वी फिट इंटू देयर फ्रेमवर्क बिकॉज़ दे क्रिएटेड दैट दोज़ नेसेसिटी यू नो इट इज़ देयर माइंड यू नो आई मीन आई डोंट वांट टू लूज़ एनीथिंग हम्म अह सो इफ देयर इज़ अ 0.01% चांस दैट यू नो मिस्टर एक्स एस एन एड कैन कैन गिव सम पुश और मे बी मेक इट लिटिल मोर शाइनी शुड बी इनवाइटेड बट हियर इज़ द गेम एस वेल दिस इज अ स्टोरी एंड दिस इज द प्रैक्टिस फॉर मोस्ट ऑफ़ द पॉलिटिकल पार्टी वी एस अ पॉलिटिकल कंसल्टिंग ग्रुप और एड वी आर क्रिएटेड जस्ट बिकॉज़ ऑफ़ द नेसेसिटी ऑफ़ देर पॉलिटिकल लीडर टू थिंक अबाउट इंगेजिंग अस कि भाई कुछ बचा बचा ना रहे सब कुछ हो जाए मतलब बड़ी बात नहीं है यही बात है। हां लेकिन एक बात यह भी है आइडियली देखें तो पिटिकल कंसल्टिंग जो आउटबाउंड होता है इनबाउंड तो मैंने बता दी पार्टी का खुद अपना रख लिया 10 लोग अच्छे आउटबाउंड जो एजेंसीज हायर होती हैं बड़ी कंपनी है शो टाइम है इंडियन पिटिकल एक्शन कमिटी है और बाकी बहुत सारे आपका खुद का है हां हम भी धीरे-धीरे उस पे काम कर रहे हैं तो बेसिकली इन्होंने काफी रिगर किया है हम और इन्होंने ग्राउंड के अह पे ग्राउंड रियलिटी को समझा है जी और बहुत सारे कैंपेन भी खड़े किए हैं आईपैक का तो इसमें खासा इतिहास है और जैसे 2021 के इलेक्शन में बहुत अच्छा तरीके से मैनेज किया ग्राउंड को भी और प्लस कैंपेन वाइज भी तो कभी-कभी ये जो एजेंसीज होती हैं तो वो तो नेसेसिटी तो होती है क्रिएटेड बाय पिटिकल लीडरशिप इन पार्टी लेकिन कभी-कभी ज्यादा एक्सेल कर जाती है। आप मेरी बात समझ गए? समझ रहा हूं। लेकिन एक चीज मैं इसमें और नोट में आपके डाल दे रहा हूं कि जैसा कि मैंने कहा था कि पॉलिटिकल कंसल्टिंग और एड का काम जो है ना वो पॉलिटिकल पार्टी के इलेक्शन इवेंट तक होना चाहिए। जी। उसके बाद नहीं होना चाहिए। दैट्स व्हाट आई बिलीव। और मुझे ऐसा लगता है कि उसके बाद अगर आप रुकते हो और अगला इलेक्शन जाते हो और उसके अगला इलेक्शन उन्हीं के साथ जाते हो तो ये आपकी भी जो आपका कोर फंक्शनल स्पेस है उसमें एक फटीग ले आता है और पार्टी का जो स्ट्रक्चर है उसमें भी फटीग ले आता है। जी बिकॉज़ सेम रैंक एंड फाइल एंड ऑर्गेनाइजेशनल एक्सपेंस आपसे मिलता रहता है। अच्छा ये एक्स वजी एजेंसी के लोग हैं। तो जो पहली दफा का जो यू नो कनेक्ट जो था ना पहली दफा का जो एक न्यूनेस जो था पहली दफा का जो चैलेंज था उनके हेड में कि ना विल हैव टू प्रूव इन फ्रंट ऑफ दिस यू नो एजेंसी पीपल और मे बी ए पीपल और ये जो काम देंगे एक एक मिलके काम करने की वो उसमें एक फटीग आता है उसमें एक ठहराव आता है तो मुझे ऐसा लगता है कि पार्टीज को नेसेसरीली जो है जब अगर वो एक्सटर्नल एजेंसी को हायर करती है। ऑफ कोर्स मतलब यह मेरी अपनी राय है। अगर किसी का बहुत अच्छा एक्सपीरियंस है एक्स व जी कंसल्टिंग ग्रुप के साथ तो वो उसी के साथ कंटिन्यू करेगी। लेकिन लार्जली मेरी ये समझ है कि ऑर्गेनाइजेशन जो नीचे होता है ब्लॉक पंचायत ये ऊपर डिस्ट्रिक्ट इनमें एक फटीग आना शुरू होता है। हम क्योंकि आप समझ रहे हो ना टॉप लीडरशिप जो टॉप जो कोठरी है उसके साथ प्रॉब्लम नहीं है। ठीक है? दे ऑल दे आर ऑल पावरफुल लेकिन जिनके ऊपर चीजें डिसाइड होती है कि इनको हटाना है इनको बिठाना है वो तो नीचे वाले होते हैं वो एक बार आपको देख चुके हैं इलेक्शन हो चुका है जी तो आपको कैसे अप्रोच करेंगे क्योंकि आपको फिर दोबारा जाके उनके बीच में काम करना है जी तो ऑल दिस थिंग्स आर वेरीेंट व्हाट हैज़ बीन योर मोस्ट इंटरेस्टिंग कंसल्टिंग एक्सपीरियंस द बेस्ट एक्सपीरियंस आई हैड सो फार लाइक यू दो आई एम वर्किंग फॉर पास्ट फोर इयर्स इंडिपेंड वि माय ओन प्लेटफार्म बट द बेस्ट एक्सपीरियंस आई बिलीव फॉर मी वाज़ एस अ कैंपेन वाज़ विद आईपैक अच्छा विद इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी आई मीन सिंस आई एम वर्किंग पास्ट फोर इयर्स ऑन माय ओन प्लेटफार्म मे बी लाइक यू नो आई आई विल बी एबल टू टॉक अह इन इयर्स टू कम अ बट दीदी के बोलो वाज़ वन ऑफ़ द कैंपेन व्हिच आई स्टिल बिलीव ही वाज़ वन ऑफ़ द बेस्ट कैंपेन। आई वास पार्ट ऑफ। अच्छा। एंड देय नो एज आई आई आई आई हैव सम लाइक यू नो गुड मेमोरीज़ ऑफ़ वर्किंग एज अ पॉलिटिकल इंटेलिजेंस यूनिट हेड। ऑफ दी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी। सो द दिस दीदी के बोलो कैंपेन दो इट वाज़ विद इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी इन ईयर 2021 2020 2021 वाज़ वन ऑफ़ द कैंपेन व्हिच आई स्टिल बिलीव वाज़ अ रोबस्ट कैंपेन आई वाज़ पार्ट ऑफ ऑफ़ कोर्स विद आई बैकक एंड माय फंक्शनल स्पेस एस अ स्टेट लीड देयर आई स्टिल बिलीव वास रियली गुड वी वर वैरी ऑनेस्ट वर्क वाइज एंड वी डवर्ड इट एंड आई बिलीव दैट यू नो इन इयर्स टू कम द थिंग द काइंड ऑफ़ थिंग आई एम बिल्डिंग अराउंड आई विल बी हैविंग यू नो गुड एक्सपीरियंस टू शेयर विद यू वेरी सून तो वकार साहब बहुत-बहुत शुक्रिया आपका थैंक यू सो मच फॉर दिस यू नो फॉर दिस पडकास्ट इट वास अ ब्रिलियंट कन्वर्सेशन आई रियली यू नो एंजॉयड इट एंड एंड आई एम श्योर द ऑडियंस वुड एंजॉय इट एंड देयर हैव बीन मेनी पॉइंट्स। बहुत चीजें इसमें हैं जो नई हैं और उन नई चीजों में भी बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो बहुत जरूरी हैं। हमको पता होना एज अ सिटीजन एज अ कम्युनिटी मेंबर एज अ मुस्लिम। बिकॉज़ एस यू मेंशंड आई कैन टेक एटलीस्ट टू टी टी के अ यू नो की टेक अवेज़ फ्रॉम दिस कन्वर्सेशन। वन इज पॉलिटिक्स इज इनहेरेंटली कटिक। आपको जो जो कस है जो अनसर्टेनिटीज हैं उनको मैनेज करना होता है। कॉन्फ्लिक्ट्स को मैनेज करना होता है। और दूसरा यह कि एज अ कम्युनिटी वन शुड लुक फ्रॉम अ पॉजिटिव पर्सपेक्टिव। क्या कर सकते हैं? कैसे कर सकते हैं? अह कम्युनिकेशंस कैसे बिल्ड करें या पॉलिटिक्स कैसे बिल्ड करें? रिप्रेजेंटेशन कैसे बिल्ड करें? एंड नॉट लुकिंग एट इट फ्रॉम द पर्सेक्टिव ऑफ क्राइसिस कि साहब हम मार्जिनलाइज्ड हैं क्राइसिस क्राइसिस में है या यू नो वी आर नॉट एबल टू डू समथिंग तो बहुत-बहुत शुक्रिया आपका थैंक यू मच पडकास्ट के लिए थैंक यू फॉर हैविंग मी हियर

Companion article

Politics as engineered instability

Waqar Usmani spent much of a long conversation with Nous dismantling a comforting assumption: that a well-run political party looks like a well-run institution, with clear hierarchy and settled rules. Usmani, founder and head of the political consulting firm Othman Advisory, spent more than six years inside the Indian Political Action Committee (I-PAC), rising to state head of its political intelligence unit for the 2021 West Bengal assembly election, before building his own practice over the past four years alongside associate director Moin Kazi. His central claim is blunt: "Party ka jo thrill hai na, party ki working philosophy hai, conflict hai, chaos hai" — a party's whole working philosophy is conflict, is chaos. A party that imposed classroom-style discipline on itself, he argued, would stop being a functioning party at all.

What looks like disorder from outside, in Usmani's account, is what he calls "controlled chaos" — a permanent, low-grade contest for proximity to central leadership, for tickets, for turf, that a party manages without ever resolving, because resolving it would remove the incentive that keeps cadre and mid-level leaders engaged. He described district-level power struggles in which a party's central command will deliberately block a well-known local leader from contesting in a neighbouring assembly seat, not because the leader lacks merit, but because letting them expand would destabilise an existing local power balance that the party depends on. Elsewhere, the same command will elevate outsiders precisely to break up an entrenched local "mathadhish" — his word for a leader who has effectively become an untouchable local potentate.

The randomness that isn't random

Usmani used a string of examples to illustrate how unpredictable candidate selection can look from outside while still following an internal logic. He pointed to the Trinamool Congress fielding former international cricketer Yusuf Pathan — with no political background and no evident connection to Bengali politics — against a veteran Congress leader in the 2024 Lok Sabha election, and winning. Pathan's appeal, Usmani argued, rested on the residual celebrity of his years playing for Kolkata Knight Riders rather than on any conventional political apprenticeship. He offered the elevation of Yogi Adityanath to Uttar Pradesh chief minister as a similar shock to conventional expectation, and Narendra Modi's own elevation as the BJP's 2014 prime ministerial candidate, despite never having sat in the Lok Sabha, as the largest such example. None of these choices are truly random, in his account: parties are running a continuous, informal perception survey of who can consolidate a constituency's actual demography and power relations, rather than picking candidates on ideological loyalty or merit alone.

Beneath candidate selection, Usmani described a layer of "political signalling" that lets politicians test their own market value without ever saying so openly — his example was Aam Aadmi Party leader Raghav Chadha's period of public prominence around the 2017 Punjab election, engineered, in his reading, more by the party testing his usefulness than by any organic movement behind him. Public praise of a rival leader, cross-party appointments to the Rajya Sabha — he cited the Congress sending poet-politician Imran Pratapgarhi to the upper house from Maharashtra — and quiet defections all form part of the same signalling economy that keeps politicians and parties mutually assessing one another between elections.

The BJP's advantage is a belief, not a machine

Asked to explain the BJP's durability, Usmani resisted crediting organisational efficiency alone. What the BJP has, he argued, is a "base perception" that Congress and most rivals lack: a living ideological conviction — Hindutva — that every layer of leadership, from the national stage down to the district unit, can invoke with total consistency. Congress, by contrast, has no equivalent base perception it can renew on demand; its historic identity as the party of independence has faded as a mobilising claim. He credited Rahul Gandhi's 2022 Bharat Jodo Yatra with a genuine, if narrow, achievement — transforming Gandhi's personal political persona, making him visible in a register (unshaven, walking, greeting people for months on end) that had not been available to him before — while questioning whether the yatra did anything to strengthen the Congress party's organisational structure independent of Gandhi himself. A movement, he argued, can make a leader; it does not automatically make a party.

A protest that never became a movement

The conversation's most pointed application of that distinction concerned the 2019–20 anti-Citizenship Amendment Act and National Register of Citizens protests. Usmani argued that the protests, for all their scale and visibility, never crossed the threshold from protest into movement, and that Muslim politics has yet to reckon with why. His account was structural rather than accusatory: organisers deliberately built the broadest possible secular coalition, invoking B. R. Ambedkar, Mahatma Gandhi and Maulana Azad, holding up the Constitution, inviting Sikh langars and left-wing speakers onto shared platforms — and even so, the protests were successfully branded "communal" by opponents, feeding directly into the polarised 2020 Delhi riots and the Delhi assembly election that followed. If even a deliberately universalist, constitutionally framed protest gets read as sectarian, Usmani suggested, the deeper problem is that Muslim political expression currently lacks a reliable "entry point" into Indian democratic life altogether — pointing to Sharjeel Imam's own acknowledged loss of control over a protest he had helped lead as evidence that even organisers recognised the movement had drifted from its original aims.

The case against treating Owaisi as the whole story

Usmani's most detailed case study was Asaduddin Owaisi's All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen, which he treated respectfully but sceptically. He offered underappreciated data points: AIMIM contested around 36 or 37 seats in the 2017 Uttar Pradesh assembly election and lost its deposit in nearly all of them; in 2022 it contested more than 90 seats in the state and lost its deposit everywhere except one constituency. His deeper structural critique was about the party's shape rather than its results: "Asad Sahab party se bade ban gaye" — Owaisi has become bigger than his own party — such that, in his estimate, most people who follow AIMIM's campaigns could not name the party's state president in any state where it contests, because the party is built around one recognisable face rather than a distributed cadre structure. He was careful to credit Owaisi's individual political skill — a mature parliamentarian, in his words, fluent on Hyderabad's issues as well as on Bengal, Assam and Uttar Pradesh — while arguing that the community's enthusiasm for AIMIM says more about how cornered Muslim political sensibility currently feels than about any fully worked-out plan on the party's part: "Hum toh cornered hain, toh kam se kam koi toh hai" — we're cornered, so at least there's someone.

Rebuilding from the ward up

Usmani's prescription ran directly against the instinct to look for a single national Muslim political vehicle. Muslim political identity, he argued, needs to be deliberately "broken down" rather than treated as a homogeneous bloc, because a single, geopolitically inflected vocabulary — invoking a global "ummah" or brotherhood — is simply the wrong register for democratic bargaining at the constituency level. He drew a comparison to how Other Backward Classes communities across Bihar and Uttar Pradesh, especially since the rise of Yogi Adityanath's government, have carved out local bargaining power not because a party arrived and declared them under-represented, but because those communities built their own local spaces for negotiation first. Muslim voters, he argued, have participated loyally in Indian elections for decades and should be credited for that — "we have always been very happy participating, voting" — but that participation has remained largely reactive and externally driven, prompted by fear of a specific national threat (he cited anxieties around a Uniform Civil Code) rather than by sustained, locally rooted engagement with municipal governance, ward-level issues, or civic development between elections. His test case was hypothetical but pointed: a Muslim voter in a constituency like Siddharth Nagar should be able to explain, independent of national headlines, why they are voting for a particular candidate on local, civic grounds — a capacity he said currently does not exist in most places.

Newton's first law of community politics

Usmani rejected the idea that this is simply a matter of information deprivation. Voters in small rural Uttar Pradesh constituencies, he argued, already know exactly when canal water is due to arrive, when fertiliser will be distributed, which village council secretary is not doing his job, and how many meetings their sitting legislator has actually held — the same texture of granular civic knowledge, he said, that any community needs to bargain politically. The Muslim question, he argued, gets treated as an exception to this rule not because the community lacks information, but because geopolitical anxieties — he pointed, by way of example, to the intense and understandable emotional pull of recent conflicts in the Middle East — keep pulling attention toward register that has no purchase in a municipal ward. He also pushed back on the idea that this happens automatically for other communities: invoking Newton's first law, he argued that a body at rest stays at rest until an external force acts on it, and that every community he named — Rajputs, Bhumihars, Kurmis, Kories, Mahadalits, or the Prajapati community he returned to repeatedly as his working example — has that force in the form of specific individuals who took the initiative to convene conversations, define shared issues, and organise people locally. Nothing about Muslim political bargaining power being externally constrained by SIR anxieties or national headlines, he said, absolves the community of needing that same kind of internal initiative-taker.

He offered municipal elections specifically as underused terrain: ward-level urban local body elections, he argued, are "a golden opportunity" for Muslim civic participation that requires no reference to Iran, Iraq or any distant geopolitical anxiety at all — just the unglamorous work of contesting as a corporator and delivering visible civic change.

Where student politics fits

Usmani was equally direct about the campus politics that so often doubles as the entry point to Indian public life. He described student union elections as an "innate function" of any university — a structured venue in which politically mature young adults form and test their views the way they test their ideas in academic debate — and lamented that this space, once vibrant, has been steadily restricted across Indian campuses over the past decade. Even so, he was cautious about overstating its downstream electoral impact: of the leadership produced by student movements in the past thirty years, he could point to only one truly national name, Kanhaiya Kumar, whose prominence emerged from the JNU sedition case controversy — and noted that even Kanhaiya has not gone on to win a parliamentary or assembly seat in his own right, distinguishing durable activist visibility from actual electoral capture. He drew a further distinction between student politics at Muslim-majority institutions like Aligarh Muslim University and Jamia Millia Islamia, where Muslim political articulation is the default backdrop, and at Muslim-minority spaces like Delhi University or JNU, which he described as ideological battlegrounds primarily contested between the Left, Congress and BJP traditions — leaving open, in his account, exactly what distinct role AMU and Jamia's own campus politics has played in shaping Muslim political leadership nationally.

Politics is hard for everyone, and consultants are a symptom

Usmani closed by locating his own profession inside this broader argument about improvisation over design. He credited Modi personally, more than any campaign apparatus, with having created the modern Indian political consulting industry: the scale of messaging experimentation built around Modi's 2014 campaign, he argued, generated a necessity for professional political agencies, rather than agencies engineering Modi's rise from outside. He was candid that consulting work should, in his own view, end with the election event itself rather than persist across cycles, warning that repeat engagements between the same agency and the same party produce a fatigue that dulls the urgency both sides bring to a first campaign — citing I-PAC's 2021 "Didi Ke Bolo" campaign in West Bengal, which he helped lead as the political intelligence unit's state head, as the most rigorous and honest campaign work of his career precisely because of that first-time intensity.

His closing message to Muslim listeners deliberately avoided the language of crisis. Politics, he said, is inherently chaotic, and the task is to manage conflict and uncertainty rather than eliminate them — a discipline, he argued, that a community anxious about its own marginalisation would do well to apply to itself. The way forward, in his account, is not a bigger national gesture but a patient, constituency-by-constituency rebuilding of political literacy: knowing why one is voting, for whom, and to what end, before the next election cycle arrives rather than after the results are in.

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